19 अगस्त 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

शासन:

  1. सूचना प्रौद्योगिकी नियम:

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

आपदा प्रबंधन:

  1. एंडोसल्फान के पीड़ित:

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

अर्थव्यवस्था:

  1. भारत के श्रम सुधारों का कड़वा सच:

शासन:

  1. क्या ‘फ्रीबीज’ की भी कोई सीमा होनी चाहिए?

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. इतना अच्छा कि यकीन करना मुश्किल है:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. काराकोरम पर्वतमाला:
  1. दूध में मिलावट (Milk Adulteration):

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्याएँ :

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

सूचना प्रौद्योगिकी नियम:

शासन:

विषय: सरकारी नीतियां-उनके डिजाइन एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न मुद्दे।

मुख्य परीक्षा: आईटी नियमों (Information Technology Rules(IT Rules)) के सकारात्मक पहलू एवं अस्पष्टताएं।

प्रसंग:

  • वीडियोलैन क्लाइंट ( VideoLAN Client (VLC)) की वेबसाइट को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है।

वीडियोलैन (VideoLan) क्या है और इसे प्रतिबंधित क्यों किया गया है?

  • वीएलसी 1990 के बाद से भारत में सबसे लोकप्रिय मीडिया प्लेयर में से एक रही है।
  • यह मुफ़्त और खुला स्रोत है यह आसानी से अन्य प्लेटफ़ॉर्म और स्ट्रीमिंग सेवाओं के साथ एकीकृत हो जाता है,तथा यह अतिरिक्त कोडेक के बिना सभी फ़ाइल स्वरूपों को सपोर्ट (supports) करता है।
  • अभी तक इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने इन प्रतिबंधों के संबंध में विभिन्न नागरिक समाज संगठनों द्वारा दायर आरटीआई आवेदनों का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया है।
  • सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की जानकारी के अभाव में विभिन्न प्रकार की अटकलें लगाई गई है,जैसे कि फरवरी 2022 में वीएलसी को 54 चीनी ऍप्लिकेशन्स के साथ प्रतिबंधित कर दिया गया था।
  • हालांकि वीएलसी एक चीनी ऐप नहीं है,लेकिन साइबर सुरक्षा फर्मों की कई रिपोर्टों में इस बात का खुलासा किया गया हैं कि कथित तौर पर चीन द्वारा समर्थित एक हैकर समूह, सिकाडा (Cicada) एक दुर्भावनापूर्ण मैलवेयर लोडर को तैनात करने के लिए वीएलसी का उपयोग कर रहा है।
  • केवल वीएलसी वेबसाइट को प्रतिबंधित किया गया है,और जबकि इस एप्लिकेशन को डाउनलोड किया जा सकता है क्योंकि ऐप स्टोर के सर्वर उन सभी सर्वरों से सुरक्षित माने जाते हैं जहां डेस्कटॉप संस्करण होस्ट किए जाते हैं।

किन स्थितियों में ऑनलाइन सामग्री को प्रतिबंधित किया जा सकता है?

  • सरकार 2 तरीकों- कार्यकारी और न्यायिक के माध्यम से सामग्री को प्रतिबंधित कर सकती है।
  • कार्यकारी: भारत सरकार को यह शक्ति सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत दी गई है।(Section 69A of the Information Technology Act, 2000.)
  • इसके तहत सरकार भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित में किसी भी कंप्यूटर में उत्पन्न, प्रेषित, प्राप्त, संग्रहीत या होस्ट की गई किसी भी जानकारी को “जनता तक पहुँचने से रोकने और उसे प्रतिबंधित” करने के लिए एक मध्यस्थ को निर्देशित कर सकती है।
  • केवल केंद्र सरकार बिचौलियों को सीधे ऑनलाइन सामग्री तक पहुंच को अवरुद्ध करने के निर्देश देने की इस शक्ति का प्रयोग कर सकती है।
  • संविधान के अनुच्छेद 19(2) Article 19(2) के तहत उचित प्रतिबंध धारा 69A को सशक्त बनाता है।
  • न्यायिक: भारत में अदालतें बिचौलियों को पीड़ित को न्याय देने के लिए सामग्री पर प्रतिबन्ध लगाने का निर्देश दे सकती हैं।
  • उदाहरण के लिए, अदालतें इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को उन वेबसाइटों को ब्लॉक करने का आदेश दे सकती हैं जो पायरेटेड सामग्री का इस्तेमाल करती हैं और वादी के कॉपीराइट का उल्लंघन करती हैं।

भावी कदम:

आईटी नियम 2009 में सुधार:

  • पारदर्शिता हेतु प्रावधान:
    • पारदर्शिता के लिए नियमों की गोपनीयता के प्रावधानों पर दोबारा गौर किया जाना चाहिए।
    • सभी मामलों में प्रभावित पक्षों को नियमों के तहत समिति के समक्ष अपना तर्क रखने का समान अवसर देना।
    • निर्माता/मेजबान द्वारा स्पष्टीकरण देने के अवसर की कमी नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
    • नियमों के तहत समीक्षा समिति के लिए प्रासंगिक नियमों के साथ प्रभावी समीक्षा तंत्र।
  • श्रेया सिंघल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आईटी नियम, 2009 में निहित प्रक्रिया को इस आधार पर बरकरार रखा है कि यह विचार और पारदर्शिता हेतु पर्याप्त तंत्र/स्वायत्तीकरण प्रदान करता है।
  • सरकार के लिए अच्छा होगा कि वह स्वयं के नियमों को सही भावना के साथ लागु करें।

सारांश:

  • इंटरनेट की पहुंच और ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं को बड़ा नुकसान पहुंचाने की इसकी क्षमता को ध्यान में रखते हुए, दुनिया भर की सरकारें उपलब्ध ऑनलाइन सामग्री के नियमन के लिए निगरानी और निर्देश जारी करने की शक्ति अपने पास सुरक्षित रखती हैं। आईटी नियमों में समय-समय पर और जरूरी/प्रासंगिक संशोधन मुक्त भाषण को बनाए रखेंगे जिसमे कुछ प्रकार की सेंसरशिप भी शामिल होगी।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

एंडोसल्फान के पीड़ित:

आपदा प्रबंधन:

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

मुख्य परीक्षा: न्यायिक सक्रियता का महत्व।

संदर्भ:

  • हाल ही में,सुप्रीम कोर्ट ने कासरगोड जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण को केरल में एंडोसल्फान पीड़ितों को दी जाने वाली चिकित्सा और उपशामक देखभाल सेवाओं पर छह सप्ताह में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

मुद्दा: आदेश के पीछे का तर्क

  • एंडोसल्फान पीड़ितों को स्वास्थ्य देखभाल में पर्याप्त बुनियादी ढांचा प्रदान करने में केरल राज्य सरकार की विफलता के संबंध में कई प्रकार की शिकायतें दर्ज करवाई गई हैं।
  • राज्य सरकार ने यह दावा किया है कि शीर्ष अदालत के वर्ष 2017 के फैसले के अनुसार पीड़ितों में से 98% (3700 से अधिक लोगों) को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है।
  • केरल सरकार ने यह भी तर्क दिया कि उसने पीड़ितों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ भी दी हैं।

केरल का मामला:

  • केरल के गांवों ने 1970 के दशक के मध्य से 4,600 हेक्टेयर काजू के बागान पर एंडोसल्फान का हवाई छिड़काव किया गया था। उसके पश्चात वहां के स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर बीमारियों, पक्षाघात और विकृतियों का अनुभव किया और इसने लोगों के आनुवंशिक और अंतःस्रावी तंत्र को प्रभावित किया।

सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश:

  • केरल में कासरगोड जिले में जहाँ इस कीटनाशक का छिड़काव किया गया था,वहां इससे फैले प्रदुषण ने हजारों घरों को प्रभावित किया जिसके कारण यह प्रदूषण का केंद्र बिंदु बन गया, जिसके बाद कानूनी सेवा प्राधिकरण की टीम द्वारा चिकित्सा, उपशामक और भौतिक चिकित्सा सुविधाओं की जांच करने का आदेश दिया गया था।
  • इस टीम को जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं का दौरा करने की सलाह दी गई है,ताकि जमीनी स्तर पर स्थिति का पूर्ण और निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके।

सारांश:

  • सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के अपने फैसले पर केरल सरकार की निष्क्रियता को भयावह और इसे ‘स्वास्थ्य के अधिकार’ के खिलाफ बताया जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन के अधिकार’ का एक महत्वपूर्ण घटक है।
  • एंडोसल्फान पर अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए:Endosulfan

संपादकीय-द हिन्दू

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

भारत के श्रम सुधारों का कड़वा सच:

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से संबंधित मुद्दे।

प्रारंभिक परीक्षा: भारत में श्रम सुधारों से संबंधित तथ्य।

मुख्य परीक्षा: भारत में श्रम सुधारों का मूल्यांकन।

संदर्भ:

  • इस लेख में आजादी के 75 वर्षों के दौरान देश में हुए श्रम सुधारों का आकलन और मूल्यांकन किया गया है।

पृष्टभूमि:

  • COVID महामारी के दौरान कई लाख नागरिकों ने अपनी आय और आजीविका के स्रोत खो दिए लेकिन, इसी अवधि के दौरान भारत में अरबपतियों की संख्या में वृद्धि हुई है।
  • भारत में सबसे बड़ी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों में से एक लाखों लोगों की पर्याप्त आय और आजीविका अर्जित करने में असमर्थता है।
  • रोजगार की खराब गुणवत्ता जिसमें अपर्याप्त आय और कठोर काम करने की स्थिति शामिल है, को इस का एक प्रमुख कारण कहा जाता है।
  • विभिन्न सिद्धांतों के अनुसार, यह माना जाता है कि “व्यापार करने में आसानी में सुधार करके रोजगार बढ़ाया जा सकता है, इस उम्मीद के साथ कि व्यवसायों में निवेश से नागरिकों को अपनी आजीविका अच्छी तरह से चलाने में आसानी होगी”।
  • इस तरह के सिद्धांतों के आधार पर भारत में विभिन्न श्रम सुधार और संहिताएं बनाई गई हैं।

भारत में श्रम सुधार:

  • चूंकि “श्रम” भारत में समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए केंद्र सरकार ने एक रूपरेखा तैयार की तथा राज्यों से इसे लागू करने का आग्रह किया था।
  • श्रम कानूनों में मजदूरी का भुगतान, सुरक्षा स्थिति, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार की शर्तें और विवाद समाधान जैसे पहलू शामिल हैं।
  • राजस्थान श्रम सुधार लागू करने वाला पहला राज्य था।
  • इसके बाद श्रम सुधार भारत के बाकी राज्यों में लागू किए गए।

भारत में श्रम सुधार (Labour Reforms) के बारे में अधिक जानने के लिए पढ़े:

श्रम सुधारों का प्रभाव:

वी.वी. गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान की रिपोर्ट “राज्यों द्वारा किए गए श्रम सुधारों के प्रभावों का मूल्यांकन” भारत में श्रम सुधारों के प्रभावों को स्पष्ट करती है।

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रम सुधार एकमात्र कारक नहीं है जो व्यावसायिक निवेश निर्णयों को प्रभावित करता है क्योंकि निवेशक अधिक लोगों को सिर्फ इसलिए रोजगार नहीं देते हैं क्योंकि उन्हें हटाना आसान हो गया है।
    • कंपनियां न केवल श्रम पर बल्कि अन्य कारकों पर भी निर्भर हैं जैसे कि बढ़ते बाजार / उनके उत्पादों की मांग, पूंजी, मशीनरी, सामग्री व भूमि, आदि।
  • रिपोर्ट के अनुसार श्रम सुधारों का बड़ी कंपनियों या फर्मों द्वारा रोजगार बढ़ाने पर प्रभाव बहुत कम पड़ा है।
  • रिपोर्ट में राजस्थान का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि श्रम सुधारों के प्रभावों का तुरंत पता नहीं चल सकता क्योंकि इसमें अधिक समय लगता है।
    • ऐसा लगता है कि इस तरह के सुधारों को लागू करने वाला राजस्थान, सबसे कम लाभान्वित हुआ है।
  • इसके अलावा, रिपोर्ट इस तथ्य को संदर्भित करती है कि 2010-11 से 2014-15 के बीच, जब प्रशासनिक सुधारों पर जोर दिया गया था तो 300 से अधिक कर्मचारियों वाली फर्मों में रोजगार का प्रतिशत 51.1% से बढ़कर 55.3% हो गया।
    • हालांकि, जब राज्यों ने विभिन्न सुधार किए थे, उस समय वृद्धि बहुत कम (55.3% से 2017-18 में 56.3%) थी।
  • रिपोर्ट के अनुसार औपचारिक उद्यमों में रोजगार अधिक अनौपचारिक होता जा रहा है।
    • रिपोर्ट के अनुसार, “औपचारिक रोजगार” का अर्थ वह है जिसमें एक लिखित अनुबंध, सवैतनिक अवकाश और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ शामिल हो।
    • उपरोक्त लाभों के साथ-साथ कर्मचारियों को सुनवाई का अधिकार तथा काम पर सम्मान भी प्रदान किया जाना चाहिए।
  • हालांकि रिपोर्ट में इस बात को संदर्भित नहीं किया गया है कि सुधारों ने श्रमिकों की कैसे मदद की है।

भावी कदम:

  • रिपोर्टों के अनुसार, 1980 और 1990 के दौरान, सकल घरेलू उत्पाद में प्रत्येक 1% की वृद्धि के परिणामस्वरूप 2 लाख से अधिक नए रोजगार के अवसर सृजित हुए।
    • जबकि 1990 से 2000 तक, नई नौकरियों में लगभग 1 लाख की कमी आई तथा 2000 से 2010 के बीच, यह कमी केवल 50,000 हो गई थी।
    • यह साबित करता है कि सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि, समाज के निचले वर्गों के लिए अधिक आय का स्वचालित रूप नहीं है।
    • इस संदर्भ में, भारतीय नागरिकों के लिए बेहतर गुणवत्ता वाली आजीविका सृजित करने के लिए आर्थिक विकास, रोजगार और श्रम नीतियों में प्रमुख सुधारों की आवश्यकता है।
  • इसके अलावा, पहले से लागू श्रम सुधारों के प्रभावों का आकलन श्रमिकों के दृष्टिकोण से करना होगा क्योंकि इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना है।

सारांश:

  • श्रम सुधार जिसमें रोजगार और श्रम नीतियों को नियंत्रित करने वाले मौजूदा ढांचे में बदलाव शामिल हैं, भारत में लोगों की आय और आजीविका की बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करना आवश्यक हैं।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 से संबंधित:

शासन:

क्या ‘फ्रीबीज’ की भी कोई सीमा होनी चाहिए?

विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियां एवं हस्तक्षेप और उनके डिजाइन एवं कार्यान्वयन से संबंधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा: भारत में मुफ्तउपहार और कल्याणकारी उपायों एवं खर्च के बीच अंतर।

पृष्टभूमि:

  • हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों, जिन्होंने “मतदाताओं को आकर्षित करने हेतु तर्कहीन मुफ्तउपहार” का वादा किया था की मान्यता को रद्द करने की मांग संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान मुफ्तउपहार में महत्वपूर्ण वित्तीय लागतों को संदर्भित किया गया है।
  • शीर्ष अदालत ने माना कि मुफ्त उपहारों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाला कानून संभव नहीं है, लेकिन विभिन्न कल्याणकारी उपायों तथा सरकारी खजाने को होने वाले नुकसान को संतुलित करने की आवश्यकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने आगे सुझाव दिया कि मुफ्त उपहारों को कल्याणकारी उपायों के साथ भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए और मुफ्तउपहार या कल्याणकारी उपाय कहा जा सकता है, उनके बीच अंतर स्पष्ट किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी (Supreme Court’s Observations) के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़े:

मुफ्त और कल्याणकारी उपायों के बीच अंतर:

  • मुफ्त उपहार और कल्याणकारी उपायों के बीच एक बहुत पतली रेखा है तथा यह एक व्यक्ति के दृष्टिकोण तथा वह आय वितरण पिरामिड में कहां खड़ा है पर निर्भर करता है।
    • कुछ उपाय (जैसे मुफ्त बिजली) एक विशेषाधिकार प्राप्त व्यक्ति को मुफ्त की तरह लग सकते हैं लेकिन यह एक गरीब व्यक्ति के कल्याण हेतु महत्वपूर्ण हो सकता है।
  • निर्देशक सिद्धांत नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए राज्य की नीति का मार्गदर्शन करते हैं लेकिन कल्याण और मुफ्त में अंतर करना मुश्किल है।
  • सार्वजनिक नीति और आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार,
    • एक कल्याणकारी उपाय एक सार्वजनिक नीति हस्तक्षेप है जिसका उत्पादन और उत्पादकता पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।
    • फ्रीबीज एक सार्वजनिक नीति हस्तक्षेप है जो मध्यम अवधि से दीर्घकालिक उत्पादन और उत्पादकता का समर्थन नहीं करता है।
  • कल्याणकारी उपायों और मुफ्त उपहारों के बीच अंतर करने के लिए दीर्घकालिक प्रभाव को निर्धारित करना और साथ ही ऐसी नीतियों के लाभार्थी समूहों की पहचान करना महत्वपूर्ण है।

“फ्रीबीज” के बारे में अधिक जानकारी के लिए CNA 20 Apr 2022 पढ़े:

भारत में कल्याण खर्च:

  • अन्य विकासशील या उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत में होने वाले कल्याणकारी खर्च को बहुत कम कहा जा सकता है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक के अध्ययन से संकेत मिलता है कि अधिक संसाधन दिए जाने के बावजूद राज्य स्तर पर सामाजिक क्षेत्र का खर्च 2014 से कम हो रहा है।
  • स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आवंटन बहुत कम रहा है तथा इसमें कमी आई है।
    • भारत में स्वास्थ्य और शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च 4.7% होने का अनुमान लगाया गया था, जबकि उप-सहारा अफ्रीका के गरीब देशों में यह लगभग 7% है।
  • कई राज्यों में महामारी के बाद राजकोषीय दबाव का सामना करने के साथ, देश में सामाजिक या कल्याणकारी खर्च पर नकरात्मक प्रभाव पड़ेगा।

कल्याणकारी उपायों के लिए कर बढ़ाने की व्यवहार्यता:

  • हाल के वर्षों में आर्थिक विकास के बावजूद देश का आयकर आधार (जनसंख्या का 6% से कम) स्थिर रहा है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि कराधान में वृद्धि से अधिक राजस्व जुटाने में मदद मिलती है जो धन के पुनर्वितरण में सहायक होता है। हालांकि, करों का भुगतान करने वाले व्यक्ति इसका कड़ा विरोध करते है।
  • इसके अलावा, भारत में गरीबी के कारण संपत्ति कर, भूसंपत्ति कर व विरासत कर जैसे कर साधन नहीं हैं या अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है।
    • उच्च निवल संपत्ति वाले व्यक्तियों पर संपत्ति कर लगाकर या संपत्ति कर बढ़ाकर सरकारी खजाने में राजस्व बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है।

भावी नीति:

  • वंचितों को मुफ्त उपहारों के वितरण की समस्याओं के साथ-साथ विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग को विभिन्न रियायतें प्रदान करने की आवश्यकता है जिसमें खराब ऋण माफी और कॉर्पोरेट करों में कमी शामिल है।
  • इसके अलावा, सब्सिडी की नीतियों पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि वर्तमान में सभी क्षेत्रों में गैर-योग्यता सब्सिडी का एक बड़ा हिस्सा वितरित किया जा रहा है। यह मानव कल्याण या सामाजिक क्षेत्र में खर्च हेतु आवश्यक संसाधनों में कमी करेगा।

सारांश:

  • नागरिकों के प्रति अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं की संख्या को अक्सर ‘फ्रीबीज’ संस्कृति माना जाता है इसलिए, कल्याणकारी उपायों और फ्रीबीज के बीच एक रेखा खींचना आवश्यक है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

इतना अच्छा कि यकीन करना मुश्किल है:

विषय: भारत और उसके पड़ोसी संबंध।

मुख्य परीक्षा: रोहिंग्या संकट के बारे में विवरण।

संदर्भ:

  • शहरी विकास मंत्री ने घोषणा की कि दिल्ली में अस्थायी झुग्गियों में रहने वाले रोहिंग्या प्रवासियों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त फ्लैटों में स्थानांतरित किया जाएगा।

विवरण:

  • शहरी विकास मंत्री ने यह भी कहा कि प्रवासियों को दिल्ली पुलिस द्वारा विभिन्न सुविधाएं और सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
  • हालांकि, गृह मंत्री कार्यालय ने दोहराया कि रोहिंग्या प्रवासियों को स्थानांतरित करने की ऐसी कोई योजना नहीं है और उन्हें “अवैध विदेशी” करार दिया गया है।
  • भारत में 40,000 रोहिंग्या प्रवासियों के प्रबंधन के बारे में लंबे समय से बहस चल रही है क्योंकि भारत 1951 के शरणार्थियों के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है।

रोहिंग्या संकट के बारे में अधिक अधिक जानकारी के लिए CNA 21 May 2019 लेख पढ़े:

सारांश:

  • भारत जो “वसुधैव कुटुम्बकम” के सिद्धांत का पालन करता है, को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रोहिंग्या प्रवासियों को घर लौटने तक बेहतर सुविधाएँ प्रदान की जाए।

प्रीलिम्स तथ्य:

1. काराकोरम पर्वतमाला:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

भूगोल:

प्रारंभिक परीक्षा: भू-आकृति विज्ञान/जियोमॉर्फोलॉजी (Geomorphology)।

संदर्भ:

  • हाल ही में, चीन ने भारत की सीमा के पास काराकोरम पठार में एक हवाई रक्षा प्रणाली का परीक्षण किया हैं।

मुख्य विवरण:

  • चीन ने 4,500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में भारत की सीमा के पास “काराकोरम पठारी क्षेत्र” में सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण किया हैं।
  • यह एक नए प्रकार की HQ-17A कम दूरी की एक वायु रक्षा मिसाइल है,जिसमें इसकी खोज और रडार ट्रैकिंग क्षमता के प्रदर्शन में सुधार किया गया है।

काराकोरम के बारे में:

  • काराकोरम कश्मीर में एक पर्वत श्रृंखला है जो पूरे चीन, भारत, पाकिस्तान में फैली हुई है, जिसकी सीमा के उत्तर-पश्चिमी छोर अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान तक फैले हुए हैं।
  • काराकोरम की सबसे ऊंची चोटी, ‘K2’ गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थित है।
  • काराकोरम पूर्व में अक्साई चिन पठार, उत्तर पूर्व में तिब्बती पठार से घिरा हुआ है।
  • इसके उत्तर पश्चिमी कोने में पामीर पर्वत स्थित हैं। काराकोरम की दक्षिणी सीमा पश्चिम से पूर्व तक गिलगित, सिंधु और श्योक नदियों द्वारा बनाई गई है।

Image Source: NCERT

2. दूध में मिलावट (Milk Adulteration):

प्रारंभिक परीक्षा: डेयरी विकास बोर्ड, अपमिश्रण।

संदर्भ:

  • तमिलनाडु से केरल में मिलावटी दूध की आवक हाल के दिनों में बढ़ी है।

मुख्य विवरण:

  • केरल में डेयरी विकास विभाग की प्रयोगशालाओं में किए गए नियमित परीक्षण के दौरान दूध में उच्च मात्रा में यूरिया की मिलावट का पता चला हैं।
  • ओणम के मौसम में,केरल को तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों से बड़ी मात्रा में दूध की आपूर्ति की जा रही है,जिसमें मिलावट की संभावना जताई गयी है।
  • कई दूध उत्पादक दूध को पुष्ट करने के लिए इसमें यूरिया सहित अन्य रसायनों को सहनीय स्तर तक मिला रहे हैं।
  • इस दूध में यूरिया मिलाया जाता है,ताकि दूध में पहले की तुलना में वसा की मात्रा अधिक हो। इस प्रकार यह गाढ़ा और शुद्ध दिखाई देता है जिसकी वजह इसे ज्यादातर लोगों द्वारा पसंद किया जाता है।
  • यूरिया जो कच्चे दूध का एक प्राकृतिक घटक होने के कारण,पीएफए (खाद्य अपमिश्रण निवारण) नियम 1955 और एफएसएसएआई (FSSAI) अधिनियम 2006 द्वारा लगाई गई अधिकतम सीमा है जो 70 मिलीग्राम / 100 मिलीलीटर होनी चाहिए।
  • दूध में की जाने वाली अन्य मिलावटों में मुख्य रूप से वनस्पति प्रोटीन, विभिन्न प्रजातियों का दूध, मट्ठा और पानी मिलाना शामिल है, जिन्हें आर्थिक रूप लाभ प्राप्ति के लिए मिलाया जाता है।
  • खाद्य अपमिश्रण पर अधिक जानकारी के लिए इस लिंक लिंक कीजिए:Food Adulteration

महत्वपूर्ण तथ्य:

1. किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या:

  • महाराष्ट्र में गत 45 दिनों में 137 किसानों ने आत्महत्या की है।
  • भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित होने के कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली है।
  • राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों को ₹13,600 प्रति हेक्टेयर सहायता की घोषणा की है।
  • किसान आत्महत्या पर अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Farmers Suicide

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. छऊ नृत्य के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः (स्तर-मध्यम)

  1. यह मुख्य रूप से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के क्षेत्रों में त्योहारों के दौरान किया जाता है।
  2. मयूरभंज छऊ नृत्य में मुखौटों का प्रयोग नहीं होता है।
  3. छऊ नृत्य मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की मुख्य सूची में शामिल होने वाले पहला नृत्य था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2

(c) केवल 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: a

व्याख्या:

  • वैदिक मंत्रोच्चार की परंपरा को वर्ष 2008 में मानवता सूची की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (intangible cultural heritage) में जोड़ा गया। छऊ नृत्य को वर्ष 2010 में जोड़ा गया था।
  • छऊ नृत्य के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Chhau Dance

प्रश्न 2. एनी बेसेंट के संबंध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर-सरल)

  1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष एनी बेसेंट थीं।
  2. न्यू इंडिया एनी बेसेंट द्वारा भारत में प्रकाशित एक दैनिक समाचार पत्र था।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न हीं 2

उत्तर: c

व्याख्या:

  • एनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष थीं। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1917 के कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता की थी।
  • एनी बेसेंट ने भारत में स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित मुद्दों को उजागर करने के लिए “न्यू इंडिया” नामक एक समाचार पत्र शुरू किया।
  • एनी बेसेंट के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए:Annie Besant

प्रश्न 3. निम्नलिखित में से कौन लैंडहोल्डर्स सोसाइटी के सदस्य थे? (स्तर-कठिन)

  1. भबानी चरण बंद्योपाध्याय
  2. द्वारकानाथ टैगोर
  3. जादूगोपाल मुखर्जी
  4. कनैलाल भट्टाचार्जी
  5. प्रसन्न कुमार टैगोर
  6. राधाकांत देब
  7. रामकमल सेन

विकल्प:

(a) केवल 1, 2, 3, 4 और 5

(b) केवल 2, 4, 5, 6 और 7

(c) केवल 1, 2, 5, 6 और 7

(d) केवल 1, 3, 4, 6 और 7

उत्तर: c

व्याख्या:

  • लैंडहोल्डर्स सोसाइटी जिसे पहले जमींदारी एसोसिएशन के नाम से जाना जाता था, आधुनिक भारत का पहला राजनीतिक संघ था। इसे मार्च 1838 में कलकत्ता में स्थापित किया गया था।
    • राजा राधाकांत देव, द्वारकानाथ टैगोर, प्रसन्न कुमार टैगोर, रामकमल सेन और भबानी चरण मित्र जैसे जमींदार इसके प्रमुख सदस्य थे।
  • इस सोसाइटी की स्थापना का उद्देशय सरकार को याचिकाओं एवं नौकरशाही के माध्यम से विवेकपूर्ण अनुनय से भूमिधारकों के हितों की सुरक्षा कर इसे बढ़ावा देना था।
  • न्यायपालिका, पुलिस और राजस्व विभागों में सुधार की मांग भी इसके एजेंडे में निहित थी।

प्रश्न 4. हुगली नदी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर-मध्यम)

  1. फोर्ट विलियम हुगली नदी के तट पर स्थित है।
  2. पहले इसे बंगाल का शोक कहा जाता था।
  3. नवद्वीप में भागीरथी और जलंगी नदियों के संगम के बाद यह हुगली कहलाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 1 और 3

(c) केवल 2 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: b

व्याख्या:

  • फोर्ट विलियम किला कलकत्ता में हेस्टिंग्स में स्थित है। इसे ब्रिटिश भारत के बंगाल प्रेसीडेंसी के प्रारंभिक वर्षों के दौरान बनाया गया था। यह हुगली नदी के पूर्वी तट पर स्थित है।
  • पश्चिम बंगाल के मैदानी इलाकों में विनाशकारी बाढ़ के कारण दामोदर नदी को ‘बंगाल का शोक’ कहा जाता है।
  • हुगली नदी नवद्वीप में भागीरथी और जलंगी नदियों के संगम से बनती है।
  • वहां से हुगली आम तौर पर पश्चिम बंगाल में एक भारी औद्योगिक क्षेत्र से निकलती हुए दक्षिण से बंगाल की खाड़ी में बहती है।

प्रश्न 5. निम्नलिखित में से क्या लोक सभा की अनन्य शक्तियां है/हैं? (स्तर-सरल)

  1. आपातकाल की उद्घोषणा का अनुसमर्थन करना।
  2. मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित करना।
  3. भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाना।

निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2

(c) केवल 1 और 3

(d) केवल 3

उत्तर: b

व्याख्या:

  • लोकसभा के पास कुछ शक्तियाँ हैं जो इसे राज्य सभा से अधिक शक्तिशाली बनाती हैं। सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में पेश और पारित किया जा सकता है।
  • मंत्रिपरिषद राज्यसभा के प्रति उत्तरदायी नहीं होती है।
  • इसलिए, राज्यसभा में अविश्वास प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता है।
  • आपातकाल (emergency) की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से एक महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना चाहिए।
  • संसद के दोनों सदन भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग ( impeach) चलाने का प्रस्ताव पेश कर सकते हैं।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. राष्ट्रीय सुरक्षा एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच एक सही संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के संदर्भ में इसकी व्याख्या कीजिए। (250 शब्द-15 अंक) (जीएस 2-राजव्यवस्था)

प्रश्न 2. क्या भारत में सार्वजनिक वित्त के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एक आयोग की स्थापना का विचार सही है? समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस 2-शासन)