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09 जनवरी 2024 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. विश्व स्वास्थ्य संगठन नई दिल्ली में आईसीडी 11 मॉड्यूल 2 ( मॉर्बिडिटी कोड्स) लॉन्च करेगा:
  2. रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने लंदन में ब्रिटेन के रक्षा मंत्री श्री ग्रांट शाप्स के साथ बैठक की:
  3. भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी):
  4. भारतीय रेल की “रेलवे के लिए स्टार्टअप” पहल में तेजी:

1. विश्व स्वास्थ्य संगठन नई दिल्ली में आईसीडी 11 मॉड्यूल 2 ( मॉर्बिडिटी कोड्स) लॉन्च करेगा:

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध,स्वास्थ्य:

विषय: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान,संस्थाएं और मंच,उनकी संरचना,अधिदेश। स्वास्थ्य,शिक्षा,मानव संसाधनों से सम्बंधित सामाजिक क्षेत्र/सवाओं के विकास और प्रबंधन से सम्बंधित विषय।

प्रारंभिक परीक्षा: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)

मुख्य परीक्षा: विश्व स्वास्थ्य संगठन आईसीडी 11 मॉड्यूल 2 ( मॉर्बिडिटी कोड्स) के लॉन्च का भारत की चिकित्सा व्यवस्था पर प्रभाव बताइये।

प्रसंग:

  • आईसीडी 11 टीएम मॉड्यूल 2, मॉर्बिडिटी कोड्स, विश्व स्वास्थ्य संगठन का लॉन्च इवेंट 10 जनवरी, 2024 को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी प्रणालियों पर आधारित रोगों से संबंधित डेटा और शब्दावली अब डब्ल्यूएचओ के आईसीडी11 क्लासिफिकेशन में शामिल की जाएगी।

उद्देश्य:

  • आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी प्रणालियों पर आधारित रोगों से संबंधित डेटा और शब्दावली को अब डब्ल्यूएचओ के आईसीडी11 क्लासिफिकेशन में शामिल किया जाएगा।
  • इस प्रयास से बीमारियों को परिभाषित करने वाली शब्दावली के कोड के रूप में एएसयू (आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध) चिकित्सा में वैश्विक एकरूपता आएगी।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बीमारियों को क्लासिफिकेशन करने के लिए इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीज (आईसीडी) नामक एक क्लासिफिकेशन श्रृंखला विकसित की है।
  • वर्तमान में उपलब्ध बीमारियों पर वैश्विक डेटा मुख्य रूप से आधुनिक बायोमेडिसिन के माध्यम से निदान की जाने वाली स्वास्थ्य देखभाल प्रथाओं पर आधारित है।
  • आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी आदि जैसी आयुष प्रणालियों पर आधारित रोगों से संबंधित डेटा और शब्दावली का वर्गीकरण अभी तक डब्ल्यूएचओ आईसीडी श्रृंखला में शामिल नहीं है।

विवरण:

  • केंद्रीय स्वास्थ्य खुफिया ब्यूरो (सीबीएचआई) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एक एजेंसी है जो आईसीडी से संबंधित गतिविधियों के लिए डब्ल्यूएचओ सहयोग केंद्र के रूप में कार्य करती है।
  • यह विभिन्न बीमारियों और मृत्यु दर पर डेटा के संग्रह और प्रसार की सुविधा प्रदान करता है।
  • आयुष मंत्रालय ने पहले ही राष्ट्रीय आयुष रुग्णता और मानकीकृत इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल (नमस्ते) के माध्यम से आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा के लिए कोड विकसित कर लिया है।
  • आयुष मंत्रालय ने डब्ल्यूएचओ के सहयोग से आईसीडी11 श्रृंखला के टीएम2 मॉड्यूल के तहत आयुष – आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी प्रणालियों पर आधारित रोगों से संबंधित डेटा और शब्दावली का एक क्लासिफिकेशन तैयार किया है।
  • आयुष मंत्रालय ने इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ एक डोनर एग्रीमेंट पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
  • यह प्रयास भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली, अनुसंधान, आयुष बीमा कवरेज, अनुसंधान और विकास और नीति-निर्माण प्रणालियों को और मजबूत और विस्तारित करेगा।
  • इसके अलावा, इन कोडों का उपयोग समाज में विभिन्न बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए भविष्य की रणनीतियों के निर्माण में भी किया जाएगा।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के कई अन्य सदस्य देश भी आईसीडी में पारंपरिक चिकित्सा रोगों की शब्दावली को शामिल करने के लिए एक समान प्रारूप लागू करने के इच्छुक हैं।
  • इस क्लासिफिकेशन में मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियाँ और पुरानी अनिद्रा जैसी जीवनशैली संबंधी बीमारियाँ शामिल हैं।
  • आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी, वर्टिगो गाइडेंस डिसऑर्डर (मूल नाम), जिसे आमतौर पर तीन पारंपरिक प्रणालियों द्वारा मान्यता प्राप्त है, एक नर्वस सिस्टम डिस्ऑर्डर के रूप में जिसे आयुर्वेद में ‘भ्रमहा’ सिद्ध के रूप में ‘अजल किरक्रिप्पु’ और यूनानी में ‘सद्र-ओ-द्वार’ के रूप में जाना जाता है।
  • आईसीडी-11 के तहत, ऐसी शब्दावली की अंतर्राष्ट्रीय कोडिंग होगी और आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा के प्रचलित रोगों के नाम और डेटा को टीएम 2 मॉड्यूल के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोड में अधिसूचित किया जाएगा।
  • आईसीडी11 को 10 जनवरी, 2024 को नई दिल्ली में डब्ल्यूएचओ और आयुष मंत्रालय के अधिकारियों की संयुक्त उपस्थिति में जारी किया जाएगा।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

1. रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने लंदन में ब्रिटेन के रक्षा मंत्री श्री ग्रांट शाप्स के साथ बैठक की:

  • रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 09 जनवरी, 2024 को लंदन में ब्रिटेन के रक्षा मंत्री श्री ग्रांट शाप्स के साथ द्विपक्षीय बैठक की।
    • दोनों मंत्रियों ने रक्षा, सुरक्षा और सहयोग के कई मामलों पर चर्चा की जिसमें रक्षा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
    • श्री ग्रांट शाप्स ने ज़ोर देकर कहा कि यूके और भारत के बीच के रिश्ते सिर्फ पेशेवर ही नहीं हैं, बल्कि दोनों देश कई समानताओं और साझा लक्ष्यों के साथ स्वाभाविक भागीदार हैं।
    • रक्षा मंत्री ने दोनों देशों के बीच, विशेषकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक सहयोग की सराहना की।
  • इस द्विपक्षीय रक्षा बैठक के बाद भारत और यूके के बीच दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
  • पहला, द्विपक्षीय इंटरनेशनल कैडेट एक्सचेंज प्रोग्रैम के संचालन को लेकर हुआ समझौता ज्ञापन था।
  • दूसरा, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा यूके की डिफेंस साइंस एंड टेक्नोलॉजी लैबोरेट्री (डीएसटीएल) के बीच अनुसंधान और विकास में रक्षा सहयोग को लेकर एक व्यवस्था पत्र (एलओए) था, जिस पर हस्ताक्षर हुए।
  • ये दस्तावेज़ दोनों देशों के लोगों, खासकर युवाओं के बीच आदान-प्रदान और दोनों देशों के बीच रक्षा अनुसंधान सहयोग के व्यापक क्षेत्र को गति प्रदान करेंगे।
  • 8 जनवरी की देर रात लंदन पहुंचने के बाद रक्षा मंत्री ने आज सुबह टेविस्टॉक स्क्वैयर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करके अपने लंदन कार्यक्रम की शुरुआत की।
  • महात्मा गांधी ने 1888 से 1891 तक पास ही के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में कानून की पढ़ाई की थी।
  • 1915 में महात्मा गांधी की दक्षिण अफ्रीका से मुंबई वापसी के संदर्भ में 9 जनवरी एक विशेष प्रतीकात्मक तारीख है, जिसे भारत में प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • इस दिन देश के विकास में प्रवासी भारतीय समुदाय के समृद्ध योगदान को याद किया जाता है।

2. भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी):

  • भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) का 55वां दीक्षांत समारोह बुधवार, 10 जनवरी 2024 को प्रगति मैदान के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा।
  • भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द समारोह के मुख्य अतिथि होंगे और दीक्षांत भाषण देंगे।
  • इस समारोह में आईआईएमसी नई दिल्ली और इसके पांच क्षेत्रीय केंद्रों ढेंकनाल, आइजोल, अमरावती, कोट्टायम और जम्मू के संकाय सदस्य भी शामिल होंगे।
  • भारतीय जन संचार संस्थान देश का सबसे प्रतिष्ठित मीडिया एवं संचार शिक्षण संस्थान है। वर्ष 1965 में स्थापित आईआईएमसी हिंदी पत्रकारिता, अंग्रेजी पत्रकारिता, विज्ञापन एवं जनसंपर्क, रेडियो एवं टेलीविजन, डिजिटल मीडिया, ओड़िया, मराठी, मलयालम और उर्दू पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करता है।

3. भारतीय रेल की “रेलवे के लिए स्टार्टअप” पहल में तेजी:

  • भारतीय रेल ने स्टार्ट-अप और अन्य संस्थाओं की भागीदारी के जरिए नवाचारी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की है।
  • रेल मंत्रालय द्वारा 13 जून, 2022 को “रेलवे के लिए स्टार्टअप” पहल शुरू की गई थी।
  • इसका उद्देश्य भारतीय रेल की परिचालन दक्षता और सुरक्षा में सुधार के लिए भारतीय स्टार्टअप/एमएसएमई/नवोन्मेषियों/उद्यमियों द्वारा विकसित नवीन प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाना है।
  • रेल मंत्रालय का लक्ष्य भारतीय रेल की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और रखरखाव संबंधी मुद्दों का समाधान करना है।
  • नीति के तहत, परियोजना के मद्देनजर बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) का विशेष स्वामित्व स्टार्टअप/एमएसएमई/नवोन्मेषी/उद्यमी के पास होगा।
  • इसके अलावा केन्‍द्रीय रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में ‘भारतीय रेलवे निर्माण नियमावली, 2023’ का अनावरण किया।
  • “निर्माण नियमावली भूमि अधिग्रहण, वन मंजूरी, पुल डिजाइन, अनुबंध प्रबंधन, सुरंग निर्माण, फ्लाईओवर/पुल के नीचे सड़क सहित अनेक कार्यों में मदद करेगी।
  • यह नियमावली हमें दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला रेल नेटवर्क बनने में मदद करेगी।
  • यह नियमावली एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी क्योंकि नियमावली का पिछला संस्करण पुराना था (लगभग 1960) और अब इसमें ईपीसी अनुबंध, पुल निर्माण, सिग्नलिंग का निष्पादन, विद्युत और गैर-इंटरलॉकिंग कार्य आदि सहित नए सुधारों को शामिल किया गया है जिन्हें नई नियमावली के माध्यम से मानकीकृत किया गया है।
  • भारतीय रेलवे सिविल इंजीनियरिंग संस्थान और विभिन्न जोनल रेलवे के निर्माण अधिकारियों की टीम ने यह नियमावली तैयार की है।
  • यह नियमावली निर्माण परियोजनाओं को तेज गति से निष्पादित करने के लिए निर्माण अधिकारियों को आवश्यक ज्ञान से लैस करने के भारतीय रेलवे के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण घटना है।
  • राष्ट्रीय रेल योजना के अनुसार, भारतीय रेलवे को वर्ष 2030 तक क्षमता विकसित करनी है जो बढ़ती मांग को वर्ष 2050 तक पूरा करेगी।
  • इस लक्ष्‍य को प्राप्त करने के लिए, भारतीय रेलवे को अपने बुनियादी ढांचे के निर्माण की गति बढ़ानी होगी यानी इसमें सुपर क्रिटिकल और क्रिटिकल परियोजनाओं को चालू करना; नई लाइनों का निर्माण; गेज परिवर्तन पूरा करना, मल्टी ट्रैकिंग, स्वचालित सिग्नलिंग और यातायात सुविधा आदि कार्यों को पूरा करना शामिल है।
  • निर्माण अधिकारियों को मार्गदर्शन देने के लिए, निर्माण के विभिन्न पहलुओं को कवर करने वाली एक नियमावली की आवश्यकता महसूस की गई।
  • नियमावली सरल भाषा में तैयार की गई है जिसे क्षेत्रीय अधिकारी आसानी से समझ सकते हैं।

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