03 मई 2023 : समाचार विश्लेषण

A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

  1. गिग एवं प्लेटफॉर्म कामगार और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020:
  2. वि-डॉलरीकरण: वैश्विक आरक्षित मुद्रा का दर्जा प्राप्त करने की दौड़:

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E. संपादकीय:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. LAC संकट और बिना लड़े हारने का खतरा:
  2. भारत के तकनीकी प्रशुल्कों को गैरकानूनी घोषित करना:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. एक अच्छा तलाक (अनुच्छेद 142):

G. महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. लुधियाना गैस रिसाव से हुई मौतों की जांच के लिए NGT ने समिति बनाई :
  2. भारत ने मालदीव को 2 नौसैनिक जहाज सौंपे:
  3. विनिर्माण क्षेत्र में कर्नाटक को सबसे ‘नवोन्मेषी’ राज्य का स्थान मिला:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

गिग एवं प्लेटफॉर्म कामगार और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020

अर्थव्यवस्था:

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

प्रारंभिक परीक्षा: सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और श्रम संहिता।

मुख्य परीक्षा: गिग अर्थव्यवस्था और गिग कामगारों से जुड़े विभिन्न मुद्दे एवं चिंताएं।

प्रसंग:

  • ज़ोमैटो के स्वामित्व वाली ब्लिंकिट कंपनी के कर्मचारी 11 अप्रैल को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में हड़ताल पर चले गए।

पृष्ठभूमि:

  • हाल ही में ब्लिंकिट कंपनी द्वारा डिलीवरी एजेंटों के लिए एक नयी भुगतान संरचना पेश कि गई थी, जिसके अनुसार प्रति डिलीवरी न्यूनतम भुगतान ₹25 से घटाकर ₹15 कर दिया गया।
  • इस नयी भुगतान संरचना के परिणामस्वरूप, ब्लिंकिट के साथ काम करने वाले डिलीवरी एक्जीक्यूटिव/एजेंट की कमाई अब घटकर लगभग ₹600 से 700 प्रति दिन रह जाएगी, जबकि पहले यह लगभग ₹1,200 थी।
  • नई भुगतान संरचना के लागू होने के बाद उनको उनको मिलने वाले साप्ताहिक भुगतान के बारे में अनिश्चित हैं, जिसकी वजह से डिलीवरी एक्जीक्यूटिव हड़ताल पर चले गए।

गिग अर्थव्यवस्था:

  • सामान्य रूप से गिग अर्थव्यवस्था को सेवा चाहने वाले और सेवा प्रदाता के बीच एक व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें सेवा चाहने वाले को एक निश्चित कार्य की आवश्यकता होती है जिसे सेवा प्रदाता द्वारा पूरा किया जाता है।
  • दोनों के बीच यह समझौता अस्थायी होता है और इसका दायरा एक विशिष्ट आवश्यकता तक सीमित होता है।
  • गिग अर्थव्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है जो लचीले, अल्पकालिक या स्वतंत्र कार्य पर आधारित होती है।
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 एक गिग कामगार को “एक ऐसा व्यक्ति जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों के बाहर काम करता है या काम की व्यवस्था में भाग लेता है और ऐसी गतिविधियों से आय अर्जित करता है” के रूप में परिभाषित करती है।
  • फ्रीलांसर, आकस्मिक कर्मचारी और स्वतंत्र ठेकेदार गिग कामगार के उदाहरण हैं।
  • गिग अर्थव्यवस्था से संबंधित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिक पर क्लिक कीजिए: Gig Economy

गिग कामगार:

  • गिग कामगार एक ऐसे कार्यबल का एक हिस्सा होते हैं जो आमतौर पर पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध के दायरे से बाहर होते हैं।

गिग कामगारों के दो समूह होते हैं:

  • प्लेटफार्म कर्मी: गिग कामगार जो उन नौकरियों में काम करते हैं जो अपने ग्राहकों से जुड़ने के लिए ऑनलाइन एल्गोरिदमिक मेचिंग प्लेटफॉर्म या मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करते हैं, प्लेटफॉर्म कर्मी कहलाते हैं।
  • गैर-प्लेटफ़ॉर्म कर्मी: वे सभी गिग कर्मी जो ऐसे ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग नहीं करते हैं, गैर-प्लेटफ़ॉर्म कर्मी कहलाते हैं।
  • गैर-प्लेटफ़ॉर्म कामगारों में निर्माण और गैर-प्रौद्योगिकी-आधारित अस्थायी कार्यों में काम करने वाले लोग शामिल होते हैं।
  • भारत में, पारंपरिक कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948, कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 (EPFA), और बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 जैसे कई कानूनों और विनियमों के अनुसार विभिन्न लाभ प्रदान किए जाते हैं।
  • इसी तरह, अनुबंध श्रम (विनियमन और उन्मूलन) अधिनियम, 1970 के तहत अनुबंध कर्मचारियों को भी इस तरह के लाभ प्रदान किये जाते हैं।
  • हालांकि, गिग कामगारों की अनूठी प्रकृति को देखते हुए मौजूदा रोजगार कानून के तहत उनकी मान्यता सीमित है और इसलिए वे ऐसे वैधानिक लाभों के दायरे से बाहर हो जाते हैं।
  • चूंकि गिग कामगारों में कर्मचारियों और स्वतंत्र ठेकेदारों दोनों की विशेषताएँ हैं, इसलिए सवाल उठे हैं कि क्या गिग कामगारों को “कर्मचारी” या “स्वतंत्र ठेकेदारों” के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए।

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020:

  • श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा लागू की गई सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 पहली बार गिग कामगारों को श्रम कानूनों के दायरे में लाती है।
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 ( Code on Social Security, 2020) की धारा 2(35) एक गिग कामगार को “एक ऐसा व्यक्ति जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों के बाहर काम करता है या काम की व्यवस्था में भाग लेता है और ऐसी गतिविधियों से आय अर्जित करता है” के रूप में परिभाषित करती है।
  • इस संहिता के अनुसार प्लेटफ़ॉर्म कार्य को “एक पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध के बाहर एक कार्य व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया गया है जिसमें संगठन या व्यक्ति विशिष्ट समस्याओं को हल करने या भुगतान के बदले विशिष्ट सेवाएं प्रदान करने के लिए अन्य संगठनों या व्यक्तियों तक पहुँचने के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करते हैं”।
  • हालाँकि यह संहिता गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों को मान्यता प्रदान करती है, फिर भी यह ऐसे श्रमिकों एवं पारंपरिक कर्मचारियों के बीच अंतर करती है।
  • इस संहिता के अनुसार, पारंपरिक कर्मचारियों को बीमा, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, कर्मचारी मुआवजा और मातृत्व लाभ जैसे लाभ प्रदान किये जाते हैं।
  • यह संहिता केंद्र और राज्य सरकारों को भविष्य निधि, स्वास्थ्य, मातृत्व लाभ, दुर्घटना लाभ आदि जैसे मामलों में गिग श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लागू करने का आदेश देती है।
  • साथ ही यह संहिता उपरोक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए सभी गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों के अनिवार्य पंजीकरण के बारे में बात करती है।

प्रमुख चिंताएँ:

  • श्रम सुधारों ( labour reforms) के हिस्से के रूप में पेश की गईं चार नई श्रम संहिताओं में से केवल सामाजिक सुरक्षा संहिता में गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों का संदर्भ दिया गया है।
  • इस प्रकार, ऐसे कर्मचारी आवश्यक लाभों और सुरक्षा उपायों के बिना काम करना जारी रखते हैं जो अन्य संहिताओं जैसे न्यूनतम मजदूरी, व्यावसायिक सुरक्षा आदि द्वारा प्रदान किए जाते हैं।
  • यद्यपि श्रम संहिताओं को सितंबर 2020 में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिल गई थी, फिर भी उन्हें लागू किया जाना बाकी है।
  • केंद्र सरकार के अनुसार, कार्यान्वयन में देरी का कारण राज्यों द्वारा नियम बनाने में देरी को माना जाता है।
  • ऐसे कर्मचारी औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 ( Industrial Disputes Act, 1947) के माध्यम से विस्तारित विभिन्न निवारण तंत्रों तक पहुँचने से भी बाहर रहते हैं।
  • यह गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को उनकी शिकायतों को दूर करने और उनके नियोक्ताओं को जवाबदेह ठहराने के लिए एक प्रभावी तंत्र से वंचित करता है।
  • गिग कामगारों के काम की गैर-पारंपरिक प्रकृति के कारण, उन्हें सामूहिक सौदेबाजी का अधिकार (आधुनिक श्रम कानून का एक मौलिक सिद्धांत जो श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है) नहीं है।
  • इसके अलावा, गिग और प्लेटफॉर्म कामगार कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त यूनियन/संगठन नहीं बना सकते।
  • 2022 में प्रकाशित फेयरवर्क इंडिया की एक रिपोर्ट ने देश में विभिन्न प्लेटफॉर्म कामगारों की तिरस्कृत कामकाजी परिस्थितियों पर प्रकाश डाला और गिग कामगारों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून बनाने के महत्व को रेखांकित किया।

न्यायपालिका द्वारा हस्तक्षेप:

  • इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) ने सितंबर 2021 में गिग कामगारों की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक जनहित याचिका (PIL) दायर की।
  • इस जनहित याचिका में गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों को असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008 के दायरे में लाने के लिए “असंगठित श्रमिक” घोषित करने की मांग की गई थी।
  • जनहित याचिका के माध्यम से, IFAT ने तर्क दिया था कि “असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008 की धारा 2(m) और 2(n) के तहत गिग श्रमिकों को असंगठित श्रमिकों” की श्रेणी से बाहर करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत गारंटीकृत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
  • इसके अलावा, यह भी तर्क दिया जाता है कि सामाजिक लाभ से वंचित करना अनुच्छेद 23 के अनुसार बलात् श्रम के माध्यम से शोषण के बराबर है।
  • याचिका में यह भी मांग की गई है कि ऐसे श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में वैधानिक सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने दिसंबर 2021 में इस याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था, लेकिन केंद्र ने अब तक जवाब नहीं दिया है।

श्रम कानून सुधारों के संदर्भ में गिग कामगारों के लिए श्रम कानून से संबंधित अधिक जानकारी एक लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: Labour Laws for Gig Workers in the Context of Labour Law Reforms

सारांश:

  • एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म-आधारित कंपनी के लिए काम करने वाले डिलीवरी एक्जीक्यूटिव के हालिया विरोध ने एक बार फिर भारत में गिग अर्थव्यवस्था और गिग कामगारों की समस्याओं को उजागर किया है। यह इंगित करता है कि गिग अर्थव्यवस्था में नियमों के मानकीकरण और ऐसे श्रमिकों के लिए सामाजिक कल्याण लाभों का विस्तार करने की तत्काल आवश्यकता है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

वि-डॉलरीकरण: वैश्विक आरक्षित मुद्रा का दर्जा प्राप्त करने की दौड़:

अर्थव्यवस्था:

विषय: संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास से संबंधित विषय।

प्रारंभिक परीक्षा: ‘वि-डॉलरीकरण’ से संबंधित जानकारी।

मुख्य परीक्षा: वैश्विक आरक्षित मुद्रा होने के लाभ एवं वि-डॉलरीकरण की आवश्यकता।

प्रसंग:

  • हाल के दिनों में, विशेष रूप से, रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद, डॉलर की वैश्विक स्वीकृति को कम करने के प्रयासों में तेजी आई है या वि-डॉलरीकरण ने गति प्राप्त की है।

‘वि-डॉलरीकरण’:

  • वि-डॉलरीकरण वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में अन्य मुद्राओं के साथ अमेरिकी डॉलर के प्रतिस्थापन को संदर्भित करता है।
  • एक आरक्षित मुद्रा वह मुद्रा है जो देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन में बड़े पैमाने पर उपयोग की जाती है और आमतौर पर विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा भंडार के रूप में रखी जाती है।
  • दुनिया भर के देश विभिन्न कारणों से कई वर्षों से वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर को प्रतिस्थापित करना चाह रहे हैं।
  • हालाँकि, रूस पर लगे प्रतिबंधों, जो रूस से तेल और अन्य सामान खरीदने के लिए डॉलर के उपयोग को सीमित करता है, ने देशों को वैश्विक अर्थव्यवस्था को वि-डॉलरिकृत करने के अपने प्रयासों को तेज करने के लिए मजबूर किया है।
  • चूंकि अमेरिकी डॉलर के रूप में किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को अमेरिकी बैंकों द्वारा मंजूरी मिलनी आवश्यक है, इसलिए देशों का मत है कि इससे यू.एस. को ऐसे लेन-देन पर नज़र रखने और उन्हें नियंत्रण करने की महत्वपूर्ण शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।

वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर:

  • अर्थशास्त्रियों का मानना है कि किसी भी देश को सीमा पार लेनदेन के लिए डॉलर का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर नहीं किया गया था, बल्कि इसका इस्तेमाल इसलिए किया जाता था क्योंकि लोग वास्तव में अमेरिकी डॉलर को प्रमुखता देते थे और डॉलर अन्य मुद्राओं की तुलना में अधिक व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता था।
  • अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन के लिए उपयोग किए जाने के लिए अन्य मुद्राएं अमेरिकी डॉलर जितनी लोकप्रिय नहीं हैं।
  • उदाहरण के लिए, भारतीय रुपये के रूप में द्विपक्षीय व्यापार करने के लिए भारत और रूस द्वारा किए गए प्रयासों के इच्छित परिणाम नहीं मिले क्योंकि रूस से भारत के आयात का मूल्य रूस को भारत द्वारा किए गए निर्यात से काफी अधिक है।
  • इस व्यापार संतुलन का मतलब था कि रूस के पास अतिरिक्त रुपये थे जो वह भारतीय वस्तुओं पर खर्च करने को तैयार नहीं था। इसलिए रूस ने द्विपक्षीय व्यापार अमेरिकी डॉलर में करने की मांग की।
  • अमेरिकी डॉलर की वैश्विक स्वीकार्यता मुख्य रूप से निवेशकों के बीच अमेरिकी संपत्तियों की लोकप्रियता के कारण है।
  • अमेरिका 1975 से लगातार व्यापार घाटे का सामना कर रहा है। इसका मतलब है कि अमेरिकी आयात का मूल्य अन्य देशों को इसके निर्यात के मूल्य से अधिक रहा है।
  • इसलिए, दुनिया भर के बाकी देशों ने अमेरिका के व्यापार घाटे के कारण अतिरिक्त डॉलर जमा किए हैं और इन अतिरिक्त डॉलरों को अमेरिकी संपत्तियों में निवेश किया जा रहा है जैसे अमेरिकी सरकार द्वारा जारी ऋण प्रतिभूतियां।
  • इसके अलावा, यू.एस. में “क़ानून के शासन” को यू.एस. वित्तीय बाजारों में वैश्विक निवेशकों के उच्च स्तर के भरोसे का एक अन्य प्रमुख कारण कहा जाता है।
  • आर्थिक महाशक्तियों की मुद्राएं आमतौर पर वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में उपयोग की जाती हैं और ब्रिटिश पाउंड और फ्रेंच फ्रैंक जैसी मुद्राओं ने अतीत में वैश्विक आरक्षित मुद्रा के दर्जे का लाभ उठाया है।
  • हालांकि, इन देशों की आर्थिक गिरावट के साथ, मुद्राओं ने अपनी लोकप्रियता और वैश्विक आरक्षित मुद्रा होने का दर्जा खो दिया।
  • ब्रिटिश पाउंड जो अब तक इस दर्जे का लाभ उठा रहा था, उसे अमेरिकी डॉलर द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया क्योंकि ब्रिटेन ने वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में अपना दर्जा खो दिया।

वैश्विक आरक्षित मुद्रा द्वारा प्राप्त लाभ:

  • एक मुद्रा जिसे वैश्विक आरक्षित मुद्रा होने का दर्जा प्राप्त होता है, उसे अन्य देशों के सापेक्ष अधिक लाभ होता है।
  • यदि किसी देश की मुद्रा को वैश्विक आरक्षित मुद्रा होने का दर्जा प्राप्त है, तो देश के पास केवल नई मुद्रा छापकर अन्य देशों से सामान और अन्य संपत्ति खरीदने की शक्ति होगी।
  • अपने लेनदेन के लिए यू.एस. डॉलर का उपयोग करने वाले देश, कंपनियां और व्यक्ति मुद्रा की अधिक तरलता सुनिश्चित करते हैं।
  • बढ़ी हुई तरलता का अर्थ है कि वित्तीय संपत्तियों की कीमत अधिक आसानी से तय की जा सकती है और ऋण अधिक आसानी से प्रदान किए जाते हैं।
  • यदि किसी देश की मुद्रा का उपयोग वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में किया जा रहा है, तो उस देश के पास वित्तीय प्रतिबंध लगाने और वैश्विक भू-राजनीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का लाभ होगा।

भावी कदम:

  • हाल के दिनों में यू.एस. फेडरल रिजर्व द्वारा अपनाई गई विस्तारवादी मौद्रिक नीतियां वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में यू.एस. डॉलर की स्थिति को खतरे में डालती हैं।
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व आमतौर पर आर्थिक मंदी को दूर करने और अमेरिकी सरकार के खर्चों को पूरा करने के लिए डॉलर की आपूर्ति बढ़ाता है।
  • हालांकि, डॉलर की आपूर्ति के इस तरह के विस्तार से मुद्रा की स्थिति कमज़ोर हो सकती है जो आरक्षित मुद्रा के रूप में इसके दर्जे को खतरे में डालती है।
  • यू.एस. द्वारा विभिन्न देशों पर एकतरफा प्रतिबंध लगाने के हाल के उदाहरणों ने यू.एस. के सहयोगियों सहित अन्य देशों को एक वैकल्पिक और डॉलर-मुक्त प्रणाली विकसित करने के लिए मजबूर किया है।
  • चीनी युआन को वर्तमान में चीन की आर्थिक शक्ति में उत्थान और विकास के कारण अमेरिकी डॉलर के संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
  • हालाँकि, चीन में “कानून के शासन” पर चिंताओं ने इसकी संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

सारांश:

  • आलोचकों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए प्राथमिक आरक्षित मुद्रा होने की डॉलर की स्थिति ने अमेरिका को अन्य देशों पर अनुचित विशेषाधिकार दिए हैं और इस प्रकार डॉलर को वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में प्रतिस्थापित करने के प्रयासों को बढ़ाने का आह्वान किया है।

संपादकीय-द हिन्दू

संपादकीय:

LAC संकट और बिना लड़े हारने का खतरा:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: भारत और उसके पड़ोसी।

मुख्य परीक्षा: भारत और चीन के बीच LAC संकट।

प्रसंग:

  • चीन की PLA को LAC के पार घुसे तीन साल पूरे हो गए हैं।

विवरण:

  • मई 2020 में, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) में कई स्थानों पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा घुसपैठ की गई थी।
  • तीन साल बाद भी डेपसांग और डेमचोक में स्थिति अनसुलझी है।
  • गौरतलब है कि भारतीय सैनिक लद्दाख के 65 में से 26 पेट्रोलिंग पॉइंट्स को नहीं छू सकते हैं।
  • नियमित राजनयिक और मंत्रिस्तरीय बैठकों और कोर कमांडर स्तर की वार्ता के बावजूद मामले में कोई खास प्रगति नहीं हुई है।
  • यह तर्क दिया जाता है कि सरकार इस संकट को संभालने में विफल रही है क्योंकि भारत अब अप्रैल 2020 की यथास्थिति की वापसी की मांग भी नहीं कर रहा है।

संकट से संबंधित विवरण के लिए, यहां पढ़ें: India-China Conflict – Galwan Valley Clash. Detailed Analysis & Summary for IAS

डेपसांग संकट (2013):

  • 2013 में, चीन की PLA ने बॉटलनेक या वाई-जंक्शन (वही स्थान जो 2020 से डेपसांग में अवरुद्ध है) पर भारतीय गश्त को रोक दिया था।
  • यथास्थिति को तीन सप्ताह के भीतर बहाल कर दिया गया था, क्योंकि भारत ने चुमार में चीनी पक्ष पर एक प्रतिकार अभियान शुरू किया था।
    • 2013 में वर्तमान विदेश मंत्री एस जयशंकर बीजिंग में भारत के राजदूत थे।
    • इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश के वर्तमान राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल के.टी. परनाइक (सेवानिवृत्त) तब उत्तरी सेना के कमांडर थे।
  • यह रेखांकित किया गया है कि विभिन्न वर्तमान राजनीतिक नेताओं और मीडिया रिपोर्टों ने तत्कालीन सरकार की आलोचना की थी। हालांकि, मीडिया और वे नेता अब चुप हैं जबकि वही स्थान तीन साल से अवरुद्ध है।
  • यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि 1962 में घरेलू दबाव ने भारत को सैन्य टकराव की ओर धकेल दिया गया था।

यह भी पढ़ें: Sino-Indian War Started With Simultaneous Chinese Offensives in Ladakh on October 20, 1962 – This Day in History

संबद्ध चिंताएं:

  • भारत का राजनीतिक नेतृत्व इस मामले पर चुप है और इसे आम जनता से छिपाने की कोशिश कर रहा है (जैसा कि व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया)।
  • यह सुझाव दिया गया है कि LAC पर निष्क्रियता सैन्य संघर्ष के डर से प्रेरित है।
  • उपग्रह की चित्रों के अनुसार, चीन ने 2019 के अंत में लद्दाख में बड़े पैमाने पर सैन्य बुनियादी ढाँचे का निर्माण शुरू किया। सरकार पर इस घटनाक्रम की उपेक्षा करने का आरोप लगाया गया है।
  • यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि 1967 के बाद से, चीन ने अपने दावों से कभी समझौता नहीं किया है, जब तक कि उसके लिए स्थिति असहज नहीं हुई हो।

भावी कदम:

  • यह सुझाव दिया जाता है कि यदि बातचीत ‘देने-लेने’ के बारे में है तो सेना को कुछ ऐसे स्थान लेने चाहिए जो राजनयिक मेज पर पेश किए जा सकें।
  • भारत को कुशल राजनीतिक नेतृत्व के साथ सक्रिय होना चाहिए।

संबंधित लिंक:

India – China Relations: Updates about the Recent Clashes at the LAC and other Events

सारांश:

  • लद्दाख में विभिन्न बिंदुओं पर तीन साल के चीनी अतिक्रमण के बाद भी, मंत्रिस्तरीय और राजनयिक स्तर की वार्ता में उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। सेना के साथ राजनीतिक नेतृत्व को 2013 के डेपसांग संकट की तरह रणनीतिक रूप से चीन से अवसर छीन लेना चाहिए।

भारत के तकनीकी प्रशुल्कों को गैरकानूनी घोषित करना:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2, 3 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध,अर्थव्यवस्था:

विषय: वैश्विक और बहुपक्षीय संगठन और समझौते।

मुख्य परीक्षा: विश्व व्यापार संगठन और आईसीटी सामानों पर भारत का प्रशुल्क।

प्रारंभिक परीक्षा: विश्व व्यापार संगठन।

विवरण:

  • यूरोपीय संघ (EU), जापान और ताइवान ने मोबाइल फोन जैसे कुछ सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पादों पर भारत के प्रशुल्क के बारे में शिकायत की है।
  • विश्व व्यापार संगठन (WTO) की तीन पैनलों ने निष्कर्ष निकाला कि भारत ने शुल्क तथा व्यापार पर सामान्य समझौते (GATT) के अनुच्छेद II का उल्लंघन किया है क्योंकि भारत के प्रशुल्क ने अपनी वस्तु अनुसूची का उल्लंघन किया है।
  • यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि विश्व व्यापार संगठन के सदस्य अपने लिए ‘बाध्य’ या उनकी वस्तु अनुसूची में निर्धारित अधिकतम प्रशुल्क से अधिक प्रशुल्क दरों को लागू नहीं करने के कानूनी दायित्व के अधीन हैं।
    • वस्तु अनुसूची विश्व सीमा शुल्क संगठन (WCO) की वर्गीकरण प्रणाली पर आधारित है।
    • इसे नामकरण की सुसंगत प्रणाली (HSN) कहा जाता है। यह व्यापार किए गए उत्पादों को विशिष्ट नामों और संख्याओं के साथ वर्गीकृत करता है।
    • नए उत्पादों को समायोजित करने के लिए HSN को नियमित रूप से अपडेट किया जाता है। इसे रूपांतरण के रूप में जाना जाता है।

मामले के बारे में विवरण:

  • भारत ने यह तर्क देते हुए अपने रुख को सही ठहराया कि ICT उत्पादों पर इसकी बाध्यकारी प्रशुल्क प्रतिबद्धताएँ सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों (ICT समझौते) के व्यापार पर विश्व व्यापार संगठन की मंत्रिस्तरीय घोषणा पर आधारित हैं। भारत ने 1996 में इस घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे।
    • ITA समझौता एक व्यवस्था है जिसके माध्यम से कुछ देश (WTO सदस्य) IT उत्पादों पर शुल्क समाप्त करने के लिए सहमत होते हैं।
    • लेकिन यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ITA के तहत प्रतिबद्धताएं GATT के अनुच्छेद II.1 (a) और (b) के तहत किसी देश पर बाध्यकारी हो जाती हैं, अगर उन्हें वस्तु अनुसूची में शामिल किया जाता है।
  • नतीजतन, पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि भारत की वस्तु अनुसूची (न कि ITA), प्रशुल्क पर भारत के कानूनी दायित्वों का स्रोत है (यहां तक कि इसमें ITA के तहत उल्लिखित उत्पादों को भी शामिल किया गया है)।
  • इसने भारत के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि ITA के तहत इसकी प्रतिबद्धताएं ‘स्थिर’ हैं। इसके अलावा, यह माना गया कि ITA भारत की वस्तु अनुसूची के तहत उल्लिखित टैरिफ की अवहेलना नहीं कर सकता है।
  • इसने संधियों के कानून पर वियना सम्मेलन के अनुच्छेद 48 के आधार पर भारत के तर्कों का भी खंडन किया है।
    • अनुच्छेद 48 घोषित करता है कि संधि में त्रुटि राज्य की सहमति को अमान्य कर देगी।
    • भारत ने कहा कि HSN 2002 संस्करण से HSN 2007 संस्करण में उसकी वस्तु अनुसूची के रूपांतरण के दौरान एक त्रुटि हुई थी। पैनल ने इस तर्क को स्वीकार कर लिया।
    • हालाँकि, पैनल ने माना कि भारत यह साबित करने में विफल रहा कि उसकी इस धारणा ने वस्तु अनुसूची के लिए भारत की सहमति हेतु एक आवश्यक आधार निर्मित किया है।
  • तीन पैनलों ने सिफारिश की है कि भारत को अपनी प्रशुल्क दरों को कम करना चाहिए और उन्हें अपनी वस्तु अनुसूची के अनुकूल बनाना चाहिए।
    • यदि भारत निर्णय का पालन करता है तो यह ICT वस्तुओं के भारत के घरेलू विनिर्माण को बाधित करेगा।
  • भारत WTO के विवाद निपटान समझौते (DSU) के अनुच्छेद 17 के आधार पर पैनल के खिलाफ अपील करने के अपने विकल्प का प्रयोग कर सकता है।
    • यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि 2019 से अपीलीय निकाय का अस्तित्व समाप्त हो गया है क्योंकि अमेरिका अपने सदस्यों की नियुक्ति को रोक रहा है।
    • इस प्रकार, भारत की अपील शून्य हो जाएगी और उसे पैनल के फैसलों का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी।
    • यद्यपि कुछ WTO सदस्यों जैसे कि EU द्वारा एक बहुदलीय अंतरिम अपील मध्यस्थता व्यवस्था (MPIA) बनाई गई है (विवाद निपटान समझौते के अनुच्छेद 25 के तहत), भारत इसका पक्षकार नहीं है।

इस घटनाक्रम के परिणाम:

  • यूरोपीय संघ विवाद निपटान निकाय की अनुज्ञा के बिना भारत पर व्यापार प्रतिबंध नहीं लगा पाएगा।
  • हालांकि, यूरोपीय संघ ने देशों के खिलाफ एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों को लागू करने और MPIA पर हस्ताक्षर करने के लिए उन्हें प्रेरित करने के लिए एक कानूनी तंत्र विकसित किया है। लेकिन ये उपाय विश्व व्यापार संगठन कानून के साथ भी असंगत हैं।
  • यह अनुमान लगाया गया है कि यूरोपीय संघ भारत के साथ चल रहे मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता में इस मामले को सौदेबाजी के उपकरण के रूप में उपयोग कर सकता है। ऐसे में भारत को इस वक्त बेहद सतर्क रहना चाहिए।

संबंधित लिंक:

India and World Trade Organisation (WTO) – Peace Clause, ICT Tariff Case, Ban of Apps | UPSC

सारांश:

  • कई देशों ने शिकायत की है कि विभिन्न सूचना और संचार प्रौद्योगिकी उत्पादों पर भारत की प्रशुल्क दरें भारत के विश्व व्यापार संगठन के दायित्वों के साथ असंगत हैं। हालांकि कानूनी तंत्र के कारण भारत पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है, नई दिल्ली को यूरोपीय संघ के साथ समझौता करते समय सावधानी से कदम बढ़ाने चाहिए।

प्रीलिम्स तथ्य:

1. एक अच्छा तलाक (अनुच्छेद 142):

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

विषय: भारतीय संविधान एवं उसकी विशेषताएँ।

प्रारंभिक परीक्षा: अनुच्छेद 142

  • 1 मई 2023 को तलाक के मामलों पर सर्वोच्च न्यायालय (SC) के फैसले को एक खराब शादी से बाहर निकलने के लिए एक अच्छे कदम के रूप में देखा जा रहा है।
  • यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13B के अनुसार, एक जोड़े को विवाह को रद्द करने के लिए स्थानीय अदालत में 6 से 18 महीने तक इंतजार करना पड़ता है।
  • संविधान पीठ ने कहा कि वह अनुच्छेद 142 (1) के असाधारण विवेक का इस्तेमाल ‘पूर्ण न्याय’ करने और आपसी सहमति से जोड़ों को तलाक देने के लिए कर सकती है।
  • अदालत ने आगे फैसला सुनाया कि वह अनुच्छेद 142 (Article 142) का उपयोग लंबित आपराधिक या कानूनी कार्यवाही को रद्द करने के लिए कर सकती है, चाहे वह घरेलू हिंसा या दहेज के आधार पर हो, चाहे पुरुष के ख़िलाफ़ हो या महिला के खिलाफ।
  • संविधान पीठ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय “विवाह की अपूरणीय क्षति” के आधार पर तलाक दे सकता है।
    • विशेष रूप से, विवाह की अपूरणीय क्षति हिंदू विवाह अधिनियम में तलाक का आधार नहीं है।
  • हालांकि, वैवाहिक मामलों में अनुच्छेद 142 को लागू करने से पहले सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कई अन्य कारकों पर भी विचार किया जाएगा। उदाहरण के लिए, विवाह की अवधि, मुकदमेबाजी की अवधि, जोड़े के अलग रहने का समय, लंबित मामलों की प्रकृति, और सुलह के प्रयास।

अन्य तथ्य:

  • पिछले दो दशकों में भारत में तलाक की संख्या दोगुनी हो गई है।
  • तलाक की घटना 1.1% है (शहरी क्षेत्रों में बड़ा हिस्सा है)।
  • जनगणना 2011 के अनुसार, “अलग हुई” जनसंख्या तलाकशुदा संख्या से लगभग तिगुनी है।
  • तलाक की संख्या में परित्यक्त और छोड़ी गई महिलाएं शामिल नहीं हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. लुधियाना गैस रिसाव से हुई मौतों की जांच के लिए NGT ने समिति बनाई :
  • राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने 30 अप्रैल को पंजाब के लुधियाना जिले में गैस रिसाव के कारण 11 लोगों की मौत की जांच के लिए एक तथ्यान्वेषी समिति का गठन किया है।
  • NGT ने लुधियाना के जिलाधिकारी को मृतकों के परिजनों को मुआवजे के रूप में 20 लाख रुपये का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है।
  • गियासपुरा इलाके में जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन बच्चों सहित 11 लोगों की मौत हो गई।
    • हवा में हाइड्रोजन सल्फाइड के उच्च स्तर का पता चला है और अधिकारियों को संदेह है कि यह रिसाव एक सीवर से हुआ है।
  • NGT ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर मामले का स्वत: संज्ञान लिया।
  • NGT अधिनियम की धारा 15 के अनुसार, घटना के कारण का पता लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय करने सहित आवश्यक उपचारात्मक कार्रवाई करना, और पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा देना आवश्यक है।
  1. भारत ने मालदीव को 2 नौसैनिक जहाज सौंपे:
  • भारतीय रक्षा मंत्री ने हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की क्षमता निर्माण सहायता के एक भाग के रूप में मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल (MNDF) को एक तीव्र गस्ती पोत (FPV) और एक लैंडिंग क्राफ्ट आक्रमण जहाज सौंपा।
  • इस बीच, भारतीय वायु सेना (IAF) के प्रमुख एयर चीफ मार्शल ने कटुनायके एयर बेस में श्रीलंका वायु सेना के कमांडर को AN -32 परिवहन विमान प्रोपेलर भी दान किए।
  • हाल के दिनों में, भारत ने IOR में हिंद महासागर के तटीय राज्यों और देशों के लिए क्षमता निर्माण और क्षमता वृद्धि के उद्देश्य से अपने सहायता कार्यक्रमों या पहलों को तेज किया है।
  • केंद्रीय रक्षा मंत्री ने IOR द्वारा सामना की जा रही जलवायु परिवर्तन और समुद्री संसाधनों के बढ़ते दोहन जैसी आम चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों का आह्वान किया।
  1. विनिर्माण क्षेत्र में कर्नाटक को सबसे ‘नवोन्मेषी’ राज्य का स्थान मिला:
  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय विनिर्माण नवाचार सर्वेक्षण (NMIS) 2021-22 ने कर्नाटक को सबसे “नवोन्मेषी” राज्य के रूप में स्थान दिया है।
    • कर्नाटक के बाद दादरा एवं नगर हवेली, दमन एवं दीव, तेलंगाना और तमिलनाडु का स्थान है।
  • सर्वेक्षण में विनिर्माण फर्मों के नवाचार प्रदर्शन और भारत में विनिर्माण फर्मों के बीच नवाचार के परिमाण का मूल्यांकन किया गया।
  • सर्वेक्षण के अनुसार, नवोन्मेषी फर्मों का उच्चतम हिस्सेदारी तेलंगाना (46.18%), कर्नाटक (39.1%), और तमिलनाडु (31.9%) में थी, जबकि ओडिशा (12.78%), बिहार (13.47%) और झारखंड (13.71%) ऐसी फर्मों की हिस्सेदारी सबसे कम थी।
  • सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि “नवाचार के लिए बाधाओं” में आंतरिक धन की कमी, उच्च नवाचार लागत और बाहरी स्रोतों से वित्तपोषण की कमी शामिल हैं।
    • गुजरात तथा दादरा एवं नगर हवेली, दमन एवं दीव ने नवाचार में बाधाओं की उच्चतम आवृत्तियों पाई गई।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. “मिशन कर्मयोगी” के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कितने सत्य है/हैं? (स्तर – सरल)

  1. यह भारत की यौगिक विरासत का स्मरणोत्सव मनाने की योजना है।
  2. यह देश के सरकारी कर्मचारियों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  3. iGOT कर्मशाला इस योजना के तहत की गई एक पहल है।

विकल्प:

  1. केवल एक कथन
  2. केवल दो कथन
  3. सभी तीनों कथन
  4. कोई भी कथन नहीं

उत्तर: b

व्याख्या:

  • कथन 1 गलत है: भारत सरकार ने सितंबर 2020 में मिशन कर्मयोगी लॉन्च किया, जो सिविल सेवा क्षमता निर्माण के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है।
    • मिशन कर्मयोगी एक ऐसी योजना है जो सिविल सेवक को आचरण और व्यवहार के उच्च स्तर को बनाए रखने के लिए प्रेरित करती है।
  • कथन 2 सही है: मिशन का उद्देश्य व्यक्तिगत, संस्थागत और प्रक्रिया स्तरों पर सिविल सेवा क्षमता निर्माण के लिए एक नई राष्ट्रीय संरचना स्थापित करना है।
  • कथन 3 सही है: iGOT कर्मशाला मिशन के एक भाग के रूप में आयोजित एक परामर्शी कार्यशाला है।

प्रश्न 2. सही कथन/कथनों की पहचान कीजिए: (स्तर – कठिन)

  1. पेटेंट नवीन आविष्कारों और खोजों के लिए प्रदान किए जाते हैं।
  2. भारतीय पेटेंट अधिनियम,2005 20 वर्षों के लिए सुरक्षा प्रदान करता है।

विकल्प:

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2

उत्तर: b

व्याख्या:

  • कथन 1 गलत है: पेटेंट एक आविष्कार के लिए दिया गया एक विशेष अधिकार है जिसमें एक उत्पाद या एक प्रक्रिया शामिल होती है जो आम तौर पर कुछ करने का एक नया तरीका प्रदान करती है, या एक समस्या का एक नया तकनीकी समाधान प्रदान करती है।
    • खोजें हालांकि पेटेंट योग्य नहीं हैं और पेटेंट संरक्षण से बाहर हैं।
  • कथन 2 सही है: भारतीय पेटेंट अधिनियम 2005 के अनुसार उत्पाद पेटेंट के लिए सुरक्षा की अवधि 20 वर्ष है।

प्रश्न 3. निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर – सरल)

  1. माल्थसियन जनसंख्या सिद्धांत कहता है कि जनसंख्या गुणोत्तर अनुक्रम से बढ़ती है जबकि संसाधन सामानांतर अनुक्रम से बढ़ते हैं।
  2. कुल प्रजनन दर का तात्पर्य है कि एक महिला अपने जीवनकाल में कुल कितने बच्चों को जन्म देगी।
  3. प्रतिस्थापन टीएफआर 2.1 है।

विकल्प:

  1. 1 और 2
  2. 2 और 3
  3. 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: c

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: माल्थस ने कहा कि जनसंख्या एक गुणोत्तर अनुक्रम यानी 2, 4, 16, 132 में बढ़ती है, जबकि खाद्य उत्पादन जैसे संसाधनों में सामानांतर अनुक्रम यानी 2, 4, 6, 8 में वृद्धि होती है।
    • इस प्रकार माल्थसियन जनसंख्या सिद्धांत के अनुसार, जनसंख्या खाद्य उत्पादन की तुलना में तेजी से बढ़ती है और थोड़े समय में इसे पार कर जाती है।
  • कथन 2 गलत है: कुल प्रजनन दर बच्चों की वह औसत संख्या है जितनी एक महिला अपने जीवनकाल में जन्म देती है।
    • इसे प्रति महिला बच्चों के संदर्भ में मापा जाता है।
  • कथन 3 सही है: संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या प्रभाग के अनुसार, प्रति महिला लगभग 2.1 बच्चों की कुल प्रजनन दर को प्रतिस्थापन-स्तर की प्रजनन क्षमता कहा जाता है।
    • प्रतिस्थापन स्तर प्रजनन, प्रजनन का वह स्तर है जिस पर एक जनसंख्या वास्तव में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में अपने आपको परिवर्तित कर लेती है।

प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सत्य है/हैं? (स्तर – कठिन)

  1. जल शक्ति मंत्रालय शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्वच्छ सर्वेक्षण करता है।
  2. यदि दिन के किसी भी समय, किसी क्षेत्र में एक भी व्यक्ति सार्वजनिक रूप से शौच नहीं करता हुआ, और अनुपचारित मल को जल निकायों में डालता हुआ नहीं पाया जाता है तो उस क्षेत्र को ओडीएफ रेटिंग दी जा सकती है।
  3. ओडीएफ + रेटिंग के लिए दिन के किसी भी समय खुले में शौच करने वाले लोगों की शून्य संख्या के अलावा, यह आवश्यक है कि उस क्षेत्र में सभी सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय ठीक से काम कर रहे हों।

विकल्प:

  1. केवल 1
  2. 1, 2 और 3
  3. केवल 3
  4. केवल 2 और 3

उत्तर: c

व्याख्या:

  • कथन 1 गलत है:केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ सर्वेक्षण करता है।
    • जल शक्ति मंत्रालय / पेयजल और स्‍वच्‍छता विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ सर्वेक्षण करता है।
  • कथन 2 गलत है: एक शहर/वार्ड को ओडीएफ शहर/ओडीएफ वार्ड के रूप में अधिसूचित/घोषित किया जा सकता है, यदि दिन के किसी भी समय, एक भी व्यक्ति खुले में शौच करता हुआ नहीं पाया जाता है।
  • कथन 3 सही है: एक शहर / वार्ड को ओडीएफ + शहर / वार्ड के रूप में अधिसूचित / घोषित किया जा सकता है, यदि दिन के किसी भी समय, एक भी व्यक्ति खुले में शौच और / या पेशाब करता हुआ नहीं पाया जाता है और सभी सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय कार्यात्मक होते हैं और उनका रखरखाव अच्छी तरह से किया जाता है।

प्रश्न 5. कृषि उत्पादन में काष्ठ के हलों के स्थान पर इस्पात के हलों का उपयोग निम्नलिखित में से किसका उदाहरण है? PYQ 2015 (स्तर – मध्यम)

  1. श्रम बढ़ाने वाली प्रौद्योगिकीय (टेक्नोलॉजिकल) प्रगति
  2. पूँजी बढ़ाने वाली प्रौद्योगिकीय प्रगति
  3. पूँजी घटाने वाली प्रौद्योगिकीय प्रगति
  4. उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर: b

व्याख्या:

  • कृषि उत्पादन में लकड़ी के हलों के स्थान पर इस्पात के हलों का उपयोग पूँजी बढ़ाने वाली प्रौद्योगिकीय प्रगति का एक उदाहरण है।
  • पूँजी बढ़ाने वाली प्रौद्योगिकीय प्रगति मौजूदा पूंजीगत वस्तुओं के अधिक उत्पादक उपयोग को सुनिश्चित करती है।
  • लकड़ी के हलों को इस्पात के हलों से प्रतिस्थपित करने से उत्पादकता में वृद्धि होती है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. गिग और प्लेटफॉर्म कामगार नियमित कामगारों को मिलने वाले लाभों और सामाजिक सुरक्षा लाभों से वंचित हैं। चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) [जीएस-3, अर्थव्यवस्था]

प्रश्न 2. वि-डॉलरीकरण से आप क्या समझते हैं? इतने लंबे समय तक अमेरिकी डॉलर पसंदीदा वैश्विक आरक्षित मुद्रा क्यों बना रहा है? क्या किसी अन्य मुद्रा में अमेरिकी डॉलर को प्रतिस्थापित करने की क्षमता है? (15 अंक, 250 शब्द) [जीएस-3, अर्थव्यवस्था]