12 अप्रैल 2023 : समाचार विश्लेषण
|
A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:
राजव्यवस्था एवं शासन:
C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: आंतरिक सुरक्षा:
भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G. महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
|---|
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
सामरिक/रणनीतिक स्वायत्तता हेतु सऊदी अरब के प्रयास:
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
विषय: विकसित एवं विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव।
मुख्य परीक्षा: सऊदी अरब की विदेश नीति में बदलाव, पीछे के तर्क और इसके निहितार्थ को समझना।
प्रसंग:
- सऊदी अरब अपनी कार्यप्रणाली में सुधार कर रहा है और इसके माध्यम से वह अपने पुराने प्रतिद्वंद्वियों और दुश्मनों तक पहुंच बना कर एवं महान शक्तियों के बीच संतुलन की मांग कर, अपनी विदेश नीति को स्वायत्त बनाने की कोशिश कर रहा है।
सऊदी की बदलती विदेश नीति:

चित्र स्रोत: The Hindu
- परंपरागत रूप से सऊदी अरब की विदेश नीति ईरान के प्रति शत्रुतापूर्ण रही है। इसने पूरे पश्चिम एशियाई क्षेत्र में छद्म संघर्षों को जन्म दिया था।
- प्रॉक्सी (परोक्षी) विरोधों के उदाहरणों में शामिल हैं:
- सीरिया में,जिसे पश्चिम एशिया में ईरान का एकमात्र सहयोगी कहा जाता है, सऊदी ने अपने खाड़ी सहयोगियों के साथ सहयोग किया और पश्चिम के साथ तुर्की ने राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ विद्रोह का समर्थन किया।
- यमन में भी, जब इसकी राजधानी सना को 2014 में ईरान समर्थित शिया हौथी विद्रोहियों ने अपने कब्जे में ले लिया था, तो सउदी ने बमबारी अभियान का सहारा लिया था।
- इसके अलावा, 2017 में नाकाबंदी लगाते हुए सउदी द्वारा कतर से की गई प्रमुख मांगों में से एक ईरान के साथ अपने संबंधों को समाप्त करना था।
- पारंपरिक शत्रुता के बावजूद, सऊदी अरब ने मार्च 2023 में ईरान के साथ राजनयिक संबंधों को सामान्य करने के प्रयासों की घोषणा की, जिसकी मध्यस्थता चीन ने की थी।
- सऊदी-ईरान तनाव की घोषणा के बाद, रिपोर्टों ने अब दावा किया है कि रूस सऊदी अरब और सीरिया के बीच वार्ता में मध्यस्थता कर रहा है।
- मई 2023 में सऊदी अरब में आयोजित होने वाले अगले शिखर सम्मेलन से पहले इन वार्ताओं के परिणामस्वरूप सीरिया अरब लीग (Arab League) में फिर से प्रवेश कर सकता है।
- हाल ही में, एक स्थायी युद्धविराम लाने के लिए हौथी विद्रोहियों के साथ चर्चा करने के लिए एक सऊदी-ओमानी प्रतिनिधिमंडल यमन पहुंचा था।
- सऊदी अरब के ये नवीनतम कदम क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान द्वारा अपनाई गई नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देते हैं।
- सऊदी की विदेश नीति परिवर्तन के दौर से गुजर रही है क्योंकि आक्रामकता को कूटनीति द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है एवं व्यावहारिक गठजोड़ के लिए वफादार (हस्तक्षेप करने वाला) गठजोड़ को अलग रखा जा रहा है।
- इसके अलावा, सऊदी की विदेश नीति में बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब सऊदी भी अमेरिका (सऊदी का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता), रूस, (सऊदी का ओपेक-प्लस पार्टनर) और चीन (क्षेत्र में बढ़ती महाशक्ति) के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
सऊदी की बदलती विदेश नीति के पीछे तर्क:
- विशेषज्ञों का मानना है कि इन परिवर्तनों का मतलब यह नहीं है कि सऊदी अरब और ईरान के बीच संबंध एक संरचनात्मक परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं क्योंकि ईरान से सऊदी अरब की सुरक्षा और रणनीतिक चिंताओं को जारी रखने की उम्मीद की जा रही है।
- हालाँकि, ईरान द्वारा लगाई गई चुनौतियों के प्रति सऊदी की प्रतिक्रिया रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता और छद्म संघर्षों से रणनीतिक डी-एस्केलेशन और आपसी सह-अस्तित्व में बदल रही है।
हालाँकि, सऊदी के रवैये में बदलाव को प्रभावित करने वाले कारकों की एक विस्तृत श्रृंखला मौजूद है, वे इस प्रकार हैं:
- हाल के समय में सऊदी अरब में असफल उद्यम।
- सीरिया में, राष्ट्रपति बशर अल असद, जिन्हें रूस और ईरान का समर्थन प्राप्त था, ने गृहयुद्ध जीत लिया।
- यमन में भी, सऊदी के नेतृत्व में हस्तक्षेप करने वाले सना, हौथी विद्रोहियों को बाहर करने में विफल रहे हैं और अब हौथियों द्वारा अपने ड्रोन और कम दूरी की मिसाइलों का उपयोग करने से खुद सऊदी के लिए एक गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा हो गया है।
- पश्चिम एशिया से दूर होना,अमेरिका की प्राथमिकता में बदलाव। अमेरिका सऊदी का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा भागीदार रहा है और अमेरिका की प्राथमिकता में इस बदलाव ने सऊदी को ईरान के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित करने के लिए मजबूर किया है।
- “सऊदी-ईरान शांति स्थापना” से सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए 14 मार्च 2023 का UPSC परीक्षा विस्तृत समाचार विश्लेषण लेख देखें।
सऊदी का संतुलनकारी रुख:

चित्र स्रोत: The Hindu
- अमेरिका के साथ: सऊदी के लिए अमेरिका अभी भी सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता देश है।
- सऊदी अरब अमेरिका की मदद से इन क्षेत्रों में ईरान की प्रगति का मुकाबला करने के लिए अपनी उन्नत मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को भी बढ़ाना चाहता है।
- सऊदी अरब ने 35 अरब डॉलर के बोइंग विमान का ऑर्डर दिया है और इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य करने पर अमेरिका के साथ सशर्त बातचीत में खुद को शामिल किया है।
- हालाँकि सऊदी को अब यह एहसास हो गया है कि अमेरिका द्वारा पश्चिम एशिया को प्राथमिकता दिए जाने से क्षेत्र में युद्ध के बाद की व्यवस्था बदल जाएगी और वह अपनी विदेश नीति को स्वायत्त बनाने के लिए अमेरिका द्वारा बनाए गए निर्वात का उपयोग करने की कोशिश कर रहा है।
- रूस के साथ: अमेरिका के अन्य पश्चिमी सहयोगियों के विपरीत, सऊदी अरब ने रूस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है।
- पश्चिम की चिंताओं के बावजूद, सऊदी अरब ने यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद से दो बार तेल उत्पादन में कटौती करने के लिए रूस के साथ सहयोग किया है।
- तेल की कीमतों को उच्च रखने के इस कदम से रूस के साथ-साथ सऊदी अरब को भी लाभ होगा क्योंकि राज्य वर्तमान में अपनी अर्थव्यवस्था को बदलने के लिए बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं चला रहा है।
- चीन के साथ: इसके साथ ही, सऊदी ने चीन के साथ गहरे व्यापारिक और रक्षा संबंध विकसित किए हैं।
- इसके अलावा, सऊदी और ईरान सुलह समझौते की चीन द्वारा मध्यस्थता की गई थी।
इस क्षेत्र के लिए निहितार्थ:
- यदि संबंधों के सामान्यीकरण और निम्नलिखित वार्ताओं के परिणामस्वरूप सीरिया अरब लीग में फिर से शामिल हो जाता है, तो इसे गृह युद्ध में व्यस्त राष्ट्रपति बशर अल असद की जीत के रूप में देखा जाएगा जिससे दमिश्क और अन्य अरब राजधानियों के बीच संबंधों को सुधारने में भी मदद मिलेगी।
- इसी प्रकार यदि सउदी हौथियों के साथ बातचीत करके यमन में युद्ध समाप्त करने में सफल हो जाता हैं, तो सऊदी अरब के पास एक शांतिपूर्ण सीमा होगी जबकि ईरान भी इस क्षेत्र में अपने मौजूदा प्रभाव को बनाए रख सकता है।
- हालाँकि, इसकी आगे की राह सुगम दिखाई नहीं दे रही है जो हाल ही में इजरायल और फिलिस्तीन संघर्ष (Israel and Palestine conflict) में वृद्धि और इजरायल और ईरान के बीच तनाव में वृद्धि से स्पष्ट हुआ है।
- सऊदी अरब के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि वह अमेरिका और पश्चिम के साथ अपने संबंधों को खराब किए बिना या नुकसान पहुंचाए बिना अपनी स्वायत्तता की कार्यप्रणाली को जारी रखे।
- ऐसा देखा गया हैं की युद्ध के बाद के पश्चिम एशिया में चाहे वह स्वेज युद्ध हो या अब्राहम समझौता (Abraham Accords) या कुछ अन्य समझौते सहित अधिकांश प्रमुख पुनर्गठन में यू.एस. मध्यस्थ था ।
- हालाँकि अब एक बदलाव आया है कि अब हो रहे समझौतों में चीन और रूस सफलतापूर्वक पुनर्निर्धारण में मध्यस्थता कर रहे हैं।
- इसके अलावा, सऊदी अरब अपनी स्वायत्तता बनाने की तलाश में है, इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सैन्य उपस्थिति होने के बावजूद, यू.एस. अब एक दर्शक बन कर रह गया है।
|
सारांश:
|
|---|
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
मानसून सत्र में डेटा संरक्षण विधेयक:
राजव्यवस्था एवं शासन:
विषय: सरकार की नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
प्रारंभिक परीक्षा: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2022 से सम्बन्धित जानकारी।
मुख्य परीक्षा: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2022 के महत्वपूर्ण प्रावधान और आलोचनात्मक मूल्यांकन।
प्रसंग:
- केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि नया डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2022 (Digital Personal Data Protection Bill, 2022) तैयार है और इसे मानसून सत्र में सदन में पेश किया जाएगा।
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2022:

चित्र स्रोत: The Hindu
- इस नए विधेयक का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन स्पेस में व्यक्तिगत गोपनीयता को लागू करना है।
- (ऑनलाइन/वर्चुअल स्पेस-वर्चुअल स्पेस वे होते हैं जहां रीयल-टाइम इंटरेक्शन ऑनलाइन होता है। चाहे हम काम कर रहे हों या खेल रहे हों, हम ऑनलाइन वर्चुअल स्पेस में रहते हैं और बातचीत करते हैं।)
- यदि यह नया विधेयक, अधिनियमित होता है, तो यह वर्ष 2011 में अधिसूचित मौजूदा सूचना प्रौद्योगिकी (उचित सुरक्षा प्रथाओं और प्रक्रियाओं और संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा या सूचना) नियमों को प्रतिस्थापित करेगा।
- नया विधेयक “डेटा” को “सूचनाओं, तथ्यों, अवधारणाओं, मतों या निर्देशों का इस तरह से प्रतिनिधित्व करना जो मनुष्यों द्वारा या स्वचालित साधनों द्वारा संचार, व्याख्या या प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त हो”।
विधेयक के अनुसार:
- डेटा प्रिंसिपल वह व्यक्ति होता है जिससे व्यक्तिगत डेटा संबंधित होता है।
- डेटा प्रत्ययी एक व्यक्ति है जो व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के उद्देश्य और साधनों को निर्धारित करता है।
- डेटा प्रोसेसर वह व्यक्ति होता है जो डेटा प्रत्ययी की ओर से व्यक्तिगत डेटा को प्रोसेस करता है।
- नए “डेटा संरक्षण विधेयक” से सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए 19 नवंबर 2022 का UPSC परीक्षा विस्तृत समाचार विश्लेषण का लेख देखें।
- संसद टीवी परिप्रेक्ष्य: डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल से सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए:Sansad TV Perspective: Digital Personal Data Protection Bill
संपादकीय-द हिन्दू
संपादकीय:
पंजाब में मध्य मार्च से सावधानी की आवश्यकता:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
आंतरिक सुरक्षा:
विषय: आंतरिक सुरक्षा को लेकर चुनौतियां।
मुख्य परीक्षा: खालिस्तानी आंदोलन।
प्रसंग:
- सिक्खों के कुछ वर्गों में उग्रवादी प्रवृत्ति का उदय।
विवरण:
- विश्व के उन हिस्सों में जहां सिख समुदाय की अच्छी खासी आबादी रहती है, में कट्टरपंथियों के खतरे के संकेत दिखाई देने लगे हैं।
- स्वयंभू सिख चरमपंथी उपदेशक अमृतपाल सिंह का उदय इस आशंका को और मजबूत करता है, जिसकी जड़ें अत्यंत गहरी हैं।
- भिडरांवाले के उपदेशक की सादृश्यता वर्तमान में कुछ वर्गों तक सीमित है और इसमें महत्त्व की कमी है। हालाँकि, इनकी गतिविधियाँ कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यू.के. और यू.एस. जैसे देशों में सिख प्रवासी सहित सिख युवाओं के बीच चरमपंथी हाशिये को आकर्षित कर रही हैं।
- यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भिंडरावाले मंडली के अंदरूनी लोगों ने स्पष्ट किया है कि “अभी तक भिंडरावाले का कोई उत्तराधिकारी नहीं है”।
- यह पाया गया है कि अमृतपाल सिंह के ‘कोर ग्रुप’ ने बब्बर खसला, सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) और खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) जैसे खालिस्तान समर्थक समूहों के साथ संबंध स्थापित किए हैं।
अधिक जानकारी के लिए इस लिंक को पढ़ें-: What is the Khalistan issue? Explore the Answer at BYJU’S UPSC Preparation
संबंधित चिंताएं:
- भारत विभिन्न धर्मों वाले सबसे अधिक आबादी वाले देशों में से एक है और लगभग सभी वर्गों ने किसी समय उपेक्षित या भेदभाव का सामना किया है।
- यह तर्क दिया जाता है कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था ने पिछले अनुभव से सबक नहीं सीखा है। उदाहरण के लिए, 1984 में, भिंडरावाले घटना का विकास अचानक नहीं हुआ था। अकाल तख्त को नुकसान और ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसी घटनाओं से बचा जा सकता था।
- यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी सिर्फ पहला कदम होगा। सबसे बड़ी चुनौती उनकी मंडली से निपटना होगा।
- सभी घटनाओं को विदेशी षड़यंत्र से जोड़ने का परिणाम गहरे आधारों की उपेक्षा करना है।
- एक अन्य चिंता का विषय यह है कि इंटेलिजेंस विश्लेषण को कम प्राथमिकता दी जाती है।
- कृषि संबंधी विरोध होने के बावजूद किसानों के विरोध (जनवरी 2021) आत्मनिर्णय के संकेत लिए हुए था।
- एक पुलिस स्टेशन (अजनाला, पाकिस्तान की सीमा के पास) पर हमले के बावजूद पुलिस बल सतर्क नहीं था।
भावी कदम:
- नीति निर्माताओं को प्रस्तुत करने से पहले सूचना का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन और विश्लेषण किया जाना चाहिए।
- केंद्रीय और राज्य की खुफिया एजेंसियों को बिगड़ती आर्थिक स्थिति के कारण सिख आबादी के बीच बढ़ती असुरक्षा की भावना और सिख किसानों के बीच असंतोष के चिहों को दरकिनार नहीं करना चाहिए।
- सूचना को विशेष रूप से बड़ी सिख आबादी वाले देशों की खुफिया एजेंसियों के साथ भी साझा किया जाना चाहिए।
- कृषि कानूनों (जनवरी 2021) के विरुद्ध हुए किसानों के आंदोलन पर फिर से विचार किया जाना चाहिए ताकि उन अन्य कारकों का निर्धारण किया जा सके जिनके कारण विरोध और हिंसा हुई।
- देश के भीतर खालिस्तान के विचार के पुनरुत्थान के संकेतों के बारे में आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता है।
- सख्त तरीकों के बजाय, सरकार और उसकी एजेंसियों को मामले को चतुराई से संभालना चाहिए।
- इसे देश के भीतर और बाहर दोनों जगह ‘फेक न्यूज’ के मुद्दे को भी संबोधित करना चाहिए।
- भारत को कट्टरपंथी खालिस्तान के खतरे की वास्तविक प्रकृति और आतंकवादी समूहों के साथ इसके घनिष्ठ संबंध के बारे में दुनिया को विश्वास दिलाना चाहिए।
- इसके अलावा, भारत को अपने देश में हिंसक घटनाओं के लिए विदेशी सरकारों की आलोचना करने से बचना चाहिए।
निष्कर्ष:
- भारत को दाएँ और बाएँ के चरमपंथ के बीच का रास्ता अपनाना चाहिए तथा व्यक्तिगत गरिमा और मानव प्रगति को उचित सम्मान देते हुए अधिक से अधिक एकता सुनिश्चित करनी चाहिए।
अधिक जानकारी के लिए इस लिंक को पढ़ें :
Khalistan Movement, Origins, Current Situation [Explained for UPSC]
|
सारांश:
|
|---|
सुरक्षा उपाय का निर्माण:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था:
विषय: भारतीय संविधान और इसकी विशेषताएं।
मुख्य परीक्षा: निवारक निरोध और संबंधित चिंताएं।
प्रारंभिक परीक्षा: निवारक निरोध।
विवरण:
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय (SC) ने पाया कि निवारक निरोध कानून (preventive detention) एक औपनिवेशिक विरासत है जो की राज्य को मनमाना अधिकार प्रदान करता है।
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों (HC) ने कई मौकों पर बंदियों के अधिकारों से निपटने के दौरान प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन करने में कार्यपालिका की विफलता की निंदा की है।
निवारक निरोध से संबंधित चिंताएँ:
- हालांकि तकनीकी आधार पर निवारक निरोध को खारिज कर दिया जाता है, लेकिन बंदियों को मिलने वाली वास्तविक राहत बहुत कम होती है।
- इसके अलावा, निरोध के आदेश कई महीनों के बाद रद्द कर दिए जाते हैं। कुछ मामलों में, निर्णय पूर्ण निरोध अवधि की समाप्ति के बाद आता है।
- निवारक निरोध मामलों में, न्यायालय आमतौर पर प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों के पालन की जांच करता है,और शायद ही कभी निरोध के पीछे के कारणों की छानबीन करता है।
निवारक निरोध के बारे में तथ्य:
- अधिकांश निरोध अंततः निम्नलिखित कारणों से रद्द कर दिए जाते हैं:
- बंदियों द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदनों के निपटान में अस्पष्ट विलंब।
- निरोध के लिए उचित आधार प्रदान करने में विफलता या देरी।
- अन्य सामान्य कारण हैं:
- दस्तावेजों की अवैध प्रतियां।
- मामूली कारणों से निरोध का आह्वान
- 2011-2021 की अवधि में तमिलनाडु में निवारक निरोध मामलों की संख्या सबसे अधिक है।
- देश भर में इस कानून का दुरुपयोग किया जाता है क्योंकि यह संदिग्धों लोगों को एक साल तक हिरासत में रखने और उन्हें जमानत से प्रतिबंधित करता है।
निष्कर्ष
- यद्यपि संविधान द्वारा निवारक निरोध की अनुमति दी गई है, लेकिन सरकार को अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए कुशल पुलिसिंग और त्वरित परीक्षण सुनिश्चित करना चाहिए।
- सरकार को निरंकुश शक्ति और विवेक के लिए कानून का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।
अधिक जानकारी के लिए इस लिंक को पढ़ें:Right to Freedom (Articles 19 – 22) – Freedom of Speech, Right to Life – UPSC Polity
|
सारांश:
|
|---|
प्रीलिम्स तथ्य:
1. भारतीय रक्षा अंतरिक्ष संगोष्ठी:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
सुरक्षा:
विषय: रक्षा अंतरिक्ष सहयोग।
प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय रक्षा अंतरिक्ष संगोष्ठी और भारतीय अंतरिक्ष संघ (Indian Space Association (ISpA)) से सम्बंधित तथ्यात्मक जानकारी।
प्रसंग:
- भारतीय अंतरिक्ष संघ (ISpA) ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation (DRDO)) के सहयोग से “भारतीय रक्षा अंतरिक्ष संगोष्ठी 2023” का आयोजन किया है।
विवरण:
- भारतीय रक्षा अंतरिक्ष संगोष्ठी 2023 के दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि युद्ध की प्रकृति बदल रही है और हम अंतरिक्ष के सैन्यीकरण और हथियारों की दिशा में लगातार प्रगति की और अग्रसर हैं।
- उन्होंने आगे कहा कि “इसका उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीक को शामिल करने और चुस्त अंतरिक्ष-आधारित खुफिया, निगरानी और टोही (आईएसआर) प्रदान करने और सुरक्षित उपग्रह-सहायता प्राप्त संचार सुनिश्चित करने के लिए NAVIC समूह (NAVIC constellation ) का विस्तार करने पर विशेष ध्यान देने के साथ दोहरे उपयोग वाले प्लेटफार्मों को विकसित करने की ओर होना चाहिए”।
भारतीय रक्षा अंतरिक्ष संगोष्ठी:
- भारतीय रक्षा अंतरिक्ष संगोष्ठी का आयोजन डीआरडीओ के सहयोग से भारतीय अंतरिक्ष संघ (ISpA) द्वारा किया जाता है।
- इस संगोष्ठी का उद्देश्य उन सभी हितधारकों के लिए एक मंच तैयार करना है, जिनकी भारत की सैन्य अंतरिक्ष क्षमता और योजनाओं को बढ़ाने में गहरी रुचि है।
- यह संगोष्ठी रक्षा के क्षेत्र में नवीनतम रुझानों और चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए रक्षा, डीआरडीओ, सरकारी क्षेत्रों और उद्योग के पेशेवरों से कई डोमेन के विशेषज्ञों को एक साथ लाने के लिए एक मंच प्रदान करेगी।
- इस संगोष्ठी का मुख्य फोकस सैन्य संचालन को बढ़ाने, संबंधित मुद्दों को संबोधित करने और राष्ट्रीय अंतरिक्ष रणनीति के अनुरूप रक्षा अंतरिक्ष रणनीति विकसित करने के लिए अंतरिक्ष डोमेन जागरूकता और उपग्रह संचार प्रदान करने पर होगा।
- भारतीय रक्षा अंतरिक्ष संगोष्ठी 2023 का आयोजन “मिशन रक्षा-अंतरिक्ष” के तहत विचार-विमर्श के एक भाग के रूप में किया गया है, जिसके तहत उद्योग द्वारा विकास के लिए 75 चुनौतियों की पहचान की गई है।
भारतीय अंतरिक्ष संघ (ISpA) से सम्बंधित जानकारी:
- इंडियन स्पेस एसोसिएशन (ISpA) की स्थापना वर्ष 2021 में हुई थी।
- भारतीय अंतरिक्ष संघ (ISpA) एक शीर्ष, गैर-लाभकारी उद्योग निकाय है जो देश में निजी और सार्वजनिक अंतरिक्ष उद्योग के सफल अन्वेषण, सहयोग और विकास की दिशा में काम कर रहा है।
- ISpA एक ऐसी नीति समर्थन करता है,सभी हितधारकों के साथ संलग्न और संचालित होता है और अंतरिक्ष से संबंधित डोमेन पर ज्ञान के आदान-प्रदान में तेजी लाने के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है।
- भारतीय अंतरिक्ष संघ (ISpA) से सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: Indian Space Association (ISpA)
2. 1952 के बाद 17वीं लोकसभा की कार्य अवधि के सबसे छोटी होने की संभावना है:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
विषय: संसद – कार्य,संरचना एवं कार्य संचालन।
राजव्यवस्था एवं शासन:
प्रारंभिक परीक्षा: 17वीं लोकसभा और बजट सत्र से सम्बंधित विवरण।
- 17वीं लोकसभा (Lok Sabha) ने केवल 230 दिनों (अप्रैल 2023 तक) तक ही कार्य किया है।
- यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि 16वीं लोक सभा में सभी पूर्ण-कालिक लोक सभाओं की तुलना में सबसे कम बैठक दिवस (331) थे।
- एक वर्ष में बैठक के दिनों की औसत संख्या 58 है। यह तथ्य इस बात पर प्रकाश डालता है कि 17वीं लोकसभा की बैठक 331 दिवस से अधिक नहीं पहुंचेगी क्योंकि अब चुनाव में केवल एक वर्ष शेष है।
- चौथी, छठी, नौवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं लोक सभा का कार्यकाल पाँच वर्ष से कम था और इस प्रकार बैठकों की संख्या भी कम थी।

चित्र स्रोतः Business Standard
बजट सत्र 2023:
- 2023 के बजट सत्र (31 जनवरी से 6 अप्रैल 2023) में लोकसभा ने अपने निर्धारित समय (46 घंटे) के 33% और राज्यसभा ने 24% (32 घंटे) के लिए कार्य किया।
- लोकसभा में, लगभग 150 विधेयक पेश किए गए और 131 विधेयक (वित्त और विनियोग विधेयकों को छोड़कर) पारित किए गए।
- 1952 के बाद यह छठा सबसे छोटा बजट सत्र था।
- प्रश्नकाल लोक सभा में निर्धारित समय का 19% और राज्य सभा में निर्धारित समय का 9% चला।
- लोकसभा या राज्यसभा (Rajya Sabha) में कोई निजी सदस्य विधेयक पेश या चर्चा नहीं की गई।
- संसदीय कार्यवाही के उपकरण – प्रश्नकाल, प्रस्ताव [यूपीएससी जीएस-द्वितीय] से सम्बन्धित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए:Devices of Parliamentary Proceedings – Question Hour, Motions [UPSC GS-II]
महत्वपूर्ण तथ्य:
1. IMD ने ‘सामान्य’ मॉनसून की भविष्यवाणी की है क्योंकि इस साल अल नीनो का प्रभाव बहुत अधिक है:

चित्र स्रोत: The Hindu
- जैसा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले मानसून के सीज़न में बारिश में 4% की कमी का अनुमान लगाया है, भारत के चार साल के शानदार ग्रीष्मकालीन मानसून वर्षा के 2023 में समाप्त होने की उम्मीद है।
- IMD ने वर्ष 2023 में वर्षा को “सामान्य” के रूप में वर्गीकृत किया है, यह है – लंबी अवधि के औसत (LPA) का 96% जो इस संस्था की सामान्य वर्षा की श्रेणी के सबसे निचले सिरे पर है।
- वर्षा में कमी का प्रमुख कारण अल नीनो के विकास से जुड़ा है, जो मध्य प्रशांत क्षेत्र में गर्म होने की घटना है।
- भारत में सूखे के सभी वर्ष अल नीनो वर्ष रहे हैं, लेकिन सभी अल नीनो वर्षों में सूखा नहीं हुआ है।
- 2019 से, भारत ला नीना (La Nina) के प्रभाव में रहा है जो मध्य प्रशांत क्षेत्रों में शीतलन और भारतीय उपमहाद्वीप में पर्याप्त वर्षा से जुड़ने की घटना को संदर्भित करता है।
- हाल के वर्षों में IMD ने “गतिशील” मानसून पूर्वानुमान तकनीकों पर अधिक जोर दिया है जो पारंपरिक रूप से अपनाए गए सांख्यिकीय दृष्टिकोण से भिन्न जलवायु परिस्थितियों का पूर्वानुमान लगाने के लिए वैश्विक वायुमंडलीय और महासागरीय स्थितियों को ध्यान में रखते हैं।
2. सरकार ने तकनीकी वस्त्रों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी किए:
- कपड़ा मंत्रालय ने 31 तकनीकी कपड़ा वस्तुओं के लिए दो गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) की घोषणा की है जिसमें 19 जियो टेक्सटाइल और 12 सुरक्षात्मक कपड़ा उत्पाद शामिल हैं।
- नवीनतम क्यूसीओ देश में तकनीकी वस्त्र उत्पादों के लिए पहला तकनीकी विनियमन है।
- अगले चरण में, कपड़ा मंत्रालय 28 वस्तुओं के लिए दो और क्यूसीओ जारी करने की सोच रहा है, जिसका उद्देश्य 22 कृषि वस्त्र उत्पादों और छह चिकित्सा वस्त्र वस्तुओं को कवर करना है।
- हाल ही में कपास, पॉलिएस्टर और विस्कोस जैसे रेशों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) शुरू किए गए, जो भारतीय कपड़ा उद्योग में बुनियादी कच्चे माल हैं।
- इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए 31 मार्च 2023 का UPSC परीक्षा विस्तृत समाचार विश्लेषण का निम्न आलेख देखें।
3. चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर 5.9% तय: IMF
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund (IMF)) ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2023-24 के लिए भारत की अर्थव्यवस्था 5.9% की दर से बढ़ेगी।
- इसके अलावा IMF ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए भारत के लिए 6.3% आर्थिक विकास दर का अनुमान लगाया है।
- इस विकास दर की घोषणा “वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO): ए रॉकी रिकवरी रिपोर्ट” (World Economic Outlook (WEO): A Rocky Recovery report) के भाग के रूप में की गई थी, जिसका अनावरण वाशिंगटन में विश्व बैंक (World Bank) और IMF स्प्रिंग मीटिंग की शुरुआत में किया गया था।
- रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को उच्च जीवन स्तर प्राप्त करने और रोजगार सृजित करने की अनुमति देने के लिए एक बहुत मजबूत अर्थव्यवस्था की आवश्यकता है।
- IMF प्रमुख के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध से उबर रही है, लेकिन इसके साथ ही, उच्च मुद्रास्फीति द्वारा संचालित गंभीर वित्तीय स्थिरता से संबंधित नकारात्मक जोखिम सामने आ रहे हैं।
- IMF ने सिफारिश की कि केंद्रीय बैंक अपने मुद्रास्फीति विरोधी उपायों के साथ स्थिर रहें और जीवन संकट की लागत से प्रभावित लोगों के लिए लक्षित समर्थन का विस्तार करते हुए अपने नीतिगत उपकरणों को भी समायोजित करें।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. निम्नलिखित कथनों में से कितने सत्य हैं? (स्तर- मध्यम)
- भारत में प्रथम बालिका विद्यालय की स्थापना महात्मा ज्योतिबा फुले ने की।
- एक साप्ताहिक मराठी समाचार पत्र दीनबंधु की शुरुआत उनके द्वारा की गई थी।
- उन्होंने महिलाओं और पिछड़ी जातियों के अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 1874 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की थी।
विकल्प:
- केवल एक कथन
- केवल दो कथन
- सभी तीनों कथन
- कोई भी कथन नहीं
उत्तर: b
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले समाज सुधारक थे जिन्होंने महिलाओं की मुक्ति के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया।
- उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप, 1848 में पुणे में पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया गया था।
- कथन 2 गलत है: दीनबंधु, भारतीय समाज (बहुजन समाज) के लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक समाचार पत्र कृष्णराव पांडुरंग भालेकर द्वारा शुरू किया गया था।
- कृष्णराव पांडुरंग भालेकर जाति-विरोधी समाज सुधारक, महात्मा ज्योतिबा फुले के करीबी सहयोगी थे।
- कथन 3 सही है: महात्मा ज्योतिबा फुले ने महिलाओं और पिछड़ी जातियों के अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 1873 में सत्यशोधक समाज (सत्यशोधक समाज) की स्थापना की थी।
प्रश्न 2. “राष्ट्रीय ऋण ढाँचे” से आप क्या समझते हैं? (स्तर-मध्यम)
- यह सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को ऋण प्रदान करने के लिए नाबार्ड द्वारा स्थापित एक ढांचा है।
- यह IMF द्वारा सदस्य देशों को उनके राष्ट्रीय ऋण प्रबंधन के साधनों के संबंध में सहायता करने के लिए एक मॉडल प्रणाली है।
- यह यूजीसी द्वारा स्कूलों और कॉलेजों को ऋण प्रणाली के संबंध में निर्देश देने के लिए एक रूपरेखा है।
- यह एक ढांचा है जिसे “घरेलू व्यवस्थित रूप से महत्वपूर्ण बैंकों” को अपने जोखिम भाग को कम करने के लिए पालन करने की आवश्यकता होती है।
उत्तर: c
व्याख्या:
- नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) प्राथमिक, स्कूल, उच्च, और व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण को शामिल करने वाला एक व्यापक ढांचा है, जो तीन-अक्षों अर्थात् अकादमिक, व्यावसायिक कौशल और अनुभवात्मक शिक्षा जिसमें प्रासंगिक अनुभव और पेशेवर स्तर शामिल हैं पर अधिगम को एकीकृत करता है।
- नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) को यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीवीईटी, एनआईओएस, सीबीएसई, एनसीईआरटी, शिक्षा मंत्रालय, डीजीटी और कौशल विकास मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
- नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा और व्यावसायिक और कौशल शिक्षा के माध्यम से अर्जित क्रेडिट को एकीकृत करने के लिए एक समावेशी छत्र ढांचा है।
प्रश्न 3. ज्यूस (JUICE) मिशन के संबंध में सही कथनों की पहचान कीजिए: (स्तर- सरल)
- यह नासा का एक मिशन है जिसे अप्रैल 2023 में लॉन्च किया जाएगा।
- इसका उद्देश्य बृहस्पति के 3 चंद्रमाओं का पता लगाना है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनके पास जीवन के लिए सही परिस्थितियां हैं या नहीं।
विकल्प:
- केवल 1
- केवल 2
- 1 और 2 दोनों
- न तो 1, न ही 2
उत्तर: b
व्याख्या:
- कथन 1 गलत है: ज्यूपिटर ICy मून्स एक्सप्लोरर (JUICE) एक यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) मिशन है।
- कथन 2 सही है: ज्यूस मिशन, विशाल गैस ग्रह और इसके तीन बड़े महासागर वाले चंद्रमाओं जैसे गेनीमेड, कैलिस्टो और यूरोपा का विस्तृत अवलोकन यह पता लगाने के लिए करेगा कि क्या वहां जीवन का समर्थन करने के लिए संभावित आवास हैं।
प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन सा जल निकाय ताइवान को घेरे हुए है? (स्तर- कठिन)
- दक्षिण चीन सागर
- ओखोटस्क का सागर
- पूर्वी चीन का समुद्र
- फिलीपीन सागर
विकल्प:
- 1, 2 और 3
- 2, 3 और 4
- 1, 3 और 4
- 1, 2 और 4
उत्तर: c
व्याख्या

चित्र स्त्रोत: Britannica Encyclopedia
प्रश्न 5. निम्नलिखित में से किस राहत मूर्तिकला शिलालेख में अशोक के चित्र के साथ ‘रण्यो अशोक’ (राजा अशोक) का उल्लेख है? (स्तर- कठिन)
- कंगनहल्ली
- सांची
- शाहबाजगढ़ी
- सोहगौरा
उत्तर: a
व्याख्या:
- 1993 में, पुरातत्वविदों की एक टीम ने कर्नाटक में सन्नई का सर्वेक्षण किया और एक टूटी हुई राहत मूर्तिकला की खोज की, जिसमें सम्राट, उनकी रानी और परिचारकों को कनगनहल्ली स्थल पर एक खंड पर उकेरा गया था।
- अशोक की पत्थर की तस्वीर के साथ ब्राह्मी पत्र में एक शिलालेख देखा गया था जिसमें “रण्यो अशोक” (राजा अशोक) पढ़ा गया था।
- यह अशोक की पहली मूर्ति है जिस पर उसका नाम खुदा हुआ है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. निवारक निरोध कानून, यद्यपि संवैधानिक है लेकिन प्रायः इसका दुरुपयोग किया जाता है। समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) [जीएस-2, राजव्यवस्था एवं शासन]
प्रश्न 2. ‘डेटा संरक्षण’ शब्द से आप क्या समझते हैं? भारत में डेटा संरक्षण कानून के विकास का परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) [जीएस-3, सुरक्षा]