13 जून 2023 : समाचार विश्लेषण
A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: राजव्यवस्था एवं शासन:
C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: राजव्यवस्था एवं शासन:
सामाजिक न्याय:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G. महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
क्या MSP में बढ़ोतरी से किसानों को फायदा होगा?
राजव्यवस्था एवं शासन:
विषय: सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप।
प्रारंभिक परीक्षा: न्यूनतम समर्थन मूल्य।
मुख्य परीक्षा: न्यूनतम समर्थन मूल्य और संबंधित चिंताएं।
प्रसंग:
- केंद्र सरकार ने खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) में 5-10% की बढ़ोतरी की है।
भूमिका:
- केंद्र ने खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में पिछले सीजन की तुलना में 5-10% की बढ़ोतरी की घोषणा की है।
- इस कदम के निम्न उद्देश्य है:
- उत्पादकों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना।
- फसल विविधीकरण (crop diversification) को प्रोत्साहित करना।
- सरकार की इस घोषणा को मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है। उदाहरण के लिए,
- कुछ कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि MSP में बढ़ोतरी से किसानों को थोड़ी राहत मिलेगी।
- हालांकि, उनका यह भी तर्क है कि देश के अधिकांश हिस्सों में MSP पर फसलों की खरीद के लिए किसी भरोसेमंद या सुनिश्चित बाजार तंत्र की अनुपस्थिति फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य को विफल करती है।
- खरीफ की फसलों में MSP द्वारा की गई वृद्धि से किसानों के प्रतिनिधियों का एक वर्ग नाखुश है और उन्होंने इस बढ़ोतरी को ‘अल्प’ वृद्धि करार दिया है।
UPSC परीक्षा के लिए कृषि में MSP, न्यूनतम समर्थन मूल्य, MSP से संबंधित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: MSP, Minimum Support Price, MSP in agriculture for UPSC exam
विवरण:
- सरकार ने 7 जून 2023 को वर्ष 2023-24 के विपणन सीजन के लिए 17 ‘खरीफ फसलों’ के लिए MSP की घोषणा की।
- सरकार का कहना है कि MSP में वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 की घोषणा के अनुरूप है जिसमें MSP को उत्पादन की अखिल भारतीय भारित औसत लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर तय करने की घोषणा की गई थी।
चित्र स्रोत: The Hindu
किसानों की चिंताएं:
- कई किसान संगठनों ने इस वृद्धि को अपर्याप्त बताया है क्योंकि अनुचित MSP के साथ बढ़ी हुई इनपुट लागत किसानों के बड़े हिस्से (विशेष रूप से छोटे और सीमांत) को कर्ज में डूबा देगी।
- इसके अलावा, सरकार का यह वादा कि MSP की गणना स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार की जाएगी, अभी भी अधूरा है।
- जिसमें यह सिफारिश की गई थी कि MSP C2+50% (C2 या उत्पादन की व्यापक लागत) होनी चाहिए।
- भारतीय किसान यूनियन (एकता-उगराहन) और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने यह कहते हुए बढ़ोतरी को खारिज कर दिया है कि यह एक लाभकारी मूल्य प्रदान नहीं करता है।
- कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि पिछले ट्रैक रिकॉर्ड के अनुसार, केवल कुछ फसलों (गेहूं, धान और कपास) की MSP पर खरीद की जा रही है, जबकि अन्य की MSP से बहुत कम कीमत पर खरीद की जा रही है।
- फसल विविधीकरण में प्रमुख बाधाएं MSP को लागू नहीं करना और बड़ी संख्या में फसलों की MSP से कम मूल्य पर खरीद है।
भारत में खाद्यान्न भंडार:
- वर्ष 2022-23 के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, भारत में कुल खाद्यान्न उत्पादन 330.5 मिलियन टन होने का अनुमान है। यह 2021-22 की तुलना में 14.9 मिलियन टन अधिक है।
- सरकारी सूत्रों का दावा है कि यह पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी है।
- भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India (FCI)) और राज्य एजेंसियों के पास चावल और गेहूं का कुल स्टॉक 555.34 लाख टन (1 मई 2023 को) है। इसमें 265.06 लाख टन चावल और 290.28 लाख टन गेहूं शामिल है।
भावी कदम:
- किसानों की आय में वृद्धि किसानों के संकट का दीर्घकालिक समाधान होना चाहिए।
- सरकार को सभी प्रमुख फसलों के लिए MSP पर सुनिश्चित खरीद और किसानों को रिटर्न प्रदान करने के लिए एक प्रभावी प्रणाली स्थापित करनी चाहिए।
- इनपुट लागत पर सब्सिडी देने का एक वैकल्पिक विकल्प तलाशा जाना चाहिए।
सारांश:
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
कोविन (CoWIN) टीकाकरण डेटा लीक, सरकार ने उल्लंघन से इनकार किया:
राजव्यवस्था एवं शासन:
विषय: डेटा सुरक्षा।
प्रारंभिक परीक्षा: कोविन (CoWIN) पोर्टल।
मुख्य परीक्षा: डेटा उल्लंघन और डेटा गोपनीयता।
भूमिका:
- कई राजनेताओं सहित कोविड टीकाकरण लाभार्थियों का कथित डेटा लीक हुआ है।
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि ऐसी रिपोर्टें निराधार हैं और प्रकृति में शरारतपूर्ण हैं क्योंकि कोविन (CoWIN) पोर्टल डेटा गोपनीयता के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों के साथ पूरी तरह से सुरक्षित था।
विवरण:
- रिपोर्टों के अनुसार, यदि व्यक्ति का मोबाइल नंबर दर्ज करने पर उत्तर के रूप में प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ (आधार/पासपोर्ट/पैन) की पहचान संख्या, लिंग, जन्म तिथि और टीकाकरण केंद्र जैसे विवरण प्राप्त होते हैं तो यह डेटा उल्लंघन का संकेत हैं।
- हालाँकि, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि CoWIN सुरक्षित है और डेटाबेस का उल्लंघन CoWIN के अलावा किसी और का हुआ था।
- विशेष रूप से, CoWIN को आरोग्य सेतु (Aarogya Setu) और UMANG ऐप्स में एकीकृत किया गया है और इस प्रकार इसने गंभीर चिंताएँ पैदा की हैं।
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (Indian Computer Emergency Response Team (CERT-In) से इस मुद्दे की जांच करने और एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अनुरोध किया।
- अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में CERT-in ने बताया कि टेलीग्राम बॉट के लिए बैक-एंड डेटाबेस (जो व्यक्तियों का विवरण दे रहा है) CoWIN डेटाबेस के API को सीधे एक्सेस नहीं कर रहा था।
- आरोपों के बावजूद, स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि CoWIN के पास अत्याधुनिक सुरक्षित बुनियादी ढाँचा है और उसे कभी भी सुरक्षा उल्लंघन का सामना नहीं करना पड़ा है।
- जून 2021 में इसी तरह की एक घटना में, ‘डार्क लीक मार्केट’ नाम के एक हैकर समूह ने दावा किया था कि उसके पास लगभग 15 करोड़ भारतीयों का डेटाबेस था, जिन्होंने CoWIN पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया था। अधिकारियों ने तब भी दावे को खारिज कर दिया था।
अधिक जनकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: https://byjus.com/govt-exams/umang/
सारांश:
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संपादकीय-द हिन्दू
संपादकीय:
पहलवानों के विरोध और असहमति के लिए सिकुड़ती जगह:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
राजव्यवस्था एवं शासन:
विषय: दबाव समूह और राजनीति में उनकी भूमिका।
मुख्य परीक्षा: पहलवानों का विरोध और उससे जुड़ी चिंताएँ।
भूमिका:
- विरोध प्रदर्शन जनता (व्यक्तियों, वर्गों और समुदायों) को अपनी शिकायतों के लिए आवाज उठाने और अपने अधिकारों की मांग करने की अनुमति देते हैं।
- विरोध प्रदर्शन सामाजिक और नीति परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं।
- पदक विजेता पहलवानों ने लगभग चार महीने तक विरोध किया और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। अध्यक्ष पर महिला पहलवानों और एक नाबालिग का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है।
यह भी पढ़ें: Right to Protest under the Indian Constitution [UPSC Polity Notes]
विवरण:
- सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही WFI प्रमुख के खिलाफ दो प्राथमिकियाँ (FIRs) दर्ज की गईं।
- पहलवानों की गृह मंत्री और खेल मंत्री से बातचीत के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका है।
- पहलवानों को महिलाओं, छात्रों और युवाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले नागरिक समाज संगठनों से समर्थन मिला है। हालांकि, यह पहले के अन्य विरोध प्रदर्शनों की तुलना में बहुत कम है।
संबद्ध चिंताएँ:
- यह देखा गया है कि विरोध जनता (विशेष रूप से, मध्यम वर्ग और महिला समूहों, जो 2012 में निर्भया विरोध में सबसे आगे थे) से समर्थन हासिल करने में विफल रहे हैं।
- लेखक का तर्क है कि मौजूदा शासन के तहत विरोध प्रदर्शनों को अक्सर ‘राष्ट्र-विरोधी’ करार दिया जाता है।
- लैंगिक न्याय का मुद्दा होने के बावजूद, महिला समूह बड़े पैमाने पर विरोध से गायब हैं।
- कुश्ती को भारत में अन्य खेलों की तरह महत्त्व और समर्थन नहीं मिला है। यह भी सुझाव दिया गया है कि विरोध करने वाले पहलवान ज्यादातर साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं।
- लेखक ने अन्ना हजारे आंदोलन (2011) और निर्भया आंदोलन (दिसंबर 2012) के माध्यम से मध्य वर्गों की सक्रिय भागीदारी के महत्व पर भी प्रकाश डाला है, जो पहलवानों के विरोध में प्रमुख रूप से गायब है।
- एफआईआर में दर्ज गंभीर आरोपों के बावजूद WFI प्रमुख और सांसद की कोई राजनीतिक निंदा नहीं होने के कारण सरकार पर जनता का अपर्याप्त दबाव है।
- इस प्रकार यह पितृसत्ता और यौन उत्पीड़न का समाज द्वारा सामान्यीकरण करने का प्रतीक है।
संबंधित लिंक:
Wrestlers’ Protest [What the Law Says – UPSC Current Affairs]
सारांश:
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समलैंगिक विवाह: नैतिकता बनाम समानता:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
सामाजिक न्याय:
पाठ्यक्रम: अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।
मुख्य परीक्षा: समलैंगिक विवाह।
प्रसंग:
- सर्वोच्च न्यायालय ने समलैंगिक विवाहों पर सुनवाई शुरू कर दी है।
भूमिका:
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर सुनवाई शुरू की। उस दौरान दुनिया के प्रमुख दार्शनिकों में से एक माइकल सैंडल ने भी भारत का दौरा किया था।
- सैंडल की समकालीन उदारवाद की आलोचना व्यक्तिगत अधिकारों के उदार ढांचे के भीतर समलैंगिक विवाह के मुद्दे को सुलझाने के किसी भी प्रयास में कठिनाई को उजागर करती है।
समलैंगिक विवाहों के विवरण के लिए, यहां पढ़ें: Same-sex Marriages in India [UPSC Current Affairs]
विवरण:
- यदि न्यायालय को विवाह के अधिकार पर निर्णय करना है, तो विवाह की वांछनीयता, विवाह की संस्था आदि जैसे नैतिक प्रश्नों पर अपनी तटस्थता की नीति छोड़ना की आवश्यकता होगा।
- विशेष रूप से, नैतिक मुद्दों पर तटस्थता बनाए रखने के लिए कई मामलों में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संवैधानिक नैतिकता का उपयोग किया जाता है।
- तटस्थता को ध्यान में रखते हुए न्यायालय लिव-इन रिलेशनशिप में सिर्फ कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने तक हो सीमित हो गया।
- यदि न्यायालय समलैंगिक विवाह को समानता के आधार पर मान्यता देता है, तो उसे विवाह को एक सामाजिक सम्मान के रूप में मान्यता देनी होगी और इसके नैतिक मूल्य घोषित करना होगा।
- जो नागरिक विवाह को एक विषमलैंगिक संस्था के रूप में देखते और महत्व देते हैं, उन्हें समलैंगिक विवाह को “अजनबियों के प्रति हमारे कर्तव्य” के रूप में मान्यता देने की आवश्यकता होगी।
- हालांकि, इस बारे में अन्य महत्वपूर्ण चिंताएं उठाई गई हैं कि क्या न्यायालय (या केंद्रीकृत राज्य) समाज में नैतिक मुद्दों पर निर्णय लेने या उन्हें हल करने में सक्षम है।
अन्य विवरण:
- मैसाचुसेट्स में गुडरिज बनाम डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ (2003) मामले में, सर्वोच्च न्यायिक न्यायालय ने समलैंगिक विवाह को न केवल समानता और पसंद की स्वतंत्रता के आधार पर बल्कि वैवाहिक सदाचार घोषित करके वैध करार दिया।
- हालाँकि, भारत में विवाह को पारंपरिक रूप में देखा जाता है।
- कई विद्वानों ने उल्लेख किया है कि भारतीय समाज में घृणा या द्वेष की वह भावना नहीं है जैसा दुनिया के अन्य हिस्सों में समलैंगिकों के साथ व्यवहार किया जाता था।
- इसके अलावा, जब भारत में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया था तब कोई हंगामा नहीं हुआ था।
- यह अनुशंसा की जाती है कि समलैंगिक विवाहों के प्रश्नों को आयरलैंड या फ़िनलैंड के सामान नागरिकों की सभाओं या नागरिकों के विमर्श पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
संबंधित लिंक:
UPSC Exam Comprehensive News Analysis. Apr 17th, 2023 CNA. Download PDF
सारांश:
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प्रीलिम्स तथ्य:
1. दशक के अंत तक चीन के पास अमेरिका या रूस जितने ICBM हो सकते हैं: SIPRI
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
विषय: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएं और मंच- उनकी संरचना, और अधिदेश।
प्रारंभिक परीक्षा: SIPRI।
विवरण:
- स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की वार्षिक रिपोर्ट (12 जून 2023 को जारी) के अनुसार, चीन ने अपने परमाणु शस्त्रागार को जनवरी 2022 में 350 वारहेड से बढ़ाकर जनवरी 2023 में 410 कर दिया है।
- इसने इस बात पर प्रकाश डाला कि दशक के अंत तक, चीन के पास संभावित रूप से अमेरिका या रूस के बराबर अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBMs) हो सकती हैं।
- ऐसा पता चला है कि भारत और पाकिस्तान के परमाणु जखीरे भी बढ़ गए हैं।
- भारत का शस्त्रागार वर्ष 2022 में 160 वॉरहेड से बढ़कर वर्ष 2023 में 164 हो गया।
- जबकि पाकिस्तान की संख्या 165 (2022 में) से बढ़कर 170 (2023 में) हो गई।
- कुल परमाणु हथियारों का लगभग 90% हिस्सा रूस और अमेरिका के पास है।
- इसके अलावा, जनवरी 2023 में 12512 वॉरहेड्स की कुल वैश्विक सूची में से लगभग 9576 संभावित उपयोग के लिए सैन्य भंडार में थे।
चित्र स्रोत: The Hindu
अधिक जानकारी के लिए: SIPRI Yearbook 2022| Stockholm International Peace Research Institute| UPSC Notes
महत्वपूर्ण तथ्य:
- यू.एस. यूनेस्को में फिर से शामिल होगा:
- यूनेस्को ( UNESCO) द्वारा यह घोषणा की गई कि फिलिस्तीन को एक सदस्य के रूप में शामिल करने के यूनेस्को के कदम से एक दशक लंबे विवाद के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका संगठन में फिर से शामिल होने की योजना बना रहा है।
- अमेरिका लगभग 600 मिलियन डॉलर की बकाया राशि का भी भुगतान करेगा।
- संगठन के नीति निर्माण में अमेरिका द्वारा पैदा की गई कमी को चीन द्वारा भरे जाने के चलते उत्पन्न चिंताओं के कारण अमेरिका ने संगठन में फिर से शामिल होने का फैसला किया है।
- आवारा कुत्तों द्वारा एक विकलांग लड़के को नोचकर मार डालने के बाद केरल सरकार के निशाने पर:
- केरल के कन्नूर में एक 11 वर्षीय विकलांग लड़के को आवारा कुत्तों ने नोच-नोच कर मार डाला।
- इस घटना ने राज्य में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे का मुद्दा खड़ा कर दिया है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर इस मुद्दे को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।
- विपक्ष का तर्क है कि राज्य में पशु जन्म नियंत्रण ( animal birth control) और एंटी-रेबीज टीकाकरण अभियान ठप हो गया है।
- इस घटना और इससे निपटने में सरकार की अक्षमता के बाद सोशल मीडिया पर भी आक्रोश फूट पड़ा है।
आवारा कुत्तों के खतरे पर निबंध [यूपीएससी करेंट अफेयर्स] से से सम्बन्धित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: Stray Dog Menace Essay [UPSC Current Affairs]
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. रक्षा अभ्यास और उनमें शामिल देशों के युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं? (स्तर- कठिन)
- एकुवेरिन: मालदीव
- खान क्वेस्ट: मंगोलिया
- लामित्ये: श्रीलंका
- डस्टलिक: उज़्बेकिस्तान
विकल्प:
- केवल एक युग्म
- केवल दो युग्म
- केवल तीन युग्म
- सभी चारों युग्म
उत्तर:c
व्याख्या:
- एकुवेरिन अभ्यास: भारत और मालदीव
- खान क्वेस्ट: मंगोलिया में वार्षिक सैन्य अभ्यास
- लामित्ये: भारत-सेशेल्स संयुक्त सैन्य अभ्यास
- डस्टलिक: भारत और उज्बेकिस्तान
प्रश्न 2. भारत-नेपाल संबंधों के संबंध में कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं? (स्तर- मध्यम)
- भारत-नेपाल मित्रता संधि पर 1950 में हस्ताक्षर किए गए थे।
- दोनों देशों के बीच मोतिहारी-अमलेखगंज पेट्रोलियम उत्पाद पाइपलाइन मौजूद है।
- भारत नेपाल में पंचेश्वर पनबिजली परियोजना का निर्माण कर रहा है।
विकल्प:
- केवल एक कथन
- केवल दो कथन
- सभी तीनों कथन
- कोई नहीं
उत्तर:c
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: भारत-नेपाल मित्रता संधि पर 1950 में हस्ताक्षर किए गए थे।
- कथन 2 सही है: मोतिहारी-अमलेखगंज पेट्रोलियम उत्पाद पाइपलाइन दोनों देशों के बीच मौजूद है।
- कथन 3 सही है: पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना, महाकाली संधि की एक महत्वपूर्ण शाखा, पर 1996 में नेपाल और भारत के बीच हस्ताक्षर किए गए थे।
प्रश्न 3. “वन फ्यूचर गठबंधन” निम्नलिखित में से किससे संबंधित है? (स्तर- सरल)
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से निपटना
- उन क्षुद्रग्रहों का मार्ग बदलने के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास जो पृथ्वी से टकराने के मार्ग पर हैं
- एक स्वास्थ्य (One Health) दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने के लिए रोगाणुरोधी प्रतिरोध के खिलाफ WHO का मिशन।
उत्तर:a
व्याख्या:
- “वन फ्यूचर गठबंधन” डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से संबंधित है। यह समान विचारधारा वाले देशों को लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की अनुमति देगा।
प्रश्न 4. सही कथन/कथनों की पहचान कीजिए: (स्तर- कठिन)
- स्वालबार्ड दुनिया की सबसे उत्तरी आबाद (बसी हुई) भूमि है।
- यह रूस का हिस्सा है।
- 1997 में इसरो ने वहां एक नई रॉकेट लॉन्चिंग रेंज के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
विकल्प:
- केवल एक कथन
- केवल दो कथन
- सभी तीनों कथन
- कोई नहीं
उत्तर:b
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: स्वालबार्ड दुनिया की सबसे उत्तरी बसी हुई भूमि है।
- कथन 2 गलत है: स्वालबार्ड नॉर्वे का एक हिस्सा है।
- कथन 3 सही है: इसरो ने 1997 में वहां एक नई रॉकेट लॉन्चिंग रेंज के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
प्रश्न 5. निम्नलिखित में से कौन-सा एक जीव, अन्य तीन जीवों के वर्ग का नहीं है? (स्तर- सरल)
- केकड़ा
- बरूथी
- बिच्छू
- मकड़ी
उत्तर:a
व्याख्या:
- बरूथी, बिच्छू और मकड़ियाँ एरेक्निड्स हैं जबकि केकड़ा क्रस्टेशियन है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. आवारा कुत्तों को उचित स्वास्थ्य देखभाल और आवास प्रदान करने के लिए सरकारों को पशु कल्याण संगठनों के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। टिप्पणी कीजिए।
(10 अंक, 150 शब्द) [जीएस-2, शासन]
प्रश्न 2. आपको क्यों लगता है कि यौन उत्पीड़न के खिलाफ पहलवानों के विरोध प्रदर्शन को नागरिक समाज से वैसी प्रतिक्रिया नहीं मिली है जैसी पिछली घटनाओं में मिली थी?
(15 अंक, 250 शब्द) [जीएस-2, राजव्यवस्था एवं शासन]