UPSC परीक्षा कम्प्रेहैन्सिव न्यूज़ एनालिसिस - 27th Apr, 2022 UPSC CNA in Hindi

27 अप्रैल 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

  1. USCIRF ने भारत को विशेष श्रेणी में रखा :
  2. ‘चीन के पास जीरो-कोविड से बाहर निकलने की रणनीति नहीं’:

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

सुरक्षा चुनौतियां:

  1. सशुल्क सदस्यता के माध्यम से मुक्त भाषण : एलोन मस्क द्वारा ट्विटर का अधिग्रहण

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

राजव्यवस्था एवं शासन:

  1. ‘मिशन अंत्योदय’ में ढील नहीं होनी चाहिए:

शासन:

  1. एक बिखरा हुआ ‘तंत्रिका केंद्र’:

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

  1. भारत एक लोकतांत्रिक महाशक्ति के रूप में:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. भारतीयता ही एक जाति: PM:
  2. मंदिरों की ई-वे पूजा ने लिया डिजिटल मोड़:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

USCIRF द्वारा भारत को विशेष श्रेणी में रखना:

विषय: भारत के हितों पर विकसित एवं विकासशील देशों की नीतियां और राजनीति का प्रभाव।

प्रारंभिक परीक्षा: यूएससीआईआरएफ (USCIRF),के विशेष चिंता वाले देश’ (सीपीसी) के बारे में जानकारी।

मुख्य परीक्षा: भारत हेतु USCIRF की सिफारिशें एवं इसके निहितार्थ।

प्रसंग:

  • हाल ही में, यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2022 जारी की। USCIRFने अपनी रिपोर्ट में भारत को रेड लिस्ट में रखा है।

यूएससीआईआरएफ (USCIRF):

  • 1998 के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (IRFA) द्वारा USCIRF को एक स्वतंत्र, द्विदलीय निकाय के रूप में स्थापित किया गया था।
  • यह आयोग दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन पर नज़र रखता है और राष्ट्रपति, राज्य सचिव और कांग्रेस (USA)को नीतिगत सुझाव देता है।
  • यह किसी भी प्रकार का कोई गैर सरकारी संगठन या वकालत समूह नहीं है, बल्कि अमरीकी कांग्रेस द्वारा बनाई गई इकाई है।
  • इस इकाई का नेतृत्व अमरीका के राष्ट्रपति वहां के दोनों राजनीतिक दलों के सांसदों और सीनेट द्वारा नियुक्त नौ अंशकालिक आयुक्तों द्वारा किया जाता है।

‘विशेष चिंता वाले देश का’ (‘Country of Particular Concern’ (CPC) ) पदनाम/श्रेणी का अर्थ:

  • IRFA के अनुसार, CPC ऐसे देश हैं जिनकी सरकारें धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करती हैं,जिसे “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता के मान्यता प्राप्त अधिकार का व्यवस्थित एवं सुचारु तरीके से चल रहे,गंभीर उल्लंघन” के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • इसके अलावा जिन देशों में कम उल्लंघन होता है उन्हें विशेष निगरानी सूची (SWL) में शामिल किया जाता है।

CPCs के रूप में नामित देश:

  • 2021 में धार्मिक स्वतंत्रता की शर्तों के आधार पर, 2022 के लिए सीपीसी पदनाम के लिए कुल 15 देशों की सिफारिश की गई है।
  • भारत के साथ साथ इसमें शामिल देशों में पाकिस्तान, बर्मा, चीन, इरिट्रिया, ईरान, उत्तर कोरिया, रूस, सऊदी अरब, ताजिकिस्तान, अफगानिस्तान, नाइजीरिया, सीरिया और वियतनाम शामिल हैं।
  • अल्जीरिया, क्यूबा, निकारागुआ, अजरबैजान, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, मिस्र, इंडोनेशिया, इराक, कजाकिस्तान, मलेशिया, तुर्की और उजबेकिस्तान उन देशों में शामिल हैं, जिन्हें विशेष निगरानी सूची (SWL) के लिए अनुशंसित किया गया है।

भारत हेतु USCIRF की सिफारिशें:

  • वर्ष 2022 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने सिफारिश की है कि भारत को ‘विशेष चिंता वाले देश’ (CPC) के तौर पर नामित किया जाए।
  • ‘विशेष चिंता वाले देश’ (सीपीसी) धार्मिक स्वतंत्रता मानदंडों पर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देशों की श्रेणी है।
  • इस रिपोर्ट में धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघन के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ “लक्षित प्रतिबंधों”,जैसे संपत्ति को फ्रीज करना या संयुक्त राज्य अमेरिका से इनको निर्वासित का भी आह्वान किया है।
  • USCIRF की इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता में काफी गिरावट आई हैं।

क्या USCIRF की सिफारिशें अमेरिकी सरकार के लिए बाध्यकारी हैं?

  • आमतौर पर, USCIRF देशों को सीपीसी (CPC) के लिए नामित करने के लिए राज्य विभाग द्वारा अनुमोदित देशों की तुलना में अधिक देशों की सिफारिश करता है।
  • ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब USCIRF इस श्रेणी में रखने के लिए किसी देश के नाम की सिफारिश करता है, तो वह पूरी तरह से उसकी धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति से संबंधित होता है।
  • IRFA द्वारा विदेश नीति के निर्माण में धार्मिक स्वतंत्रता पर विचार करना आवश्यक होने के बावजूद, विदेश विभाग और इसका अंतर्राष्ट्रीय स्वतंत्रता कार्यालय ऐसा करने में विफल रहा है।
  • किसी भी देश को सीपीसी में नामित करने का निर्णय लेने से पहले, यह अन्य राजनयिक, द्विपक्षीय और रणनीतिक चिंताओं पर विचार करता है।

USCIRF की सिफारिश का प्रभाव:

  • अभी तक अमेरिकी विदेश विभाग ऐसी सिफारिशों पर खामोश रहा है।
  • दूसरी ओर भारत को यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका के साथ अपनी असहमति और रूस के खिलाफ अमेरिका समर्थित संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का समर्थन से इनकार करने के परिणामस्वरूप बढ़े हुए दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

सारांश:

  • USCIRF की सिफारिश से भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव के साथ-साथ वैश्विक मंचों पर भारत की छवि खराब हो सकती है। इससे चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों द्वारा भारत की धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति की विश्वसनीयता को कम करने वाले आरोपों में भी वृद्धि होगी।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

सुरक्षा चुनौतियां:

सशुल्क सदस्यता के माध्यम से मुक्त भाषण : एलोन मस्क द्वारा ट्विटर का अधिग्रहण

विषय:संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा हेतु चुनौतियां, इन के लिए मीडिया और सोशल नेटवर्किंग साइटों की भूमिका।

मुख्य परीक्षा: एलोन मस्क का ट्विटर अधिग्रहण और इसके निहितार्थ।

प्रसंग:

  • ट्विटर के निदेशक मंडल ने टेस्ला और स्पेसएक्स के CEO से $44 बिलियन के खरीद प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया है ।

पृष्ठ्भूमि:

  • हाल ही में ट्विटर के निदेशक मंडल ने टेस्ला और स्पेसएक्स के CEO एलोन मस्क से $44 बिलियन के खरीद प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी हैं।
  • मंजूरी के बाद अब एलोन मस्क को यह तय करने का पूरा अधिकार होगा कि कंपनी कैसे पैसा कमाएगी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रूप में फ्री स्पीच के मुद्दों से कैसे निपटा जाय।

Twitter के साथ समस्याएँ (Issues with Twitter business):

  • वर्तमान में ट्विटर का स्टॉक केवल $50 से अधिक पर कारोबार कर रहा है, जो 2013 में इसके आईपीओ मूल्य 26 डॉलर से बहुत अधिक नहीं है।
  • ट्विटर ने एक ऐसा व्यवसाय मॉडल खोजने के लिए संघर्ष किया है जो वैश्विक संवाद को प्रभावी ढंग से मुद्रीकृत करवा सके।
  • फेसबुक और गूगल बहुत सटीकता के साथ विज्ञापनों को लक्षित करने के लिए उपयोगकर्ता के डेटा को शुद्ध/सारभूत कर सकते हैं, जबकि ट्विटर ने कभी भी एक व्यवहार्य विज्ञापन मॉडल विकसित नहीं किया।

एलोन मस्क की ट्विटर में रुचि का कारण:

  • एलोन मस्क ने कहा हैं कि ट्विटर खरीदने का उनका प्रस्ताव पैसे के बजाय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए है।
  • मस्क ने कई मौकों पर ट्विटर के मंच को “वास्तविक सार्वजनिक वर्ग” (“de-facto public square”) के रूप में संदर्भित किया है।
  • शब्द “वास्तविक सार्वजनिक वर्ग” (“de-facto public square”) सार्वजनिक मंचों में मुक्त भाषण की प्रथम संशोधन की गारंटी को संदर्भित करता है।
  • ऐसा प्रतीत होता हैं कि मस्क अपने “निरंकुश मुक्त भाषण ” (“free-speech absolutist”) के विचारों को मंच पर लाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।

मस्क द्वारा सुझाए गए परिवर्तन:

  • बॉट (निर्माण-परिचालन-अंतरण (bot-build-operate-transfer) नेटवर्क को साफ़ करना, एल्गोरिथम को खुला स्रोत बनाना और सदस्यता सेवा ये सभी ट्विटर की संभावित उन्नत विषेशताएँ हो सकती हैं।
  • यदि एल्गोरिथम को खुला स्रोत बनाया जाता है, तो उपयोगकर्ता यह ट्रैक कर पाएंगे कि उनकी टाइमलाइन पर एक ट्वीट कैसे और क्यों दिखाई देता है।
  • उन्होंने ट्विटर पर ‘संपादित’ (Edit) बटन जोड़ने का भी सुझाव दिया है।
  • हालाँकि ये सुझाव ट्विटर के व्यवसाय को बेहतर बनाने के लिए बिल्कुल महत्वपूर्ण नहीं हैं।

एलोन मस्क द्वारा ट्विटर के अधिग्रहण करने पर जताई जा रही चिंता:

  • ज्ञातव्य हैं कि फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गलत सूचना, प्रचार और ट्रोलिंग ने कब्जा कर लिया है।
  • इसे उस खराब सामग्री को जिसने गलत सूचनाओं को फैलाने और वास्तविक दुनिया की घटनाओं को प्रभावित किया है, को संतुलित करने के लिए भी फटकार लगाई गई है।
  • मस्क के ट्विटर के अपने इस्तेमाल की भी आलोचना की गई है, क्योंकि उन पर अपने ट्वीट्स में सेक्सिस्ट होने का आरोप लगाया गया है।
  • नस्लवाद के आरोपों के कारण उनकी दूसरी कंपनी टेस्ला की कार्य संस्कृति को भी सवालों के घेरे में ला दिया है।

सारांश:

  • ट्विटर प्लेटफॉर्म पर विशाल बॉट नेटवर्क को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है,जो भारत सहित सभी जगह अभद्र भाषा को बढ़ावा देता है। यदि इस मंच पर आगे ‘मुक्त’ भाषण देने की अपनी बोली में,मस्क स्त्री-विरोधी और नस्लवादी ट्रोल्स को बने रहने देते हैं, तो विश्लेषकों को डर है कि यह उपयोगकर्ताओं और विज्ञापनदाताओं को और अलग-थलग कर सकता है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

‘चीन के पास जीरो-कोविड से बाहर निकलने की रणनीति नहीं’:

विषय: भारत के हितों पर विकसित एवं विकासशील देशों की नीतियां और राजनीति का प्रभाव

प्रारंभिक परीक्षा: ‘जीरो-कोविड नीति’।

मुख्य परीक्षा: ‘जीरो-कोविड नीति’ से संबंधित चिंताएं और भारत पर इसका प्रभाव।

प्रसंग:

  • इस लेख में चीन की जीरो कोविड नीति और इसके प्रभावों के बारे में बात कि गई है।

क्या है चीन की ‘जीरो-कोविड पॉलिसी’?

  • संपर्क निगरानी, सीमा प्रतिबंध, सामूहिक जांच और समय-समय पर लॉकडाउन ये सभी उपाय COVID जैसे वायरस के फैलने से रोकने के सभी रास्तों को प्रभावी ढंग से बंद करने के लिए जीरो-कोविड रणनीति का हिस्सा हैं।
  • यह एक “उन्मूलन” विधि है, न कि COVID प्रबंधन जैसी “शमन” रणनीति।इसका लक्ष्य जितना संभव हो सक्रिय मामलों को शून्य के करीब पहुंचाना है।

चीन की जीरो-कोविड नीति से सम्बंधित चिंताएं:

  • बीते कुछ हफ्तों से चीन की वित्तीय राजधानी में बड़े पैमाने पर तालाबंदी की गई जिसके कारण वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखला बाधित हुई ।
  • चीन अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है।
  • युआन का पहले से ही डॉलर के मुकाबले महत्वपूर्ण रूप से मूल्यह्रास हुआ है, जिसके चलते केंद्रीय बैंक अपने आरक्षित अनुपात को कम करने को मजबूर हुए, और बैंकों को कम विदेशी मुद्रा रखने और मुद्रा को मजबूत करने की इजाजत मिली।
  • आने वाले चंद महीनों में चीन अपनी मुद्रास्फीति की समस्या से जूझेगा और इसका निर्यात भी घटने की संभावना है। इसके अलावा सरकार उर्वरक और इस्पात के निर्यात को रोकने के लिए पहले ही कदम उठा चुकी है।
  • जिन समुदायों को लॉक कर दिया गया है वहां भोजन, चिकित्सा देखभाल आदि की आपूर्ति कम होने की सूचना मिली है।
  • इस बीच आवाजाही के कठोर नियमों और प्रतिबंधों के कारण प्रवासी कई महीनों से अपने परिवारों से अलग हैं।

भारत पर इसका प्रभाव:

  • चीन से ऑटोमोबाइल पार्ट्स से लेकर केमिकल, टेक्सटाइल और फर्टिलाइजर इनपुट तक सब कुछ भारतीय कंपनियों द्वारा आयात किया जाता है।
  • पहले से ही ऑटोमोबाइल से लेकर ड्रोन तक के महत्वपूर्ण घटकों को प्राप्त करने में कठिनाई की रिपोर्ट सामने आ रही हैं।
  • कई अंतरराष्ट्रीय व्यापारी चाहे वे इस बात को स्वीकार करें या नहीं लकिन दीर्घ काल से यह माना जाता रहा हैं कि निरंकुश शासन अधिक स्थिर होते हैं एवं सामाजिक परिवर्तन के प्रतिरोधी होते हैं।
  • बहुत से लोग अब महसूस कर रहे हैं कि चीन में व्यापार करना बेहद मुश्किल हो सकता है।
  • अंतरराष्ट्रीय निवेशकों द्वारा चीनी शेयरों और बांडों से सैकड़ों अरबों डॉलर निकाले गए हैं।
  • जबकि भारत जो एक साल से थोक मूल्य मुद्रास्फीति से जूझ रहा है, पहले से ही इस समस्या से जूझ रहा है।

सारांश:

  • जीरो-कोविड नीति और व्यापक लॉकडाउन का चीनी अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। इसका चीन से भारतीय निर्यात पर भी गंभीर देखने को मिल रहा हैं। अतः चीन को सख्त उन्मूलन रणनीति के बजाय एक प्रभावी प्रबंधन रणनीति अपनानी चाहिए।

संपादकीय-द हिन्दू

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

‘मिशन अंत्योदय’ में ढील नहीं होनी चाहिए:

विषय: केंद्र और राज्यों की कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और इनका निष्पादन।

प्रारंभिक परीक्षा: मिशन अंत्योदय की विशेषताएं।

मुख्य परीक्षा: मिशन अंत्योदय का महत्व और चुनौतियां।

पृष्टभूमि:

विकेंद्रीकृत सुधारों की विफलता:

  • एक प्रमुख लोकतांत्रिक सुधार के रूप में भारत में पंचायती राज संस्थानों (PRIs) और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को संवैधानिक दर्जा देने हेतु 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 को लागू किया गया। जिसने अधिक विकेंद्रीकरण तथा जवाबदेहीता एवं प्रभावशालीता में वृद्धि हेतु योजना और उनके कार्यान्वयन में जनभागीदारी को बढ़ाने की सिफारिश की।
  • कुछ प्रमुख उपायों में शामिल हैं:
    • ग्राम सभा की शक्तियाँ।
    • स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 243G और 243W) स्थानीय सरकारों को ‘आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय’ के लिए योजनाएं तैयार करने और लागू करने की अनुमति देते हैं।
    • जिला योजना समिति नीचे से ऊपर तक स्थानिक विकास योजनाएं तैयार कर रही है।
    • राज्यों में पंचायती राज संस्थाओं जैसे स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए राज्य वित्त आयोगों की स्थापना की गई है। वे राजकोषीय आवंटन में ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज इक्विटी सुनिश्चित करने में मदद करते हैं।
    • महिलाओं के लिए और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए जनसंख्या आधारित आरक्षण का प्रावधान है।
  • हालाँकि, भारत के विकेंद्रीकृत सुधार और प्रक्रिया ग्रामीण भारत में विकास और सामाजिक न्याय के परिकल्पित लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रही हैं।

भारत में गरीबी और अभाव:

  • भारत में, 2011 की सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना (SECC) के अनुसार 8.5 करोड़ से अधिक परिवार गरीब है जो आश्रयहीनता, भूमिहीनता, एकल महिलाओं के नेतृत्व वाले घर, SC/ST के वंचित परिवार या परिवार में विकलांग सदस्य जैसी कठिनाईयों से ग्रस्त हैं।
  • विशेष रूप से भारत केंद्र और राज्य के बजट और बैंक-क्रेडिट से जुड़े स्वयं सहायता कार्यक्रमों के माध्यम से गरीबों पर ₹3 ट्रिलियन से अधिक का खर्च करता है। इसके बावजूद भी, भारत में गरीबी है।

लेखक का संदर्भ:

  • इस लेख में मिशन अंत्योदय कार्यक्रम को मजबूत करने के पक्ष में तर्क दिया गया है ताकि ग्रामीण भारत में आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की प्राप्ति तथा नियोजन हेतु विकेंद्रीकरण के संवैधानिक लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

मिशन अंत्योदय:

  • इसे केंद्रीय बजट 2017-18 में अपनाया गया। मिशन अंत्योदय एक एकीकृत ढांचा है जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के तहत भारत सरकार के 27 मंत्रालयों/विभागों द्वारा आवंटित संसाधनों का इष्टतम उपयोग और प्रबंधन करना है।
  • मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों की गरीबी को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। मिशन 2022 तक गरीबी मुक्त भारत के दृष्टिकोण को साकार करने हेतु प्रयासरत है।
  • ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्रालय मिशन की नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता हैं।
  • मिशन अंत्योदय को ग्राम पंचायतों के साथ एकीकृत कर राज्यों के नेतृत्व वाली पहल के रूप में परिकल्पित किया गया है। यह ग्राम पंचायतों को विकासात्मक योजना की मूल इकाई को परिकल्पित करता है।
  • नियोजन प्रक्रिया का क्रियान्वयन वार्षिक सर्वेक्षण की मदद से किया जाता है जो संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची द्वारा पंचायतों को सौंपे गए 29 विषयों के संबंध में डेटा एकत्र कर, विभिन्न विकास अंतरालों का आकलन करता है साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर विकास की प्रगति की निगरानी भी करता है। यह वार्षिक सर्वेक्षण पंचायत राज मंत्रालय के जन योजना अभियान (PPC) के साथ किया जाता है और इसका उद्देश्य ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) की भागीदारी योजनाओं की मदद करना है।

मिशन अंत्योदय का महत्व:

  • मिशन विविध योजनाओं और कार्यक्रमों को एकीकृत कर, दुर्लभ संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करेगा।
  • ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) की भागीदारी योजना की प्रक्रिया की मदद से स्थानीय स्तर पर सेवा वितरण और शासन सुधार में मदद मिलेगी।
  • वार्षिक सर्वेक्षणों ने ‘बड़े डेटा विश्लेषण’ को एक व्यापक मंच प्रदान किया है और यह साक्ष्य आधारित नीति, नियोजन और कार्यान्वयन हेतु सहायक होगा।
  • गरीबी को दूर करने हेतु किए गए बहुआयामी हस्तक्षेप, ग्रामीण आजीविका सुधार में सहायक होंगे।

कमियां:

  • मिशन अंत्योदय की अभूतपूर्व क्षमता के बावजूद भी, ग्रामीण क्षेत्र अभी भी कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों को बृहद ढांचागत अंतराल का सामना करना पड़ रहा है। 2019-20 में ‘मिशन अंत्योदय’ सर्वेक्षण 2.67 लाख ग्राम पंचायतों में बुनियादी ढांचे के अंतराल को प्रदर्शित करता है, जिसमें 1.03 अरब आबादी के साथ 6.48 लाख गांव शामिल हैं।
  • ग्राम पंचायत के समग्र सूचकांक में अधिकतर ग्राम पंचायतों का प्रदर्शन खराब रहा है।
  • यह लेख निम्नलिखित कारणों को इसका श्रेय देता है।

एकीकरण की कमी:

  • संसाधनों (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम, प्रधान मंत्री आवास योजना, आदि) को एकीकृत करने और प्रशासनिक खर्चों को कम करने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए।

खराब राजकोषीय संघवाद:

  • उप-राज्य स्तर पर राजकोषीय हस्तांतरण प्रणाली, खराब राजकोषीय संघवाद प्रदर्शित करती है। शासन का तीसरा स्तर खराब वित्तीय संसाधनों और ऊपरी फंड पर उच्च निर्भरता से त्रस्त है। जो कि उनकी स्वतंत्रता और प्रभावशीलता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

सारांश:

  • मिशन अंत्योदय महत्वपूर्ण है, पर यह व्यवधान की स्थिति में है। इस मिशन के द्वारा ग्रामीण भारत में आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के संवैधानिक लक्ष्यों को स्थानीय विकेंद्रीकरण और एकीकृत ढांचे द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

शासन:

एक बिखरा हुआ ‘तंत्रिका केंद्र’:

विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास की सरकारी नीतियां एवं उनका हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

प्रारंभिक परीक्षा: स्मार्ट सिटी मिशन और एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र।

मुख्य परीक्षा: ICCCs का महत्व और चिंताएं।

सन्दर्भ:

  • हाल ही में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री ने घोषणा की है कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चुने गए 80 शहरों में एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (ICCCs) स्थापित किए जा चुके हैं।
    • स्मार्ट सिटी मिशन, एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जो मौजूदा शहर के बुनियादी ढांचे हेतु चयनित स्मार्ट समाधानों के अनुप्रयोग की परिकल्पना करता है। स्मार्ट सिटीज मिशन का एक महत्वपूर्ण कदम यह है कि प्रत्येक शहर में ICCCs स्थापित किया जाएगा ।

एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (ICCCs):

  • ICCCs को विभिन्न सुविधाओं की वास्तविक समय (real time) में निगरानी हेतु अधिकारियों को सक्षम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • प्रारंभ में ये केंद्र पानी एवं बिजली आपूर्ति, स्वच्छता, यातायात नियंत्रण, एकीकृत भवन प्रबंधन, शहर कनेक्टिविटी, इंटरनेट बुनियादी ढांचे को नियंत्रित करने और उनकी निगरानी रखने के उद्देश्य से विकसित किए गए।
  • ICCC के निम्नलिखित बुनियादी स्तंभ होते हैं:
    • सेंसर और एज डिवाइस जो रीयल-टाइम डेटा रिकॉर्ड और जेनरेट करते हैं।
    • अंतिम उपकरणों और ICCC के बीच डेटा के आदान-प्रदान के लिए बैंडविड्थ।
    • डेटा स्टोरेज।
    • विश्लेषक सॉफ्टवेयर जो अंतिम उपकरणों द्वारा कैप्चर किए गए डेटा को अंकित कर प्रभावी “सूचना” उत्पन्न करता है।

ICCC का महत्व:

  • ICCC को शहर का “मस्तिष्क” माना गया है क्योंकि ये स्मार्ट सिटी के अंतर्गत आने वाली स्मार्ट सेवाओं से संबंधित डेटा और सूचना के केंद्र बिंदु होते हैं, जैसे LED स्ट्रीट लाइटिंग, CCTV निगरानी कैमरे, वायु गुणवत्ता सेंसर, स्मार्ट पार्किंग सिस्टम, WiFi, बिजली और पानी की आपूर्ति और बिलिंग, GIS, ई-अस्पताल, संपत्ति कर प्रबंधन, संपत्ति प्रबंधन, इंजीनियरिंग सिस्टम, परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली और अन्य सेवाएं आदि।
  • ICCC, शहरों के प्रबंधन हेतु “तंत्रिका केंद्र” के रूप में कार्य करता है। उदाहरण के लिए, यह वर्तमान में एकीकृत यातायात प्रबंधन निगरानी हेतु उपयोगी स्रोत है।
  • ICCC, समग्र स्तर पर डेटा सेट के एक जटिल और बड़े समूह को संसाधित करता है और बहुमूल्य जानकारी प्रदान करता है। यह जानकारी “पूर्वानुमानित मॉडलिंग” पर केंद्रीत है जो न केवल शहर की यथास्थिति बल्कि इसके सुचारू क्रियान्वयन संबंधित इनपुट हेतु डेटा का उपयोग करता है। यह भविष्य के रियल एस्टेट हॉट स्पॉट (real estate hot spots) की पहचान करने में मदद कर सकता है; शहर में सभी दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान एवं उनकी भविष्यवाणी कर सकता है तथा भीड़भाड़ वाले बस मार्गों का पूर्वानुमान कर यह शहरी प्रशासन को अधिक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने में सक्षम बना सकता है।
  • ICCCs ने COVID-19 के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरकार ने कोरोना वायरस बीमारी से प्रभावित देश भर के जिलों की रीयल-टाइम निगरानी और नियंत्रण के साथ, प्रकोप के प्रबंधन के लिए ICCC का युद्ध कक्ष के रूप में उपयोग किया। इसने शहरों के विभिन्न प्रशासनिक क्षेत्रों में कोविड पॉजिटिव मामलों की यथास्थिति की जानकारी प्रदान दी।

कार्यान्वयन के साथ चिंता:

  • क्योकि ICCC को विशेष प्रयोजन तकनीकों (SPV) के रूप में क्रियान्वित किया जा रहा है, जो अलग-अलग प्रणालियों के उद्भव का कारण बन सकता है जो SPV और शहरी स्थानीय निकायों के बीच तनाव पैदा कर सकता है।
  • साथ ही बिखरी हुई प्रणालीयां ICCC की प्रभावशीलता के लिए शुभ संकेत नहीं है। सॉफ्टवेयर, वर्कफ्लो और SOP के संदर्भ में ULB सेवाओं के साथ खराब एकीकरण ICCC की कार्यात्मक क्षमता में कमी कर सकता है। यह प्रणाली के स्थायी रूप से कम उपयोग के जोखिम को पैदा करेगा।
  • शहरों में ICCC ढांचे के निर्माण हेतु बड़े निवेश की आवश्यकता है। किन्तु दुविधा यह है कि क्या इस तरह के उच्च निवेश की आवश्यकता है, क्योंकि कुछ शहर अभी भी अपने बुनियादी ढांचे और सेवाओं को उन्नत करने के लिए धन के लिए संघर्षरत हैं। ICCC को स्थापित करने और क्रियान्वयन हेतु हस्तांतरण निधि पर निर्भरता उनकी स्थिरता के लिए एक अच्छा संकेत नहीं है।
  • सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद, ICCC के कुछ क्षेत्रों में अभी भी चुनिंदा उद्योगपतियों का वर्चस्व है, जो शहर के लिए शर्तों को निर्धारित कर सकते हैं या भुगतान के लिए मना कर सकते हैं।

सुझाव:

  • सुविधाओं में सुधार हेतु शहरी स्थानीय निकायों की सेवाओं को ICCC के साथ एकीकृत करना होगा
    • स्वास्थ्य, नगर नियोजन, जलापूर्ति जैसे विभागों में कार्यरत ULB के मुख्य कर्मचारियों को ICCC प्रणाली को अपनाना होगा। इसी तरह SPV में एक टीम बनाने का प्रयास होना चाहिए जो कि ICCC और ULB के बीच एक सेतु का काम कर सके।

सारांश:

  • एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (ICCC) शहरों के संचालन एवं प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालाँकि, उनके वर्तमान ढांचे और संचालन जोखिम, शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग प्रणालियों के उद्भव का कारण पैदा होते हैं जो उनकी प्रभावशीलता में कमी कर सकते हैं। इस दिशा में ICCC के साथ शहरी स्थानीय निकायों की सेवाओं के एकीकरण की भावी नीति को अपनाना होगा।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

भारत एक लोकतांत्रिक महाशक्ति के रूप में:

विषय: भारत के हितों व प्रवासी भारतीयों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव।

मुख्य परीक्षा: भारत का बढ़ता वैश्विक कद और संबंधित जिम्मेदारियां।

विवरण:

  • ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधान मंत्री, टोनी एबॉट द्वारा लिखे गए लेख में भारत के बढ़ते वैश्विक कद की प्रशंसा की गई है और भारत को इस बढ़ते कद के साथ और अधिक जिम्मेदारी उठाने के लिए कहा गया।

भारत का उदय:

  • भारत क्रय शक्ति के मामले में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। एक जीवंत मुक्त बाजार, बड़े जनसांख्यिकीय लाभांश और सहायक सरकारी नीतियों के साथ, भारत अधिक से अधिक आर्थिक विकास करने की ओर अग्रसर है।
  • साथ ही दुनिया के लगभग हर हिस्से में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय, वैश्विक मामलों में कुछ आवश्यक सॉफ्ट पावर प्रदान करते हैं।
  • इन बातोँ को ध्यान में रखते हुए, लेखक भारत को एक लोकतांत्रिक महाशक्ति के रूप में संदर्भित करता है।

वैश्विक मामलों में भारत की जिम्मेदारी:

  • सत्ता के साथ जिम्मेदारी आती है और इस दिशा में लेखक भारत से और अधिक जिम्मेदारियां निभाने का आह्वान करता हैं, खासकर वर्तमान वैश्विक भू-राजनीति मंथन के बीच

रूस-यूक्रेन संघर्ष:

  • अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित भारत की समृद्ध परंपराओं के अनुरूप, लेखक ने भारत से रूस-यूक्रेन संघर्ष पर मध्यस्थता करने का आह्वान किया।
  • इससे विश्व में भारत की स्थिति में वृद्धि में भी मदद मिलेगी।

चीनी मुखरता से निपटना:

  • हिन्द-प्रशांत क्षेत्र के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर चीन की बढ़ती शक्ति को देखते हुए, भारत को चीन से निपटने में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। इस दिशा में, लेखक क्वाड फ्रेमवर्क के तहत अधिक सहयोग और सहभागिता का आह्वान करता है।
  • चीनी आयात पर निर्भर राष्ट्रों पर आर्म ट्विस्टिंग तकनीकों का उपयोग करने के विगत चीनी प्रयासों को देखते हुए, भारत को साथी लोकतंत्रों की आपूर्ति श्रृंखलाओं में चीन का स्थान लेने की कोशिश करनी चाहिए, जिनकी विनिर्माण आवश्यकता मानक, गुणवत्ता और कीमत पर आधारित हो।

सारांश:

  • भारत ने अपनी वैश्विक शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि की है और यह विदित है कि सत्ता के साथ जिम्मेदारी भी आती है, ऐसे में भारत को विशेष रूप से रूस-यूक्रेन संघर्ष में मध्यस्थता करने की कोशिश कर वैश्विक भू-राजनीति में अधिक जिम्मेदारी लेने की आवश्यकता है। जो क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर चीनियों की बढ़ती मुखरता से निपटने में सक्रिय भूमिका भी निभा सके।

प्रीलिम्स तथ्य:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

1. भारतीयता ही एक जाति : PM

  • प्रधान मंत्री ने कहा कि देश के रूप में लोगों की एक ही जाति है वह है-भारतीयता।
  • श्री नारायण गुरु का ‘एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर’ का उपदेश हमारी देशभक्ति को एक आध्यात्मिक आयाम देता है।

2. मंदिरों की ई-वे पूजा ने लिया डिजिटल मोड़: :

  • आज के समय में पूजा भी डिजिटल हो रही है। कोच्चि के एक प्रमुख मंदिर में भक्तों को प्रसाद चढ़ाने के लिए कुछ हुंडियों पर लगे मोबाइल वॉलेट के क्यूआर कोड स्टिकर दिए जा रहे हैं ।
  • महामारी के प्रकोप के बीच एडापल्ली में श्री महा गणपति मंदिर में प्रसाद की तकनीक-संचालित विधि शुरू की गई थी।
  • लकिन इस विधि में कुछ स्पष्ट बाधाएं हैं क्योंकि अधिकांश भक्त मोबाइल फोन को मंदिरों के अंदर ले जाना पसंद नहीं करते हैं और कुछ मंदिरों में फोन ले जाने पर रोक हैं।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. प्रसिद्ध समाज सुधारक श्री नारायण गुरु के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. उन्होंने “एक जाति, एक धर्म,एक भगवान” का प्रसिद्ध नारा दिया (ओरु जाठी, ओरु मथम, ओरु दैवम, मनुश्यानु)।
  2. 1888 में,उन्होंने अरुविप्पुरम में भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर का निर्माण किया जो उस समय के जाति-आधारित प्रतिबंधों के खिलाफ था।
  3. श्री नारायण गुरु अद्वैत वेदांत, आदि शंकराचार्य के अद्वैत के सिद्धांत के सबसे बड़े समर्थक और पुनर्मूल्यांकनकर्ताओं में से एक बन गए थे।

सही कथन का चयन कीजिए:

(a)केवल 1 और 2

(b)केवल 2 और 3

(c)केवल 1 और 3

(d)उपर्युक्त सभी

उत्तर: d

व्याख्या:

  • श्री नारायण गुरु का जन्म 22 अगस्त, 1856 को केरल के तिरुवनंतपुरम के एक छोटे से गाँव केमपज़ंथी में मदन आसन के यहाँ उनकी पत्नी कुट्टियाम्मा के गर्भ से हुआ था।
  • उस समय के सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार, वह मूल रूप से एझावा जाति के थे और उन्हें ‘अवर्ण’ भी माना जाता था।
  • उन्होंने जातिगत अन्याय (ओरु जाठी, ओरु मथम, ओरु दैवम, मनुश्यानु) का मुकाबला करने के लिए “एक जाति, एक धर्म, सभी के लिए एक ईश्वर” का नारा गढ़ा।
  • उन्होंने उस समय के जाति-आधारित मानदंडों को धता बताते हुए, 1888 में अरुविप्पुरम में भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर का निर्माण किया।
  • वह अद्वैत वेदांत, आदि शंकराचार्य की गैर-द्वैत अवधारणा के सबसे उत्साही समर्थक और पुनर्मूल्यांकनकर्ताओं में से एक बन गए।
  • श्री नारायण गुरु ने विभिन्न भाषाओं में कई उपन्यास लिखे जिसमे अद्वैत दीपिका, आश्रम, थेवरप्पाथिंकंगल और कुछ अन्य प्रमुख हैं।
  • अतः सभी कथन सही हैं।
  • श्री नारायण गुरु के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Sree Narayana Guru

प्रश्न 2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. मोंटेलुकास्ट (Montelukast) दवा एक मौखिक उपचार है जो अस्थमा के कारण होने वाली घरघराहट, सांस लेने में कठिनाई और सीने में जकड़न को रोकने के लिए दी जाती हैं।
  2. जब यह मानव कोशिका को संक्रमित करता है, तो कोरोनावायरस Nsp1 नामक एक प्रोटीन छोड़ता है, जो इसकी प्रतिकृति की कुंजी है।
  3. अन्य वायरल प्रोटीन की तुलना में Nsp1 की उत्परिवर्तन दर बहुत अधिक है।

सही कथन का चयन कीजिए:

(a)केवल 1 और 2

(b)केवल 2 और 3

(c)केवल 1 और 3

(d)उपर्युक्त सभी

उत्तर: a

व्याख्या:

  • यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, मोंटेलुकास्ट नामक दवा जो कि घरघराहट, सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न और अस्थमा के कारण होने वाली खांसी को रोकने के लिए किया जाने वाला एक मौखिक उपचार है, व्यायाम के दौरान सांस लेने में कठिनाई को रोकने के लिए भी उपयोग किया जाता है।
  • मोंटेलुकास्ट का प्रयोग दमा के इलाज के लिए किया जाता है।यह आमतौर पर तब दी जाती है जब अस्थमा हल्का होता है और इसे खराब स्थिति में पहुँचने से रोकना संभव हो। अतः कथन 1 सही है।
  • जब यह मानव कोशिका को संक्रमित करता है, तो कोरोनावायरस Nsp1 नामक एक प्रोटीन छोड़ता है, जो इसकी प्रतिकृति की कुंजी है।
  • वायरल प्रोटीन मेजबान कोशिका की प्रोटीन बनाने वाली मशीनरी को बांधता है, जिसे राइबोसोम कहा जाता है।
  • Nsp1 को लक्षित करके, वायरस से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
  • IISc के शोधकर्ताओं ने पाया कि मोंटेलुकास्ट Nsp1 से मजबूती से बांधता है, जिससे राइबोसोम तक इसकी पहुंच अवरुद्ध हो जाती है। अतः कथन 2 सही है।
  • अन्य वायरल प्रोटीनों की तुलना में Nsp1 की उत्परिवर्तन दर बहुत कम है, जिसका अर्थ है कि Nsp1 से उभरने वाले किसी भी वायरस वेरिएंट में बड़े पैमाने पर अपरिवर्तित रहने की संभावना है।
  • इसलिए ऐसी बिमारियों को लक्षित करने वाली दवाओं के ऐसे सभी प्रकारों के खिलाफ काम करने की उम्मीद है।अतः कथन 3 सही नहीं है।

प्रश्न 3. गेहूं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. गेहूँ रबी की फसल है जिसे पकने के समय ठंडे मौसम और तेज धूप की आवश्यकता होती है।
  2. गेहूं को अच्छी जल निकासी वाली उपजाऊ दोमट और चिकनी दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है।
  3. रूस के बाद भारत दुनिया में गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।

सही कथन का चयन कीजिए:

(a)केवल 1 और 2

(b)केवल 2 और 3

(c)केवल 1 और 3

(d)उपर्युक्त सभी

उत्तर: a

व्याख्या:

  • गेहूं भारत की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण फसल है। यह देश के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में प्राथमिक/मुख्य खाद्य फसल है।
  • रबी की इस फसल को उगाने के लिए ठंडे मौसम के साथ-साथ पकने के दौरान तेज धूप की आवश्यकता होती है।
  • इसके लिए पूरे मौसम में समान रूप से फैले 50 से 75 सेमी वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। अतः कथन 1 सही है।
  • गेहूं विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उगाया जाता है, जिसमें रेगिस्तानी मिट्टी और भारी मिट्टी की मिट्टी शामिल है।
  • मध्यम जल धारण क्षमता के साथ अच्छी तरह से सुखी, उपजाऊ और दोमट मिट्टी में गेहूं सबसे अच्छा बढ़ता है। अतः कथन 2 सही है।
  • चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक है, लेकिन उच्च खपत आधार ने शायद ही कभी इसे एक बड़ा निर्यातक बनने दिया हो। अतः कथन 3 सही नहीं है।

प्रश्न 4. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. वीटो शक्ति की उत्पत्ति संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 24 से हुई है।
  2. एक स्थायी सदस्य जो मतदान से दूर रहता है या अनुपस्थित रहता है तो वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में किसी प्रस्ताव को पारित होने से नहीं रोक सकता है।
  3. सर्वप्रथम वीटो शक्ति का उपयोग सोवियत संघ द्वारा वर्ष 1946 में किया गया था, जब उसमे लेबनान और सीरिया से विदेशी सैनिकों की वापसी के संबंध में एक मसौदा प्रस्ताव पर वीटो कर इसे अवरुद्ध कर दिया था।

सही कथन का चयन कीजिए:

(a)केवल 1 और 2

(b)केवल 1 और 3

(c)केवल 2 और 3

(d)उपर्युक्त सभी

उत्तर: c

व्याख्या:

  • यद्यपि संयुक्त राष्ट्र चार्टर में “वीटो की शक्ति” का उल्लेख नहीं किया गया है, अनुच्छेद 27 के अनुसार इस के लिए स्थायी सदस्यों के सहमति मतों का होना आवश्यक है। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • एक स्थायी सदस्य जो मतदान से दूर रहता है या अनुपस्थित रहता है, वह किसी प्रस्ताव को पारित होने से नहीं रोक सकता। अतः कथन 2 सही है।
  • सर्वप्रथम वीटो शक्ति का उपयोग सोवियत संघ द्वारा वर्ष 1946 में तब किया गया था, जब उसमे लेबनान और सीरिया से विदेशी सैनिकों की वापसी के संबंध में एक मसौदा प्रस्ताव पर वीटो कर इसे अवरुद्ध कर दिया था।अतः कथन 3 सही है।

प्रश्न 5. भारतीय इतिहास के सन्दर्भ में 1884 का रुखमाबाई मामला निम्न में से किससे संबंधित था:PYQ (2020)

  1. महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार
  2. सहमति की आयु
  3. वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापन

निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:

(a)केवल 1 और 2

(b)केवल 2 और 3

(c)केवल 1 और 3

(d)1, 2 और 3

उत्तर: b

व्याख्या:

  • रुखमाबाई औपनिवेशिक भारत में अभ्यास करने वाली पहली महिला चिकित्सक थीं।
  • रुखमाबाई ने सहमति अधिनियम, 1891 के आयु अधिनियमन को पारित करवाने में अपने योगदान के कारण भी इतिहास में अपनी पहचान बनाई।
  • ग्यारह साल की छोटी उम्र में उनकी शादी कर दी गई थी, जबकि उनके पति दादाजी भीकाजी उन्नीस साल के थे। वह बाद में उसके संपर्क में आया, शायद वह उसके पैसे में दिलचस्पी रखता था जो उसे उसकी माँ के निधन के बाद विरासत में मिले थे ।
  • रुखमाबाई ने अपने पति के साथ जाने से इनकार कर दिया और अपने सौतेले पिता के साथ रहना जारी रखा और समाज के मानदंडों के खिलाफ जाकर शिक्षा प्राप्त की।
  • 1885 में, शादी के 12 साल बाद, भीकाजी ने “वैवाहिक अधिकारों की बहाली” (“restitution of conjugal rights”) की मांग की।
  • मार्च 1887 में, रुखमाबाई को अपने पति के साथ रहने या छह महीने जेल में बिताने का आदेश दिया गया था।
  • भीकाजी दादाजी के पास न लौटने और अपनी शिक्षा जारी रखने के अपने निर्णय पर रुखमाबाई ने बहादुरी से कहा कि वह दिए गए फैसले को स्वीकार करने के बजाय दंड का सामना करना चाहेंगी।
  • कई सुनवाई होने के बाद, शादी की पुष्टि की गई,लेकिन रुखमाबाई ने महारानी विक्टोरिया को पत्र लिखा। जिसके बाद रानी ने अदालत के फैसले को खारिज कर दिया और इस शादी को भंग कर दिया।
  • अत: विकल्प B सही है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. मिशन अंत्योदय के उद्देश्यों की सूची बनाइये एवं इस मिशन के लॉन्च के बाद से इसमें हुई अब तक की गई प्रगति का आकलन कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) जीएस II (शासन)

प्रश्न 2. पिछले तीन दशकों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों और द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य की संभावनाओं का विस्तार से वर्णन कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) जीएस II (अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

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