02 नवंबर 2022 : समाचार विश्लेषण

A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

  1. C-295 और भारत का विमान उद्योग:

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E. संपादकीय:

पर्यावरण:

  1. वायु प्रदूषण की लड़ाई में सबसे कमजोर कड़ी:

अर्थव्यवस्था:

  1. ‘द इंडिया स्टोरी’ के बारे में सच्चाई:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. मुदुमलाई टाइगर रिजर्व में आक्रामक पेड़ों का प्रसार:

G. महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. अनिवासी भारतीयों के लिए दूरस्थ मतदान सुविधा पर विचार: सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया:
  2. केसर के खेत पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गए हैं
  3. SCO की बैठक में जयशंकर ने BRI पर निशाना साधा:
  4. मोदी ने मानगढ़ धाम को वैश्विक जनजातीय गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए रोड मैप का आह्वान किया:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

C-295 और भारत का विमान उद्योग:

अर्थव्यवस्था:

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

प्रारंभिक परीक्षा: C-295 विमान से सम्बंधित तथ्य।

मुख्य परीक्षा: भारत के घरेलू विमान विनिर्माण क्षेत्र का महत्व और रुझान।

संदर्भ:

  • भारत के प्रधानमंत्री ने गुजरात के वडोदरा में C-295 विमान की निर्माण सुविधा की आधारशिला रखी, जिसे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस द्वारा स्थापित किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

  • सितंबर 2021 में, रक्षा मंत्रालय (MoD) ने संबद्ध उपकरणों सहित 56 C-295MW विमान के अधिग्रहण के लिए एयरबस डिफेंस एंड स्पेस के साथ 21,935 करोड़ रूपये के सौदे पर सहमति व्यक्त की थी।
  • इन 56 विमानों में से 16 विमानों को सितंबर 2023 से अगस्त 2025 के दौरान स्पेन से फ्लाई-अवे स्थिति में भारत पहुंचाया जाएगा और शेष 40 का निर्माण भारत में नई स्थापित सुविधा में किया जाएगा तथा इन्हें सितंबर 2026 से 2031 के बीच प्रति वर्ष आठ विमान की दर से वितरित किया जाएगा।
  • इसके अलावा टूल, जिग्स और टेस्टर के साथ-साथ 13,400 से अधिक डिटेल पार्ट्स, 4,600 सब-असेंबली और सभी सात प्रमुख कंपोनेंट असेंबलियों का निर्माण भी भारत में किया जाएगा।

C-295MW विमान:

चित्र स्रोत: airbus.com

  • C-295MW विमान 5 से 10 टन क्षमता वाला एक परिवहन विमान है।
  • C-295MW परिवहन विमान हल्के एवं मध्यम श्रेणी में नई पीढ़ी का टैक्टिकल विमान है और इसका इस्तेमाल उन जगहों पर लॉजिस्टिक संचालन करने के लिए किया जा सकता है, जहां भारी विमान पहुँचने में सक्षम नहीं हैं।
  • सबसे पहले इसे स्पेनिश एयरोस्पेस कंपनी CASA द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया था।
  • C-295MW विमान का उपयोग पैराशूट और माल/सामान की आवाजाही, समुद्री गश्त, इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल इंटेलिजेंस, चिकित्सा निकासी आदि जैसे कई मिशनों के लिए भी किया जा सकता है।
  • C-295MW विमान के बारे में और अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: C-295MW Aircraft

इस कदम का महत्व:

  • सरकार द्वारा उठाये गए इस कदम के माध्यम से नई पीढ़ी के C-295MW विमान भारतीय वायु सेना (IAF) में पुराने एवरो विमान (Avro aircraft) की जगह लेंगे, जिन्हें 1960 के दशक में खरीदा गया था।
  • C-295 विमान को AN-32 विमान के संभावित प्रतिस्थापन के रूप में भी देखा जा रहा है, जिसे IAF का वर्कहॉर्स माना जाता है।
  • वडोदरा में स्थापित विनिर्माण सुविधा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करेगी क्योंकि विनिर्माण शुरू होने से पहले 240 से अधिक इंजीनियरों को परियोजना के लिए स्पेन में एयरबस सुविधा में प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • यह कदम घरेलू रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को महत्वपूर्ण गति प्रदान करेगा और इसके परिणामस्वरूप देश भर में एक मजबूत निजी औद्योगिक एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र का विकास होगा।
  • टाटा के अनुसार, इस कदम से वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप भारत भर से 125 से अधिक आपूर्तिकर्ताओं के साथ एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र में 15,000 से अधिक कुशल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

भारत में घरेलू विमान निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में रुझान:

  • विगत 20 वर्षों में, भारतीय कंपनियां (सार्वजनिक और निजी दोनों) रक्षा और एयरोस्पेस उपकरणों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में प्रमुख घटकों की एक विस्तृत श्रृंखला का निर्माण और आपूर्ति करके अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं।
  • उदाहरण के लिए: भारत से बोइंग कंपनी की सोर्सिंग सालाना 1 बिलियन डॉलर है, जिसमें से 60% से अधिक मैन्युफैक्चरिंग (300 से अधिक आपूर्तिकर्ताओं के नेटवर्क के माध्यम से, जिनमें से 25% सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम हैं) से संबंधित है।
  • इसके अलावा, टाटा अपने AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टर के लिए एयरो-संरचनाओं के निर्माण के लिए बोइंग के साथ एक संयुक्त उद्यम में शामिल है जिसमें फ्यूजलेज, सेकेंडरी स्ट्रक्चर, वर्टिकल फिन स्ट्रक्चर और वर्टिकल स्पर बॉक्स फ्यूजलेज शामिल हैं।
  • टाटा कंपनी बोइंग के CH-47 चिनूक हेलीकॉप्टरों के लिए क्राउन और टेल-कोन भी बनाती है।
  • इसी तरह, लॉकहीड मार्टिन ने हैदराबाद में TASL के साथ संयुक्त उद्यम पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसने C-130J सुपर हरक्यूलिस परिवहन विमान के लिए 180 से अधिक एम्पेनेज का निर्माण किया है और 157 S-92 हेलीकॉप्टर केबिन वितरित किए हैं।
  • भारतीय कंपनियों द्वारा हस्ताक्षरित अन्य संयुक्त उपक्रमों में जटिल लड़ाकू विमान के पंखों का निर्माण भी शामिल है, जिसमें 70% से अधिक डिटेल पार्ट्स का स्वदेशी रूप से उत्पादन किया जाता है।
  • अब तक हस्ताक्षरित संयुक्त उपक्रमों के तहत $600 मिलियन मूल्य का निर्यात किया गया है और भारतीय उद्योग के राजस्व में लगभग $200 मिलियन का योगदान दिया गया है।
  • अमेरिका द्वारा भारत पर निर्यात नियमों के हालिया सरलीकरण ने भी इस क्षेत्र को गति प्रदान की है।

भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र के रुझान:

  • विशेषज्ञों के अनुसार, रक्षा क्षेत्र की तुलना में नागरिक उड्डयन विनिर्माण क्षेत्र में भारत के पास अधिक संभावना है क्योंकि भारत अपने आप में एक प्रमुख बाजार है। एयरबस और बोइंग दोनों अपने नागरिक कार्यक्रमों के लिए भारत से महत्वपूर्ण सोर्सिंग करते हैं।
  • दुनिया के प्रमुख विमान निर्माता जैसे एयरबस और बोइंग अपने नागरिक कार्यक्रमों की मांगों को पूरा करने के लिए भारत से सोर्सिंग कर रहे हैं।
  • एयरबस के अनुसार, वर्तमान में कंपनी द्वारा निर्मित प्रत्येक वाणिज्यिक विमान आंशिक रूप से भारत में डिजाइन और निर्मित होता है। एयरबस भारतीय आपूर्तिकर्ताओं से यहाँ निर्मित पुर्जे और इंजीनियरिंग सेवाएं भी खरीदता है, जिनकी कीमत हर साल $650 मिलियन से अधिक है।
  • इसके अलावा, इन उद्योग दिग्गजों द्वारा स्थापित प्रशिक्षण केंद्रों में सैकड़ों और हजारों पायलटों और इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

भावी कदम:

  • भारत को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र का घर कहा जाता है और निकट भविष्य में हवाई यातायात के मामले में इसके दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल होने का अनुमान है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अगले 10-15 वर्षों में लगभग 2000 यात्री तथा मालवाहक विमानों की आवश्यकता होगी और इसे देखते हुए भारत के पास रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) संचालन के लिए एक क्षेत्रीय केंद्र बनने का अवसर है।
  • हालांकि निजी रक्षा क्षेत्र अभी भी अपने प्रारंभिक चरण में है और यह ध्यान देने योग्य तथ्य है कि एक अनुकूल और स्थिर नियामक तथा नीतिगत वातावरण अपेक्षित लक्ष्यों को प्राप्त करने की कुंजी होगी।

सारांश:

  • आज जब भारत “मेक इन इंडिया” और “मेक फॉर द ग्लोब” की दृष्टि से आगे बढ़ रहा है, ऐसे समय में देश में C-295 विमान के लिए विनिर्माण सुविधा की स्थापना को वैश्विक विमान विनिर्माण क्षेत्र में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि यह पहली बार है जब कोई निजी कंपनी भारत में एक पूर्ण विमान का निर्माण करेगी।

संपादकीय-द हिन्दू

संपादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

पर्यावरण:

वायु प्रदूषण की लड़ाई में सबसे कमजोर कड़ी:

विषय: पर्यावरण संरक्षण।

मुख्य परीक्षा: वायु प्रदूषण और संबंधित चिंताएं।

प्रारंभिक परीक्षा: राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

विवरण:

  • वायु प्रदूषण के मुद्दे से निपटने के लिए भारत में कई महत्वपूर्ण नियामक हैं। राज्यों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदूषण नियंत्रण समितियां (PCCs) इन नियामकों में शामिल हैं।
  • इनका मुख्य कार्य उद्योगों और विद्युत संयंत्रों जैसे बिंदु स्रोतों से उत्सर्जन को विनियमित करना है जो शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वायु प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैं।
  • ये नियामक राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme) के तहत निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए शहरों का मार्गदर्शन करते हैं और साथ ही वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए वित्त आयोग द्वारा दिए गए अनुदान का उपयोग भी करते हैं। इस प्रकार, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि स्वच्छ वायु के साथ बेहतर भविष्य के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उच्चतम स्तर पर प्रदर्शन करना चाहिए।
  • राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का गठन पूर्व में जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के दायरे में किया गया था। वायु गुणवत्ता प्रबंधन को शामिल करने के लिए वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 (Air (Prevention and Control of Pollution) Act, 1981) के तहत राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका और कार्यों का विस्तार किया गया। इसके अलावा, कई अन्य पर्यावरण कानूनों के अधिनियमन के साथ, इसके कार्यों का और अधिक विस्तार किया गया।
  • वायु प्रदूषण के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: National Clean Air Programme – NCAP Full Form. Significance, Ministry, etc. for IAS.

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित मुद्दे:

  • बोर्डों की क्षमता उनकी बढ़ी हुई भूमिका से मेल नहीं खाती है।
  • बोर्ड अपने वैधानिक कार्यों के निर्वहन में अप्रभावी हो गए हैं। पूरे भारत में वायु गुणवत्ता और जल गुणवत्ता जैसे पर्यावरणीय संकेतकों में गिरावट इसका स्पष्ट उदाहरण है।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खराब प्रदर्शन के कारण और इसके निहितार्थ:

  • सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च ने निम्नलिखित कारणों की पहचान की है जो राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के प्रदर्शन में निरंतर बाधा डाल रहे हैं।
  • राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संरचना और हितों का टकराव:
    • बोर्ड में एक अध्यक्ष और एक सदस्य-सचिव के साथ निकाय के प्रमुख के रूप में कई सदस्य शामिल होते हैं। बहु-सदस्यीय निकाय के निर्णय और नीतियां संगठन के दैनिक कामकाज का मार्गदर्शन करती हैं।
    • राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संरचना गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि अधिकांश राज्यों में विशेषज्ञों और महत्वपूर्ण हितधारकों की कमी है।
    • विश्लेषण किए गए दस राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों/प्रदूषण नियंत्रण समितियों के बोर्ड सदस्यों में से लगभग 50% में स्थानीय प्राधिकरण, सार्वजनिक क्षेत्र के निगम और उद्योग (सभी संभावित प्रदूषक हैं) शामिल हैं। ये राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियामक उपायों के अधीन हैं और इनकी विशाल उपस्थिति हितों के टकराव के मुद्दे को जन्म देती है।
    • इसके अलावा, शिक्षाविदों, चिकित्सकों और वैज्ञानिकों की बोर्ड में केवल 7% हिस्सेदारी है। कई बोर्ड वायु गुणवत्ता प्रबंधन का ज्ञान और अनुभव रखने वाले कम से कम दो बोर्ड सदस्यों की वैधानिक आवश्यकता को भी पूरा नहीं करते हैं।
    • भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण के और इसके कारणों के कारण, बहु-विषयक विशेषज्ञता होना बहुत जरूरी है। वायु प्रदूषण नीति तैयार करते समय स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का नेतृत्व:
    • राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का नेतृत्व अध्यक्ष और सदस्य सचिव द्वारा किया जाता है। लेकिन इनका कार्यकाल लंबा, पूर्णकालिक और स्थायी नहीं है।
    • ऐसा देखा गया है कि कई राज्यों में, इन दो पदों पर आसीन व्यक्तियों के पास अन्य सरकारी विभागों में भी अतिरिक्त प्रभार होता है।
    • उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि कई अध्यक्षों/सदस्य सचिवों का कार्यकाल एक वर्ष से भी कम रहा है। उदाहरण के लिए, छत्तीसगढ़ के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष का कार्यकाल 18 दिन और हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों में सदस्य सचिव का कार्यकाल 15 दिनों का रहा है।
    • इस तरह के छोटे कार्यकाल और कई कार्यों के परिणामस्वरूप, वायु प्रदूषण को कम करने के लिए दीर्घकालिक नीति नियोजन, रणनीतिक हस्तक्षेप और प्रभावी कार्यान्वयन अत्यंत कठिन हो जाता है।
  • मौजूदा रिक्तियां:
    • देश भर के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों में कर्मचरियों की भारी कमी है। आंकड़ों से पता चला है कि 9 राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों/प्रदूषण नियंत्रण समितियों में सभी स्वीकृत पदों में से लगभग 40% रिक्त हैं।
    • तकनीकी पदों पर रिक्तियां झारखंड में 84 फीसदी और बिहार और हरियाणा में करीब 75 फीसदी हैं।
    • भारी रिक्तियों का प्रदूषण विनियमन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है क्योंकि औद्योगिक अनुपालन की निगरानी, उल्लंघन के मामले में प्रवर्तन कार्रवाई शुरू करने और मानक निर्धारित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रायः पीछे छूट जाते हैं।
    • कर्मचारियों की कम संख्या कमजोर नियामक समीक्षा और अपर्याप्त प्रभाव आकलन का भी कारण बनती है। उदाहरण के लिए, बिहार, पंजाब, झारखंड और उत्तर प्रदेश के इंजीनियरों को अपने उच्च कार्यभार के कारण प्रत्येक सहमति आवेदन (consent application) का निरीक्षण, मूल्यांकन और उस पर निर्णय लेने के लिए एक दिन से भी कम समय मिलता है।

संबंधित लिंक:

CPCB – Central Pollution Control Board. Notes for UPSC 2021. Download PDF.

सारांश:

पर्यावरणीय मुद्दों पर बोर्डों के विशाल अधिदेश को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन में निरंतर और पर्याप्त लाभ प्राप्त करने के लिए उचित और उपयुक्त क्षमता, विशेषज्ञता और दूरदृष्टि की आवश्यकता है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

‘द इंडिया स्टोरी’ के बारे में सच्चाई:

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था।

मुख्य परीक्षा: भारत का आर्थिक प्रदर्शन

संदर्भ:

  • भारत की घटती विकास दर।

पिछले कुछ वर्षों में भारत का आर्थिक प्रदर्शन:

  • भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय ऐसी ‘अवस्था में’ है, जहाँ यह न तो बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही है और न ही बहुत खराब।
  • हालांकि भारतीय रुपये की विनिमय दर बहुत खराब है और मुद्रास्फीति 7.41% है। ऐसा वैश्विक घटनाओं के कारण हैं और लगभग सभी मुद्राएं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरावट का सामना कर रही हैं।
  • रोजगार सृजन के मामले में भारत का प्रदर्शन खराब है। बेरोजगारी दर 7.8% है। विश्व बैंक द्वारा एकत्रित और प्रस्तुत किए गए अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ( International Labour Organization (ILO)) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में युवा बेरोजगारी (15 से 24 वर्ष के आयु वर्ग के लिए) 28.3% है। इस प्रतिशत के साथ भारत ईरान (27.2%), मिस्र (24.3%) और सीरिया (26.2%) जैसे अशांत पश्चिम एशियाई देशों के समूह में है और इंडोनेशिया (16%), मलेशिया (15.6%) तथा बांग्लादेश (14.7%) जैसे कई एशियाई देशों की तुलना में बहुत खराब स्थिति में है।
  • वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 8.7% थी, जो दुनिया में सबसे ज्यादा थी। लेकिन यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह वृद्धि महामारी के दौरान हुई वृद्धि के सापेक्ष है। वर्ष 2020-21 में, यह -6.6% थी, जिससे भारत वैश्विक विकास चार्ट में निचले पायदान पर था।
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) ने वर्ष 2022-23 के लिए भारत के विकास के अनुमान को घटाकर 6.1% कर दिया है। इससे जुड़ी दो चिंताएं हैं:
    • अधिकांश वृद्धि टॉप एंड पर हो रही है। उच्च बेरोजगारी दर के साथ, जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण अनुपात वास्तव में नकारात्मक वृद्धि का अनुभव कर रहा है।
    • एक और चिंता पिछले प्रदर्शन की तुलना में भारत लगातार गिरता प्रदर्शन है।

भारत के आर्थिक वृद्धि की कहानी:

  • स्वतंत्रता के बाद, लगभग चार दशकों तक भारत की वृद्धि दर बहुत कम थी। 1991-93 के आर्थिक सुधारों के कारण 1990 के दशक में इसकी वृद्धि दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
  • वर्ष 2003 में, इसमें और सुधार हुआ तथा भारत एशियाई सुपर परफॉर्मर्स (शानदार प्रदर्शन करने वाले देशों की श्रेणी में) की श्रेणी में शामिल हो गया। वर्ष 2005 से 2008 तक, भारत ने अधिकांश चार्टों में शीर्ष स्थान हासिल किया और लगातार तीन वर्षों तक इसकी वृद्धि दर क्रमशः 9.3%, 9.2% और 10.2% रही। हालांकि, इन वर्षों में वृद्धि दर के बारे में आधिकारिक भारतीय अनुमानों को संशोधित किया गया है। नवीनतम आर्थिक सर्वेक्षण में इन वृद्धि दरों को संशोधित करके क्रमशः 7.9%, 8.0% और 8.0% किया गया है।
  • इस गिरावट के बावजूद, भारत वर्ष 2003 से 2011 तक वैश्विक रैंकिंग में शामिल था (2008-09 की महामंदी को छोड़कर)।
  • भारत में आर्थिक मंदी कोविड-19 महामारी ( COVID-19 pandemic.) से बहुत पहले शुरू हो गई थी। यह वर्ष 2016 में शुरू हुई थी और लगातार चार वर्षों तक, साल-दर-साल वृद्धि दर पिछले वर्ष की तुलना में निरंतर कम रही थी। निम्न तालिका में वर्ष 2016 से 2021 तक भारत की वृद्धि दर को दर्शाया गया है।

वर्ष

भारत की वृद्धि दर

2016-17

8.3%

2017-18

6.9%

2018-19

6.6%

2019-20

4.8%

2020-21

-6.6%

  • वर्ष 1947 के बाद पहली बार लगातार चार वर्षों तक वृद्धि दर में गिरावट आई है।

आर्थिक सुधारों के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: UPSC GS 3 Notes: Economic Reforms Of 1991

भारत की निवेश दर:

  • पिछले छह वर्षों में भारत के खराब प्रदर्शन के पीछे प्रमुख कारणों में से एक कम निवेश दर है।
  • निवेश दर राष्ट्रीय आय का वह अंश है जो बुनियादी ढांचे के विकास जैसे सड़कों, पुलों, कारखानों और मानव पूंजी पर खर्च किया जाता है।
  • कई वर्षों तक भारत में निवेश की दर कम रही जो धीमी वृद्धि दर में तब्दील हो गई। वर्ष 2004-05 में निवेश दर धीरे-धीरे बढ़ी और 30% को पार कर गई। वर्ष 2007-08 में यह 39.1% पर पहुंच गई। यह पहली बार था जब भारत सुपर परफॉर्मर्स (सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले देश) की तुलना में तेजी से आगे बढ़ रहा था।
  • इसके बाद 6 साल तक निवेश दर 40% से थोड़ा कम ही रही तथा फिर धीरे-धीरे और कम होने लगी। यह वर्ष 2019-20 तक घटकर 32.2% हो गई थी।
  • देश में निवेश दर को प्रभावित करने वाले मौद्रिक और राजकोषीय नीति जैसे कई कारक हैं। यह सामाजिक और राजनीतिक कारकों पर भी निर्भर करती है। अर्थव्यवस्था में विश्वास का स्तर भी निवेश दर निर्धारित करता है।

भावी कदम:

  • नीति में कुछ अमीर निगमों को प्राथमिकता देने के बजाय किसानों, छोटे व्यवसायों और साधारण मजदूरों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए जो आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
  • इसके अलावा, कुछ ऐसे राजकोषीय नीतिगत हस्तक्षेप किए जाने चाहिए जो आय को समाज के गरीब वर्गों में स्थानांतरित कर सके। यह एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारत में असमानता तेजी से बढ़ी है।
  • आम जनता के बीच विश्वास पैदा करना और समावेशी विकास पर अधिक ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है।

संबंधित लिंक:

Highlights of Economic Survey 2022

सारांश:

  • भारत ने अतीत में मिश्रित आर्थिक विकास का देखा है। ऐसी स्थिति में इसे अपने पिछले अनुभव से सीखना चाहिए और वर्ष 2016 के बाद से वृद्धि दर में गिरावट की प्रवृत्ति को उत्क्रमित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। क्योंकि आज भारत के पास मजबूत बुनियादी ढांचे और प्रचुर प्रतिभा की वजह से उसके समक्ष विशाल आर्थिक संभावना के द्वार खुले हुए हैं।

प्रीलिम्स तथ्य:

1.मुदुमलाई टाइगर रिजर्व में आक्रामक पेड़ों का प्रसार:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

पर्यावरण:

विषय: पर्यावरण और जैव विविधता

प्रारंभिक परीक्षा: सेना स्पेक्टैबिलिस एवं मुदुमलाई टाइगर रिजर्व से सम्बंधित तथ्य।

संदर्भ:

  • ऐसा कहा जा रहा है कि सेना स्पेक्टैबिलिस (Senna spectabilis) नामक एक आक्रामक पौध प्रजाति तमिलनाडु के मुदुमलाई टाइगर रिजर्व (Mudumalai Tiger Reserve ) के बफर जोन के 800 से 1,200 हेक्टेयर क्षेत्र पर फ़ैल गई है।

विवरण:

  • हाल के वर्षों में मुदुमलाई टाइगर रिजर्व में सेना स्पेक्टैबिलिस के चमकीले पीले फूल अधिक प्रमुखता से देखे जा रहे हैं।
  • संरक्षणवादियों के अनुसार, इस आक्रामक पौध प्रजाति का स्थानीय जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है क्योंकि यह देशी प्रजातियों को वहां उगने नहीं देता है और वन्यजीवों के लिए भोजन की उपलब्धता को सीमित कर देता है।
  • सेना स्पेक्टैबिलिस और लैंटाना कैमरा उन पांच प्रमुख आक्रामक खरपतवारों में शामिल हैं, जो नीलगिरि के जंगलों में व्यापक रूप से फ़ैल गए हैं और स्थानीय जैव विविधता को प्रभावित कर रहे हैं।
  • नीलगिरी (यूकेलिप्टस) और देवदार के वृक्षों को भी विदेशी और आक्रामक प्रजाति माना जाता है लेकिन ये अन्य प्रजातियों की तरह तेजी से नहीं फैलते हैं और इन्हें प्रबंधित करना आसान होता है।
  • वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, तमिलनाडु न्यूजप्रिंट एंड पेपर्स लिमिटेड (TNPL) द्वारा कागज बनाने के लिए सेना स्पेक्टैबिलिस की लकड़ी का उपयोग करने की संभावनाओं पर नीति-स्तरीय चर्चा हो रही है और लैंटाना कैमरा को व्यवस्थित रूप से हटाने के लिए वन विभाग द्वारा 10 साल की योजना तैयार करने के प्रयास चल रहे हैं।
  • विदेशी या आक्रामक प्रजातियों के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Alien or Invasive species

सेना स्पेक्टैबिलिस (Senna spectabilis):

चित्र स्रोत: india.wcs.org

  • सेना स्पेक्टैबिलिस (Senna spectabilis) फैबेसी (Fabaceae) परिवार से संबंधित एक विदेशी पौध प्रजाति है।
  • सेना स्पेक्टैबिलिस दक्षिण एवं मध्य अमेरिका और उष्णकटिबंधीय अमेरिका के अन्य हिस्सों के लिए देशज प्रजाति है।
  • सेना स्पेक्टैबिलिस का उपयोग सजावटी पेड़ के रूप में किया जाता है और इसकी लकड़ी का उपयोग ईंधन के लिए भी किया जाता है।
  • यह प्रजाति अपने चमकीले पीले फूलों के लिए जानी जाती है जो गर्मियों के महीनों में खिलते हैं और इसलिए इसे “गोल्डन वंडर ट्री” भी कहा जाता है।
  • सेना स्पेक्टैबिलिस का उपयोग आमतौर पर पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है और इसे जीवाणुरोधी, एंटीबायोफिल्म, एंटिफंगल और एंटीऑक्सिडेंट गुणों के लिए जाना जाता है।
  • हालाँकि, भारत, ऑस्ट्रेलिया, युगांडा और क्यूबा जैसे स्थानों में सेना स्पेक्टैबिलिस को एक आक्रामक प्रजाति माना जाता है क्योंकि यह बहुत कठोर चरम परिस्थितियों में भी जीवित रहती है और इसे किसी भी एक परिदृश्य/स्थान से पूरी तरह से समाप्त करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है क्योंकि इस कार्य में वर्षों लग सकते हैं।
  • ग्लोबल कम्पेंडियम ऑफ वीड्स द्वारा इसे एक पर्यावरणीय खरपतवार माना जाता है क्योंकि यह बहुत तेजी से फलता-फूलता है और काटने पर शीघ्रता से बढ़ता है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

1.अनिवासी भारतीयों के लिए दूरस्थ मतदान सुविधा पर विचार: सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया:

  • केंद्र सरकार ने कहा है कि वह चुनावी प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करते हुए अनिवासी भारतीयों (non-resident Indians (NRI)) को दूरस्थ रूप से मतदान करने की सुविधा प्रदान करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है।
  • सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने प्रारंभ में कहा था कि देश भर में दूर-दराज के इलाकों में तैनात सैनिकों को पोस्टल बैलेट की सुविधा प्रदान करना उन लोगों को समान विकल्प देने से अलग था, जिन्होंने विदेश में रहने का विकल्प चुना था। हालांकि, अदालत ने माना कि सिर्फ मतदान करने के लिए भारत आना प्रवासी मजदूरों के लिए मुश्किल है।
  • शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार इस मुद्दे से अवगत थी और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया था जो विदेशी नागरिकों को प्रॉक्सी द्वारा मतदान करने की सुविधा प्रदान करता है लेकिन 16वीं लोकसभा के विघटन के साथ यह बिल व्यपगत हो गया।
  • प्रवासी भारतीयों को विदेशों से मतदान करने की अनुमति देने के कदम से कई प्रवासी मजदूरों को मदद मिल सकती है, जिनमें ज्यादातर केरल, तमिलनाडु और देश के उत्तरी हिस्सों से हैं। ये देश की चुनावी राजनीति में एक निर्णायक शक्ति बन सकते हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित डाक मतपत्र प्रणाली या ETPBS से सम्बंधित अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Electronically Transmitted Postal Ballot System or ETPBS

2. केसर के खेत पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गए हैं

  • जम्मू-कश्मीर के पर्यटन विभाग ने केसर की खेती की प्रक्रिया से अवगत कराने के लिए पंपोर के लधू क्षेत्र में आयोजित केसर उत्सव में शामिल होने के लिए छात्रों और स्थानीय किसानों को आमंत्रित किया है।
  • केसर एक शाही मसाला है जो एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर है और जम्मू-कश्मीर के लगभग 226 गांवों में रहने वाले 30,000 से अधिक परिवार इस मसाले के कारोबार से जुड़े हैं।
  • सोशल मीडिया रील बनाने और अनोखे अनुभवों के लिए पर्यटकों को आकर्षित करने हेतु दक्षिण कश्मीर के पंपोर के छात्रों ने पारंपरिक पोशाक पहनी और 16 वीं शताब्दी के कश्मीरी कवि और रानी हब्बा खातून के रूप को पुनर्जीवित किया।
  • पंपोर क्षेत्र में करेवा (karewas) (ऊंचा पठार) क्षेत्र देश के सबसे महंगे मसालों में से एक की खेती के लिए प्रसिद्ध है।

3. SCO की बैठक में जयशंकर ने BRI पर निशाना साधा:

  • भारत के विदेश मंत्री ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की एक आभासी बैठक में यह कहकर चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव ( Belt and Road Initiative (BRI))) को लक्षित किया कि “कनेक्टिविटी परियोजनाओं को संप्रभुता के मुद्दों का सम्मान करना चाहिए”।
  • विदेश मंत्री ने ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह (Chabahar port ) और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन ( International North South Transport (INST) ) गलियारे (भारत भी इसका एक सदस्य है) के माध्यम से व्यापार बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा। विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत का लक्ष्य मध्य एशियाई देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार में सुधार करना है।
  • गौरतलब है कि भारत ने BRI में शामिल होने से इनकार कर दिया था और BRI एवं पाकिस्तान के माध्यम से व्यापार पारगमन के विकल्प के रूप में चाबहार में शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल और INSTC के माध्यम से व्यापार को बढ़ावा दे रहा है।
  • मंत्री ने आगे यह भी कहा कि भारत और SCO सदस्यों के बीच कुल व्यापार केवल 141 अरब डॉलर है और इसे कई गुना तक बढ़ाया जा सकता है। उन्होने कहा कि उचित बाजार पहुंच पारस्परिक रूप से लाभप्रद और आगे बढ़ने का एकमात्र तरीका होगा।
  • मंत्री ने यह भी कहा कि भारत खाद्य संकट से निपटने के लिए SCO सदस्य देशों के साथ अधिक सहयोग (विशेष रूप से बाजरा के संदर्भ में) को बढ़ावा देगा।
  • बैठक में सभी SCO देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा असमर्थित एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों को लागू करने की भी आलोचना की और कहा कि प्रतिबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

4.मोदी ने मानगढ़ धाम को वैश्विक जनजातीय गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए रोड मैप का आह्वान किया:

  • भारत के प्रधानमंत्री ने मानगढ़ धाम को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख पहचान के साथ एक आदिवासी गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए एक रोड मैप तैयार करने का आग्रह किया है।
  • मानगढ़ धाम राजस्थान-गुजरात सीमा के पास स्थित है और 1913 में ब्रिटिश भारतीय सेना द्वारा आदिवासी लोगों के नरसंहार के लिए जाना जाता है।
  • 17 नवंबर, 1913 को मानगढ़ में ब्रिटिश भारतीय सेना द्वारा बंधुआ मजदूरी प्रणाली को खत्म करने और उच्च कृषि करों से छूट की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने के कारण लगभग 1,500 भील आदिवासियों और वनवासियों की जान चली गई थी।
  • दक्षिणी राजस्थान क्षेत्र में जनजातियों का नेतृत्व गोविंद गुरु ने किया था जो एक आदिवासी नेता और समाज सुधारक थे।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. 1913 के मानगढ़ हत्याकांड के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। (स्तर – कठिन)

  1. ब्रिटिश भारतीय सेना द्वारा बंधुआ मजदूरी प्रणाली को खत्म करने और उच्च कृषि करों से छूट की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने के कारण लगभग 1,500 भील आदिवासियों और वनवासियों की जान चली गई थी।
  2. गोविंद गुरु विरोध-प्रदर्शन के प्रमुख नेता थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) दोनों कथन

(d) दोंनों कथनों में से कोई भी नहीं

उत्तर: c

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: ब्रिटिश भारतीय सेना द्वारा बंधुआ मजदूरी प्रणाली को खत्म करने और उच्च कृषि करों से छूट की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने के कारण लगभग 1,500 भील आदिवासियों और वनवासियों की जान चली गई थी।
  • कथन 2 सही है: दक्षिणी राजस्थान क्षेत्र में जनजातियों का नेतृत्व गोविंद गुरु ने किया था जो एक आदिवासी नेता और समाज सुधारक थे।

प्रश्न 2. सेना स्पेक्टैबिलिस पादप के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।(स्तर – कठिन)

  1. यह भारत में पाई जाने वाली एक विदेशी प्रजाति है और मध्य तथा दक्षिण अमेरिका के लिए देशज है।
  2. इसका उपयोग सजावटी उद्देश्यों और छायादार पेड़ों के रूप में भी किया जाता है और कुछ क्षेत्रों में ईंधन की लकड़ी के लिए इसकी खेती की जाती है।
  3. यह दक्षिण भारत के कई हिस्सों में एक आक्रामक प्रजाति बन गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: सेना स्पेक्टैबिलिस भारत में पाई जाने वाली एक विदेशी पौध प्रजाति है जो मध्य और दक्षिण अमेरिका के लिए देशज है।
  • कथन 2 सही है: सेना स्पेक्टैबिलिस का उपयोग सजावटी उद्देश्यों और छायादार पेड़ों के रूप में भी किया जाता है और कुछ क्षेत्रों में ईंधन की लकड़ी के लिए इसकी खेती की जाती है।
  • कथन 3 सही है: हाल के वर्षों में मुदुमलाई टाइगर रिजर्व में सेना स्पेक्टैबिलिस के चमकीले पीले फूल अधिक प्रमुखता से देखे जा रहे हैं और इन आक्रामक पौधों का स्थानीय जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

प्रश्न 3. भारत ने निम्नलिखित में से किस देश के साथ आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं? (स्तर – मध्यम)

(a) जापान

(b) अमेरिका

(c) ऑस्ट्रेलिया

(d) इजराइल

उत्तर: c

व्याख्या:

  • भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2 अप्रैल 2022 को आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (Economic Cooperation and Trade Agreement (ECTA)) पर हस्ताक्षर किए थे।
  • यह ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार समझौता दूसरा व्यापार समझौता है जिसे भारत ने फरवरी 2022 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ इसी तरह के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद हाल ही में हस्ताक्षरित किया है।

प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन सा देश काला सागर के साथ सीमा साझा नहीं करता है? (स्तर – मध्यम)

(a) बुल्गारिया

(b) रोमानिया

(c) ग्रीस

(d) जॉर्जिया

उत्तर: c

व्याख्या:

चित्र स्रोत: World Atlas

प्रश्न 5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिएः (PYQ-2019) (स्तर – मध्यम)

  1. कृषि मृदाएँ पर्यावरण में नाइट्रोजन के ऑक्साइड निर्मुक्त करती हैं।
  2. मवेशी पर्यावरण में अमोनिया निर्मुक्त करते हैं।
  3. कुक्कुट उद्योग पर्यावरण में अभिक्रियाशील नाइट्रोजन यौगिक निर्मुक्त करते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 3

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 2

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: कृषि मृदाओं का नाइट्रस ऑक्साइड की निर्मुक्ति में बहुत व्यापक वैश्विक हिस्सेदारी है।
  • कथन 2 सही है: मवेशी पर्यावरण में अमोनिया निर्मुक्त करते हैं। अमोनिया उत्पादन में मवेशियों की हिस्सेदारी 80% है।
  • कथन 3 सही है: कुक्कुट उद्योग पर्यावरण में अभिक्रियाशील नाइट्रोजन यौगिक निर्मुक्त करते हैं।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. वास्तव में हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों पर खरा उतरने के लिए, भारत को प्रवासियों को भी दूरस्थ मतदान की सुविधा प्रदान करनी चाहिए। समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) [जीएस-2, राजव्यवस्था]

प्रश्न 2. देश में केसर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा की गई पहलों के बारे में चर्चा कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) [जीएस-3, कृषि]