UPSC परीक्षा कम्प्रेहैन्सिव न्यूज़ एनालिसिस - 21 June, 2022 UPSC CNA in Hindi

21 जून 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

  1. अल साल्वाडोर का बिटकॉइन दांव:
  2. भारत निकट भविष्य की चुनौतियों का सामना कर रहा है: वित्त मंत्री

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

राजव्यवस्था एवं शासन:

  1. न्यायालय का मामला भटकाव विधायी क्षेत्र में:
  2. एक मृत कानून को पुनर्जीवित करना:

अर्थव्यवस्था:

  1. रोजगार सृजन के केंद्र में:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. डच रोग:
  2. ग्रीष्म अयनांत या संक्रांति (Summer Solstice):

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. शाह ने डेटा सुरक्षा का महत्व बताया:
  2. चुनाव आयोग ने 111 ‘गैर-मौजूद’ दलों को सूची से हटाया:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अल साल्वाडोर का बिटकॉइन दांव:

अर्थव्यवस्था:

विषय : संसाधन जुटाने, विकास एवं संवृद्धि से संबंधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा : क्रिप्टोकरेंसी का महत्व और उससे जुडी चिंताएं।

संदर्भ:

  • दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी, बिटकॉइन की कीमत नवंबर 2021 में $ 69,000 के रिकॉर्ड उच्च स्तर से हाल के हफ्तों में लगभग 20,000 डॉलर तक गिर गई है।
  • विशेष रूप से बिटकॉइन की कीमतों और सामान्य रूप से क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।
  • इससे दुनिया भर के निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है।

पृष्ठ्भूमि:

  • अल साल्वाडोर द्वारा बिटकॉइन को आधिकारिक मुद्रा के रूप में अपनाना:
  • मध्य अमेरिकी देश अल सल्वाडोर ने सितंबर 2021 में बिटकॉइन को आधिकारिक मुद्रा के रूप में अपनाया था।
  • तब से, इस देश की सरकार नागरिकों को अपने दैनिक लेनदेन के लिए मुख्य रूप से बिटकॉइन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रही है।
  • नागरिकों को बिटकॉइन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने के लिए, सरकार ने चिवो नाम का एक पेमेंट वॉलेट भी पेश किया हैं,जिसमे एक बार $30 मुफ्त बिटकॉइन दिया जाता हैं।
  • अल सल्वाडोर सरकार ने देश में बिटकॉइन माइनिंग को बिजली देने के लिए भू-तापीय संयंत्र भी स्थापित किए हैं।
  • अल सल्वाडोर द्वारा आधिकारिक मुद्रा के रूप में बिटकॉइन को अपनाने और इसके महत्व और चिंताओं के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए 13 जून 2021 का व्यापक समाचार विश्लेषण देखें।

अल साल्वाडोर द्वारा बिटकॉइन को अपनाने के कारण:

  • अल सल्वाडोर का सार्वजनिक ऋण उसके सकल घरेलू उत्पाद के 100% से भी अधिक हो गया था, जो ज्यादातर सरकार के सार्वजनिक धन के कुप्रबंधन के कारण था।
  • इसी क्रम में सरकार की खर्च की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकारी बॉन्ड या अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से धन जुटाने के सरकार के प्रयास सफल नहीं हो रहे थे।
  • इस संदर्भ में अधिकांश आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि अल सल्वाडोर में बिटकॉइन को आधिकारिक मुद्रा के रूप में अपनाने का निर्णय सरकार की अमेरिकी डॉलर में उधार लेने में असमर्थता का परिणाम हो सकता है।
  • विशेष रूप से, 2001 में, अल सल्वाडोर ने अमेरिकी डॉलर को अपनी आधिकारिक मुद्रा के रूप में अपनाया।
  • पिछले साल से बिटकॉइन को आधिकारिक मुद्रा के रूप में अपनाने के बाद से, वर्तमान में, अल साल्वाडोर में बिटकॉइन और अमेरिकी डॉलर दोनों को आधिकारिक मुद्राओं के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
  • इस सन्दर्भ में बिटकॉइन अल सल्वाडोर सरकार को अपने घरेलू खर्च को वित्त की आपूर्ति करने और अपने बाहरी ऋणों को चुकाने के लिए अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता में कटौती करने का अवसर प्रदान करता है।

अल साल्वाडोर में बिटकॉइन का प्रदर्शन/गुणवत्ता:

  • अल साल्वाडोर के अधिकांश नागरिक बिटकॉइन को विनिमय के माध्यम या कानूनी निविदा के रूप में अपनाने के अनिच्छुक रहे हैं, मुख्य रूप से बिटकॉइन की कीमत में अत्यधिक मूल्य अस्थिरता के कारण।
  • यह एक बड़ा कारण हैं जिसके कारण लोग बिटकॉइन को अपनाने के लिए निरुत्साही होते है क्योंकि भविष्य में बिटकॉइन के मूल्य पर बड़ी अनिश्चितता बनी रहेगी।

बिटकॉइन मूल्य में गिरावट के कारण अल सल्वाडोर के सम्बन्ध में चिंताएं:

  • अल साल्वाडोर सरकार के बिटकॉइन में 100 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश करने से इसकी कीमत में हुई गिरावट के कारण सरकार के निवेश का मूल्य लगभग आधा रह गया है।
  • अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बिटकॉइन की कीमत में गिरावट का मतलब है कि सरकार को अपने बिटकॉइन को कम डॉलर में बेचना होगा,जिसका मतलब है डॉलर के कर्ज को चुकाने की उसकी क्षमता भी प्रभावित होगी।

सारांश:

  • क्रिप्टोकरेंसी को अपनाने के संबंध में अल सल्वाडोर का अनुभव भारत सहित दुनिया भर के देशों के लिए क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य पर मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में लगातार बना रहता उतार-चढ़ाव उसको व्यापक रूप से अपनाने के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

भारत निकट भविष्य की चुनौतियों का सामना कर रहा है: वित्त मंत्री

अर्थव्यवस्था:

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन, संसाधनों, विकास तथा रोजगार से संबंधित मुद्दे।

प्रारंभिक परीक्षा: महत्वपूर्ण आर्थिक शब्दावली- राजकोषीय घाटा और चालू खाता घाटा।

मुख्य परीक्षा: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां और सिफारिशें।

संदर्भ:

  • वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक रिपोर्ट।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निकट भविष्य की चुनौतियां:

  • रिपोर्ट में मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने, राजकोषीय घाटे और चालू खाता घाटे के प्रबंधन, आर्थिक विकास को बनाए रखने और रुपये के उचित मूल्य को बनाए रखने में निकट भविष्य की चुनौतियों की चेतावनी दी गई है।
  • वर्तमान में कच्चे और खाद्य तेल की बढ़ी हुई वैश्विक कीमतें अर्थव्यवस्था में उच्च खुदरा मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी कर रही हैं।
  • फसल उत्पादन पर गर्मी में हीट वेव के प्रभाव ने इस मुद्रास्फीति के दबाव को और भी अधिक बढ़ा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप घरेलू स्तर पर खाद्य कीमतों में वृद्धि हुई है।
  • अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के स्तर को नियंत्रित करने के लिए डीजल और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में हालिया कटौती से राजकोषीय घाटे में वृद्धि का जोखिम बढ़ गया है क्योंकि इससे सरकारी राजस्व में काफी कमी आएगी।
  • केवल अतिरिक्त कल्याण और सब्सिडी खर्च ने सकल बजट घाटे पर दबाव बढ़ा दिया है।
  • राजकोषीय घाटे में वृद्धि से चालू खाता घाटा बढ़ सकता है, आयात महंगा हो सकता हैं,जिसके कारण इसका प्रभाव और नकारात्मक हो सकता है, यह रुपये के मूल्य को कमजोर कर सकती है जिससे बाहरी असंतुलन बढ़ सकता है एवं व्यापक घाटे और कमजोर मुद्रा के चक्र का जोखिम पैदा हो सकता है।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था जो महामारी से प्रेरित व्यवधान के कारण पहले से ही दबाव में थी, इन अतिरिक्त वैश्विक कारकों की वजह से इसके विकास में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
  • आपूर्ति श्रृंखला में आ रही अड़चनें वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि,मौद्रिक सुविधाओं की अनुमानित वापसी की तुलना में तेजी से योगदान दे रही हैं,जो भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।
  • उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में मात्रात्मक सख्ती के कारण भारत से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में बड़े पैमाने पर बहिर्वाह हो रहा है।
  • इससे रुपये में गिरावट का खतरा बना हुआ है।
  • उच्च मुद्रास्फीति और कम वृद्धि की संभावना से मुद्रास्फीतिजनित मंदी की संभावित चिंताएं पैदा होती हैं।
  • मुद्रास्फीतिजनित मंदी (Stagflation) एक ऐसी स्थिति है जिसमें मुद्रास्फीति की दर अधिक होती है, आर्थिक विकास दर धीमी हो जाती है और बेरोजगारी बढ़ जातीं है।

भारत निकट भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए अच्छी स्थिति में है:

  • रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अन्य देशों की तुलना में निकट अवधि की चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है।

इसके निम्नलिखित कारण बताये गए हैं:

  • भारतीय अर्थव्यवस्था में अपेक्षाकृत वित्तीय क्षेत्र की बेहतर स्थिरता,जनसंख्या के तेजी से टीकाकरण ने अर्थव्यवस्था को तेजी से पुनः खोलने में सक्षम बनाया है।
  • भारत वर्ष 2022-23 में सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। पिछले वित्त वर्ष (2021-22) में भारत की अर्थव्यवस्था 8.7 प्रतिशत बढ़ी, जबकि पिछले वर्ष में यह 6.6 प्रतिशत थी।
  • इसे महामारी के बाद आर्थिक सुधार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
  • कृषि क्षेत्र में निरंतर वृद्धि और निर्यात में वृद्धि के साथ-साथ बढ़ते निवेश इस को मजबूत करते प्रतीत होते हैं।
  • भारत की मध्यम अवधि की विकास संभावनाएं उज्ज्वल बनी हुई हैं,क्योंकि आने वाले दशक में निजी क्षेत्र के क्षमता विस्तार से पूंजी निर्माण और रोजगार सृजन की उम्मीद है।
  • पूंजीगत व्यय पर जोर देने से आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी।

सिफारिशें:

  • रिपोर्ट में भारत में व्यापक आर्थिक स्थिरता का त्याग किए बिना अल्पकाल की चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
  • यह निकट अवधि के विकास पर व्यापक आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देने का आह्वान करता है।
  • सरकार को खर्च पर नियंत्रण रखना चाहिए। इसके लिए सरकार द्वारा सीमा रहित व्यय को युक्तिसंगत बनाने की आवश्यकता होगी।
  • यह न केवल सरकार को सीमा निर्धारित विकास-सहायक की रक्षा करने में मददगार साबित होगा, बल्कि राजकोषीय फिसलन/गिरावट को कम करने भी मदद करेगा।

सारांश:

  • भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कई निकट-अवधि की चुनौतियां बनी हुई हैं, जिसके लिए विकास की गति को बनाए रखने, बजट के भीतर राजकोषीय घाटे को बनाए रखने और कुशल नीतियों के माध्यम से मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के बीच एक बेहतर संतुलन बनाने की आवश्यकता होगी।

संपादकीय-द हिन्दू

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

न्यायालय का मामला भटकाव विधायी क्षेत्र में:

विषय: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और निर्देश।

प्रारंभिक परीक्षा: IPC की धारा 498A।

संदर्भ:

  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के दुरुपयोग के आरोपों के मद्देनजर कई निर्देश जारी किए हैं।
    • IPC की धारा 498A के अनुसार जो कोई भी, किसी महिला का पति या पति का रिश्तेदार, महिला के साथ क्रूरता करता है, उसे 1 वर्ष के कारावास की सजा दी जाएगी और उसेको 3 वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकता है तथा जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

विवरण:

  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने IPC की धारा 498A के दुरुपयोग से बचने के लिए कुछ सुरक्षा उपायोंकी सिफारिश की थी जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं।
  • उच्च न्यायालय ने पुलिस को दहेज मामले में आरोपी को “कूलिंग पीरियड” के समापन तक गिरफ्तार नहीं करने का निर्देश दिया है, जिसे उच्च न्यायालय ने प्रथम सूचना रिपोर्ट [एफआईआर] के पंजीकरण से दो महीने के लिए निर्धारित किया है।
      • भारतीय दंड संहिता या आपराधिक प्रक्रिया संहिता में शीतलन अवधि के लिए कोई प्रावधान नहीं है।
  • धारा 498A IPC और अन्य संबद्ध धाराओं के तहत प्रत्येक शिकायत या आवेदन को संबंधित मजिस्ट्रेट द्वारा प्रत्येक जिले में स्थापित की जाने वाली परिवार कल्याण समिति को तुरंत भेजा जाएगा।
      • केवल उन मामलों को FWC को प्रेषित किया जाएगा जिनमें धारा 498-A IPC से समबंधित हो उसमें कोई चोट न आई हों तथा धारा 307 (हत्या का प्रयास) एवं IPC की अन्य धाराएं जिनमें कारावास 10 साल से कम हो।
  • शिकायत प्राप्त होने के बाद, समिति दोनों पक्षों को बुलाएगी और प्रथिमिकी दर्ज होने से दो महीने की अवधि के भीतर वैवाहिक विवाद को निपटाने का प्रयास करेगी।
  • साथ ही, समिति विचार-विमर्श करने के बाद, एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी और मामले के सभी तथ्यात्मक पहलुओं और उनकी राय को संबंधित मजिस्ट्रेट/पुलिस अधिकारियों को संदर्भित करेगी।

फैसले से संबंधित चिंता :

  • हालांकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्देश नेक इरादे के साथ त्रुटिपूर्ण प्रतीत होता हैं।

सुप्रीम कोर्ट की पिछली टिप्पणियों के खिलाफ:

  • विशेष रूप से, मानव अधिकार बनाम भारत संघ (2018) मामले के लिएसोशल एक्शन फोरम में सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह की समितियों का गठन किया था और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत गिरफ्तारी पर प्रतिबंध लगा दिया था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने राजेश शर्मा बनाम द स्टेट ऑफ यूपी, 2017 मामले में भी इसी तरह का निर्णय दिया था।

प्रावधानों को कम करना:

  • संबंधित मामले में अदालत के निर्देश, राजेश शर्मा मामले में निर्धारित निर्देशों को कम करते हैं। जैसे कि, यदि वैवाहिक झगड़े के दौरान किसी महिला की हड्डी टूट जाती है या उसके पति द्वारा किसी आंख या कान या जोड़ को अंगभंग कर दिया जाता है, तो पुलिस ऐसे मामलों में गिरफ्तारी करने में सक्षम होगी तथा गंभीर चोट में निर्धारित अधिकतम सात वर्ष का कारावास का प्रावधान है।
  • साथ ही नए निर्देशों के अनुसार कूलिंग-अवधि को एक महीने (राजेश शर्मा मामले के अनुसार) से बढ़ाकर दो महीने कर दिया गया है। इससे कूलिंग पीरियड के दौरान दोबारा अपराध होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • ऐसी चिंताएं हैं कि इन निर्देशों से दहेज उत्पीड़न की वास्तविक पीड़िता के अधिकारों में कमी आ सकती है।

न्यायपालिका द्वारा अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण:

  • इस पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये निर्देश उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं, क्योंकि CrPC के तहत पहले से ही जांच की स्पष्ट रूपरेखा निर्धारित है तथा गिरफ्तारी के संबंध में कोई अस्पष्टता मौजूद नहीं है, जिसकी व्याख्या न्यायपालिका द्वारा की जानी पड़े।
  • विशेष रूप से, दहेज प्रावधानों की संवैधानिकता पहले से ही न्यायपालिका द्वारा निर्धारित है। IPC की धारा 498A का दुरुपयोग अपने आप में इसे कमजोर करने और ऐसे निर्देश जारी करने का आधार नहीं हो सकता है जो संहिता के किसी प्रावधान में नहीं हैं तथा यह विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आएगा।
  • साथ ही परिवार कल्याण समिति तीसरी एजेंसी होने के कारण दहेज के मामलों से निपटने के लिए सही निकाय नहीं हो सकती है तथा इसके तहत जब तक समिति द्वारा रिपोर्ट पेश नहीं की जाती तब तक गिरफ्तारी को रोका जा रहा है।

सुझाव:

  • हाल के निर्देशों से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए, इस लेख में दहेज कानून के प्रावधानों के दुरुपयोग से बचने के साथ-साथ सख्त दहेज विरोधी प्रावधानों की आवश्यकता को संतुलित करने के लिए कुछ सिफारिशें की गई है।

अर्नेश कुमार मामले में अदालत के निर्देशों को लागू करना:

  • पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आरोपी व्यक्ति के खिलाफ गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त कारण और विश्वसनीय सामग्री है या नहीं।
  • जांच अधिकारियों को अर्नेश कुमार मामले में न्यायपालिका द्वारा निर्धारित सिद्धांतों का प्रशिक्षण देकर, पुलिस बल की सख्त जवाबदेहीता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

धारा 498ए में परिवर्तन:

  • विधायिका को IPC की धारा 498A को जमानती बनाने पर विचार करना चाहिए।
  • विधायिका को IPC की धारा 498A को अपराध के तहत संशोधित करने तथा उसे समाज अनुकूल बनाने पर विचार करना चाहिए ताकि सक्षम अदालत की अनुमति या उसके बिना समझौता किया जा सके। इससे न केवल विवाद में पक्षकारों की लागत की बचत होगी बल्कि न्यायपालिका का कीमती समय भी बचेगा।

मध्यस्थता के लिए गुंजाइश:

  • आगामी मध्यस्थता विधेयक 2021 में नागरिको द्वारा वैवाहिक विवाद को निपटान हेतु संस्थागत मध्यस्थता तंत्र का प्रावधान होना चाहिए।

सारांश:

  • हालांकि मौजूदा कानूनों के दुरुपयोग को रोकने के किसी भी प्रयास का स्वागत है, लेकिन यह वास्तविक पीड़ितों के अधिकारों की कीमत पर नहीं हो सकता है। साथ ही, शक्तियों के पृथक्करण को सुनिश्चित करने हेतु न्यायपालिका के बजाय विधायिका को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

रोजगार सृजन के केंद्र में:

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से संबंधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा: भारत में रोजगार के परिदृश्य को लेकर चिंता।

सन्दर्भ:

  • प्रधान मंत्री ने घोषणा की है कि आगामी 18 महीनों में 10 लाख सरकारी नौकरियां प्रदान की जाएंगी। इससे अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी की चुनौती और रोजगार के अवसर सृजित करने उम्मीद जगी है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार परिदृश्य से संबंधित चिंताएं:

रोजगार के रुझान:

  • भले ही श्रम बल और कार्यबल की भागीदारी दर में मामूली वृद्धि हुई है, फिर भी सामान्य रूप से शिक्षित बेरोजगारी दर (माध्यमिक विद्यालय और उच्च विद्यालय ) और शहरी क्षेत्रों में युवा बेरोजगारी (15-29 वर्ष) दोहरे अंकों में हैं।

रोजगार क्षेत्र में सरकार की घटती भूमिका:

  • राज्य और केंद्र सरकार दोनों स्तरों पर सरकार में बड़ी रिक्तियां बनी हुई हैं। केंद्र सरकार के विभागों में मौजूदा रिक्तियों की संख्या वर्तमान में 8,72,243 है। साथ ही, हाल के वर्षों में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (CPSEs) नौकरियां में कमी कर रहे हैं। ये रुझान सरकारी क्षेत्र में भविष्य के रोजगार के रुझान हेतु अच्छा संकेत नहीं हैं।

रोजगार पैदा करने के लिए निजी क्षेत्र की सीमित क्षमता:

  • निजी क्षेत्र पर्याप्त रोजगार सृजित करने में सक्षम नहीं रहा है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगारविहीन विकास का संकेत है। हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र या आधुनिक गिग अर्थव्यवस्था ने नौकरियां सृजित की हैं, ये नौकरियां या तो बहुत उच्च-कुशल योग्यता की हैं या कम-कुशल योग्यता की हैं

नौकरी के अवसरों की गुणवत्ता में गिरावट:

  • नौकरियों की गुणवत्ता में गिरावट आई है।
  • विगत कुछ वर्षों में स्वरोजगार के अवैतनिक वर्ग में वृद्धि हुई है और कुल रोजगार में कृषि क्षेत्र में वृद्धि हुई है। कम उत्पादकता वाला यह क्षेत्र मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत नहीं है।
  • अनौपचारिक उद्यमों में – 2017-18 से 2020-21 तक पुरुषों (71% से 75%), महिलाओं (55% से 57%) और सभी व्यक्तियों (68% से 71%) के रोजगार में वृद्धि हुई है।

विश्वसनीय रोजगार डेटा का अभाव:

  • भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण रोजगार के आंकड़ों का अभाव है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन/राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली/कर्मचारी राज्य बीमा योजना पंजीकरण और औपचारिक श्रम बाजार के आंकड़ो पर निर्भरता अप्रासंगिक है तथा यह रोजगार सृजन के बजाय औपचारिकता को अधिक इंगित करती है।

सामाजिक सुरक्षा का अभाव:

  • नियमित वेतनभोगी कामगारों का हिस्सा, जिनके पास औपचारिक रोजगार अनुबंध, भुगतान छुट्टी तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा पात्रता नहीं थी की संख्या में दोनों लिंगों में कमी आई है, लेकिन रोजगार स्तर अभी भी उच्च है।

सुझाव:

  • सरकार को अपने मंत्रालयों और CPSE में नौकरियों और मनरेगा जैसे सुनिश्चित रोजगार सृजन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रमुख रोजगार सृजनकर्ता बनाना चाहिए। यह एक स्थायी श्रम बाजार सुनिश्चित करने का दीर्घकालिक उपाय होगा।
  • सृजित नौकरियों की मात्रा पर सामान्य जोर देने के अलावा अच्छे काम करने की भी आवश्यकता है। इन नौकरियों में मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना चाहिए।

सारांश:

  • भारतीय अर्थव्यवस्था में संबंधित रोजगार परिदृश्य के साथ-साथ बेरोजगारी वृद्धि की घटनाए देखी गई है, इसलिए सरकार को भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रमुख रोजगार सृजक के रूप में अपनी भूमिका को पुनर्स्थापित करना आवश्यक है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

एक मृत कानून को पुनर्जीवित करना:

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से संबंधित मुद्दे।

प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 253।

मुख्य परीक्षा: द्वैतवादी और अद्वैतवाद राज्य की अवधारणा।

संदर्भ:

  • साइबर अपराध से निपटने हेतु प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संधि के लिए संयुक्त राष्ट्र में हो रही वार्ता में, भारत ने “आक्रामक संदेशों” को अपराधीकरण श्रेणी में रखने का प्रस्ताव किया है। विशेष रूप से, भारत द्वारा किए गए सबमिशन में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 A में उल्लिखित प्रावधान शामिल हैं। इसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 A को पुनः लागू करने के संभावित प्रयास के रूप में वर्णित किया जा रहा है जिसे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2015 में श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ के मामले में “स्वतंत्र भाषण पर द्रुतशीतन प्रभाव (chilling effect on free speech)” तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के खिलाफ होने के कारण असंवैधानिक घोषित किया था।

धारा 66A और श्रेया सिंघल मामले पर अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित लेख पढ़े:

https://byjus.com/free-ias-prep/upsc-exam-comprehensive-news-analysis-july14-2021/

  • इस संदर्भ में, लेख विकास से संबंधित कुछ पहलुओं की जांच करता है।

द्वैतवादी बनाम अद्वैतवाद:

  • भारत एक द्वैतवादी राज्य है।
    • एक द्वैतवादी मॉडल के तहत, अंतरराष्ट्रीय कानूनी दायित्वों के बीच द्वैतवाद है जिसमे देशों को अपने विदेशी संबंधों और घरेलू कानूनी नियमों को मान्यता देने पर सहमत होना पड़ता हैं, जो देश और उसके नागरिकों के बीच आंतरिक संबंधों के साथ बाध्यकारी होता हैं I
    • यह अद्वैतवाद से अलग होता है जिसमें घरेलू कानून का समर्थन किए बिना भी अंतरराष्ट्रीय कानून स्वचालित रूप से देश की घरेलू कानूनी प्रणाली में शामिल हो जाता है।
  • इसलिए, अंतरराष्ट्रीय कानून भारत की कानूनी प्रणाली का हिस्सा नहीं बन पाता है जब तक कि इसे विशेष रूप से संसद द्वारा कानूनी न बनाया जा सके।

इस मुद्दे पर न्यायपालिका का दृष्टिकोण:

  • हाल के दिनों में, भारत का सर्वोच्च न्यायालय के पारंपरिक द्वैतवादी दृष्टिकोण से अद्वैतवाद की ओर रूपांतरित हो रहा है। विशाखा बनाम राजस्थान राज्य (1997), राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ (2014) तथा के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2018), मामलों में न्यायपालिका ने घरेलू कानूनों के किसी विशिष्ट प्रावधान के अभाव में अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रावधानों को घरेलू कानून में शामिल करने की अनुमति दी है।
  • न्यायालयों ने संकेत दिया है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करेंगे जब तक कि यह नहीं दिखाया जा सकता कि यह नगरपालिका कानून के साथ असंगत है।

संबंधित संवैधानिक प्रावधान:

  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 253 अंतरराष्ट्रीय समझौतों को प्रभावी बनाने हेतु कानून निर्माण की अनुमति देता है। इसमें कहा गया है कि संसद को किसी अन्य देश या देशों के साथ किसी भी संधि, समझौते को लागू करने या किसी भी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, संघ या अन्य निकाय में किए गए किसी भी निर्णय को भारत के पूरे क्षेत्र या किसी भी हिस्से में लागू करने के लिए कानून बनाने की शक्ति है।

सारांश:

  • एक अंतरराष्ट्रीय कानून भारत में घरेलू कानूनी प्रणाली का हिस्सा नहीं बन पाता है जब तक कि इसे विशेष रूप से संसद द्वारा घरेलू कानून में तब्दील नहीं किया जाता है तथा इस तरह के प्रावधान को न्यायपालिका की संवैधानिक कसौटी पर खरा उतरने में सक्षम होना चाहिए।

प्रीलिम्स तथ्य:

1. डच रोग:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

विषय: महत्वपूर्ण आर्थिक शब्दावली।

प्रारंभिक परीक्षा: डच रोग।

  • अर्थशास्त्र में डच रोग एक ऐसी घटना को संदर्भित करता है जिसमें एक देश प्राकृतिक संसाधनों, विशेष रूप से बड़े तेल भंडार की खोज के कारण कुछ क्षेत्रों में असमान विकास को इंगित करता है।
  • यह एक विशिष्ट क्षेत्र के आर्थिक विकास में वृद्धि और अन्य क्षेत्रों में गिरावट के बीच एक स्पष्ट कारण संबंध बताता है।
  • इस अवधारणा के अनुसार, जब कोई देश प्राकृतिक संसाधनों की खोज करता है और उन्हें शेष विश्व में निर्यात करना शुरू करता है,तो यह मुद्रा की विनिमय दर को मजबूत बनाता है।
  • यह आयात को प्रोत्साहित करते हुए अन्य क्षेत्रों से निर्यात की कीमत प्रतिस्पर्धात्मकता को कम करता है।
  • लंबे समय में, ये कारक बेरोजगारी बढ़ा सकते हैं, क्योंकि विनिर्माण नौकरियां कम लागत वाले देशों में चली जाती हैं।
  • उत्तरी सागर में गैस के भंडार की खोज के बाद नीदरलैंड में विनिर्माण उद्योग की गिरावट का वर्णन करने के लिए ‘डच रोग’ शब्द पहली बार 1977 में गढ़ा गया था।

2. ग्रीष्म अयनांत या संक्रांति (Summer Solstice):

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

भूगोल :

विषय: महत्वपूर्ण भूगोल शब्दावली।

प्रारंभिक परीक्षा: ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice)।

  • 21 जून उत्तरी गोलार्ध के लिए वर्ष का सबसे लंबा दिन और दक्षिणी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन है।
  • इसे ग्रीष्म संक्रांति कहते हैं। यह वह दिन है जब सूर्य सीधे कर्क रेखा के ऊपर होता है। कर्क रेखा पृथ्वी पर अक्षांश का सबसे उत्तरी वृत्त है जिस पर सूर्य सीधे ऊपर की ओर चमकता है।
  • इस दिन उत्तरी ध्रुव सूर्य की ओर झुका और दक्षिणी ध्रुव सूर्य से दूर होता है। इसलिए उत्तरी गोलार्द्ध में दिन लंबे और दक्षिणी गोलार्द्ध में छोटे होते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य:

1. शाह ने डेटा सुरक्षा का महत्व बताया:

  • साइबर सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए, केंद्रीय गृह मंत्री ने मैलवेयर हमलों, फ़िशिंग और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर होने वाले साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं का उल्लेख किया हैं।
  • उन्होंने कहा कि 2012 में पंजीकृत साइबर अपराधों की संख्या 3,377 थी और 2020 में यह बढ़कर 50,000 से अधिक हो गयी थी और वर्ष 2025 तक इस अपराध दर के 231% बढ़ने का अनुमान हैं।
  • देश में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए जन जागरूकता पैदा करने के प्रयासों के तहत गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था।
  • मंत्री ने डेटा गोपनीयता को बनाए रखने और साइबर हमलों से महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा का आह्वान किया हैं।

2. चुनाव आयोग ने 111 ‘गैर-मौजूद’ दलों को सूची से हटाया:

  • चुनाव आयोग ने 111 पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को हटाने का आदेश दिया है।
  • नए पंजीकृत दल वे दल हैं जो किसी राज्य का राजनितिक दल बनने के लिए विधानसभा या आम चुनावों में पर्याप्त प्रतिशत वोट हासिल नहीं कर पाए हैं, या जिन्होंने पंजीकृत होने के बाद से कभी चुनाव नहीं लड़ा है, उन्हें गैर-मान्यता प्राप्त दल माना जाता है।
  • इन दलों पर यह कार्रवाई इसलिए की गई है क्योंकि इन दलों को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धाराओं का उल्लंघन करते हुए पाया गया था।
  • साथ ही, इनमें से तीन पक्षों को गंभीर वित्तीय अनियमितता में लिप्त होने के लिए आवश्यक कानूनी और आपराधिक कार्रवाई के लिए राजस्व विभाग को भेजा गया है।
  • इन पार्टियों पर मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का संदेह है। पोल पैनल का मानना है कि उनमें से ज्यादातर लोगों को दान स्वीकार करके अपने पुराने पैसे को सफेद करने में मदद करने के लिए कागजों पर ऐसी पार्टियों का वजूद मौजूद हैं।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. सिंगल यूज प्लास्टिक के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – कठिन)

  1. प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार, भारत में गुटखा, तंबाकू और पान मसाला के भंडारण, पैकिंग या बिक्री हेतु प्लास्टिक सामग्री का उपयोग करने वाले पाउच पर पूर्ण प्रतिबंध है।
  2. बांग्लादेश वर्ष 2002 में पतले प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बना।
  3. वानुअतु और सेशेल्स ने प्लास्टिक के कूड़ा करकट पर एकमुश्त प्रतिबंध लगा दिया है।

सही कथन का चयन कीजिए:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: d

व्याख्या:

  • प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (पीडब्लूएम) नियम, 2016 के अनुसार, गुटखा, तंबाकू और पान मसाला के भंडारण, पैकिंग या बिक्री के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्लास्टिक सामग्री का उपयोग करने वाले पाउच पर पूर्ण प्रतिबंध है।
  • पीडब्लूएम (संशोधित) नियम, 2021 के अनुसार, पचहत्तर माइक्रोन से कम के शुद्ध या पुनर्नवीनीकरण प्लास्टिक से बने कैरी बैग के निर्माण, आयात, स्टॉकिंग, वितरण, बिक्री और उपयोग पर 30 सितंबर, 2021 से प्रतिबंध लगा दिया गया है। पीडब्लूएम नियम, 2016 के तहत पहले पचास माइक्रोन की सिफारिश की गई थी।
  • इसके अतिरिक्त, 12 अगस्त 2021 की अधिसूचना, 1 जुलाई, 2022 से कम उपयोगिता और उच्च कूड़े की क्षमता वाली चुनिंदा एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं के निर्माण, आयात, स्टॉकिंग, वितरण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाती है।
  • 2002 में, विनाशकारी बाढ़ के दौरान जल निकासी व्यवस्था को अवरुद्ध करने के बाद पतले प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध लगाने वाला बांग्लादेश दुनिया का पहला देश बन गया हैं।
  • केवल दो देशों,वानुअतु और सेशेल्स ने प्लास्टिक के कूड़ा करकट पर एकमुश्त प्रतिबंध लगा दिया है।

प्रश्न 2. ‘ब्लैक स्वान इवेंट’ एक मुहावरा है जो अक्सर चर्चा में रहता है। इसका क्या मतलब है? (स्तर – सरल)

(a) मानवीय गतिविधियों से प्रेरित एक प्राकृतिक आपदा।

(b) एक दुर्लभ, अप्रत्याशित घटना जिसका समाज या दुनिया पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

(c) एक कानून जो वन्यजीवों के हितों के खिलाफ माना जाता है।

(d) देश में समुद्री जीवन को संरक्षित करने के लिए विशेष रूप से तैयार की गई एक पहल।

उत्तर: b

व्याख्या:

  • “ब्लैक स्वान” एक दुर्लभ, अप्रत्याशित घटना है,जो एक आश्चर्य के रूप में आता है और समाज या दुनिया पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है।

प्रश्न 3. ट्रांसजेंडर एथलीटों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – कठिन)

  1. अक्टूबर 2021 में, विश्व रग्बी ओलंपिक और महिला रग्बी विश्व कप जैसी वैश्विक प्रतियोगिताओं में प्रतिस्पर्धा करने वाली ट्रांसजेंडर महिलाओं पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला अंतरराष्ट्रीय खेल शासी निकाय बन गया।
  2. हाल ही में, अंतर्राष्ट्रीय तैराकी (FINA) संघ ने ट्रांसजेंडर एथलीटों को महिला प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति देने के खिलाफ मतदान किया – इसमें शर्त यह तय की गई कि एक ट्रांसजेंडर एथलीट 12 साल की उम्र से पहले अपना लिंग परिवर्तन करवा ले।
  3. 2021 टोक्यो ओलंपिक में, कनाडाई एथलीट क्विन ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली ट्रांसजेंडर एथलीट बनीं।

सही कथन का चयन कीजिए:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: d

व्याख्या:

  • अंतर्राष्ट्रीय तैराकी (FINA) ने ट्रांसजेंडर एथलीटों को महिला प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति देने के खिलाफ मतदान किया है।
  • अक्टूबर 2021 में, विश्व रग्बी वैश्विक प्रतियोगिताओं में प्रतिस्पर्धा करने वाली ट्रांसजेंडर महिलाओं पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला अंतरराष्ट्रीय खेल शासी निकाय बन गया।
  • क्विन एक कनाडाई पेशेवर फ़ुटबॉल खिलाड़ी और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता हैं जो कनाडा की राष्ट्रीय टीम के लिए खेलते हैं।

प्रश्न 4. निम्नलिखित में से किस देश ने बिटकॉइन को आधिकारिक मुद्रा के रूप में अपनाया था? (स्तर – सरल)

(a) इक्वेडोर

(b) सेंट किट्स एंड नेविस

(c) एल साल्वाडोर

(d) सैन मैरीनो

उत्तर: c

व्याख्या:

  • मध्य अमेरिकी देश अल सल्वाडोर ने सितंबर 2021 में बिटकॉइन को आधिकारिक मुद्रा के रूप में अपनाया था।

प्रश्न 5. वर्ष 2000 में स्थापित लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवार्ड के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर – कठिन)

  1. अमेरिकी गोल्फर टाइगर वुड्स इस पुरस्कार के पहले विजेता थे।
  2. यह पुरस्कार अब तक ज्यादातर ‘फॉर्मूला वन’ खिलाड़ियों को मिला है।
  3. रोजर फेडरर को यह पुरस्कार दूसरों की तुलना में सबसे अधिक बार मिला है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन से सही हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: c

व्याख्या:

  • लॉरियस वर्ल्ड स्पोर्ट्स अवार्ड वर्ष की सबसे बड़ी और सबसे प्रेरणादायक खेल जीत का सम्मान करता है।
  • अमेरिकी गोल्फर टाइगर वुड्स इस पुरस्कार के पहले विजेता थे।
  • यह पुरस्कार अब तक ज्यादातर टेनिस खिलाड़ियों ने जीता है और रोजर फेडरर को यह पुरस्कार अब तक सबसे अधिक बार (5 बार) मिला है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. ‘न्यायिक अतिरेक’ शब्द से आप क्या समझते हैं ? भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के दुरुपयोग के संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हालिया निर्देशों के संदर्भ में जांच कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस पेपर 2- राजनीति)

प्रश्न 2. श्रेया सिंघल मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर जोर देते हुए आईटी अधिनियम की धारा 66 ए से सम्बंधित विवाद का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए । (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस पेपर 2- राजनीति)

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