UPSC परीक्षा कम्प्रेहैन्सिव न्यूज़ एनालिसिस - 10 June, 2022 UPSC CNA in Hindi

10 जून 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

समाज:

  1. क्या शादी कर लेना गंभीर आपराधिक मामलों को सुलझाने का एक तरीका है?

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

  1. भारतीय पेटेंट व्यवस्था एवं अमेरिकी मानदंडों के साथ इसका टकराव:

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. भारत-ईरान संबंधों को पुनर्स्थापित करना:
  2. भारत-पाकिस्तान संबंधों को पाटने वाला एक स्थायी समझौता:

अर्थव्यवस्था:

  1. क्या गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना सही नीति है?:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. थाईलैंड मारिजुआना (गांजा) को वैध करार देने वाला प्रथम एशियाई देश बना:
  2. असम रिजर्व में राइनो के पुनरुत्पादन में सफलता:
  3. आगामी राज्यसभा चुनाव की रणभूमि:

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. आईआईएससी, बेंगलुरु श्रेष्ठ भारतीय विश्वविद्यालय:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

भारतीय पेटेंट व्यवस्था एवं अमेरिकी मानदंडों के साथ इसका टकराव:

अर्थव्यवस्था:

विषय: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, उनकी संरचना और जनादेश।

प्रारंभिक परीक्षा: ट्रिप्स (TRIPS) डब्ल्यूटीओ (WTO )।

मुख्य परीक्षा : भारत के पेटेंट मानदंडों का विश्लेषण।

संदर्भ:

  • संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (US Trade Representative-USTR) ने भारत की पेटेंट व्यवस्था पर चिंता जताई है।

स्थिति का अवलोकन:

  • संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने “बौद्धिक संपदा संरक्षण और प्रवर्तन पर विशेष रिपोर्ट-301” (“Special 301 on Intellectual Property Protection and Enforcement”) में भारतीय पेटेंट व्यवस्था में उत्पन्न बाधाओं के बारे में बताया है, जो व्यापारिक हितों में हस्तक्षेप करती हैं।
  • इस रिपोर्ट में बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रवर्तन के संदर्भ में अमेरिका के व्यापारिक भागीदारों पर पड़ने वाले प्रभाव का भी वार्षिक मूल्यांकन किया गया है।
  • भारत अर्जेंटीना, चिली, चीन, इंडोनेशिया, रूस और वेनेजुएला जैसे छह अन्य देशों के साथ अमेरिका की प्राथमिकता निगरानी सूची में बना रहेगा।

भारत संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की प्राथमिकता निगरानी सूची में क्यों है ?

  • संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने आईपी मानदंडों में बदलाव के लिए अपने व्यापारिक भागीदारों द्वारा की गई प्रगति का गहन विश्लेषण करने के बाद, भारत से संबंधित निम्नलिखित मुद्दों पर जोर दिया हैं:
  1. पेटेंट संरक्षण को लेकर भारत की विसंगतियां।
  2. पेटेंट की जा सकने वाली सामग्री से सम्बंधित मौजूदा चिंताएं।
  3. पेटेंट प्राप्त करने के लिए प्रतीक्षा समय।
  4. बोझिल रिपोर्टिंग आवश्यकताएं।
  5. डेटा सुरक्षा को लेकर चिंता।

भारत में पेटेंट व्यवस्था:

  • पेटेंट (Patent) एक ऐसा कानूनी अधिकार है जो किसी व्यक्ति या संस्था को उसके द्वारा की गई किसी खोज, डिजाईन, प्रक्रिया या सेवा के लिए एकाधिकार प्रदान करता है।
    • इसमें एक उत्पाद या प्रक्रिया हो सकती है जो कुछ चीजों को करने का एक नया तरीका प्रदान करती है, जिसमें नवाचार और मौलिकता शामिल होती है।
    • पेटेंट प्राप्त करने वाले व्यक्ति या आविष्कार कर्त्ता के अलावा यदि कोई दूसरा व्यक्ति या संस्था इनके अविष्कार का उपयोग बिना पेटेंट धारक की अनुमति के करता है तो ऐसा करना कानूनन अपराध है।
  • भारत में, पेटेंट व्यवस्था भारतीय पेटेंट अधिनियम 1970 ( Indian Patents Act 1970) के प्रावधानों द्वारा प्रशासित होती हैं।
  • शुरू में सस्ती दवाओं की बेहतर उपलब्धता के लिए भारतीय पेटेंट अधिनियम ने फार्मास्युटिकल उत्पादों पर पेटेंट संरक्षण प्रदान नहीं किया गया था।
  • ट्रिप्स समझौते के अनुपालन हेतु इस कानून में वर्ष 2005 में किये गए संशोधन के बाद इन फार्मास्युटिकल उत्पादों को पेटेंट संरक्षण के तहत लाया गया था।
  • भारतीय पेटेंट अधिनियम का अनुच्छेद 3 (d) भारतीय बौद्धिक संपदा कानून के परिदृश्य और अमेरिकी पेटेंट कानूनों के साथ इसके संरेखण के क्षेत्रों के साथ-साथ उन क्षेत्रों में एक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है जहां दोनों देशों के कानून भिन्न हैं।
  • भारतीय पेटेंट अधिनियम का यह लेख केवल नई खोज या किसी ज्ञात पदार्थ के नए उपयोग का पेटेंट करने के मौजूदा तरीकों की तुलना में इसकी प्रभावकारिता में वृद्धि को कम करता है।
  • यह पेटेंट की लोकप्रियता को कम करता है।
  • संसद की स्थायी समिति ने बताया कि भारतीय पेटेंट अधिनियम के अनुच्छेद 3 (d) के तहत प्रावधान केवल श्रेष्ठ और वास्तविक आविष्कारों का पेटेंट करके सामान्य प्रतिस्पर्धा की अनुमति देता है।
  • समय के साथ भारत ने बौद्धिक संपदा अधिकारों (intellectual property) के संबंध में विश्व के साथ तादात्म्य बनाने के लिए भारी प्रयास किए हैं।
  • भारत बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार-संबंधित पहलुओं (TRIPS) पर होने वाले समझौते का एक पक्षकार हैं।
  • भारत जनवरी 1995 में विश्व व्यापार संगठन (WTO) का सदस्य बना।
  • भारत सरकार आईपीआर से संबंधित विभिन्न सम्मेलनों पर हस्ताक्षरकर्ता रही है।

ट्रिप्स और दोहा घोषणा:

  • ट्रिप्स समझौते और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दोहा घोषणा को विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देशों द्वारा वर्ष 2021 में अपनाया गया था।
  • इस घोषणा में “विकासशील और सबसे कम विकसित देशों को प्रभावित करने वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं की गंभीरता” को उजागर कर इन समस्याओं के समाधान के लिए ट्रिप्स को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई का हिस्सा बनने की आवश्यकता पर बल दिया गया ।
  • विश्व व्यापार संगठन वार्ता और दोहा दौर के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: WTO Negotiations and Doha Round
  • सार्वजनिक हित में एक राज्य द्वारा अनिवार्य लाइसेंस का आह्वान किया जा सकता है, जिससे पेटेंट मालिक के अलावा कंपनियों को सहमति के बिना पेटेंट उत्पाद का उत्पादन करने की अनुमति मिल सकती है।

हाल के दिनों में भारत द्वारा उठाए गए सकारात्मक कदम:

  • विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) के प्रदर्शन और फोनोग्राम संधि और डब्ल्यूआईपीओ कॉपीराइट संधि में प्रवेश, को सामूहिक रूप से डब्ल्यूआईपीओ इंटरनेट संधि के रूप में जाना जाता है
  • पेटेंट (संशोधन) नियम, 2020 के तहत फॉर्म 27 से संबंधित संशोधन:कुछ उल्लेखनीय परिवर्तनों में एक से अधिक संबंधित पेटेंट के लिए एक फॉर्म 27 को दाखिल करना, अधिक पेटेंट होने पर संयुक्त फॉर्म दाखिल करना और अधिकृत एजेंटों को फॉर्म जमा करने की अनुमति देना शामिल है।

वे सम्मेलन जिनमे भारत एक हस्ताक्षरकर्ता देश है:

  • बर्न कन्वेंशन (Berne Convention)- यह साहित्यिक और कलात्मक कार्यों की सुरक्षा के लिए है,जिसे 1886 में अपनाया गया था। यह तीन सिद्धांतों पर आधारित है:
  1. राष्ट्रीय उपचार का सिद्धांत।
  2. स्वचालित सुरक्षा का सिद्धांत
  3. सुरक्षा की स्वतंत्रता का सिद्धांत।
  • बुडापेस्ट संधि (The Budapest Treaty ) – इसे 1977 में अपनाया गया था और यह सूक्ष्मजीवों पर अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट प्रक्रिया की एक विशिष्ट विषय से संबंधित है।
    • संधि में पेटेंट के उद्देश्य के लिए सूक्ष्मजीवों को इकठा करने के अंतर्राष्ट्रीय मान्यता के मानदंडों की व्याख्या है।
  • सभी हस्ताक्षरकर्ता देश संधि के मानदंडों को मानने के लिए बाध्य हैं।
  • औद्योगिक संपत्ति के संरक्षण के लिए पेरिस सम्मेलन (The Paris Convention for the Protection of Industrial Property) – इसे व्यापक अर्थों में औद्योगिक संपत्ति के लिए एक रूपरेखा स्थापित करने के लिए अपनाया गया था।
    • यह सम्मेलन पेटेंट, ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिजाइन, उपयोगिता मॉडल, सेवा चिह्न, व्यापार नाम, भौगोलिक संकेत और अनुचित प्रतिस्पर्धा के दमन के लिए मानदंड स्थापित करता है।
  • यह अन्वेषकों/आविष्कारकों को यह सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौता था,कि उनके द्वारा किये गए आविष्कार या खोज/काम अन्य देशों में सुरक्षित हैं।
    • यह सम्मेलन सभी देशों के लिए खुला हुआ है।
    • अनुसमर्थन/परिग्रहण के साधन को डब्ल्यूआईपीओ (WIPO) के महानिदेशक के पास जमा किया जाना चाहिए।
    • (अनुसमर्थन/परिग्रहण-वह कार्य या प्रक्रिया जिसके द्वारा कोई व्यक्ति सम्मान या शक्ति के पद तक पहुँचता है)

WIPO के बारे में भी अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए:WIPO

  • पेटेंट सहयोग संधि (The Patent Cooperation Treaty)-यह आवेदकों को उनके आविष्कारों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट संरक्षण देने में सहायता करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय पेटेंट कानून के रूप में कार्य करती है।
  • यह पेटेंट कार्यालयों को उनके पेटेंट देने के निर्णयों के साथ-साथ उन आविष्कारों से संबंधित तकनीकी जानकारी तक पहुंच की सुविधा भी देता है।

भावी कदम:

  • ट्रिप्स समझौते पर दोहा घोषणापत्र में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि भारत को एक संप्रभु देश के रूप में भारतीय पेटेंट अधिनियम के प्रावधानों के तहत पेटेंट मानदंड पर समझौता नहीं करना चाहिए क्योंकि इस पेटेंट के अनुदान पर जो सीमाएं निर्धारित की हैं वे सशर्त हैं और उनमे लचीलापन है जो सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बदलता रहता है।
  • इसके अलावा, संसदीय स्थायी समिति ने भारत में आईपीआर मानदंडों के संबंध में सामान्य मुद्दों की समीक्षा की है और संसद के दोनों सदनों को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
  • इसलिए, पेटेंट निरस्तीकरण के खतरे, पेटेंट वैधता के अनुमान की कमी और मौजूदा संकीर्ण पेटेंट योग्यता मानदंड जैसे कुछ मुद्दों को हल किया जाना चाहिए।

सारांश:

  • भारत और यू.एस. पेटेंट अधिनियम के बीच विवाद को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की आवश्यकता है, विशेष रूप से व्यापार नीति फोरम के बौद्धिक संपदा कार्य समूह के माध्यम से।
    • हालांकि, भारत को धारा 3 (d) के तहत पेटेंट योग्यता मानदंड से समझौता नहीं करना चाहिए।
    • यूएसटीआर (USTR) द्वारा जारी रिपोर्ट, भारत की पेटेंट व्यवस्था में मौजूद कुछ चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करती है जो पेटेंट की प्रक्रिया को जटिल बनाती हैं।
    • हालांकि, यह सुझाव दिया जाता है कि भारत को एक संप्रभु देश के रूप में, बौद्धिक संपदा अधिकारों के मानदंडों को विनियमित करने के लिए अपना लचीलापन बनाए रखना चाहिए।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

क्या शादी कर लेना गंभीर आपराधिक मामलों को सुलझाने का एक तरीका है?:

समाज:

विषय: महिलाओं की भूमिका, उनकी समस्याएं और उनके उपचार।

मुख्य परीक्षा: उन आधारों पर चर्चा करना जिनके आधार पर किसी अपराधी को किसी अपराध के लिए सजा से छूट दी जा सकती है।

संदर्भ:

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल कर किसी के जीवन की स्थिरता को बनाए रखने के आधार पर दोषियों को यह कहते हुए सजा से मुक्त किया कि आरोपी ने पीड़िता के परिवार के एक सदस्य से शादी कर ली है।

प्रमुख चिंता:

  • इस फैसले ने केवल पीड़ित परिवार के किसी सदस्य से शादी करने के आधार पर किसी दोषी के बरी होने की संभावना पर सवाल खड़ा कर दिया है।
  • अदालत के इस फैसले ने अपराधी द्वारा किए गए अपराध की तीव्रता को कम करने के समाधान के रूप में पीड़ित/पीड़ित के परिवार के सदस्य से शादी करने पर एक नई बहस शुरू कर दी है।

पृष्ठभूमि: पहला मामला

  • शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 142 (Article 142) के प्रावधानों के तहत पीड़िता की बहन से शादी करने के आधार पर धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास के आरोप में दंडित एक व्यक्ति को रिहा कर दिया है।
  • यह मामला मद्रास उच्च न्यायालय में विचाराधीन था।
  • जानकारी मिली हैं कि आरोपी और पीड़िता का परिवार एक ही मोहल्ले में रहता है।
  • परिवार में शांति और व्यवस्था बहाल करने के लिए आरोपी द्वारा सजा को कम करने की अपील की गई थी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने गहन छानबीन के बाद दोनों पक्षों को मिलकर समझौता करने की अनुमति दी।

पृष्ठभूमि: दूसरा मामला

  • एक व्यक्ति पर अपनी नाबालिग भतीजी से बलात्कार करने का आरोप लगाया गया था और उस पर POCSO अधिनियम (POCSO Act.) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
  • बाद में उसने पीड़िता से शादी कर ली थी।
  • तमिलनाडु में अविच्छिन्न विवाह (एक चाचा और उसकी भतीजी के बीच विवाह) के रिवाज को ध्यान में रखते हुए,अदालत ने परिवार में शांति बनाए रखने और उनके विवाहित जीवन को सुखी बनाने के लिए उनकी सजा को रद्द कर दिया था।
  • साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह का फैसला अजीबोगरीब तथ्यों और परिस्थितियों पर आधारित था एवं इसे मिसाल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

संभावित अनुमान:

  • दोनों ही मामलों में शीर्ष अदालत ने एक दोषी व्यक्ति को सजा देने के स्थान पर घरेलू स्थिरता को सर्वोच्चता प्रदान की है।
  • इस फैसले से महिलाओं के खिलाफ हिंसा और यौन उत्पीड़न की दर बढ़ सकती है।
  • ऐसे निर्णय सिर्फ इसलिए अभियुक्तों के पक्ष में प्रतीत होते हैं, कि उन्होंने या तो पीड़िता से या पीड़ित के परिवार के किसी सदस्य से शादी की है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे फैसलों में मुख्य आधार की कमी है।

भावी कदम:

  • एक ऐसे देश में जो लैंगिक समानता और समावेशी समाज की बात करता है, महिलाओं के खिलाफ अपराध की बढ़ती दरें इस पुरुषप्रधान समाज के बारे में प्रमुख चिंताएं पैदा करती हैं ।
  • भारत जैसे विकासशील समाज में, महिलाओं से संबंधित मामलों में निर्णय महिलाओं की गरिमा, स्वतंत्रता और पवित्रता के प्रति अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है।
  • जो न्यायिक प्रणाली स्त्री के आचरण को आधार बना कर न्याय करता हैं, को सुधारात्मक उपायों को अपनाना चाहिए जो एक महिला की गरिमा और सुरक्षा के पक्ष में हों।

सारांश:

  • घरेलू स्थिरता के आधार पर जो दोषियों के दोषमुक्त करता हैं,के फैसलों में मुख्य आधार का अभाव है अतः सर्वोच्च न्यायालय को इस तरह के फैसलों पर फिर से विचार करना चाहिए। स्त्री आचरण को पुरुषवादी दृष्टिकोण से आंकने की धारणा में सुधार करने की आवश्यकता है।

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

भारत-ईरान संबंधों को पुनर्स्थापित करना:

विषय: भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव।

प्रारंभिक परीक्षा: IAEA, OIC की संरचना।

मुख्य परीक्षा: भारत और उसके पारंपरिक सहयोगी ईरान के संबंधों में खटास।

संदर्भ:

  • पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणियों के बाद ईरानी विदेश मंत्री की हालिया यात्रा।

पृष्टभूमि:

  • हाल ही में, ईरानी विदेश मंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा और बुनियादी ढांचे में निवेश के संबंध में भारत के साथ वार्ता की। यह वार्ता इसलिए प्रासंगिक है भारत और ईरान के बीच संबंधों में भिन्नता बढती जा रही है, जिसका कारण संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन की ओर झुकाव है।

भारत के लिए द्विपक्षीय यात्रा का महत्व:

  • इस्लामिक सहयोग संगठन, जो अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार, कश्मीर विवाद और हाल ही में पैगंबर मुहम्मद पर की गई टिप्णियों के खिलाफ कड़ा रुख अपना रहा है, के किसी सदस्य का यह पहला दौरा है।
  • यह यात्रा इजरायल के रक्षा मंत्री बेनी गैंट्ज़ की यात्रा के कारण सफल हुई है तथा यह पश्चिम एशिया में संबंधों के डी-हाइफ़नेशन (इज़रायल-फिलिस्तीन से संबंधित) की भारतीय विदेश नीति का परिणाम है।
  • संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के तहत ईरानी परमाणु परियोजना को पश्चिम द्वारा दी जाने वाली मंजूरी भी IAEA के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के विचाराधीन है।।
  • अफगानिस्तान सरकार के पतन के बाद ईरान और भारत ने तालिबान के साथ एक समझौता किया ताकि यह सुनिश्चित हो कि सीमा पार से आतंकवाद उन्हें प्रभावित न करे।
  • विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संकेत दिया था कि ईरान से तेल का आयात रूसी तेल पर पश्चिम और भारत की निर्भरता को कम का सकता है।
  • भारत के संयुक्त अरब अमीरात-इज़राइल-यूएसए के गठबंधन जिसे ‘ईरान विरोधी’ माना जाता है, में शामिल होने के बाद से यह पहली यात्रा है, साथ ही ये समूह यमनी हौथी विद्रोहियों को ईरानी समर्थक मानते है, जिन्होंने हाल ही में एक यूएई तेल सुविधा पर हमला किया था।

भारत के लिए सुझाए गए उपाय:

  • भारत को इस्लामिक सहयोग संगठन में अपनी आवाज बनाने के लिए ईरान का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि पाकिस्तान संगठन में एक मुखर भारत विरोधी है। कश्मीर विवाद पर हाल की टिप्पणियों पर भारत से कड़ी प्रतिक्रिया दी गई थी तथा इस प्रतिक्रिया को संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे OIC के सदस्यों द्वारा सक्रिय समर्थन मिला।
  • भारत ने इजराइल और ईरान के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाने के लिए अपनी विदेश नीति को एक स्थिर डी-हाइफ़नेशन का रूप दिया है, हालांकि हाल के दिनों में ईरान के साथ संबंधों में खटास आई है बावजूद इसके ईरान अभी भी भारत का पारंपरिक सहयोगी है। भारत को पश्चिम एशियाई राजनीति में यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि उसका राष्ट्रीय हित अंतरराष्ट्रीय मामलों के कारण प्रभावित न हो।
  • JCPOA समझौते को रद्द करने के राष्ट्रपति ट्रम्प के एकतरफा कदम के बाद से ईरान में चाबहार पोर्ट में भारत के निवेश के कारण काफी नुकसान हुआ। हालांकि भारत को चाबहार में व्यापार में छूट दी गई थी, लेकिन ईरानी तेल प्रतिबंधों को कोई छूट नहीं थी। इससे कच्चे तेल की कमी से घरेलू मुद्रास्फीति में तेजी आई है। यदि ईरान और IAEA के बीच समझौता हो जाता है, तो इससे भारत ईरान में पूँजी निवेश कर सकेगा।
  • भारत को अफगानिस्तान पर विशेष ध्यान देते हुए ईरान के साथ साझेदारी मजबूत करनी चाहिए। हाल के दिनों में, भारत की पश्चिमी सीमा पर सीमा पार आतंकवाद, बंदूक और नशीली दवाओं की तस्करी के अधिक मामले सामने आए हैं। यह अफगानिस्तान में अस्थिर स्थिति के कारण है। ईरान की अफगानिस्तान के साथ एक विशाल सीमा है जिसका भारत फ़ायदा उठा सकता है।
  • व्यापार 17 बिलियन डॉलर (2017-18) से घटकर लगभग 2 बिलियन डॉलर (2020-21) हो गया हैं। इससे ईरान का झुकाव चीन की ओर बढ़ रहा है। हालाँकि, चीनी ऋण से श्रीलंका और पाकिस्तान में पैदा हुए संकट का लाभ उठा कर भारत को ईरान के साथ अपने सम्बन्ध मजबूत करने चाहिए क्योंकि इससे इस क्षेत्र का बहुपक्षीय विकास होगा और भारत की ऊर्जा जरूरत भी पूरी होगी ।

भावी नीति

  • भारत और ईरान के बीच संबंधों को बेहतर करने की जरूरत है। दोनों पक्षों की विविध आवश्यकताओं के कारण दोनों के बीच सहयोग, समन्वय और आम सहमति होनी चाहिए।

सारांश:

  • अंतरराष्ट्रीय संबंधों के नए प्रतिमान अप्रत्याशित तथा इलाके बदलते रहते हैं, हालांकि, पारंपरिक गठबंधन वह आधार है जिस पर राष्ट्रीय विदेश नीति अनिश्चितता से बची रहती है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

भारत-पाकिस्तान संबंधों को पाटने वाला एक स्थायी समझौता:

विषय: भारत और उसके पड़ोस- संबंध।

प्रारंभिक परीक्षा: सिंधु जल संधि, सिंधु नदी बेसिन।

मुख्य परीक्षा: सिंधु जल संधि भारतीय उपमहाद्वीप में बहुपक्षीय जुड़ाव और समझौते का एक स्तंभ है।

संदर्भ:

  • भारत और पाकिस्तान के सिंधु आयुक्तों की स्थायी सिंधु आयोग (PIC) की 118 वीं बैठक मई 2022 में नई दिल्ली में आयोजित की गई थी। वर्तमान बैठक में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब की एक सहायक मरुसुदर नदी पर स्थित पाकल दुल और लोअर कलनई जलविद्युत संयंत्रों के निर्माण और तकनीकी डिजाइन पर आपत्तियों पर चर्चा की गई।
  • सिंधु जल संधि (IWT) सिंधु और उसकी सहायक नदियों के पानी का उपयोग करने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच एक स्थापित जल-वितरण संधि है। इस पर तत्कालीन भारतीय प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने विश्व बैंक के तत्वावधान में वार्ता की थी।

इस मुद्दे के बारे में CNA 2nd June 2022 में पढ़ें:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

क्या गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना सही नीति है?:

विषय: प्रमुख फसलें एवं देश के विभिन्न हिस्सों में फसल पैटर्न।

प्रारंभिक परीक्षा: विश्व व्यापार संगठन, MSP, मुद्रास्फीति।

मुख्य परीक्षा: किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य और खाद्य सुरक्षा की आवश्यकता।

संदर्भ:

  • हाल ही में, केंद्र सरकार ने गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है और बाहर जाने वाली चीनी शिपमेंट पर मात्रात्मक प्रतिबंध लगा दिया है। इस साल भीषण गर्मी के कारण कम उपज की उम्मीद से प्रतिबंध लगाया गया है। इस मुद्दे का कई कारकों पर प्रभाव पड़ता है जैसे कि बुवाई वरीयता, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियम और किसानों की आय।

इस मुद्दे के बारे में CNA May 18 2022 में पढ़ें:

प्रीलिम्स तथ्य:

1. थाईलैंड मारिजुआना (गांजा) को वैध करार देने वाला प्रथम एशियाई देश बना:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: विकसित एवं विकासशील देशों की नीतियां और राजनीति का प्रभाव।

प्रारंभिक परीक्षा: मारिजुआना (गांजा-Marijuana)।

संदर्भ:

  • थाईलैंड ने मारिजुआना/गांजे (Thailand Marijuana Legalize) को रखने और उसकी खेती करने को वैध कर दिया गया है।

गहराई से देखने पर:

  • थाईलैंड मारिजुआना/गांजे को वैध बनाकर,ऐसा करने वाला प्रथम एशियाई देश बन गया हैं।
  • यह कृषि और पर्यटन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए किया गया हैं।
  • हालांकि इसके सार्वजनिक रूप से पीने पर प्रतिबंध है।
    • यह कानून के खिलाफ है और नशे की लत पैदा करने वाली दवाओं और पदार्थों के खिलाफ सख्त कानूनों को समाप्त नहीं किया गया है।
  • मारिजुआना से युक्त वस्तुओं को वैध कर दिया गया है,जिसमें कैनबिस-इन्फ्यूज्ड पेय, मिठाई और अन्य पौधे आधारित उत्पाद शामिल हैं।
  • थाईलैंड में थकान को कम करने के लिए दर्द निवारक के रूप में भांग (cannabis) का उपयोग करने की परंपरा रही है। मारिजुआना के औषधीय उपयोग को थाईलैंड में 2018 में वैध कर दिया गया था।
  • मारिजुआना के उपयोग पर प्रतिबंध इसके साइकोएक्टिव घटक, टेट्राकैनाबिनोल के 0.2% से अधिक नहीं होने का प्रावधान करता है।
  • नियम को तोड़ने पर जेल की सजा होगी विशिष्ट शर्तों के साथ और जुर्माने दोनों दंडनीय होंगे।
  • नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट पदार्थ के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act Substance

2. असम रिजर्व में राइनो के पुनरुत्पादन में सफलता:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

पर्यावरण और पारिस्थितिकी:

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं निम्नीकरण और पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन।

प्रारंभिक परीक्षा: मानस राष्ट्रीय उद्यान, इंडियन राइनो विजन 2020।

संदर्भ:

  • 14वीं असम राइनो अनुमान जनगणना के अनुसार, पश्चिमी असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान में एक सींग वाले गैंडों की उच्च जीवन प्रत्याशा और जनसंख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मानस राष्ट्रीय उद्यान (Manas National Park):

  • मानस राष्ट्रीय उद्यान एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और एक बाघ अभयारण्य है।
  • मानस राष्ट्रीय उद्यान असम के दो जिलों बोंगाईगांव और बारपेटा में स्थित है।
  • हिमालय की तलहटी में स्थित यह पार्क भूटान के रॉयल मानस राष्ट्रीय उद्यान से सटा हुआ है।
  • मानस राष्ट्रीय उद्यान के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Manas National Park

इंडियन राइनो विजन 2020:

  • भारतीय राइनो विजन 2020 के तहत गैंडा प्रजनन कार्यक्रम वर्ष 2006 में शुरू किया गया था।
  • इसने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य से गैंडों के स्थानान्तरण के अलावा काजीरंगा में वन्यजीव पुनर्वास और संरक्षण केंद्र में अनाथों को इस योजना के तहत पाला है।
  • इंडियन राइनो विजन 2020 (IRV2020) के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Indian Rhino Vision 2020 (IRV2020)
  • भारतीय गैंडे के लक्षण, व्यवहार और संरक्षण के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Indian Rhinoceros: Characteristics, Behavior and Conservation

3. आगामी राज्यसभा चुनाव की रणभूमि:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राज्यव्यवस्था एवं शासन:

विषय: शासन, संसदीय व्यवस्था और इसके महत्वपूर्ण पहलू।

प्रारंभिक परीक्षा: राज्यसभा चुनाव।

संदर्भ:

  • 4 राज्यों की विधानसभाएं 16 सांसदों को राज्यसभा के लिए चुनने वाली हैं।

राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव किस प्रकार किया जाता हैं?

  • राज्य सभा एक स्थायी सदन है और यह कभी भंग नहीं होती है।
  • राज्यसभा चुनाव में केवल राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य ही मतदान कर सकते हैं।
  • राज्यसभा के लिए छह साल के कार्यकाल के लिए हर दो साल में नए सदस्यों के एक बैच को उच्च सदन में भेजने के लिए मतदान किया जाता है।
  • प्रत्येक राज्य के राज्यसभा सांसदों में से एक तिहाई सदस्य दो साल में एक बार सेवानिवृत्त हो जाते हैं और इन रिक्तियों को भरने के लिए चुनाव होते हैं।
  • किसी विशेष दल के उम्मीदवारों को राज्य विधान सभा में उनकी पार्टी की ताकत के आधार पर उच्च सदन के लिए चुना जा सकता है।
  • मतदान एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है,जिसका अर्थ है कि मतदाता अपनी पसंद के क्रम में कितने भी उम्मीदवारों को वोट दे सकता है।
  • एक उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निर्दिष्ट संख्या में पहली वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है और प्रत्येक वोट का मूल्य 100 होता है।
  • एक एकल सांसद के लिए आवश्यक प्रथम वरीयता मतों की संख्या प्रत्येक राज्य में विधान सभा के आकार और उन सीटों की संख्या के आधार पर भिन्न होती है।
  • संसद सदस्य, सभापति, राज्य सभा के चुनावों के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Members, Chairman, Elections of Rajya Sabha

महत्वपूर्ण तथ्य:

1. आईआईएससी, बेंगलुरु श्रेष्ठ भारतीय विश्वविद्यालय:

  • QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी द्वारा की गई रैंकिंग में भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु (IISc, Bengaluru) देश में शिक्षा के क्षेत्र में शीर्ष राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान है।
  • QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी आईआईएससी, आईआईटी आदि जैसे प्रमुख संस्थानों में बड़े पैमाने पर सुधारों को निर्धारित कर इनकी रैंकिंग करता है।
  • QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में 41 भारतीय विश्वविद्यालयों को शामिल किया गया हैं, जिनमें से कई ने स्थिर स्थितियों में कुछ सुधार दिखाया है,और कुछ में गिरावट की स्थिति देखी गई हैं।
  • IISC विश्व स्तर पर 155वें स्थान पर है और प्रति संकाय संकेतक उद्धरणों में विश्व स्तर पर शीर्ष पर है,जिसका उपयोग विश्वविद्यालयों द्वारा उत्पादित अनुसंधान के प्रभाव का आकलन करने के लिए किया जाता है।
  • यह QS (क्वाक्वेरेली साइमंड्स-Quacquarelli Symonds) रैंकिंग में शीर्ष -200 विश्वविद्यालयों में सबसे तेजी से उभरता दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? (स्तर: मध्यम)

  1. निवर्तमान राष्ट्रपति के कार्यकाल की समाप्ति के कारण हुई रिक्ति को भरने के लिए चुनाव कार्यकाल की समाप्ति के छह महीने के भीतर कराना आवश्यक है और तब तक निवर्तमान राष्ट्रपति कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में कार्य करता रहेगा।
  2. राजनीतिक दल अपने सदस्यों को किसी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने के लिए एक व्हिप जारी कर सकते हैं,जैसा कि राज्यसभा के चुनावों में देखा गया था।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: d

व्याख्या:

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 62 में कहा गया है कि निवर्तमान राष्ट्रपति के पद की अवधि की समाप्ति के कारण हुई रिक्ति को भरने के लिए चुनाव होगा और चुनाव कार्यकाल की समाप्ति से पहले आयोजित किया जाएगा। अतः कथन 1 गलत है।
  • राज्यसभा चुनाव के मामले में राजनीतिक दल अपने सदस्यों को किसी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने के लिए व्हिप जारी नहीं कर सकते हैं। अतः विकल्प 2 गलत है।
  • अतः ‘D’ सही उत्तर है।

प्रश्न 2. विश्व निवेश रिपोर्ट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। (स्तर: मध्यम)

  1. यह व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा प्रकाशित की जाती है।
  2. इस रिपोर्ट के अनुसार, चीन और यू.एस. के बाद भारत तीसरा सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त करने वाला देश है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन से सही हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 , न ही 2

उत्तर: a

व्याख्या:

  • व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की वैश्विक प्रवृत्ति को निर्धारित करने और उसका आकलन करने के लिए सालाना विश्व निवेश रिपोर्ट जारी करता है। अतः विकल्प 1 सही है।
  • विश्व निवेश रिपोर्ट 2021 के अनुसार, भारत FDI प्राप्तकर्ता के रूप में 7वें स्थान पर है।
  • रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका सबसे अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त करता है और शीर्ष स्थान (प्रथम रैंक) पर है। अतः विकल्प 2 गलत है।
  • सही उत्तर ‘a’ है।

प्रश्न 3. समुद्र और सीमावर्ती देश के संबंध में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए। (स्तर: मध्यम)

सागर सीमावर्ती देश

  1. ईजियन सागर तुर्की
  2. ओखोटस्क सागर जापान
  3. एड्रियाटिक सागर इटली
  4. तस्मान सागर ऑस्ट्रेलिया

निम्नलिखित युग्मों में से कौन से सुमेलित है?

(a) केवल 1, 2 और 4

(b) केवल 2, 3 और 4

(c) 1, 2, 3 और 4

(d) केवल 1 और 3

उत्तर: c

व्याख्या:

  • ईजियन सागर ग्रीस और तुर्की के बीच स्थित है। इसकी सीमा ग्रीस, तुर्की, उत्तरी मैसेडोनिया, सर्बिया, बुल्गारिया से लगती है। अतः विकल्प 1 सही है।
  • ओखोटस्क सागर जापान और रूस (कामचटका प्रायद्वीप) से घिरा हुआ है। अतः विकल्प 2 सही है।
  • एड्रियाटिक सागर के तट पर स्थित देशों में अल्बानिया, बोस्निया, हर्जेगोविना, क्रोएशिया, मोंटेनेग्रो, इटली और स्लोवेनिया शामिल हैं। अतः विकल्प 3 सही है।
  • तस्मान सागर की सीमा पश्चिम में ऑस्ट्रेलिया और पूर्व में न्यूजीलैंड से लगती है। अतः विकल्प 4 सही है।
  • इसलिए, ‘C’ (1,2,3,4) सही उत्तर है।

प्रश्न 4. बांड प्रतिफल के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से गलत है/हैं? (स्तर: कठिन)

  1. बांड मूल्य और बांड प्रतिफल के बीच विपरीत संबंध होता है।
  2. अर्थव्यवस्था में उच्च ब्याज दरों से बांड प्रतिफल कम होगा।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: b

व्याख्या:

  • बॉन्ड की कीमत और बॉन्ड यील्ड के बीच एक व्युत्क्रम/विपरीत संबंध होता है।
  • जब बांड की कीमत अंकित मूल्य से कम होती है, तो बांड प्रतिफल हैंडबिल दर से अधिक होता है। अतः विकल्प 1 सही है।
  • इसके विपरीत जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो नए बॉन्ड निवेशकों को मौजूदा बॉन्ड की तुलना में बेहतर ब्याज दरों का भुगतान करते हैं।
  • वैसे पुराने बॉन्ड कम आकर्षक होते हैं और मुआवजे के रूप में अपनी कीमतों को कम कर देते हैं, और रियायती मूल्य पर बेचे जाते हैं। अतः विकल्प 2 गलत है।
  • सही उत्तर ‘B’ (केवल 2) है।

प्रश्न 5. भारत में माइक्रोबियल रोगजनकों में बहु-दवा प्रतिरोध के निम्नलिखित में से कौन से कारण हैं? (स्तर: मध्यम)

  1. कुछ लोगों की आनुवंशिक प्रवृत्ति।
  2. बीमारियों को ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं की गलत खुराक लेना।
  3. पशुओं पर एंटीबायोटिक का प्रयोग।
  4. कुछ लोगों में कई पुरानी बीमारियां।

निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) 1, 3 और 4

(d) 2, 3 और 4

उत्तर: b

व्याख्या:

  • भारत में माइक्रोबियल रोगजनकों में बहु-दवा प्रतिरोध के कारणों में एंटीबायोटिक दवाओं की गलत खुराक लेना जैसे रोगों को ठीक करने के लिए, पशुधन की खेती में एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग, तेजी से उत्परिवर्तन, सूक्ष्मजीवों में जीन पुनर्संयोजन, सूक्ष्मजीवों द्वारा दवा की एंजाइमेटिक निष्क्रियता, प्रोटीनयुक्त पंपों का विकास आदि शामिल है।अतः विकल्प 2 और 3 सही है।
  • कुछ लोगों की आनुवंशिक प्रवृत्ति और कुछ लोगों में कई पुरानी बीमारियों को माइक्रोबियल रोगजनकों में बहु-दवा प्रतिरोध से संबंधित नहीं किया जा सकता है।
  • अतः विकल्प 1 और 4 गलत है। अतः ‘B’ सही उत्तर है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. भारत में पेटेंट अधिनियम की मुख्य विशेषताओं पर चर्चा करें और बौद्धिक संपदा के मोर्चे पर भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच की बाधाओं की जांच करें। (250 शब्द, 15 अंक)

प्रश्न 2. बलात्कार के अपराधियों को पीड़ितों से शादी करने की अनुमति देने वाले न्यायिक फैसले कानून के शासन के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं। चर्चा कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)

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