29 नवंबर 2022 : समाचार विश्लेषण

A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

सामाजिक न्याय:

  1. भारत में बाइनरी से परे देखने का आह्वान दृढ़ हो रहा है:

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E. संपादकीय:

समाज:

  1. घरेलू हिंसा से बचे लोगों के लिए यह अभी भी एक बुरा सपना है:

पर्यावरण:

  1. हानि व क्षति पर निर्णय, अनभिज्ञ संकट और वादे:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. सारस (SARAS) 3 टेलीस्कोप:
  2. भारत का पहला निजी रॉकेट लॉन्चपैड श्रीहरिकोटा में:

G. महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. गृह मंत्रालय ने अदालत से कहा कि धर्म के अधिकार में धर्मांतरण का अधिकार शामिल नहीं हैं:
  2. केंद्र की स्वदेशी, आदिवासी/जनजातीय समाजों की संस्कृतियों, सामाजिक प्रथाओं का दस्तावेजीकरण करने की योजना:
  3. कनाडा ने भारत को अहम साझेदार तथा चीन को ‘तेजी से विघटनकारी’ शक्ति बताया:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

भारत में बाइनरी से परे देखने का आह्वान दृढ़ हो रहा है:

सामाजिक न्याय:

विषय: कमजोर वर्गों की सुरक्षा और बेहतरी के लिए तंत्र और कानून।

प्रारंभिक परीक्षा: विशेष विवाह अधिनियम, 1954 से सम्बंधित तथ्य।

मुख्य परीक्षा: भारत में समलैंगिक जोड़ों को विवाह के अधिकार देने की अपीलों और न्यायालयों द्वारा विभिन्न निर्णयों का परीक्षण करना।

संदर्भ:

  • सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष विवाह अधिनियम, 1954 (Special Marriage Act, 1954) के तहत समलैंगिक विवाह कराने के विभिन्न अनुरोधों पर सरकार से जवाब मांगा है।
  • इस मुद्दे पर पृष्ठभूमि की विस्तृत जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Supreme Court on Same-sex marriages

विशेष विवाह अधिनियम, 1954:

  • भारत में विवाहों को विभिन्न कानूनों जैसे कि 1955 के हिंदू विवाह अधिनियम, 1954 के मुस्लिम विवाह अधिनियम या 1954 के विशेष विवाह अधिनियम के तहत पंजीकृत किया/करवाया जा सकता है।
  • कुछ मामलों में विवाह के एक विशेष रूप का प्रावधान करने, इस तरह के और कुछ अन्य विवाहों और तलाक के पंजीकरण के लिए 1954 में विशेष विवाह अधिनियम अधिनियमित किया गया था।
  • विशेष विवाह अधिनियम, 1954 में भारत के नागरिकों और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए नागरिक विवाह (Civil Marriage) के प्रावधान हैं, भले ही दोनों में से कोई भी पक्ष किसी भी धर्म का पालन करता हो।
  • विशेष विवाह अधिनियम के माध्यम से विभिन्न धार्मिक पृष्ठभूमि के लोग विवाह के बंधन में बंध सकते हैं क्योंकि यह अधिनियम विवाह के अनुष्ठान और पंजीकरण दोनों की प्रक्रिया प्रदान करता है, जहां पति या पत्नी या दोनों हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख नहीं हैं।
  • इस अधिनियम के अनुसार विवाहित जोड़े को विवाह की तारीख से 30 दिन पहले संबंधित दस्तावेजों के साथ विवाह अधिकारी को नोटिस (विवाह करने के सन्दर्भ में जानकारी देना) देना चाहिए।
    • कोई भी व्यक्ति 30 दिनों की समाप्ति से पहले इस आधार पर इस विवाह पर आपत्ति उठा सकता है कि विवाह अधिनियम में निर्धारित एक या अधिक शर्तों का उल्लंघन होगा।

अधिनियम में निर्धारित शर्तें:

    • शादी करने के इच्छुक दोनों व्यक्तियों के जीवनसाथी जीवित नहीं होने चाहिए।
    • दोनों व्यक्तियों को मानसिक रूप से अस्वस्थ नहीं होना चाहिए या इस हद तक मानसिक विकारों से पीड़ित नहीं होना चाहिए कि वे शादी करने और संतानोत्पत्ति के अयोग्य हों।
    • विवाह के समय पुरुष की आयु 21 वर्ष और महिला की आयु 18 वर्ष पूर्ण होनी चाहिए।
    • दोनों व्यक्ति निषिद्ध संबंध के स्तर के भीतर नहीं हैं, बशर्ते कि कम से कम एक पक्ष द्वारा पालन किया जाने वाला रिवाज व्यक्तियों के बीच विवाह की अनुमति देता है।
  • इस लेख को निम्नलिखित लिंक में व्यापक रूप से शामिल किया गया है:

UPSC Exam Comprehensive News Analysis dated 19 June 2021

संपादकीय-द हिन्दू

संपादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

घरेलू हिंसा से बचे लोगों के लिए यह अभी भी एक बुरा सपना है:

समाज:

विषय: महिलाओं से संबंधित मुद्दे।

प्रारंभिक परीक्षा: घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 (Protection of Women from Domestic Violence Act 2005 (PWDVA))

मुख्य परीक्षा: घरेलू हिंसा।

संदर्भ:

  • 25 नवंबर का दिन महिलाओं के खिलाफ सभी प्रकार की हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

विवरण:

  • घरेलू हिंसा को मानवाधिकारों का उल्लंघन माना जाता है और घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 (PWDVA)के तहत महिलाओं की सुरक्षा का उल्लंघन एक दंडनीय अपराध है।
    • यह प्रगतिशील कानून है जो महिलाओं को घर के भीतर हिंसा से बचाने और समर्थन करने के लिए नागरिक और आपराधिक दोनों प्रकार की सुरक्षा का वादा करता है।
    • हालांकि, कानून के वादे और प्रावधान असमान रूप से लागू किए गए हैं या अनुपलब्ध हैं और अधिकांश महिलाओं की पहुंच से बाहर हैं।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण -5 (2019-21) के अनुसार, 18 से 49 वर्ष की आयु की 32% विवाहित महिलाओं ने अपने पति द्वारा की गई भावनात्मक, शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव किया है। यह पता चला है कि शहरी महिलाओं के विपरीत अधिक ग्रामीण महिलाओं ने घरेलू हिंसा के अनुभवों की सूचना दी है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ये आंकड़े परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा हिंसा की व्यापकता को नहीं दर्शाते हैं।
  • NFHS -5 की रिपोर्ट है कि एक तिहाई महिलाओं के घरेलू हिंसा का शिकार होने के बावजूद केवल 14% ने मदद मांगी है। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या बहुत कम है।
  • इसके अलावा, NFHS-5 के डेटा में यह भी उल्लेख किया गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं द्वारा एक ऐसे परिदृश्य को सही ठहराने की अधिक संभावना होती है जिसमें पति द्वारा अपनी पत्नी के खिलाफ हिंसा करना स्वीकार्य है।

NFHS-5 के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें: National Family Health Survey 5 – Facts about NFHS for UPSC

अनुसंधान विश्लेषण:

  • महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में घरेलू हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं की रोज़मर्रा की वास्तविकताओं, भय, बाधाओं, पूर्वाग्रहों और मदद मांगने की प्रवृत्ति का विश्लेषण करने के लिए एक शोध किया गया।
  • यह विश्लेषण बताता हैं कि:
    • कई महिलाएं अपने पति के व्यवहार में बदलाव और अंततः उनकी स्थितियों में बदलाव को लेकर आशान्वित थीं।
    • महिलाएं घरेलू हिंसा के मामलों की रिपोर्ट नहीं करती हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इसके कारण उनके परिवारों में समस्याएँ खड़ी होंगी या तनाव उत्पन्न होगा। ये दूसरों पर बोझ नहीं बनना चाहती।
    • महिलाओं का मानना है कि हिंसा के ख़िलाफ़ रिपोर्ट करने से उनके परिवार का अपमान होगा और परिवार को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा। महिलाओं की इस सोच पर उनकी शिक्षा, जाति या वर्ग के स्तर का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
    • उपरोक्त भय प्रवासी महिलाओं, ट्रांसजेंडरों, या बहनों, या बीमार/बूढ़े/ माता-पिता के लिए अधिक स्पष्ट थे, क्योंकि उन्होंने महसूस किया कि उनके खिलाफ की गई हिंसा के लिए वे ही व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार थे।
  • सहायता प्राप्त करने के पहलू पर: इस श्रेणी में दो मुख्य समूहों की पहचान की गई-
    • जिन्होंने छह महीने के भीतर अनुभव साझा किए:
      • ये महिलाएं अपने माता-पिता के पास वापस चली गईं। अधिकांश मामलों में, माता-पिता ने अपनी बेटियों पर पारिवारिक वातावरण को बनाए रखने और अपने पति (और/या उसके परिवार की) की आवश्यकताओं के साथ समायोजित होने और उसके अनुसार व्यवहार करने पर जोर दिया।
      • बहुत कम मामलों में, बेटी के कल्याण को प्राथमिकता दी गई तथा पुलिस और वकीलों का सहारा लेने से पहले रिश्ते में मध्यस्थता करने या रिश्ते से बाहर निकलने के उपाय किए गए।
    • जिन्होंने 5 या अधिक वर्षों के बाद अनुभव साझा किए:
      • इन मामलों में रिश्तेदारों या पड़ोसियों (अधिक विशेष रूप से हिंसा के गवाह) की कार्रवाई महत्वपूर्ण थी।
      • इन मामलों में ‘टिपिंग’ बिंदु जिनके कारण रिपोर्टिंग हुई वे थे – अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए पीड़ितों की चिंताएं, पति के अन्य के साथ संबंधों का पता लगाना, या अत्यधिक हिंसा जिसके लिए चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ी थी।
      • इतने लंबे संघर्ष के पीछे के प्रमुख कारण वित्तीय असुरक्षा और/या संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े पितृसत्तात्मक मानदंड थे।
  • इसमें पाया गया कि घरेलू हिंसा के खिलाफ कार्रवाई करने वाली महिलाओं को जीवन में नई उम्मीद मिली।
  • शोध में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि कई महिलाओं के पास जाने के लिए और कोई और जगह नहीं है। इसके अलावा, अदालतों के माध्यम से कानूनी न्याय तक पहुंचना केवल स्वतंत्र संपत्ति और पहुँच वाली महिलाओं या कुछ गैर सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा समर्थित महिलाओं के लिए ही संभव था।
  • घरेलू हिंसा की रिपोर्ट करने में पुलिस की भूमिका:
    • शोध में भाग लेने वाली महिलाओं में से अधिकांश ने बताया कि पुलिस द्वारा आधिकारिक शिकायत दर्ज किए बिना या उनका संरक्षण अधिकारियों से संपर्क कराए बिना (जैसा कि स्पष्ट रूप से PWDVA में दिया गया है) उन्हें उनके हिंसक परिवारों में वापस भेजने की अधिक संभावना थी।
    • भारत के कई राज्यों ने अभी तक संरक्षण अधिकारियों के प्रावधान को लागू नहीं किया है और यदि लागू किया भी गया है तो उनके पास संसाधनों की कमी है, उनमें कौशल की कमी है या उनके ऊपर पहले से ही काम का अत्यधिक बोझ है।
    • हालांकि, कुछ महिलाओं ने पुलिस से सकारात्मक प्रतिक्रिया की सूचना दी है।

निष्कर्ष:

  • महिलाओं के लिए हिंसा के अनुभवों को साझा करना एक शक्तिशाली कदम है। इसके अलावा, कानूनी उपायों के माध्यम से उपलब्ध समर्थन और सेवाओं तक पहुँच अक्सर निराशा, भय और अनिश्चितता का कारण बनती है।
  • उत्तरजीवियों के लिए स्थिति को बदलना भी नए कौशल और आजीविका के अवसरों का लाभ उठाते हुए आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने की क्षमता पर निर्भर करता है।
  • भले ही यह माना जाता है कि घरेलू हिंसा एक अपराध है, और उसके लिए नागरिक उपचार की उपलब्धता है, फिर भी घरेलू हिंसा के परिणामों का प्रबंधन अभी भी उत्तरजीवियों और उनके परिवारों के द्वारा किया जा रहा है।

संबंधित लिंक्स:

International Day for Elimination of Violence Against Women (25 November)- UPSC Notes.

सारांश:

  • घरेलू हिंसा के खिलाफ सख्त कानून होने के बावजूद यह काफी हद तक भारतीय समाज में कायम है। यह महत्वपूर्ण है कि इस खतरे को रोकने और दुनिया को महिलाओं के लिए एक सुरक्षित स्थान बनाने के लिए इसकी पहुंच और प्रवर्तन को और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

हानि व क्षति पर निर्णय, अनभिज्ञ संकट और वादे:

पर्यावरण:

विषय: जलवायु परिवर्तन वार्ता।

मुख्य परीक्षा: हानि व क्षति कोष।

प्रारंभिक परीक्षा: COP27 से सम्बंधित तथ्य।

प्रसंग: COP27 का परिणाम- हानि व क्षति कोष।

विवरण:

  • COP27 का एक प्रमुख परिणाम हानि व क्षति (L और D) पर ध्यान केंद्रित करने वाली नई वित्त पोषण व्यवस्था पर निर्णय है, विशेष रूप से उन देशों के लिए जो जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के प्रति संवेदनशील हैं।
  • नई वित्त पोषण व्यवस्था के संचालन के लिए तत्व तैयार करने के लिए एक संक्रमणकालीन समिति की स्थापना की जाएगी। नई व्यवस्था COP28 में अपनाई जाएगी।
  • समिति का मंतव्य धन स्रोतों की पहचान करना और उनका विस्तार करना तथा बहुपक्षवाद की प्रक्रिया में विश्वास बहाल करना है।
  • हालाँकि, जलवायु वित्त प्रतिबद्धता (2020 तक प्रति वर्ष 100 बिलियन डॉलर जुटाना) के संदर्भ में विकसित देशों द्वारा गैर-अनुपालन से जुड़ी चिंताएँ विद्यमान हैं।
  • यह माना जाता है कि नया वित्त पोषण तंत्र मौजूदा व्यवस्थाओं का पूरक होगा और इसमें अभिसमय और पेरिस समझौते (Paris Agreement) के भीतर और बाहर स्रोत, धन, प्रक्रियाएं और पहल शामिल हैं। इससे नए और अतिरिक्त संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।
  • यह COP27 और उसके बाहर लघु द्वीप देशों के गठबंधन (AOSIS) द्वारा एक समर्पित हानि व क्षति प्रतिक्रिया कोष स्थापित करने के लिए उठाई जा रही लगातार मांगों को कम करेगा, जो मौजूदा जलवायु वित्त प्रतिबद्धताओं के शीर्ष पर है।
  • यह निर्णय विकसित राष्ट्रों के अनुकूल जलवायु परिवर्तन वार्ताओं की शमन-केंद्रित प्रकृति को मान्यता देता है।
    • वार्ता की शमन-केंद्रित प्रकृति की जानकारी जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र का फ्रेमवर्क सम्मेलन (UNFCCC) 1992 के अनुच्छेद 2 में प्राप्त की जा सकती है।
    • अनुच्छेद 2 में कहा गया है कि एक बार ‘ग्रीनहाउस गैस सांद्रता का स्थिरीकरण एक ऐसे स्तर पर प्राप्त हो जाता है जो जलवायु प्रणाली के साथ मानवजनित हस्तक्षेप को रोकता है और पारिस्थितिक तंत्र को प्राकृतिक रूप से जलवायु परिवर्तन के अनुकूल होने की अनुमति देता है।’
    • अनुच्छेद 8(1) केवल पक्षकार द्वारा जलवायु परिवर्तन से संबंधित L और D को टालने, कम करने और संबोधित करने के महत्व को पहचानता है।

AOSIS के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें: Small Island Developing States [UPSC Notes].

वित्त पोषण संबंधी वार्ताओं की पृष्ठभूमि का विवरण:

  • विकसित राष्ट्रों ने अतीत की सभी जलवायु वार्ताओं में जलवायु परिवर्तन की जवाबदेही का लगातार विरोध किया है। कुछ कोषों में उनका योगदान सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं (CBDR) के सिद्धांत पर आधारित है।
  • मुआवजे के पहलू के लिए अपराधी और जलवायु परिवर्तन के शिकार के बीच कारण संबंध स्थापित करने की कानूनी चुनौती की आवश्यकता होती है, क्योंकि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का प्रभाव काफी बाद में होता है।
  • जबकि 1991 में UNFCCC के लिए बातचीत प्रक्रियाधीन थी, AOSIS ने समुद्र के स्तर में वृद्धि से होने वाली हानि व क्षति के लिए सर्वाधिक सुभेद्य लघु द्वीपीय और निचले इलाकों के तटीय विकासशील देशों को क्षतिपूर्ति करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय बीमा पूल स्थापित करने का “विफल” प्रयास किया।
  • यदि 1991 के प्रस्ताव को अमल में लाया जाता तो L और D के लिए ‘कौन’ भुगतान करता है यह स्पष्ट हो गया होता। अंतर्राष्ट्रीय बीमा पूल अवधारणा के लिए विकसित और विकासशील देशों में प्रमुख उत्सर्जकों के बीच गहन शोध और विचार-विमर्श की आवश्यकता है।
  • मिस्र में AOSIS ने एक बीमा पूल के बजाय एक समर्पित L और D प्रतिक्रिया कोष (Response Fund) पर जोर दिया।
  • यह माना जाता है कि कोष तेल और गैस कंपनियों के मुनाफे पर कर जैसे अन्य संभावित स्रोतों को भी आकर्षित करेगा।
  • हालांकि, जीवाश्म ईंधन, तेल और गैस कंपनियों पर कर लगाने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है क्योंकि यह जलवायु परिवर्तन वार्ताओं के लिए राष्ट्र-राज्य के दृष्टिकोण का एक विकल्प है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि ‘भारत, ब्राजील, चीन, सऊदी अरब, मैक्सिको, ईरान और दक्षिण अफ्रीका जैसे गैर-परिशिष्ट I देशों से प्राप्त जीवाश्म ईंधन से और अंगोला, कुवैत, नाइजीरिया, लीबिया, मलेशिया और वेनेजुएला’ जैसे बड़े पैमाने के उत्सर्जक देशों से महत्वपूर्ण उत्सर्जन हुआ है।
  • COP27 के निर्णय का एक अन्य हिस्सा जर्मन समर्थित “जलवायु जोखिमों के खिलाफ वैश्विक ढाल योजना” था।
    • पहल का उद्देश्य आपदाओं के घटित होने से पहले या ठीक बाद में वितरित किए जाने वाले पूर्व-एकत्रित वित्त को बढ़ाना है।
  • AOSIS ग्लोबल शील्ड समेत विभिन्न प्रस्तावों से धन वितरित करने के लिए एक समर्पित L और D प्रतिक्रिया कोष का समर्थन करता है, और एक खंडशः दृष्टिकोण से बचता है।
  • L और D को संबोधित करने के लिए अन्य संभावित दृष्टिकोण मुकदमा दायर करना है। हालाँकि, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर प्रोत्साहन, आरोपण और स्थायित्व की चुनौतियाँ हैं।

जलवायु परिवर्तन पर अधिक जानकारी के लिए, यहां पढ़ें: Climate Change In India [UPSC Notes GS III]

संबंधित लिंक:

COP27 – Progress and Outcomes: Sansad TV Perspective Discussion of 21 Nov 2022

सारांश:

  • COP27 के प्रमुख परिणामों में से एक हानि व क्षति कोष की स्थापना है। जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी तय करने और वित्त पोषण प्रक्रिया में अभी भी कुछ अनिश्चितताएं हैं। संक्रमणकालीन समिति इन पहलुओं पर विचार-विमर्श करेगी और COP28 में इन्हें लागू करेगी।

प्रीलिम्स तथ्य:

1.सारस (SARAS) 3 टेलीस्कोप:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

विज्ञान एवं तकनीक:

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां।

प्रारंभिक परीक्षा: सारस 3 टेलीस्कोप से सम्बंधित तथ्य।

संदर्भ:

  • सारस (SARAS) 3 टेलीस्कोप ने ब्रह्मांड के पहले सितारों और आकाशगंगाओं की प्रकृति के बारे में महत्वपूर्ण विवरण प्रदान करने में मदद की है।

सारस 3 टेलीस्कोप:

चित्र स्रोत: The Hindu

  • सारस (SARAS) 3 एक रेडियो टेलीस्कोप है जिसे रमन अनुसंधान संस्थान (RRI) में स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है।
    • रमन अनुसंधान संस्थान (RRI) बैंगलोर में स्थित वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान है।
    • RRI की स्थापना 1948 में नोबेल पुरस्कार विजेता सी. वी. रमन ने की थी।
  • वर्ष 2020 में, सारस (SARAS) 3 रेडियो टेलीस्कोप को कर्नाटक की झीलों अर्थात् दंडिगनहल्ली झील और शरवती बैकवाटर में स्थापित किया गया था।
  • रेडियो टेलीस्कोप रेडियो रिसीवर और एंटीना सिस्टम से युक्त खगोलीय उपकरण है जो पृथ्वी या उसके वायुमंडल से बाहर के स्रोतों द्वारा उत्सर्जित रेडियो-आवृत्ति विकिरण का पता लगाने में मदद करते हैं।
  • रेडियो टेलीस्कोप का उपयोग तारों, आकाशगंगाओं, ब्लैक होल और अन्य खगोलीय पिंडों से प्राकृतिक रूप से उत्पन्न रेडियो प्रकाश का अध्ययन करने के लिए किया जाता है।
  • खगोलविद और शोधकर्ता सारस 3 टेलीस्कोप के डेटा की मदद से बिग बैंग के बाद लगभग 200 मिलियन वर्ष की अवधि में बनी रेडियो प्रदीप्त आकाशगंगाओं के गुणों को निर्धारित करने में सक्षम हुए हैं, जिसे ब्रह्मांडीय उषा (Cosmic Dawn) के रूप में जाना जाता है।
  • शोधकर्ताओं और खगोलविदों ने आकाशगंगाओं (जो रेडियो तरंग दैर्ध्य में प्रदीप्त हैं) के प्रारंभिक निर्माण के समय ऊर्जा उत्पादन, प्रदीप्ति और द्रव्यमान पर प्रकाश डालने के लिए सारस 3 डेटा से प्राप्त निष्कर्षों का उपयोग किया है।
  • मार्च 2022 में, SARAS 3 टीम ने एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी और MIT के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित EDGES रेडियो टेलीस्कोप द्वारा निर्मित कॉस्मिक डॉन (Cosmic Dawn) से प्राप्त एक विलक्षण 21-सेमी सिग्नल का पता लगाने के दावों को खारिज करने के लिए टेलीस्कोप से प्राप्त डेटा का उपयोग किया था।

2. भारत का पहला निजी अंतरिक्ष लॉन्चपैड श्रीहरिकोटा में स्थापित:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

विज्ञान एवं तकनीक:

विषय: अंतरिक्ष के क्षेत्र में जागरूकता।

प्रारंभिक परीक्षा: भारत के पहले निजी लॉन्चपैड से सम्बंधित तथ्य।

संदर्भ:

  • भारत का पहला निजी रॉकेट लॉन्चपैड श्रीहरिकोटा में स्थापित किया गया है।

विवरण:

  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप अग्निकुल, ने श्रीहरिकोटा में एक निजी भागीदार द्वारा संचालित भारत का पहला लॉन्चपैड स्थापित किया है। इस स्टार्ट-अप का मुख्यालय चेन्नई में स्थित है।
  • नई सुविधा को अग्निकुल द्वारा डिज़ाइन किया गया था तथा इसरो और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (Indian National Space Promotion and Authorization Center (IN-SPACe)) के समर्थन से निष्पादित किया गया था।
  • नई सुविधा में अग्निकुल लॉन्चपैड (Agnikul launchpad (ALP) ) और अग्निकुल मिशन नियंत्रण केंद्र (Agnikul mission control center (AMCC)) नामक दो खंड शामिल हैं।
  • लॉन्चपैड को तरल चरण द्वारा नियंत्रित प्रक्षेपणों को समर्थन देने की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है और प्रक्षेपणों के दौरान प्रमुख उड़ान सुरक्षा मापदंडों की निगरानी के लिए इसरो की रेंज ऑपरेशंस टीम की आवश्यकता को भी ध्यान में रखा गया है।
  • इसके अलावा इस सुविधा में इसरो के मिशन नियंत्रण केंद्र के साथ महत्वपूर्ण जानकारी साझा करने की क्षमता है।

अग्निकुल की अन्य पहलें:

    • अग्निबाण कंपनी का अत्यधिक अनुकूलन योग्य, दो-चरण वाला प्रक्षेपण यान है जो लगभग 700 किमी की ऊँचाई पर निम्न भू-कक्षा (Low Earth Orbits (LEO)) में 100 किलोग्राम पेलोड ले जाने में सक्षम है और यह प्लग-एंड-प्ले कॉन्फ़िगरेशन को सक्षम करता है।
    • अग्निलेट दुनिया का पहला सिंगल-पीस 3-डी प्रिंटेड इंजन है जिसे पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है। अग्निलेट का 2021 में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था, जिसने अग्निकुल को इसरो में अपने इंजनों का परीक्षण करने वाली भारत की पहली कंपनी बना दिया।

महत्वपूर्ण तथ्य:

1.गृह मंत्रालय ने अदालत से कहा कि धर्म के अधिकार में धर्मांतरण का अधिकार शामिल नहीं हैं:

  • गृह मंत्रालय ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया है कि धर्म के अधिकार में अन्य व्यक्तियों को किसी विशेष धर्म में धर्मान्तरित करने का अधिकार शामिल नहीं है, विशेष रूप से तब, जब यह जबरदस्ती, धोखे, प्रलोभन और अन्य माध्यमों से करवाया गया हो।
  • गृह मंत्रालय ने माना कि अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार-right to freedom of religion) में “प्रचार” शब्द में धर्मांतरण का अधिकार शामिल नहीं है और इसके बजाय, यह अपने सिद्धांतों की व्याख्या करके अपने धर्म का प्रसार करने के सकारात्मक अधिकार को संदर्भित करता है।
  • केंद्र सरकार ने माना है कि जबरदस्ती, बलपूर्वक या धोखाधड़ी से करवाया गया धर्मांतरण किसी व्यक्ति की अंतरात्मा की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है और सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करता है। इस प्रकार, राज्य के पास इसे विनियमित या प्रतिबंधित करने की शक्ति है।
  • सरकार ने इस तथ्य को भी दोहराया है कि संगठित और बड़े पैमाने पर अवैध धर्मांतरण की चुनौतियों का समाधान करने के लिए अतीत में बनाए गए ऐसे कानूनों को सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसलों एवं निर्देशों के माध्यम से बरकरार रखा है।
  • हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कपटपूर्ण धर्मांतरण राष्ट्र की सुरक्षा और धर्म की स्वतंत्रता और नागरिकों के विवेक पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, और न्यायालय ने सरकार से इस संबंध में कदम उठाने और एक हलफनामे में स्पष्टीकरण का आग्रह किया है कि वह बलपूर्वक या कपटपूर्ण धार्मिक रूपांतरणों को रोकने के लिए क्या करना चाहती है।
  • आगे अदालत ने यह भी कहा कि देश में धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी है लेकिन जबरन धर्मांतरण धर्म की स्वतंत्रता नहीं है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को अपना धर्म चुनने का अधिकार है, लेकिन जबरन धर्मांतरण या प्रलोभन के माध्यम से नहीं।

2.केंद्र की स्वदेशी, आदिवासी/जनजातीय समाजों की संस्कृतियों, सामाजिक प्रथाओं का दस्तावेजीकरण करने की योजना:

  • केंद्र सरकार,राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (National Commission for Scheduled Tribes (NCST),) के साथ मिलकर भारत में स्वदेशी और जनजातीय समाजों की संस्कृतियों और सामाजिक प्रथाओं के “पुनः प्रलेखन” (re-documentation) का प्रयास कर रही है, क्योंकि मौजूदा साहित्य बहुत हद तक औपनिवेशिक प्रशासकों द्वारा संकलित ज्ञान पर आधारित है।
  • सरकार का लक्ष्य अब भारत के स्वदेशी और जनजातीय समुदायों के अधिक समाजशास्त्रियों, मानवविज्ञानी और शोधकर्ताओं को स्वयं के समुदायों की सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक प्रथाओं पर शोध और पुनर्लेखन करने के लिए प्रोत्साहित करना है क्योंकि इस कदम से सरकार को आदिवासी समाजों, पहचान और अधिकारों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
  • हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समुदायों का ज्ञान जैसे बीमारियों के इलाज के तरीके, हथियार बनाना, प्रकृति की रक्षा करना और सामुदायिक गीत के माध्यम से ज्ञान का हस्तांतरण भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System (IKS)) में शामिल किया जाना चाहिए जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) के माध्यम से केंद्रीय विमर्श में है।
  • भारत की राष्ट्रपति ने यह भी माना कि आदिवासी समुदायों का ज्ञान भारत को “ज्ञान महाशक्ति” बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

3. कनाडा ने भारत को अहम साझेदार तथा चीन को ‘तीव्र विघटनकारी’ शक्ति बताया:

  • कनाडा ने अपनी “हिंद-प्रशांत रणनीति” (Indo-Pacific strategy) जारी की है जिसमें उसने कहा है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, इसमें चीन को एक तीव्र विघटनकारी वैश्विक शक्ति के रूप में माना और भारत को एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में मान्यता दी।
  • रणनीति दस्तावेज़ में कहा गया है कि कनाडा भारत के साथ सुरक्षा, लोकतंत्र को बढ़ावा देने, बहुलवाद और मानवाधिकारों जैसे सामान्य हित के क्षेत्रों में सहयोग करने और बातचीत में शामिल होने के अवसरों की तलाश करेगा।
  • कनाडा ने भारत-प्रशांत क्षेत्र रणनीति दस्तावेज़ में आगे कहा है कि भारत के बढ़ते रणनीतिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय महत्व को स्वीकार करते हुए, चीन गहन व्यापार और निवेश के माध्यम से और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण में सहयोग करके आर्थिक संबंधों में सुधार करेगा।
  • रणनीति दस्तावेज का उद्देश्य एक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते की दिशा में एक कदम के रूप में अर्ली प्रोग्रेस ट्रेड एग्रीमेंट ((Early Progress Trade Agreement (EPTA))) द्वारा बाजार पहुंच का विस्तार करना तथा नई दिल्ली और चंडीगढ़ में कनाडा की वीज़ा-प्रसंस्करण क्षमता में निवेश करके एवं शैक्षणिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, युवा और अनुसंधान आदान-प्रदान का समर्थन करके भारत के साथ लोगों के बीच संपर्क में सुधार करना है।
  • भारत-कनाडा संबंध के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: India-Canada relations

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. अध्यादेशों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – मध्यम)

  1. अध्यादेश तभी प्रख्यापित किया जा सकता है जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों।
  2. 1970 के आर. सी. कूपर मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि अध्यादेश जारी करने के राष्ट्रपति के निर्णय को इस आधार पर चुनौती दी जा सकती है कि ‘तत्काल कार्रवाई’ की आवश्यकता नहीं थी, और अध्यादेश मुख्य रूप से विधायिका में बहस और चर्चा को दरकिनार करने के लिए जारी किया गया था।
  3. अनुच्छेद 123 अध्यादेशों पर कोई संख्यात्मक सीमा आरोपित नहीं करता है।

सही कूट का चयन कीजिए:

  1. एक कथन सही है
  2. दो कथन सही हैं
  3. सभी कथन सही हैं
  4. कोई भी कथन सही नहीं है

उत्तर: b

व्याख्या:

  • कथन 1 सही नहीं है: राष्ट्रपति केवल तभी अध्यादेश जारी कर सकता है जब दोनों सदन सत्र में न हों या केवल एक सदन सत्र में हो।
  • कथन 2 सही है: 1970 के आर. सी. कूपर मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि अध्यादेश जारी करने के राष्ट्रपति के निर्णय को इस आधार पर चुनौती दी जा सकती है कि ‘तत्काल कार्रवाई’ की आवश्यकता नहीं थी, और अध्यादेश मुख्य रूप से विधायिका में बहस और चर्चा को दरकिनार करने के लिए जारी किया गया था।
  • कथन 3 सही है: अनुच्छेद 123 अध्यादेशों पर कोई संख्यात्मक सीमा आरोपित नहीं करता है।

प्रश्न 2. इजराइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत के रुख के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर-कठिन)

  1. वर्ष 2019 में, भारत ने शाहेद नाम के एक फिलिस्तीनी संगठन को पर्यवेक्षक का दर्जा देने से इनकार करने के लिए ECOSOC (आर्थिक और सामाजिक परिषद) में इज़राइल के पक्ष में मतदान किया था।
  2. वर्ष 1947 में, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने संकल्प 181 को अपनाया, जिसे विभाजन योजना के रूप में जाना जाता है, इसमें फिलिस्तीन के ब्रिटिश अधिदेश को अरब और यहूदी राज्यों में विभाजित करने की मांग की गई थी।
  3. वर्ष 2017 में, भारत के प्रधान मंत्री ने केवल इज़राइल का दौरा किया, फिलिस्तीन का नहीं।

सही कूट का चयन कीजिए:

(a) केवल 1 और 3

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: वर्ष 2019 में, भारत ने शाहेद नाम के एक फिलिस्तीनी संगठन को पर्यवेक्षक का दर्जा देने से इनकार करने के लिए ECOSOC (आर्थिक और सामाजिक परिषद) में इज़राइल के पक्ष में मतदान किया था।
  • कथन 2 सही है: वर्ष 1947 में, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने संकल्प 181 को अपनाया, जिसे विभाजन योजना के रूप में जाना जाता है, इसमें फिलिस्तीन के ब्रिटिश अधिदेश को अरब और यहूदी राज्यों में विभाजित करने की मांग की गई थी।
  • कथन 3 सही है: वर्ष 2017 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी इज़राइल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधान मंत्री बने जिन्होंने फिलिस्तीनी प्राधिकरण का दौरा नहीं किया।

प्रश्न 3. निम्नलिखित में से किस दिन को ‘लाल ग्रह दिवस’ (‘Red planet day’) के रूप में मनाया जाता है? (स्तर – कठिन)

(a) जिस दिन नासा ने मंगल की ओर मेरिनर 4 अंतरिक्ष मिशन प्रक्षेपित किया

(b) जिस दिन नासा का क्यूरियोसिटी रोवर मंगल ग्रह पर उतरा

(c) जिस दिन नासा का वाइकिंग 1 मंगल ग्रह पर उतरा

(d) जिस दिन नासा ने मंगल ग्रह की सतह की पहली तस्वीरें जारी कीं

उत्तर: a

व्याख्या:

  • 28 नवंबर को मंगल ग्रह की ओर मेरिनर 4 अंतरिक्ष मिशन के प्रक्षेपण के उपलक्ष्य में लाल ग्रह दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • मेरिनर 4 को 28 नवंबर 1964 को लॉन्च किया गया था। यह पहली बार था कि एक अंतरिक्ष यान ने लाल ग्रह का पहला फ्लाईबाई किया और यह किसी अन्य ग्रह की क्लोज-अप (निकट की) तस्वीरें लेने वाला पहला अंतरिक्ष यान बन गया।

प्रश्न 4. हाल ही में चर्चा में रहा ‘सारस 3’ (SARAS 3) संदर्भित करता है: (स्तर – मध्यम)

(a) उच्च गुणवत्तापूर्ण समुद्री नेविगेशन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सोनार।

(b) भारत का डीप ओशन अनुसंधान पोत।

(c) ब्रह्मांडीय उषा (Cosmic Dawn) से रेडियो तरंग संकेत खोजने की कोशिश कर रहा एक रेडियो टेलीस्कोप।

(d) ब्रह्मांडीय ध्वनि को पकड़ने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया स्पीकर।

उत्तर: c

व्याख्या:

  • सारस 3 एक रेडियो टेलीस्कोप है जिसे रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई) में स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है।
  • वर्ष 2020 में, सारस (SARAS) 3 रेडियो टेलीस्कोप को कर्नाटक की झीलों अर्थात् दंडिगनहल्ली झील और शरवती बैकवाटर में स्थापित किया गया था।
  • खगोलविद और शोधकर्ता सारस 3 टेलीस्कोप के डेटा की मदद से बिग बैंग के बाद लगभग 200 मिलियन वर्ष की अवधि में बनी रेडियो प्रदीप्त आकाशगंगाओं के गुणों को निर्धारित करने में सक्षम हुए हैं, जिसे ब्रह्मांडीय उषा (Cosmic Dawn) के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न 5. किसी देश के ‘नाभिकीय पूर्तिकर्ता समूह’ के सदस्य बनने का/के क्या परिणाम है/हैं? PYQ (2018) (स्तर – मध्यम)

  1. इसकी पहुँच नवीनतम और सबसे कुशल परमाणु प्रौद्योगिकियों तक हो जाएगी।
  2. यह स्वमेव “नाभिकीय आयुध अप्रसार संधि (NPT)” का सदस्य बन जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: a

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: नाभिकीय पूर्तिकर्ता समूह (NSG) नाभिकीय पूर्तिकर्ता देशों से बना एक अंतर्राष्ट्रीय निकाय है जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के विकास में प्रयुक्त सामग्री और संबंधित प्रौद्योगिकी के निर्यात पर अंकुश लगाकर परमाणु हथियारों के प्रसार को नियंत्रित करना है।
    • NSG में शामिल होने से देशों को नवीनतम, सबसे कुशल परमाणु प्रौद्योगिकियों और सबसे परिष्कृत परमाणु प्रौद्योगिकी तक पहुंच प्राप्त होगी।
  • कथन 2 सही नहीं है: भारत NSG का सदस्य नहीं है, लेकिन NSG का हिस्सा बनना चाहता है। हालांकि, भारत ने नाभिकीय आयुध अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं, चीन और पाकिस्तान को भारत के नामांकन पर आपत्ति है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. आदिवासी समुदाय की स्वदेशी ज्ञान प्रणाली को संरक्षित और प्रचारित करने की आवश्यकता है। इसे सुनिश्चित करने के उपाय सुझाइए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस II – राजव्यवस्था)

प्रश्न 2. भारत को ‘बाइनरी’ जेंडर से परे देखने की जरूरत है। क्या आप सहमत हैं? विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस I – समाज)