UPSC परीक्षा कम्प्रेहैन्सिव न्यूज़ एनालिसिस - 16 May, 2022 UPSC CNA in Hindi

16 मई 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

  1. NATO में शामिल होने के लिए फ़िनलैंड का आग्रह :

स्वास्थ्य:

  1. लॉन्ग COVID और उसके प्रभावों को समझना:

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

सामाजिक मुद्दे:

  1. दिल्ली हाई कोर्ट को वैवाहिक बलात्कार में अंतर स्पष्ट करने की जरूरत:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. लुंबिनी का महत्व:

सुशासन:

  1. सुरक्षा की राह:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. भारतीय कंपनी युद्ध के लिए सामरिक बैटरी बना रही है:
  2. ‘माफ़ी पर फैसला सिर्फ एक राज्य कर सकता है’:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

NATO में शामिल होने के लिए फ़िनलैंड का आग्रह:

विशेष : विकसित और विकासशील देशों की नीतियां एवं राजनीति का प्रभाव।

मुख्य परीक्षा: नाटो में फिनलैंड की सदस्यता का महत्व और भावी कदम।

प्रसंग:

  • फिनलैंड,उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) में शामिल होना चाहता है।

पृष्ठ्भूमि:

  • हालाँकि फ़िनलैंड पिछले 20 विषम वर्षों तक तटस्थ रहा हैं, इस तटस्थ स्थिति ने फ्रांस को यूरोपीय आर्थिक मंदी के दौरान दोनों यूरोपीय देशों के साथ-साथ रूस के साथ अपने संबंधों में सुधार करने की परिस्थितियों को जन्म दिया।
  • यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के मद्देनजर, फिनलैंड अपनी लंबे समय से चली आ रही विदेश नीतियों को उलट रहा है।
  • स्वीडन से भी इसी तरह का कदम उठाये जाने की उम्मीद है।

नाटो की सदस्यता का महत्व:

  • रूस द्वारा साइबर एवं हाइब्रिड हमलों तथा हवाई क्षेत्र और समुद्री सीमाओं के उल्लंघन की चिंताओं के बीच,फ़िनलैंड और स्वीडन नाटो समूह में अपनी सदस्यता के लिए उत्सुक हैं क्योंकि यह सदस्यता उन्हें इस संदर्भ में कई प्रकार के लाभ प्रदान कर सकती है।
  • फिनलैंड और स्वीडन को नाटो की सदस्यता उनके सुरक्षा मुद्दों पर एक निश्चित स्तर तक राहत देगी लेकिन अत्यधिक अस्थिर क्षेत्र में शामिल ये सभी देश तब तक गतिरोध की स्थिति में रहेंगे जब तक कि कोई इन नीतियों में बदलाव के माध्यम से इस गतिरोध को तोड़ नहीं देता।

रूस की प्रतिक्रिया:

  • रूस का मानना है कि अमेरिका एक ऐसे एजेंट की भूमिका निभा रहा है जो देशों को नाटो की ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।
  • नाटो में शामिल होने के लिए फिनलैंड और स्वीडन की रुचि ने रूस की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है,क्योंकि नाटो का यह विस्तार रूस को बाल्टिक सागर और आर्कटिक में घेर लेगा इस स्थिति में रूस ने इन देशों को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उत्पन्न हुए खतरों का मुकाबला करने के लिए जवाबी सैन्य-कार्रवाई कर सकता है।
  • रूस मई में बेची गई बिजली का भुगतान न करने का आरोप लगा कर भविष्य में फिनलैंड को बिजली की आपूर्ति न करने की तैयारी कर रहा है।

भावी कदम:

  • रूस ने नाटो के विस्तार को रूस के सुरक्षा हितों के लिए चिंता का एक प्रमुख कारण बताया है।
  • आने वाले दिनों में कई देश सुरक्षा गारंटी के लिए नाटो या अन्य गठबंधनों में शामिल हो सकते है।
  • एस्टोनिया ने नाटो से बाल्टिक के पास अपनी सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए रूस विरोधी कमांड सेंटर और बेहतर वायु रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति के लिए कहा है।
  • यूक्रेन पर रूस द्वारा किये गए आक्रमण के परिणामस्वरूप रूस को दुनिया के अधिकांश देशों से अलग-थलग कर दिया गया है।
  • कई देश और सहयोग समूह पहले ही रूसी अर्थव्यवस्था से बाहर निकल चुके हैं और इन सभी ने अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए रूस पर अपनी निर्भरता को कम करना जारी रखा है, ऐसी स्थिति में रूस का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है।
  • फ़िनलैंड और रूस 1,300 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं और फ़िनलैंड नाटो की सदस्यता चाहता है, ऐसे में रूस रूसी-फिनलैंड सीमा पर तैनात अपनी सेना की संख्या बढ़ा सकता है।

सारांश:

  • यूक्रेन पर रूस की आक्रामकता फिर से कम होती दिख रही है,अब रूस को ही अपनी सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है क्योंकि कई देश जो कभी तटस्थ थे, वे नाटो में शामिल होने पर विचार कर रहे है। नाटो का यह विस्तार पहले से ही चिंतित रूस को और अधिक परेशान करेगा और इसलिए इस भू-राजनीतिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए दोनों पक्षों के बीच निरंतर राजनयिक आदान-प्रदान की आवश्यकता है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

स्वास्थ्य:

लॉन्ग COVID और उसके प्रभावों को समझना:

विषय: सामाजिक क्षेत्र/स्वास्थ्य से संबंधित सेवाओं के विकास और उनके प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा : लॉन्ग COVID से जुड़े लक्षण और उसके समाधान के विभिन्न उपाय।

प्रसंग:

  • इस लेख में लॉन्ग (Long-दीर्घकालिक) COVID से जुड़े प्रमुख लक्षणों पर चर्चा की गई है।

पृष्ठ्भूमि:

  • सार्वभौमिक रूप से कोई स्वीकृत परिभाषा नहीं होने के कारण, पोस्ट-कोविड सिंड्रोम को ऐसे संकेत और लक्षण के रूप में माना जाता है जो COVID-19 के संक्रमण के दौरान या बाद में विकसित होता है एवं 12 सप्ताह से अधिक समय तक इसका प्रभाव रहता है और इन्हे वैकल्पिक निदान द्वारा समझाया नहीं जाता है।
  • जो लोग COVID संक्रमण से बच गए थे उन लोगों में स्वास्थ्य स्थिति सामान्य लोगों की तुलना में निम्न स्तर की (गिरावट)है।

लॉन्ग COVID:

  • कुछ रिपोर्टों में साबित हुआ हैं कि COVID-19 संक्रमण से उबरने वाले लोगों की एक बड़ी संख्या ने अपने कई अंगों और शरीर की प्रणालियों पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव का अनुभव किया है।
  • उन लोगों में भी इसके दीर्घकालिक प्रभाव पड़े, जिनके संक्रमण चरण में कोई भी COVID संबंधित लक्षण नहीं था।
  • पारम्परिक रूप से, पोस्ट-कोविड ऐसे लक्षणों को माना जाता है जो संक्रमण के बाद चार सप्ताह तक रहते हैं और लॉन्ग COVID उन लक्षणों को संदर्भित करता है,जो संक्रमण के बाद 12 सप्ताह तक बने रहते हैं।
  • लक्षणों में त्वचा पर चकत्ते, नींद में कठिनाई, थकान, मांसपेशियों में कमजोरी, बालों का झड़ना, जोड़ों में दर्द, धड़कन, चक्कर आना, खांसी, सिरदर्द, गले में खराश, सीने में दर्द, गंध और स्वाद विकार, चिंता और परिवर्तनशीलता के मुद्दे शामिल हैं।

लैंसेट अध्ययन:

  • पहली बार किए गए इस अध्ययन ने लॉन्ग COVID को दो साल के सबसे लंबे समय के रूप में परिभाषित किया हैं।
  • किए गए इस अध्ययन में रोगियों में तीव्र संक्रमण के बाद के दो वर्षों के दौरान गंभीरता के साथ COVID उत्तरजीवियों में स्वास्थ्य परिणामों में आये बदलाव की निगरानी की।
  • अध्ययन बताता है कि कम से कम एक परिणामी लक्षण वाले व्यक्तियों का प्रतिशत छह महीने में 68% से घटकर दो साल में 55% हो गई।
  • इस अध्ययन में अधिकांश क्षेत्रों में सुधार की भी सूचना है, विशेष रूप से चिंता या अवसाद के मामले में।
  • लगभग 89% व्यक्ति जिन्हें COVID के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, दो साल के अंत तक सामान्य हुए।
  • अध्ययन में पाया गया है कि संक्रमण के दो साल बाद, लंबे समय तक COVID के लक्षण मुख्य रूप से स्वास्थ्य से संबंधित जीवन की गुणवत्ता में गिरावट, व्यायाम क्षमता, मनोवैज्ञानिक असामान्यता और स्वास्थ्य देखभाल पर बढ़ती निर्भरता से संबंधित थे।
  • इसके अलावा, जिन लोगों को अपने संक्रमण चरण के दौरान उच्च-स्तरीय श्वसन सहायता प्राप्त हुई थी, उनमें से अधिक संख्या में बचे लोगों ने लगातार श्वसन संबंधी समस्याओं का अनुभव किया।

भारत का संदर्भ:

  • भारत सरकार ने पोस्ट-कोविड लक्षणों के प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय व्यापक दिशानिर्देश तैयार किए हैं।
  • यह रिपोर्ट हृदय तथा रक्तवाहिकाओं संबंधी (cardiovascular), गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, नेफ्रोलॉजिकल, न्यूरोलॉजिकल और श्वसन प्रणालियों को प्रभावित करने वाली पोस्ट-COVID जटिलताओं के इलाज के लिए एक विस्तृत प्रक्रिया प्रदान करता है।
  • देश के कई अस्पतालों ने कोविड के बाद के लक्षणों वाले व्यक्तियों के इलाज के लिए कोविड वार्ड स्थापित किए हैं।
  • जनवरी 2022 में नई दिल्ली के एक अस्पताल ने रेखांकित किया कि COVID की दूसरी लहर में संक्रमित व्यक्तियों ने पहली लहर की तुलना में चार गुना अधिक लंबी COVID स्थितियों और उच्च बुखार, दस्त और फेफड़ों के गंभीर संक्रमण जैसे कई लक्षणों का अनुभव किया।
  • अस्पताल ने बताया कि संक्रमण के एक साल बाद भी मरीजों को गंभीर कमजोरी और थकान का अनुभव हो रहा हैं।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में पोस्ट COVID और लॉन्ग COVID दोनों ही जटिलताएं कम हैं।
  • विशेषज्ञों ने यह भी जोड़ा कि टीकाकरण के प्रति प्रतिरक्षी प्रतिक्रिया जैसे प्रतिरक्षा विज्ञान के सिद्धांत दुनिया भर में काफी हद तक एक समान रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक COVID के लक्षण दुनिया भर में समान नहीं होंगे क्योंकि ये स्वास्थ्य की एक स्थिति हैं।

सारांश:

  • चूंकि COVID से बचे लोगों का एक बड़ा अनुपात दीर्घकालिक लक्षणों का अनुभव कर रहा है, जो व्यक्तियों के समग्र स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं,इसके निदान हेतु स्वास्थ्य देखभाल विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को एक समग्र चिकित्सा प्रबंधन योजना के साथ आना चाहिए जो इन लक्षणों को दूर करने और जीवन की बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद कर सके।

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

सामाजिक मुद्दे:

दिल्ली हाई कोर्ट को वैवाहिक बलात्कार में अंतर स्पष्ट करने की जरूरत:

विषय: महिलाओं की भूमिका और संबंधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा: वैवाहिक बलात्कार के मुद्दे पर दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का आलोचनात्मक विश्लेषण।

सन्दर्भ:

  • दिल्ली उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने के सवाल पर निर्णय दिया कि कानून में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

विवरण:

  • भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 (वैवाहिक बलात्कार अपवाद) के अपवाद 2 में कहा गया है कि “किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ संभोग या यौन कृत्य, यदि पत्नी की उम्र पंद्रह वर्ष से कम नहीं है, बलात्कार नहीं है”।
  • लेखक दोनों निर्णयों के दौरान उठाए गए कई महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे साक्ष्य की उपलब्धता, सहमति का महत्व, अन्य कानूनों में घरेलू हिंसा से बचे महिलाओं को न्याय मिला या नहीं, पर मतभेद थे पर चर्चा करते हैं।

अनुच्छेद 14 के अपवाद की संवैधानिकता

  • संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और कानून के समान संरक्षण की गारंटी देता है।
    • लेखक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समान वर्गों के साथ समान व्यवहार किया जाता है और यह दो वर्गों के व्यक्तियों के बीच विभेदपूर्ण व्यवहार को पूरी तरह से नहीं रोक पाता है।
  • लेख के तहत उचित वर्गीकरण में शामिल हैं
    • बोधगम्य अंतर की स्थिति: दो वर्गों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जा सकता है यदि यह मान्य हो जाए कि वास्तव में वे एक दूसरे से अलग हैं।
    • एक कानून के लिए एक तर्कसंगत संबंध या तार्किक औचित्य होना चाहिए जो दो वर्गों को कानून के आधार पर अलग-अलग मानता हो।
  • वैवाहिक बलात्कार अपवाद के मामले में अंतर, विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच का है। लेकिन न्यायमूर्ति राजीव शकधर के अनुसार वैवाहिक बलात्कार अपवाद दूसरी शर्त अर्थात् कानून के अनुरूप नहीं है।
    • उनके अनुसार, सहमति की कमी ही बलात्कार के गलत और उसके हानिकारक स्वरूप को परिभाषित करती है।
    • उनका मानना है कि गैर-सहमति वाले यौन कृत्यों को महिला से संबंधों की परवाह किए बिना बलात्कार माना जा सकता है।
    • चूंकि अंतर (विवाहित और अविवाहित महिलाओं) और कानून के बीच कोई तर्कसंगत संबंध नहीं है, उन्हें लगता है कि वैवाहिक बलात्कार अपवाद उचित वर्गीकरण में विफल है और इसे असंवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए।

विभेदक विचार

  • हालांकि, न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर के अनुसार वैवाहिक बलात्कार अपवाद का उद्देश्य वैवाहिक क्षेत्र से बाहर बलात्कार के आरोपों को कम करना तथा विवाह की प्रथा की रक्षा करना है।
  • उनका मानना है कि विवाहित और अविवाहित महिलाओं के साथ भेदभाव असंवैधानिक नहीं है और उनका मानना है कि वैवाहिक बलात्कार की मान्यता विवाह की प्रथा के लिए खतरा है।

न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर के इस विभेदक मत के विरुद्ध तर्क

  • विशेषज्ञों ने उन देशों का उदाहरण दिया है जहां वैवाहिक बलात्कार को असंवैधानिक घोषित किया है और तर्क दिया गया है कि वहाँ विवाह की प्रथा के कमजोर या नष्ट होने का कोई सबूत नहीं है।
  • आलोचक इस राय पर सवाल उठाते हैं क्योंकि यह स्पष्ट नहीं करता है कि ‘विवाह के दायरे में सेक्स की वैधता की उम्मीद’ क्यों है जो विवाह में सेक्स की प्रकृति को निर्धारित करता है न कि सहमति को।
  • हालांकि न्यायाधीश इस बात से सहमत हैं कि महिलाओं की यौन स्वायत्तता सम्मान की हकदार है, और जब महिलाओं की यौन स्वायत्तता और शारीरिक अखंडता के अधिकार की बात आती है तो, तो विवाह के भीतर सेक्स की उम्मीद समाप्त हो जाती है, वह इस तथ्य को नहीं मानते हैं कि शादी के भीतर गैर-सहमति वाले सेक्स को बलात्कार माना जाना चाहिए।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि स्वायत्तता (स्वशासन का अधिकार) बल के विपरीत है और किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा या सहमति के विरुद्ध मजबूर करने का कोई भी प्रयास स्वायत्तता के अधिकार को कमजोर करता है और यहां तक कि विवाह की प्रथा भी किसी व्यक्ति को मजबूर नहीं कर सकती है।
  • न्यायाधीश की राय जो इस बात की पुष्टि करती है कि एक अजनबी द्वारा बलात्कार एक पति द्वारा बलात्कार से बदतर होता है, बलात्कार पीड़ितों के भयानक अनुभवों को स्वीकार करने में विफल रहता है।
  • आलोचकों का कहना है कि वैवाहिक बलात्कार वास्तव में विश्वास के उल्लंघन में वृद्धि और शारीरिक अखंडता के निरंतर उल्लंघन के डर का परिणाम है जिससे विवाह की प्रथा की मूल संरचना को नुकसान पहुंचता है।

सारांश:

  • ऐसे कोई सबूत नहीं हैं जो ‘गैर-सहमति/जबरन यौन कृत्यों’ को विवाह के दायरे में गलत या हानिकारक ठहराया जाता हैं इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट या संसद IPC की धारा 375 के अपवाद को समाप्त करे और वैवाहिक बलात्कार को बलात्कार कानून के दायरे में लाए।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

लुंबिनी का महत्व:

विषय: भारत और उसके पड़ोसी देशों से संबंध।

प्रारंभिक परीक्षा: लुंबिनी और भारत के अन्य महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल।

मुख्य परीक्षा: भारत के लिए लुंबिनी का महत्व तथा इस क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को बेहतर करने के उपाय।

सन्दर्भ:

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लुंबिनी दौरा।

भारत के लिए लुंबिनी का महत्व:

  • बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण केंद्र: नेपाल में लुंबिनी को बुद्ध का जन्म स्थान कहा जाता है और यह बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है।
  • चीनी कारक: लुंबिनी में चीनी उपस्थिति और प्रभाव में वृद्धि हुई है।
    • सबसे बड़ा मठ चीनियों द्वारा बनाया गया है जो नेपाल में बौद्ध धर्म पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों का समर्थन और प्रचार भी करता हैं।
    • चीनी नेपाल में बौद्ध धर्म की अपनी शक्ति का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत की सामरिक उपस्थिति का अभाव:

  • बौद्ध धर्म के कई पवित्र केंद्रों का घर होने के बावजूद, भारत का लुंबिनी में प्रभाव नहीं है।
  • लुंबिनी में विभिन्न देशों के मठ हैं लेकिन लुंबिनी में भारत का कोई मठ नहीं है।
  • भारत ने 1990 के दशक के अंत में अब तक केवल एक छोटा संग्रहालय भवन बनाने में मदद की है।

भारत में महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल:

  • बोधगया – भगवान बुद्ध के ज्ञानोदय का स्थान
  • सारनाथ – बुद्ध के प्रथम उपदेश का स्थान
  • कुशीनगर – बुद्ध के महापरिनिर्वाण का स्थान
  • श्रावस्ती और राजगीर – वे स्थान जहाँ बुद्ध ने कई वर्षों तक उपदेश दिया
  • नालंदा – बौद्ध मठवासी विश्वविद्यालय

चित्र स्रोत: Wikimedia Commons

भारत के लिए इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाने का अवसर:

  • भारत को इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाने पर विचार करना चाहिए और इसके लिए एक भारतीय मठ की स्थापना की जानी चाहिए।
  • नेपाल को लुंबिनी को विकसित करने की उस योजना को जिसे पांच दशक पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा नियुक्त अंतरराष्ट्रीय समिति द्वारा तैयार किया गया था, को लागू करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है ।
    • भारत को इस संबंध में अपना समर्थन देना चाहिए।
  • एक बौद्ध सर्किट का विकास
    • नेपाल और भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों के बीच कनेक्टिविटी हेतु बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए दोनों देशों को एक साथ आना होगा क्योंकि उत्तर प्रदेश-नेपाल सीमा के साथ सुनौली-भैरहवा, भारत-नेपाल चेक पोस्ट जैसे मौजूदा नेटवर्क को पार करना मुश्किल है।
    • भारत को बौद्ध सर्किट के विकास पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करनी चाहिए जिसमे बौद्ध देशों के दूतों को आमंत्रित किया जाए और इस प्रकार भारत की सॉफ्ट पावर में वृद्धि होगी।

एक बौद्ध सर्किट का विकास:

  • भारत में बौद्ध स्थलों जैसे बोधगया पर ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि वे अनियोजित तरीके से निर्मित हैं।
  • बेहतर नीतियां बनाने और बोधगया को हिंदुओं और बौद्धों दोनों के लिए पवित्र स्थल के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है।
  • समस्याओं के समाधान और बौद्ध स्थलों के विकास के लिए सभी हितधारकों के प्रतिनिधियों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जा सकती है।
  • बोधगया को लुम्बिन की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है और भारत बोधगया में बौद्ध परंपराओं का एक अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय स्थापित कर सभी बौद्ध देशों को भाग लेने के लिए आमंत्रित कर सकता है।
  • लुंबिनी-बोधगया-सारनाथ-कुशीनगर, सम्पूर्ण बौद्ध सर्किट को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की दिशा में प्रयास किए जाना चाहिए।

सारांश:

  • भारतीय प्रधान मंत्री की लुंबिनी यात्रा का महत्व है क्योंकि इस यात्रा ने भारत के लिए नेपाल के साथ बेहतर सहयोग करने के लिए इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति में सुधार करना तथा दुनिया को यह बताना कि भारत शांति, करुणा के सिद्धांतों और बुद्ध द्वारा प्रचारित अहिंसा का पालन करता है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

सुशासन:

सुरक्षा की राह:

विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप।

मुख्य परीक्षा: विभिन्न उपाय जो देश में भीषण दुर्घटनाओं की संख्या को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

पृष्टभूमि:

  • भारत के सभी बड़े शहरों में सालाना लगभग 50,000 दुर्घटनाएं होती हैं।
  • इनमें से लगभग 25% दुर्घटनाएं भीषण होती हैं।
  • इनमें से 50% से अधिक दुर्घटनाएँ उच्च गति के कारण तथा उनमें से 25% खतरनाक ड्राइविंग के कारण होती हैं।
  • अपनी जान गंवाने वालों में से लगभग 50% पैदल चलने वाले होते हैं तथा इनमें से 50% की मौतें बस और ट्रक दुर्घटनाओं के कारण होती हैं।

दुर्घटनाओं को कम करने हेतु पहल:

  • 2009 में दिल्ली में दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतें चरम पर थीं और दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए प्रयास के कारण वाहनों की संख्या में वृद्धि के बावजूद धीरे-धीरे कमी आई है।
  • दिल्ली पुलिस ने ब्लैक स्पॉट, ट्रैफिक कम करने के उपायों, बेहतर प्रवर्तन और सख्त अनुशासन को लागू करने के लिए एक अभियान शुरू किया है, जिसकी शुरुआत बस लेन अनुपालन से हुई है।
  • दिल्ली में स्वचालित ड्राइविंग परीक्षण केंद्र भी हैं, जो मानवीय हस्तक्षेप के मार्जिन को और कम करते हैं, जिसकी अक्सर भ्रष्टाचार अक्षमता के कारण आलोचना की जाती है।

इन हस्तक्षेपों द्वारा लाए गए परिवर्तन

  • इन हस्तक्षेपों ने यह सुनिश्चित किया है कि भारतीय ड्राइवरों के पास पर्याप्त कौशल सेट हैं क्योंकि स्वचालित ड्राइविंग परीक्षण केंद्रों ने शिक्षार्थियों और ड्राइविंग लाइसेंसों के मुद्दे का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया है जो अब सड़क संकेतों, यातायात नियमों और ड्राइविंग की बुनियादी समझ पर एक कौशल परीक्षण के बाद ही जारी किए जाते हैं।
  • सभी उपयोगकर्ताओं को समायोजित करने हेतु सड़क के डिजाइन का अनुपालन।
    • उदाहरण: बसों को बस लेन के नियमों का पालन करने की आवश्यकता होती है जिससे अन्य उपयोगकर्ताओं को समायोजित करने के लिए जगह मिलती है।
  • कैमरों की स्थापना जो तीव्र गति वाले वाहनों को पहचान कर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली का उपयोग कर चलान जारी करते हैं इसलिए चालानों की संख्या में वृद्धि देखी गई और अंततः इसने शहर में वाहनों की गति को धीमा कर दिया।

सुझाव

  • लाइसेंस जारी करने के नियामक ढांचे में अनिवार्य सिम्युलेटर और मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का उपयोग किया जाना चाहिए, खासकर भारी परिवहन वाहनों के चालकों के लिए।
  • सड़कों को इस तरह से डिजाइन करना कि वे सभी उपयोगकर्ताओं जैसे पैदल चलने वालों, साइकिल चालकों, मोटर चालकों आदि को समायोजित कर सकें।
  • यातायात प्रबंधन प्रणालियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उन्नत तकनीक को अपनाना।
  • यातायात नियमों को लागू करने में सड़क-मालिक एजेंसी, नगर निकाय, यातायात पुलिस और परिवहन प्रवर्तन विंग जैसी कई एजेंसियों का सहयोग करना।
  • सार्वजनिक परिवहन की दक्षता में सुधार।
  • एक सेवा के रूप में गतिशीलता (MaaS) समाधान – यह एक ऐसा मंच है जहां परिवहन के सभी साधनों की जानकारी मिलेगी।
    • यह यात्री को व्यवहार्यता के आधार पर परिवहन के साधन को चुनने का विकल्प प्रदान करता है।
    • सभी गतिशीलता विकल्पों के साथ सरकार समर्थित डिजिटल समाधान सार्वजनिक परिवहन को अधिक कुशल बना देगा और अंतिम-मील और प्रथम-मील कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

सारांश:

  • दुर्घटनाओं में मानव जीवन की बहुत बड़ी हानि हुई है इसलिए यातायात सुरक्षा में सुधार के लिए आम जनता के मन में सामूहिक व्यवहार परिवर्तन के साथ-साथ सभी स्तरों पर सरकारों द्वारा संरचित प्रयासों की आवश्यकता है।

प्रीलिम्स तथ्य:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

1. भारतीय कंपनी युद्ध के लिए सामरिक बैटरी बना रही है:

  • बेंगलुरू में स्थित एक कंपनी ने एक मजबूत सामरिक बैटरी बनाई है,और अब वह इसे यूरोप में उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) बलों को बेचने की योजना बना रही है।
  • “प्रविग फील्ड पैक” (Pravaig Field Pack) एक भारी शुल्क वाला पावर बैंक है जो पोर्टेबल है और इसका वजन 14 किलोग्राम है।
  • आधुनिक सैन्य और विशेष बलों को डिजिटल रूप से कनेक्ट करना महत्वपूर्ण है, जिन्हें यूक्रेन और लीबिया जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में काम करना पड़ता है, और यह पावर बैंक गैजेट्स का उपयोग करते समय आसान हो जाता है जिसके लिए निरंतर पावर बैक-अप की आवश्यकता होती है।
  • फील्ड पैक का उपयोग सैन्य उपकरणों को रिचार्ज करने के लिए किया जा सकता है और रिमोट सेंसर को तैनात करने, ड्रोन संचालित करने और सामरिक संचालन में उपयोग किया जा सकता है जिसमें कई हथियार प्रणालियां शामिल हैं।

2. ‘माफ़ी पर फैसला सिर्फ एक राज्य कर सकता है’:

  • सुप्रीम कोर्ट ने माना हैं कि किसी दोषी व्यक्ति की माफ़ी या समय से पहले रिहाई पर उस राज्य में लागू नीति के संदर्भ में विचार किया जाना चाहिए जहां अपराध किया गया था, न कि जहां मुकदमा स्थानांतरित किया गया था और समाप्त हुआ था।
  • कोर्ट ने कहा कि एक बार जब अपराध किसी राज्य में किया गया था, मुकदमे के समाप्त होने के बाद और दोषसिद्धि का फैसला पारित होने के बाद, आगे की सभी कार्यवाही जैसे कि माफ़ी/क्षमा या समय से पहले रिहाई उन्हीं राज्यों के कानून के अनुसार होगी है जहां अपराध किया गया था, न कि राज्य जहां अदालत के आदेशों के तहत किसी भी असाधारण कारणों से मुकदमे को स्थानांतरित और समाप्त कर दिया गया था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1973 की धारा 432 (7) के तहत, माफ़ी/क्षमा का मामला दो राज्य सरकारों का समवर्ती क्षेत्राधिकार नहीं हो सकता है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. नेपाल में स्थित लुंबिनी के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?(स्तर – मध्यम)

  1. बौद्ध परंपरा के अनुसार रानी महापजापति गोतमी ने लुंबिनी में सिद्धार्थ गौतम को जन्म दिया था।
  2. अशोक ने लुंबिनी का दौरा किया था और सम्राट की यात्रा की स्मृति में लुंबिनी में एक स्तंभ स्थित है।
  3. विश्व धरोहर समिति के आगामी सत्र में लुंबिनी को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है।

विकल्प:

(a)केवल 1 और 2

(b)केवल 1 और 3

(c)केवल 2

(d)केवल 1

उत्तर: c

व्याख्या:

  • कथन 1 सही नहीं है: बौद्ध परंपरा के अनुसार रानी महामायादेवी ने लुंबिनी में सिद्धार्थ गौतम को जन्म दिया था।
  • महापजापति गौतमी बुद्ध की पालक-मां, सौतेली मां और मौसी (मां की बहन) थीं।
  • कथन 2 सही है: अशोक ने लुंबिनी का दौरा किया था, और सम्राट की यात्रा की स्मृति में लुंबिनी में एक स्तंभ है।
  • कथन 3 सही नहीं है: लुंबिनी को 1997 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन सा कथन परियोजना 75-I का सबसे अच्छा वर्णन करता है? (स्तर – सरल)

(a)इस परियोजना में अत्याधुनिक वायु स्वतंत्र प्रणोदन प्रणाली से लैस पनडुब्बियों के डीजल-इलेक्ट्रिक वर्ग के स्वदेशी निर्माण की परिकल्पना की गई है।

(b)इस परियोजना में परमाणु ऊर्जा चलित पनडुब्बियों के स्वदेशी निर्माण की परिकल्पना की गई है।

(c)इस परियोजना में चार अत्याधुनिक स्टील्थ गाइडेड मिसाइल विध्वंसक के स्वदेशी निर्माण की परिकल्पना की गई है।

(d)इस परियोजना में 2030 तक भारतीय नौसेना के लिए दो परमाणु संचालित विमानवाहक पोतों के स्वदेशी निर्माण की परिकल्पना की गई है।

उत्तर: a

व्याख्या:

  • प्रोजेक्ट-75 (I) में समकालीन उपकरण, हथियार और सेंसर के साथ छह आधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों के स्वदेशी निर्माण की परिकल्पना की गई है, जिसमें ईंधन-सेल आधारित एआईपी (एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन प्लांट), उन्नत टॉरपीडो, आधुनिक मिसाइल और अत्याधुनिक काउंटरमेजर सिस्टम शामिल हैं।

प्रश्न 3. भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर – मध्यम)

  1. उनका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक होता है।
  2. CEC को वही दर्जा ,वेतन और भत्ते प्राप्त होतें है, जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए निर्धारित किए गए है।
  3. CEC को साबित कदाचार या अक्षमता के आधार पर संसद द्वारा लाए गए प्रस्ताव के माध्यम से उसके पद से हटाया जा सकता है।
  4. मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में किसी व्यक्ति की नियुक्ति के लिए योग्यता के संबंध में संविधान में स्पष्ट निर्देश हैं।

विकल्प:

(a)1,2,3 और 4

(b)केवल 3

(c)केवल 1 और 2

(d)1,2 और 3

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: CEC का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो होता है।
  • कथन 2 सही है: CEC को वही दर्जा ,वेतन और भत्ते प्राप्त होतें है, जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए निर्धारित किए गए है।
  • कथन 3 सही है: CEC को साबित कदाचार या अक्षमता के आधार पर संसद द्वारा पारित प्रस्ताव के माध्यम से पद से हटाया जा सकता है।
  • कथन 4 सही नहीं है: संविधान ने चुनाव आयोग के सदस्यों की योग्यता (कानूनी, शैक्षिक, प्रशासनिक या न्यायिक) निर्धारित नहीं की है।

प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कप और संबंधित खेल की जोड़ी सही सुमेलित है/हैं? (स्तर – कठिन)

  1. थॉमस कप-बैडमिंटन
  2. डेविस कप -टेनिस
  3. राइडर कप -गोल्फ

विकल्प:

(a)केवल 1

(b)केवल 2 और 3

(c)1,2 और 3

(d)केवल 2

उत्तर: c

व्याख्या:

  • उपरोक्त सभी युग्म सही सुमेलित हैं।
  • अत: विकल्प c सही है।

प्रश्न 5. निम्नलिखित में से कौन सा कथन ‘मीथेन हाइड्रेट’ के निक्षेपों के विषय में सही है? PYQ (2019) (स्तर – कठिन)

  1. ग्लोबल वार्मिंग इन निक्षेपों से मीथेन गैस के निष्कासन को तीव्र कर सकती है।
  2. ‘मीथेन हाइड्रेट’ के बड़े भंडार आर्कटिक टुंड्रा और समुद्र के नीचे पाए जाते हैं।
  3. वायुमंडल में मीथेन एक या दो दशक बाद कार्बन डाइऑक्साइड का आक्सीकरण करती है।

निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:

(a)केवल 1 और 2

(b)केवल 2 और 3

(c)केवल 1 और 3

(d)1,2 और 3

उत्तर: d

व्याख्या:

  • कथन 1 सही है: मीथेन हाइड्रेट समुद्र तल के नीचे पाई जाती है और यह आर्कटिक पर्माफ्रॉस्ट के अंदर और अंटार्कटिक बर्फ के नीचे भी दबी है,और ग्लोबल वार्मिंग इन निक्षेपों से मीथेन गैस के निष्कासन को तीव्र कर सकती है।(पर्माफ्रोस्ट- मिट्टी की विशेष तरह की एक मोटी परत है, यह मुख्यतः ध्रुवीय क्षेत्रों में पाई जाती है।)
  • कथन 2 सही है: आर्कटिक टुंड्रा और समुद्र तल के नीचे ‘मीथेन हाइड्रेट’ के बड़े भंडार पाए जाते हैं।
  • कथन 3 सही है: जब मीथेन मानवजनित रूप से उत्सर्जित होती है, तो मीथेन एक या दो दशक बाद वातावरण में ऑक्सीकृत हो जाती है।
  • एक बार ऑक्सीकृत हो जाने पर, प्रत्येक मीथेन अणु कार्बन CO2 में परिवर्तित हो जाता है, जो तब वायुमंडल में CO2 के रूप में एक और शताब्दी या उससे अधिक समय तक रहता है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. वैवाहिक बलात्कार अपवाद एक कानूनी कल्पना पैदा करता है, जहां भले ही बलात्कार के सभी कृत्यों को किया गया हो, लेकिन कानून यह मानता है कि यदि पक्ष विवाहित हैं तो इसे बलात्कार नहीं माना जाएगा। क्या आपको लगता है कि वैवाहिक बलात्कार कानून जरूरी है? औचित्य सिद्ध कीजिए ?(15 अंक, 250 शब्द) (जीएस 1- सामाजिक मुद्दे)

प्रश्न 2. नाटो का ध्यान रूस की क्षेत्रीय आक्रामकता को समाप्त करने पर होना चाहिए न कि नाटो के विस्तार पर। विश्लेषण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) (जीएस 2- अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

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