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13 नवंबर 2023 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. अनुपालन और रिपोर्टिंग के आधार पर भारत को रक्‍त चंदन की महत्वपूर्ण व्यापार प्रक्रिया की समीक्षा से हटा दिया गया है
  2. कोयला मंत्रालय की 2027 तक 1404 मिलियन टन उत्पादन की योजना
  3. आईएनएस सुमेधा मिशन को नामीबिया की वाल्विस खाड़ी में तैनात किया गया
  4. G-20 थिंक
  5. ‘आईना डैशबोर्ड फॉर सिटीज’ पोर्टल का शुभारंभ किया गया

अनुपालन और रिपोर्टिंग के आधार पर भारत को रक्‍त चंदन की महत्वपूर्ण व्यापार प्रक्रिया की समीक्षा से हटा दिया गया है:

सामान्य अध्ययन: 3

पर्यावरण:

विषय: संरक्षण, पर्यावरण का क्षरण।

प्रारंभिक परीक्षा: वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES); रक्‍त चंदन।

  • केंद्रीय मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव के अनुसार वन्‍य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) की स्थायी समिति की अभी हाल ही में संपन्न हुई बैठक भारत के वन्यजीव और इकोसिस्‍टम संरक्षण के प्रयासों के लिए एक बड़ा प्रोत्‍साहन साबित हुई है।
  • एक पोस्ट में श्री यादव ने कहा कि वन्यजीव अधिनियम में संशोधन के परिणामस्वरूप, भारत के CITES विधान को CITES की राष्ट्रीय विधान परियोजना की श्रेणी 1 में रखे जाने की पुष्टि हो गई है। उन्‍होंने यह भी कहा कि भारत वर्ष 2004 से रक्‍त चंदन के महत्वपूर्ण व्यापार प्रक्रिया की समीक्षा के अधीन था। उन्होंने कहा कि हमारे अनुपालन और रिपोर्टिंग के आधार पर, भारत को रक्‍त चंदन की महत्वपूर्ण व्यापार समीक्षा से हटा दिया गया है। उन्‍होंने कहा कि यह घटनाक्रम रक्‍त चंदन उगाने वाले किसानों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है।
  • वन्‍य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन की स्‍थायी समिति की 77वीं बैठक 6 से 10 नवंबर 2023 तक जिनेवा, स्विट्जरलैंड में आयोजित की गई है।
    • भारत वर्ष 1976 से CITES का एक पक्षकार है।
  • रक्‍त चंदन एक अधिक बाजार मूल्य वाला पेड़ है, जो आंध्र प्रदेश के कुछ जिलों में पाया जाता है।
    • यह प्रजाति 1994 से CITES के तहत परिशिष्ट II में सूचीबद्ध है।
    • यह प्रजाति अवैध कटाई और तस्करी के खतरों का सामना कर रही है, जिससे प्राकृतिक वन में इनकी निरंतर कमी हो रही है। हालाँकि, कानूनी निर्यात में कृत्रिम रूप से प्रचारित (वृक्षारोपण) रक्‍त चंदन की लकड़ी का बड़ा योगदान है।
  • रक्‍त चंदन प्रजाति को 2004 से कमोबेश महत्वपूर्ण व्यापार की समीक्षा (RST) प्रक्रिया के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
  • CITES RST प्रक्रिया उन देशों पर निर्देशित व्यापार निलंबन के रूप में अनुशासनात्मक कार्रवाई को सक्षम बनाती है जो अपने दायित्वों को पूरा करने में असफल रहते हैं।
    • यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से CITES स्थायी समिति किसी भी देश से किसी प्रजाति की निर्यात की जांच को आगे बढ़ाती है जिससे यह निर्धारित किया जा सके कि क्‍या कन्वेंशन को ठीक तरह से लागू किया जा रहा है या नहीं। इसी के कारण विगत में भारत के साथ व्यापार निलंबित करने की सिफारिश भी की गई थी।
  • भारत CITES सचिवालय को रक्‍त चंदन के निर्यात की स्थिति के बारे में नवीनतम जानकारी देता रहता है।
  • भारत ने इन प्रजातियों के लिए गैर-हानिकारक खोजबीन भी आयोजित की थी और जंगली क्षेत्रों से रक्‍त चंदन के निर्यात को पूरी तरह रोकने के लिए कार्रवाई तय की थी।
  • CITES सचिवालय, स्थायी समिति और प्‍लांट कमेटी के साथ इस मामले को लगातार चर्चा किए जाने के कारण स्थायी समिति ने 77वीं बैठक में RST प्रक्रिया से रक्‍त चंदन को हटाने पर निर्णय लिया।
  • भारत से RST प्रक्रिया से रक्‍त चंदन (टेरोकार्पस सैंटालिनस) को बिना किसी शर्त के हटाया गया है। इस कार्रवाई से रक्‍त चंदन उगाने वाले किसानों को बागानों में रक्‍त चंदन की खेती करने और उसके निर्यात के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इससे किसानों को एक स्थायी आय के साधन के रूप में अधिक से अधिक रक्‍त चंदन के पेड़ उगाने के लिए प्रोत्‍साहन मिलेगा।
  • CITES यह प्रावधान करता है कि प्रत्येक पक्षकार CITES प्रावधानों को समायोजित करने के लिए राष्ट्रीय विधान का अनुपालन करे।
  • भारत को CITES राष्ट्रीय विधान कार्यक्रम के लिए श्रेणी 2 में सूचीबद्ध किया गया था। इसलिए, वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 को वर्ष 2022 में संशोधित किया गया था, जिसमें CITES के प्रावधानों को इस अधिनियम में शामिल किया गया।
  • CITES की स्थायी समिति ने अपनी 77वीं बैठक में भारत को श्रेणी 1 में रखने का निर्णय लिया, क्योंकि इसने CITES राष्ट्रीय विधान कार्यक्रम की जरूरतों का पूरी तरह से अनुपालन किया है।
  • इसके अलावा, भारत ने बड़ी बिल्ली प्रजातियों विशेष रूप से एशियाई बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए कड़े उपायों को अपनाने की जरूरत के बारे में हस्तक्षेप किया था।
  • भारत ने अपने हस्तक्षेप में कई देशों और अन्य हितधारकों से सात बड़ी बिल्‍ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए 9 अप्रैल 2023 को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) में शामिल होने की अपील की है।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. कोयला मंत्रालय की 2027 तक 1404 मिलियन टन उत्पादन की योजना:
    • कोयला मंत्रालय ने वर्ष 2027 तक 1404 मिलियन टन (MT) और वर्ष 2030 तक 1577 MT कोयला उत्पादन करने की योजना बनाई है।
    • वर्तमान में कोयले का उत्पादन स्तर लगभग एक बिलियन टन प्रति वर्ष है। चालू वर्ष के लिए घरेलू कोयला आधारित बिजली संयंत्र को लगभग 821 मीट्रिक टन कोयला आपूर्ति किया गया।
    • कोयला मंत्रालय ने 2030 तक देश में जोड़ी जाने वाली अतिरिक्त 80 गीगावॉट थर्मल क्षमता की आपूर्ति के लिए अतिरिक्त कोयले की आवश्यकता महसूस की है। अतिरिक्त थर्मल क्षमता के लिए कोयले की आवश्यकता 85 प्रतिशत PLF पर लगभग 400 मीट्रिक टन होगी, और वास्तविक आवश्यकता नवीकरणीय स्रोतों के योगदान के कारण आने वाले समय में उत्पादन जरूरतों के आधार पर कम हो सकती है।
    • कोयला मंत्रालय की उत्पादन वृद्धि योजना में अतिरिक्त मात्रा में कोयले का उत्पादन करने की योजना है और यह ताप विद्युत संयंत्रों को घरेलू कोयले की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
    • उत्पादन योजना में नई खदानें खोलना, खदानों की क्षमता का विस्तार और कैप्टिव/वाणिज्यिक खदानों से उत्पादन शामिल है। ये सभी तीन प्रचालनगत घटक योगदान दे रहे हैं और आगे की वृद्धि के लिए स्पष्ट योजनाएं हैं। वर्ष 2027 और 2030 के लिए उत्पादन योजनाएं देश में थर्मल पावर प्लांटों की संभावित घरेलू आवश्यकता से कहीं अधिक होंगी, जिसमें संभावित अतिरिक्त क्षमता भी शामिल है।
    • जहां तक चालू वर्ष के लिए कोयले की स्थिति का सवाल है, स्टॉक बनना आरंभ हो गया है और थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक अब लगभग 20 मीट्रिक टन हो चुका है और खदानों में यह 41.59 मीट्रिक टन है। कुल स्टॉक (ट्रांजिट और कैप्टिव खदानों सहित) पिछले वर्ष के 65.56 मीट्रिक टन की तुलना में 73.56 मीट्रिक टन है, जो 12 प्रतिशत (वर्ष-दर-वर्ष) की वृद्धि दर्शाता है।
    • कोयला, बिजली और रेल मंत्रालय पूरे समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। इसी के अनुरूप कोयले की सुचारू आपूर्ति बनाए रखी गई है।
  2. आईएनएस सुमेधा मिशन को नामीबिया की वाल्विस खाड़ी में तैनात किया गया:
    • पश्चिम अफ्रीका और अटलांटिक महासागर में भारतीय नौसेना की मिशन-आधारित तैनाती के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए आईएनएस सुमेधा ने 10-13 नवंबर, 2023 तक नामीबिया की वाल्विस खाड़ी में ठहराव के लिए एक पोर्ट कॉल किया।
    • आईएनएस सुमेधा का यह पड़ाव नामीबिया के साथ भारत के मधुर संबंधों के विस्तार, समुद्री सुरक्षा को बढ़ाने और मित्र देशों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने की वचनबद्धता को प्रकट करता है।
    • भारत और नामीबिया के बीच लोकतंत्र, विकास एवं धर्मनिरपेक्षता के साझा मूल्यों को साझा करते हुए मधुर व मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंध हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग और सैन्य आदान-प्रदान के लिए कई द्विपक्षीय व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं। भारत ने अपने रक्षा सहयोग के हिस्से के रूप में पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न सैन्य संस्थानों में बड़ी संख्या में नामीबियाई सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया है।
    • भारतीय नौसेना के युद्धपोत ‘मैत्री सेतु’ तैयार करने और मित्र देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सशक्त करने के साथ-साथ दुनिया भर में समुद्री चिंताओं को दूर करने के भारतीय नौसेना के मिशन के हिस्से के रूप में नियमित रूप से तैनात किए जाते हैं। वर्तमान यात्रा का उद्देश्य मित्र देशों के साथ भारत की एकजुटता को बढ़ाना और विशेष रूप से नामीबिया के साथ मित्रता के मौजूदा संबंधों को विस्तारित करना है।
    • आईएनएस सुमेधा सरयू श्रेणी के स्वदेशी रूप से विकसित नौसेना के अपतटीय गश्ती जहाज के (NOPV) बेड़े में से तीसरा पोत है, जो स्वतंत्र रूप से और बेड़े के संचालन में सहयोग के उद्देश्य कई भूमिकाओं को निभाने के लिए तैनात किया गया है।
    • यह युद्धपोत अनेक हथियार प्रणालियों, सेंसरों, अत्याधुनिक नौसंचालन और संचार प्रणालियों तथा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम की युद्ध प्रणाली से सुसज्जित है। आईएनएस सुमेधा ने इससे पहले विभिन्न बेड़ों में सहयोग, तटीय एवं अपतटीय गश्त के अभियान, महासागर निगरानी और HDR मिशन संचालित किये गए हैं, जिसमें अप्रैल 2023 में संघर्ष प्रभावित सूडान से भारतीय प्रवासियों को निकालने के लिए हाल ही में आयोजित ऑपरेशन कावेरी भी शामिल है।
  3. G-20 थिंक:
    • भारतीय नौसेना और नेवी वेलनेस एंड वेलफेयर एसोसिएशन (NWWA) पिछले कुछ वर्षों से नौसेना सप्ताह गतिविधियों के भाग के रूप में स्कूली बच्चों के लिए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित कर रहे हैं। “द इंडियन नेवी क्विज़ – थिंक” क्विज़ 2023 ने वैश्विक पहुंच हासिल कर ली है, जो G-20 सचिवालय से मिली साझेदारी और समर्थन पर आधारित है और प्रतिष्ठित G-20 में भारत की अध्यक्षता का प्रतीक है। इसलिए, सही शब्दों में इस आयोजन को G-20 थिंक भी कहा जा रहा है।
    • यह आयोजन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय – दो स्तरों और दो स्थानों – मुंबई और नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।
    • भारत एक दिसंबर 23 को ब्राजील को G-20 बैटन सौंपेगा। G-20 थिंक संभवतः 22 दिसंबर से देश में आयोजित महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की श्रृंखला की समापन कड़ी होगी। इसका उद्देश्य भारत की अध्यक्षता का उल्लेखनीय समापन भी है। देश ने वैश्विक स्तर पर G-20 की कई अनूठी उपलब्धियां देखी हैं।
  4. ‘आईना डैशबोर्ड फॉर सिटीज’ पोर्टल का शुभारंभ किया गया
    • ‘आईना डैशबोर्ड फॉर सिटीज’ पोर्टल www.aaina.gov.in को आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा 13 नवंबर, 2023 को लाइव कर दिया गया है, जहां देश भर के शहरी स्थानीय निकाय (ULB) इस पोर्टल पर उपलब्ध एक सरल, भरने में आसान, डेटा प्रविष्टि फॉर्म के जरिए नियमित आधार पर स्वेच्छा से अपना प्रमुख डेटा जमा करने के लिए इस अग्रणी पहल में भाग ले सकते हैं।
    • आईना डैशबोर्ड का प्राथमिक उद्देश्य शहरों को (i) यह देखने में मदद करना है कि वे अन्य शहरों की तुलना में कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं, (ii) संभावनाओं और सुधार के क्षेत्रों की ओर इशारा करके उन्हें प्रेरित करना और (iii) सीखने और अग्रणी लोगों के साथ जुड़ने का अवसर प्रदान करना है।
    • ULB की रैंकिंग न करते हुए, आईना डैशबोर्ड समान रूप से स्थित विभिन्न शहरों की तुलना करने और विभिन्न शहरों के बीच सहकर्मी शिक्षण को बढ़ावा देने के एक उपकरण के रूप में काम करेगा।
    • यह डैशबोर्ड ULB द्वारा प्रस्तुत डेटा को पांच व्यापक स्तंभों से जुड़े संकेतकों के आधार पर प्रस्तुत करेगा, अर्थात:
    1. राजनीतिक और प्रशासनिक संरचना
    2. वित्त
    3. योजना
    4. नागरिक केन्द्रित शासन
    5. बुनियादी सेवाओं के वितरण।
    • विभिन्न ULB इस डैशबोर्ड के पोर्टल पर लॉग इन करके ऑडिट किए गए खातों और खुद के द्वारा रिपोर्ट किए गए प्रदर्शन मैट्रिक्स सहित अपना डेटा जमा करेंगे।
    • शुरू में ULB अपने द्वारा प्रदान की गई जानकारी को आवश्यकतानुसार किसी भी समय पोर्टल पर अपडेट करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
    • इस डैशबोर्ड की परिकल्पना ULB से संबंधित डेटा के एक स्थायी मंच के रूप में की गई है, जिसे नियमित आधार पर अपडेट किया जाएगा।
    • सभी ULB के सक्रिय सहयोग से, ‘आईना डैशबोर्ड फॉर सिटीज’ का लक्ष्य शहरी स्थानीय निकायों के प्रमुख प्रदर्शन मैट्रिक्स का एक ठोस डेटाबेस बनाना है, जिसे सभी हितधारकों द्वारा देखा जा सकेगा और बाद में इस डैशबोर्ड में पर्याप्त डेटा संकलित हो जाने पर इसे सार्वजनिक रूप से देखे जाने के लिए खोल दिया जाएगा।
    • डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के जरिए मंत्रालय आवश्यकता के आधार पर डेटा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में ULB/राज्यों को सहायता प्रदान करेगा।

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