31 अक्टूबर 2022 : समाचार विश्लेषण
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A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित: शासन:
C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित: आज इससे संबंधित कुछ नहीं है। E. संपादकीय: अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
F. प्रीलिम्स तथ्य:
G. महत्वपूर्ण तथ्य:
H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न: |
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सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:
भारत में अंधविश्वास विरोधी कानून:
शासन:
विषय: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप।
मुख्य परीक्षा: भारत में एक व्यापक अंधविश्वास विरोधी कानून की आवश्यकता है।
संदर्भ:
- हाल ही में केरल में “अनुष्ठानात्मक मानव बलि” (ritualistic human sacrifices) के हिस्से के रूप में दो महिलाओं की हत्या कर दी गई थी।
विवरण:
- “अनुष्ठानात्मक मानव बलि” के एक मुख्य भाग के रूप में दो महिलाओं की नृशंस हत्याओं ने केरल में अंधविश्वास, काला जादू और टोना-टोटका के प्रचलन को लेकर एक बहस छेड़ दी है।
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau (NCRB)) की वर्ष 2021 की एक रिपोर्ट के अनुसार छह मौतों को मानव बलि से जोड़ा गया था, जबकि 68 हत्याओं का मकसद सीधे तौर पर जादू टोना से जुड़ा हुआ था।
- इन सब के चलते केरल में मानव बलि के दो मामले देखे गए।
- इनके अलावा देश में जादू टोना के सबसे अधिक मामले छत्तीसगढ़ (20), उसके बाद मध्य प्रदेश (18) और तेलंगाना (11) में दर्ज किए गए।

चित्र स्रोत: The Hindu
भारत में इससे संबंधित कौन से कानून हैं?
- वर्तमान में देश में अंधविश्वास, काला जादू या विशेष रूप से मानव बलि से निपटने के लिए कोई राष्ट्रव्यापी कानून मौजूद नहीं है, जबकि भारतीय दंड संहिता की कुछ धाराएं ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए लागू दंड को सूचीबद्ध कर सजा का प्रावधान सुनिश्चित करती हैं।
- धारा 302 (हत्या की सजा) में मानव बलि का संज्ञान लिया गया है, लेकिन हत्या की घटना के बाद ही।
- धारा 295A (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य, जिसका उद्देश्य किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को आहत कर उसके धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करना है) ऐसी प्रथाओं को हतोत्साहित करने का काम करता है।
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51A (H) (Article 51A (h)) भारतीय नागरिकों के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना को विकसित करना एक मौलिक कर्तव्य बनाता है।
- औषधि और चमत्कारिक उपचार अधिनियम 1954 (Drugs and Magic Remedies Act of 1954) के तहत अन्य प्रावधानों का भी उद्देश्य देश में मौजूद विभिन्न अंधविश्वासी गतिविधियों के प्रभाव से निपटना है।
राज्य विशिष्ट कानून:
- एक राष्ट्रव्यापी कानून के अभाव में देश में कुछ राज्यों ने जादू टोना का मुकाबला करने और महिलाओं को घातक ‘जादू टोना शिकार’ से बचाने के लिए कानून बनाए हैं।
- अक्टूबर 1999 में बिहार किसी महिला को डायन बताने की घटना पर रोक लगाने एवं जादू टोना कृत्य रोकने के लिए कानून बनाने वाला पहला राज्य था।
- इसी तरह का एक कानून वर्ष 2001 में झारखंड में डायन प्रथा प्रतिषेध (डायन)अधिनियम,2001 (the Prevention of Witch (Daain) Practices Act) नाम से पारित किया गया था।
- छत्तीसगढ़ ने 2005 में छत्तीसगढ़ टोनही (चुड़ैल) प्रताप निवारण अधिनियम अधिनियमित किया।
- ओडिशा में डायन-शिकार के बढ़ते मामलों से निपटने हेतु एक कानून बनाने के लिए ओडिशा उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए 2013 में प्रिवेंशन ऑफ विच-हंटिंग बिल (Prevention of Witch-Hunting Bill) विधानसभा द्वारा पारित किया गया था।
- अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता डॉ नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के बाद महाराष्ट्र मानव बलि और अन्य अमानवीय, बुराई और अघोरी प्रथाओं और काला जादू रोकथाम और उन्मूलन अधिनियम, 2013 पारित किया गया था।
- असम का डायन प्रथा निषेध, रोकथाम, संरक्षण अधिनियम, 2015, (Assam Witch Hunting (Prohibition, Prevention and Protection) Act, 2015) जिसे 2018 में राष्ट्रपति की सहमति मिली थी, डायन प्रताड़ना को पूरी तरह से प्रतिबंधित करता है।
- कर्नाटक अमानवीय बुरी प्रथाओं और काला जादू रोकथाम और उन्मूलन विधेयक, 2017 (Karnataka Prevention and Eradication of Inhuman Evil Practices and Black Magic Act, 2017) जनवरी 2020 में लागू हुआ।
- यह कानून काला जादू और अंधविश्वास से संबंधित कई प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाता है, जैसे कि धार्मिक त्योहारों पर किसी व्यक्ति को आग पर चलने के लिए मजबूर करना और जबड़े के एक तरफ से दूसरी तरफ रॉड छिदवाना।
देशव्यापी अंधविश्वास और काला जादू अधिनियम की आवश्यकता क्यों:
- इस तरह की प्रथाओं को अनुमति देना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत किसी व्यक्ति के समानता के मौलिक अधिकार और जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।
- इस तरह की प्रथाएं महिलाओं, बच्चों और गरीबों सहित समाज के कमजोर वर्गों को एकतरफा तरीके से लक्षित करती हैं।
- यदि अंधविश्वास का मुकाबला करने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाये जाते हैं तो इसकी वजह से समाज में अतार्किक और अवैज्ञानिक प्रथाओं जैसे धार्मिक उपचार, नीमहकीम और चिकित्सा उपचार के बारे में दुष्प्रचार भी बढ़ सकता है, जिसका नागरिकों के स्वास्थ्य और सार्वजनिक व्यवस्था पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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सारांश:
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संपादकीय-द हिन्दू
संपादकीय:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित
अंतरराष्ट्रीय संबंध:
अमेरिका की बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति जारी:
विषय: भारत के हित पर विकसित देशों की नीतियों का प्रभाव।
प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (NSS)
मुख्य परीक्षा: अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति
संदर्भ:
- अमेरिका ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति जारी की।
विवरण:
- संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (NSS) जारी की है। गोल्डवाटर-निकोल्स डिपार्टमेंट ऑफ़ डिफेंस रीऑर्गनाइजेशन एक्ट 1986 के अनुसार, प्रत्येक अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपना NSS तैयार करें और राष्ट्रीय सुरक्षा के संबंध में कार्यपालिका के दृष्टिकोण को विधायी निकाय को संप्रेषित करें।
- राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (NSS) राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंडे के संबंध में सरकार के विचारों को दर्शाता है।
- इसके अलावा, यह कांग्रेस को निवेश क्षेत्रों और समग्र व्यय का आकलन करने का अवसर भी देता है जिसे देश को राष्ट्रीय सुरक्षा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए वहन करना होगा।
नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति:
- नव प्रस्तावित NSS में प्रमुख रूप से वर्तमान दशक पर एक ‘निर्णायक’ के रूप में ध्यान केंद्रित किया गया है जहां अमेरिका अपने वैश्विक नेतृत्व को बनाए रखने, अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार, और साझेदारी और गठबंधनों के एक विशाल और अच्छे नेटवर्क के निर्माण के लिए तत्पर है।
- यह चीन और रूस का मुकाबला क्रमशः अपने रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी और विघ्नकर्ता के रूप में मुकाबला करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य अपने लोकतंत्र की रक्षा करना और अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना है।
- इसके अलावा, यह वर्तमान प्रशासन के महत्वाकांक्षी एजेंडे को चित्रित करता है, व्यापक रूप से अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों को कवर करता है, और घरेलू मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जोड़ता है। इनमें खाद्य असुरक्षा, मुद्रास्फीति, जलवायु परिवर्तन, महामारी, ऊर्जा सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दे शामिल होंगे। इन मुद्दों के अलावा, बाह्य अंतरिक्ष सुरक्षा और शासन पर भी पर्याप्त ध्यान दिया गया है।
- नए NSS के तीन मुख्य आधार इस प्रकार हैं:
- निवेश: यह रणनीति घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करके, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को उन्नत करके और माइक्रोचिप्स और सेमीकंडक्टर्स जैसी प्रौद्योगिकियों में निवेश करके “प्रभाव और शक्ति के उपकरण” में निवेश पर केंद्रित है।
- सृजन: इसका उद्देश्य वैश्विक भू-राजनीति को एकतरफा नियंत्रित करने में संयुक्त राज्य अमेरिका की महत्वाकांक्षाओं और सीमाओं दोनों को समझते हुए ‘देशों का सबसे मजबूत संभव गठबंधन’ बनाना है।
- आधुनिकीकरण: आधुनिकीकरण में आंतरिक और बाहरी सुरक्षा मांगों को एक साथ पूरा करने का प्रयास है।
- NSS को जारी करने से प्राप्त तीन व्यापक उद्देश्य इस प्रकार हैं:
- यह अंतरिम राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीतिक मार्गदर्शन (मार्च 2021 में सार्वजनिक) के रणनीतिक दृष्टिकोण को पूरा करता है।
- यह वर्तमान प्रशासन के अन्य नीतिगत उपायों पर बेहतर स्पष्टता और विनियमन प्रदान करता है।
- यह आगे अमेरिका में महत्वपूर्ण राष्ट्रपति सिद्धांतों पर सभी अटकलों को समाप्त करता है।
- यह मध्यावधि चुनाव (नवंबर 2022) के समय आया है और नीतिगत स्पष्टता के कारण चुनावों को प्रभावित कर सकता है।
- इसके सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक अमेरिकी रक्षा विभाग की रणनीति को सूचित करना है, विशेष रूप से दो प्रमुख क्षेत्रों- परमाणु उपयोग और मिसाइल रक्षा में। यद्यपि रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine war) के कारण NSS के सामने आने में देरी हुई थी, फिर भी इसने परमाणु हथियारों के शक्तिशाली उपयोग के बारे में उपयोगी सबक प्रदान किया है, जिसका अंतिम बार क्यूबा मिसाइल संकट (1962) में उपयोग किया गया था।
- अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में न्यूक्लियर पोस्चर रिव्यू, राष्ट्रीय रक्षा रणनीति और मिसाइल डिफेंस रिव्यु भी जारी की, जिससे NSS के मूल विचार को मजबूती मिली।
चीन-रूस चुनौती:
- NSS चीन से उभरती चुनौतियों और खतरों पर तत्काल और दीर्घकालिक दोनों तरह से विचार करता है। यद्यपि इसने चीन को मात देकर और रूस को प्रतिबंधित करके बाहरी चुनौतियों से निपटने के लिए एक संयुक्त रणनीति की रूपरेखा तैयार की है, लेकिन उसका लक्ष्य चीन की ओर अधिक झुका हुआ है।
- वर्तमान सरकार चीन को अपने दशकीय दृष्टिकोण की धुरी पर रखती है। चीन की मौजूदगी विश्व स्तर पर बढ़ रही है और विशेष रूप से भारत-प्रशांत क्षेत्र में विकास, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, वैश्विक शासन और कूटनीति जैसे आयामों में स्पष्ट है।
- इस दस्तावेज़ में चीन को ‘एकमात्र प्रतियोगी’ के रूप में नामित किया गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मौलिक रूप से बदलने की क्षमता और इरादे वाला बताया गया है।
- NSS में चीन द्वारा ताइवान की स्थिति में एकतरफा बदलाव का भी स्पष्ट विरोध किया गया है। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों और साझेदारी के माध्यम से सामूहिक क्षमता का निर्माण करना इसका ध्येय है।
- नई रणनीति रूसी अर्थव्यवस्था को कम करने, वैश्विक प्रभाव, सैन्य और सॉफ्ट पावर के लिए भी एक विचारशील मामला है। इसमें उभरते अंतराल को भरने के लिए भारत और जापान जैसे देशों की भी बात की गई है।
- यह G7 जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मंचों में भारत के एकीकरण का भी संकेत देता है। हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ये भारत-प्रशांत भागीदारों की महत्वाकांक्षाओं के बजाय अमेरिका के हितों को दर्शाते हैं।
NSS में भारत के आयाम:
- NSS में एक प्रमुख रक्षा भागीदार और सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत के महत्व के अलावा इसे भारत-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय और बहुपक्षीय भागीदार के रूप में दिखाया गया है।
- इसमें क्वाड (Quad-ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान, अमेरिका) और I2U2 ( I2U2 -इज़राइल, भारत, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका) के माध्यम से अमेरिका-भारत साझेदारी को महत्व दिया गया है।
संबंधित लिंक:
Strategic Importance of Indo Pacific: RSTV – Big Picture
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सारांश:
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प्रीलिम्स तथ्य:
1. गंगा डॉल्फ़िन:
सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:
जैव विविधता:
विषय: जैव विविधता और संरक्षण
प्रारंभिक परीक्षा: भारत का राष्ट्रीय जलीय पशु।
संदर्भ:
- पानी की गुणवत्ता में सुधार होते ही डॉल्फ़िन ने गंगा नदी में फिर से प्रजनन करना शुरू कर दिया है।
विवरण:
- स्वच्छ गंगा हेतु राष्ट्रीय मिशन (National Mission for Clean Ganga (NMCG)),जो सरकार की प्रमुख योजना नमामि गंगे को लागू करती है, डॉल्फ़िन को बचाने के लिए कुछ पहल कर रही है।
- नमामि गंगे कार्यक्रम से नदी के पानी की गुणवत्ता में सुधार संभव हुआ जिसके साथ ही डॉल्फ़िन गंगा में वापस आने लगी हैं।
- वर्तमान में, उत्तर प्रदेश में गंगा में डॉल्फ़िन की आबादी लगभग 600 की संख्या होने का अनुमान है।
- जलीय जीवन नदी पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य का सूचक है। चूंकि गंगा की डॉल्फिन खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर है, अतः प्रजातियों और उसके आवास की रक्षा करने से नदी के जलीय जीवन का संरक्षण सुनिश्चित होगा।
- उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में योजना के कार्यान्वयन के बाद से नमामि गंगे परियोजना के तहत 23 परियोजनाओं को पूरा किया है।
- वर्ष 2014 से 2022 के दौरान उत्तर प्रदेश में 20 स्थानों पर नदी के पानी की गुणवत्ता के आकलन से पता चला है कि घुलित ऑक्सीजन (dissolved oxygen (DO)), जैव रासायनिक मांग (biochemical demand (BOD) ) और फेकल कोलीफॉर्म (faecal coliform (FC)) जैसे मापदंडों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
- इस कार्यक्रम के तहत उत्तर प्रदेश ने गंगा में 460 एमएलडी (million litres a day) से अधिक सीवेज के प्रवाह को रोक दिया था।
गंगा में डॉल्फ़िन को खतरा:
- सीवेज और उद्योगों से निकले गंदे पानी के बहने के कारण गंगा नदी प्रदूषित हो गई और जैव विविधता, विशेष रूप से गंगा डॉल्फ़िन (Ganga Dolphins) वहां से गायब होने लगी।
- बांध निर्माण और अन्य सिंचाई से संबंधित परियोजनाएं उन्हें अंतःप्रजनन और अन्य खतरों के प्रति संवेदनशील बनाती हैं क्योंकि वे नए क्षेत्रों में नहीं जा सकते हैं।
- एक बांध के नीचे/तले में मौजूद डॉल्फ़िन को भारी प्रदूषण, मछली पकड़ने की गतिविधियों में वृद्धि और पोत यातायात से खतरा उत्पन्न हो जाता है।
- बांध मछली और अन्य शिकार के प्रवास, प्रजनन चक्र और आवास को बाधित करते हैं जो कि डॉल्फ़िन को उनके भोजन स्रोत से वंचित कर देते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य:
1. दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान:
- दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में पराली जलाने (stubble burning) की हिस्सेदारी/योगदान 30 अक्टूबर 2022 को बढ़कर 26% हो गई, जो इस साल सबसे ज्यादा है।
- दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ (‘very poor) श्रेणी में रही है।
- अक्टूबर में लंबे समय तक बारिश और धीमी हवाओं के कारण दिल्ली के वायु प्रदूषण पर पराली जलाने का प्रभाव पहले (7% पर) कम था।
- दिल्ली प्रशासन ने प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों को नियंत्रित करने के लिए पानी के छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन जैसे स्थानीय उपायों का सहारा लिया है।
- सर्दियों के मौसम के दौरान, आमतौर पर बायोमास जलने और वाहनों के प्रदूषण और धूल जैसे स्थानीय कारकों के कारण शहर के प्रदूषण स्तर में वृद्धि होती है।
- ये कारक, मौसम संबंधी स्थितियों जैसे हवा की गति या दिशा में परिवर्तन के साथ मिलकर प्रदूषण के स्तर में और वृद्धि करते हैं।
- दिल्ली में वायु प्रदूषण पर अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Air Pollution in Delhi
2.राष्ट्रीय एकता दिवस 2022:
- नेशनल यूनिटी डे (National Unity Day) जिसे राष्ट्रीय एकता दिवस भी कहा जाता है, सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को मनाया जाता है।
- इस वर्ष (2022) सरदार वल्लभ भाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) की 147वीं जयंती है।
- यह दिवस देश के लिए उनके द्वारा किये गए असाधारण कार्यों को याद कर ‘भारत के लौह पुरुष’ को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से वर्ष 2014 में पहली बार मनाया गया था।
- भारत के केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय एकता दिवस “हमारे देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए वास्तविक और संभावित खतरों का सामना करने के लिए हमारे राष्ट्र की अंतर्निहित ताकत और लचीलापन की पुष्टि करने का अवसर प्रदान करता हैं।”
- यहां तक कि एक पुरस्कार भी राष्ट्रीय एकता दिवस को समर्पित किया गया है ताकि देश के लिए व्यक्तियों द्वारा किए गए योगदान से राष्ट्र को प्रेरित किया जा सके।
3. C-295 परिवहन विमान:
- प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अक्टूबर, 2022 को गुजरात के वडोदरा में C-295 विमान निर्माण संयंत्र की आधारशिला रखी।
- टाटा-एयरबस कंसोर्टियम भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए इस परिवहन विमान का निर्माण करेगा।
- यह अपनी तरह की पहली परियोजना है जिसमें एक निजी कंपनी द्वारा भारत में एक सैन्य विमान का निर्माण किया जाएगा।
- ऐसा भी पहली बार हुआ है कि C-295 विमान यूरोप के बाहर निर्मित किए जाएंगे।
- सितंबर 2021 में, भारत ने IAF के पुराने एवरो -748 विमानों (जो 1960 के दशक की शुरुआत में सेवा में आया था) को बदलने के उद्देश्य से 56 C-295 विमान खरीदने के लिए एयरबस डिफेंस एंड स्पेस के साथ 21,935 करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे।
- C-295MW 5 से 10 टन क्षमता और 480 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति वाला एक परिवहन विमान है।
- इसमें त्वरित प्रतिक्रिया और सैनिकों और कार्गो के पैरा-ड्रॉपिंग के लिए एक रियर रैंप दरवाजा है।
- अर्ध-तैयार सतहों से शार्ट टेक-ऑफ और लैंडिंग इसकी कुछ अन्य विशेषताएं हैं।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर-मध्यम)
- जब कोई राज्य किसी मामले की जांच के लिए CBI को सामान्य सहमति प्रदान करता है, तो इस एजेंसी को जांच के संबंध में या हर मामले के लिए हर बार उस राज्य में प्रवेश करने पर नई अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती है।
- राज्य सरकार द्वारा सहमति की वापसी, यदि कोई हो, को भूतलक्षी (retrospectively) रूप से नहीं, बल्कि भविष्यलक्षी प्रभाव से (prospectively) प्रभावी किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से गलत है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) दोनों
(d) इनमें से कोई भी नहीं
उत्तर: d
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: CBI (CBI ) को राज्य सरकार की सहमति या तो केस-विशिष्ट या सामान्य हो सकती है।
- आम तौर पर राज्यों द्वारा अपने राज्यों में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में सीबीआई की मदद करने के लिए आम सहमति दी जाती है।
- यह बाय डिफ़ॉल्ट सहमति है, जिसके अभाव में CBI को हर मामले में यहाँ तक की छोटी-छोटी कार्रवाई करने से पहले भी राज्य सरकार को अनुरोध करना होगा।
- कथन 2 सही है: राज्य सरकार द्वारा सहमति की वापसी, यदि कोई हो, को भूतलक्षी (retrospectively) रूप से नहीं, बल्कि भविष्यलक्षी प्रभाव से (prospectively) प्रभावी किया जा सकता है।
- इसके अलावा, संवैधानिक न्यायालयों द्वारा संदर्भित मामलों में, उस राज्य द्वारा सीबीआई के प्रवेश से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि इसके लिए राज्य की सहमति की आवश्यकता नहीं होती है।
- CBI और राज्यों की सहमति पर अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: CBI and Consent of States
प्रश्न 2. C-295 वायुयान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (स्तर-कठिन)
- C-295 मूल रूप से एक फ्रांसीसी विमान निर्माता द्वारा निर्मित किया गया था, जिसका नाम कंस्ट्रक्शियोनेस एयरोनॉटिकस सा (Construccionaes Aeronauticcas SA) है।
- C-295MW 5 से 10 टन क्षमता एवं 480 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति वाला एक परिवहन विमान है।
विकल्प:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) दोनों
(d) इनमें से कोई भी नहीं
उत्तर: b
व्याख्या:
- कथन 01 गलत है: C-295 मूल रूप से एक स्पेनिश विमान निर्माता द्वारा निर्मित किया गया था, जिसका नाम कंस्ट्रक्शियोनेस एयरोनॉटिकस सा (Construccionaes Aeronauticcas SA) है।
- कथन 02 सही है: C-295MW 5 से 10 टन क्षमता और 480 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति वाला एक परिवहन विमान है। इसमें त्वरित प्रतिक्रिया और सैनिकों और कार्गो के पैरा-ड्रॉपिंग के लिए एक रियर रैंप दरवाजा है।
प्रश्न 3. निम्नलिखित में से किन प्रावधानों में प्रथम संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा संशोधन किया गया था? (स्तर-कठिन)
- इसने राज्य को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार दिया।
- इसके तहत नौवीं अनुसूची में शामिल भूमि सुधार और अन्य कानूनों को न्यायिक समीक्षा से संरक्षण प्रदान करने के लिए यह अनुसूची जोड़ी गई।
- इसके जरिए नागालैंड को राज्य का दर्जा दिया गया और उसके लिए विशेष प्रावधान किए गए।
- इसने जनहित में खाद्य पदार्थों, पशुओं के चारे, कच्चे कपास, कपास के बीज और कच्चे जूट के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करने के लिए संसद को अधिकार दिया।
विकल्प:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2, 3 और 4
(c) केवल 1, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: a
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 (1st Constitutional Amendment Act, 1951) ने राज्य को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान करने का अधिकार प्रदान किया हैं।
- कथन 2 सही है: इसके तहत भूमि सुधार और इसमें शामिल अन्य कानूनों को न्यायिक समीक्षा से बचाने के लिए नौवीं अनुसूची को जोड़ा गया था।
- कथन 3 गलत है: 13वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1962 ने नागालैंड को एक राज्य का दर्जा दिया और इसके लिए विशेष प्रावधान किए थे।
- कथन 4 गलत है: तीसरा संशोधन अधिनियम 1954 के तहत संविधान की सातवीं अनुसूची में संशोधन किया गया तथा संसद को जनहित में खाद्य पदार्थों, पशुओं के चारे, कच्चे कपास, कपास के बीज और कच्चे जूट के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करने का अधिकार प्राप्त हुआ।
प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन से देश खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) का हिस्सा हैं? (स्तर-मध्यम)
- बहरीन
- ईरान
- कुवैत
- ओमान
- कतर
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात
- यमन
विकल्प:
(a) केवल 1, 2, 3, 4, 5 और 6
(b) केवल 1, 3, 4, 5, 6 और 7
(c) केवल 2, 4, 5, 6, 7 और 8
(d) केवल 1, 2, 3, 7 और 8
उत्तर: b
व्याख्या:
- खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council के छह सदस्य सऊदी अरब, कतर, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत हैं।
प्रश्न 5. किसी संगठन या कंपनी द्वारा किए गए व्यय के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (CSE-PYQ-2022) (स्तर-कठिन)
- नई प्रौद्योगिकी प्राप्त करना पूंजीगत व्यय है।
- ऋण वित्तीयन को पूंजीगत व्यय माना जाता है, जबकि इक्विटी वित्तीयन को राजस्व व्यय माना जाता है।
निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
उत्तर: a
व्याख्या:
- कथन 1 सही है: पूंजीगत व्यय से तात्पर्य उस व्यय से है जिससे या तो संपत्ति का निर्माण करता है या सरकार की देयता कम होती है। इसलिए, नई प्रौद्योगिकी प्राप्त करना एक पूंजीगत व्यय माना जाता है क्योंकि यह भविष्य में लाभ उत्पन्न करेगा और नई संपत्ति के निर्माण में मदद करेगा।
- कथन 2 गलत है: राजस्व व्यय को एक संगठन द्वारा व्यवसाय के दिन-प्रतिदिन के कार्यों का प्रबंधन करने के लिए किए गए व्यय के रूप में संदर्भित किया जाता है, जिसमें कर्मचारी मजदूरी, इन्वेंटरी, किराया, बिजली, बीमा, स्टेशनरी, डाक और कर शामिल होते हैं।
- ये ऐसे व्यय हैं जो न तो संपत्ति के निर्माण में मदद करते हैं और न ही किसी व्यवसाय की देनदारियों को कम करने में। यह प्रकृति में आवर्ती है और किसी व्यवसाय या संगठन के दैनिक संचालन को बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक है।
- ऋण वित्तीयन और इक्विटी वित्तीयन को पूंजीगत व्यय के तहत माना जाता है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:
प्रश्न 1. अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति क्या है? इसमें भारत किस स्थान पर आता है? (150 शब्द, 10 अंक) (जीएस 2-अंतर्राष्ट्रीय संबंध)
प्रश्न 2. हाल की घटनाओं के संदर्भ में, क्या भारत में एक केंद्रीय अंधविश्वास विरोधी कानून की आवश्यकता है? (150 शब्द, 10 अंक) (जीएस 2-राजव्यवस्था एवं शासन)