UPSC परीक्षा कम्प्रेहैन्सिव न्यूज़ एनालिसिस - 07 June, 2022 UPSC CNA in Hindi

07 जून 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

  1. सरोगेसी अधिनियम पर विचार विमर्श:
  2. सोशल मीडिया विनियमों पर वापस लिए गए मसौदे के प्रावधान:

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

राजव्यवस्था एवं शासन:

  1. यौनकर्मियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने हेतु कदम उठाना:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. बंगाल की खाड़ी का सुनहरा सपना:

शिक्षा:

  1. डिजिटल सहयोग की आवश्यकता:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. सामरिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण:

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. संपत्ति मुद्रीकरण के लिए ‘नीति निश्चितता, और पारदर्शिता जरुरी ‘:
  2. बैड बैंक जुलाई में NPA का अधिग्रहण शुरू करेगा: फिनमिन

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

सरोगेसी अधिनियम पर विचार विमर्श:,

विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां, हस्तक्षेप,उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

प्रारंभिक परीक्षा: सरोगेसी अधिनियम से सम्बंधित तथ्यात्मक जानकारी।

मुख्य परीक्षा: सरोगेसी अधिनियम का महत्वपूर्ण विश्लेषण।

संदर्भ:

  • याचिकाकर्ताओं द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय से सवाल किया हैं कि भारत में सरोगेसी को लागु करने या न करने के लिए वैवाहिक स्थिति, उम्र या लिंग जैसे मानदंडों का निर्धारण क्यों किया गया।

किराए की कोख (Surrogacy):

  • ‘सरोगेसी’ को एक ऐसी प्रथा के रूप में परिभाषित किया जाता है,जिसमें एक महिला किसी दूसरे जोड़े के लिए अपनी कोख से बच्चे को जन्म देती है और जन्म के बाद उस बच्चे को अपनी मर्जी से उन्हें सौंप देती है।
  • अधिनियम के तहत केवल ‘परोपकारी सरोगेसी’ की ही अनुमति है – जिसमें गर्भावस्था के दौरान दंपति द्वारा सरोगेट मां को केवल चिकित्सा खर्च और उसका बीमा किया जाता है। इसके आलावा उसे कोई अन्य वित्तीय लाभ देने की अनुमति नहीं है।

सरोगेसी अधिनियम क्या है?

  • सरोगेसी (विनियमन) विधेयक नवंबर 2016 में संसद में पेश किया गया था और 2021 में संसद के शीतकालीन सत्र में इसे पारित किया गया था।
  • इस अधिनियम में सरोगेसी को विनियमित करने का प्रस्ताव किया गया हैं, क्योंकि सरोगेसी देश में बांझपन उद्योग का महत्वपूर्ण भाग है।
  • सरोगेसी विनियमन बिल के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Surrogacy Regulation Bill

भारत में सरोगेसी अधिनियम की आवश्यकता:

  • गत वर्षों में भारत बांझपन के इलाज के एक केंद्र के रूप में उभरा है,जो अत्याधुनिक तकनीक और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बांझपन के इलाज व सरोगेसी हेतु दुनिया भर के लोगों को अपनी और आकर्षित कर रहा है।
  • भारतीय समाज में प्रचलित सामाजिक-आर्थिक असमानताओं के कारण आर्थिक रूप से वंचित महिलाओं को ‘अपनी कोख किराए पर देने’ का विकल्प मिला और इसके माध्यम से वे शादी ,बच्चों की शिक्षा , बामारी या अपने दूसरे खर्चों/जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसे कमाने लगी।
  • सरोगेसी की उपलब्धता की जानकारी मिलते ही इसकी मांग में भी तेजी आई।
  • बेईमान बिचौलियों ने खुद को इस कार्य में शामिल कर लिया जिसके कारण इन महिलाओं का शोषण हो रहा है ।
  • इसके बाद ऐसे कई उदाहरण है, जिन से पता चलता है कि महिलाओं को जितनी राशि देने का वादा किया गया था वो उन्हें नहीं दी गई जिसके कारण हताशा में वे पुलिस में शिकायत दर्ज करवा रही हैं।
  • उदाहरण के लिए, 2008 में एक जापानी जोड़े ने गुजरात की महिला को सेरोगेसी के लिए चुना लेकिन बच्चे के जन्म से पहले वे दोनों अलग हो गए और उन्होंने बच्चे को लेने से इनकार कर दिया।
  • वर्ष 2012 में, एक ऑस्ट्रेलियाई जोड़े ने एक सरोगेट मां की कोख से पैदा हुए जुड़वा बच्चों में से केवल एक को ही लिया।

सरोगेट माताओं के संबंध में शर्तें:

  • इच्छुक जोड़ों के लिए शर्तें: कोई भी जोड़ा जो बांझ हो वह सेरोगेसी से अपना बच्चा पैदा करवा सकता हैं।
  • इस अधिनियम में सेरोगेसी के जरिये बच्चे की उम्मीद करने वाले जोड़ों को ‘इच्छुक युगल’ कहा गया है, लकिन वे इसके पात्र तब होंगे जब उनके पास ‘आवश्यकता का प्रमाण पत्र’ और उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा जारी ‘पात्रता का प्रमाण पत्र’ होगा।
  • युगल द्वारा तीन शर्तों को पूरा करने के बाद इसे जारी किया जाता हैं :
  1. एक, जिला मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी एक या दोनों के बांझपन का प्रमाण पत्र;
  2. दूसरा, एक मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा पारित सरोगेट बच्चे के माता-पिता को अभिरक्षा का आदेश;
  3. तीसरा, सरोगेट मदर के लिए बीमा कवर।
  • पात्रता प्रमाण पत्र: पात्रता प्रमाण पत्र में कहा गया है कि दंपति द्वारा निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना आवश्यक है :
  1. वे भारतीय नागरिक होने चाहिए और उनकी शादी को कम से कम पांच साल हो चुके हों;
  2. महिला की आयु 23 से 50 वर्ष और पुरुष की 26 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए;
  3. उनके कोई जीवित संतान न हो (जैविक, दत्तक, या सरोगेट)।

सरोगेट मां:

  • दंपति की केवल करीबी रिश्तेदार ही सरोगेट मां बन सकती है, जो मेडिकली फिट हो।
  • सरोगेट महिला शादीशुदा होनी चाहिए, उसका अपना एक बच्चा होना चाहिए और उसकी उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए, इन सब शर्तों को पूरा करने के बाद वह केवल एक बार सरोगेट मां बन सकती है।

अधिनियम से सम्बंधित विवाद:

  • हालाँकि विधेयक की धीमी प्रशंसा की गयी थी एवं बांझपन विशेषज्ञों से द्वारा कुछ सख्त अनुमोदन भी दिया गया था, बावजूद इसके, इसमें अत्यधिक प्रतिबंधात्मक नियमों के बारे में कुछ आशंका बनी हुई थी।
  • इन समूहों के प्रतिनिधि तब भी सामने आए जब स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सदन में विधेयक पेश किया।
  • कुछ अन्य में मुख्य रूप से अंग प्रत्यारोपण में शामिल लोगों ने बताया कि कैसे इसी तरह के कड़े कानून के बावजूद अंगों का व्यापार देश में फल-फूल रहा है।
  • सम्बंधित प्राधिकारी और कानून प्रवर्तन अधिकारियों को धोखा दे कर ये दलाल गुप्त रूप से अस्पताल के अधिकारियों से मिलीभगत कर इस अवैध काम को अंजाम देते हैं ।
  • स्पष्ट रूप से इस मुद्दे से कड़ाई से निपटना होगा, भले ही लोगों की संवेदनाएं इससे आहत होती हों।

सारांश:

  • अपवर्जनात्मक मानदंड के कारण सरोगेसी अधिनियम पर कुछ शंकाएं हैं जो इसके लागू होने के बाद ही उजागर हुई हैं।इससे सम्बंधित शिकायतों को हल करने और माता-पिता की सभी श्रेणियों के लिए पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

सोशल मीडिया विनियमों पर वापस लिए गए मसौदे के प्रावधान:

विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां,हस्तक्षेप,डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

प्रारंभिक परीक्षा: सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021

मुख्य परीक्षा: सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 का महत्वपूर्ण विश्लेषण।

संदर्भ:

  • हाल ही में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने एक मसौदा प्रस्ताव रखा था, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में प्रस्तावित संशोधनों के एक सेट पर आम जनता से टिप्पणी मांगी गई थी।

सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 क्या है?

  • आईटी नियम (2021) के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अपनी साइट पर उपलब्ध अवांछित सामग्री के संबंध में तत्काल कार्रवाई करना आवश्यक है।
  • इसके अनुसार उन्हें एक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर गैरकानूनी और अनुपयुक्त सामग्री को अनिवार्य रूप से हटाना होगा ।
  • इन प्लेटफॉर्म का शिकायत निवारण अधिकारी उपयोगकर्ताओं की शिकायतों को दूर करने के लिए जिम्मेदार होता है।
  • किसी व्यक्ति को पूर्ण या आंशिक तौर पर नग्न दिखाना, यौन क्रिया में या किसी अन्य व्यक्ति को अधिनियम में प्रतिरूपित करने वाली सामग्री की शिकायत प्राप्त होने के 24 घंटों के भीतर इस प्लेटफॉर्म से हटाना आवश्यक है।
  • इन प्लेटफॉर्म पर किसी अन्य माध्यम से ऐसे लोगों की पहुंच और प्रसार को भी अक्षम किया जाना चाहिए।
  • सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Information Technology Rules, 2021

वापस लिए गए मसौदे में क्या बदलाव प्रस्तावित किए गए थे?

  • इस मसौदे में एक अतिरिक्त स्तर की निगरानी का प्रस्ताव रखा गया था,जिसे ‘शिकायत अपील समिति’, कहा गया,यह मध्यस्थ के शिकायत निवारण अधिकारी के ऊपर कार्य करती है।
  • यदि कोई उपयोगकर्ता मध्यस्थ के निर्णय से संतुष्ट नहीं है, तो वह सीधे अदालत जाने के बजाय अपीलीय स्तर पर इस निर्णय के खिलाफ अपील कर सकता है।
  • हालांकि, इसने किसी अन्य अदालत में अपील करने के उपयोगकर्ता के अधिकार को छीना नहीं हैं।
  • मसौदे में यह निर्धारित किया गया था कि इस अपीलीय के सभी आदेशों का अनुपालन किया जाना चाहिए।
  • इसके अतिरिक्त, मसौदे में यह भी निर्धारित किया गया है कि सभी सोशल मीडिया मध्यस्थ रिपोर्टिंग के 72 घंटों के भीतर इन सभी शिकायतों का समाधान किया जाना चाहिए।
  • इस नियम पर एक उप-खंड ने सुझाव दिया कि अपीलीय अदालत ने ऐसे मामलों को तीस दिनों के भीतर निपटाया, जिससे जल्दबाजी में निर्णय लेने की संभावना बढ़ जाती हैं।

कानूनी चुनौतियां:

  • बॉम्बे और मद्रास उच्च न्यायालयों दोनों ने पिछले वर्ष अगस्त और सितंबर में क्रमशः विधायी दिशानिर्देशों के नियम 9 के उप-खंड 1 और 3 को लागू करने पर रोक लगा दी थी।
  • समाचार और समसामयिक मामलों की सामग्री या क्यूरेट की गई सामग्री से निपटने वाले ऑनलाइन प्रकाशकों के लिए दो उप-खंड ‘आचार संहिता’ से संबंधित हैं।
  • इन उप-खंडों में बताया गया हैं कि इन संस्थाओं ने शिकायतों (उनके मंच से संबंधित) से निपटने के लिए एक त्रि-स्तरीय तंत्र की सदस्यता ली ताकि उनके कोड का पालन किया जा सके।
  • इसमें प्रकाशकों द्वारा स्व-विनियमन (स्तर I), प्रकाशकों के स्व-विनियमन निकायों द्वारा (स्तर II) और अंत में, केंद्र सरकार (स्तर III) द्वारा एक निरीक्षण तंत्र शामिल है।

सारांश:

  • नए आईटी नियम, 2021, सूचना उपयोगकर्ताओं और बिचौलियों को सोशल मीडिया के रूप में एक ही मंच पर रखने की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है। चूंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सवाल पूछने और आलोचना करने के लिए किया जा सकता है, चूँकि वे एक महत्वपूर्ण उपकरण हैं अतः इसका इस्तेमाल बुद्धिमानी से किया जाना चाहिए।

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

यौनकर्मियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने हेतु कदम उठाना:

विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास हेतु सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप तथा उनके निर्माण एवं कार्यान्वयन से संबंधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा: भारत में गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार पर चर्चा करें।

संदर्भ:

  • सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने 1999 में एक सेक्स वर्कर की नृशंस हत्या से संबंधित बुद्धदेव कर्मस्कर बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य मामले में निर्देश जारी किया है। इस लेख में उन पर विस्तार से चर्चा की गई है।

पृष्टभूमि:

  • 1999 में, अपीलकर्ता ने यौन संबंध बनाने से इनकार करने पर एक यौनकर्मी की बेरहमी से हत्या कर दी थी।
  • इसने अदालतों को न केवल उस कृत्य के लिए दोषी ठहराया जो उसने किया था बल्कि उसने निर्दोष होने की चुनौती दी, साथ ही समाज में यौनकर्मियों, वेश्याओं और जबरन देह व्यापार में आने वालों की दुर्दशा को भी उजागर किया।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 की व्यापक व्याख्या करते हुए उनके और उनके वंशजों के गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार को बरकरार रखने तथा यौनकर्मियों के जीवन की सुरक्षा का ऐतिहासिक निर्णय दिया। भारतीय क्षेत्राधिकार में वेश्यावृत्ति के नियमन पर विचार कर सर्वोच्च न्यायालय पुण्य का कार्य किया है।

सर्वोच्च न्यायालय की सिफारिशें:

  • भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पैनल ने यौनकर्मियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए 10 सिफारिशें की हैं।
  • केंद्र ने कुछ सिफारिशों को लेकर अपनी आपत्ति जताई है इसलिए अगली सुनवाई से पहले केंद्र को इसका जवाब देना होगा।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को जिन छह सिफारिशों को लागू करने का निर्देश दिया है, वे इस प्रकार हैं:
    • संवेदीकरण: यह देखा गया है कि पुलिस का यौनकर्मियों के प्रति रवैया अक्सर क्रूर और हिंसक होता है। ऐसा इसलिए है कि उन्हें लगता है कि यह ऐसा वर्ग हैं जिनके कोई अधिकार नहीं हैं इसलिए उनके प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता है।
    • पहचान का खुलासा नहीं किया जाना चाहिए: अदालत ने कहा कि मीडिया को इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि वह गिरफ्तारी, छापेमारी और बचाव अभियान के दौरान यौनकर्मियों की पहचान उजागर न करें, चाहे वह पीड़ित हों या आरोपी, और ऐसी कोई भी तस्वीर प्रकाशित या प्रसारित न करें जिसके परिणामस्वरूप उनकी पहचान का खुलासा हो।
    • चिकित्सा सहायता: यौन उत्पीड़न की शिकार यौनकर्मियों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
    • साक्ष्य के उपाय: पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्वास्थ्य उपाय (गर्भनिरोधक) के उपयोग को पुलिस द्वारा यौनकर्मियों के खिलाफ सबूत नहीं माना जाना चाहिए।
    • सेक्स वर्कर्स को शिक्षित करें: बेंच ने सिफारिश की है कि केंद्र और राज्य सरकारों को सेक्स वर्कर्स को उनके अधिकारों और सेक्स वर्क की वैधता के बारे में भी शिक्षा देनी चाहिए।
    • यौनकर्मियों को रिहा करें: पैनल ने सिफारिश की है कि वयस्क श्रमिकों को उनकी इच्छा के विरुद्ध ITPA में रखा गया था, जिन्हें रिहा किया जाना चाहिए।

केंद्र सरकार की आपत्तियां:

चार सिफारिशें हैं जिन पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई है। उनकी चर्चा नीचे की गई है:

  • यौनकर्मियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई:
    • यौनकर्मी को कानून के समान संरक्षण का हक हैं। आपराधिक कानून सभी मामलों में ‘आयु’ और ‘सहमति’ के आधार पर समान रूप से लागू होना चाहिए। जब यह स्पष्ट हो जाए कि यौनकर्मी वयस्क है और अपनी मर्जी से इस में लिप्त है, तो पुलिस को हस्तक्षेप करने या कोई आपराधिक कार्रवाई करने से बचना चाहिए।
    • इसका तात्पर्य यह है कि स्वेच्छा से यौनकर्मी होना कोई अपराध नहीं है। ‘दुर्व्यवहार’ और ‘वेश्यावृत्ति’ शब्दों के भी अलग-अलग अर्थ हैं।
    • इसलिए ‘व्यक्तियों के दुरुपयोग’ और ‘यौन शोषण’ की एक उपयुक्त परिभाषा की आवश्यकता है ताकि लागू करने वाली एजेंसियां शर्तों का दुरुपयोग न कर सकें।
  • सिर्फ वेश्यालय चलाना गैर कानूनी :
    • इसमें यह भी कहा गया है कि यौनकर्मियों को न तो गिरफ्तार न ही दंडित और न ही वेश्यालयों पर छापेमारी के दौरान प्रताड़ित किया जाना चाहिए क्योंकि स्वैच्छिक यौन कार्य अवैध नहीं है केवल वेश्यालय चलाना गैरकानूनी है।
    • वेश्यालय का उपयोग उस स्थान को इंगित करने के लिए किया जाता है जिसका उपयोग दो या दो से अधिक यौनकर्मियों के लाभ के लिए यौन शोषण या दुर्व्यवहार के लिए किया जाता है।
    • यह तय करने के लिए कोई नीति या अधिनियम होना चाहिए कि लाभ के लिए एक साथ रहने वाली दो या दो से अधिक यौनकर्मियों को अपराधी बनाया जाए या नहीं।
  • सेक्स वर्कर्स के बच्चों को मां से अलग नहीं करना चाहिए:
    • कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि सेक्स वर्कर के बच्चे को सिर्फ इस आधार पर मां से अलग नहीं किया जाना चाहिए कि वह देह व्यापार में संलग्न है।
    • यदि कोई नाबालिग वेश्यालय में या यौनकर्मियों के साथ रहता है, तो यह नहीं माना जाना चाहिए कि उसकी तस्करी की गई है।
    • सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे को मां से अलग करने का कोई आदेश नहीं दिया है, यह इसे तस्करी मानता है।
    • जज ने बच्चों को वेश्यालय से छुड़ाने की सिफारिश की है तथा उन्हें किशोर न्याय अधिनियम के तहत किसी भी चाइल्ड केयर में भेजा जाना चाहिए।
    • इसलिए, बाल कल्याण सुनिश्चित करने हेतु इस सिफारिश पर विचार किया जाना चाहिए।
  • प्रतिनिधि:
    • चौथी सिफारिश के अनुसार यौनकर्मियों से सम्बंधित सुधारों का मसौदा बनाते वक्त उनके प्रतिनिधियों को भी इस में शामिल किया जाना चाहिए।
    • इससे यौनकर्मियों का तेजी से और अधिक प्रभावी पुनर्वास सुनिश्चित करेगा।

भावी नीति:

  • ITPA अधिनियम के अनुसार, अधिसूचित क्षेत्रों जैसे धार्मिक स्थलों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों आदि के बाहर यौन कार्य करना दंडनीय नहीं है। ITPA अधिनियम वेश्यावृत्ति को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए व्यक्तियों के यौन शोषण या दुर्व्यवहार के रूप में भी परिभाषित करता है। फिर इस अधिनियम को कहीं भी अनुमति कैसे दी जाती है?
  • इसलिए वेश्यावृत्ति और यौनकर्मियों के काम के बीच उचित अंतर तय किया जाना चाहिए।
  • सरकार को वेश्यावृत्ति पर प्रतिबंध लगाना चाहिए लेकिन कुछ शर्तों के साथ स्वैच्छिक यौन कार्य की अनुमति भी देनी चाहिए।
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उपयोग यौनकर्मियों की स्थिति में सुधार लाने और कानूनों और नीतियों के बारे में स्पष्टता लाने के अवसर के रूप में किया जाना चाहिए।

सारांश:

  • यौनकर्मियों को भी गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार है। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने बुद्धदेव कर्मस्कार बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य के मामले में कुछ सिफारिशें दी हैं। ये सिफारिशें यौनकर्मियों को अधिक प्रभावी ढंग से पुनर्वास करने का अवसर प्रदान करती हैं।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अन्तर्राष्ट्रीय संबंध:

बंगाल की खाड़ी का सुनहरा सपना:

विषय: भारत से जुड़े एवं इसके हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह के समझौते।

मुख्य परीक्षा: बिम्सटेक के प्रदर्शन का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें।

संदर्भ:

  • इस लेख में बिम्सटेक (BIMSTEC) की उपलब्धियों, भावी मुद्दों और किए जाने वाले उपायों पर चर्चा की गई है।

पृष्टभूमि:

  • BIST-EC (बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका, थाईलैंड – आर्थिक सहयोग) का गठन जून 1997 में बैंकॉक में किया गया था। 6 जून 2022 को इसने 25 वर्ष पूर्ण किए हैं।
  • म्यांमार को इसमे दिसंबर 1997 में शामिल किया गया था तथा संगठन का नाम बदलकर BIMST-EC कर दिया गया था।
  • फरवरी 2004 में नेपाल और भूटान को शामिल किए जाने के बाद समूह का विस्तार हुआ।
  • जुलाई 2004 में बैंकॉक में आयोजित पहली शिखर बैठक में समूह का नाम बदलकर (BIMSTEC), बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) कर दिया गया था।

अवलोकन:

  • जब बिम्सटेक बनाया गया था, तब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका का दबदबा था। भारत और थाईलैंड ने फिर हाथ मिलाया और दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र (आसियान) का निर्माण किया। 21वीं सदी में, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर हावी हैं, जिससे नए तनाव और अवसर भी पैदा हुए हैं।
  • बिम्सटेक ने खुद को पुनः जीवंत कर दिया है और इसे क्षेत्रीय सहयोग और एकीकरण के साधन के रूप में देखा जाता है।
  • बिम्सटेक को काठमांडू शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास फिर से करना चाहिए।

अब तक की उपलब्धियां:

  • बिम्सटेक ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उनमें से कुछ का उल्लेख नीचे किया गया है:

घोषणा पत्र:

  • बिम्सटेक ने अपने लिए एक चार्टर बनाया है जो संगठन के दृष्टिकोण और कार्यों को परिभाषित करता है और एक कानूनी कार्यपद्धति को भी बनाए रखता है।

सहयोग के क्षेत्र:

  • समूह की प्राथमिकता के क्षेत्र सात हैं और प्रत्येक देश निर्दिष्ट क्षेत्र के लिए अग्रणी के रूप में कार्य करता है।

शिखर सम्मेलन:

  • 2014 के बाद, बिम्सटेक ने विदेश मंत्रियों के शिखर सम्मेलन और बैठकें आयोजित करना शुरू कर दिया था तब से अब तक सफलतापूर्वक पांच शिखर सम्मेलन आयोजित किए जा चुके है। वर्तमान में, बिम्सटेक दो साल में एक बार नियमित शिखर सम्मेलन आयोजित करता है।

फोकस क्षेत्रों में प्रगति:

  • समूह ने आतंकवाद का मुकाबला करने, सुरक्षा सहयोग स्थापित करने, मानवीय सहायता और आपदा राहत के बेहतर प्रबंधन के लिए तंत्र और संस्थाओं के निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

संस्थान:

  • कुछ संस्थान हैं जैसे एनर्जी सेंटर और सेंटर ऑन वेदर एंड क्लाइमेट चेंज है जो कि क्षेत्रीय सहयोग पर आधारित हैं।

संकट:

  • समूह ने म्यांमार सेना द्वारा उत्पीड़न के कारण बांग्लादेश में रोहिंग्या संकट जैसे कई संकट देखे हैं।
  • म्यांमार के इस सैन्य तख्तापलट के कारण कई संस्थानों ने म्यांमार का बहिष्कार किया।
  • हाल ही में, समूह ने श्रीलंका में एक गंभीर आर्थिक संकट भी देखा।

बिम्सटेक के साथ मुद्दे:

  • FTA निर्माण में असमर्थता:
  • व्यापक मुक्त व्यापार समझौते का न होना बिम्सटेक की विफलताओं में से एक है।
  • FTA को क्रियान्वित करने के लिए सात समझौतों की जरूरत है लेकिन अभी केवल दो ही तैयार किए गए हैं।
  • कनेक्टिविटी समस्या:
    • बुनियादी ढांचा ऊर्जा, डिजिटल और वित्तीय डोमेन तथा संस्थाए जो व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए लोगों को एक साथ लाती है, के बीच कनेक्टिविटी न होना एक प्रमुख समस्या है।
    • एशियाई विकास बैंक (ADB) द्वारा प्रदान किए गए कनेक्टिविटी मास्टर प्लान के बावजूद अब तक बहुत सीमित प्रगति हुई है।
    • अब तक स्थापित सभी कनेक्टिविटी का श्रेय भारत, बांग्लादेश, भूटान और नेपाल द्वारा की गई पहलों को जाता है।
  • वित्तीय संसाधन:
    • क्षेत्रीय संपर्क का अधिक विस्तार करने के लिए अधिक वित्तीय सहायता की आवश्यकता है।
  • कुछ लंबित परियोजनाएं:
  • बिम्सटेक विकास कोष बनाने की दिशा में एक छोटा सा प्रयास।
  • ब्लू इकोनॉमी पर अभी तक कोई काम नहीं हुआ है।
  • बिजनेस चैंबर्स और कॉरपोरेट लीडर्स अभी तक बिम्सटेक की गतिविधियों में पूरी तरह से शामिल नहीं हैं। इसलिए, समूहीकरण काफी हद तक विशेषज्ञों और अधिकारियों के हाथों में है।
  • ‘थर्ड स्पेस’ की भागीदारी को महत्वपूर्ण रूप से विस्तारित करने की आवश्यकता है।

भावी नीति:

  • बिम्सटेक समूह, बंगाल की खाड़ी समुदाय (BOBC) के दृष्टिकोण के अनुरूप काम करता है तथा जिसमें दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिण एशिया के बीच संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता है।
  • समृद्धि के लिए नव निर्मित इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क और क्षेत्र के विकास में तेजी लाने के लिए बिम्सटेक के बीच तालमेल स्थापित किया जाना चाहिए।
  • बिम्सटेक के तीन सदस्यों की बड़ी जिम्मेदारी है। बांग्लादेश बिम्सटेक सचिवालय के मेजबान के रूप में, थाईलैंड दक्षिण पूर्व एशिया के प्रतिनिधि के रूप में तथा भारत को दक्षिण एशिया के सबसे बड़े देश के रूप में बिम्सटेक की प्रगति को गति देने की दिशा में काम करना चाहिए।

सारांश:

  • बिम्सटेक ने स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इसने कई लक्ष्य हासिल किए हैं लेकिन कुछ मुद्दों जैसे कनेक्टिविटी, वित्तीय संसाधन आदि के कारण प्रगति थोड़ी धीमी रही है। इसे सहयोग और महत्वपूर्ण उपायों को मजबूत कर विकास विकासोन्मुख बनाया जाना चाहिए।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

शिक्षा:

डिजिटल सहयोग की आवश्यकता:

विषय: सामाजिक क्षेत्र एवं सेवाओं के विकास तथा प्रबंधन से संबंधित स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधन के मुद्दे।

मुख्य परीक्षा: भारत में ऑनलाइन शिक्षण और दूरस्थ शिक्षा का समालोचनात्मक मूल्यांकन करें।

संदर्भ:

  • इस लेख में भारत में ऑनलाइन एवं दूरस्थ शिक्षा पर यूजीसी के हालिया नियमों तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग चर्चा की गई है।

पृष्टभूमि:

  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने उन नियमों को मंजूरी दे दी है जिसके तहत भारतीय और विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान अब संयुक्त या दोहरी डिग्री कार्यक्रम शुरू कर सकेंगे।
  • यूजीसी ने कुछ शर्तें रखी हैं जिसके तहत कॉलेज इस तरह के कार्यक्रम हेतु आवेदन कर सकते हैं।
  • इस योजना से लाभान्वित भारतीय शैक्षणिक संस्थानों के लिए मानदंड यह है कि या तो उनका न्यूनतम स्कोर 3.01 होना चाहिए या वह संस्थान जो राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) की विश्वविद्यालय श्रेणी में शीर्ष 100 में हो।
  • पात्र होने के लिए भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों को टाइम्स हायर एजुकेशन या क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के शीर्ष 1000 में होना चाहिए।
  • महामारी ने शिक्षा की दुनिया में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी को बहुत महत्वपूर्ण बना दिया है। लेकिन, ट्विनिंग कार्यक्रमों के लिए यूजीसी के नियम ऑनलाइन सीखने और मुक्त और दूरस्थ शिक्षा की अनुमति नहीं देते हैं।

भारत में दूरस्थ शिक्षा:

  • 2020 में, राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने सुझाव दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों (HEI) में सकल नामांकन अनुपात को बढ़ाने के लिए अधिक ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम को अपनाना चाहिए।
  • दूरस्थ शिक्षा के कुछ लाभ हैं जिनका उल्लेख नीचे किया गया है:
    • यह दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों तक पहुंच प्रदान करती है।
    • यह उन लोगों को भी शिक्षा ग्रहण करने का मौका देती जो आर्थिक, सामाजिक या व्यावसायिक बाधाओं के कारण उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकते हैं।
    • यह उन कर्मचारियों के लिए भी उपयुक्त है जो अपने करियर में बेहतर अवसरों के लिए अंशकालिक पाठ्यक्रम के रूप में उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।
    • ये कार्यक्रम नियमित पाठ्यक्रमों की तुलना में अधिक किफायती हैं।
    • यह वंचित समूहों में अधिक प्रचलित है।

दूरस्थ शिक्षा की पहल:

  • उच्च शिक्षा के कुल नामांकन में दूरस्थ नामांकन का योगदान 11.1% है। यूजीसी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थान विभिन्न पहलों जैसे MOOCs, SWAYAM, NPTEL आदि के माध्यम से भारत में ऑनलाइन शिक्षा को प्रायोजित कर रहे हैं।
  • ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को रूसा (RUSA) और TEQIP-III कार्यक्रमों के तहत केंद्रीय रूप से वित्त पोषित किया जाता है।
  • केंद्रीय बजट में डिजिटल यूनिवर्सिटी बनाने की घोषणा की गई है।
  • एक ओर इन्हें सरकारी पहलों द्वारा बढ़ावा दिया जाता है एवं दूसरी ओर, UGC ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा को अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के दायरे से बाहर रखता है।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का लाभ:

  • उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (AISHE) के निष्कर्षों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय देशों के लगभग 49,348 छात्र उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) के पाठ्यक्रमों में नामांकित हैं।
  • इसमे सबसे बड़ा हिस्सा हमारे पड़ोसी देशों: नेपाल, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भूटान का है।
  • यह सहयोग भारत में अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के नामांकन में वृद्धि करेगा और आर्थिक रूप से विवश उच्च शिक्षा संस्थानों को लाभ प्रदान करेगा।

हानि:

  • केंद्रीय विश्वविद्यालयों को उच्च शिक्षा के लिए अनुदान 7,643 करोड़ रु. से बढ़ाकर 9,420 करोड़ रुपये कर दिया गया है। IIT और IIM के लिए फंड में भी क्रमशः 658.9 करोड़ रु. और 177.9 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।
  • राज्य द्वारा वित्त पोषित संस्थान इन केंद्रीय स्तर के उपायों से मेल नहीं खाते और पिछड़ जाते हैं। वे रैंकिंग प्रणाली में भी अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं।
  • अब, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्रयासों के अवसर से भी बाहर रखा गया है। इससे केंद्र-राज्य की खाई और बढ़ेगी।

भावी नीति:

  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रयासों के संबंध में यूजीसी की नीतियों पर दोबारा गौर किया जाना चाहिए।
  • इसे वर्तमान शिक्षा प्रणाली की जरूरतों को देखना चाहिए ताकि राज्य प्रायोजित HEIs में पढ़ने वाले और ODL और ऑनलाइन शिक्षा का चयन करने वाले छात्र भारत में लाभों से वंचित न हों।

सारांश:

  • हाल के वर्षों में ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा में सुधार हुआ है। सरकार ने ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कुछ पहलें भी की हैं। हाल ही में, UGC एक अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक प्रयास के साथ आगे बढ़ रहा है लेकिन ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। UGC को शिक्षा नीतियों पर पुनर्विचार करना होगा तथा वर्तमान शिक्षा प्रणाली में सुधार के प्रयास करने होंगे।

प्रीलिम्स तथ्य:

1. सामरिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई तकनीक विकसित करना।

प्रारंभिक परीक्षा: अग्नि-IV

संदर्भ:

  • भारत ने इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) अग्नि -4 का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।

अग्नि-4:

  • अग्नि-4 एक इंटरमीडिएट रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल है।
  • अग्नि- IV मिसाइलों की अग्नि श्रृंखला में चौथी है – जिसे पहले अग्नि II प्राइम के रूप में जाना जाता था – इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया था।
  • यह मिसाइल दो चरणों वाली एक हथियार प्रणाली है,और इसे सड़क मार्ग से ले जाया जा सकता है।
  • अग्नि-5, भारत की एकमात्र अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जिसकी मारक क्षमता 5,000 किमी से अधिक है।

अग्नि -4 का महत्व:

  • अग्नि-4 “विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध” क्षमता रखने की भारत की नीति की पुष्टि करती है।
  • विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध का सिद्धांत भारत की परमाणु रणनीति का आधार है।
  • न्यूनतम प्रतिरोध का मतलब है कि भारत पहले किसी पर हमला नहीं करेगा लेकिन जवाबी कार्रवाई जरूर करेगा।
  • सतह से सतह पर मार करने वाली अग्नि, ब्रह्मोस, पृथ्वी मिसाइल के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Surface to Surface Missile – Agni, Brahmos, Prithvi

महत्वपूर्ण तथ्य:

1. संपत्ति मुद्रीकरण के लिए ‘नीति निश्चितता, और पारदर्शिता जरुरी ‘:

  • मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) ने कहा हैं कि सरकार के परिसंपत्ति मुद्रीकरण प्रयास की सफलता सुनिश्चित करने के लिए नीति स्थिरता और पारदर्शिता महत्वपूर्ण थी।
  • उन्होंने जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करने में आने वाली बाधाओं को समाप्त करने की कोशिश की एवं इस मार्ग में प्रमुख वैश्विक चुनौती को पूरा करने के लिए राजकोषीय और धातुओं एवं खनिजों जैसे कच्चे माल की आपूर्ति के संदर्भ में आ रही बाधाओं पर प्रकाश डाला।
  • CEA ने अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के लिए धातुओं और खनिजों में अधिक निवेश की आवश्यकता पर भी बल दिया।

2. बैड बैंक जुलाई में NPA का अधिग्रहण शुरू करेगा: फिनमिन

  • वित्त मंत्रालय ने कहा हैं कि 6,000 करोड़ रुपये के आकार वाली राष्ट्रीय संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी (एनएआरसीएल) या बैड बैंक द्वारा अगले महीने बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) के पहले सेट का अधिग्रहण किए जाने की उम्मीद है।
  • सरकार ने एनएआरसीएल का गठन 500 करोड़ रुपये से अधिक आकार वाले बैंक एनपीए खातों का अधिग्रहण करने के लिए विशेष प्रायोजन वाली परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी के रूप में किया है।
  • एनएआरसीएल, जो बैंकों से खराब ऋण प्राप्त करेगा, जिसके लिए इंडिया डेट रेज़ोल्यूशन कंपनी लिमिटेड ने आवश्यक अनुमोदन और अनुमतियां प्राप्त कर ली हैं।
  • 2021-22 के बजट में घोषित NARCL का उद्देश्य 2 लाख करोड़ रुपये के तनावग्रस्त ऋण की समस्या को हल करना है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. हाल ही में लॉन्च किए गए जन समर्थ पोर्टल का निम्नलिखित में से कौन सबसे अच्छा वर्णन करता है? (स्तर: मध्यम)

(a) यह केंद्र सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन पर लोगों से प्रतिक्रिया जानने हेतु एक पोर्टल है।

(b) यह नीति निर्माण प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देने वाला एक पोर्टल है।

(c) यह सरकारी क्रेडिट योजनाओं को जोड़ने वाला वन स्टॉप डिजिटल पोर्टल है।

(d) यह पथभ्रष्ट सरकारी अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने हेतु एक पोर्टल है।

उत्तर: c

व्याख्या:

  • जन समर्थ पोर्टल सरकारी ऋण योजनाओं को जोड़ने वाला वन-स्टॉप डिजिटल पोर्टल है।
    • यह अपनी तरह का पहला मंच है जो लाभार्थियों को सीधे ऋणदाताओं से जोड़ता है।
    • पोर्टल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के समावेशी विकास और संवृद्धि को सरल और आसान डिजिटल प्रक्रियाओं के माध्यम से प्रोत्साहित करना है।
    • पोर्टल सभी लिंक्ड योजनाओं की कवरेज सुनिश्चित करता है।
  • अत: C सही विकल्प है।

प्रश्न 2. निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर: मध्यम)

  1. यूएई भारत के शीर्ष तीन वैश्विक व्यापार भागीदारों में शामिल है।
  2. सऊदी अरब विश्व स्तर पर भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है।
  3. खाड़ी देशों में, संयुक्त अरब अमीरात में प्रवासी भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है।

विकल्प:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: c

व्याख्या:

  • भारत वर्ष 2021 की प्रथम छमाही में कुल मात्रा ( overall volume ) के साथ चीन के बाद दुबई के दूसरे सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार के रूप में उभरा है। अतः कथन 1 सही है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका ने वर्ष 2021 में इराक के बाद सऊदी अरब को भारत के दूसरे सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ता के रूप में पीछे कर दिया हैं। अतः कथन 2 गलत है।
  • विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात 3.4 मिलियन से अधिक भारतीयों के साथ इस क्षेत्र में सबसे ऊपर है, इसके बाद सऊदी अरब (2.6 मिलियन) और कुवैत (1 मिलियन) का स्थान आता है। इसलिए कथन 3 सही है।

प्रश्न 3. विकलांगता से सम्बंधित भारत के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन गलत है/हैं? (स्तर: कठिन)

  1. भारत ने विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए हैं,लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है।
  2. भारत एशिया और प्रशांत क्षेत्र में विकलांग व्यक्तियों के लिए इंचियोन रणनीति के निर्माण” का पक्षकार है।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: a

व्याख्या:

  • विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन विकलांग लोगों के अधिकारों से संबंधित एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधि है।
  • भारत ने अक्टूबर 2007 में यूएनसीआरपीडी की पुष्टि की।
  • संसद ने यूएनसीआरपीडी के तहत दायित्वों को पूरा करने की दृष्टि से विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 को अधिनियमित किया। अतः कथन 1 गलत है।
  • विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन में उल्लिखित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इंचियोन रणनीति को अपनाया गया है।
  • भारत एशिया और प्रशांत क्षेत्र में विकलांग व्यक्तियों के लिए इंचियोन रणनीति “वास्तविक बनाने” (To make the Right Real) का एक पक्षकार है। अतः कथन 2 सही है।

प्रश्न 4. घाटियों और उनसे जुड़े राज्यों के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए। (स्तर: कठिन)

घाटी राज्य

  1. यांकती कुटी (Yankti kuti) उत्तराखंड
  2. युमथांग (Yumthang) नागालैंड
  3. ज़ुकोउ (Dzukou) मिजोरम
  4. चंबा (Chamba) हिमाचल प्रदेश

उपर्युक्त में से कौन से युग्म सुमेलित हैं?

(a) केवल 1 युग्म

(b) केवल 2 युग्म

(c) केवल 3 युग्म

(d) उपर्युक्त सभी युग्म

उत्तर: b

व्याख्या:

  • यांकती कुटी घाटी भारत के उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ जिले में स्थित एक हिमालयी घाटी है। अत: युग्म 1 सही है।
  • युमथांग घाटी भारत में सिक्किम में हिमालय के पहाड़ों से घिरे रोलिंग घास के मैदानों पर नदियों, गर्म झरनों, याक और चरागाहों से सुसज्जित एक प्रकृति अभयारण्य है। अत: युग्म 2 गलत है।
  • ज़ुकोउ (Dzukou) घाटी पूर्वोत्तर भारत में नागालैंड और मणिपुर राज्यों की सीमाओं पर स्थित एक घाटी है। अत: युग्म 3 गलत है।
  • चंबा भारत के हिमाचल प्रदेश में चंबा जिले का एक शहर है। अत: युग्म 4 सही है।

प्रश्न 5. निम्नलिखित में से किस कारण से किसी अर्थव्यवस्था में मुद्रा गुणक में वृद्धि होती है? PYQ (2019) (स्तर: मध्यम)

(a) बैंको के नकद आरक्षित अनुपात में वृद्धि।

(b) लोगों की बैंकिंग आदत में वृद्धि।

(c) वैधानिक तरलता अनुपात में वृद्धि।

(d) देश की जनसंख्या में वृद्धि।

उत्तर: b

व्याख्या:

  • वाणिज्यिक बैंकों द्वारा दी गई निश्चित राशि के आधार धन और आरक्षित अनुपात के लिए बनाई गई धनराशि को धन गुणक के रूप में संदर्भित किया जाता है।
  • एक उच्च नकद आरक्षित अनुपात बैंकों को अधिक धन उधार देने से रोकता है,और धन गुणक को कम करता है।
  • जनसंख्या की बैंकिंग आदतों में वृद्धि से उधार में वृद्धि होगी, जिसके परिणामस्वरूप बैंकिंग प्रणाली में अधिक जमा होंगे और इस प्रकार धन गुणक में वृद्धि होगी।
  • अत: विकल्प B सही है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. सोशल मीडिया पर सरकार के विनियमों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सरकार के प्रतिबंध के बीच एक महीन रेखा है। चर्चा कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस II (शासन)

प्रश्न 2. भारत में सरोगेसी कानून देश में सरोगेसी संबंधी समस्याओं से कैसे निपटेगा ? व्याख्या कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) जीएस II (सामाजिक मुद्दे)

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