UPSC परीक्षा कम्प्रेहैन्सिव न्यूज़ एनालिसिस - 01 June, 2022 UPSC CNA in Hindi

01 जून 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

  1. आधार की सुरक्षा पर सवाल:

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

  1. तालिबान शासन पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट पर एक नजर:

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

  1. भारत की EV महत्वाकांक्षा तीन पहियों पर सवार:

राजव्यवस्था:

  1. एक न्यायिक पाठ्यक्रम जो आत्मनिरीक्षण की मांग करता है:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. भारत ने WTO द्वारा ई-कॉम शुल्कों पर लगाए गए प्रतिबंधों का विरोध करने का फैसला किया:
  2. इजरायल-यूएई मुक्त व्यापार समझौता:
  3. मंकीपॉक्स के मामलों के प्रबंधन के लिए मंत्रालय ने दिशानिर्देश जारी किए:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

आधार की सुरक्षा पर सवाल:

विषय: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू

मुख्य परीक्षा : शासन के महत्वपूर्ण पहलू, पारदर्शिता एवं जवाबदेही, ई-गवर्नेंस अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और क्षमता।

संदर्भ:

  • हाल ही में लोगों को अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी साझा करने का परामर्श (एडवाइजरी) जारी करने के बाद, भारतीय विशिष्ट पहचान विकास प्राधिकरण (UIDAI) ने इस अधिसूचना को वापस ले लिया।
  • वापस लिए गए इस नोटिस में UIDAI) ने सुझाव दिया कि आधार कार्ड धारक को इसकी पारंपरिक फोटोकॉपी के बजाय एक मास्क्ड आधार कार्ड का उपयोग करना चाहिए, साथ ही यह भी कहा कि ऐसे दस्तावेज़ को साइबर कैफे या सार्वजनिक कंप्यूटर से डाउनलोड नहीं किया जाना चाहिए और यदि किसी कारण से ऐसा किया भी जाता है, तो इसे सिस्टम से स्थायी रूप से हटा दिया जाना (Delete) चाहिए।
  • UIDAI के अनुसार “मास्क्ड आधार संख्या का मतलब है आधार संख्या के पहले 8 अंकों को “xxxx-xxxx” के साथ बदल दिया जाता हैं,तथा आधार संख्या के केवल अंतिम 4 अंक दिखाई देते हैं।”
  • इस नोटिस में यह भी बताया गया है कि ‘उपयोगकर्ता से केवल लाइसेंस’ धारक संस्थाओं को प्रमाणीकरण उद्देश्यों के लिए आधार मांगने की अनुमति है। होटल या फिल्म हॉल जैसी निजी संस्थाएं पहचान दस्तावेज की प्रतियां एकत्र या रख नहीं सकती हैं।

मास्क्ड आधार कार्ड क्या है:

  • मास्क्ड आधार एक सामान्य आधार कार्ड के ही समान है जिसमें अंतर यह है कि आधार नंबर आंशिक रूप से छिपा हुआ होता है।
    • केवल आधार नंबर के आखिरी चार अंक दिखाई देते हैं। मास्क्ड आधार कार्ड में अन्य जानकारी समान होती हैं जैसे नाम, जन्म तिथि, लिंग, पता और क्यूआर कोड,।UIDAI के पास आधार का एक खास वर्जन होता है जिसे मास्क्ड आधार कहा जाता है।
    • इस वर्जन का इस्तेमाल आधार के दुरुपयोग से बचने के लिए किया जा सकता है। आधार कार्ड का यह वर्जन आधार कार्ड को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है।
    • डाउनलोड किए गए ई-आधार में यह आधार नंबर को छुपा देता है और सिर्फ आधार नंबर के अंतिम चार अंक ही दिखाता है।

पृष्ठ्भूमि:

  • नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NCPI) के आंकड़ों के मुताबिक,वित्त वर्ष 2021-22 में 2,391 विशिष्ट उपयोगकर्ता से जुड़े लेनदेन के 8,739 मामलों में ₹6.48 करोड़ की वित्तीय धोखाधड़ी हुई।
  • UID परियोजना के तहत विभिन्न संस्थानों और संगठनों ने अपने डेटाबेस को आधार संख्या के साथ जोड़ने पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें बैंक खाते भी शामिल हैं, विशेष रूप से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजनाओं के लिए आधार को लिंक करना अनिवार्य है।
  • NCPI आधार भुगतान ब्रिज (APB) और आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AEPS), प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) की सुविधा प्रदान करते हैं और व्यक्तियों को भुगतान के लिए आधार का उपयोग करने की अनुमति देते हैं।
  • इसके लिए बैंक खातों को आधार से लिंक करना जरूरी है।
  • वर्ष 2017 में, सेंटर फॉर इंटरनेट एंड सोसाइटी (CIS) के शोधकर्ताओं ने इस तरह की सामाजिक सुरक्षा और रोजगार योजनाओं के विभिन्न लाभार्थियों जैसे उनके आधार नंबर, बैंक खाते का विवरण, जॉब कार्ड की स्थिति, मोबाइल नंबर आदि से सम्बंधित जानकारी हासिल की।

आधार अधिनियम के महत्वपूर्ण प्रावधान:

  • आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी लाभ और सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016 कहता है कि भारत के समेकित कोष से वित्तपोषित सब्सिडी, लाभ और सेवाओं का लाभ उठाने के लिए आधार का प्रमाणीकरण आवश्यक है।
  • आधार के अभाव में व्यक्ति को उसकी पहचान का एक वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन प्रदान किया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह इससे वंचित नहीं है।
  • आधार को प्रमुख KYC (अपने ग्राहक को जानो) दस्तावेज के रूप में वर्णित किया गया है, लेकिन बैंक खाता खोलने, नया सिम लेने या स्कूल में प्रवेश के लिए यह अनिवार्य नहीं है।
  • इसके साथ ही अनुरोध करने वाली इकाई को पहले व्यक्ति की सहमति प्राप्त करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि जानकारी का उपयोग केवल केंद्रीय पहचान डेटा रिपोजिटरी (सीआईडीआर) द्वारा तय उद्देश्यों के लिए किया जायगा ।
  • इसमें नियामक को धारक के बैंक, निवेश, या बीमा विवरण की जानकारी नहीं मिलती है।
  • आधार अधिनियम, आधार संख्या निर्माण और प्रमाणीकरण के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए कोर बायोमेट्रिक जानकारी (जैसे फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन, अन्य बायोमेट्रिक विशेषताओं के बीच) को साझा करने से मना करता है।
  • अधिनियम में यह प्रावधान है कि गोपनीयता बनाए रखनी होगी,और प्रमाणित जानकारी का उपयोग निर्दिष्ट उद्देश्य के अलावा किसी अन्य चीज़ के लिए न हो।
  • धारक से एकत्र की गई कोई आधार संख्या (या संलग्न व्यक्तिगत जानकारी) सार्वजनिक रूप से प्रकाशित, प्रदर्शित या पोस्ट नहीं की जा सकती है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में किसी व्यक्ति की पहचान या प्रमाणीकरण का रिकॉर्ड उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार या केवल सचिव रैंक या उससे ऊपर के किसी व्यक्ति द्वारा दिए गए आदेश के बाद ही प्रस्तुत किया जाएगा।
  • आधार डेटा वॉल्ट वह जगह है जहां प्रमाणीकरण एजेंसियों द्वारा एकत्र किए गए सभी नंबर संग्रहीत होते हैं।
    • इसका उद्देश्य एजेंसियों को केवल आवश्यकता के आधार पर ही विवरण तक पहुंचने की सुविधा प्रदान करना है।

UIDAI से सम्बंधित मुद्दे:

  • यूआईडीएआई (UIDAI) ने आधार डेटा वॉल्ट को सुरक्षित करने के लिए न तो कोई एन्क्रिप्शन एल्गोरिथम निर्दिष्ट किया है और न ही यह स्पष्ट करने के लिए कोई तंत्र मौजूद हैं कि सम्बंधित संस्थाएं उपयुक्त प्रक्रियाओं का पालन कर रही हैं।
  • बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के साथ यूआईडीएआई (UIDAI) के अस्थिर रिकॉर्ड ने इसके डुप्लीकेशन प्रयासों में मदद नहीं की है, यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि उत्पन्न प्रत्येक आधार संख्या विशिष्ट है।
    • (डिडुप्लीकेशन – निरर्थक डेटा को खत्म करने की एक विधि है।)
  • इस कारण कई लोगों को एक ही बायोमेट्रिक डेटा दिए जाने के उदाहरण सामने आए हैं।
  • यूआईडीएआई (UIDAI) सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए स्वचालित बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली पर निर्भर है।
    • कैग की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें लीकेज का पता लगाने और उन्हें बंद करने में ये उपाय “पर्याप्त रूप से प्रभावी नहीं” हैं।
  • बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण एक चिंता का कारण हो सकता है, विशेष रूप से विकलांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए जिनके आईरिस और उंगलियों के निशान दोनों खराब हैं।

आधार में पहचान की चोरी की संभावना:

  • यूआईडीएआई (UIDAI) ने कहा हैं कि 200 से अधिक केंद्र और राज्य सरकार की वेबसाइटों ने सार्वजनिक रूप से कुछ आधार लाभार्थियों के विवरण जैसे उनके नाम और पते प्रदर्शित किए हैं।
  • इस प्रकार की कमी एक मजबूत एन्क्रिप्शन की कमी के कारण देखने को मिल रही हैं।
  • संभावित रूप से इस तरह के UID डेटा का लाभार्थियों के आधार को धोखाधड़ी के माध्यम से एक अलग बैंक खाते के साथ जोड़ने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, प्रतिरूपण द्वारा लाभार्थी के लाभ का गबन करना, उपलब्ध बड़े पहचान दस्तावेजों द्वारा संभव बनाया गया है।
  • हालांकि, केवल बैंक खाता संख्या जानना ही बैंक से पैसे निकालने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि किसी भी पंजीकृत मोबाइल नंबर पर व्यक्ति के फिंगरप्रिंट, आईरिस डेटा या OTP की आवश्यकता होती हैं।
  • लेकिन ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले हैं जहां सेवा प्रदाता कर्मचारी बायोमेट्रिक जानकारी की चोरी करते हुए पकड़े गए थे।
  • बायोमेट्रिक्स प्राप्त करने के लिए एक दूरगामी साधन द्वारा विभिन्न स्थानों से उंगलियों के निशान एकत्र करना शामिल होगा, जिसे एक व्यक्ति अनजाने में एक निश्चित स्थान (जैसे सीढ़ी की रेलिंग) को छू सकता है, जिसमे उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरों की सहायता से आईरिस डेटा प्राप्त किया जा सकता है।
  • भारत में लोग दो या दो से अधिक फोन नंबर रखते हैं,और इन मोबाइल नम्बरों का उपयोग सत्यापन के लिए किया जाता हैं।
  • ऐसी संभावना भी हो सकती है कि आधार से जुड़े नंबर का प्रमुखता से इस्तेमाल न किया जाता हो।
  • इन कमियों का लाभ उठाकर जालसाज इसका उपयोग अपने फोन नंबरों को लिंक करने के अवसर के रूप में कर सकते हैं, उपलब्ध जानकारी (व्यक्तिगत) का उपयोग करके इसे बैंक में अपडेट कर धोखाधड़ी कर सकते हैं।

सारांश:

  • हालांकि आधार को सभी पहचान आवश्यकताओं के लिए एक पूर्ण समाधान माना जाता था, लेकिन अब भी इसके लाभार्थियों की गोपनीयता की रक्षा के लिए इसके पूर्ण-प्रूफ उपायों को लागु करने की आवश्यकता है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

तालिबान शासन पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट पर एक नजर:

विषय: अंतर्राष्ट्रीय संबंध

मुख्य परीक्षा: भारत और उसके पड़ोसी देश,आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियां पैदा करने में बाहरी राज्य और गैर-राज्य नेताओं की भूमिका।

संदर्भ:

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की विश्लेषणात्मक सहायता और प्रतिबंध निगरानी टीम द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान में नए तालिबान शासन के तहत विदेशी आतंकवादी संगठन यहाँ सुरक्षित पनाहगाह का लाभ उठा रहे हैं।
  • रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस समय आतंकवादी समूह वित्तीय संकट के कारण, और संभवतः राजनीतिक दबाव व तालिबान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किरकिरी न हो,इस वजह से शांत बैठे हैं,इसीलिए वर्ष 2023 से पहले अफगानिस्तान के बाहर किसी बड़े हमले की संभावना नहीं है।

तालिबान की अंदरूनी कलह:

  • तालिबान मुख्य रूप से उदारवादी/नरमपंथी और कट्टर गुटों के बीच विभाजित है।
  • इनका उदारवादी गुट विदेशी भागीदारों के साथ कामकाजी संबंध और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के साथ एकीकरण चाहता है,जबकि कट्टरपंथियों (जिसमें हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा के इर्द-गिर्द केंद्रीकृत तालिबान के वरिष्ठ नेता शामिल हैं) का रुख वैचारिक अधिक है, और उनकी अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बहुत कम रुचि है।
  • इन दोनों गुटों से स्वतंत्र एक हक्कानी नेटवर्क है, जो कट्टरपंथियों के सहारे तालिबान के हितों को हासिल करने के लिए वैचारिक दृष्टिकोण के बजाय एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रहा है।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, हिबतुल्लाह की कमान में तालिबान के विभिन्न गुट पैंतरेबाजी का युद्धाभ्यास कर रहे हैं और हक्कानी नेटवर्क प्रशासन में अधिकांश प्रभावशाली पदों पर कब्जा कर रहा है।
  • तालिबान नेतृत्व के बीच कंधारी (दुररानी) तालिबान का उदय/प्रमुख होगा, जिसमें पश्तूनों को गैर-पश्तूनों पर वरीयता दी जाएगी।
  • उत्तर में कई प्रमुख ताजिक और उज़्बेक कमांडरों को दक्षिण से पश्तूनों के साथ बदल दिया गया है,और ये फैसले “पश्तूनों द्वारा उत्तर में समृद्ध कृषि भूमि से ताजिक, तुर्कमेन और उज़्बेक समुदायों को बेदखल करने के लिए पश्तूनों द्वारा आयोजित अभियान” की पृष्ठभूमि के खिलाफ आए हैं।
  • तालिबान के भीतर आंतरिक सामंजस्य भयंकर उग्रवाद की अवधि के दौरान बनाए रखना आसान था जब “अफगानिस्तान से विदेशी ताकतों को खदेड़ने के लिए एक अनिवार्य सामान्य कारण” था।
  • अब जब वे सत्ता में हैं,ऐसे समय में “तालिबान की दक्षिणी तालिबान के प्रभुत्व वाले पश्तून राष्ट्रवादी कारण की मूल पहचान फिर से उभर रही है, जिससे अन्य जातीय समूहों के साथ तनाव और संघर्ष पैदा हो रहा है।”

विदेशी आतंकवादियों की उपस्थिति:

  • तहरीक ई-तालिबान पाकिस्तान (TTP) अफगानिस्तान में विदेशी आतंकवादी लड़ाकों का सबसे बड़ा गुट है,जहाँ उनकी संख्या 3,000 से 4,000 होने का अनुमान है और वे पूर्व और दक्षिण पूर्व अफगानिस्तान पाकिस्तान सीमा के पास रह रहे है।
  • इराक में इस्लामिक स्टेट एंड द लेवेंट खुरासान (ISILK) जेल से रिहा होने वाले लोगों और नई भर्तियों के माध्यम से अपनी संख्या में इजाफा कर ताकत में वृद्धि कर रहा है।
  • अल-कायदा का अभी भी तालिबान के साथ संबंध है और वह तालिबान नेता हिबतुल्ला के प्रति निष्ठा को यदा कदा प्रदर्शित करता रहता है।
  • हालाँकि, न तो आईएसआईएलके ( ISILK ) और न ही अल-कायदा वर्ष 2023 से पहले अंतरराष्ट्रीय हमला करने में सक्षम हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति,और अफगान धरती पर अन्य आतंकवादी समूहों की उपस्थिति, पड़ोसी देशों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

भारत केंद्रित आतंकवादी समूह:

  • इस रिपोर्ट में भारत केंद्रित आतंकवादी समूहों के खतरे पर भी प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दो भारत केंद्रित आतंकवादी समूहों, जैश-ए-मोहम्मद (JIM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के अफगानिस्तान में प्रशिक्षण शिविर होने की सूचना मिली है।
  • हालाँकि दोनों समूहों के तालिबान नेतृत्व के साथ घनिष्ठ संबंध हैं,क्योंकि लश्कर-ए-तैयबा द्वारा तालिबान के संचालन हेतु वित्त और प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (AQIS) के अफगानिस्तान में 180400 लड़ाके हैं। “इन लड़ाकों में बांग्लादेश, भारत, म्यांमार और पाकिस्तान के नागरिक शामिल हैं।
  • हालांकि कंधार के शोराबक जिले में अक्टूबर 2015 के संयुक्त संयुक्त राज्य अफगान छापे और वित्तीय बाधाओं के परिणामस्वरूप AQIS की क्षमताओं को बहुत नुकसान पहुंचा हैं जिससे वे कमजोर हो गए हैं।
  • AQIS पत्रिका का नाम ‘नवा-ए-अफगान-जिहाद’ से बदलकर ‘नवा-ए-गज़वा-ए-हिंद’ करना “अफगानिस्तान से कश्मीर तक AQIS के पुन: ध्यान केंद्रित करने” का सुझाव देता है।

सारांश:

  • तालिबान द्वारा अफगान भूमि का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं करने की प्रतिज्ञा के बावजूद, अफगानिस्तान अभी भी भारत सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए खतरे के रूप में आतंकवादियों के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल बना हुआ है।

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

भारत की EV महत्वाकांक्षा तीन पहियों पर सवार:

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विकास एवं अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

प्रारंभिक परीक्षा: भारत में ईवी सेक्टर का विकास।

संदर्भ:

  • इस लेख में भारत के EV क्षेत्र का विश्लेषण और इलेक्ट्रोनिक-थ्री व्हीलर के EV बाजार में प्रभुत्व पर भी चर्चा की गई है।

पृष्टभूमि:

  • भारत में फेम (FAME- Faster Adoption and Manufacture of Hybrid and Electric Vehicles) इंडिया योजना चरण II को 2019 में 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ शुरू किया गया। इस योजना से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिला। FAME का पहला चरण 2015 में 895 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ शुरू किया गया था।
  • भारत, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग को दोगुना करने के अतरिक्त घर में ही (स्वदेशी) इलेक्ट्रिक वाहनों का अपना खुद का विनिर्माण उद्योग स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है ताकि घरेलू मांग को पूरा किया जा सके।
  • FAME II की अवधि 3 साल तक थी, लेकिन महामारी सहित कुछ कारकों के कारण 2021 में इसे दो वर्षो के लिए और बढ़ा दिया गया। इसका लक्ष्य 10 लाख ई-टू व्हीलर, 5 लाख ई-थ्री व्हीलर, 55,000 ई-फोर व्हीलर पैसेंजर कारों और 7,000 ई-बसों का निर्माण करना है।
  • FAME-II लक्ष्य से पिछड़ रहा था इसलिए सरकार ने स्वदेशी विनिर्माण पर जोर दिया।
  • टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, हीरो इलेक्ट्रिक और टीवीएस जैसे बड़े वाहन निर्माताओं ने अपने EV सेगमेंट खोले है।
  • ई-टू-व्हीलर्स में नए EV निर्माता ओला और बाउंस भी शामिल हुए है।
  • भारत के EV बाजार में ई-थ्री-व्हीलर्स का दबदबा है।

ई-थ्री व्हीलर वाहनों का दबदबा:

  • ऑटो-रिक्शा जैसे तिपहिया वाहनों का का हिस्सा सभी पंजीकृत EV का 65% है।
  • दोपहिया वाहनों का हिस्सा 30% है और चार पहिया का हिस्सा केवल 2.5% है।
  • FAME-II के तहत 2019 में 5 लाख ई-थ्री व्हीलर्स का लक्ष्य तय किया गया था। ई-थ्री-व्हीलर्स की संख्या 4 लाख को पार कर गई है और 2023 तक 5 लाख के लक्ष्य को प्राप्त करने की उम्मीद है।
  • पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहनों के आंकड़ों के अनुसार असम, बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक संख्या में ई-थ्री-व्हीलर पंजीकृत हैं और यह लगभग 80% है। अकेले उत्तर प्रदेश का 40% ई-थ्री-व्हीलर्स पंजीकरण के साथ सर्वाधिक योगदान है।

ई-थ्री व्हीलर में बढ़ोतरी के कारण:

सस्ती कीमत:

  • सभी उल्लिखित राज्यों में, जनसंख्या अधिक है जबकि किफायती सार्वजनिक परिवहन की कमी है।
  • इन राज्यों में EV थ्री-व्हीलर की संख्या 1 से 1.5 लाख के बीच है।

EV नीतियां:

  • इन पांच राज्यों की EV नीतियां स्थानीय विनिर्माण को बढ़ा कर EV वाहनों की मांग तेजी बढ़ाने पर केंद्रित हैं।
  • स्थानीय निर्माताओं ने इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण ऐसी विशिष्ट भारतीय शैली में किया है कि बड़े वाहन निर्माता भी इसका मुकाबला करने में सक्षम नहीं हैं।
  • इन राज्यों द्वारा 100% रोड टैक्स छूट और पंजीकरण शुल्क पर 100% छूट दी जाती है।
  • असम, दिल्ली और पश्चिम बंगाल ने कुछ मामलों में ऋण के अतिरिक्त लाभों और स्क्रैपेज लाभों के साथ बैटरी के आकार के आधार पर प्रोत्साहनों को जोड़ा है।
  • उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के कर्मचारियों को EV वाहन खरीदने पर 100% ब्याज मुक्त ऋण और एकल बालिका वाले परिवार को EV के सड़क मूल्य पर 30% सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
  • EVs की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए यूपी में भी SGST से छूट है। इन पांच राज्यों ने FAME-II में महत्वपूर्ण प्रदर्शन किया है और ये पांच राज्य 5 लाख करोड़ ई-थ्री व्हीलर के लक्ष्य को पार कर जाएंगे।

मांग और आपूर्ति:

  • ई-थ्री व्हीलर की मांग और आपूर्ति दोनों कारक इसके विकास में योगदान करते हैं, कई लाभों जैसे कर छूट, सब्सिडी, ब्याज मुक्त ऋण आदि ने EV की मांग को बढ़ा दिया है।
  • दूसरी ओर, कम कीमत, रखरखाव में आसानी, परिचालन लागत के साथ-साथ विनिर्माण लागत में कमी ऑपरेटरों द्वारा EV आपूर्ति की वृद्धि में सहायक होगी।

EVs से संबंधित मुद्दे:

विश्वसनीय निर्माताओं की कमी:

  • ई-चार-पहिया और दोपहिया वाहन मुख्य रूप से व्यक्तिगत उपयोग के लिए खरीदे जाते हैं, लेकिन EV से जुड़े विभिन्न मुद्दे जैसे ई-स्कूटर में आग का हालिया मामले ने उपभोक्ताओं के अंदर EV वाहनों के प्रति शंका पैदा की हैं।
  • ई-टू-व्हीलर्स और ई-थ्री-व्हीलर्स में विश्वसनीय निर्माताओं के जुड़ने में कठिनाई आ रही है।

सुरक्षा का अभाव:

  • स्थानीय निर्माताओं के पास विभिन्न संसाधनों की कमी होती है और इसके कारण वे सुरक्षा के लिहाज से EV वाहनों को डिजाइन नहीं करते हैं तथा सरकारों द्वारा भी सही तरीके से इसकी निगरानी नहीं की जाती है।
  • यात्रियों के लिए बचाव और सुरक्षा के उचित मानक होने चाहिए।

बड़े वाहन निर्माताओं की कमी:

  • सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए कि बड़े निर्माता ई-थ्री-व्हीलर्स सेगमेंट में प्रवेश से निराश न हों क्योंकि EV नीतियां विशेष रूप से स्थानीय निर्माताओं के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
  • इसलिए सभी हितधारकों को ध्यान में रखते हुए EV की मांग और आपूर्ति को पूरा करने के लिए भविष्य की EV नीतियां तैयार की जानी चाहिए।

सारांश:

  • जबकि सरकार ने भारत के जलवायु लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए भारत में EV सेगमेंट को आगे बढ़ाने वाली योजनाएं शुरू की और नीतियां बनाई हैं लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इसके समक्ष आने वाली चुनौतियों का समाधान भी किया जाए।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था:

एक न्यायिक पाठ्यक्रम जो आत्मनिरीक्षण की मांग करता है:

विषय: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पहलू।

प्रारंभिक परीक्षा: अनुच्छेद 142, अनुच्छेद 161, अनुच्छेद 245।

मुख्य परीक्षा : महत्वपूर्ण संस्थानों की पारदर्शिता और जवाबदेही।

संदर्भ:

  • इस लेख में पेरारिवलन मामले के हालिया फैसले के संवैधानिक पहलुओं पर चर्चा की गई।

पृष्टभूमि:

  • सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए राजीव गांधी हत्याकांड के सात दोषियों में से एक एजी पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया है।
  • सर्वोच्च न्यायालय का विचार था कि अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल द्वारा पेरारिवलन की शीघ्र रिहाई की याचिका पर निर्णय लेने में अत्यधिक देरी के कारण उनकी रिहाई आवश्यक थी।
  • जब 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती बम हमले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत हो गई थी तब पेरारिवलन को 11 जून 1991 को 19 साल की उम्र में गिरफ्तार किया गया था।

अनुच्छेद 142 और अनुच्छेद 161 क्या हैं?

  • अनुच्छेद 142 में प्रावधान है कि “सुप्रीम कोर्ट अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग कर ऐसी डिक्री पारित कर सकता है या ऐसा आदेश दे सकता है जो उसके समक्ष लंबित किसी भी मामले में पूर्ण न्याय के लिए आवश्यक हो।
  • अनुच्छेद 161 में राज्य के राज्यपाल को क्षमादान देने और कुछ मामलों में सजा को निलंबित करने, हटाने या कम करने की शक्ति है।

लेख और मुद्दे:

  • राज्य मंत्रिमंडल ने उनकी माफी याचिका को स्वीकार करने का फैसला किया और तदनुसार अपनी सिफारिश राज्यपाल को भेज दी। इसके बाद राज्यपाल ने याचिका को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
  • पीठ ने राज्यपाल से एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा, लेकिन राष्ट्रपति को याचिका पर निर्णय लेने के लिए सक्षम प्राधिकारी मानते हुए, राज्यपाल ने कैबिनेट की सिफारिश को उनके पास भेज दिया था।
  • अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि विशेष रूप से राज्यपाल को नहीं, बल्कि राष्ट्रपति को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत मामले में क्षमादान देने की शक्ति थी, साथ ही यह निर्णय अनुच्छेद 161 को “मृत पत्र” बना देगा और एक ऐसी स्थिति पैदा होगी जिसके तहत विगत 70 वर्षों में हत्या के मामलों में राज्यपालों द्वारा दी गई क्षमा को अमान्य घोषित कर दिया जाएगा।
  • संरक्षित संघवाद के तहत अदालत ने कहा कि हत्या के मामलों में दोषियों द्वारा किए गए अनुच्छेद 161 के तहत क्षमा की याचिका के मामले में राज्यों के पास राज्यपाल को सलाह देने और सहायता करने की शक्ति थी।

एक गहन जांच की आवश्यकता:

निम्नलिखित कारणों से मामले की गहन जांच की आवश्यकता है:

विषय स्पष्ट नहीं :

  • शीर्ष अदालत की पीठ के अनुसार राज्यों के राज्यपाल द्वारा शक्ति के प्रयोग के संबंध में अनुच्छेद 161 का विषय स्पष्ट नहीं है।

राज्य की शक्तियां:

  • आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 432 के तहत, जब किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए सजा सुनाई गई है, तो उपयुक्त सरकार, किसी भी समय, बिना किसी शर्त या किसी भी शर्त जो अपराधी को मंजूर हो, उसकी सजा के निष्पादन को निलंबित कर सकता है या उस सजा के पूरे या उसके किसी भी हिस्से को माफ कर कर सकता, जिसके लिए उसे सजा सुनाई गई है।
  • जब राज्य इस शक्ति का उपयोग कर सकता था तो उसने रिहाई के लिए अनुच्छेद 161 का सहारा क्यों लिया। इस मुद्दे पर पूर्ण संवैधानिक स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।

राज्यपाल द्वारा देरी:

  • इस मामले पर निर्णय लेने में राज्यपाल की ओर से देरी हुई तथा सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यपाल को इस मुद्दे पर कार्रवाई करने के लिए कोई समय सीमा प्रदान नहीं की।

निष्कर्ष:

  • मुद्दों पर संवैधानिक स्पष्टता के लिए गहन जांच आवश्यक है।

सारांश:

  • हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया, जो राजीव गांधी की हत्या के दोषियों में से एक था। यह अनुच्छेद 142 को रद्द करके किया गया था जिसके तहत कुछ समस्याओं को चिह्नित किया गया है। कुछ लोगो ने इस फैसले की सराहना की और कुछ ने फैसले पर स्पष्टता की मांग की है।

प्रीलिम्स तथ्य:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

1. भारत ने WTO द्वारा ई-कॉम शुल्कों पर लगाए गए प्रतिबंधों का विरोध करने का फैसला किया:

  • भारत ने विश्व व्यापार संगठन की बैठक में ई-कॉमर्स व्यापार पर सीमा शुल्क पर रोक जारी रखने का विरोध करने का फैसला किया हैं। क्योंकि विकासशील देशों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा हैं।
  • विकासशील देशों के लिए अपनी डिजिटल उन्नति हेतु आयात को विनियमित करने और सीमा शुल्क के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करने के लिए नीतिगत स्थान को संरक्षित करने के लिए अधिस्थगन को समाप्त करना महत्वपूर्ण हैं।
  • विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य देश वर्ष 1998 से इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण पर सीमा शुल्क नहीं लगाने पर सहमत हुए थे।

2. इजरायल-यूएई मुक्त व्यापार समझौता:

  • इज़राइल ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, यह किसी अरब देश के साथ पहला समझौता है।
  • इस FTA द्वारा दोनों देशों के व्यवसायों को बाजारों तक तेजी से पहुंच और कम टैरिफ से लाभ होगा क्योंकि यह राष्ट्रों के बीच व्यापार बढ़ाने, रोजगार सृजित करने, नए कौशल को बढ़ावा देने और सहयोग को गहरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
  • वर्ष 2020 का यह समझौता यूएस मध्यस्थता अब्राहम समझौते का हिस्सा था जिसके माध्यम से इज़राइल ने बहरीन और मोरक्को के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए।

3. मंकीपॉक्स के मामलों के प्रबंधन के लिए मंत्रालय ने दिशानिर्देश जारी किए:

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंकीपॉक्स रोग के प्रबंधन पर दिशानिर्देश जारी किए हैं।
  • मंकीपॉक्स (MPX) एक वायरल जूनोटिक बीमारी है,जिसके लक्षण चेचक जैसे होते हैं।
  • इस वायरस का प्राकृतिक जनक अभी तक अज्ञात है, कुछ कृन्तकों (रस्सी गिलहरी, पेड़ गिलहरी, गैम्बियन पाउच वाले चूहों और डॉर्मिस सहित) और अमानवीय प्राइमेट को स्वाभाविक रूप से वायरस के लिए अतिसंवेदनशील/जिम्मेदार माना जाता है।
  • मंकीपॉक्स की अवधि आमतौर पर छह से 13 दिनों तक होती है, लेकिन यह पांच से 21 दिनों तक भी हो सकती है, और संक्रमण की अवधि दाने उभरने से एक या दो दिन पहले तक होती है जब तक कि सभी पपड़ी गिर न जाए या कम न हो जाए।
  • बीमार या संदिग्ध मामलों में किसी भी उम्र का व्यक्ति शामिल हो सकता है, जिसने पिछले 21 दिनों के भीतर प्रभावित देशों की यात्रा की है, जिसमें अस्पष्टीकृत दाने और एक या अधिक लक्षण नजर आते हैं, जिनमें सूजन लिम्फ नोड्स, बुखार, सिर / शरीर में दर्द और गहरा कमजोरी शामिल है।
  • दिशानिर्देशों के अनुसार, संक्रामक अवधि के दौरान अंतिम संपर्क से 21 दिनों की अवधि के दौरान लक्षणों के लिए संपर्कों की दैनिक निगरानी की जानी चाहिए।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. प्रमुख आठ उद्योगों के सूचकांक के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

  1. यह आर्थिक सलाहकार कार्यालय, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग द्वारा जारी किया जाता है।
  2. इन आठ क्षेत्रों में सर्वाधिक भारांश बिजली क्षेत्र एवं सबसे कम भारांश उर्वरक उद्योग का है।
  3. विद्युत क्षेत्र के अंतर्गत नवीकरणीय ऊर्जा को शामिल नहीं किया गया है।

विकल्प:

(a) 1, 2 और 3

(b) केवल 1 और 2

(c) केवल 2 और 3

(d) केवल 1

उत्तर: d

व्याख्या:

  • इन आठ प्रमुख उद्योगों में प्राकृतिक गैस, कोयला, रिफाइनरी उत्पाद, कच्चा तेल, सीमेंट, बिजली, इस्पात और उर्वरक शामिल हैं।
  • इन उद्योगों को सामान्य आर्थिक और अन्य औद्योगिक गतिविधियों पर उनके मजबूत प्रभाव के कारण मुख्य उद्योग कहा जाता है।
  • इन उद्योगों में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में शामिल कुल वस्तुओं के कुल भार का कुल 40.27% शामिल है।
  • आठ प्रमुख उद्योगों का उच्चतम भार सूचकांक वर्तमान में रिफाइनरी उत्पाद उद्योग के पास है। इससे पहले सबसे ज्यादा भारांश बिजली उद्योग को दिया जाता था।

इन उद्योगों के भारांक के घटते क्रम में सूची इस प्रकार है:

  1. रिफाइनरी उत्पाद उद्योग
  2. बिजली उद्योग
  3. स्टील उद्योग
  4. कोयला उद्योग
  5. कच्चा तेल उद्योग
  6. प्राकृतिक गैस उद्योग
  7. सीमेंट उद्योग
  8. उर्वरक उद्योग

प्रश्न 2. भारत से कपड़ा निर्यात के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

  1. वैश्विक बाजार में मांग में कमी और निर्यात बाजार में बांग्लादेश एवं वियतनाम जैसे उभरते खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा के कारण चालू वर्ष में भारत से कपड़ा और परिधान निर्यात मात्रा में पर्याप्त गिरावट आई है।
  2. भारत वस्त्र और परिधान का शीर्ष निर्यात, संयुक्त अरब अमीरात को करता है।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: d

व्याख्या:

  • भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में हस्तशिल्प सहित कपड़ा और परिधान (T&A) में यूएस $ 44.4 बिलियन का अब तक का सबसे अधिक निर्यात किया।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका 27% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष निर्यात गंतव्य हैं, इसके बाद यूरोपीय संघ (18%), बांग्लादेश (12%) और संयुक्त अरब अमीरात (6%) का स्थान है।
  • उत्पाद श्रेणियों के संदर्भ में, सूती वस्त्रों का निर्यात 39% हिस्सेदारी के साथ 17.2 अरब अमेरिकी डॉलर था। मानव निर्मित वस्त्र निर्यात 14% हिस्सेदारी के साथ 6.3 अरब अमेरिकी डॉलर था।
  • रेडीमेड गारमेंट्स का निर्यात 36% शेयर के साथ 16 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।

प्रश्न 3. निम्नलिखित देशी पशुधन नस्लों और उनसे संबंधित राज्य युग्मों में से कौन-सा/से सुमेलित नहीं है?

  1. अमृतमहल – पंजाब
  2. ओंगोले- राजस्थान
  3. मलेनाडु गिद्दा- तमिलनाडु
  4. सुरती – बिहार
  5. बीटल- पश्चिम बंगाल

विकल्प:

(a) 1, 2 और 5

(b) 1, 3 और 4

(c) 2, 4 और 5

(d) 1, 2, 3, 4 और 5

उत्तर: d

व्याख्या:

  • अमृत महल मवेशियों की एक नस्ल है जो भारत के कर्नाटक राज्य के मैसूर में पैदा हुई थी। इनकी उत्पत्ति हल्लीकर से हुई है। वे अपनी सहनशीलता और गति के लिए जाने जाते हैं।
  • ओंगोल मवेशी एक स्वदेशी पशु नस्ल है जो भारत में आंध्र प्रदेश राज्य के प्रकाशम जिले में पाई जाती है।इस नस्ल में खुर पका और मुंह पका और मड काऊ रोग के प्रति प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है।
  • मलेनाडु गिद्दा भारत में कर्नाटक राज्य के पश्चिमी घाट की पहाड़ी, बरसाती और घने जंगलों वाले मालेनाडु क्षेत्र के मवेशियों की एक बौनी नस्ल है।
  • वे छोटे कद के होते हैं और अपनी अनुकूलन क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जाने जाते हैं। इनके दूध और मूत्र का इस्तेमाल ओषधि बनाने में होता है।
  • सुरती जल भैंस की एक नस्ल है जो गुजरात के कैरा और वडोदरा जिलों में पाई जाती है। यह औसतन 1600-1800 लीटर दूध देती है। दूध में वसा की मात्रा लगभग 8-10 प्रतिशत होती है।
  • बीटल बकरी की एक नस्ल है जो मुख्य रूप से पंजाब में पाई जाती है। इन नस्लों को मुख्य रूप से दूध और मांस के उद्देश्य से पाला जाता है।

प्रश्न 4. GST मुआवजे के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से गलत है/हैं?

  1. GST (राज्यों को मुआवजा) अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के तहत, राज्यों को 15 साल की अवधि के लिए GST के कार्यान्वयन के कारण होने वाले किसी भी राजस्व नुकसान के लिए मुआवजे का आश्वासन दिया गया है।
  2. राज्यों का संरक्षित राजस्व 10% की चक्रवृद्धि दर के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
  3. मुआवजा भारत की समेकित निधि से दिया जाता है।

विकल्प:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: d

व्याख्या:

  • देश में 1 जुलाई 2017 को माल और सेवा कर लागू किया गया था और राज्यों को जीएसटी (राज्यों को मुआवजा) अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के अनुसार जीएसटी के कार्यान्वयन के कारण होने वाले किसी भी राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए पांच साल तक मुआवजे का आश्वासन दिया गया था।
  • राज्यों को मुआवजा प्रदान करने के लिए, कुछ वस्तुओं पर उपकर लगाया जा रहा है और एकत्रित उपकर की राशि को मुआवजा कोष में जमा किया जा रहा है।
  • 2017-18, 2018-19 में समय पर राज्यों को द्विमासिक जीएसटी मुआवजा जारी किया गया था।
  • चूंकि राज्यों का संरक्षित राजस्व 14% चक्रवृद्धि वृद्धि से बढ़ रहा है, जबकि उपकर संग्रह उसी अनुपात में नहीं बढ़ा है, COVID-19 ने उपकर संग्रह में कमी सहित संरक्षित राजस्व और वास्तविक राजस्व प्राप्ति के बीच के अंतर को और बढ़ा दिया है।

संदर्भ:

  • भारत सरकार ने 31 मई, 2022 तक राज्यों को जीएसटी मुआवजे के रूप में 86,912 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है।

प्रश्न 5. भारत के संविधान का कौन सा अनुच्छेद अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने के अधिकार की रक्षा करता है ?

(a) अनुच्छेद 19

(b) अनुच्छेद 21

(c) अनुच्छेद 25

(d) अनुच्छेद 29

उत्तर: b

व्याख्या:

  • सुप्रीम कोर्ट ने लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शादी के अधिकार को जीवन के अधिकार के एक घटक के रूप में देखा हैं।
  • इसी तरह की टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने हदिया मामले में की थी जिसमें उसने कहा था कि अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) का अभिन्न अंग है।
  • अनुच्छेद 21 में कहा गया है कि कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगा।
  1. अनुच्छेद 19 बुनियादी स्वतंत्रता का प्रतीक है।
  2. अनुच्छेद 25 धार्मिक अधिकारों के संबंध में है।
  3. अनुच्छेद 29 धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करता है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. वर्तमान में सम्पूर्ण देश में FAME II योजना के प्रदर्शन और भारत में EV पहुंच के विस्तार में आ रही बाधाओं का आकलन कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस III- ऊर्जा)

प्रश्न 2. भारत के संविधान का अनुच्छेद 142 क्या है? क्या यह शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के विरुद्ध है? विस्तार से चर्चा कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस II- राजनीति)

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