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A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: शासन:
C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: राजव्यवस्था:
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
नीति-शास्त्र:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G. महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
आंशिक ऐप प्रतिबंध:
शासन:
विषय: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप एवं उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे। वैधानिक, नियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय।
प्रारंभिक परीक्षा : ट्राई (Telecom Regulatory Authority of India (TRAI)) से सम्बन्धित जानकारी।
मुख्य परीक्षा: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही से संबंधित मुद्दे एवं सांविधिक निकाय।
प्रसंग:
- भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India (TRAI)) तनावपूर्ण अवधि के दौरान संचार पर नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए पूर्ण इंटरनेट शटडाउन के बजाय “चयनात्मक” ऐप प्रतिबंध लागू करने की संभावना तलाश रहा है।
विवरण:
- भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने पूर्ण इंटरनेट शटडाउन के बजाय “चयनात्मक” ऐप प्रतिबंध लागू करने की व्यवहार्यता पर इनपुट (निविष्टियां) मांगा है।
- सांप्रदायिक तनाव के दौरान उत्तेजक सामग्री के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए भारत के विभिन्न राज्यों और जिलों में अक्सर इंटरनेट शटडाउन लगाया जाता है।
- TRAI का उद्देश्य कानून और व्यवस्था बनाए रखते हुए व्यापक संचार लॉकडाउन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करना है।
भारत में इंटरनेट शटडाउन का इतिहास:
- इंटरनेट शटडाउन को भारत सरकार द्वारा कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक वैध उपकरण माना गया है।
- ये शटडाउन लंबे समय तक चल सकता है, जिससे शिक्षा, कार्य, बैंकिंग और सूचना तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है।
- जम्मू-कश्मीर और मणिपुर में अधिकारियों और अदालतों ने धीरे-धीरे वायर्ड और सीमित वायरलेस इंटरनेट एक्सेस की अनुमति देकर दीर्घकालिक प्रतिबंधों को कम कर दिया है।
- भारत में इंटरनेट शटडाउन के बारे में अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: Internet Shutdowns India
ट्राई का प्रस्तावित दृष्टिकोण:
- ट्राई के सुझाए गए प्रस्ताव में शटडाउन के दौरान सेवाओं को निलंबित करने के लिए दूरसंचार ऑपरेटरों और व्हाट्सएप जैसी मैसेजिंग ऐप फर्मों के बीच सहयोग शामिल है।
- मैसेजिंग ऐप्स को लाइसेंस देने, संभावित रूप से कंपनियों को निगरानी और अवरुद्ध करने की आवश्यकताओं के बारे में इनपुट मांगे जा रहे हैं।
ऐप विनियमन पर ट्राई का पिछला विचार:
- वर्ष 2015 और 2018 में ट्राई ने मैसेजिंग ऐप्स को विनियमित करने पर विचार-विमर्श किया, जिससे नेट तटस्थता सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
- टेलीकॉम ऑपरेटरों ने ऑनलाइन कॉल और संदेशों के कारण सुरक्षा, निगरानी और राजस्व हानि के बारे में चिंताओं का हवाला देते हुए विनियमन का आह्वान किया हैं।
- वर्ष 2016 से, DoT और TRAI ने उपभोक्ता डेटा की श्रेणियों के बीच गैर-भेदभाव पर जोर देते हुए विनियमन के तर्क को खारिज कर दिया है।
- मैसेजिंग ऐप्स को विनियमित करने पर ध्यान सुरक्षा और पुलिसिंग की ओर स्थानांतरित हो गया है, जिसका उद्देश्य गलत सूचना और उत्तेजक सामग्री से निपटना है।
वीपीएन के साथ चुनौतियाँ:
- वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) उपयोगकर्ताओं को टेलीकॉम ऑपरेटरों द्वारा लगाए गए वेबसाइट और ऐप ब्लॉक को बायपास करने में सक्षम बनाता है।
- वीपीएन इंटरनेट ट्रैफ़िक को एन्क्रिप्ट करते हैं और इसे अन्य देशों में स्थित सर्वरों के माध्यम से रूट करते हैं, जिससे सरकार के लिए कनेक्शन की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
- सरकार गोपनीयता, आतंकवाद और साइबर अपराध के बारे में चिंताओं के कारण वीपीएन को बढ़ते संदेह की दृष्टि से देखती है।
- संसद टीवी परिप्रेक्ष्य: नए वीपीएन नियम से सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए:Sansad TV Perspective: New VPN Rules
वीपीएन और भारतीय विनियम:
- भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (Indian Computer Emergency Response Team (CERT-in)) ने 2022 में निर्देश जारी कर वीपीएन कंपनियों को उपयोगकर्ता रिकॉर्ड बनाए रखने की आवश्यकता बताई, जिससे कुछ प्रदाताओं को भारत में भौतिक रूप से स्थित सर्वर की पेशकश बंद करने के लिए प्रेरित किया गया।
- इसके बावजूद, वीपीएन भारतीय उपयोगकर्ताओं को सेवा देना जारी रखते हैं, जिससे उन्हें विदेशी सर्वर से एन्क्रिप्टेड कनेक्शन के माध्यम से अवरुद्ध साइटों तक पहुंचने की अनुमति मिलती है।
वीपीएन को ब्लॉक करने में कठिनाई:
- वीपीएन सेवा प्रदाताओं द्वारा बार-बार आईपी एड्रेस बदलने के कारण वीपीएन को ब्लॉक करना आसान नहीं है।
- वीपीएन सेवाओं की वेबसाइटों को अवरुद्ध किया जा सकता है, जबकि इंस्टॉलेशन फ़ाइलें अभी भी कहीं और ऑनलाइन पाई (देखी) जा सकती हैं।
- टेलीकॉम ऑपरेटरों ने कहा है कि वीपीएन को ब्लॉक करना तकनीकी रूप से असंभव है।
वीपीएन ब्लॉकिंग को लेकर बहस:
- इंटरनेट अधिकार कार्यकर्ताओं का तर्क है कि वीपीएन को अवरुद्ध करने से ऑनलाइन गोपनीयता को नुकसान होगा, क्योंकि वे पत्रकारों, व्हिसलब्लोअर और कार्यकर्ताओं के लिए डिजिटल अधिकार सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- वीपीएन गोपनीय जानकारी की रक्षा करते हैं, उपयोगकर्ता की पहचान की रक्षा करते हैं, और निगरानी और सेंसरशिप के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं।
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सारांश:
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संपादकीय-द हिन्दू
संपादकीय:
ईडी और सीबीआई की कमजोर होती स्वायत्तता:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
राजव्यवस्था:
विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय, संघीय ढांचे से संबंधित मुद्दे और चुनौतियाँ।
मुख्य परीक्षा: सेवा कार्यकाल की जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता पर प्रभाव; ईडी और सीबीआई प्रमुख का कार्यकाल विस्तार।
प्रसंग:
- सर्वोच्च न्यायालय का फैसला भारत में जांच एजेंसियों की संस्थागत स्वतंत्रता, विशेष रूप से प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate (ED)) के प्रमुख के सेवा कार्यकाल के बारे में चिंता पैदा करता है।
भूमिका:
- जांच एजेंसियों के प्रमुखों को सेवा विस्तार देने के संबंध में 2021 में किए गए वैधानिक संशोधनों को बरकरार रखने वाले सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के हालिया फैसले ने उनकी संस्थागत स्वतंत्रता की सुरक्षा के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं।
- जबकि फैसले में प्रवर्तन निदेशक, एस. के. मिश्रा को दिए गए एक-एक साल के दो विस्तारों को रद्द करना एक सकारात्मक घटनाक्रम है, वहीं फैसले का बाकी हिस्सा इन एजेंसियों की स्वायत्तता के लिए खतरा पैदा करता है।
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प्रवर्तन निदेशालय (ED):
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI):
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संस्थागत स्वतंत्रता को झटका:
- सेवा के कई विस्तारों की अनुमति देने का सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय जांच एजेंसियों की संस्थागत स्वतंत्रता की रक्षा के उद्देश्य को कमजोर करता है।
- यह फैसला सरकार को इन एजेंसियों की स्वायत्तता को कमजोर करने की खुली छूट देता है, जिसके असर निष्पक्ष जांच पर पड़ सकते हैं।
एस. के. मिश्रा के सेवा विस्तार को रद्द करना:
- न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशक एस. के. मिश्रा को 31 जुलाई, 2023 को पद छोड़ने का आदेश दिया है और उन्हें दिए गए एक-एक साल के दो विस्तारों को रद्द कर दिया है।
- सेवानिवृत्ति की आयु से अधिक विस्तार देने के सरकार के फैसले पर न्यायालय ने सवाल उठाया था, और इस तरह के विस्तार को दुर्लभ और असाधारण होने की आवश्यकता पर बल दिया था।
वार्षिक विस्तार की अनुमति देने वाले परिवर्तनों का समर्थन:
- निर्णय केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के प्रमुखों के लिए कार्यालय में पांच साल पूरे होने तक वार्षिक विस्तार को सक्षम करने वाले संशोधनों का समर्थन करता है।
- इसका मतलब यह है कि एक अधिकारी को अधिकतम तीन वार्षिक विस्तार मिल सकते हैं, जिससे उनका कार्यकाल दो वर्ष से बढ़कर से पांच वर्ष तक हो सकता है।
स्वतंत्रता और जवाबदेही के लिए निहितार्थ:
- आलोचकों का तर्क है कि अलग-अलग विस्तार कार्यालय की स्वतंत्रता को कमजोर करता है और एक पुरस्कार-और-दंड की नीति लागू करता है, जो संभावित रूप से निदेशकों को सरकार के एजेंडे के साथ जुड़ने के लिए प्रभावित करता है।
- न्यायालय द्वारा इस तर्क को खारिज करना कि संशोधन निश्चित कार्यकाल को अनिवार्य करने वाले पहले के निर्णयों के खिलाफ हैं, निदेशकों को बाहरी दबावों से बचाने के बारे में चिंताएं पैदा करता है।
मौलिक अधिकारों का उल्लंघन:
- फैसले का यह निष्कर्ष कि संशोधन किसी भी मौलिक अधिकार (fundamental rights) का उल्लंघन नहीं करता है, आश्चर्यजनक है, क्योंकि यह सरकार को राजनीतिक निर्देशों के आधार पर जांच को नियंत्रित करने की अनुमति देता है।
- यह नागरिकों के समान व्यवहार और निष्पक्ष जांच के अधिकार को कमजोर करता है, खासकर राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ सरकारी एजेंसियों के संभावित दुरुपयोग को देखते हुए।
निष्कर्ष:
- जांच एजेंसियों के प्रमुखों को कई विस्तारों की अनुमति देने वाले वैधानिक संशोधनों को बरकरार रखने का सर्वोच्च न्यायालय का फैसला उनकी संस्थागत स्वतंत्रता के लिए चुनौतियां पेश करता है।
- जबकि एस. के. मिश्रा के लिए विस्तार को रद्द करना एक सकारात्मक कदम है, वहीं समग्र निर्णय एक ऐसी प्रणाली का समर्थन करता है जो इन एजेंसियों की स्वायत्तता से समझौता करती है।
- कानून का शासन (rule of law) सुनिश्चित करने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए निश्चित कार्यकाल के सिद्धांतों को बनाए रखना और जांच एजेंसियों को राजनीतिक प्रभाव से बचाना महत्वपूर्ण है।
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सारांश:
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दक्षिण चीन सागर में तनाव:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।
मुख्य परीक्षा: फिलीपींस के साथ द्विपक्षीय संबंध, चीन के बाहुबल का मुकाबला करने की भारत की रणनीति।
प्रसंग:
- भारत और फिलीपींस ने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने तथा बातचीत और सहयोग के माध्यम से दक्षिण चीन सागर में तनाव को दूर करने के लिए हाल ही में नई दिल्ली में एक बैठक की।
भूमिका:
- भारत और फिलीपींस के विदेश मंत्रियों ने द्विपक्षीय सहयोग पर फिलीपींस-भारत संयुक्त आयोग की पांचवीं बैठक में नई दिल्ली में मुलाकात की।
- बैठक का उद्देश्य साझा समुद्री हितों और राजनयिक संबंधों के लंबे इतिहास पर ध्यान केंद्रित करते हुए दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करना था।
बैठक के प्रमुख नतीजे:
- मजबूत द्विपक्षीय संबंध: बैठक का उद्देश्य भारत और फिलीपींस के बीच द्विपक्षीय साझेदारी को बढ़ाना है।
- रेजिडेंट डिफेंस अटैच कार्यालय: मनीला में रेजिडेंट डिफेंस अटैच कार्यालय खोलने के निर्णय पर चर्चा की गई, जो दोनों देशों के बीच घनिष्ठ रक्षा सहयोग का संकेत देता है।
- तटरक्षक सहयोग: दोनों देशों ने अपने-अपने तटरक्षकों के बीच सहयोग बढ़ाने, समुद्री सुरक्षा और आपदाओं की प्रतिक्रिया में संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया।
- क्षमता निर्माण: बैठक में भारत और फिलीपींस के तट रक्षकों ( Coast Guard of India ) के बीच क्षमता निर्माण पहल, प्रशिक्षण कार्यक्रम और ज्ञान साझा करने के अवसरों की खोज की गई।
- समुद्री क्षेत्र जागरूकता: दोनों देशों ने समुद्री क्षेत्र जागरूकता में सुधार के उपायों पर चर्चा की, जैसे समुद्री सुरक्षा खतरों पर खुफिया जानकारी और अन्य जानकारी साझा करना।
- नौसेना संपत्ति अधिग्रहण: मनीला ने फिलीपीन नौसैनिक क्षमताओं को बढ़ाने की सुविधा प्रदान करने के लिए दिल्ली से रियायती ऋण सुविधा के तहत नौसैनिक संपत्ति हासिल करने का इरादा व्यक्त किया।
- समुद्री सुरक्षा पर सहयोग: बैठक में समुद्री सुरक्षा पर संयुक्त अभ्यास के विस्तार पर प्रकाश डाला गया, जिसमें एक सुरक्षित और स्थिर समुद्री वातावरण सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया।
- आपदा प्रतिक्रिया पर ध्यान: समुद्री सुरक्षा के अलावा, बैठक में आपदा प्रतिक्रिया संचालन में संयुक्त अभ्यास और सहयोग, तैयारियों और समन्वय को बढ़ाने पर जोर दिया गया।
- अंतर्राष्ट्रीय कानून के लिए समर्थन: भारत ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि ( United Nations Convention on the Law of the Sea (UNCLOS)) सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
- 2016 के पंचाट अधिनिर्णय की मान्यता: भारत ने दक्षिण चीन सागर पर 2016 के मध्यस्थ अधिनिर्णय के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया, जो कि उसकी पिछली स्थिति से हटकर है।
फिलीपींस का मध्यस्थता मामला:
- फिलीपींस ने चीन के साथ विवादों को सुलझाने के लिए स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ( Permanent Court of Arbitration (PCA)) में मध्यस्थता के लिए एक मामला प्रस्तुत किया।
- चीन के मध्यस्थता से हटने के बावजूद, UNCLOS दिशानिर्देशों के तहत कार्यवाही जारी रही।
- PCA ने फिलीपींस के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 12 जुलाई 2016 को अधिनिर्णय जारी किया।
मध्यस्थता अधिनिर्णय के निष्कर्ष:
- न्यायाधिकरण ने दक्षिण चीन सागर में चीन के ऐतिहासिक अधिकार के दावे को खारिज कर दिया।
- इसने निर्धारित किया कि “नाइन-डैश लाइन” के भीतर के दावे निराधार थे और चीन ने विकास और भूमि पुनर्ग्रहण के माध्यम से पर्यावरणीय क्षति पहुंचाई थी।
- चीन ने मछली पकड़ने, कृत्रिम द्वीपों का निर्माण करने और फिलीपीन जहाजों को बाधित करने में हस्तक्षेप करके फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone (EEZ)) में उसके संप्रभु अधिकारों का उल्लंघन किया।
- न्यायाधिकरण ने निष्कर्ष निकाला कि विवादित समुद्री क्षेत्रों के भीतर संसाधनों पर ऐतिहासिक अधिकारों का दावा करने के लिए चीन के पास कोई कानूनी आधार नहीं है।
भावी कदम:
- दक्षिण चीन सागर प्रशांत और हिंद महासागरों के बीच एक महत्वपूर्ण समुद्री प्रवेश द्वार है, जिसके महत्वपूर्ण भूराजनीतिक और आर्थिक निहितार्थ हैं।
- क्षेत्र में कोई भी टकराव क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है।
- भारत और अन्य देशों का क्षेत्र में मुक्त और स्थिर समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा में निहित स्वार्थ है।
- दक्षिण चीन सागर तनाव को हल करने के लिए एक राजनीतिक ढांचा खोजने के लिए बातचीत महत्वपूर्ण है, क्योंकि कानूनी रास्ते की संभावनाएं सीमित हैं।
- दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (Association of Southeast Asian Nations (ASEAN)) के नेताओं को शांतिपूर्ण समाधान खोजने के लिए “शांत रहने की कूटनीति” में संलग्न होना चाहिए।
- चीन को प्रभावी ढंग से राजनीतिक संदेश देने के लिए आसियान देशों को अपनी समझ और एकता बढ़ानी चाहिए।
- दक्षिण चीन सागर विवाद पर के बारे में अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: South China Sea Dispute
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सारांश:
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औपनिवेशिक लूट और क्षतिपूर्ति:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:
नीति-शास्त्र:
विषय:अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में नैतिक मुद्दे
मुख्य परीक्षा: अतीत में उपनिवेशवादियों द्वारा किए गए गलत कार्यों के लिए न्याय।
प्रसंग:
- नीदरलैंड जैसे देशों द्वारा कलाकृतियों की वापसी की घोषणा की हालिया घटनाओं ने औपनिवेशिक काल के दौरान लूटी गई सांस्कृतिक कलाकृतियों की वापसी को लेकर बहस शुरू कर दी है। औपनिवेशिक काल के दौरान लूटी गई सांस्कृतिक कलाकृतियों का मुद्दा और चुराए गए खजाने को उनकी मूल भूमि पर वापस करने की बढ़ती मांग फोकस में आ गई है।
पृष्ठभूमि:
- हाल ही में नीदरलैंड ने इंडोनेशिया और श्रीलंका से लूटी गई कलाकृतियां वापस लौटाने का ऐलान किया है। लेकिन सभी औपनिवेशिक शक्तियाँ एक जैसा रवैया नहीं दिखातीं।
- उदाहरण के लिए, अंग्रेजों ने एल्गिन मार्बल्स और रोसेटा स्टोन जैसी वस्तुओं को वापस करने से इनकार कर दिया है। हालाँकि, उन्होंने कुछ बेनिन कांस्य को नाइजीरिया वापस भेज दिया है।
- भारतीय कलाकृतियों के मामले में, कोहिनूर हीरे (Kohinoor diamond) से लेकर अमरावती स्तूप की मूर्तियों तक, एक मिसाल कायम होने और संभावित रूप से अपने संग्रहालयों के खाली हो जाने के डर से अंग्रेज उन्हें वापस करने में अनिच्छुक रहे हैं।
लूटी गई सांस्कृतिक कलाकृतियाँ लौटाना नैतिक दायित्व:
- पूर्व औपनिवेशिक शक्तियों का नैतिक दायित्व है कि वे औपनिवेशिक शासन के दौरान सांस्कृतिक कलाकृतियों की लूट के माध्यम से की गई ऐतिहासिक गलतियों को स्वीकार करें।
- लूटी गई सांस्कृतिक कलाकृतियाँ लौटाना अतीत के अन्यायों की पहचान और उन्हें सुधारने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
- यह प्रभावित समुदायों और राष्ट्रों के लिए न्याय और मेल-जोल का प्रतिनिधित्व करता है।
- लूटी गई कलाकृतियों को वापस करके, पूर्व औपनिवेशिक शक्तियों ने एक नैतिक मिसाल कायम की जो ऐतिहासिक अन्याय की वैश्विक मान्यता को प्रोत्साहित करती है।
- यह अन्य देशों को अपनी औपनिवेशिक विरासतों का सामना करने और पिछली गलतियों को सुधारने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करता है।
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण:
- ज़ख्मों का भरना और मेल-जोल: कलाकृतियाँ सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का हिस्सा हैं। कुछ ऐतिहासिक कलाकृतियों का गहरा सांस्कृतिक महत्व है। सांस्कृतिक कलाकृतियों का प्रत्यावर्तन प्रभावित समुदायों के लिए ज़ख्मों के भरने और मेल-जोल की दिशा में एक मार्ग प्रदान करता है।
- प्रत्यावर्तन राष्ट्रों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को पुनः प्राप्त करने और संरक्षित करने की अनुमति देता है, जिसे गलत तरीके से छीन लिया गया था।
- यह भावी पीढ़ियों को अपने इतिहास से जुड़ने में सक्षम बनाता है और उनकी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व की भावना को बढ़ावा देता है।
वित्तीय क्षतिपूर्ति से परे:
- सांस्कृतिक कलाकृतियों की वापसी वित्तीय क्षतिपूर्ति से परे है और उपनिवेशवाद के प्रभाव के अमूर्त पहलुओं को संबोधित करती है।
- यह नैतिक मुक्ति का एक रूप प्रदान करता है, जो औपनिवेशिक शासन के तहत पीड़ित समुदायों को राहत प्रदान करता है।
सीमाएँ और चुनौतियाँ: नैतिक, वित्तीय और अन्य दायित्वों और लाभों के बावजूद वापसी आसान नहीं है। इसमें कई चुनौतियाँ और सीमाएँ हैं जैसे:
- कानूनी बाधाएँ: वि-परिग्रहण कानून संग्रहालयों में वर्तमान में रखी गई वस्तुओं की वापसी को रोक सकते हैं, जिससे प्रत्यावर्तन में कानूनी बाधाएँ पैदा हो सकती हैं।
- संग्रहालय संग्रहों पर असर: द्वार खुलने और महत्वपूर्ण सांस्कृतिक खजाने खोने का डर कुछ देशों को व्यापक प्रत्यावर्तन प्रयास शुरू करने से रोक सकता है।
- आम सहमति का अभाव: लूटी गई कलाकृतियों पर सही स्वामित्व और दावों को लेकर राष्ट्रों और सांस्कृतिक संस्थानों के बीच असहमति और अलग-अलग दृष्टिकोण इस प्रक्रिया को जटिल बनाते हैं।
- ऐतिहासिक उत्तरदायित्व को संतुलित करना: ऐतिहासिक अन्याय को संबोधित करने और वैश्विक संग्रहालयों में सांस्कृतिक कलाकृतियों के शैक्षिक मूल्य को संरक्षित करने के बीच संतुलन बनाना एक जटिल चुनौती है।
- वित्तीय और तार्किक विचार: लागत, रसद का आकलन करना और नाजुक कलाकृतियों के सुरक्षित परिवहन और संरक्षण को सुनिश्चित करना, प्रत्यावर्तन प्रक्रिया में व्यावहारिक चुनौतियाँ पैदा करता है।
- भारत से चोरी हुई प्राचीन वस्तुओं की बरामदगी के बारे में अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: Recovery of Stolen Antiquities from India
निष्कर्ष:
- इन सीमाओं को संबोधित करने के लिए नेतृत्व और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भूमिका महत्वपूर्ण है। विली ब्रांट और जस्टिन ट्रूडो जैसे नेताओं के कार्य प्रायश्चित के उदाहरण हैं। इसके अलावा, ब्रिटिश सरकार को इसका अनुसरण करने के लिए प्रोत्साहित करना, प्रायश्चित का एक महत्वपूर्ण भाव व्यक्त करने और चुराई गई सांस्कृतिक कलाकृतियों की वापसी के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बना सकता है।
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सारांश:
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प्रीलिम्स तथ्य:
1. नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF):
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधन आदि से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन के लिए सरकारी पहल।
प्रारंभिक परीक्षा: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास, अनुसंधान वित्त पोषण और समन्वय तंत्र को बढ़ावा देने हेतु प्रमुख सरकारी पहल।
संसद में NRF विधेयक का पेश किया जाना:
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020) की सिफारिशों के बाद संसद में नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF) विधेयक पेश करने को मंजूरी दे दी है।
- NRF का उद्देश्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी में वित्त पोषण चुनौतियों का समाधान करना और शोधकर्ताओं, सरकारी निकायों और उद्योग के बीच एक समन्वय एजेंसी के रूप में कार्य करना है।
NRF के उद्देश्य:
- NRF का लक्ष्य अनुसंधान बुनियादी ढांचे और शोधकर्ताओं को वित्त पोषित करके भारत के विश्वविद्यालयों, विशेष रूप से राज्य विश्वविद्यालयों में अनुसंधान को सुविधाजनक बनाना है।
- इसका इरादा उद्योग को अनुसंधान की मुख्यधारा में लाना और शिक्षा जगत और उद्योग के बीच सहयोग के लिए एक मंच के रूप में काम करना है।
NRF का वित्त पोषण:
- NRF पांच वर्षों के लिए ₹50,000 करोड़ के बजट के साथ संचालित होगा, जिसमें 28% (₹14,000 करोड़) सरकार द्वारा और 72% (₹36,000 करोड़) निजी क्षेत्र से वित्त पोषित होगा।
- मौजूदा विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड के बजट से ₹4,000 करोड़ के साथ, सरकार की हिस्सेदारी प्रति वर्ष ₹20,000 करोड़ तक बढ़ाने का प्रस्ताव है।
वित्त पोषण को लेकर चिंता:
- NRF के लिए आवंटित धन, अनुसंधान और विकास (GERD) पर देश के सकल घरेलू व्यय का 2% से भी कम, अमेरिका और चीन जैसी अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अपर्याप्त माना जाता है।
- वर्ष 2017-18 में भारत का जीईआरडी (GERD) अमेरिका और चीन की तुलना में काफी कम था, जो अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता को उजागर करता है।
“विज्ञान में सुगमता” को सुविधाजनक बनाना:
- NRF को अनुदान आवेदन और धन वितरण के बीच के समय को कम करने की आवश्यकता है, जिसके लिए अधिकतम छह महीने का समय सुनिश्चित करना चाहिए।
- भौतिक प्रतियों की आवश्यकता को समाप्त करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए कागजी कार्रवाई और वित्तीय लेनदेन की डिजिटल प्रसंस्करण को लागू किया जाना चाहिए।
- सामान्य वित्तीय नियमों और सरकार के ई-मार्केटप्लेस (government e-Marketplace (GeM)) से अलग, जवाबदेही बनाए रखते हुए लचीलापन प्रदान करने के लिए NRF के पास स्वतंत्र व्यय दिशानिर्देश होने चाहिए।
- धन की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए और इसे प्रभावी ढंग से लागू करने और सुविधाजनक बनाने के लिए तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।
निजी क्षेत्र की भागीदारी और वित्त पोषण:
- हालाँकि NRF में निजी उद्योग की भागीदारी का स्वागत किया जा रहा है, लेकिन इस उद्योग से ₹36,000 करोड़ जुटाने के तंत्र के लिए अधिक विस्तृत योजना और एस्क्रो खातों जैसे सुरक्षित तंत्र की स्थापना की आवश्यकता है।
अंतर्राष्ट्रीय मॉडलों से सीखना:
- NRF यू.एस. नेशनल साइंस फाउंडेशन जैसी अंतरराष्ट्रीय विज्ञान एजेंसियों और जर्मनी, यू.के., स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर में विज्ञान एजेंसियों से प्रेरणा लेता है।
- NRF की सफलता महत्वपूर्ण सोच, रचनात्मकता और नवाचार पर ध्यान देने के साथ मौजूदा प्रथाओं से भिन्न पारदर्शी नियमों को स्थापित करने और लागू करने की सरकार की क्षमता पर निर्भर करेगी।
महत्वपूर्ण तथ्य:
1.पाकिस्तान को IMF का समर्थन मिला:
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund (IMF)) ने पाकिस्तान की संघर्षरत अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में सहायता के लिए 3 अरब डॉलर की “आपातकालीन प्रबंधन/स्टैंड-बाय व्यवस्था” (stand-by arrangement) को मंजूरी दे दी है।
- आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड द्वारा पाकिस्तान को 9 महीने की स्टैंड-बाय व्यवस्था (Stand-By Arrangement (SBA)) प्रदान की गई है, जिसका कुल मूल्य एसडीआर 2,250 मिलियन (लगभग 3 बिलियन डॉलर के बराबर) है।
- 1.2 बिलियन डॉलर तुरंत वितरित किए जाएंगे, जबकि शेष राशि तिमाही समीक्षा लंबित होने तक कार्यक्रम की अवधि के दौरान धीरे-धीरे वितरित की जाएगी।
- कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य वित्त वर्ष 2024 के बजट को लागू करना है, जिसका लक्ष्य पाकिस्तान के आवश्यक वित्तीय समायोजन को सुविधाजनक बनाना और उसके ऋण की स्थिरता की गारंटी देना है।
- आईएमएफ की मंजूरी से पहले फंड की शर्तों के अनुसार पाकिस्तान को पहले ही सऊदी अरब से 2 बिलियन डॉलर और यूएई से 1 बिलियन डॉलर मिल चुके थे।
- नए ऋण से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार (foreign exchange reserves ) में सुधार होने और संभावित रूप से संस्थानों और देशों के साथ बहुपक्षीय ऋण समझौतों का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।
- पाकिस्तान के आर्थिक संकट के बारे में अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: Pakistan’s Economic Crisis
2. ईयू संसद (EU Parliament):
- भारत ने मणिपुर में हिंसा पर “तत्काल बहस” की यूरोपीय संसद की योजना को आंतरिक मुद्दा मानते हुए खारिज कर दिया है।
- यूरोपीय संघ की बहस का उद्देश्य हिंसा की निंदा करना और यूरोपीय संघ के अधिकारियों से समाधान के लिए भारत के साथ जुड़ने का आग्रह करना है।
- विदेश सचिव विनय क्वात्रा का कहना है कि भारत ने सांसदों से इस प्रकार की बहस को रोकने की सलाह दी है, लेकिन फिर भी बहस जारी है।
- कथित तौर पर भारत सरकार ने यूरोपीय संसद के सदस्यों (Members of European Parliament (MEPs)) तक पहुंच में सहायता के लिए ब्रुसेल्स में एक लॉबिंग फर्म को काम पर रखा है।
- यूरोपीय संसद के आठ राजनीतिक समूहों में से छह ने भारत और मणिपुर की स्थिति पर एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।
- कुछ प्रस्तावों में चर्चों पर हमलों और मैतेई और कुकी समुदायों के बीच झड़पों को उजागर किया गया है, जिसमें इंटरनेट शटडाउन को समाप्त करने का आग्रह किया गया है।
- 2023 मणिपुर हिंसा की व्याख्या के बारे में अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: 2023 Manipur Violence Explained
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इस अधिनियम को सबसे पहले जम्मू-कश्मीर में लागू किया गया था।
- यह सशस्त्र बलों को बल प्रयोग की अनुमति प्रदान करता है, लेकिन उन्हें बिना वारंट के गिरफ्तारी करने पर रोक लगाता है।
- इसके एक बार लागू हो जाने के बाद, केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना इस अधिनियम के तहत किसी भी अपराध के लिए कोई मुकदमा शुरू नहीं किया जा सकता है।
ऊपर दिए गए कितने कथन गलत हैं?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) केवल तीन
(d) कोई नहीं
उत्तर: b
व्याख्या:
- AFSPA को सबसे पहले पूर्वोत्तर क्षेत्र में लागू किया गया था। यह सशस्त्र बलों को विशेष शक्तियां प्रदान करता है, जैसे कि विचार और संदेह के आधार पर बल प्रयोग, बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार और हत्या करने या संपत्ति को नुकसान पहुँचाने या नष्ट करने पर गोली चलाने की सामर्थ्यता प्रदान करना।
प्रश्न 2. प्रवर्तन निदेशालय (ED) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन एक विशेष वित्तीय जांच एजेंसी है।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य आर्थिक कानूनों को लागू करना और वित्तीय अपराधों से लड़ना है।
निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: c
व्याख्या:
- दोनों कथन सही हैं। इसका प्राथमिक उद्देश्य आर्थिक कानूनों को लागू करना और मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को वैध बनाना) और विदेशी मुद्रा उल्लंघन जैसे वित्तीय अपराधों से लड़ना है।
प्रश्न 3. दक्षिण चीन सागर की सीमा से लगे देशों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- चीन अपनी भू-स्थलीय सीमा दक्षिण चीन सागर से लगे सभी देशों के साथ साझा करता है।
- वियतनाम, फिलीपींस और मलेशिया उन देशों में से हैं जो दक्षिण चीन सागर के साथ समुद्री सीमाएँ साझा करते हैं।
- ब्रुनेई और सिंगापुर का दक्षिण चीन सागर पर कोई क्षेत्रीय दावा नहीं जताया जाता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कितने सही हैं?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) सभी तीनों
(d) कोई नहीं
उत्तर: a
व्याख्या:
- कथन 1 ग़लत है, क्योंकि चीन अपनी सीमाएँ दक्षिण चीन सागर की सीमा से लगे सभी देशों के साथ साझा नहीं करता है। कथन 3 गलत है, क्योंकि ब्रुनेई और सिंगापुर द्वारा दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय दावा किया जाता है।
प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF) की स्थापना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार की जा रही है।
कथन-II: NRF का लक्ष्य अनुसंधान बुनियादी ढांचे और शोधकर्ताओं को वित्त पोषित करके भारत के विश्वविद्यालयों, विशेष रूप से राज्य विश्वविद्यालयों में अनुसंधान को सुविधाजनक बनाना है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
(a) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं और कथन-II कथन-I की सही व्याख्या है।
(b) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं और कथन-II कथन-I की सही व्याख्या नहीं है।
(c) कथन-I सही है, लेकिन कथन-II गलत है।
(d) कथन-I गलत है, लेकिन कथन-II सही है।
उत्तर: a
व्याख्या:
- कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं और कथन-II कथन-I की सही व्याख्या है।
- कथन-II NRF के प्रयोजन और उद्देश्य की व्याख्या करता है, जिससे यह कथन-I के लिए सही स्पष्टीकरण बन जाता है।
प्रश्न 5. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है, जिसका उद्देश्य वैश्विक मौद्रिक सहयोग और वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।
- यह सदस्य देशों को भुगतान संतुलन की कठिनाइयों को दूर करने में मदद करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
- आईएमएफ में मतदान की शक्ति पूरी तरह से सदस्य देशों के आर्थिक आकार के आधार पर आवंटित की जाती है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कितने सही हैं?
(a) केवल एक
(b) केवल दो
(c) केवल तीन
(d) कोई नहीं
उत्तर: b
व्याख्या:
- कथन 3 गलत है, क्योंकि आईएमएफ में मतदान की शक्ति पूरी तरह से आर्थिक आकार पर आधारित नहीं है, बल्कि जीडीपी, कोटा सदस्यता आदि जैसे अन्य कारकों के संयोजन के माध्यम से निर्धारित की जाती है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई के प्रमुखों के कार्यकाल का टुकड़ों में विस्तार उनकी स्वतंत्रता के लिए झटका है। आलोचनात्मक चर्चा कीजिए।
(250 शब्द, 15 अंक) [जीएस-2: शासन]
प्रश्न 2. दक्षिण चीन सागर में तनाव पर विस्तार से चर्चा कीजिए और इस संदर्भ में, भारत-फिलीपींस संबंधों में नवीनतम विकास पर भी चर्चा करें।
(250 शब्द, 15 अंक) [जीएस-2: अंतर्राष्ट्रीय संबंध]