01 मार्च 2023 : समाचार विश्लेषण

A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

  1. अव्यवस्था वाली नई दुनिया में भारत को मध्यम मार्ग पर बने रहना चाहिए:

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E. संपादकीय:

कला एवं संस्कृति:

  1. ‘अडॉप्ट ए हेरिटेज’ (एक विरासत को अपनाएं) योजना की नाकामयाबी:

पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण:

  1. अंतर्राष्ट्रीय अदालतें और जलवायु परिवर्तन:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. सरहदों की मुश्किलें:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. CE-20 क्रायोजेनिक इंजन:

G. महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. भारत, ऑस्ट्रेलिया ने योग्यता की पारस्परिक मान्यता के समझौते पर हस्ताक्षर किये:
  2. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के फैसलों के खिलाफ शिकायतों के लिए खुला पोर्टल :
  3. अयोग्यता का सामना कर रहे विधायक फ्लोर टेस्ट में शामिल नहीं हो सकते: SC
  4. कोर सेक्टर का उत्पादन जनवरी में 10 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अव्यवस्था वाली नई दुनिया में भारत को मध्यम मार्ग पर बने रहना चाहिए:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: भारत के हितों पर विकसित एवं विकासशील देशों की नीतियां और राजनीति का प्रभाव।

मुख्य परीक्षा: वैश्विक व्यवस्था में भारत की गुटनिरपेक्षता और भारतीय विदेश नीति की भावी दिशा।

प्रसंग:

  • भारत एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र महासभा के उस प्रस्ताव में मतदान से दूर रहा, जिसमें यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की निंदा की गई थी।

पृष्ठभूमि:

  • द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) के बाद, वैश्विक व्यवस्था में दो बड़े बदलाव देखे गए:
    • अमेरिका और सोवियत संघ के नेतृत्व में एक द्विध्रुवीय विश्व का निर्माण।
    • 1991 में सोवियत संघ के विघटन के साथ एकध्रुवीयता ने द्विध्रुवीयता को प्रतिस्थापित कर दिया और अमेरिका केंद्र बन गया।
  • हालाँकि, हाल के वर्षों में, अमेरिकी एकध्रुवीयता पर चीन के तीव्र उदय और रूस की आक्रामक विदेश नीति जिसने युद्ध के बाद तीसरे परिवर्तन को निरुपित किया है ने प्रश्न चिन्ह लगा दिया है और इसे चुनौती दी है।
  • आज जब अमेरिका दुनिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य शक्ति बना हुआ है, ऐसे समय में भारत, रूस और चीन जैसे देशों ने बहुध्रुवीयता का स्वागत किया है, जबकि दूसरी ओर भू-राजनीति को प्रभावित करने की अमेरिका की क्षमता में कमी आ रही है जिसे नाटो की अफगानिस्तान से वापसी के मामलों में और रूसी-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी देखी गया था।
  • इन परिवर्तनों ने भारत जैसे देशों के लिए इसे ओर कठिन बना दिया है,क्योंकि वैश्विक व्यवस्था के भविष्य के पाठ्यक्रम के बारे में कोई स्पष्टता नजर नहीं आ रही है।

भारत की गुटनिरपेक्षता की सफलता:

  • जिस समय भारत को स्वतंत्रता मिली, उस समय शीत युद्ध (Cold War) अपने प्रारंभिक चरण में था और उस समय भारत के लिए वैचारिक और भू-राजनीतिक रूप से विभाजित दुनिया में अपनी विदेश नीति का प्रबंधन करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था।
  • हालाँकि, भारत द्वारा विदेश नीति के एक मुख्य सिद्धांत के रूप में गुटनिरपेक्षता को अपनाने ने ऐसी अधिकांश भू-राजनीतिक चुनौतियों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • शीत युद्ध के चरण के दौरान भारत की विदेश नीति को “अति आदर्शवादी” माना जाता था, लेकिन भारत की विदेश नीति के विकल्प वास्तव में लचीले रहे हैं तथा भारत ने वैश्विक और क्षेत्रीय समीकरणों में बदलाव के लिए खुद को तैयार किया है।
  • तत्कालीन भारतीय प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने केंद्रीय संधि संगठन (CENTO) और दक्षिण पूर्व एशिया संधि संगठन (SEATO) के गठन के बाद 1960 के दशक में गुटनिरपेक्षता को एक आंदोलन में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • गुटनिरपेक्षता की सच्ची भावना के अनुरूप, भारत ने 1950 और 1960 के दशक के दौरान शीत युद्ध के दोनों गुटों से समान दूरी बनाए रखी।
  • 1970 के दशक में, जैसे ही चीन ने अमेरिका के करीब जाना शुरू किया, भारत ने सोवियत संघ की ओर झुकना शुरू कर दिया, लेकिन बावजूद उसके भारत सोवियत नेतृत्व वाले किसी भी सैन्य गठबंधन में शामिल नहीं हुआ।
  • हालाँकि, सोवियत संघ के विघटन के साथ, भारत ने अमेरिका के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने और वैश्वीकरण के नए युग में खुद को वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करने का प्रयास शुरू कर दिया।
  • ऐसा करके, भारत अभी भी रक्षा और रणनीतिक संबंधों के माध्यम से रूस के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखने में कामयाब रहा और चीन के साथ एक जीवंत आर्थिक साझेदारी विकसित की।

गुट निरपेक्ष आंदोलन (NAM) से संबंधित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: – Non-Aligned Movement (NAM)

नई चुनौतियां:

  • शीत युद्ध का केंद्र यूरोप था लेकिन यूएस-चीन के बीच महाशक्ति बनने की प्रतिस्पर्धा का केंद्र एशिया होगा जो भारत के लिए इससे बाहर रहना मुश्किल बना देगा।
  • इसके अतिरिक्त, शीत युद्ध के दौरान, भारत के दोनों विरोधी महाशक्तियों के साथ कोई शत्रुतापूर्ण संबंध नहीं थे। हालाँकि, वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य के अनुसार, भारत को यूएस के पाले में शामिल होते देखा जाएगा क्योंकि भारत के चीन के साथ कईं द्विपक्षीय मुद्दों पर मतभेद हैं।
    • भारत और चीन के बीच शक्ति असंतुलन हाल ही में बढ़ा है।
    • चीन पाकिस्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी विकसित कर रहा है और भारत के पड़ोस में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है।
    • साथ ही, भारत और चीन के बीच लंबे समय से चली आ रही सीमा शांति 2020 में गालवान घाटी संघर्ष ( Galwan valley clash) के दौरान भंग हो गई थी।
  • भारत और रूस ने पारंपरिक रूप से घनिष्ठ संबंध बनाए रखे हैं लेकिन भारत पर अब इसके पश्चिमी भागीदारों द्वारा रूस और यूक्रेन में उसके द्वारा किए जा रहे कृत्यों की आलोचना करने का अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा है।
    • ऐसे फैसले लेते समय भारत को इस तथ्य पर भी विचार करना चाहिए कि रूस को अलग-थलग करने से रूस का रुझान चीन की ओर और अधिक बढ़ेगा।
  • चीन के संबंध में भारत और अमेरिका के बीच हितों का अभिसरण रहा है क्योंकि अमेरिका चीन को उदार अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक खतरे के रूप में देखता है और भारत चीन को एक करीबी प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखता है जिसका उदय क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बदल सकता है।
    • इन साझा हितों ने अमेरिका और भारत को चीनी चुनौती से निपटने के लिए गहरे संबंध बनाने में मदद की। हालाँकि, रूस-यूक्रेन युद्ध ने संबंधों को आगे बढ़ाना मुश्किल बना दिया है।

चीन से सीख:

  • 1970 के दशक तक, सोवियत संघ चीन का एक वैचारिक मार्गदर्शक और एक महत्वपूर्ण पड़ोसी था। हालाँकि, चीन सोवियत संघ के लिए अधीनस्थ भूमिका निभाने से खुश नहीं था और इस तरह वह सोवियत साम्यवादी छाया से दूर हो गया।
  • चीन अमेरिका के साथ एक अनौपचारिक-गठबंधन में शामिल हो गया और सोवियत गुट को हराने में अमेरिका की मदद की तथा बाद में चीन ने अधिक आर्थिक एवं सैन्य ताकत हासिल कर ली और उसने अमेरिका को चुनौती देना शुरू कर दिया।
  • विशेषज्ञों का यह मानना है कि इस समय में भारत का मुख्य ध्यान चीन की तरह आर्थिक और सैन्य रूप से खुद को बदलने पर होना चाहिए और चीन के साथ अंतर को पाटने की दिशा में काम करना चाहिए।
  • भारत को भी दक्षिण एशियाई और हिंद महासागर क्षेत्रों में एक स्थिर शक्ति के रूप में खुद को स्थापित करना चाहिए क्योंकि चीन इन क्षेत्रों में अपना प्रभुत्व बढ़ाना चाहता है।

भारत के लिए अन्य चुनौतियाँ और संभावित समाधान:

  • चीन के साथ समस्याओं के अलावा, भारत अन्य चुनौतियों का भी सामना कर रहा है, विशेष रूप से अपनी उत्तर-पश्चिमी सीमाओं के पास, जहाँ अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी के बाद, तालिबान सत्ता में लौट आया है।
    • इस तरह के घटनाक्रमों से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के लिए, भारत को रूस और ईरान जैसी मध्य एशियाई तथा यूरेशियन शक्तियों के साथ मिलकर काम करना होगा, जो दोनों ही अमेरिका के ख़िलाफ़ हैं।
    • इस प्रकार रणनीतिक स्वायत्तता पर मौजूदा रुख को बदलने और अमेरिका के नेतृत्व वाले गुट में शामिल होने से नई दुनिया में भारत के विकल्पों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
  • इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही अमेरिका और चीन के बीच एक नया शीत युद्ध छिड़ जाए, लेकिन वैश्विक व्यवस्था के दो ध्रुवों में विभाजित होने की संभावना नहीं है क्योंकि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था वैचारिक रूप से विविध और आर्थिक रूप से एकीकृत है।
    • ऐसे परिदृश्य के मामले में, भारत को एक बहु-जुड़ाव की रणनीति अपनानी चाहिए, यानी किसी भी गुट में शामिल होने के बजाय, भारत को मध्य शक्तियों के साथ जुड़ाव और साझेदारी से व्यवस्था के नए स्तंभ विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।

सारांश:

  • जैसा कि यूएस-चीन की महाशक्ति बनने की संभावित प्रतिस्पर्धा का केंद्र भारत के पड़ोस की ओर स्थानांतरित हो रहा है, भारत के लिए यह महत्वपूर्ण हो गया है कि वह बहु-सहभागिता दृष्टिकोण अपनाए और बहु-संरेखण दृष्टिकोण का पालन करने के बजाय मध्य मार्ग पर बना रहे।

संपादकीय-द हिन्दू

संपादकीय:

‘अडॉप्ट ए हेरिटेज’ (एक विरासत को अपनाएं) योजना की नाकामयाबी:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

कला एवं संस्कृति:

विषय: भारतीय विरासत और संस्कृति।

मुख्य परीक्षा: अडॉप्ट ए हेरिटेज (एक विरासत को अपनाएं) योजना और संबंधित चिंताएं।

प्रारंभिक परीक्षा: अडॉप्ट ए हेरिटेज (एक विरासत को अपनाएं) योजना।

विवरण:

  • निजी कंपनियां/फर्म और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएं संस्कृति मंत्रालय के साथ एक समझौता करके राज्य के स्वामित्व वाले पुरातात्विक स्थलों/स्मारकों को गोद ले सकती हैं और उनका रखरखाव कर सकती हैं।
  • इन संस्थाओं को स्मारक मित्र कहा जाएगा। यह ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज’ योजना का एक नया संस्करण है जिसे 2017 में शुरू किया गया था।
  • ‘नवीन’ योजना व्यवसायों को टिकट कार्यालयों, संग्रहालयों, रेस्तरां, शौचालयों और वॉकवे का निर्माण और रखरखाव करने के लिए अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility) निधि का उपयोग करने की अनुमति देगी। वे स्मारकों को रोशन भी कर सकते हैं, निर्देशित यात्राएं स्थापित कर सकते हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं, लाइट और साउंड शो की व्यवस्था कर सकते हैं, आदि।

एडॉप्ट ए हेरिटेज योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए, यहां पढ़ें: Adopt a Heritage Scheme, India – Ministry of Tourism

संबद्ध चिंताएं:

  • हालांकि इस योजना का उद्देश्य आगंतुक सेवाओं और सुविधाओं में सुधार करना है, फिर भी जोख़िम की आशंका है। उदाहरण के लिए,
    • गुजरात के मोरबी में एक घड़ी कंपनी (पुल इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता के बिना) को औपनिवेशिक युग के पुल रखरखाव की अनुमति दी गई थी।
  • इसी तरह, व्यवसायों को संग्रहालयों और व्याख्या केंद्रों के रखरखाव का मौका देना (पेशेवर विशेषज्ञों की अनदेखी करना) भारत की अपने अतीत की समझ को खतरे में डाल सकता है।
  • यह तर्क दिया जाता है कि नई योजना भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के जनादेश को दरकिनार करती है और उत्खनित वस्तुओं को सुरक्षित रखना और आगंतुकों को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित करने के लिए सारनाथ पहल (ASI, गेटी ट्रस्ट, यू.एस., ब्रिटिश संग्रहालय, और राष्ट्रीय संस्कृति कोष के दिशा-निर्देश) का परित्याग करती है।
  • योजना के लिए चुने गए कई स्मारकों में पहले से ही पर्यटक अवसंरचना मौजूद है। उदाहरण के लिए, सांची स्तूप (Sanchi stupas), बृहदेश्वर मंदिर (तंजावुर), आदि।
  • इसके अलावा, व्यवसाय सार्वजनिक भूमि पर कब्जा कर लेंगे और अपने ब्रांड का निर्माण करेंगे। यह प्रतिष्ठित स्मारकों के आसपास की मूल्यवान भूमि में कमी कर देगा।
  • ऐसी आशंकाएं हैं कि यह स्थानीय समुदायों और ऐतिहासिक स्थलों के साथ उनके संबंधों को कमजोर कर सकता है। उदाहरण के लिए, व्यापारिक संस्थाओं द्वारा निर्देशित पर्यटन स्थानीय समुदायों की आजीविका को खतरे में डालेगा।
  • रात में स्मारकों को रौशन करने के परिणामस्वरूप ग्रामीण घरों और अस्पतालों से बिजली की कटौती की जाएगी।
  • योजना के लिए चुने गए कई स्मारकों/स्थलों का रखरखाव पहले से ही केंद्रीय एजेंसियों या राज्य के पुरातत्व निदेशालय द्वारा किया जाता है।
  • ऐतिहासिक संरक्षण पर लापरवाहीपूर्ण पर्यटन और कॉर्पोरेट हितों को तवज्जो देने का आरोप है।

भावी कदम:

  • व्यवसायों द्वारा नागरिकों को स्मारकों को बेहतर ढंग से समझने में मदद की जानी चाहिए। CSR फंड का प्रयोग अनुसंधान, लेखन, गुणवत्तापूर्ण पाठ्यपुस्तकों के प्रकाशन और शिक्षण इतिहास के नवीन तरीकों के विकास के लिए किया जा सकता है।
  • कॉरपोरेट्स फैलोशिप शुरू करने, प्रोफेसरशिप देने और अनुसंधान प्रशिक्षण का समर्थन करने में भी मदद की जा सकती है। उदाहरण के लिए, श्री और श्रीमती नारायण मूर्ति ने संगठनों को पाठ्य अभिलेख और पुरातात्विक साक्ष्यों को तर्कसंगत रूप से लिंक करके इतिहास लेखन जारी रखने में सहायता की।
  • औद्योगिक घराने भी अपने CSR कोष का उपयोग उन उपकरणों को स्थापित करने के लिए कर सकते हैं जो कम हानिकारक गैसों का उत्सर्जन करते हैं और नदियों में कम अपशिष्टों का निर्वहन करते हैं।
  • संगठन व्यक्तियों को जीर्णोद्धार कौशल में प्रशिक्षित भी कर सकते हैं। उभरते हुए जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए उन्नत स्तर का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा सकता है। स्मारकों को प्रभावित करने वाले जलवायु परिवर्तन के कुछ उदाहरण हैं:
    • समुद्र का बढ़ता स्तर और लवणता महाराष्ट्र में विभिन्न किलों की नींव को नुकसान पहुँचा रही है।
    • भारी बारिश से लद्दाख के प्लास्टर (Stucco) वाले घर उखड़ रहे हैं।
    • इसी तरह, उच्च तापमान शेखावाटी के भित्ति चित्रों को नुकसान पहुँचा रहा है।

संबंधित लिंक:

List of Important Historical Monuments in India – State, Place, Built By

सारांश:

  • संशोधित ‘अडॉप्ट ए हेरिटेज’ योजना के साथ कई मुद्दे जुड़े हुए हैं। भारत सरकार को ऐतिहासिक संरक्षण के दूरदर्शी सिद्धांतों को अपनाना चाहिए। यह भारत के नागरिकों को भारत की बहुलतावादी विरासत की रक्षा करने के लिए प्रेरित करेगा।

अंतर्राष्ट्रीय अदालतें और जलवायु परिवर्तन:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण:

विषय: जलवायु परिवर्तन।

मुख्य परीक्षा: जलवायु परिवर्तन में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालयों की भूमिका।

प्रारंभिक परीक्षा: वानुआतु की पहल और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय।

प्रसंग:

  • वानुआतु की अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय से परामर्श लेने की पहल।

विवरण:

  • जलवायु परिवर्तन के मुद्दे से निपटने के लिए सोलह देशों के एक समूह ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में एक प्रयास शुरू किया है।
  • समूह का नेतृत्व वानुआतु कर रहा है और जलवायु परिवर्तन पर अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) से एक परामर्श चाहता है।
    • विशेष रूप से, ICJ का परामर्श गैर-बाध्यकारी है। हालांकि, न्यायालय का मानक प्रभाव होता है और वह अंतर्राष्ट्रीय कानूनों को स्पष्ट करता है।

ICJ के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें: International Court of Justice (ICJ) – Principal Organ of the UN. UPSC IR Notes.

वानुआतु द्वारा पहल:

  • जलवायु परिवर्तन पर कई अंतर्राष्ट्रीय समझौतों जैसे जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन, क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौते के बावजूद, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने जलवायु परिवर्तन के लिए पर्याप्त समाधान प्रस्तुत नहीं किए हैं।
  • वानुआतु जैसे लघु द्वीपीय विकासशील राज्य (SIDS) बढ़ते समुद्र के स्तर और बढ़ते तापमान के कारण अपेक्षाकृत अधिक जोखिम में हैं।
  • वानुआतु ने UNGA के माध्यम से सितंबर 2021 को “जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को रोकने और उनका निवारण करने के लिए सभी देशों के कानूनी दायित्वों” के संबंध में ICJ से परामर्श लेने के लिए एक पहल की शुरुआत की।
  • 100 से अधिक देशों ने वानुआतु की पहल का समर्थन किया है।
  • मसौदा प्रस्ताव में निम्नलिखित पहलुओं पर जवाब की माँग की गई है:
    • ग्रीनहाउस गैसों के मानवजनित उत्सर्जन से जलवायु की सुरक्षा के लिए देशों के अंतर्राष्ट्रीय दायित्व।
      • कुछ विद्वानों द्वारा यह सुझाव दिया गया है कि ICJ इन संधियों में अंतराल को भरने के लिए सामान्य और प्रथागत अंतर्राष्ट्रीय कानून (CIL) का भी उपयोग कर सकता है।
      • इस प्रकार, यह पेरिस समझौते के अस्पष्ट प्रावधानों को स्पष्ट करने के लिए ‘कोई नुकसान नहीं’ (नो हार्म) सिद्धांत (CIL का एक महत्वपूर्ण हिस्सा) का उपयोग कर सकता है।
        • ‘कोई नुकसान नहीं’ (नो हार्म) सिद्धांत के अनुसार देशों का एक दायित्व है कि उनके अधिकार क्षेत्र में होने वाली गतिविधियां अन्य देशों को नुकसान नहीं पहुंचाती हैं।
    • यह उन देशों के कानूनी परिणामों पर जवाब मांगेगा जिन्होंने जलवायु और SIDS को महत्वपूर्ण नुकसान पहुंचाया है।
    • संकल्प आगे जलवायु सुधार पर स्पष्टीकरण की मांग करता है, जो जलवायु न्याय की दिशा में लंबे समय से चली आ रही मांग है।

जलवायु न्याय के लिए अन्य उपाय:

  • जलवायु परिवर्तन और अंतर्राष्ट्रीय कानून पर लघु द्वीपीय राज्यों के आयोग (एंटीगुआ, बारबुडा और तुवालु जैसे देशों सहित) ने समुद्र के कानून के लिए अंतर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण (ITLOS) का परामर्श भी मांगा है।
  • ITLOS से अनुरोध किया जाता है कि वह समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCLOS) के तहत समुद्री प्रदूषण को रोकने, उसे नियंत्रित और कम करने के लिए देशों के दायित्वों को निर्धारित करे।

यह भी पढ़ें: UNCLOS: UN’s Convention on Law of the Sea. UPSC Notes for International Relations

निष्कर्ष:

  • दुनिया भर के राष्ट्रों और G20 जैसे अंतर्राष्ट्रीय समूहों को लघु द्वीपीय विकासशील राज्यों के प्रयासों का समर्थन करना चाहिए। भारत को भी G20 अध्यक्षता के अवसर का उपयोग लाइफ अभियान (LiFE campaign) पर लगातार जोर देने के लिए करना चाहिए।

संबंधित लिंक:

Small Island Developing States [UPSC Notes]

सारांश:

  • वानुआतु के नेतृत्व में देशों के एक समूह ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय से परामर्श मांगा है। सभी देशों को इस पहल का समर्थन करना चाहिए और जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए अपने-अपने तरीके से नेतृत्व करना चाहिए।

सरहदों की मुश्किलें:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: विकसित विश्व की नीतियों और राजनीति का प्रभाव।

मुख्य परीक्षा: विंडसर फ्रेमवर्क।

प्रारंभिक परीक्षा: विंडसर फ्रेमवर्क।

प्रसंग:

  • यूके और यूरोपीय आयोग ने विंडसर फ्रेमवर्क की घोषणा की है।

विवरण:

  • यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय आयोग ने उत्तरी आयरलैंड में ब्रेक्सिट के बाद की कठिनाइयों (post-Brexit difficulties in Northern Ireland) को दूर करने के लिए “विंडसर फ्रेमवर्क” नामक एक नए समझौते की घोषणा की है। यह लंदन और ब्रसेल्स के बीच बेहतर सहयोग का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।
  • “विंडसर फ्रेमवर्क” का उद्देश्य उत्तरी आयरलैंड प्रोटोकॉल के कारण उत्तरी आयरलैंड और यूके के बाकी हिस्सों के बीच व्यापार व्यवधानों को दूर करना है।

यह भी पढ़ें: BREXIT – Causes, Global Impact and Impact on India [UPSC]

उत्तरी आयरलैंड प्रोटोकॉल:

  • ब्रेक्सिट के एक भाग के रूप में उत्तरी आयरलैंड प्रोटोकॉल पर सहमति बनी थी।
  • प्रोटोकॉल के अनुसार, उत्तरी आयरलैंड वस्तुओं के लिए यूरोपीय संघ (EU) के एकल बाजार का हिस्सा बना रहेगा और यूरोपीय संघ के सीमा शुल्क नियमों के तहत काम करेगा।
  • उत्तरी आयरलैंड और यू.के. के बीच एक सीमा शुल्क सीमा बनाकर प्रोटोकॉल लागू किया गया था।
  • 2019 में प्रोटोकॉल को समाप्त करने के बावजूद, इसने कुछ संघवादियों के बीच चिंताएँ उत्पन्न की थीं।

विंडसर फ्रेमवर्क:

  • नया समझौता हरित और लाल लेन की स्थापना करके मुक्त व्यापार को संरक्षित करेगा।
  • यह उत्तरी आयरलैंड के बाजारों में दवा और भोजन जैसे ब्रिटिश सामान की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
  • इसके अलावा, फ्रेमवर्क संघ में उत्तरी आयरलैंड के स्थान को सुरक्षित करेगा और इसके लोगों की संप्रभुता को बहाल करेगा।
  • यह एक समझौता है जहां ब्रिटेन प्रशासन एक ऐसे फॉर्मूले पर पहुंचा है जिसे वापसी समझौते के तहत लंदन के दायित्वों को बरकरार रखते हुए जमीन पर लागू किया जा सकता है।
  • हालाँकि, फ्रेमवर्क का कई लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा है, विशेष रूप से यू.के. में।
  • प्रमुख चिंताओं में से एक ‘स्टोरमॉन्ट ब्रेक’ है। यह एक आपातकालीन उपाय है जो उत्तरी आयरलैंड की सरकार को यूरोपीय संघ के किसी भी नए कानून को प्रांत पर लागू होने से रोकने की अनुमति देगा।

निष्कर्ष:

संभावित चुनौतियों और चिंताओं के बावजूद विंडसर फ्रेमवर्क के परिणामस्वरूप घनिष्ठ सहयोग को ब्रेक्सिट के बाद यू.के.-यूरोपीय संघ के संबंधों में एक सकारात्मक चरण की शुरुआत के रूप में माना जाना चाहिए।

संबंधित लिंक:

Differences Between the United Kingdom, Great Britain and England With Their Detailed Comparison

सारांश:

  • विंडसर फ्रेमवर्क यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ संबंधों में एक सकारात्मक कदम है। यह उत्तरी आयरलैंड की ब्रेक्सिट के बाद की कठिनाइयों को भी दूर करेगा।

प्रीलिम्स तथ्य:

1.CE-20 क्रायोजेनिक इंजन:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

विषय: प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

प्रारंभिक परीक्षा: CE-20 क्रायोजेनिक इंजन और चंद्रयान-3 मिशन से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी।

प्रसंग:

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( Indian Space Research Organisation (ISRO)) ने CE-20 क्रायोजेनिक इंजन का उड़ान स्वीकृति हॉट-टेस्ट सफलतापूर्वक किया है।

CE-20 क्रायोजेनिक इंजन और चंद्रयान-3 मिशन:

  • CE-20 क्रायोजेनिक इंजन चंद्रयान-3 मिशन के लिए लॉन्च व्हीकल मार्क 3 (LMV3) के क्रायोजेनिक अपर स्टेज को पावर देगा।
    • वर्तमान में कार्यरत हाई थ्रस्ट क्रायोजेनिक इंजन सबसे शक्तिशाली अपर स्टेज क्रायोजेनिक इंजन है।
  • CE-20 पहला भारतीय क्रायोजेनिक इंजन है जिसमें गैस-जनरेटर साइकल है।
  • LVM3 वाहन (C25 चरण) का क्रायोजेनिक ऊपरी चरण LOX-LH2 प्रणोदक संयोजन यानी क्रायोजेनिक इंजन के साथ काम करने वाले CE-20 इंजन द्वारा संचालित होता है जो प्रणोदक के रूप में तरल ऑक्सीजन (LOX) और तरल हाइड्रोजन (LH2) का उपयोग करता है।
  • CE-20 क्रायोजेनिक इंजन निर्वात में 186.36 kN का नाममात्र प्रणोद विकसित करता है।
  • चंद्रयान-3 भारत का इंटरप्लेनेटरी मिशन और तीसरा चंद्र मिशन है।
  • चंद्रयान-3, चंद्रयान-2 का अनुवर्ती मिशन है, जो चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग और उस पर चलने की क्षमता प्रदर्शित करता है।
  • चंद्रयान -3 मिशन में तीन प्रमुख मॉड्यूल हैं, जैसे प्रणोदन, लैंडर और रोवर मॉड्यूल।
  • लॉन्च व्हीकल मार्क 3 (LMV3) मिशन के लिए लॉन्च व्हीकल है।

चंद्रयान-3 मिशन से संबंधित अधिक जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक कीजिए: Chandrayaan-3 Mission

महत्वपूर्ण तथ्य:

1.भारत और ऑस्ट्रेलिया ने योग्यता की पारस्परिक मान्यता के समझौते पर हस्ताक्षर किये:

  • भारत एवं ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए ऑस्ट्रेलियाई शिक्षा मंत्री,ऑस्ट्रेलियाई उच्च शिक्षा से संबंधित नेताओं की एक टीम के साथ दिल्ली पहुंचे।
  • इस यात्रा के दौरान, शिक्षा के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को गति प्रदान करने के उद्देश्य से भारतीय शिक्षा मंत्री के साथ कई बैठकें और कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं।
  • दोनों मंत्रियों द्वारा योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता के तंत्र पर हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है, जो दोनों देशों में शिक्षा तक पहुंच के लिए आपसी मान्यता के नियमों को लागू करता है और इसके भारत द्वारा किसी अन्य देश के साथ हस्ताक्षरित सबसे व्यापक और सबसे अनुकूल मान्यता समझौता होने की उम्मीद है।
    • यह समझौता दोनों देशों के बीच छात्रों की आवाजाही को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • ऑस्ट्रेलियाई मंत्री ने आगे कहा कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy), जिसने 2035 तक उच्च शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा में नामांकन को 50% तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, ने ऑस्ट्रेलियाई शिक्षा प्रदाताओं को भारत के साथ सहयोग करने का एक अनूठा अवसर प्रदान किया है।
  • इसके अलावा मार्च में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस भारत का दौरा करेंगे और उनकी इस यात्रा के दौरान, ऑस्ट्रेलिया का डीकिन विश्वविद्यालय गुजरात के गिफ्ट सिटी में एक स्वतंत्र विदेशी परिसर की घोषणा करेगा, जिससे यह भारत में एक अपतटीय परिसर स्थापित करने वाला पहला अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय बन जाएगा।

2. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के फैसलों के खिलाफ शिकायतों के लिए खुला पोर्टल:

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 ( Information Technology Rules, 2021 ) के तहत एक शिकायत अपील समिति (GAC) पोर्टल लॉन्च किया है।
  • यह पोर्टल उन लोगों की सरकार द्वारा गठित तीन समितियों में से एक द्वारा सुनवाई करने की अनुमति देता है जो सोशल मीडिया कंपनियों के समक्ष सामग्री हटाने के अनुरोधों के लिए की गई अपनी शिकायतों के समाधान से असंतुष्ट हैं।
    • शिकायतें प्राप्त करने और आईटी नियमों में हालिया संशोधन को लागू करने के लिए जनवरी में तीन समितियों का गठन किया गया था।
  • सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन किया गया था, जिसमें यह अनिवार्य किया गया था कि सोशल मीडिया कंपनियों को “अनुच्छेद 14, 19 और 21 सहित संविधान के तहत नागरिकों को दिए गए सभी अधिकारों का सम्मान करना चाहिए”।
    • इसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ऐसी अभिव्यक्ति की अनुमति दी जिनकी उनके प्लेटफॉर्म पर अनुमति नहीं थी लेकिन जिन्हें अन्यथा सार्वजनिक रूप से व्यक्त कानूनी रूप से सही था।
  • आईटी नियमों में आगे ऐसे प्रावधान हैं जिनके लिए प्लेटफॉर्म को सामग्री के खिलाफ शिकायतें स्वीकार करने और उपयोगकर्ताओं द्वारा सामग्री हटाए जाने के विरुद्ध अपील करने की प्रक्रिया की आवश्यकता होती है।
  • इसके अलावा, आईटी मंत्रालय ने कहा है कि आईटी नियमों को वैधानिक समर्थन देने के लिए “डिजिटल इंडिया बिल” तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

3. अयोग्यता का सामना कर रहे विधायक फ्लोर टेस्ट में शामिल नहीं हो सकते: सर्वोच्च न्यायालय

  • भारत के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में सर्वोच्च न्यायालय की एक संविधान पीठ ने माना है कि एक विधायक (सांसद या विधायक) जो दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता का सामना कर रहा है, को फ्लोर टेस्ट में भाग लेने की अनुमति देना संविधान की दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule of the Constitution) के उद्देश्य को विफल कर देगा।
  • सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ के अनुसार, एक ऐसे व्यक्ति, जिसके कार्यों से पार्टी में फूट पड़ी और जो दल-बदल कानून के अंतर्गत अयोग्य होने की कगार पर है, को एक विश्वास मत में भाग लेने अनुमति देना “संवैधानिक पाप” को “वैध बनाने” जैसा होगा।
  • शीर्ष अदालत ने आगे सवाल किया कि क्या एक विधायक जो सत्ताधारी सरकार को अस्थिर करने का कारण है, बाद में होने वाले फ्लोर टेस्ट से लाभ पहुँचा सकता है, जबकि उसी सदस्य के कारण ही फ्लोर टेस्ट करवाने की स्थिति उत्पन्न हुई है।

4. कोर सेक्टर का उत्पादन जनवरी में 10 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया:

चित्र स्रोत: The Hindu

  • देश के आठ प्रमुख क्षेत्रों (कोर सेक्टर्स) में उत्पादन वृद्धि चार महीनों में उच्चतम दर्ज की गई (दिसंबर 2022 में 7% की तुलना में जनवरी 2023 में 7.8% दर्ज की गई)।
  • उत्पादन में यह वृद्धि उर्वरक उत्पादन में सालाना 17.9% की तेज वृद्धि और कोयला खनन और बिजली उत्पादन में महत्वपूर्ण विस्तार के कारण हुई है।
  • कोर इंडस्ट्रीज का समग्र सूचकांक औद्योगिक उत्पादन सूचकांक ( Index of Industrial Production (IIP)) का लगभग 40% है और 10 महीनों में अपने उच्चतम स्तर तक बढ़ गया है।
  • जनवरी 2022 में प्रमुख क्षेत्रों (कोर सेक्टर्स) का आउटपुट लगभग 4% बढ़ा था।
  • कच्चे तेल को छोड़कर सभी कोर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों ने एक साल पहले की तुलना में उत्पादन में वृद्धि दर्ज की है।
  • स्टील और सीमेंट उत्पादन में क्रमशः 6.2% और 4.6% की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • कोयला और बिजली क्षेत्रों ने 13.4% और 12% की वृद्धि दर्ज की है जो स्थिर औद्योगिक गतिविधि और अर्थव्यवस्था में बिजली की उच्च मांग को दर्शाता है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर – सरल)

  1. B20 G20 देशों से संबंधित नौकरशाहों की बैठक है।
  2. यह एक अनौपचारिक बैठक है और G20 से संबद्ध नहीं है।

विकल्प:

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 गलत है: बिजनेस 20 (B20) वैश्विक आर्थिक और व्यापार शासन के मुद्दों पर अपने विचारों के लिए वैश्विक व्यापार जगत के नेताओं को प्रेरित करने की प्रक्रिया का नेतृत्व करता है और पूरे G-20 व्यापार समुदाय के लिए एक स्वर में आवाज़ उठाता है।
    • B20 के सदस्य G20 के सभी सदस्य देशों में से उद्योग और व्यापारिक नेताओं के प्रतिनिधि होंगे।
  • कथन 2 गलत है: B20 वैश्विक व्यापार समुदाय के साथ संवाद करने के लिए आधिकारिक G20 संवाद मंच है।

प्रश्न 2. जीडीपी में निम्न में से कितने शामिल हैं? (स्तर – मध्यम)

  1. एक कार जो भारत में असेंबल होती है।
  2. स्क्रू का एक पैकेट जिसका उपयोग कार की असेंबली के लिए किया जाएगा।
  3. एक विदेशी कंपनी द्वारा भारत में विकसित एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम।
  4. प्रोग्राम को चलाने के लिए रूस से आयात किया गया एक तैयार कंप्यूटर।

विकल्प:

  1. केवल एक कथन
  2. केवल दो कथन
  3. केवल तीन कथन
  4. सभी चारों कथन

उत्तर: b

व्याख्या:

  • GDP में केवल अंतिम उत्पाद यानी बिक्री के लिए तैयार वस्तुएँ शामिल होती हैं, न कि मध्यवर्ती वस्तुएँ जिनका उपयोग अंतिम उत्पाद बनाने के लिए किया जाता है।
  • इसके अलावा, GDP एक वर्ष के दौरान घरेलू अर्थव्यवस्था के भीतर उत्पादित होने वाली अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल उत्पादन को मापता है।
  • इस प्रकार, एक कार जो भारत में असेंबल होती है और एक विदेशी कंपनी द्वारा भारत में विकसित एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम भारत की GDP में शामिल होंगे।
  • हालांकि, स्क्रू का एक पैकेट जो कार की असेंबली के लिए इस्तेमाल किया जाएगा और प्रोग्राम को चलाने के लिए रूस से आयातित एक तैयार कंप्यूटर भारत की GDP में शामिल नहीं होंगे।

प्रश्न 3. सचेतक (व्हिप) प्रणाली के बारे में निम्न में से कितने सत्य हैं? (स्तर – मध्यम)

  1. यह विशेषता संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से ग्रहण की गई थी।
  2. एक लाइन का व्हिप सभी व्हिप में सबसे सख्त होता है और इसमें सदस्यों को पार्टी लाइन के अनुसार मत देने का निर्देश दिया जाता है।
  3. व्हिप का उल्लंघन दल-बदल विरोधी कानून के तहत सदस्य की अयोग्यता का कारण बन सकता है।

विकल्प:

  1. केवल एक कथन
  2. केवल दो कथन
  3. सभी तीनों कथन
  4. कोई भी नहीं

उत्तर: a

व्याख्या:

  • कथन 1 गलत है: व्हिप की अवधारणा ब्रिटिश संसदीय प्रणाली से ली गई है।
  • कथन 2 गलत है: पार्टी लाइन के अनुसार वोट देने के लिए सदस्यों को जारी किया जाने वाला तीन लाइन वाला व्हिप सभी व्हिप में सबसे सख्त होता है।
    • सदस्यों को मतदान की सूचना देने के लिए एक लाइन का व्हिप जारी किया जाता है। यदि कोई सदस्य पार्टी लाइन का पालन नहीं करने का निर्णय लेता है, तो एक लाइन व्हिप सदस्य को पार्टी लाइन का उल्लंघन करने की अनुमति देता है।
    • सदस्यों को मतदान के समय सदन में उपस्थित रहने का निर्देश देने के लिए दो लाइन का व्हिप जारी किया जाता है लेकिन मतदान पैटर्न पर कोई निर्देश नहीं दिया जाता है।
  • कथन 3 सही है: दसवीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून के अनुसार, एक राजनीतिक दल को अपने सदस्यों को व्हिप जारी करने का अधिकार है।
    • यदि कोई सदस्य पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करता है, तो उसे दलबदल विरोधी कानून के तहत सदन से अयोग्य ठहराया जा सकता है।

प्रश्न 4. भारत में मूर्ति चोरी के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं? (स्तर – सरल)

  1. भारत यूनेस्को अभिसमय का सदस्य है जो इसे प्रतिबंधित करता है।
  2. इसे रोकने के लिए संसद द्वारा एक समर्पित अधिनियम पारित किया गया है।
  3. स्मारकों और पुरावशेषों पर राष्ट्रीय मिशन का कार्य देश में पुरावशेषों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस विकसित करना है।

विकल्प:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: भारत, सांस्कृतिक संपत्ति के अवैध आयात, निर्यात और स्वामित्व के हस्तांतरण को प्रतिबंधित करने और रोकने के उपाय से संबंधित 1970 के यूनेस्को अभिसमय का हस्ताक्षरकर्ता है (भारत ने 1977 में इसकी पुष्टि की)।
  • कथन 2 सही है:पुरावशेष और बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972 पुरावशेषों और बहुमूल्य कलाकृति को धारण करने के अधिकार और व्यापार को विनियमित करने के लिए अधिनियमित किया गया था, ताकि पुरावशेषों की तस्करी और धोखाधड़ी के व्यवहार को रोका जा सके।
  • कथन 3 सही है: राष्ट्रीय स्मारक और पुरावशेष मिशन (NMMA) एक भारतीय सरकारी एजेंसी है जो भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत सांस्कृतिक विरासत डेटाबेस को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।

प्रश्न 5. भारत में, क्यों कुछ परमाणु रिएक्टर “आई.ए.ई.ए. सुरक्षा उपायों” के अधीन रखे जाते हैं जबकि अन्य इस सुरक्षा के अधीन नहीं रखे जाते? PYQ 2020 (स्तर – मध्यम)

  1. कुछ यूरेनियम का प्रयोग करते हैं और अन्य थोरियम का
  2. कुछ आयातित यूरेनियम का प्रयोग करते हैं और अन्य घरेलू आपूर्ति का
  3. कुछ विदेशी उद्यमों द्वारा संचालित होते हैं और अन्य घरेलू उद्यमों द्वारा
  4. कुछ सरकारी स्वामित्व वाले होते हैं और अन्य निजी स्वामित्व वाले

उत्तर: b

व्याख्या:

  • भारत में केवल कुछ परमाणु रिएक्टरों को IAEA सुरक्षा उपायों के तहत रखा जाता है क्योंकि वे आयातित यूरेनियम का उपयोग करते हैं जबकि अन्य घरेलू आपूर्ति का उपयोग करते हैं।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. ‘अडॉप्ट ए हेरिटेज’ (एक विरासत को अपनाएं) योजना के क्या प्रावधान हैं? इससे जुड़े विवाद का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।Link (15 अंक, 250 शब्द) [जीएस-1, कला और संस्कृति]

प्रश्न 2. विंडसर फ्रेमवर्क ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच एक स्वागत योग्य समझौता है। परीक्षण कीजिए।Link (15 अंक, 250 शब्द) [जीएस-2, अंतर्राष्ट्रीय संबंध]