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A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
पर्यावरण:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G. महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।
संपादकीय-द हिन्दू
संपादकीय:
क्या संयुक्त राष्ट्र युद्धों को समाप्त करने में अक्षम है?
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
विषय: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान।
मुख्य परीक्षा: 21वीं सदी में संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता।
प्रसंग:
- इज़राइल और हमास के बीच चल रहे संघर्षों के साथ-साथ लगातार चल रहे रूस-यूक्रेन संघर्ष (Russia-Ukraine conflict) ने वैश्विक संघर्षों को हल करने में संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता पर प्रकाश डाला है।
संयुक्त राष्ट्र की प्रभावहीनता का संकेतः
- इजरायल-हमास युद्ध में संघर्ष विराम की मध्यस्थता करने में संयुक्त राष्ट्र की असमर्थता वैश्विक संघर्ष समाधान में इसकी कम प्रभावकारिता का स्पष्ट संकेत देता है।
- पिछले कुछ दशकों में, संघर्ष समाधान में संयुक्त राष्ट्र की भागीदारी कम हो गई है, जो इसे समकालीन संघर्षों में एक सक्रिय मध्यस्थ की तुलना में एक पर्यवेक्षक के रूप में अधिक चित्रित करती है।
संयुक्त राष्ट्र अप्रभावी क्यों है:
- मुख्य रूप से प्रमुख विश्व शक्तियों के बीच पर्याप्त असहमति और कलह के कारण संयुक्त राष्ट्र के सामने महत्वपूर्ण बाधाएं सामने खड़ी हैं।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना, विशेष रूप से इसके स्थायी सदस्यों द्वारा उपयोग की जाने वाली वीटो शक्ति, उन संघर्षों को दूर करने में दुर्जेय बाधाएं प्रस्तुत करती है जहां प्रभावशाली देशों के राष्ट्रीय हित शांति और समाधान की व्यापक खोजों में आपस में टकराते हैं।
- इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की शक्ति संरचना पर आधारित है और यह वर्तमान बहुध्रुवीयता को प्रतिबिंबित नहीं करता है। यह एक सिद्ध तथ्य है कि बहुपक्षवाद के बिना बहुध्रुवीयता अराजकता और संघर्ष का कारण बनेगी।
यदि संयुक्त राष्ट्र कोई समाधान प्रदान नहीं कर रहा है, तो हम उसे कहां खोजें?
- इजरायल-हमास संघर्ष में युद्धविराम के लिए व्यापक अंतर्राष्ट्रीय समर्थन के बावजूद, प्रमुख शक्तियों की साझा आधार खोजने में असमर्थता संघर्ष को हल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों को बाधित करती है।
पश्चिम एशियाई क्षेत्र में भारतीय हितः
- पश्चिम एशियाई क्षेत्र में भारत के बढ़ते हित महत्वपूर्ण और बहुआयामी हैं। इसमें राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक आयामों को शामिल करते हुए खाड़ी अरब राज्यों के साथ संबंधों को गहरा करना शामिल है।
- इस क्षेत्र में भारत का एक बड़ा प्रवासी समुदाय निवास करता है और यह धन प्रेषण के लिए इस पर निर्भर करता है, जिससे यह क्षेत्र देश के लिए आर्थिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण है।
- इसके अतिरिक्त, भारत ने कई पश्चिम एशियाई देशों के साथ मजबूत ऊर्जा संबंध स्थापित किए हैं, जो इसकी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता में योगदान दे रहे हैं।
भारत की संभावित भूमिका और सीमाएँ:
- जटिल भू-राजनीतिक गतिशीलता और चल रहे संघर्षों में प्रमुख वैश्विक शक्तियों का प्रमुख प्रभाव एक प्रभावी शांति वाहक के रूप में कार्य करने की भारत की क्षमता को प्रतिबंधित करता है।
- इस क्षेत्र में भारत के रिश्ते, जिसमें खाड़ी अरब राज्यों, इज़राइल और फिलिस्तीनी मुद्दे के साथ उसके संबंध शामिल हैं,जटिलता से भर जाते हैं, जिससे ऐसे संघर्षों में पर्याप्त मध्यस्थता की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण हो जाता हैं।
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सारांश:
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पुराने पश्चिम एशिया का बदला:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
विषय: भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव।
मुख्य परीक्षा: हालिया इज़राइल-हमास संघर्ष पश्चिम एशियाई इतिहास में निहित है और अभी भी क्षेत्र की भूराजनीति को प्रभावित कर रहा है।
विवरण:
- 1967 में, छह दिवसीय युद्ध के दौरान इज़राइल ने ऐतिहासिक फिलिस्तीन पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था।
- इस नियंत्रण में वेस्ट बैंक, पूर्वी येरुशलम, गाजा पट्टी, सिनाई प्रायद्वीप और गोलान हाइट्स शामिल थे।
- तब से फ़िलिस्तीनी क्षेत्र इज़रायली सेना के कब्जे में हैं।
इज़राइली आख्यान:
- इज़राइल हमास जैसे हमलों का जवाब देने के अधिकार का दावा करके अपने कार्यों को उचित ठहराता है।
- इज़राइल असंगत बल का उपयोग करने और नागरिकों को निशाना बनाने (दहिया सिद्धांत-Dahiya doctrine) के लिए जाना जाता है।
- इजरायली नेताओं का तर्क है कि इन हमलों के लिए पूरी आबादी जिम्मेदार हैं और गाजा में कोई निर्दोष नागरिक नहीं है।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य:
- शांति के लिए एक बड़ी बाधा माने जाने वाले हमास की स्थापना 1988 में इज़रायल का कब्ज़ा शुरू होने के 21 साल बाद हुई थी।
- अतीत में, इज़राइल ने हमास के पूर्ववर्ती इस्लामिक सेंटर जैसे समूहों को मान्यता दी और उनके साथ काम किया, जबकि फतह और पीएलओ जैसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रवादी आंदोलनों को प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा।
- पीएलओ ने अंततः इज़राइल को मान्यता दी और वर्ष 1967 के दौरान निर्धारित की गई सीमाओं के भीतर एक देश/राज्य को स्वीकार कर लिया, लेकिन उसके पश्चात् शांति प्रयास लड़खड़ा गए, जिससे हमास का उदय हुआ।
ईरान फैक्टर:
- ईरान इस क्षेत्र में इज़राइल का एक प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बन गया है और हमास जैसे समूहों का समर्थन करता है।
- हालाँकि, इज़राइल के प्रति ईरान की शत्रुता 1979 में इस्लामी क्रांति (Islamic Revolution) के बाद शुरू हुई।
- शांति प्रक्रिया रुकने और हमास को प्रमुखता मिलने से फिलिस्तीनियों के बीच ईरान का प्रभाव बढ़ गया।
शत्रुतापूर्ण पड़ोस:
- इज़राइल का तर्क है कि उसे शत्रुतापूर्ण पड़ोस में खतरों का सामना करना पड़ता है।
- हालाँकि अरब देशों ने शुरू में इज़राइल के अस्तित्व का विरोध किया था, लेकिन आखिरी बड़ा अरब हमला 1973 में हुआ था।
- पिछले कुछ वर्षों में, कुछ अरब देशों ने इज़राइल के साथ संबंध सामान्य किये।
- संयुक्त राज्य अमेरिका के समर्थन से इज़राइल अब एक शक्तिशाली क्षेत्रीय खिलाड़ी बन गया है।
अनसुलझा फ़िलिस्तीन मुद्दा:
- क्षेत्रीय परिवर्तनों के बावजूद, आज भी इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष (Israel-Palestine conflict) जारी है।
- हालाँकि इज़राइल का दृष्टिकोण कब्जे के मुद्दे को नजरअंदाज करना और अरब देशों के साथ शांति योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना रहा है।
- हाल की घटनाएं, जैसे हमास के हमले और इज़राइल की प्रतिक्रिया, इस बात पर प्रकाश डालती हैं कि फ़िलिस्तीनी समस्या इस क्षेत्र में अस्थिरता का एक मुख्य स्रोत बनी हुई है।
निष्कर्ष:
- इसराइल-फ़िलिस्तीन के बीच चल रहे संघर्ष का प्रभाव इस क्षेत्र पर पड़ रहा है।
- यह ऐतिहासिक जड़ों और भू-राजनीतिक आयामों वाला एक जटिल मुद्दा है जो पश्चिम एशिया में हिंसा के चक्र में योगदान देता है।
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सारांश:
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बायोस्फीयर रिजर्व आशा के स्रोत के रूप में विकसित हो रहे हैं:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
पर्यावरण:
विषय: पर्यावरण संरक्षण।
मुख्य परीक्षा: बायोस्फीयर रिजर्व की उपयोगिता और खतरा।
प्रसंग:
- विश्व बायोस्फीयर रिजर्व दिवस प्रतिवर्ष 3 नवंबर को मनाया जाता है।
- इसका उद्देश्य बायोस्फीयर रिजर्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उनके संरक्षण और टिकाऊ उपयोग को बढ़ावा देना है।
संरक्षण की उपयोगिता:
- यूनेस्को द्वारा नामित बायोस्फीयर रिजर्व, जैव विविधता (biodiversity) की रक्षा करते हैं, सतत विकास को बढ़ावा देते हैं और अनुसंधान की सुविधा प्रदान करते हैं।
- इनमें कोर जोन (कड़ाई से संरक्षित), बफर जोन (प्रकृति के साथ सामंजस्य), और संक्रमण क्षेत्र (टिकाऊ मानव गतिविधियां) शामिल हैं।
- बायोस्फीयर रिजर्व विभिन्न संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा समर्थित हैं।
- वर्तमान में 134 देशों में 748 बायोस्फीयर रिजर्व हैं, जिनमें सीमा पार स्थल भी शामिल हैं।
- वे दुनिया भर में 250 मिलियन से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में योगदान देते हैं।
स्थानीय स्तर पर:
- स्थानीय समुदाय बायोस्फीयर रिजर्व (biosphere reserve) संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- भारत में सुंदरबन बायोस्फीयर रिजर्व का उदाहरण जहां समुदाय मैंग्रोव वनों का प्रबंधन करते हैं और जैव विविधता की रक्षा करते हैं।
- मन्नार बायोस्फीयर रिजर्व की खाड़ी में, स्वयं सहायता समूह, महिलाएं और युवा संरक्षण प्रयासों में संलग्न हैं।
- मन्नार की खाड़ी बायोस्फीयर रिजर्व ट्रस्ट ने सड़क निर्माण के लिए प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा करने और रीसाइक्लिंग करने के लिए “प्लास्टिक चेकपॉइंट्स” की शुरुआत की हैं।
चेन्नई में एशियाई बैठक:
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ साझेदारी में यूनेस्को ने भारत के चेन्नई में 10वीं दक्षिण और मध्य एशियाई बायोस्फीयर रिजर्व नेटवर्क मीटिंग (SACAM) का आयोजन किया।
- बैठक का विषय “रिज टू रीफ” ( “Ridge to Reef”) था।
- SACAM का उद्देश्य दक्षिण और मध्य एशिया क्षेत्र में स्थायी पर्यावरण प्रथाओं में ज्ञान के आदान-प्रदान और सहयोग को सुविधाजनक बनाना है।
- यूनेस्को मैन एंड द बायोस्फीयर (Man and the Biosphere (MAB)) कार्यक्रम मानव-पर्यावरण संबंध को बढ़ाने, आजीविका में सुधार, पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक और सामाजिक विज्ञान को जोड़ता है।
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सारांश:
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प्रीलिम्स तथ्य:
1. कार्बन सीमा समायोजन तंत्र:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
विषय: अर्थव्यवस्था
प्रारंभिक परीक्षाः यूरोपीय संघ का कार्बन सीमा समायोजन तंत्र।
विवरण:
- आयात पर कार्बन टैक्स (carbon tax) लगाने की यूरोपीय संघ की योजना की भारत द्वारा आलोचना की गई हैं।
- भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री, पीयूष गोयल का कहना है कि कर यूरोपीय संघ के विनिर्माण क्षेत्र को नुकसान पहुंचा सकता है और भारत के लिए प्रभावी नहीं हो सकता है।
- भारत अपने उपायों से यूरोपीय संघ के कार्बन कर का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।
यूरोपीय संघ का कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM):
- यूरोपीय संघ का कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) ) यूरोपीय संघ के ग्रीन डील का एक प्रमुख घटक है, जिसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।
- सीबीएएम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यूरोपीय संघ में आयातित वस्तुएं यूरोपीय संघ द्वारा उत्पादित वस्तुओं की तरह ही कार्बन उत्सर्जन मानकों को पूरा करें।
- सीबीएएम के तहत, निर्यातकों को अपने माल के उत्पादन से जुड़े कार्बन उत्सर्जन के बारे में रिपोर्ट करना और भुगतान करना आवश्यक है।
- यह तंत्र वर्ष 2026 से शरू होने वाला है, इसके साथ ही स्टील सहित निर्यातकों के लिए रिपोर्टिंग आवश्यकताओं की शुरुआत पहले ही हो चुकी है।
- यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) ने इस महीने की शुरुआत में स्टील सहित निर्यातकों के लिए रिपोर्टिंग आवश्यकताओं की शुरुआत की।
- गोयल ने भारत और यूरोप में अलग-अलग कार्बन मूल्य निर्धारण के कारण सीबीएएम को “अनुचित” करार दिया हैं।
भारत की प्रतिक्रिया:
- मंत्री गोयल ने यूरोपीय संघ के सीबीएएम को “अनुचित” करार दिया हैं,क्योंकि यह भारत और यूरोप के बीच एक समान कार्बन मूल्य निर्धारण को मानता है, जो कि सही स्थिति नहीं है।
- भारत अपने राष्ट्रीय कार्बन कटौती लक्ष्यों के अनुरूप अपने स्वयं के कार्बन कर को लागू करके यूरोपीय संघ के कार्बन कर को बेअसर करने की योजना बना रहा है।
- गोयल का सुझाव है कि कार्बन कर का सामना कर रहे यूरोपीय उत्पादक अतिरिक्त लागत से बचने के लिए अपने उत्पादन को भारत में स्थानांतरित करने पर विचार कर सकते हैं।
भारत के लिए अवसरः
- गोयल का मानना है कि कार्बन कर के परिणामस्वरूप यूरोपीय वाहन क्षेत्र में गिरावट आ सकती है, जिससे भारत को एक प्रतिस्पर्धी वाहन उद्योग विकसित करने का अवसर मिल सकता है।
- यूरोप में उत्पादन लागत बढ़ने से भारत को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है, जिससे विदेशी निवेश आकर्षित हो सकता है और अपने विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार हो सकता है।
2. भारत-अमेरिका ‘2+2’ वार्ता:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
विषय: अंतर्राष्ट्रीय संबंध
प्रारंभिक परीक्षा: भारत और अमेरिका के बीच 2+2 वार्ता।
विवरण:
- अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ‘2+2’ बैठक के लिए नई दिल्ली जाएंगे।
- इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ चर्चा होगी।
- इस बैठक में द्विपक्षीय और वैश्विक चिंताओं, विशेषकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र, दोनों पर चर्चा की जाएगी।
बैठक विवरण:
- यह बैठक सचिव ब्लिंकन की 2-10 नवंबर की यात्रा का हिस्सा है, जिसमें 9-10 नवंबर को तेल अवीव, अम्मान, टोक्यो, सियोल और नई दिल्ली में रुकना शामिल है।
- मंत्रिस्तरीय चर्चा के बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सचिव ब्लिंकन और सचिव ऑस्टिन से मुलाकात करेंगे।
क्वाड शिखर सम्मेलन और इज़राइल-हमास संघर्ष:
- भारत 27 जनवरी, 2024 को अस्थायी रूप से नई दिल्ली में क्वाड (Quad) शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए तैयार है, जिसमें अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं के भाग लेने की उम्मीद है।
- इस बैठक में इजरायल और हमास की नवीनतम दौर की लड़ाई के बाद हुआ इजरायल-हमास संघर्ष चर्चा का एक प्रमुख विषय होगा।
कार्यक्रम के अन्य विषय:
- इस बैठक में यूक्रेन, रूस,विश्व बैंक (World Bank) और आईएमएफ सहित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के सुधार जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी।
- जी-20 के निवर्तमान अध्यक्ष के रूप में भारत की भूमिका इन संस्थानों में सुधार को प्राथमिकता देती रही है।
राजनयिक संबंध और चिंताएँ:
- यह ‘2+2’ बैठक भारत और कनाडा के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच हो रही है, जो विवाद एक कनाडाई खालिस्तानी अलगाववादी नेता की हत्या में भारत की संलिप्तता के आरोपों से उपजा हैं।
- अमेरिका ने भारत से इस मामले में कनाडा की जांच में सहयोग करने का आग्रह किया है।
क्षेत्रीय और रक्षा मुद्दे:
- बैठक में चीन और दक्षिण एशिया से संबंधित विषयों पर भी चर्चा होगी, जिसमें हालिया मालदीव चुनाव और बांग्लादेश के प्रति दृष्टिकोण में अंतर शामिल हैं।
- रक्षा संबंधी चर्चाओं में अमेरिका-भारत रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप, आपूर्ति व्यवस्था की सुरक्षा, पारस्परिक रक्षा खरीद समझौता और एमक्यू-9बी मानव रहित हवाई वाहनों (MQ-9B Unmanned Aerial Vehicles) के लिए खरीद समझौता शामिल होगा।
- रक्षा उपकरणों का सह-उत्पादन मुख्य फोकस रहेगा।
सहयोग का विस्तार:
- चारों मंत्री लोकतंत्र, मानवाधिकार, स्वच्छ ऊर्जा, आतंकवाद विरोधी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष और सेमीकंडक्टर विनिर्माण को आगे बढ़ाने के प्रयासों पर चर्चा करेंगे।
- भारत में लोकतांत्रिक मानदंडों और अल्पसंख्यक अधिकारों के बारे में चिंताओं पर चर्चा की जाएगी।
पूर्व पहलों की निरंतरता:
- इस बैठक में जून में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन डीसी की राजकीय यात्रा के दौरान घोषित पहल जारी रहने की उम्मीद है।
- इन चर्चाओं का उद्देश्य दोनों देशों के बीच एक संतुलित बातचीत करना है।
इंडो-पैसिफिक के लिए अमेरिकी प्रतिबद्धता:
- सचिव ब्लिंकन की नई दिल्ली यात्रा अन्य वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जैसा कि पूर्वी एशियाई और प्रशांत मामलों के लिए विदेश विभाग के शीर्ष राजनयिक डैनियल क्रिटेनब्रिंक ने कहा है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
1. म्यांमार ने चिनश्वेहौ पर नियंत्रण खो दिया:
- म्यांमार की सेना को चीनी सीमा पर एक रणनीतिक शहर पर नियंत्रण बनाए रखने में महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
- प्रश्नचिन्ह लगते इस शहर चिनश्वेहौ (Chinshwehaw) में कई दिनों से सैन्य और जातीय सशस्त्र समूहों के बीच झड़पें जारी हैं।
- जुंटा प्रवक्ता ने घोषणा की कि सरकारी संस्थान, प्रशासनिक संगठन और सुरक्षा बल चिनश्वेहाव में “अब मौजूद नहीं हैं” (“no longer present”)।
- यह शहर एक महत्वपूर्ण व्यापार केंद्र है जो चीन के युन्नान प्रांत की सीमा पर स्थित है, जो इसे रणनीतिक महत्व प्रदान करता है।
- म्यांमार सेना और इस क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न जातीय सशस्त्र समूहों के बीच चल रही झड़पों के बाद सेना द्वारा इस शहर से नियंत्रण खो दिया गया है।
- जातीय सशस्त्र समूह म्यांमार के भीतर अधिक स्वायत्तता और प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं, जिससे सेना के साथ संघर्ष हो रहा है।
- चिनश्वेहौ को होने वाले नुकसान का सीमावर्ती क्षेत्र पर सेना के नियंत्रण और पड़ोसी चीन के साथ उसके संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
- यह देश के विभिन्न हिस्सों में अधिकार और सुरक्षा बनाए रखने में सेना के सामने आने वाली चुनौतियों को रेखांकित करता है।
2. रूस ने CTBT अनुसमर्थन रद्द किया:
विवरण:
- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक विधेयक पर अपने हस्ताक्षर किए हैं जो परमाणु परीक्षणों पर प्रतिबंध लगाने वाली विश्वव्यापी संधि की रूस की औपचारिक स्वीकृति को रद्द करता है।
निरस्तीकरण का कारण:
- मॉस्को का दावा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ समानता स्थापित करने के लिए यह कदम आवश्यक है।
- राष्ट्रपति पुतिन ने जोर देकर कहा है कि संधि के अनुसमर्थन को रद्द करने का उद्देश्य इस संधि पर अमेरिका के रुख को “प्रतिबिम्बित” करना है।
वैश्विक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि:
- व्यापक परमाणु-परीक्षण-प्रतिबंध संधि (Comprehensive Nuclear-Test-Ban Treaty (CTBT)), जो की इसका औपचारिक नाम है,एक वैश्विक समझौता है जिसका लक्ष्य सभी परमाणु विस्फोटों को प्रतिबंधित करना है, चाहे वे नागरिक या सैन्य उद्देश्यों के लिए हों।
- संयुक्त राज्य अमेरिका ने सीटीबीटी पर हस्ताक्षर किए हैं लेकिन इसकी पुष्टि नहीं की है, जिसका अर्थ है कि यह इन प्रावधानों से कानूनी रूप से बाध्य नहीं है।
निहितार्थ:
- सीटीबीटी के अनुसमर्थन को रद्द करने का रूस का निर्णय परमाणु परीक्षण पर अंकुश लगाने के वैश्विक प्रयासों और हथियार नियंत्रण समझौतों की स्थिरता पर सवाल उठाता है।
- यह परमाणु प्रसार को रोकने और वैश्विक सुरक्षा बनाए रखने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को प्रभावित कर सकता है।
3. पराली जलाना और दिल्ली की वायु गुणवत्ता:
गंभीर वायु गुणवत्ता:
- दिल्ली में हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई, जो इस सीज़न की पहली ऐसी घटना है।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Board of Pollution Control) ने 2 नवंबर 2023 को शाम 4 बजे 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (air quality index (AQI)) 392 दर्ज किया, जो पिछले दिन के 364 से बढ़ कर 392 हो गया हैं।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) श्रेणियाँ:
- AQI रीडिंग 0 से 500 के बीच होती है, जिसका उच्च मान बढ़े हुए वायु प्रदूषण का संकेत देता है।
- श्रेणियाँ: ‘अच्छा’ (0-50), ‘संतोषजनक’ (51-100), ‘मध्यम’ (101-200), ‘खराब’ (201-300), ‘बहुत खराब’ (301-400), और ‘ गंभीर’ (401-500)।
तत्काल कार्रवाई की गई:
- दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management (CAQM) ) ने आवश्यक परियोजनाओं को छोड़कर निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
- दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बढ़ते प्रदूषण के कारण दिल्ली के सभी सरकारी और निजी प्राथमिक स्कूलों को 3 और 4 नवंबर को बंद करने की घोषणा की है।
शाम को बिगड़ती वायु गुणवत्ता:
- 2 नवंबर 2023 को शाम 7 बजे तक दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खराब होकर 410 (‘गंभीर’ श्रेणी) के AQI तक पहुंच गई थी, और रात 11 बजे यह और भी खराब होकर 427 AQI तक पहुंच गई।
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अन्य क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता का स्तर अलग-अलग था, ग्रेटर नोएडा ‘गंभीर’ श्रेणी में, गुरुग्राम ‘खराब’ और फ़रीदाबाद और नोएडा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में थे।
कुछ वाहनों पर प्रतिबंध:
- सीएक्यूएम ने दिल्ली और फरीदाबाद, गुरुग्राम, गौतम बौद्ध नगर और गाजियाबाद जिलों में बीएस-III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल हल्के मोटर वाहनों (एलएमवी, चार पहिया वाहनों) पर भी प्रतिबंध लगा दिया हैं।
- संबंधित राज्य सरकारों द्वारा आदेश जारी होने पर प्रतिबंध लागू किए जाएंगे। उल्लंघन करने वालों को ₹20,000 का जुर्माना भरना पड़ सकता है।
गतिविधियों का बंद होना:
- सीएक्यूएम उपायों में एनसीआर में स्टोन क्रशर, खनन और संबंधित गतिविधियों को बंद करना शामिल है।
- दिल्ली और एनसीआर राज्यों को स्कूलों में कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए भौतिक कक्षाएं बंद करने और ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया है।
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का चरण 3:
- ये उपाय ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan (GRAP)) के चरण 3 का हिस्सा हैं, जो वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से आपातकालीन उपायों का एक सेट है।
- सीएक्यूएम ने एनसीआर में संबंधित एजेंसियों द्वारा जीआरएपी के चरण 3 के तहत उल्लिखित सभी कार्यों के तत्काल कार्यान्वयन पर जोर दिया हैं।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan (GRAP)) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. GRAP में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में गिरावट को संबोधित करने के लिए आपातकालीन उपायों का एक सेट शामिल है।
2. यह वायु गुणवत्ता सूचकांक (AI) श्रेणी के आधार पर विभिन्न चरणों को सक्रिय करते हुए एक वृद्धिशील दृष्टिकोण का पालन करता है।
3. GRAP का चरण 2 तब लागू किया जाता है जब AQI ‘गंभीर +’ श्रेणी में आता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही है/हैं?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) सभी तीनों
(d) कोई नहीं
उत्तर: b
व्याख्या:
- GRAP में वायु गुणवत्ता के लिए आपातकालीन उपाय शामिल होते हैं, जो वृद्धिशील चरण AQI पर आधारित हैं, एवं चरण 2 ‘बहुत खराब’ श्रेणी में सक्रिय होता है, जबकि चरण 4 ‘गंभीर +’ श्रेणी से मेल खाता है।
प्रश्न 2. कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना (KLIP) किस नदी पर स्थित है?
(a) गंगा
(b)नर्मदा
(c) गोदावरी
(d) कृष्ण
उत्तर: c
व्याख्या:
- कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना भारत के तेलंगाना में गोदावरी नदी पर स्थित एक बहुउद्देश्यीय सिंचाई परियोजना है। इसका उद्देश्य राज्य में सिंचाई और पेयजल सुविधाएं प्रदान करना है।
प्रश्न 3. व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन गलत है/हैं?
1. व्यापक परमाणु-परीक्षण-प्रतिबंध संधि (CTBT) सभी परमाणु विस्फोटों पर प्रतिबंध लगाती है, चाहे वह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हो या सैन्य के लिए।
2. चीन, मिस्र, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने इस संधि की पुष्टि की है।
निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: b
व्याख्या:
- चीन, मिस्र, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने संधि पर हस्ताक्षर किए हैं लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है। इसलिए कथन 2 गलत है।
प्रश्न 4. निम्नलिखित में से किस देश के साथ भारत की रणनीतिक और सुरक्षा मुद्दों पर 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता है?
1. संयुक्त राज्य अमेरिका
2. ऑस्ट्रेलिया
3. जापान
4. रूस
निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:
(a) केवल 1, 2 और 3
(b) केवल 2, 3 और 4
(c) केवल 1, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: d
व्याख्या:
- भारत की अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और रूस के साथ 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता है। वार्ता में दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री शामिल हैं।
प्रश्न 5. यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका उद्देश्य आयात को यूरोपीय संघ के उत्पादों के समान कार्बन लागत पर रखकर कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।
2. आयातकों को सालाना आयातित वस्तुओं की मात्रा और उत्सर्जन की घोषणा करनी होगी।
3. सीबीएएम प्रमाणपत्र मूल्य ईयू कार्बन ट्रेडिंग सिस्टम भत्ता मूल्य पर आधारित होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कितने गलत है/हैं?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) सभी तीनों
(d) कोई नहीं
उत्तर: d
व्याख्या:
- सीबीएएम उत्सर्जन में कटौती के लिए यूरोपीय संघ और आयातित उत्पादों पर कार्बन लागत को बराबर करता है। आयातक प्रतिवर्ष आयातित मात्रा और उत्सर्जन की घोषणा करते हैं। सीबीएएम प्रमाणपत्र मूल्य ईयू कार्बन ट्रेडिंग सिस्टम भत्ते पर आधारित होता हैं।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में संयुक्त राष्ट्र ने अपनी विश्वसनीयता क्यों खो दी है? कथन का परीक्षण कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक) [जीएस-II: अंतर्राष्ट्रीय संबंध] (Why has the UN lost its credibility in resolving global conflicts? Examine. (250 words, 15 marks) [GS-II: International Relations])
प्रश्न 2. इज़राइल-फिलिस्तीन मुद्दा पश्चिम एशिया की भू-राजनीति के केंद्र में बना हुआ है। चर्चा कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक) [जीएस-II: अंतर्राष्ट्रीय संबंध] (The Israel-Palestine issue remains central to the geopolitics of West Asia. Discuss. (250 words, 15 marks) [GS-II: International Relations])
(नोट: मुख्य परीक्षा के अंग्रेजी भाषा के प्रश्नों पर क्लिक कर के आप अपने उत्तर BYJU’S की वेव साइट पर अपलोड कर सकते हैं।)