22 अगस्त 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

शासन:

  1. चेहरे की पहचान तकनीक और बड़े पैमाने पर निगरानी:

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

  1. नेपाल का नया नागरिकता कानून:

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

आंतरिक सुरक्षा:

  1. चीनी कंपनियों पर सरकारी कार्रवाई:

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

राजव्यवस्था:

  1. जमानत कराना असंभव:
  2. डेटा सुरक्षा पर आगे क्या?

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. बौना रोग (Dwarfing Disease):

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

चीनी कंपनियों पर सरकारी कार्रवाई:

आंतरिक सुरक्षा:

विषय: आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियां पैदा करने में बाहरी राज्य और गैर-राज्य अभिनेताओं की भूमिका।

मुख्य परीक्षा: चीनी फर्मों पर कड़े नियमों का आर्थिक प्रभाव।

संदर्भ:

  • चीन की एक प्रमुख दूरसंचार कंपनी ‘हुआवेई’ (Huawei) भारत में अपने अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) सुविधाओं के संचालन को कम करने की योजना बना रही है।

हुआवेई’ (Huawei) अपना आकार क्यों कम कर रही है?

  • हुआवेई पर भारत सरकार ने कई कार्रवाइयाँ की है, जिसमें आयकर जांच, कंपनी के 20 वर्षों के रिकॉर्ड का ऑडिट और इसके संचालन में “राष्ट्रीय सुरक्षा” पहलुओं की जांच करना शामिल है।
  • जुलाई 2022 में, आयकर विभाग ने कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिसमें भारत के विपणन संचालन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी शामिल थे, जो भारत में कर योग्य आय की की गणना के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण जानकारी को कथित रूप से रोक रहे थे और मूल कंपनी को लाभांश के रूप में बड़ी मात्रा में पुनर्निर्देशित कर रहे थे।
  • इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भारत में विपणन संचालन के खिलाफ एक लुक-आउट सर्कुलर जारी किया गया था, जिसने उन्हें विदेश यात्रा करने से रोक दिया था।
  • इसे हाल ही में हुए 5G टेलीकॉम ट्रायल से भी बाहर रखा गया था।

अनौपचारिक प्रतिबंध:

  • भारत सरकार, विशेष रूप से केंद्रीय शिक्षा और गृह मामलों के मंत्रालयों ने “महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के खिलाड़ियों” (critical ecosystem players) जैसे विश्वविद्यालयों, स्टार्ट-अप और हुआवेई के साथ एनालिटिक्स फर्मों के हर तरह के संबंधों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
  • चीन के हुआवेई के विशेषज्ञ भारत आने के लिए वीजा नहीं ले सकते हैं, जाहिर तौर पर यह चीनी सरकार के पारस्परिक प्रतिबंधों के कारण हो रहा हैं।
  • नतीजतन,हुआवेई ने पहले ही अपनी कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं को चीन स्थानांतरित कर दिया है,और भारतीय टीमों को मौजूदा परियोजनाओं में फिर से तैनात कर दिया है।

आकार घटाने के परिणाम:

  • भारत में 5G बाजार के बिना, हुआवेई (Huawie ) 2G, 3G और 4G नेटवर्क के दूरसंचार बाजार से बाहर है,क्योंकि यह भारत सरकार के विश्वसनीय भागीदारों की सूची में शामिल नहीं है।
  • मौजूदा परियोजनाओं को पूरा किया जा रहा है और वर्तमान में कोई नई परियोजना अनुबंधित नहीं की जा रही है।
  • हुआवेई ने वर्ष 2000 में बेंगलुरु के पास एक R&D सुविधा स्थापित करने के लिए $150 मिलियन से अधिक का निवेश किया था।
  • यह वर्तमान में 3,500 इंजीनियरों को रोजगार प्रदान करता है,जो विविध उत्पादों और विकास गतिविधियों पर काम करते हैं।
  • आकार घटाने का कदम इन सभी नौकरियों को प्रभावित कर सकता है जो उसने 20 वर्षों में भारत में पैदा की हैं।
  • सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और उत्पाद डिजाइन टीमों की संख्या में कटौती करने की योजना और इसके विशाल परिसर के कुछ हिस्सों को पट्टे पर देने की एक अन्य संभावित योजना के साथ, अन्य नौकरियों का भविष्य भी खतरे में है।
  • ये कार्रवाइयां चीनी हितों को “नुकसान” पहुंचा सकती हैं,और इससे भारत में निवेश और “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।

चीनी कंपनियों पर कार्रवाई:

  • इन कंपनियों के खिलाफ कई कथित अपराधों की जांच की जा रही है, जैसे- शुल्क छूट का गलत तरीके से लाभ उठाना, कर चोरी (tax evasion) और मनी लॉन्ड्रिंग (money laundering)।
  • हुआवेई के खिलाफ यह कार्रवाई देश में चीनी कॉर्पोरेट प्रभाव की जांच करने के उद्देश्य से सरकारी उपायों की एक श्रृंखला का हिस्सा है। जो खासकर भारत-चीन सीमा पर गलवान घाटी में हुई हिंसा (Violence in the Galwan Valle) के बाद की गयी हैं।
  • हुआवेई के अलावा, दूरसंचार प्रमुख वीवो, जेडटीई ओप्पो और श्याओमी और अन्य चीनी कंपनियों के अपने कार्यालयों की तलाशी आयकर विभाग और राजस्व खुफिया निदेशालय द्वारा ली गयी है।
  • कई कंपनियों ने अपना डेटा क्लाउड सर्वर में सहेज कर रखा है, जहां भारतीय संस्थाओं के खातों की जानकारी सीधे चीनी मूल कंपनियों के साथ साझा की जा रही है।

सारांश:

  • सरकार वर्ष 2020 की शुरुआत से ही चीनी कंपनियों पर नकेल कस रही है – पहले चीनी मोबाइल एप्लिकेशन पर प्रतिबंध (anning Chinese mobile applications) लगाकर और फिर चीनी फर्मों को भारतीय आयकर और मनी लॉन्ड्रिंग के कानूनों का उल्लंघन करने पर।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

चेहरे की पहचान तकनीक और बड़े पैमाने पर निगरानी:

शासन:

विषय: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू।

मुख्य परीक्षा: चेहरे की पहचान के उपयोग और उससे सम्बंधित चिंताएं।

संदर्भ:

  • दिल्ली पुलिस द्वारा हाल ही में सूचना के अधिकार (RTI) के जवाब में कहा कि चेहरे की पहचान तकनीक (facial recognition technology (FRT)) प्रणाली के माध्यम से किए गए 80% से अधिक मिलान सही निकले हैं।

चेहरे की पहचान तकनीक (facial recognition technology (FRT)) क्या है?

  • चेहरे की पहचान एक बायोमेट्रिक तकनीक है, जिसमे किसी व्यक्ति की पहचान और अन्य से अंतर करने के लिए चेहरे की विशिष्ट विशेषताओं का उपयोग किया जाता है।

चेहरे की पहचान तकनीक मुख्य रूप से दो उद्देश्यों के लिए लाई गई है:

  1. मौजूदा जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति की तुलना और कंट्रास्ट टूल (असमान वस्तुओं की तुलना) के रूप में एवं,
  2. जानकारियों का संग्रह तैयार करना जिसके आधार पर पहचान की प्रक्रिया को उन्नत किया जा सके।

Image Source: Nature.com

दिल्ली पुलिस और चेहरे की पहचान तकनीक:

  • दिल्ली पुलिस को दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद पहली बार दिल्ली के साधन हलदर बनाम एनसीटी, 2018 के मामले में लापता बच्चों का पता लगाने और उनकी पहचान के लिए एफआरटी का उपयोग करने के लिए अधिकृत किया गया था।
  • दिल्ली पुलिस भी विशेष रूप से 2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों, 2021 लाल किले की हिंसा और 2022 जहांगीरपुरी दंगों की जांच के लिए एफआरटी का उपयोग किया था।
  • दिल्ली पुलिस द्वारा हाल ही में आरटीआई प्रतिक्रियाओं से पता चला है कि 80% से अधिक समानता वाले मिलान को सकारात्मक परिणाम माना जाता है, जबकि 80% से कम समानता वाले मिलान को झूठे सकारात्मक परिणामों के रूप में माना जाता है, जिसके लिए अतिरिक्त “पुष्टिकारक साक्ष्य” की आवश्यकता होती है।
  • दिल्ली पुलिस अभी तक कैदियों की पहचान अधिनियम, 1920 की धारा तीन और चार के तहत एकत्र की गई तस्वीरों/वीडियो के मिलान द्वारा कर रही थी, जिसे अब आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 (Criminal Procedure (Identification) Act, 2022) से बदल दिया गया है।

एफआरटी के व्यापक उपयोग से संबंधित चिंताएं:

  • इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन द्वारा ‘प्रोजेक्ट पैनोप्टिक’ (Project Panoptic) के अनुसार,जो भारत में FRT के प्रसार को ट्रैक करता है, भारत में कम से कम 124 सरकारी अधिकृत FRT परियोजनाएं हैं।
  • 80% से कम नकारात्मक परिणामों की बजाय सकारात्मक के रूप से वर्गीकृत परिणामों की आगे भी जांच हो सकती है।
  • इस प्रकार, जो लोग पारिवारिक चेहरे जैसी विशेषताओं को साझा करते हैं, इसके आधार पर उनके परिवारों या समुदायों को लक्षित किया जा सकता है।
  • विभिन्न अध्ययनों के अनुसार,जाति और लिंग के आधार पर FRT की सटीकता दर बहुत कम है।
  • इस खराब सटीकता के परिणामस्वरूप जहां किसी व्यक्ति को गलत पहचाना जाता है, या झूठी नकारात्मक जहां एक व्यक्ति को स्वयं के रूप में सत्यापित नहीं किया जाता है।
  • उदाहरण के लिए: आधार के तहत बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की विफलता के कारण कई लोगों को आवश्यक सरकारी सेवाएं नहीं मिलती है,और इसी के परिणामस्वरूप भुखमरी से उनकी मौतें हुई हैं।
  • राज्य द्वारा एफआरटी के व्यापक उपयोग से गोपनीयता का उल्लंघन होता है और गलत गिरफ्तारियां होती हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनके निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है।
  • इसके लिए कोई सुरक्षा उपाय नहीं किये गए हैं,अतः यह सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी केवल उन्हीं उद्देश्यों के लिए FRT का उपयोग करें जिनके लिए उन्हें अधिकृत किया गया है,क्योंकि भारत में डेटा संरक्षण कानून ( data protection law ) या FRT पर कोई विशिष्ट नियम नहीं है जो इसके दुरुपयोग को रोकने में सक्षम हो।
  • चेहरे की पहचान के उपयोग और चिंताओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Uses and Concerns of Facial Recognition

सारांश:

  • एफआरटी का उपयोग उसके उद्देश्य का विस्तार स्पष्ट रूप से ‘फ़ंक्शन क्रीप’ (function creep) का एक उदाहरण है,जिसमें एक तकनीक या प्रणाली धीरे-धीरे अपने मूल उद्देश्य में व्यापक कार्यों को शामिल कर उन्हें पूरा करने के लिए अपने दायरे को विस्तृत करती रहती है। एफआरटी का दुरुपयोग गलत पहचान और सामूहिक निगरानी से संबंधित दो मुद्दों को प्रस्तुत करता है,जिसके परिणामस्वरूप निजता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

नेपाल का नया नागरिकता कानून:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: भारत और उसके पड़ोसी देशों से – संबंध

मुख्य परीक्षा: भारत के हित को प्रभावित करने वाली नीतियां।

संदर्भ:

  • हाल ही में, नेपाल के राष्ट्रपति ने नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2006 को नेपाल की संसद के निचले सदन में वापस भेज दिया एवं सदस्यों से इस अधिनियम पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया हैं।

परिचय:

  • नेपाल की पहली महिला राष्ट्रपति, राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2006 को नेपाल की संसद के निचले सदन ‘प्रतिनिधि सभा’ (Pratinidhi Sabha) को वापस भेज दिया हैं तथा उसके सदस्यों से इस अधिनियम पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया हैं।
  • इस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करने से इनकार ने संविधान के कुछ भागों (sections) पर ध्यान आकर्षित किया है,जो महिलाओं और नागरिकता संबंधी प्रावधानों पर अधिक जिम्मेदारी डालते हैं।

नेपाल में नागरिकता का मुद्दा:

  • नेपाल के संविधान को 20 सितंबर, 2015 को अपनाया गया था। इस तिथि से पहले पैदा हुए सभी नेपाली नागरिकों को नैसर्गिक तौर पर नेपाल की नागरिकता स्वत मिल गई थी।
  • लेकिन उनके बच्चों को यह नागरिकता नहीं मिल पाई क्योंकि उन्हें एक संघीय कानून द्वारा निर्देशित किया जाना था जिसे अभी तक तैयार नहीं किया गया है।
  • हाल के संशोधन अधिनियम से ऐसे कई नागरिकता विहीन युवाओं के साथ-साथ उनके माता-पिता के लिए नागरिकता का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद की जा रही है।

संशोधन अधिनियम के मुद्दे:

  • मुख्य रूप से इसकी आलोचना इसलिए की जा रही है कि यह लैंगिक न्याय के स्थापित मानकों के खिलाफ है।
  • इस कानून की विभिन्न धाराओं में भी विरोधाभास है।
  • उदाहरण के लिए: संविधान के अनुसार, नेपाली नागरिकता वाले पिता या माता से जन्म लेने वाला व्यक्ति वंश के आधार पर नागरिकता प्राप्त कर सकता है।
  • संविधान के अनुच्छेद 11(5) में कहा गया है कि जो व्यक्ति नेपाली मां और अज्ञात पिता से पैदा हुआ है, उसे भी वंश के आधार पर नागरिकता मिलेगी।
  • लेकिन मां को यह घोषित करना होगा कि पति के वंश से उसका बच्चा नागरिकता के लिए पात्र नहीं हैं,क्योंकि उसका पति अज्ञात है। नेपाली पिता के मामले में, ऐसी घोषणाओं की आवश्यकता नहीं है।
  • नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए सात साल की कूलिंग ऑफ अवधि को हटाने के प्रावधान ने प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच विरोधाभास पैदा कर दिया है।

इस प्रकार संशोधन क्यों तैयार किया गया है? (Why has the amendment been framed thus?)

  • देश के रूढ़िवादी वर्गों को इस बात का डर है कि अगर नेपाली पुरुष उत्तर भारत की महिलाओं से शादी करना जारी रखते हैं तो इससे नेपाली पहचान खत्म हो जाएगी।
  • “बेटी-रोटी” (भारतीय महिलाओं से शादी करने वाले नेपाली पुरुष) के कारण, कई महिलाएं नेपाल की नागरिक नहीं बन सकीं क्योंकि नेपाल में नागरिकता के लिए आवेदन करने से पहले उन्हें 07 साल की ‘विराम अवधि’ (cooling-off period) के तहत लाया गया था। जैसे जो महिलाएं राज्यविहीन थीं, ऐसे परिवारों के बच्चे भी अक्सर नेपाली नागरिकता के बिना रह जाते हैं।
  • हाल के संशोधनों ने इन स्टेटलेस महिलाओं के लिए ‘विराम अवधि’ (cooling-off period) को समाप्त कर दिया है।

सारांश:

  • नागरिकता संशोधन अधिनियम को राष्ट्रपति द्वारा अस्वीकार किए जाने से उत्पन्न विवाद के कारण नागरिकता विवाद की अंतर-जातीय प्रकृति उजागर हुई है।
    • भारतीय/विदेशी मूल की महिलाओं को संविधान और नौकरशाही की शिथिलता के कारण नेपाल की नागरिकता से वंचित करने के लिए ‘विराम अवधि’ (cooling-off period) के कारण अधिकारों से वंचित कर दिया जाएगा, और यदि राष्ट्रपति द्वारा इस अधिनियम को मान्यता नहीं दी जाती है, तो उनके बच्चे राज्यविहीन स्थिति में फंस कर रह जाएंगे।
  • भारत में नागरिकता के बारे में अधिक जनकरी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Citizenship in India

संपादकीय-द हिन्दू

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 से संबंधित:

राजव्यवस्था:

जमानत कराना असंभव:

विषय: सरकारी नीतियां एवं हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

मुख्य परीक्षा: धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA)।

संदर्भ:

  • विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय का हालिया निर्णय।

संबंधित चिंताएं:

  • विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की संवैधानिकता को बरकरार रखा है। इससे एक बार फिर ADM जबलपुर मामले की वैधता पुनः लागू हो गई है।
    • ADM जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ला (1976) के फैसले को 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने निजता के मौलिक अधिकार (जस्टिस के.एस. पुट्टस्वामी केस) को बरकरार रखते हुए खारिज कर दिया था।
    • इस निर्णय ने “जमानत एक आदर्श और जेल एक अपवाद” की लोकप्रिय कहावत को न्यायिक रूप से कमजोर कर दिया है। इससे जमानत मिलना लगभग असंभव हो जाएगा।

फैसले के बारे में अधिक जानकारी के लिए CNA 3rd 2022 & 09 Aug 2022 पढ़े:

  • यह मुद्दा NIA बनाम जहूर वटाली (2019) के फैसले के बाद और भी जटिल हो गया है, जहां यह निर्णय लिया गया था कि जमानत पर विचार करते समय, अदालत को सबूतों पर विचार न कर केवल आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामले पर विचार करना चाहिए।
    • यह भी माना गया कि अभियोजन पक्ष का बयान आरोपी को जमानत देने से इनकार करने हेतु पर्याप्त है।
    • हालांकि, PMLA मामले के विपरीत, UAPA के आरोपी को प्राथमिकी की एक प्रति प्रदान की जाती है।

सम्बंधित लिंक्स:

Sansad TV Perspective: Prevention of Money Laundering Act, 2002

सारांश:

  • विजय मदनलाल चौधरी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अतीत के विभिन्न विवादास्पद फैसलों को उजागर किया है जिन्हें बाद के मामलों में खारिज कर दिया गया था। सबसे बड़ी चिंता जमानत के प्रावधान को कमजोर करने को लेकर है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-2 से संबंधित:

राजव्यवस्था:

डेटा सुरक्षा पर आगे क्या?

विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियां एवं हस्तक्षेप और उनके डिजाइन एवं कार्यान्वयन से संबंधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा: व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा बिल।

सन्दर्भ:

  • सरकार ने लोकसभा में पेश किए गए व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक को वापस ले लिया।

डेटा सुरक्षा कानून के वापसी के बारे में अधिक जानकारी के लिए CNA 07 Aug 2022 & 10 Aug 2022 पढ़ें:

डेटा सुरक्षा के लिए भावी कदम:

  • नए कानून की रूपरेखा:
    • जैसा कि सरकार ने सुझाव दिया है कि डेटा सुरक्षा से संबंधित कई कानून बनाए जाने चाहिए।
    • डिजिटल इकोसिस्टम और डेटा गवर्नेंस के सभी उद्देश्यों को कानून के साथ समायोजित करना असंभव होगा।
    • जटिल डिजिटल अर्थव्यवस्था शासन में बहुकेंद्रीयता को बनाए रखना चाहिए तथा विभिन्न कानूनों एवं एजेंसियों को स्थापित और उन्हें एकीकृत करना चाहिए।
    • बेहतर होगा यदि प्रत्येक कानून डेटा सुरक्षा के विशेष एक सेट को संबोधित/लक्षित करता हो: उदाहरण के लिए, अलग-अलग कानून राज्य निगरानी के मुद्दों या डेटा अर्थव्यवस्था की चिंताओं जैसे प्रतिस्पर्धा से संबंधित चुनौतियों से निपट सकते हैं जो डेटा एकाधिकार से उत्पन्न होती हैं। समय के साथ, ऐसी प्रणाली से अधिक संतुलित और लाभकारी परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
  • गोपनीयता सुरक्षा की प्रकृति:
    • 2018 का कानून यूरोपीय जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन पर आधारित था। हालांकि, जैसा कि कई आलोचकों ने उद्धृत किया है कि यह भारतीय संदर्भ में प्रासंगिक नहीं था। उदाहरण के लिए, जबरदस्ती कार्रवाई की शक्ति के साथ डेटा संरक्षण इकाई की स्थापना भारत में विधि के शासन के खिलाफ है।
    • उपरोक्त चिंता को दूर करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
      • सबसे पहले, डेटा सुरक्षा हेतु एक जोखिम-आधारित पद्धति विकसित की जाए, जो संभावित नुकसान को कम करने की दिशा में नियामक फोकस को निर्देशित करती हो।
      • दूसरा जोखिम मूल्यांकन के आधार पर, कानून का स्व-विनियमन और सह-विनियमन होना चाहिए। यह व्यक्तिगत अधिकारों को प्रभावित किए बिना संस्थाओं पर अनुपालन के दबाव को कम करेगा।
      • तीसरा, जवाबदेही प्रक्रियाओं को मजबूत किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, नियुक्तियों, रिपोर्टिंग और परामर्श के प्रावधानों वाले नियामकों की शक्ति के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए अधिक प्रावधान किए जाने चाहिए।
      • चौथा, कानून के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत प्रशासनिक क्षमता का निर्माण किया जाना चाहिए।
      • अंत में, पारदर्शिता और हितधारकों की चिंताओं को भी संबोधित किया जाना चाहिए।

सम्बंधित लिंक्स:

Sansad TV Perspective: Episode on 8th Dec, 2021: Data Protection

सारांश:

  • डिजिटल अर्थव्यवस्था की बढ़ती पैठ एवं डेटा सुरक्षा बिल की वापसी ने डेटा सुरक्षा में फिर से कई कमियों को उजागर किया हैं। सभी हितधारकों की सर्वसम्मति परिकलित कानून वर्तमान और भविष्य की डेटा गोपनीयता चिंताओं को दूर कर सकता है।

प्रीलिम्स तथ्य:

1. बौना रोग (Dwarfing Disease):

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

कृषि:

विषय: देश के विभिन्न हिस्सों में प्रमुख फसल स्वरूप(pattern)।

प्रारंभिक परीक्षा: पादप रोगजनक और रोग।

संदर्भ:

  • पंजाब के किसानों ने धान के एक रहस्यमय “बौने” रोग की सूचना दी है जिसे कृषि वैज्ञानिक अभी भी पहचान नहीं पाए हैं।

मुख्य विवरण:

  • पिछले कुछ हफ्तों में, पंजाब, हरियाणा,उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी के उच्च उपज वाले तराई मैदानी इलाकों में कई किसानों ने धान की एक रहस्यमय “बौना” बीमारी की सूचना दी है।
  • इस रोग के कारण धान के पौधे बौने हो जाते हैं; जिसके कारण संक्रमित हुए खेतों में ये बीमारी पौधों की सामान्य ऊंचाई और उनकी नियमित वृद्धि को प्रभावित/संक्रमित करती हैं।
  • संक्रमित खेतों में बौने/अविकसित पौधों की ऊंचाई एक महीने के बाद सामान्य ऊंचाई का 33-60% होना चाहिए।
  • बौना रोग उन क्षेत्रों में अधिक होता है जहां धान की सीधी बुवाई के विपरीत धान की रोपाई की जाती है।
  • कृषि वैज्ञानिक अभी तक इस बीमारी का इलाज नहीं खोज पाए हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न1. मद्रास के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर-मध्यम)

  1. मद्रास पर विजयनगर का शासन था तथा उन्होंने नायक के रूप में जाने जाने वाले उन सरदारों को नियुक्त किया जिन्होंने प्रांत के विभिन्न क्षेत्रों पर लगभग स्वतंत्र रूप से शासन किया।
  2. जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी अपने व्यापार और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए पहुंची तो उस समय दमरला वेंकटद्रि नायक सरदार थे।
  3. फ्रांसिस डे और एंड्रयू कोगन को चंद्रगिरि के राजा ने भूमि अनुदान में दी थी।
  4. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, मद्रास एकमात्र भारतीय शहर था जिस पर जर्मन लाइट क्रूजर SMS एम्डेन द्वारा बमबारी की गई थी।

विकल्प:

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 3 और 4
  4. 1, 2, 3 और 4

उत्तर: d

व्याख्या:

मद्रास का इतिहास:

  • वर्तमान में चेन्नई का शहर 1644 में एक अंग्रेजी बस्ती के रूप में स्थापित हुआ, जिसे फोर्ट सेंट जॉर्ज के नाम से जाना जाता है।
  • यह क्षेत्र तब विजयनगर साम्राज्य का हिस्सा था, जिसका मुख्यालय वर्तमान आंध्र प्रदेश के चंद्रगिरी में था।
  • विजयनगर के नायक के रूप में जाने जाने वाले सरदारों को नियुक्त किया, जिन्होंने प्रांत के विभिन्न क्षेत्रों पर लगभग स्वतंत्र रूप से शासन किया।
  • जब अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी चेन्नई में एक कारखाना स्थापित करने के लिए पहुंची, तो दमारला वेंकटाद्री नायक चेन्नई शहर के क्षेत्र के प्रभारी थे। अंग्रेजों ने वेंकटाद्री नायक द्वारा EIC को मद्रासपट्टिनम के मछली पकड़ने वाले गांव में तीन मील लंबी भूमि की एक पट्टी को अनुदान के रूप में दिया।
  • 22 अगस्त, 1639 को, EIC के फ्रांसिस डे द्वारा उनके दुभाषिया बेरी थिमप्पा और श्रेष्ठ एंड्रयू कोगन के साथ विलेख पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, मद्रास एकमात्र भारतीय शहर था जिस पर जर्मन लाइट क्रूजर SMS एम्डेन द्वारा बमबारी की गई थी।

प्रश्न 2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर-सरल)

  1. आधार संख्या भारत के निवासियों के लिए UIDAI द्वारा जारी 12 अंकों की एक यादृच्छिक संख्या है।
  2. आधार को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ना अनिवार्य है।
  3. आधार से लिंक नहीं होने पर वोटर ID रद्द कर दी जाएगी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से गलत है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. केवल 3

उत्तर: c

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है, आधार संख्या UIDAI (“प्राधिकरण”) द्वारा प्राधिकरण द्वारा निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करने के बाद भारत के निवासियों को जारी किया गया एक 12-अंकीय यादृच्छिक संख्या है।
  • कथन 2 गलत है, आधार को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ना स्वैच्छिक है।
  • कथन 3 गलत है, आधार संख्या जमा न करने पर मतदाता सूची में कोई प्रविष्टि नहीं हटाई जाएगी। इसलिए, आधार से लिंक नहीं होने पर मतदाता पहचान पत्र रद्द नहीं किया जाएगा।

प्रश्न 3. निम्नलिखित में से कौन निःशुल्क कानूनी सेवाएं प्राप्त करने के पात्र हैं? (स्तर-मध्यम)

  1. महिलाएं और बच्चे
  2. जीवित स्वतंत्रता सेनानी
  3. अल्पसंख्यक
  4. विकलांग व्यक्ति
  5. सेवानिवृत्त सैन्य कर्मी (RMP)

विकल्प:

  1. केवल 1, 2, 3 और 4
  2. केवल 2, 3 और 5
  3. केवल 1 और 4
  4. 1, 2, 3, 4 और 5

उत्तर: c

व्याख्या: नीचे उल्लिखित अनुभाग मुफ्त कानूनी सेवाओं के हकदार हैं।

Image Source:nalsa.gov

भारतीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (National Legal Services Authority of India) के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़ें:

प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर-मध्यम)

  1. उन्होंने अखिल भारतीय दलित वर्ग लीग की नींव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  2. वह रांची में हैमंड आयोग के सामने पेश हुए और पहली बार दलितों के लिए मतदान के अधिकार की मांग की।
  3. उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा शुरू किए गए भारत छोड़ो आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी के लिए गिरफ्तार किया गया था।

उपर्युक्त कथन सबसे अच्छा वर्णन करते हैं:

  1. अनंत लक्ष्मण कान्हेरे
  2. बाबू जेनु
  3. डॉ. भीम राव अम्बेडकर
  4. जगजीवन राम

उत्तर: d

व्याख्या:

  • जगजीवन राम, जिन्हें प्यार से बाबूजी के नाम से जाना जाता है, एक स्वतंत्रता सेनानी, एक राष्ट्रीय नेता, सामाजिक न्याय के योद्धा, दलित वर्गों के चैंपियन और एक उत्कृष्ट सांसद थे।
  • 1935 में, उन्होंने अखिल भारतीय दलित वर्ग लीग के गठन में सहायता की।
  • उन्होंने दलित नेताओं को सामाजिक सुधारों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की भी मांग की। 1935 में, वह रांची में हैमंड आयोग के सामने पेश हुए और पहली बार दलितों के लिए मतदान के अधिकार की मांग की।
  • गांधीजी से प्रेरित होकर उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा शुरू किए गए भारत छोड़ो आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी के लिए उन्हें 1942 में गिरफ्तार किया गया था।

बाबू जगजीवन राम ( Babu Jagjivan Ram) के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़ें:

प्रश्न 5. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: (स्तर-कठिन) (CSE Prelims 2022)

अक्सर चर्चा में उल्लिखित क्षेत्र : देश

  1. अनातोलिया : तुर्की
  2. अमहारा : इथियोपिया
  3. काबो डेलगाडो : स्पेन
  4. कैटेलोनिया : इटली

उपर्युक्त कितने युग्म सुमेलित हैं?

  1. केवल एक युग्म
  2. केवल दो युग्म
  3. केवल तीन युग्म
  4. उपर्युक्त सभी युग्म

उत्तर: b

व्याख्या:

  • युग्म 1 सुमेलित है: अनातोलिया, जिसे रोम के लोग एशिया माइनर (लेसर एशिया) कहते हैं, भूमि आधुनिक तुर्की का एशियाई हिस्सा है। यह ग्रीस के पूर्व में एजियन सागर में स्थित है और आमतौर पर इसे इसके प्राचीन नाम अनातोलिया से जाना जाता है।

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  • युग्म 2 सुमेलित है: अम्हारा क्षेत्र उत्तरी इथियोपिया का राज्य है और अम्हारा लोगों की मातृभूमि है।
  • युग्म 3 सुमेलित नहीं है: काबो डेलगाडो मोजाम्बिक का सबसे उत्तरी प्रांत है। इस क्षेत्र में एक संघर्ष चल रहा है जो मुख्य रूप से उग्रवादी इस्लामवादियों एवं जिहादियों, जो कि इस क्षेत्र को एक इस्लामिक राज्य के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं तथा मोजाम्बिक सुरक्षा बल के बीच है।

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  • युग्म 4 सुमेलित नहीं है: कैटेलोनिया के स्वायत्त समुदाय ने स्पेन के उत्तरपूर्वी कोने में एक त्रिकोणीय क्षेत्र पर कब्जा किया है। इसकी सीमा उत्तर में फ्रांस और अंडोरा से, पूर्व में भूमध्य सागर से लगती है।
  • 17वीं शताब्दी से यह एक अलगाववादी आंदोलन का केंद्र था जो कभी-कभी स्पेनिश मामलों पर हावी था।

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UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. वैश्विक दूरसंचार बाजार में हुआवेई की भूमिका सुरक्षा के आधार पर तेजी से विवादास्पद हो गई है। मामले का विस्तार से परिक्षण कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस 2,3-अंतर्राष्ट्रीय संबंध और आंतरिक सुरक्षा)

प्रश्न 2. चेहरा पहचान प्रणाली के कई फायदे है,लेकिन कानून प्रवर्तन में इसके उपयोग ने गंभीर नैतिक और मानवाधिकारों की चिंता को बढ़ा दिया है। स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस 3-विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और आंतरिक सुरक्षा)