05 सितंबर 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

सामाजिक न्याय:

  1. रूपांतरण चिकित्सा (Conversion Therapy):

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

  1. 5जी आर्किटेक्चर:

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

भारतीय राजव्यवस्था:

  1. न्याय मिला लेकिन अधूरा:

अंतरराष्ट्रीय संबंध:

  1. भारत और ऑस्ट्रेलिया, विचलन से अभिसरण तक:
  2. भारत-बांग्लादेश संबंधों का बहुत कुछ दांव पर:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. ज्वलनशील वायुगतिकीय डिसेलेरेटर (Inflatable Aerodynamic Decelerator):

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. नेहरू ट्रॉफी:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

5जी आर्किटेक्चर:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

विषय: प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास

मुख्य परीक्षा: 5G परिनियोजन हेतु रोडमैप

संदर्भ:

  • हाल ही में सरकार द्वारा रिकॉर्ड 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की 5G दूरसंचार स्पेक्ट्रम ड्राइंग की नीलामी की गई है।
    • (ड्राइंग-रेखाचित्र या ‘आरेखण’ (ड्राइंग) एक दृश्य कला है जिसमें द्वि-आयामी साधन को चिह्नित करने के लिए किसी भी तरह के रेखाचित्र उपकरणों का उपयोग किया जाता है।)

दूरसंचार प्रौद्योगिकी का विकास:

  • पहली पीढ़ी अर्थात 1जी का संचार नेटवर्क, एक कम बैंडविड्थ वाला एनालॉगर संचार नेटवर्क हैं,जिसके माधयम से आवाज और लिखित संदेशों का आदान प्रदान किया जाता है।
  • दूसरी पीढ़ी की इस तकनीक में मुख्य रूप से केबीपीएस रेंज में गति के साथ आवाज और एसएमएस (SMS) भेजने की तकनीकी को समाहित किया गया था।
    • अर्थात 2जी के संचार नेटवर्क भी कम बैंडविड्थ के संचार नेटवर्क हैं,लेकिन इसकी विशेषता यह है कि यह डिजीटल प्रौद्योगिकी पर आधारित हैं इसलिए इस पद्धति से भेजे गए संदेशों का आदान प्रदान तेज गति से होता है।
    • 2जी नेटवर्क मुख्यतः ध्वनि सेवाओं और धीमे डाटा ट्रांस्मिशन के लिए बनाया गया था।
  • 3जी तकनीकी आवाज से डेटा ट्रांसमिशन में बदलाव की गवाह रही और साथ ही इसमें 2Mbps की रेंज में गति/स्पीड के साथ मल्टीमीडिया मैसेजिंग (MMS) जोड़ा गया।
    • 3जी नेटवर्क एक अधिक वैंडविड्थ वाला नेटवर्क है इसलिए इसके माधयम से भेजे जाने वाली आवाज और लिखित संदेशों की गुणवत्ता में सुधार आया।
    • इस तकनीक के माध्यम से ध्वनि भेजने के लिए सर्किट स्विचिंग का प्रयोग वहीं लिखित संदेश एवं डाटा भेजने के लिए पैकेट स्विचिंग का प्रयोग किया जाता है।
  • 4G की तकनीक उपयोगकर्ताओं को 3G से तीन गुना अधिक गति से लगभग 20Mbps से लेकर 50Mbps तक की वीडियो स्ट्रीम और डाउनलोड करने की सुविधा प्रदान करती है।

लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन’ (Long Term Evolution (LTE)):

  • एलटीई (LTE) मानक-आधारित पीढ़ी अपनी पूर्ववती पीढ़ी से से दो पहलू में विशिष्ट थी।
  • 4जी-तकनीकी धारणीय सेल फोन ने लोगों को टेलीफोन नेटवर्क के बजाय इंटरनेट पर कॉल करने में सक्षम बनाया।
  • 4जी+ (एलटीई एडवांस्ड) ने 200 से 300 एमबीपीएस (Mbps) की डाउनलोड स्पीड मुहैया कराई।
  • 4G की बहुसंकेतन क्षमता (multiplexing capability) को तकनीकी रूप से ऑर्थोगोनल फ़्रीक्वेंसी डिवीजन मल्टीप्लेक्स (orthogonal frequency division multiplex (OFDM)) के रूप में जाना जाता है, जो कई उपयोगकर्ताओं को एक सामान्य चैनल साझा करने की अनुमति देते हुए उच्च डेटा अंतरण दर प्राप्त कर दक्षता का एक बेहतर स्तर प्रदान करता है।
  • इससे लोग सोशल मीडिया का उपयोग कर सकते हैं, ऐप में संगीत डाउनलोड कर सकते हैं और मोबाइल उपकरणों पर वीडियो लाइव स्ट्रीम देख सकते हैं।
  • वर्ष 2010 में 4G की शुरुआत के बाद से, दुनिया में स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की संख्या 2022 में 6.6 बिलियन हो गई है।
  • ज्ञातव्य है कि धारणीय योग्य और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) उपकरणों के साथ अरबों स्मार्टफोन और टैबलेट के लिए कई अन्य एप्लिकेशन्स के साथ सिंक (SYNC-स्वत नवीनतम अपडेट की सुविधा) में काम करने के लिए,एक बेहतर नेटवर्किंग और कनेक्टिविटी की जरूरत होती है और यह एलटीई-आधारित पीढ़ी इस परिमाण के कार्यभार और रीयल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है।

5G का परिनियोजन करना:

  • 5G कम विलंबता, अधिक डाउनलोड गति के साथ-साथ कई उपकरणों को जोड़ने और रीयल-टाइम में डेटा का आदान-प्रदान करने की क्षमता प्रदान करता है।
  • 5G का एक प्रमुख पहलू इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Internet of Things) की ओर संभावित बदलाव होगा।
  • यह स्मार्ट सिस्टम के क्रमागत विकास की तकनीक की और ले जा सकता है जैसे घर पर बिजली के मीटरों की सेंसर-आधारित रीडिंग और बिजली बिलों को बनाना और किसान द्वारा घर से ही सेंसर या ड्रोन के माध्यम से अपनी फसलों की निगरानी करना।
  • इसमें 5G न्यू रेडियो (NR) नामक एक नया मानक निहित है, जो LTE की सर्वोत्तम क्षमताओं का उपयोग करता है।
    • 5G न्यू रेडियो (NR) कनेक्टेड डिवाइसों के लिए ऊर्जा की बचत और कनेक्टिविटी को बढ़ाने में सक्षम होगा।
  • 5G मोबाइल में संचार उच्च-आवृत्ति मिलीमीटर तरंग (mmWave) बैंड का उपयोग किया जायगा जो 4G के LTE के 06 GHz की तुलना में 30 GHz और 300 GHz के बीच तरंग दैर्ध्य पर काम करेगा।
  • 5G वर्ष 2010 के आसपास तक आ जाता,लेकिन मुख्य रूप से कम 5G-संगत उपकरणों और स्पेक्ट्रम की नीलामी में देरी के कारण इसे सार्वभौमिक रूप से शुरू नहीं किया जा सका था।

गैर-स्टैंडअलोन बनाम स्टैंडअलोन आर्किटेक्चर:

  • बाजार में अधिकांश 4G अनुकूल उपकरणों के माध्यम से 5G सेवाओं को शुरू करने के इच्छुक दूरसंचार ऑपरेटर और व्यवसाय या तो एक गैर-स्टैंडअलोन (NSA) या एक स्टैंडअलोन आर्किटेक्चर का निर्माण कर सकते हैं।
  • एक एनएसए (NSA) आर्किटेक्चर में, टेलीकॉम ऑपरेटर एक नया रेडियो एक्सेस नेटवर्क (RAN) शुरू करते समय 5 जी सेवाओं को शुरू करने के लिए अपनी मौजूदा स्थापित क्षमताओं और एलटीई आर्किटेक्चर का उपयोग कर सकता है।
  • यह ऑपरेटरों को पूंजीगत व्यय को कम करने और लघु-से-मध्यम अवधि के लिए परिचालन लागत को कम करने में मदद कर सकता है।
  • जर्मनी ने 2019 में 5G सेवाओं को शुरू करने के लिए NSA मॉडल का इस्तेमाल किया था।
  • स्टैंडअलोन मॉडल एक शुद्ध प्ले 5G आर्किटेक्चर है,जो ऑपरेटरों को पांचवीं पीढ़ी की क्षमता की पूरी श्रृंखला प्रदान करता है और उन्हें नेटवर्क को विस्तृत/पृथक्करण करने की अनुमति देता है।
  • इस आर्किटेक्चर में,आरएएन (RAN) और कोर पूरी तरह से नए हैं, और इनका 3GPP अनुशंसाओं के अनुरूप विभिन्न नेटवर्क के कार्यों का स्पष्ट पृथक्करण होगा।
  • यह उनके नेटवर्क संचालन को सरल करेगा और उपयोगकर्ता अनुभव में सुधार करेगा।
  • ऑपरेटर विशिष्ट उपयोगकर्ताओं और उपयोग के मामलों के लिए समर्पित खंड बनाकर नेटवर्क पृथक्करण/स्लाइसिंग के अवसरों का लाभ उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

Image Source: The Hindu

सारांश:

  • स्टैंडअलोन आर्किटेक्चर में 5G का परिनियोजन ऑपरेटरों के लिए एक राजस्व प्रवाह बनाने का अवसर है। 5G संभावित रूप से उपभोक्ताओं को नए तरीके से कनेक्ट और सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकता है। भारत सरकार को 5G के समय पर और प्रभावी तरीके से रोलआउट/लांच/लागू करने के लिए बुनियादी ढांचे की बाधाओं को दूर करने पर काम करना चाहिए।
  • 5जी पर अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: 5G

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

रूपांतरण चिकित्सा (Conversion Therapy):

सामाजिक न्याय:

विषय: कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं

मुख्य परीक्षा: LGBTQ+ समुदाय से संबंधित मुद्दे।

संदर्भ:

  • हाल ही में, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission (NMC)) ने रूपांतरण चिकित्सा को “पेशेवर कदाचार” घोषित किया हैं।

परिचय:

  • राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission (NMC)) ने ‘रूपांतरण चिकित्सा’ को ‘पेशेवर कदाचार’ घोषित किया हैं,और इसके दिशानिर्देश का उल्लंघन होने पर राज्य चिकित्सा परिषदों को अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार दिया हैं।
  • यह दिशानिर्देश भारतीय चिकित्सा परिषद (व्यावसायिक आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 के तहत एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप जारी किये गए है, जिसमें रूपांतरण चिकित्सा को गलत बताया गया है।
  • चिकित्सा के संबंध में लंबित कानून के चलते मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश ने अपने जून 2021 के फैसले में पुलिस के लिए दिशानिर्देश जारी किए,जिसमे इस समुदाय की सुरक्षा के लिए हर कुछ महीनों में राज्य और केंद्र के सामाजिक कल्याण मंत्रालय,चिकित्सा परिषद और हितधारकों से अपडेट मांगा हैं।

‘रूपांतरण चिकित्सा’ क्या है:

  • समलैंगिक (पुरुष), समलैंगिक (महिला), उभयलिंगी, ट्रांसजेंडर, क्वीर (विचित्र), इंटरसेक्स, अलैंगिक या किसी अन्य अभिविन्यास के सदस्यों को खासकर जब वे युवा होते हैं तो अक्सर बल द्वारा उनके यौन अभिविन्यास या लिंग पहचान को बदलने के लिए उनकी रूपांतरण या ‘रिपेरेटिव’ थेरेपी की जाती है।
  • समलैंगिकता को मानसिक बीमारी मानकर ऐसा किया जाता है,भले ही इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद न हो।
  • वर्ष 2018 में निर्धारित की गई मेडिकल पाठ्यपुस्तकों में समलैंगिकता को अभी भी एक “विकृति माना जाता जो “मानसिक पतन” जैसा एक कार्य है।
  • इस थेरेपी का मतलब मनोरोग उपचार, मनोदैहिक दवाओं का उपयोग, इलेक्ट्रोशॉक थेरेपी, भूत भगाने और हिंसा जैसा कुछ भी हो सकता है।
  • इससे आघात लग सकता है, जो अक्सर अवसाद, चिंता, नशीली दवाओं के उपयोग और यहां तक कि आत्महत्या के रूप में व्यक्ति में प्रकट हो सकता है।

भावी कदम:

  • जर्मनी, कनाडा, माल्टा, ऑस्ट्रेलिया और यू.एस. सहित कई देशों में इस प्रथा के खिलाफ कानून पहले ही पारित किए जा चुके हैं।
  • इस कार्य को गैरकानूनी घोषित करने और दवा के जबरन सेवन और चिकित्सा के शारीरिक और मानसिक दुरुपयोग को कानूनी रूप से रोकने के लिए एक अलग विधायी कार्रवाई की आवश्यकता है।
  • इस सम्बन्ध में प्रशासन को मद्रास उच्च न्यायालय के सुझावों को लागू करना चाहिए।
  • LGBTQ+ समुदाय के बारे में पूर्वाग्रहों को समाप्त करने के लिए इसके बारे में ज्ञान और जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से स्कूलों और कॉलेजों में बुनियादी शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
  • LGBTQ+ समुदाय की जरूरतों को पूरा करने और “मनुष्य की परिवर्तनशीलता” को स्वीकार करने और सभी को सम्मान देने के लिए कानूनों के माध्यम से पूरक सामाजिक स्तर पर परिवर्तन की आवश्यकता है।

सारांश:

  • समलैंगिकता को अपराध से मुक्त करने ( decriminalisation of homosexuality) के बाद भी भारत में रूपांतरण चिकित्सा की अपमानजनक प्रथा अभी भी प्रचलित है। इसी सन्दर्भ में मद्रास उच्च न्यायालय के हालिया निर्देशों और एनएमसी के नोटिस को समावेशिता की दिशा में प्रगतिशील कदम और LGBTQAI+ समुदाय को सुरक्षित महसूस कराने के रूप में देखा जा सकता है।

संपादकीय-द हिन्दू

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 से संबंधित:

भारतीय राजव्यवस्था:

न्याय मिला लेकिन अधूरा:

विषय: भारत का संविधान – विशेषताएं और महत्वपूर्ण प्रावधान

मुख्य परीक्षा: जमानत से संबंधित प्रावधान।

संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को अंतरिम जमानत दी।

मामले का विवरण:

  • भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को अंतरिम जमानत दे दी।
  • अदालत ने इस बात पर विचार नहीं किया कि अपीलकर्ता को नियमित जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए या नहीं क्योंकि उस मामले का फैसला ह्यूग कोर्ट द्वारा किया जाना चाहिए।
  • पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान आदेश का मूल्याँकन गुणदोष के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए और अन्य आरोपियों द्वारा मामले की आगे की सुनवाई में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
  • सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायलय (SC) के न्यायाधीशों ने चार चिंताओं पर प्रकाश डाला। वे हैं:
    • पहली चिंता कार्यकर्ता की गिरफ्तारी के दो महीने बाद भी चार्जशीट दाखिल करने में चूक।
    • दूसरी चिंता सर्वोच्च न्यायलय के फैसले के अगले ही दिन प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) पंजीकरण के संबंध में थी,जिसमेंउन आरोपियों को दोषमुक्त करने और गुजरात 2002 के दंगों से जुड़े याचिका को खारिज कर दिया था।
    • तीसरा मुद्दा यह था कि हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका के बाद भी याचिका को लंबे समयतक स्थगित कर दिया गया
    • अंत में ,कोई भी ऐसा अपराध जो कि बहुत गंभीर था, साथ ही उसकी जमानत याचिका को खारिज करने के लिए लगाए गए आरोप भी अनुचित थे।
  • न्यायालय की चिंताएं न केवल सुश्री सीतलवाड़ के मामले के सम्बन्ध में हैं, बल्कि यह उससे भी बहुत आगे तक है। सर्वोच्च न्यायलय की बेंच द्वारा उठाए गए सवाल कुछ हद तक राज्य की कार्रवाई में द्वेष को उजागर करते हैं।
  • हालांकि, सर्वोच्च न्यायलय द्वारा की गई चिंताओं के बाद भी, अंतिम आदेश में स्पष्ट न्यायिक समाधान के लिए दृढ़ताऔर उत्साह की कमी है।

सर्वोच्च न्यायलय के फैसले से जुड़ी चिंता:

  • सर्वोच्च न्यायलय का आदेश कुछ हद तक निराशाजनक था क्योंकि सर्वोच्च न्यायलय को संविधान का संरक्षक होने के नाते खुद से पूछे गए सवालों का जवाब देना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट को आरोपी को नियमित जमानत देनी चाहिए थी ताकि इसी तरह के अन्य मामलों के लिए यह एक उपयोगी मिसाल बनती ।
  • उच्च न्यायालयों द्वारा नियमित जमानत आवेदनों को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करना एक और मुद्दा है जिसे SC द्वारा गंभीरता से सुलझाना चाहिए था। यह स्पष्ट रूप से दोहराया जाना चाहिए था कि इस तरह की अनिश्चितकालीन देरी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 136 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में अपील की मांग करती है।
  • छूटा हुआ अवसर जिसे सर्वोच्च न्यायालय को गंभीरता से लेना चाहिए था:
    • जमानत याचिका पर निर्णय लेने में अनिश्चितकालीन देरी प्रमुख चिंता हैं जो भारतीय न्यायपालिका की दक्षता और प्रभावशीलता को और प्रभावित करती हैं। फादर स्टेन स्वामी की हिरासत में मौत और सिद्दीकी कप्पन, गौतम नवलखा और उमर खालिद के मामलों में बार-बार जमानत देने से इनकार किया गया है और न्यायपालिका में मुकदमा चल रहा है।
    • सॉलिसिटर जनरल द्वारा किया गया यह तर्क कि कार्यकर्ता को उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए था, मौलिक अधिकारों के गंभीर उल्लंघन के आधार पर SC द्वारा खारिज कर दिया जाना चाहिए था।
    • सुप्रीम कोर्ट को उस पीठ के गलत और अन्यायपूर्ण क्षेत्राधिकार का आत्मनिरीक्षण करना चाहिए था जिसने कार्यकर्ता पर गुजरात दंगों को उछालने और मामले से जुड़े अधिकारियों की अखंडता पर सवाल उठाने का आरोप लगाया था। इस फैसले ने कार्यकर्ता की नियमित जमानत पर रिहाई को मुश्किल बना दिया है।

जमानत से जुड़े मामले:

  • गुडिकंती नरसिम्हुलु केस 1977 में कहा गया था कि – “जमानत या जेल’ का मुद्दा – पूर्व-परीक्षण या सजा के बाद के चरण में हालांकि काफी हद तक न्यायिक विवेक पर निर्भर करता है, यह न्याय, स्वतंत्रता, सार्वजनिक खजाने और सार्वजनिक सुरक्षा का बोझ है। यह सब इस बात पर जोर देता है कि जमानत का विकसित न्यायशास्त्र सामाजिक रूप से संवेदनशील न्यायिक प्रक्रिया का अभिन्न अंग है।”
  • 1994 में जोगिंदर कुमार बनाम स्टेट ऑफ यू.पी.मामले में उपरोक्त फैसले को दोहराया गया और अदालत ने गिरफ्तारी के लिए प्रक्रियात्मक अनिवार्यता का आदेश दिया।
  • 2011 के संजय चंद्रा बनाम CBI मामले में, कोर्ट ने कहा कि जमानत का उद्देश्य न तो दंडात्मक है और न ही निवारक और इसमें अभियुक्त की उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य और अन्य (2014) के मामले में निर्णय विधि आयोग की रिपोर्ट और आपराधिक प्रक्रिया संहिता के आधार पर था। इसमें मनमाने ढंग से नजरबंदी और गिरफ्तारी के खिलाफ भी चेतावनी दी गई थी ।
  • इसके अलावा हाल ही में सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम CBI मामले (2022) में, उच्चतम न्यायालय ने देखा कि लोकतंत्र और पुलिस राज्य के विचार एक दूसरे के विपरीत हैं और इसलिए न्यायालय ने भारत में एक जमानत अधिनियम बनाने के लिए आग्रह किया

जमानत के बारे में अधिक जानकारी के लिए, इस लिंक पर क्लिक करे: भारत में जमानत – https://byjus.com/free-ias-prep/bail-upsc-notes/https://byjus.com/free-ias-prep/bail-upsc-notes।

सारांश:

यद्यपि सामाजिक कार्यकर्ताओं को अंतरिम जमानत देकर, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न्याय प्रदान किया गया है,यह अधूरा है। शीर्ष अदालत को मामले को गंभीरता से लेना चाहिए था और देश के जमानत प्रावधानों में पर्याप्त हस्तक्षेप करना चाहिए था।

संबधित लिंक: https://byjus.com/free-ias-prep/indian-judiciary/

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 से संबंधित:

अंतरराष्ट्रीय संबंध:

भारत और ऑस्ट्रेलिया, विचलन से अभिसरण तक

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह जिसमें भारत के हित शामिल हैं

प्रारंभिक परीक्षा: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ट्रैक 1.5 संवाद।

मुख्य परीक्षा: भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध।

संदर्भ: भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई नेताओं ने नई दिल्ली में सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय ट्रैक 1.5 संवाद के पांचवें दौर के लिए मुलाकात की।

विवरण:

  • भारत-प्रशांत क्षेत्र के भविष्य के लिए भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध बहुत महत्वपूर्ण हैं।
  • लगभग बीसवीं शताब्दी तक, ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच शायद ही कोई सार्थक संवाद हुआ हो जिसके कारण थे:
    • शीत युद्ध के दौर की छाया।
    • भारत की निरंकुश आर्थिक नीतियां।
    • व्हाइट ऑस्ट्रेलिया नीति।
    • ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारत को यूरेनियम न देने का निर्णय आदि।
  • भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच समान मूल्य और हित निम्न से स्पष्ट हैं:
    • दोनों देश अंग्रेजी बोलने वाले और बहुसांस्कृतिक हैं
    • उनके पास कानून के शासन वाले संघीय लोकतंत्र हैं
    • भारत और ऑस्ट्रेलिया के रणनीतिक हित हैं और वे हिंद-प्रशांत में संतुलन सुनिश्चित करना चाहते हैं एवं इस क्षेत्र में किसी विशेष शक्ति का आधिपत्य प्रभुत्व नहीं होना चाहिए।
    • इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया में कुशल प्रवासियों का सबसे बड़ा स्रोत भारत है।
    • एक विचार यह भी है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहले से ही मजबूत आर्थिक संबंधों को और मजबूत जा सकता है यदि नया ऑस्ट्रेलिया-भारत आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता (ECTA) सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया जाए।

भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें https://byjus.com/free-ias-prep/india-australia-relations/

भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्ता का महत्व:

  • दोनों देशों के बीच लीडरशिप डायलॉग महत्वपूर्ण है क्योंकि संबंधों में विचार उतना ही मायने रखते हैं जितना कि बातचीत और लेन-देन।
    • संवाद को भागीदारों के रूप में काम करने के लिए सहमत होने वालों के बीच होने वाली बातचीत के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • मजबूत, स्थिर और टिकाऊ संबंध न केवल संभावित लाभ पर आधारित होते हैं बल्कि भविष्य के वादे पर समान रूप से आधारित होते हैं। दूसरे शब्दों में, इस तरह के मंच नए विचारों को प्रसारित करने और संबंधों में नई ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए जगह और माहौल प्रदान कर सकते हैं।
  • यह माना जाता है कि संवाद एक सांझे भौतिक स्थान में व्यक्तिगत और सामूहिक संचार की शक्ति प्रदान करता है। यह अंततः वास्तविक कनेक्शन हैं जो साइबर दुनिया के विपरीत सबसे अधिक मायने रखता हैं।
  • इसके अलावा, यह महामारी के बाद का पहला डायलॉग है। यह 2019 के बाद से आयोजित नहीं किया गया था।

सहयोग के क्षेत्र:

  • सहयोग के क्षेत्र जहां दोनों देशों को साझा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है वे हैं:
    • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर खतरे
    • इंडो-पैसिफिक का भू-राजनीतिक रूप से अशांत क्षेत्र
    • अर्थव्यवस्थाओं को डीकार्बोनाइज करने के उपाय
    • महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग के माध्यम से मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में एक दूसरे की मदद करना
    • मानव संसाधन के क्षेत्र में सहयोग, जहां भारतीय प्रवासी ऑस्ट्रेलिया के कौशल अंतराल को दूर करने में मदद कर सकते हैं।
    • उभरती हुई प्रौद्योगिकी का उपयोग एक अन्य क्षेत्र है।
  • इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया एक वैकल्पिक चीनी बाजार खोजना चाहता है और अपने महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना चाहता है। भारत की महत्वपूर्ण खनिज रणनीति में पहचाने गए कुल 49 खनिजों में से लगभग 21 के भंडार वाले देश के रूप में, ऑस्ट्रेलिया भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। भारत के कार्बन कटौती लक्ष्य के लिए वर्तमान परिदृश्य में यह और भी आवश्यक है।
  • यह क्षेत्रीय सुरक्षा पहलू के लिए भी महत्वपूर्ण होगा।
  • संबंध वाणिज्यिक और व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देंगे। इसमें लोगों से लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने की क्षमता भी है।

सारांश:

जैसा कि भारत पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में यूनाइटेड किंगडम से आगे निकल गया है, भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध भारतीय अर्थव्यवस्था को और गति प्रदान कर सकते हैं। दोनों देशों के नेताओं को संबंधों को मजबूत करने और शांतिपूर्ण और टिकाऊ ग्रह बनाने के लिए और अधिक ठोस कदमों की सिफारिश करनी चाहिए।

संबधित लिंक: https://byjus.com/free-ias-prep/upsc-exam-comprehensive-news-analysis-apr03-2022/

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 से संबंधित:

अंतरराष्ट्रीय संबंध:

भारत-बांग्लादेश संबंधों का बहुत कुछ दांव पर:

विषय: भारत और पड़ोसी-संबंध।

मुख्य परीक्षा: भारत-बांग्लादेश संबंध।

संदर्भ: बांग्लादेश के प्रधान मंत्री की भारत यात्रा।

भारत-बांग्लादेश संबंधों का विवरण:

  • 2020-21 में लगभग दस बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार मूल्य के साथ बांग्लादेश भारत का छठा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। बांग्लादेश भारत से महत्वपूर्ण औद्योगिक कच्चे माल का आयात करता है।
  • दोनों पड़ोसी देशों ने साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप, कनेक्टिविटी और फिनटेक जैसे क्षेत्रों सहित अपनी साझेदारी का विस्तार किया। यह भारत-बांग्लादेश संयुक्त सलाहकार आयोग के सातवें दौर का परिणाम था जो जून 2022 में संपन्न हुआ था।
  • बांग्लादेश के प्रधान मंत्री की भारत यात्रा के दौरान व्यापार चर्चा का प्रमुख क्षेत्र होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि दोनों देश एक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर करने वाले हैं।
    • CEPA उस समय आता है जब बांग्लादेश भारत में कोटा-मुक्त और शुल्क-मुक्त बाजार-पहुंच सुविधाओं जैसे विभिन्न लाभों को खोने वाला है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 2026 के बाद बांग्लादेश एक विकासशील देश बन जाएगा।
    • विश्व बैंक के अनुसार, मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के दायरे में बांग्लादेश का निर्यात लगभग 182% तक बढ़ सकता है।
    • यह कम लेनदेन लागत और व्यापार सुविधा उपायों के प्रावधान के साथ 300% तक भी पहुंच सकता है।
    • बांग्लादेश भी भारतीय विशेषज्ञता की मदद से अपने विनिर्माण उद्योगों में सुधार कर सकता है
  • भारत और बांग्लादेश के नेता निकट भविष्य में एक संयुक्त उद्यम बिजली संयंत्र का भी उद्घाटन करेंगे।
  • वर्तमान में, अंतरराष्ट्रीय बस सेवाएं और तीन एक्सप्रेस ट्रेनें दोनों देशों के बीच संचालित होती हैं।
  • भारत और बांग्लादेश को भी एक प्रमुख नदी पर सहयोग करने की उम्मीद है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लीक करे: https://byjus.com/free-ias-prep/india-bangladesh-relations/

भारत-बांग्लादेश संबंधों का महत्व:

  • दोनों देशों ने पूर्वी भारत और बांग्लादेश के बीच संपर्क को बढ़ावा देने के लिए अतीत में कई परियोजनाओं को शुरूकिया है। यह भारत के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में और मदद करेगा।
  • भारत यह भी उम्मीद कर रहा है कि बांग्लादेश को सिंगापुर या मलेशियाई समकक्षों के स्थान पर भारतीय बंदरगाहों का उपयोग करके अपने निर्यात को मोड़ना चाहिए।

चिंता के कारण:

  • तीस्ता नदी बंटवारा 1947 से दोनों देशों के बीच एक विवादास्पद मुद्दा बना हुआ है। जैसा कि भारत के मामले में है, तीस्ता पश्चिम बंगाल राज्य के लिए महत्वपूर्ण है, जहां आबादी का लगभग 12.77% हिस्सा खेती पर निर्भर है। तीस्ता के बाढ़ के मैदान बांग्लादेश के लिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह देश के कुल फसली क्षेत्र का लगभग 14% है और लगभग 7.3% आबादी को प्रत्यक्ष आजीविका प्रदान करता है।
  • बांग्लादेश में चीन की बढ़ती प्रमुखता भारत के लिए चिंता का एक प्रमुख कारण है। बांग्लादेश ने तीस्ता नदी के जल प्रवाह को बढ़ाने के लिए एक बड़ी परियोजना के लिए चीन से संपर्क किया था। चीन भी रोहिंग्या शरणार्थी संकट को सुलझाने में बांग्लादेश का समर्थन कर रहा है। इसके अलावा, बांग्लादेश चीन के लिए (पाकिस्तान के बाद) दूसरा सबसे बड़ा हथियार बाजार है।
  • दशकों से चले आ रहे ठंडे रिश्तों के बाद बांग्लादेश भी पाकिस्तान के साथ मधुरता लाने की कोशिश कर रहा है.
  • NRC और नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर भी चिंता थी।
  • सीमा क्षेत्र में हत्याएं भी एक गंभीर मुद्दा है जो अक्सर दोनों देशों के बीच संबंधों को खराब करता है।
  • बांग्लादेश में यह भी माना जाता है कि भारत एक विशेष राजनीतिक विचारधारा से जुड़ा हुआ है।

सारांश:

भले ही भारत बांग्लादेश के साथ सद्भावना बनाए रखता है, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि दोनों देशों के बीच की चिंताओं को तत्काल आधार पर संबोधित किया जाए। बांग्लादेश की आबादी सम्मान और निष्पक्षता के साथ व्यवहार करने के लिए समान रूप से संवेदनशील है।

संबधित लिंक: https://byjus.com/free-ias-prep/indo-bangladesh-connectivity-economic-partnership-rstv-big-picture/

प्रीलिम्स तथ्य:

1. ज्वलनशील वायुगतिकीय डिसेलेरेटर (Inflatable Aerodynamic Decelerator):

विषय: प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास

प्रारंभिक परीक्षा: इसरो के मिशन।

संदर्भ:

  • हाल ही में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने इन्फ्लेटेबल एरोडायनामिक डिसेलेरेटर (IAD) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है।

विवरण:

  • आईएडी एक ऐसी तकनीक है,जो रॉकेट चरणों में खर्च हुई लागत प्रभावी वसूली/रिकवरी और अन्य ग्रहों पर सुरक्षित रूप से लैंड पेलोड में सहायता प्रदान कर सकता है।
  • यह वायुगतिकीय खिंचाव/ड्रैग के माध्यम से पेलोड के वेग को व्यवस्थित रूप से कम करके वायुमंडल के माध्यम से नीचे गिरने वाली वस्तु की गति को धीमा करने का कार्य करता है।
  • एक बार जब आईएडी समुद्र में गिर जाता हैं तो यह एक अपस्फीति पायरो वाल्व फायर करके संकुचित हो जाता हैं।
  • इसका थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन (Thumba Equatorial Rocket Launching Station (TERLS) से रोहिणी-300 (RH300 Mk II) परिज्ञापी रॉकेट के द्वारा सफलतापूर्वक उड़ान-परीक्षण किया गया, जिसे इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया हैं।
  • इसरो शुक्र और मंगल के अपने मिशन सहित भविष्य के कई मिशनों में इसका इस्तेमाल करेगा।
  • रोहिणी परिज्ञापी राकेटों का उपयोग इसरो द्वारा विकसित की जा रही नई प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ भारत और विदेशों के वैज्ञानिकों द्वारा उड़ान प्रदर्शन के लिए नियमित रूप से किया जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

1. नेहरू ट्रॉफी:

  • नेहरू ट्रॉफी बोट रेस केरल के अलाप्पुझा के पास पुन्नमदा झील में आयोजित एक लोकप्रिय वल्लम काली है।
  • वल्लम काली या वल्लमकली का शाब्दिक अर्थ है नाव का खेल/दौड़, लेकिन अंग्रेजी में इसे साँप नौका दौड़ (the Snake Boat Race) कहा जा सकता है।
  • दौड़ में सबसे लोकप्रिय चुंदनवल्लम (सांप नौका) की प्रतियोगिता है। इसलिए इस दौड़ को अंग्रेजी में स्नेक बोट रेस के नाम से भी जाना जाता है।
  • इस नाव दौड़ का उद्घाटन 1952 में प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था। विजेता को जवाहरलाल नेहरू के नाम पर एक ट्रॉफी से सम्मानित किया जाता हैं।
  • वर्ष 2019 में, इसे नवगठित सीबीएल – चैंपियंस बोट लीग का भी हिस्सा बनाया गया था।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. दिए गए कथनों में से कोनसे कथन गलत है/हैं? (स्तर-मध्यम)

  1. हिमालय चंद्र टेलीस्कोप लद्दाख के हानले में स्थित है।
  2. हाई एनर्जी गामा रे टेलिस्कोप लद्दाख के हानले में स्थित है।
  3. भारत का सबसे बड़ा और दूसरा डार्क स्काई रिजर्व लद्दाख के हानले में बनेगा।

विकल्प:

(a) केवल कथन एक

(b) केवल कथन दो

(c) तीनों कथन

(d) इनमे से कोई भी नहीं

उत्तर: a

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप भारतीय खगोलीय वेधशाला (Indian Astronomical Observatory (IAO)), माउंट सरस्वती, हानले, लद्दाख में 2 मीटर व्यास वाला ऑप्टिकल-इन्फ्रारेड टेलीस्कोप है।
  • यह समुद्र तल से 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
  • यह भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बैंगलोर द्वारा संचालित है।
  • कथन 2 सही है: मेजर एटमॉस्फेरिक चेरेनकोव एक्सपेरिमेंट टेलीस्कोप (MACE) भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का सबसे ऊंचा गामा-रे टेलीस्कोप हानले, लद्दाख में स्थित है।
  • कथन 3 गलत है: केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने लद्दाख में भारत का पहला नाइट स्काई अभयारण्य स्थापित करने का बीड़ा उठाया है।
  • प्रस्तावित डार्क स्काई रिजर्व लद्दाख के हानले में चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य के एक भाग के रूप में स्थापित किया जाएगा।

प्रश्न 2. इस मंदिर का निर्माण कार्कोट वंश के राजा ललितादित्य मुक्तापीड द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर भगवान सूर्य को समर्पित है और इस पर गांधार कला का प्रभाव है। कल्हण द्वारा लिखित राजतरंगिणी में इस मंदिर की भव्यता का वर्णन किया गया है। यहाँ किस मंदिर के बारे में चर्चा की जा रही है:(स्तर: कठिन)

(a) कोणार्क सूर्य मंदिर

(b) नवलखा मंदिर

(c) मार्तंड सूर्य मंदिर

(d) सूर्यनार कोविला

उत्तर: c

व्याख्या:

  • मार्तंड सूर्य मंदिर 8 वीं शताब्दी का मंदिर है जो जम्मू और कश्मीर में स्थित हैं। इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा “राष्ट्रीय महत्व के स्थल” (“Site of national importance”) के रूप में मान्यता दी गई है।
  • कल्हण की पुस्तक राजतरंगिणी में वर्णित भगवान शिव को समर्पित मार्तंड सूर्य मंदिर का निर्माण कर्कोटा वंश के ललितादित्य मुक्तापीड द्वारा करवाया गया था।
  • यह कश्मीरी वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना हैं, जिसमें गंधार, गुप्त और चीनी वास्तुकला के रूपों को मिश्रित किया गया था।
  • वर्ष 1389 से 1413 के बीच सिकंदर शाह मिरी के शासन के दौरान इसे नष्ट कर दिया गया था।

Image Source: Wikipedia

प्रश्न 3. “न्यू फंड ऑफर (NFO)” के संबंध में दिए गए कथनों में से कोनसे सही हैं/हैं (स्तर: मध्यम)

  1. NFO परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (AMCs) द्वारा शुरू की गई नई योजना के लिए पहली बार सदस्यता की पेशकश करता है।
  2. NFO का उद्देश्य देश भर में रुकी हुई किफायती और मध्यम आय वाली आवास परियोजनाओं के लिए अंत तक धन उपलब्ध कराना है।
  3. पूंजी जुटाने के लिए NFO को बाजार में उतारा जाता है।

विकल्प:

(a) इनमे से केवल एक कथन

(b) इनमे से केवल दो कथन

(c) तीनो कथन

(d) इनमे से कोई भी नहीं

उत्तर: b

व्याख्या:

  • न्यू फंड ऑफर (NFO) परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (AMCs) द्वारा शुरू की गई नई योजना के लिए पहली बार सदस्यता की पेशकश करता है।
  • इसे शेयरों, सरकारी प्रतिभूतियों,बाजार से बांड आदि को खरीदने के लिए जनता से पूंजी जुटाने के लिए बाजार में उतारा गया है।
  • यह बाजार से पूंजी जुटाने के लिए आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) के समान है।
  • एनएफओ एक निर्धारित अवधि के लिए जारी किए जाते हैं।

प्रश्न 4. “कुर्की” – जो हाल ही में समाचारों रहा है: (स्तर-मध्यम)

(a) खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों और कुछ पड़ोसी देशों में मुख्य रूप से निर्माण और घरेलू क्षेत्रों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की निगरानी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रणाली।

(b) किर्गिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उजबेकिस्तान की सरकारों द्वारा अपनाई गई प्रशासनिक प्रक्रिया पर सामान्य व्यवस्थित कानून।

(c) बिना किसी भौतिक धन को वास्तव में स्थानांतरित किए बिना धन हस्तांतरित करने का एक अनौपचारिक और अवैध तरीका।

(d) एक किसान की जमीन की कुर्की, जो पहले से ही ऋण देने वाली संस्था या व्यक्ति के पास ऋण के बदले गिरवी रखी गई है।

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कुर्की का अर्थ है एक किसान की भूमि की कुर्की, जो पहले से ही ऋण देने वाली संस्था या व्यक्ति के पास ऋण के बदले गिरवी रखी गई है।
  • बैंकों के अलावा, निजी साहूकार, कमीशन एजेंट भी समय-समय पर किसानों के खिलाफ यह फरमान जारी करते हैं।
  • कुर्की आदेश सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 60 के तहत जारी किए जाते हैं।

प्रश्न 5. भारत के इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिएः (CSE Prelims-2016) (स्तर: कठिन)

शब्द विवरण

  1. एरीपट्टी: भूमि जिससे मिलने वाला राजस्व अलग से ग्राम के जलाशय के रख-रखाव के लिए निर्धारित कर दिया जाता था।
  2. तनियूर: एक अकेले ब्राह्मण अथवा ब्राह्मण- समूह को दान में दिए गये ग्राम।
  3. घटिका :मंदिरों के साथ सम्बद्ध विद्यालय।

उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 3

(c) केवल 2 और 3

(d) केवल 1 और 3

उत्तर: d

व्याख्या:

  • जोड़ी 1 सही सुमेलित है: एरीपट्टी टैंक की भूमि थी अर्थात व्यक्तियों द्वारा दान की गई भूमि, जिसका राजस्व गांव के टैंक के रखरखाव के लिए अलग रखा जाता था।
  • जोड़ी 2 सही सुमेलित नहीं है:तनियूर एक बड़ा गाँव था और चोलों के अधीन विशिष्ट राजस्व इकाइयाँ थीं। एक ब्राह्मण या ब्राह्मणों के समूह को दान किए गए गांवों को ब्रह्मदेय कहा जाता था।
  • जोड़ी 3 सही सुमेलित है: एक घाटिका अग्रहार की तुलना में आकार में छोटी थी जो सीखने के अतिरिक्त धार्मिक शिक्षा का भी केंद्र थी। अधिकांश घटिकाएँ मंदिरों से जुड़ी संस्थाएं थीं।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. भारत की पड़ोसी कूटनीति में बांग्लादेश के साथ संबंधों का अभी भी महत्वपूर्ण स्थान है। कथन को स्पष्ट कीजिए । (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस 2-अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

प्रश्न 2. आजादी के बाद से LGBTQI+ समुदाय के अधिकारों को सुनिश्चित करने में भारत सरकार द्वारा की गई प्रगति का आकलन कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस 2-सामाजिक न्याय)