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Question

Q. Which of the following India’s ancient schools of Philosophy believes in logical or analytical thinking to achieve salvation?

Q. निम्नलिखित में से भारतीय दर्शन के कौन - से प्राचीन संप्रदाय मोक्ष प्राप्त करने के लिए तार्किक या विश्लेषणात्मक चिंतन में विश्वास करते हैं ?



  1. Yoga
    योग

  2. Vedanta
    वेदांत

  3. Lokayata
    लोकायत

  4. Nyaya
    न्याय


Solution

The correct option is D
Nyaya
न्याय

Explanation: 

Option (a) is incorrect: Yoga literally indicates that one needs to do meditation or asanas.

Option (b) is incorrect: Vedanta which indicates infallibility of Vedas, i.e. Vedas as the ultimate source of knowledge.

Option (c) is incorrect: Lokāyata or carvaka school believes in this worldly material tradition and rejects doctrine of salvation or moksha.

Option (d) is correct: Nyaya school follows a scientific and a rational approach. Sage Gautama is the founder of this school. Nyaya school banks upon various pramanas (mechanism of attaining knowledge). It believes that gaining knowledge through logical and analytical thinking using five senses is the sole way of attaining liberation from the cycle of birth and death.

Explainer’s Perspective

If the student knows about the ancient philosophies the question can be answered directly. However, this question can also be answered easily by just deciphering the name of the given school and matching with the key words in the given question. 

Option (a), Yoga literally indicates that one needs to do meditation or asanas. So there is no element of logical or analytical thinking present.

Option (b), Vedanta which indicates infallibility of Vedas, i.e. Vedas as the ultimate source of knowledge. 

Option (c), Lokayata. Its name itself suggests that it doesn’t believe in another world or afterlife. So, one can eliminate this also.

Hence, the correct answer is option (d). 

If one goes by breaking down the meaning of “Nyaya” i.e. “rules” or “methods”. Hence, it is indirectly referring to logical or analytical thinking. Hence, the answer is (d).

स्पष्टीकरण:

विकल्प a गलत है: योग का शाब्दिक अर्थ है कि व्यक्ति को ध्यान या आसन करने की आवश्यकता होती है।

विकल्प b गलत है: वेदांत जो वेदों के महत्व को दर्शाता है, अर्थात् वेदों को ज्ञान के अंतिम स्रोत के रूप में स्वीकार करता है।

विकल्प c गलत है: लोकायत या चार्वाक दर्शन इस सांसारिक भौतिक परंपरा में विश्वास करते हैं और मोक्ष या मोक्ष के सिद्धांत को खारिज करते हैं।

विकल्प d सही है: न्याय दर्शन वैज्ञानिक और तर्कसंगत दृष्टिकोण का अनुसरण करता है। ऋषि गौतम इस दर्शन के संस्थापक हैं। विभिन्न प्रमाणों (ज्ञान प्राप्त करने का तंत्र) पर आधारित न्याय दर्शन यह मानता है कि पांच इंद्रियों का उपयोग करके तार्किक और विश्लेषणात्मक सोच के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करना जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति पाने का एकमात्र तरीका है।

एक्सप्लेनर परिप्रेक्ष्य :

यदि छात्र को प्राचीन दर्शन के बारे में पता है तो प्रश्न का उत्तर सीधे दिया जा सकता है। हालाँकि, इस प्रश्न का उत्तर दिए गए सम्प्रदायों के नाम को समझकर और दिए गए प्रश्न में "की वर्ड्स" के साथ मिलान करके आसानी से दिया जा सकता है।

विकल्प (a), योग का शाब्दिक अर्थ है कि व्यक्ति को ध्यान या आसन करने की आवश्यकता होती है। इसलिए इसमें तार्किक या विश्लेषणात्मक सोच का कोई तत्व मौजूद नहीं है।

विकल्प (b), वेदांत जो वेदों की अचूकता को दर्शाता है, यानी ज्ञान के अंतिम स्रोत के रूप में वेद। 

विकल्प (c), लोकायत। इसके नाम से ही पता चलता है कि यह किसी दूसरी दुनिया या जीवनशैली पर विश्वास नहीं करता है। तो, इसे भी हटा सकते हैं।

इसलिए, सही उत्तर विकल्प (d) है। 

यदि कोई “न्याय” शब्द को “नियम” या “विधियाँ” में तोड़ देता है तो , यह परोक्ष रूप से तार्किक या विश्लेषणात्मक चिंतन की ओर इशारा करता है। इसलिए, उत्तर (d) है।

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