22 जनवरी 2023 : समाचार विश्लेषण
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A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: मध्यकालीन इतिहास:
B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
सामाजिक न्याय:
C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: अंतरराष्ट्रीय संबंध:
स्वास्थ्य:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G. महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:
मध्यकालीन इतिहास:
असम का चराइदेव मैदाम
विषय: अहोम राजवंश
मुख्य परीक्षा: अहोम राजवंश और भारतीय संस्कृति तथा इतिहास में इसका योगदान
संदर्भ:
- केंद्र सरकार ने यूनेस्को विश्व विरासत स्थल के लिए असम के चराइदेव मैदाम को नामित करने का निर्णय लिया है।
मुख्य विवरण:
- केंद्र सरकार ने यूनेस्को विश्व विरासत केंद्र के लिए असम के चराइदेव मैदाम (अहोम साम्राज्य का चराइदेव मैदाम प्राचीन मिस्र के पिरामिडों के समकक्ष है) को नामित करने का निर्णय लिया है।
- ये असम में ताई अहोम समुदाय की उत्तरार्ध मध्यकालीन (13वीं-19वीं शताब्दी ईस्वी.) दफन परंपरा को दर्शाते हैं।
- इन मैदामों की तुलना पिरामिडों से की जा सकती है क्योंकि ये वास्तव में अहोम साम्राज्य, जिसकी स्थापना चाउ लुंग सिउ का फा ने 1228 में की थी, के राजाओं और रानियों की कब्रगाह हैं।
- बराही जनजाति (Barahi tribe) पर कब्ज़ा करके चाउ लुंग सिउ का फा ने पटकाई पहाड़ियों की तलहटी में अहोम साम्रज्य की पहली राजधानी की स्थापना की और इसे चे-राय-दोई या चे-ताम-दोई नाम दिया, जिसका उनकी भाषा में अर्थ है “पहाड़ के ऊपर एक चमकदार शहर” और इसे अनुष्ठान के साथ एक पवित्र स्थल घोषित किया।
- अब तक उत्खनित कुल 386 मैदामों में से चराइदेव में मिली 90 शाही कब्रगाहें सबसे अच्छी तरह से संरक्षित हैं और ये कब्रगाहें इस रिवाज को दर्शाने वाले व्यापक उदाहरण हैं।
- अनुष्ठान प्रणाली और मृतक शाही लोगों को दफ़न करने की परंपरा में, चे-राय-डोइकन के मोई-डैम (Moi-Dams of Che-Rai-Doican) की तुलना प्राचीन चीन के शाही मकबरों और मिस्र के फिरौन के पिरामिडों से की जा सकती है।
- इसे विश्व विरासत स्थल के टैग के लिए चुने जाने वाले देश भर के 52 स्थलों में से चुना गया है।
- वर्तमान में पूर्वोत्तर में सांस्कृतिक विरासत की श्रेणी में फिलहाल कोई विश्व विरासत स्थल नहीं है।
- चराइदेव मैदाम का नामांकन ऐसे समय में और भी अधिक महत्व का हो गया है जब देश लचित बोरफुकन की 400वीं जयंती मना रहा है।
- देखभाल के अभाव में अधिकांश मैदाम प्राकृतिक कारणों और अतिक्रमण के कारण क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। इस जगह के पास लूटपाट की घटनाएं भी रिपोर्ट की गई हैं।


चित्र स्रोत: The Hindu
दफन प्रथा:
- अहोम साम्रज्य लगभग 600 वर्षों तक अस्तित्व में रहा जब तक कि वर्ष 1826 में अंग्रेजों ने असम पर अपना अधिकार नहीं कर लिया।
- 18वीं शताब्दी के बाद, अहोम शासकों ने दाह संस्कार की हिंदू प्रथा को अपनाया और चराइदेव के मैदामों में दाह संस्कार की हड्डियों तथा राख को दफनाना शुरू कर दिया।
- अहोम राजधानी के दक्षिण और पूर्व की ओर स्थानांतरित होने के साथ, उत्तरी वियतनाम, लाओस, थाईलैंड, उत्तरी बर्मा, दक्षिणी चीन और पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में मैदामों का निर्माण किया गया- जो उस क्षेत्र को परिभाषित करते हैं जहां ताई-अहोम संस्कृति प्रचलित थी।
- इस पूरे क्षेत्र में, चराइदेव में स्थित मैदामों का समूह अपने आकार, संकेंद्रण और ताई-अहोम की सबसे पवित्र भूमि में स्थित होने के कारण अन्य से काफी अलग हैं।
- अहोम शासकों ने 18वीं शताब्दी के बाद दाह संस्कार की हिंदू प्रथा को अपनाया और दाह संस्कार की हड्डियों तथा राख को चराइदेव के मैदामों में दफन कर दिया।
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सारांश:
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भारत में मौजूद यूनेस्को के विश्व विरासत स्थलों के बारे में अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक कीजिए: UNESCO World Heritage Sites in India
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
भारत-चीन सीमा विवाद
विषय: भारत और उसके पड़ोस-संबंध
मुख्य परीक्षा: भारत और चीन के बीच बढ़ता तनाव
संदर्भ:
- चीन भारतीय सीमा के पास तिब्बत में एक नया बांध बना रहा है।
मुख्य विवरण:
- इंटेल लैब के एक भू-स्थानिक खुफिया शोधकर्ता डेमियन सिमोन द्वारा जारी की गई नई उपग्रह छवियों में चीन को तिब्बत में माब्जा जांगबो नदी पर एक बांध का निर्माण करते हुए दिखाया गया है, जो कि तिराहे (त्रि-जंक्शन) के करीब है।
- तस्वीरों में मई 2021 से तिब्बत की बुरांग काउंटी जिसकी सीमा नेपाल के साथ लगी है, में जारी गतिविधियों को देखा जा सकता है।
- बांध तिराहे के लगभग 16 किमी. उत्तर और उत्तराखंड के कालापानी क्षेत्र के विपरीत में स्थित है।
- माब्जा जांगबो तिब्बत की नगरी काउंटी से निकलती है जो भारत की गंगा नदी में मिलने से पूर्व तक नेपाल से होते हुए घाघरा नदी में मिलती है।

चित्र स्रोत: Mint
निहितार्थ:
- चीन का यह कदम भारत और नेपाल के लिए चिंता का विषय हो सकता है क्योंकि चीन इस बांध का उपयोग पानी को दूसरी दिशा में मोड़ने और संग्रहीत करने के लिए कर सकता है जिससे माब्जा जांगबो नदी पर निर्भर क्षेत्रों में पानी की कमी हो सकती है और नेपाल में घाघरा तथा करनाली जैसी नदियों में जल स्तर कम हो सकता है।
- क्षेत्र में चीन द्वारा सीमा के करीब निर्मित किए जा रहे इस बांध का उपयोग उसके द्वारा विवादित क्षेत्रों पर अपना दावा मजबूत करने के लिए किया जा सकता है।
- वर्ष 2021 में, चीन ने घोषणा की थी कि वह 70 GW बिजली पैदा करने के लिए यारलुंग जांगबो के निचले क्षेत्रों में एक विशाल बांध का निर्माण करेगा, जो कि देश के थ्री गोर्जेस बांध से उत्पादित की जाने वाली बिजली से तीन गुना अधिक है। थ्री गोर्जेस बांध स्थापित क्षमता के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत संयंत्र है।
- तिब्बत में ब्रह्मपुत्र के रूप में जानी जाने वाली यारलुंग जांगबो नदी तिब्बत में हिमालय से निकलती है, अरुणाचल प्रदेश के जरिए भारत में प्रवेश करती है और बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले असम तथा बांग्लादेश से होकर प्रवाहित होती है।
- यह स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न करने और वर्ष 2060 तक कार्बन तटस्थता प्राप्त करने के लिए चीन द्वारा घोषित कई अन्य जलविद्युत परियोजनाओं में से एक थी।
- लाभ के रूप में पानी का उपयोग करने के अलावा, चीन द्वारा इस तिराहे के पास एक सैन्य प्रतिष्ठान की स्थापना की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसने अरुणाचल प्रदेश के पास यारलुंग जांगबो नदी के समीप इसे (सैन्य प्रतिष्ठान) स्थापित किया था।
- चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा से सटे निर्जन क्षेत्रों में दर्जनों गाँव भी बनाए हैं, जिनके बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का उद्देश्य विवादित सीमा के समीप के क्षेत्रों पर अपने दावे को मजबूत करने के लिए इन गावों का उपयोग करना है।
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सारांश:
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भारत और चीन के बीच हालिया सीमा संघर्ष के बारे में अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक कीजिए:Recent Border Clash Between India and China
भारत-चीन संबंधों के बारे में अधिक जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक कीजिए:India-China Relations
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
सामाजिक न्याय:
मनरेगा के तहत रोजगार के दिन
विषय: कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का प्रदर्शन
मुख्य परीक्षा: मनरेगा योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियाँ
संदर्भ:
- मनरेगा के तहत रोजगार के दिनों की संख्या पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है।
मुख्य विवरण:
- वित्तीय वर्ष 2022-23 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत प्रति परिवार प्रदान किए जाने वाले रोजगार के औसत दिनों की संख्या पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है।
- इस वित्तीय वर्ष में प्रति परिवार रोज़गार के औसत दिनों की संख्या 42 है, जबकि 2021-22 में यह 50 दिन, 2020-21 में 52 दिन, 2019-20 में 48 दिन और 2018-19 में 51 दिन था।
- महामारी के दो वर्षों की तुलना में इस वित्तीय वर्ष में मनरेगा कार्यक्रम के तहत काम की मांग में कमी आई है। गौरतलब है कि महामारी के दो वर्षों के दौरान एक बड़ी आबादी नौकरी छूटने के कारण आय के अंतर को पूरा करने के लिए मनरेगा पर निर्भर थी।
- हालांकि, कई विद्वानों और कार्यकर्ताओं का दावा है कि मनरेगा कार्यक्रम में संरचनात्मक समस्याएँ मौजूद हैं जो लोगों को इसमें भाग लेने से वंचित करती हैं।
योजना से जुड़े विभिन्न मुद्दे:
- धन के खराब आवंटन के कारण काम की मांग में कमी आई है और वेतन भुगतान में देरी हुई है। इन आपूर्ति बाधाओं ने श्रमिकों को नरेगा कार्य करने से हतोत्साहित किया है।
- कार्यस्थल पर उपस्थिति दर्ज करने के लिए ऐप जैसी अनावश्यक तकनीकी जटिलताओं की वजह से श्रमिकों के लिए और अधिक कठिनाइयाँ पैदा हो गई हैं।
- आलोचकों ने भी प्रायः इस बात की शिकायत की है कि योजना के प्रारंभ होने के बाद से काम उपलब्ध कराने की लागत में काफी वृद्धि हुई है।
- उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे गरीब राज्यों के बारे में योजना का बेहतर उपयोग करने में सक्षम नहीं होने को लेकर चिंताएं रही हैं, लेकिन आर्थिक रूप से बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्य जैसे केरल संपत्ति निर्माण के लिए योजना का कुशलता से उपयोग कर रहे हैं।
- देश में कम से कम नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अनुमानित व्यक्ति दिवसों के 70% से कम का उपयोग किया है।
- कम उपयोग के कारण, खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिए वित्तीय परिव्यय के आगामी वित्तीय वर्ष में और अधिक कम होने की उम्मीद है।
- मनरेगा के तहत व्यक्ति दिवसों को किसी वित्तीय वर्ष में योजना के तहत पंजीकृत व्यक्ति द्वारा कार्य दिवसों की कुल संख्या के रूप में परिभाषित किया गया है।
- फर्जी जॉब कार्ड और फर्जी लाभार्थी, भ्रष्टाचार, मस्टर रोल को देर से अपलोड करने और मजदूरी के भुगतान में देरी जैसी अन्य चुनौतियां मनरेगा के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न करती रही हैं।
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सारांश:
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संपादकीय-द हिन्दू
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
अंतरराष्ट्रीय संबंध:
क्यों घट रही है चीन की आबादी?
विषय: भारत के हित पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव।
मुख्य परीक्षा: चीन की बदलती जनसांख्यिकी और उसके परिणाम
विवरण:
- चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2022 में चीन की जनसंख्या में 8,50,000 की गिरावट आई है। 1961 के बाद यह पहली गिरावट है।
- जनसांख्यिकीविदों द्वारा इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि चीन की जनसंख्या अब चरम पर है, भारत 2023 में सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा।
- 1980 के बाद से, चीन में जन्म दर गिर रही है। 2022 में जन्म की कुल संख्या 9.56 मिलियन थी। यह 2021 से 10% से अधिक की गिरावट है।
- वर्ष 2022 में पहली बार चीन की जन्म दर, मृत्यु दर से कम हो गई है।
गिरावट के कारण:
- एक बच्चा नीति:
- इस नीति के तहत जबरन गर्भपात पर जोर दिया गया और उच्च जुर्माना लगाया गया।
- चीन की सरकार ने यह कहते हुए इस नीति का बचाव किया कि इसके जरिए देश में अतिरिक्त 400 मिलियन नवजातों के जन्म को रोका गया।
- हालांकि, विशेषज्ञ इस दृष्टिकोण का हवाला देते हुए इसे खारिज करते हैं कि बढ़ते आर्थिक विकास के कारण परिवार का आकार घटता है। इस संदर्भ में विशेषज्ञ वृद्ध होती आबादी जैसे परिणामों पर भी प्रकाश डालते हैं।
- विवाह प्राथमिकताएं:
- एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के बार्कले ब्रैम ने शोध पत्र में बताया है कि “युवा चीनी नागरिक देर से विवाह कर रहे हैं, कम बच्चे पैदा कर रहे हैं, या बच्चे पैदा करने से पूरी तरह से बच कर रहे हैं”।
- यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि चीन में शादी करने वाले जोड़ों की संख्या 2013 और 2020 के बीच लगभग 13.46 मिलियन से घटकर 8.14 मिलियन हो गई थी।
- विवाहित जोड़े की बाल प्राथमिकताएं:
- विवाहित जोड़े कम बच्चे पैदा करना पसंद कर रहे हैं और देर से अपना परिवार शुरू कर रहे हैं।
- 1990 से 2020 तक, पहली बार माता-पिता बनने की औसत आयु 24.1 से बढ़कर 27.5 हो गई थी।
घटती जनसंख्या पर चीन की प्रतिक्रिया:
- जनसंख्या में गिरावट की प्रवृत्ति को रोकने के लिए 2016 में चीनी सरकार द्वारा एक बच्चा नीति को त्याग दिया गया था।
- दो बच्चों की नीति भी पेश की गई थी। हालाँकि, इस पर प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली। एक सर्वेक्षण के अनुसार, यह पाया गया कि शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल की उच्च लागत के कारण नीति विफल रही।
- 2021 में “तीन-बच्चे की नीति” शुरू की गई थी। इसमें तीन बच्चों वाले परिवारों के लिए वित्तीय प्रलोभन शामिल थे।
- पोलित ब्यूरो ने महंगी निजी शिक्षा कंपनियों पर नकेल कसने जैसे आर्थिक कारकों के समाधान का भी वादा किया।
- हालाँकि, छोटे परिवारों के लिए व्यक्तिगत प्राथमिकताओं का वैश्विक चलन एक प्रमुख मुद्दा है।
- कुछ विद्वानों का सुझाव है कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाना एक अधिक यथार्थवादी नीति होगी।
चीन की अर्थव्यवस्था पर घटती आबादी का प्रभाव:
- चीन की कामकाजी उम्र (16-59) की आबादी घट रही है। 2022 के अंत में यह संख्या 875 मिलियन या कुल जनसंख्या का 62% थी। यह 2010 से लगभग 75 मिलियन कम है।
- 60 वर्ष से ऊपर की आबादी 280 मिलियन है जो कुल आबादी का 20% है। यह करीब 30 करोड़ की बढ़ोतरी है। चीनी सरकार के अनुसार, 2050 तक 60 से ऊपर की आबादी कुल आबादी का 35% होगी।
- बुजुर्गों की बढ़ती आबादी पर चीन के राष्ट्रीय कार्य आयोग ने अनुमान लगाया है कि इस खंड पर स्वास्थ्य देखभाल व्यय 2050 तक सकल घरेलू उत्पाद का 26% तक बढ़ जाएगा, जो 2015 में 7% था।
- प्रमुख मुद्दों में से एक जनसंख्या की सिकुड़ती आर्थिक क्षमता है।
- चीन के कार्यबल का आकार (2011 में चरम पर) 2050 में 925 मिलियन से घटकर 700 मिलियन होने की संभावना है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि बढ़ती मजदूरी के साथ, कई कारखाने बांग्लादेश और दक्षिण पूर्व एशिया में स्थानांतरित हो रहे हैं।
- चीनी मीडिया के कई लेख बताते हैं कि भारत 1980 के दशक वाले चीन के समान जनसांख्यिकीय और श्रम बल प्रोफ़ाइल के साथ दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा।

स्रोत: The Hindu
संबंधित लिंक
Two-Child Policy in India | UPSC Notes
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सारांश:
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
स्वास्थ्य:
खसरा, रूबेला उन्मूलन के लिए भारत की योजना
विषय: स्वास्थ्य से जुड़े मामले
प्रारंभिक परीक्षा: खसरा और रूबेला
मुख्य परीक्षा: खसरा और रूबेला का उन्मूलन
विवरण:
- भारत 2023 तक खसरा और रूबेला (MR) को खत्म करने का इरादा रखता है। यह याद रखा जाना चाहिए कि भारत महामारी जैसे विभिन्न कारणों से 2023 के अपने पूर्व के लक्ष्य से चूक गया है।
- इससे पहले भारत 2015 का लक्ष्य भी चूक गया था। 2023 का लक्ष्य आखिरकार 2019 में निर्धारित किया गया था।
खसरा और रूबेला के बारे में अधिक जानकारी के लिए, यहां क्लिक कीजिए: Measles and Rubella Vaccination Campaign – MR Vaccine Campaign. UPSC Notes.
पृष्ठभूमि विवरण:
- खसरा वायरस के कारण हर साल विश्व स्तर पर 1 लाख से अधिक बच्चों की मौत हो जाती है।
- इसी तरह, रूबेला जन्म दोष का एक प्रमुख कारण है।
- खसरा और रूबेला दोनों टीके से रोके जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, पिछले दो दशकों में, ऐसा अनुमान है कि खसरे के टीके से वैश्विक स्तर पर लगभग 30 मिलियन मृत्यु की घटनाएँ टली हैं।
- दोनों बीमारियों के लक्षणों में दाने और बुखार शामिल हैं।
- अक्टूबर 2022 में, महाराष्ट्र में, विशेषकर मुंबई में खसरे का प्रकोप देखा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संक्रमण के कारण 15 बच्चों की मौत हो गई थी।
- वायरोलॉजिस्ट डॉ. जैकब जॉन ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि 2022 का प्रकोप कोविड-19 महामारी के साथ ही एक विषम परिस्थिति थी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह हर्ड इम्युनिटी को बढ़ाएगा और टीकाकरण कार्यक्रम के आवश्यक लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा।
खसरा और रूबेला को खत्म करने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदम:
- 2010 से 2013 की अवधि के दौरान, भारत सरकार ने 9 महीने से 10 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए 14 राज्यों में चरणबद्ध रूप से खसरा टीकाकरण कार्यक्रम आयोजित किया था। लगभग 119 मिलियन बच्चों का टीकाकरण किया गया था।
- 2014 में, गैर-टीकाकृत आबादी का टीकाकरण करने के लिए मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत की गई थी।
- 2017-2021 के दौरान, सरकार ने खसरा और रूबेला उन्मूलन के लिए एक राष्ट्रीय रणनीतिक योजना अपनाई थी। इस योजना के अंतर्गत रूबेला युक्त टीका (RCV) को भी नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया गया था।
- एक राष्ट्रव्यापी खसरा-रूबेला पूरक टीकाकरण गतिविधि (SIA) कैच-अप अभियान की भी शुरूआत की गई थी।
- खसरा-रूबेला नेटवर्क में प्रयोगशालाओं की संख्या भी दोगुनी कर दी गई थी।
संबद्ध जोखिम और भावी कदम:
- 1 वर्ष से कम आयु वाली आबादी एक गंभीर चुनौती है। लेकिन अगर टीकाकरण कवरेज की दूसरी खुराक की गति 95% बनी रहती है तो खसरा और रूबेला को खत्म करने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
- न केवल MR के परीक्षण के लिए जिलेवार दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए बल्कि तेज बुखार और दाने निकलने की निगरानी भी की जानी चाहिए।
- ग्रामीण स्वास्थ्य नर्स, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी और एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) कर्मी जैसे जमीनी स्तर के कर्मचारियों को समय पर वेतन और बेहतर सेवा शर्तों के रूप में पर्याप्त सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
निष्कर्ष:
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) 2023 तक खसरा और रूबेला को खत्म करने के भारत के प्रयास पर सकारात्मक है। इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि “कहीं भी संक्रमण का खतरा एक प्रकार से हर जगह खतरा है।”
संबंधित लिंक:
Immunisation Drive in India – Universal Immunization Programme
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सारांश:
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प्रीलिम्स तथ्य:
- बार हेडेड गूज
विषय: जैव विविधता और पर्यावरण
प्रारंभिक परीक्षा: भारत में प्रवासी पक्षी
संदर्भ:
- कर्नाटक में वन विभाग के कर्मियों ने एक अभिनेता के फार्महाउस पर छापा मारकर चार बार हेडेड गूज को इस आधार पर जब्त कर लिया कि वहाँ इसे कानून का उल्लंघन करके पाला जा रहा था।
बार हेडेड गूज:
- बार-हेडेड गूज (एंसर इंडिकस) एक हंस/गूज है जो मध्य एशिया में पर्वतीय झीलों के पास हजारों की संख्या में और सर्दियों में दक्षिण एशिया में (दक्षिण में प्रायद्वीपीय भारत तक) प्रजनन करते हैं।
- ये अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, भारत, मंगोलिया, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान, रूस, थाईलैंड और वियतनाम में विशाल संख्या में पाए जा सकते हैं। ये कनाडा और स्पेन में भी पाए जाते हैं।
- यद्यपि ये जमीन में स्थित घोंसले में अंडे देते हैं, लेकिन हिमालय में प्रवास करते समय अत्यधिक ऊंचाई तक उडान भरने के लिए जाने जाते हैं।
- ये निरंतर उड़ान के माध्यम से इस चरम यात्रा से अपना बचाव करते हैं। निरंतर उड़ान से उनके शरीर द्वारा अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिसे वे अपने निचले पंखों के द्वारा बनाए रखते हैं। इस प्रजातियों में एक विशेष प्रकार का हीमोग्लोबिन भी पाया जाता है जो अन्य पक्षियों की तुलना में ऑक्सीजन को अधिक तेज़ गति से अवशोषित कर सकता है।
- बार-हेडेड गूज दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों (असम से तमिलनाडु तक दक्षिण में) में सर्दियाँ व्यतीत करने के लिए हिमालय में प्रवास करते हैं।
- इन प्रजातियों का आधुनिक शीतकालीन आवास जुते हुए खेत हैं, जहां ये जौ, चावल और गेहूं के दानों को खाकर जीवित रहते हैं।
- इन प्रजातियों का ग्रीष्मकालीन आवास उच्च ऊंचाई पर स्थित झीलें हैं जहां ये छोटी घासों को खाकर जीवित रहते हैं।
संरक्षण की स्थिति:
- बार-हेडेड गूज की IUCN संरक्षण स्थिति को ‘खतरे से बाहर’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
- ये वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची 2 में सूचीबद्ध हैं।
- इस सूची के तहत शामिल किए गए पशुओं को उनके व्यापार पर प्रतिबंध के साथ उच्च सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसके तहत अपराध के लिए उच्चतम दंड निर्धारित हैं।

चित्र स्रोत: eBird.org
महत्वपूर्ण तथ्य:
- वैगनर समूह:
- अमेरिका ने हाल ही में रूस के वैगनर समूह को एक “अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन” के रूप में नामित किया है और इसे इतालवी माफिया समूहों और जापानी तथा रूसी संगठित अपराध वाले लीग/गुट में रखा है।
- अमेरिकी कार्यकारी आदेश 13581 के तहत वैगनर को एक “अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक संगठन” घोषित करने से वैगनर की किसी भी अमेरिकी संपत्ति को जब्त कर लिया जाएगा और अमेरिकी नागरिकों को इस समूह को धन, सामान या सेवाएं प्रदान करने से रोक दिया जाएगा।
- यह समूह एक व्यवसायी येवगेनी प्रिगोज़िन द्वारा नियंत्रित किया जाता है और यूक्रेन में इसके लगभग 50,000 लड़ाके हैं, जिनमें से 80% जेलों से रिहा हुए कैदी हैं।
- अमेरिका के इस कदम से यूक्रेन में लड़ रही निजी रूसी सेना पर दबाव और अधिक बढ़ गया है।
- इस अमेरिकी कदम से समूह के विशाल वैश्विक नेटवर्क के खिलाफ प्रतिबंधों का व्यापक प्रयोग भी देखने को मिलेगा, जिसके तहत प्रतिबंधों के अंतर्गत अफ्रीका और अन्य देशों में भाड़े के सैनिकों के संचालन (mercenary ऑपरेशन्स) के साथ-साथ व्यवसाय भी शामिल हैं।
- वर्ष 2015 से, वैगनर समूह के भाड़े के सैनिक सीरिया में सरकार समर्थक बलों के साथ लड़ रहे हैं और तेल क्षेत्रों की रखवाली कर रहे हैं।
- लीबिया में भी वैगनर समूह के भाड़े के सैनिक मौजूद हैं, जो जनरल खलीफा हफ्तार के प्रति वफादार बलों का समर्थन करते हैं।
- मध्य अफ्रीकी गणराज्य (CAR) ने वैगनर समूह को हीरे की खानों की रक्षा के लिए आमंत्रित किया है, और माना जाता है कि यह समूह सूडान में सोने की खानों की रखवाली करता है।
- पश्चिमी अफ्रीका में माली की सरकार इस्लामिक उग्रवादी समूहों के खिलाफ वैगनर समूह का इस्तेमाल कर रही है।
- अमेरिका ने उत्तर कोरिया से हथियारों की खरीद के लिए वैगनर पर भी आरोप लगाया है।
- उत्तर कोरिया से हथियारों का लेन-देन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का सीधा उल्लंघन है।
- यूरोपीय संघ ने वर्ष 2021 में वैगनर पर प्रतिबंध लगाया था और समूह से जुड़े व्यक्तियों को “गंभीर मानवाधिकारों के हनन में शामिल होने, जिसमें अत्याचार और असाधारण या मनमाने ढंग से फांसी देना और हत्याएं करना शामिल हैं” का आरोपी माना था।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. सांभर हिरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर-मध्यम)
- यह भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया के लिए स्थानिक एक बड़ा हिरण है।
- यह IUCN लाल सूची में एक संवेदनशील (vulnerable) प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध है।
विकल्प:
- केवल 1
- केवल 2
- दोनों
- इनमें से कोई भी नहीं
उत्तर: c
व्याख्या: सांभर (Rusa unicolor) भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया का एक बड़ा हिरण है जो वर्ष 2008 से IUCN की लाल सूची में एक सुभेद्य प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध है। अत्यधिक शिकार, स्थानीय उग्रवाद और आवास के औद्योगिक दोहन के कारण इसकी आबादी में बड़े स्तर पर कमी आई है।

चित्र स्रोत: Animalia
प्रश्न 2. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: (स्तर-कठिन)
मुद्रा अर्थ
- अभय मुद्रा यह बोधि वृक्ष के नीचे बुद्ध के ज्ञान का प्रतीक है।
- भूमिस्पर्श मुद्रा यह सुरक्षा, शांति और भय को दूर करने का प्रतीक है।
- करण मुद्रा यह बुराई और अन्य नकारात्मक प्रभावों से दूर रखने की एक मुद्रा है।
- वरद मुद्रा यह दान, करुणा और वरदान देने का प्रतीक है।
उपर्युक्त युग्मों में से कितना/कितने सुमेलित है/हैं?
- केवल एक युग्म
- केवल दो युग्म
- केवल तीन युग्म
- सभी चारों युग्म
उत्तर: b
व्याख्या:
- युग्म 1 सुमेलित नहीं है: संस्कृत में अभय का अर्थ है निर्भयता। निर्भयता की मुद्रा या अभय मुद्रा भय को दूर करने का प्रतीक है। यह मुद्रा दाहिने हाथ को कंधे की ऊंचाई तक उठाकर, हाथ को मोड़कर और हथेली को बाहर की ओर करके बनाई जाती है।
- युग्म 2 सुमेलित नहीं है: भूमिस्पर्श मुद्रा को “पृथ्वी को छूने” के रूप में भी जाना जाता है जो बुद्ध के जागरण के क्षण का प्रतिनिधित्व करती है क्योंकि उनके अनुसार पृथ्वी उनके ज्ञानोदय की साक्षी है। इस मुद्रा को दाहिने हाथ की मदद से दर्शाया जाता है। इसमें दाहिने हाथ को दायें घुटने पर रखकर हथेली को अंदर की ओर रखते हुए कमल के सिंहासन को छूते हुए दर्शाया जाता है।
- युग्म 3 सुमेलित है: करण मुद्रा एक पवित्र हाथ की भंगिमा या “मुद्रा” है जिसका उपयोग योग और ध्यान अभ्यास के दौरान प्राण के रूप में जानी जाने वाली महत्वपूर्ण जीवन शक्ति ऊर्जा के प्रवाह को प्रसारित करने के साधन के रूप में किया जाता है।
- करण मुद्रा प्रसन्नता और संतोष की भावनाओं को बढ़ाने के साथ-साथ नकारात्मकता, चिंता, भय और अवसाद को दूर करने में मदद करती है।
- यह शरीर के भीतर अग्नि और ईथर तत्वों को उत्तेजित करती है, जिसे क्रमशः अंगूठे और मध्यमा अंगुली द्वारा दर्शाया जाता है।
- युग्म 4 सुमेलित है: वरद मुद्रा भेंट, स्वागत, दान, करुणा और ईमानदारी को दर्शाती है। इस मुद्रा को दोनों हाथों की मदद से दाहिने हाथ की हथेली को आगे की ओर रखकर उंगलियों को खोलते हुए और बाएं हाथ की हथेली को खुली उंगलियों के साथ नाभि के पास रखकर प्रदर्शित किया जाता है।
प्रश्न 3. निम्नलिखित में से कौन सा संशोधन श्रीलंका में भारतीय हस्तक्षेप का परिणाम था? (स्तर-कठिन)
- 7वां संशोधन
- 9वां संशोधन
- 13वां संशोधन
- 14वां संशोधन
उत्तर: c
व्याख्या: 13वां संशोधन वर्ष 1987-1990 के बीच श्रीलंका में भारतीय हस्तक्षेप का परिणाम था। यह 29 जुलाई, 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते से प्रेरित है।
- समझौते (जिसे जयवर्धने-राजीव गांधी समझौते के रूप में भी जाना जाता है) की शर्तों के तहत, श्रीलंकाई संसद ने 13वां संशोधन लाया, जिसके तहत संपूर्ण श्रीलंका में निर्वाचित प्रांतीय परिषदों की प्रणाली का प्रावधान किया गया।
प्रश्न 4. अखिल भारतीय किसान सभा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही हैं? (स्तर-कठिन)
- इसकी स्थापना 1936 में अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के मेरठ अधिवेशन में हुई थी।
- अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष स्वामी सहजानन्द सरस्वती थे।
- इसका उद्देश्य जमींदारी को समाप्त करना तथा भूमि को कृषि और अन्य ग्रामीण मजदूरों के बीच निःशुल्क वितरित करना था।
विकल्प:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: b
व्याख्या:
- कथन 1 गलत है: अखिल भारतीय किसान सभा भारत में किसानों के अधिकारों और सामंतवाद विरोधी आंदोलन के लिए काम करने वाला एक किसान मोर्चा है। इसकी स्थापना 1936 में अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के लखनऊ अधिवेशन में की गई थी।
- कथन 2 सही है: सहजानंद सरस्वती बिहार प्रांतीय किसान सभा (BPKS) के संस्थापक थे और अखिल भारतीय किसान सभा के पहले अध्यक्ष थे।
- कथन 3 सही है: अखिल भारतीय किसान सभा किसानों और कृषि तथा अन्य ग्रामीण मजदूरों का प्रतिनिधित्व करने वाले मंच के रूप में काम करती है। अखिल भारतीय किसान सभा के निम्नलिखित उद्देश्य हैं:
- जमींदारी प्रथा को समाप्त करना और भूमि को कृषि तथा अन्य ग्रामीण मजदूरों को मुफ्त में वितरित करना।
- ग्रामीण जनता के जीवन स्तर में सुधार करना और कृषि तथा उद्योग का विकास करना।
- कृषि और अन्य ग्रामीण मजदूरों के शोषण को समाप्त करना।
प्रश्न 5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर-कठिन)
- ये उत्तरी ब्राजील और दक्षिणी वेनेजुएला के वर्षावनों और पहाड़ों में रहते हैं।
- ये दक्षिण अमेरिका की सबसे बड़ी अपेक्षाकृत अलग-थलग जनजाति हैं।
- ये अपने सभी सदस्यों को समान मानते हैं, और उनका कोई मुखिया नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में निम्नलिखित में से किसका सर्वोत्तम वर्णन है?
- ह्यूरोन
- मोहेगन
- ओजिब्वा
- यानोमामी
उत्तर: d
व्याख्या: यानोमामी दक्षिण अमेरिका में सबसे बड़ी अपेक्षाकृत अलग-थलग जनजाति है। ये उत्तरी ब्राजील और दक्षिणी वेनेजुएला के वर्षावनों और पहाड़ों में रहते हैं।
- यानोमामी स्वयं को एक संयुक्त समूह के रूप में नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक रूप से स्वायत्त गांवों से जुड़े व्यक्तियों के रूप में मानते हैं।
- यानोमामी समुदायों को एक साथ रखा गया है क्योंकि उनकी आयु और सगोत्रता समान है, और सैन्य गठबंधन समुदायों को एक साथ जोड़ते हैं।
- एक तुक्सावा (मुखिया) प्रत्येक गाँव के नेता के रूप में कार्य करता है, लेकिन कोई भी नेता यानोमामी के रूप में वर्गीकृत सभी लोगों की अध्यक्षता नहीं करता है क्योंकि वे सभी लोगों को समान मानते हैं।
प्रश्न 6. निम्नलिखित में से किस प्रकार के प्रकाश पौधों द्वारा अच्छी तरह से अवशोषित होते हैं? (स्तर-मध्यम) विगत वर्ष के प्रश्न (2007)
- बैंगनी और नारंगी
- नीला और लाल
- इंडिगो और पीला
- पीला और बैंगनी
उत्तर: b
व्याख्या: प्रकाश के सात रंगों में से केवल लाल और नीला रंग ही पौधों द्वारा अवशोषित किया जाता है। चूँकि क्लोरोफिल हरे रंग का होता है, इसलिए यह सूर्य के विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम के नीले और लाल रंगों को अच्छी तरह से अवशोषित करता है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. चीन की जनसंख्या संकट के संदर्भ में, एक राष्ट्र के रूप में भारत के पास मौजूद अवसरों पर चर्चा कीजिए? (10 अंक, 150 शब्द) (GSI- भारतीय समाज-जनसंख्या और संबद्ध चुनौतियां)
प्रश्न 2. “प्रमुख संकेतकों पर मनरेगा का खराब प्रदर्शन नीति निर्माताओं के लिए एक चेतावनी होनी चाहिए” टिप्पणी कीजिए? (15 अंक, 250 शब्द) (GSII-शासन)