20 अप्रैल 2022 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. केन्‍द्र सरकार ने निधि नियम, 2014 में संशोधन किया:

    सामान्य अध्ययन: 2

    शासन:

    विषय:  संशोधित नीति द्वारा भारतीय लोगों के हितों की रक्षा करना।

    प्रारंभिक परीक्षा: निधि नियम, 2014,कम्‍पनी कानून, 2013 ।
    प्रसंग:

    • केन्‍द्र सरकार ने आम जनता के हितों की रक्षा के लिए निधि नियम, 2014 में संशोधन किया हैं।

    उद्देश्य:

    • संशोधित नीति भारतीय लोगों के हितों की रक्षा के तंत्र को मजबूत बनाएगी।
    • नियमों में प्रावधान किया गया है कि निधियों के रूप में कार्य करने की इच्छुक सार्वजनिक कंपनियों को जमा स्वीकार करने से पहले केन्‍द्र सरकार से पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी।

    विवरण:

    • कम्‍पनी कानून, 1956 के तहत, एक निधि या म्यूचुअल बेनेफिट सोसाइटी का अर्थ एक ऐसी कम्‍पनी है जिसे केन्‍द्र सरकार ने अधिसूचना द्वारा आधिकारिक राजपत्र में निधि या म्यूचुअल बेनिफिट सोसाइटी घोषित किया है।
      • कम्‍पनी कानून, 2013 के तहत, शुरू में किसी कम्‍पनी को निधि कम्‍पनी के रूप में कार्य करने के लिए केन्‍द्र सरकार से अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं थी।
      • ऐसी कम्पनियों को केवल निधि के रूप में शामिल करना आवश्यक होता था और निधि नियमावली के नियम 5 के उप-नियम (1) के तहत आवश्यकताएं पूरी करनी होती थीं, जैसे कि 200 की न्यूनतम सदस्यता, 10 लाख रुपये की शुद्ध स्वामित्व वाली निधि (एनओएफ), एनओएफ को 1:20 के अनुपात में जमा करना होता था और निधि नियम, 2014 के प्रारंभ होने के एक वर्ष के भीतर 10 प्रतिशत भार मुक्त जमा राशि नियत वाणिज्यिक बैंकों या डाकघरों में जमा करनी होती थी।
    • कम्‍पनी कानून, 2013 के कार्यान्वयन से उत्पन्न मुद्दों पर सिफारिशें करने के लिए मंत्रालय द्वारा एक समिति गठित की गई थी और यह महसूस किया गया कि निधि के रूप में घोषणा के लिए केन्द्र सरकार की मंजूरी के लिए आवश्यक कम्‍पनी कानून, 1956 के तहत पूर्व में किए गए प्रावधान उपयुक्त हैं क्योंकि वे ऐसी संस्थाओं के नियमन के लिए एक केन्द्रीकृत और अधिक प्रतिबंधात्मक ढांचा प्रदान करते हैं और तदनुसार कम्‍पनी कानून, 2013 की धारा 406 में 15.08.2019 से संशोधन किया गया, ताकि केन्‍द्र सरकार द्वारा निधि के रूप में घोषणा की आवश्यकता को ख़त्म किया जा सके।
    • कम्‍पनी कानून, 2013 में 2019 के संशोधन और निधि नियमों, 2014 में परिणामस्वरूप 2019 से हुए संशोधन के बाद निधियों के रूप में शामिल की गई कम्पनियों के लिए यह अनिवार्य था कि वे शामिल होने के 14 महीनों के भीतर घोषणा के लिए फॉर्म एनडीएच-4 में केन्‍द्र सरकार को आवेदन करें, यदि उन्हें निधि (संशोधन) नियमों के 15.08.2019 से प्रभावी होने के बाद और निधि (संशोधन) नियमों के लागू होने के 09 महीने के भीतर, 2014 के बाद लेकिन 15.08.2019 से पहले निधि के रूप में शामिल किया जाता है।
    • आम जनता के हितों की रक्षा के लिए, यह अनिवार्य हो गया है कि इसका सदस्य बनने से पहले, किसी को भी केन्‍द्र सरकार द्वारा एक कम्‍पनी को निधि के रूप में घोषित करना सुनिश्चित करना चाहिए और इसके लिए नियमों में कुछ आवश्यक/महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं जो निधि (संशोधन) नियम, 2022 के बाद शामिल की जाने वाली कम्पनियों पर निम्नानुसार लागू है:
      • 10 लाख रुपये की शेयर पूंजी के साथ निधि के रूप में शामिल एक सार्वजनिक कंपनी को खुद को निधि के रूप में घोषित कराने के लिए 120 दिनों के भीतर 20 लाख रुपये का एनओएफ के साथ सबसे पहले 200 की न्यूनतम सदस्यता के साथ फॉर्म एनडीएच-4 में आवेदन करना होगा
      • कम्पनी के प्रमोटरों और निदेशकों को नियमों में निर्धारित मानदंडों को पूरा करना होगा।
      • समय पर निपटान के लिए, संशोधित नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि केन्द्र सरकार एनडीएच-4 के रूप में कम्पनियों द्वारा दायर आवेदनों की प्राप्ति के 45 दिनों के भीतर कोई निर्णय नहीं लेती है, तो मंजूरी को स्वीकृत माना जाएगा।
      • यह ऐसी कम्पनियों के लिए लागू होगा जिन्हें निधि (संशोधन) कानून, 2022 के बाद शामिल किया जाएगा।
  2. छठी स्कॉर्पीन पनडुब्बी ‘वागशीर’ को समुद्र में उतारा गया:

    सामान्य अध्ययन: 3सुरक्षा,विज्ञानं एवं प्रोधोगिकी:विषय: स्कॉर्पीन पनडुब्बी ‘वागशीर’ का भारतीय नौसेना के लिए महत्व।प्रारंभिक परीक्षा:   स्कॉर्पीन पनडुब्बी ‘वागशीर’,प्रोजेक्ट- 75प्रसंग: 

    • भारतीय नौसेना में यार्ड 11880, प्रोजेक्ट- 75 के तहत कलवरी श्रेणी से आने वाली पनडुब्बियों की छठी और आखिरी पनडुब्बी का मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) के कन्होजी आंग्रे वेट बेसिन में जलावतरण किया गया।

    विवरण:

    • रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार इस समारोह के मुख्य अतिथि थे और किसी महिला द्वारा शुभारम्भ अथवा नामकरण की नौसेना की परंपराओं को ध्यान में रखते हुए श्रीमती वीना अजय कुमार द्वारा ‘वागशीर’ पनडुब्बी का जलावतरण किया गया।
    • प्रोजेक्ट- 75 के अंतर्गत निर्मित पनडुब्बियों की पहली पनडुब्बी को दिसंबर 2017 में नौसेना में कमीशन किया गया था और वर्तमान में इस परियोजना की चार पनडुब्बियां भारतीय नौसेना की सेवा में कार्यरत हैं।
    • पांचवीं पनडुब्बी समुद्री परीक्षण के साथ आगे बढ़ रही है और इस वर्ष इसकी डिलीवरी होने की संभावना है।
    • इसके बाद श्रृंखला की छठी पनडुब्बी अब विभिन्न उपकरणों और उसके बंदरगाह परीक्षणों के लिए तैयार है।
    • इसके बाद चालक दल पनडुब्बी को पूर्ण रूप से समुद्री गतिविधियों से संबंधित परीक्षणों के लिए रवाना करेगा जिसके बाद पनडुब्बी को अगले वर्ष के अंत तक भारतीय नौसेना को सौंप दिया जाएगा।
  3. भारत का गैर-बासमती चावल निर्यात वित्त वर्ष 2013-14 की तुलना में 109 प्रतिशत बढ़ कर 6115 मिलियन डॉलर तक जा पहुंचा:

    सामान्य अध्ययन: 3अर्थव्यवस्था,कृषि:विषय:भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि के विकास में तेजी लाने में गैर बासमती चावल की भूमिका।प्रारंभिक परीक्षा: गैर बासमती चावल निर्यात।प्रसंग: 

    • भारत का गैर-बासमती चावल निर्यात वित्त वर्ष 2013-14 के 2925 मिलियन डॉलर की तुलना में आश्चर्यजनक तरीके से 109 प्रतिशत बढ़ कर वित्त वर्ष 2021-22 में 6115 मिलियन डॉलर तक जा पहुंचा है।

    उद्देश्य:

    • डीजीसीआईएस आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में दुनिया भर के 150 से अधिक देशों को चावल का निर्यात किया।
    • भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में 150 से अधिक देशों में से 76 देशों को एक मिलियन डॉलर से अधिक का निर्यात किया जो पिछले कई वर्षों के दौरान भारत के चावल निर्यात के विविधीकरण को इंगित करता है।

    विवरण:

    • डीजीसीआईएस आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2019-20 में 2015 मिलियन डॉलर के बराबर के गैर बासमती चावल का निर्यात किया था जो बढ़ कर वित्त वर्ष 2020-21 में 4799 मिलियन डॉलर तथा वित्त वर्ष 2021-22 में 6115 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
    • गैर बासमती चावल का निर्यात वित्त वर्ष 2021-22 में 27 प्रतिशत की वृद्धि तथा 6115 मिलियन डॉलर अर्जित करने के साथ सभी कृषि वस्तुओं के बीच सबसे अधिक विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाली फसल रही।
    • पश्चिमी अफ्रीकी देश बेनिन भारत से गैर बासमती चावल के प्रमुख आयातक देशों में से एक है।
      • अन्य गंतव्य देश हैं: नेपाल, बांग्लादेश, चीन, कोत दिव्वार (Côte d’Ivoire), टोगो, सेनेगल, गिनी, वियतनाम, जिबूती, मेडागास्कर, कैमरून, सोमालिया, मलेशिया, लाइबेरिया, संयुक्त अरब अमीरात आदि।
    • वित्त वर्ष 2020-21 में, भारत ने नौ देशों- तिमोर-लेस्टे, प्यूओर्टो रिको, ब्राजील, पपुआ न्यू गिनी, जिम्‍बाब्‍वे, बुरुंडी, एस्वाटिंनी, म्यांमार तथा निकारगुआ को गैर बासमती चावल का निर्यात किया।
    • पिछले दो वर्षों में भारत का जोर बंदरगाह बुनियादी ढांचे को विस्तारित करने तथा चावल निर्यात के लिए देशों या बाजारों में नए अवसरों की खोज करने के प्रयासों के साथ-साथ प्रमुख हितधारकों को शामिल करने वाली मूल्य श्रृंखला के विकास पर रहा है जिसके कारण चावल के निर्यात में भारी बढोतरी हुई है।
    • कोविड-19 महामारी द्वारा उत्पन्न लॉजिस्ट्क्सि संबंधी चुनौतियों के बावजूद, भारत अफ्रीकी, एशियाई तथा यूरोपीय संघ के बाजारों में अपने चावल निर्यात को लगातार बढ़ाता रहा है और इस प्रकार वैश्विक चावल व्यापार में सबसे बड़ा हिस्सा प्राप्त कर चुका है। मजबूत वैश्विक मांग से भी चावल निर्यात में वृद्धि  हुई।
    • देश के प्रमुख चावल उत्पादक राज्य हैं: पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, असम तथा हरियाणा।
    • बहरहाल, वित्त वर्ष 2021-22 के लिए द्वितीय अग्रिम आकलन के अनुसार, देश में कुल खाद्यान्न् उत्पादन के रिकॉर्ड 316.06 मिलियन टन होने का अनुमान है जो वित्त वर्ष 2020-21 के खाद्यान्न के उत्पादन की तुलना में 5.32 मिलियन टन अधिक है।
    • इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान उत्पादन पिछले पांच वर्षों (2016-17 से 2020-21) के खाद्यान्न के औसत उत्पादन की तुलना में 25.35 मिलियन टन अधिक है।
    • उल्लेखनीय है कि भारत चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है।
      • कृषि निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि को देश के कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने से किसानों की आय बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता के प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है।
  4. भारत और फिनलैंड ने वर्चुअल उत्कृष्टता केंद्र ( सीओई ) के लिए क्वान्टम कंप्यूटिंग में सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा की:

    सामान्य अध्ययन: 2अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:विषय:भारत के हितों पर विभिन्न अंर्तष्ट्रीय वित्त संघठनो एवं विकसित और विकासशील देशों की नीतियां  और राजनीति का प्रभाव।मुख्य परीक्षा: बुनियादी ढांचे, विरासत, सार्वजनिक वित्त पोषण, नवोन्मेषण आधारित उद्योग में फिनलैंड की क्वान्टम कंप्यूटिंग की शक्ति, इसके मजबूत क्वान्टम परितंत्र तथा नोर्डिक भावना के बारे में चर्चा कीजिए।आरई क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर प्रकाश डालिये।प्रसंग: 

    • भारत और फिनलैंड ने क्वान्टम कंप्यूटिंग में सहयोग के संभावित क्षेत्रों और सहयोगात्मक वर्चुअल उत्कृष्टता केंद्र ( सीओई ) के एक रोडमैप पर चर्चा की।

    उद्देश्य:

    • दोनों देश शैक्षणिक तथा औद्योगिक साझीदारों को प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं जो सामान्य रूप से  मानवता की बेहतरी के लिए क्वान्टम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विकास करने में सहायता कर सकते हैं।

    विवरण:

    • यह बैठक भारत एवं फिनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री की उपस्थिति में क्वान्टम कंप्यूटिंग पर भारत-फिनलैंड वर्चुअल नेटवर्क केंद्र की स्थापना के लिए संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने के एक दिन बाद आयोजित की गई।
    • फिनलैंड ने भारत की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा के साथ फिनलैंड की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा के जुड़ने, वैज्ञानिक परितंत्रों तथा दोनों देशों के शक्तिशाली आईटी समुदायों का उपयोग करने एवं उन्हें इस प्रकार सुदृढ़ बनाने जिससे दूसरे अप्रत्याशित लाभ ( स्पिन ऑफ ) भी प्राप्त हो सकें, की आवश्यकता रेखांकित की।
    • इसका उद्वेश्य एक उत्पाद और शोध-संचालित सहयोग की दिशा में है जो सुपरकंप्यूटिंग डिवासेज, सेंसरों, संचार प्रौद्योगिकीयों, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकीयों की दिशा में काम कर सकता है।
    • केंद्रीय विद्युत एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा (एनआरई) मंत्री ने फिनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री  से नई दिल्ली में मुलाकात की।
    • इस मुलाकात में आरई क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और बताया कि भारत एकमात्र जी20 देश और बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसने पेरिस समझौते के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के अनुरूप लगातार कार्रवाई की है।
    • दोनों मंत्रियों ने विशेष रूप से ऊर्जा के क्षेत्र में फिनलैंड और भारत के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
    • फिनलैंड की ओर से सक्षम हरित हाइड्रोजन/हरित अमोनिया उत्पादन, इसके भंडारण, परिवहन क्षेत्र में उनके उपयोग, बैटरियों के पुनर्चक्रण, स्मार्ट मीटरिंग सॉफ्टवेयर आदि के क्षेत्र में साथ-साथ काम करने को लेकर भारत के साथ सहयोग करने में अपनी दिलचस्पी दिखाई।
  5. प्रधानमंत्री ने ग्लोबल आयुष निवेश और नवोन्मेष शिखर सम्मेलन 2022 का उद्घाटन किया:

    सामान्य अध्ययन: 2शासन,अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह और भारत से जुड़े समझौते या भारत के हितों को प्रभावित करना।प्रारंभिक परीक्षा: ग्लोबल आयुष निवेश और नवोन्मेष शिखर सम्मेलन 2022 ।प्रसंग: 

    • प्रधानमंत्री ने गुजरात के गांधीनगर में ग्लोबल आयुष निवेश और नवोन्मेष शिखर सम्मेलन 2022 का उद्घाटन किया।  

    उद्देश्य:

    • इस तीन दिवसीय आयुष वैश्विक शिखर सम्मेलन में उद्यमियों, उद्योग, स्टार्टअप और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत होगी ताकि उन्हें आयुष में नवाचार के लिए निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। 

    विवरण:  

    • उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री ने इस उद्घाटन सत्र में कहा की “हम पहले से ही आयुष औषधियों, सप्लीमेंट्स और सौंदर्य प्रसाधनों के उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि देख रहे हैं। 2014 में आयुष क्षेत्र 3 अरब डॉलर से भी कम था, आज वह बढ़कर 18 अरब डॉलर को पार कर गया है। 
    • प्रधानमंत्री द्वारा आयुष क्षेत्र में अनेक नई पहलों की घोषणा में, सबसे पहले आयुष उत्पादों के लिए एक विशेष आयुष चिह्न था। 
      • इससे पूरी दुनिया के लोगों को गुणवत्तापूर्ण आयुष उत्पादों का भरोसा मिलेगा। 
      • सरकार देश भर में आयुष उत्पादों के प्रचार, अनुसंधान और उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए आयुष पार्कों का एक नेटवर्क विकसित करेगी। 
      • ‘आयुष आहार’ नाम की एक नई श्रेणी की घोषणा की गई, जो हर्बल पोषक तत्वों वाले सप्लीमेंट्स के उत्पादकों को बहुत सुविधा प्रदान करेगी।
    • इसके अलावा, आयुष चिकित्सा का लाभ लेने के लिए भारत आने के इच्छुक विदेशी नागरिकों के लिए एक और बड़ी पहल की घोषणा की गई। 
    • भारत जल्द ही एक विशेष आयुष वीजा श्रेणी पेश करेगा। वर्तमान युग को यूनिकॉर्न का युग बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में ही अब तक भारत के 14 स्टार्ट-अप यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो चुके हैं। 
    • प्रधानमंत्री ने आयुष निर्यात संवर्धन परिषद और चार आयुष आईसीटी पहल शुरू करने की घोषणा की जिसमें आयुष सूचना हब, आयुसॉफ्ट, आयुष नेक्स्ट और आयुष जीआईएस शामिल हैं। 
      • प्रधानमंत्री ने ‘प्रोफेसर आयुष्मान’ नामक एक कॉमिक बुक का भी विमोचन किया, जिसमें बताया गया है कि कैसे आयुष प्रणालियों और उत्पादों ने न केवल कोविड-19 बल्कि अन्य बीमारियों से भी लड़ने में मदद की।
    • उद्घाटन सत्र में वैश्विक संस्थानों और सरकारों के बीच 5 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर भी शामिल थे। 
    • आयुर्वेद और चिकित्सा की अन्य परम्परारगत प्रणालियों के क्षेत्र में सहयोग के लिए राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ (आरएवी) का अर्जेंटीना के साथ समझौता, आयुर्वेद में शैक्षणिक सहयोग स्थापित करने पर अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) और ब्राजील के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ है । 
    • अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान और यूनिवर्सिटी हेल्थ नेटवर्क, टोरंटो (यूएचएन), कनाडा के बीच समझौता ज्ञापन, यूनिवर्सिडैड ऑटोनोमा डी न्यूवो लियोन (यूएएनएल), मैक्सिको में आयुर्वेद की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन और एनआईए, जयपुर और फिलीपीन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेडिशनल एंड ऑल्टरनेटिव हेल्थ केयर (पीआईटीएएचसी) के बीच समझौता ज्ञापन।
    • आयुष क्षेत्र प्रति वर्ष 17 प्रतिशत की दर से उल्लेखनीय रूप से बढ़ रहा है। 
      •   इस वर्ष के अंत तक आयुष उद्योग के 23 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। 
    • आयुष मंत्रालय और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक उद्योगों के बीच उद्यमिता विकसित कर रहे हैं। 
      • आयुष मंत्रालय ने प्रधानमंत्री की स्टार्टअप इंडिया पहल के अनुरूप युवा उद्यमियों को आयुष में स्टार्टअप स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) भी विकसित किया है।
    • शिखर सम्मेलन निवेश क्षमता को उजागर करने में मदद करेगा, और नवाचार, अनुसंधान और विकास, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और कल्याण उद्योग को बढ़ावा देगा। 
    • यह उद्योगपतियों, शिक्षाविदों और विद्वानों को एक साथ लाने में मदद करेगा और भविष्य के सहयोग के लिए एक मंच के रूप में कार्य करेगा।
    • वैश्विक आयुष निवेश और नवाचार शिखर सम्मेलन 22 अप्रैल, 2022 तक गांधीनगर, गुजरात में जारी रहेगा प्रधानमंत्री ने जामनगर में डब्ल्यूएचओ-ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन की आधारशिला रखी थी।

      प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

    1. नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड/एनके, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड/रिफॉर्मेशन और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड/के-खान्गो के साथ युद्धविराम समझौते को आगे बढ़ाया गया:
    • भारत सरकार और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड/एनके (एनएससीएन/एनके), नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड/रिफॉर्मेशन (एनएससीएन/आर) और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड/के-खान्गो (एनएससीएन/के-खान्गो) के बीच युद्धविराम समझौते पर चर्चा जारी हैं।
    • इन युद्धविराम समझौतों को एक वर्ष की एक और अवधि के लिए आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। 
    • एनएससीएन/एनके और एनएससीएन/आर के साथ यह युद्धविराम समझौता 28 अप्रैल, 2022 से लेकर 27 अप्रैल, 2023 तक और एनएससीएन/के-खान्गो के साथ यह युद्धविराम समझौता 18 अप्रैल, 2022 से लेकर 17 अप्रैल, 2023  तक प्रभावी रहेगा। 
    • इन समझौतों पर 19 अप्रैल, 2022 को हस्ताक्षर किए गए थे।  

20 अप्रैल 2022 : PIB विश्लेषण –Download PDF Here

लिंक किए गए लेख में 19 अप्रैल 2022 का पीआईबी सारांश और विश्लेषण पढ़ें।

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