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Question

Q. Which one of the following regions of India has a combination of tropical dry deciduous forest, semi-evergreen forest and moist deciduous forest?

Q. भारत के निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन, अर्ध-सदाबहार वन और नम पर्णपाती वन का संयोजन है?


A

Telangana Plateau
तेलंगाना पठार
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B

Rayalaseema
रायलसीमा
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C

Karnataka Plateau
कर्नाटक का पठार
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D

Malwa Plateau
मालवा का पठार
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Solution

The correct option is D
Karnataka Plateau
कर्नाटक का पठार
Explanation:

Option (a) is incorrect: Tropical semi-evergreen forests need an annual rainfall of 200-250 cm. Telangana receives average annual rainfall of 71. 36 cm. The moisture laden monsoon winds due to orographic effect sheds most of its moisture on the western ghats; the leeward side receives comparatively low rainfall.

Option (b) is incorrect:  The average annual rainfall of Rayalaseema is hardly 67 cm. So semi-evergreen forest is absent in Rayalaseema.

Option (c) is correct: The Southern Karnataka Plateau has a general elevation of 600 metres to 900 metres and it is encircled by the Western Ghats on the west and the south.  Rainfall in this region averages 300–400 cm with localised extremes touching 900 cm. The annual rainfall of 200-250 cm favours the semi-evergreen forests. Tropical Moist Deciduous Forests need an annual rainfall of 100 to 200 cm and Tropical Dry Deciduous Forests needs an annual rainfall of 150 to 100 cm. With favourable rainfall (300-400 cm) and temperature (24°C to 27°C) in the southern Karnataka plateau one can find semi-evergreen, moist deciduous and dry deciduous forest in the Karnataka Plateau.

Option (d) is incorrect: In total, Malwa Plateau wraps up 18 districts of Madhya Pradesh either in complete or partial form. The dispersion of rainfall in this area is unequal. In the western part of Malwa the average rainfall is 75cm whereas in eastern part the average is 75 – 125cm. Rainfall is mainly due to Arabian Sea branch of the South West monsoon. Thus, it is devoid of semi-evergreen forest.

व्याख्या:

विकल्प (a) गलत है: उष्णकटिबंधीय अर्ध-सदाबहार जंगलों को 200-250 सेमी की वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। तेलंगाना में औसत वार्षिक वर्षा 71. 36 सेमी होती है।
ऑर्गेनिक प्रभाव के कारण नमी से लदी मॉनसूनी हवाएँ पश्चिमी घाट पर अपनी अधिकांश नमी को बहा ले जाती हैं; लीवार्ड की ओर अपेक्षाकृत कम वर्षा प्राप्त होती है।

विकल्प (b) गलत है: रायलसीमा की औसत वार्षिक वर्षा बमुश्किल 67 सेमी है। इस तरह , रायलसीमा में अर्ध सदाबहार वन नहीं  है।

विकल्प (c) सही है: दक्षिणी कर्नाटक के पठार की सामान्य ऊंचाई 600 मीटर से 900 मीटर है और यह  पश्चिम और दक्षिण में पश्चिमी घाटों से घिरा हुआ है।
इस क्षेत्र में वर्षा औसतन 300-400 सेंटीमीटर होती है, जिसमें स्थानीय स्तर पर अधिकतम वर्षा मात्रा 900 सेमी होती है।
200-250 सेमी की वार्षिक वर्षा अर्द्ध सदाबहार जंगलों के लिए मददगार  है। उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वन को 100 से 200 सेमी की वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है और उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन को 150 से 100 सेमी की वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। दक्षिणी कर्नाटक पठार में अनुकूल वर्षा (300-400 सेमी) और तापमान (24 डिग्री सेल्सियस से 27 डिग्री सेल्सियस) के साथ कर्नाटक पठार में अर्द्ध सदाबहार, नम पर्णपाती और शुष्क पर्णपाती वन देखने को मिलते हैं।

विकल्प (d) गलत है: कुल मिलाकर, मालवा पठार के अंतर्गत मध्य प्रदेश के 18 जिले या तो पूर्ण या आंशिक रूप से आते  है। इस क्षेत्र में वर्षा का फैलाव असमान है। मालवा के पश्चिमी भाग में औसत वर्षा 75 सेमी है जबकि पूर्वी भाग में औसत 75 - 125 सेमी है। बारिश मुख्य रूप से दक्षिण पश्चिम मानसून की अरब सागर शाखा के कारण होती है। इस प्रकार, यह अर्ध-सदाबहार जंगल रहित है।

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