UPSC परीक्षा कम्प्रेहैन्सिव न्यूज़ एनालिसिस - 30th Apr, 2022 UPSC CNA in Hindi

30 अप्रैल 2022 : समाचार विश्लेषण

A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी:

  1. मद्रास उच्च न्यायालय ने प्रकृति(mother Nature)’ को एक जीवित विधिक इकाई का दर्जा दिया:

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E. संपादकीय:

भारतीय समाज:

  1. एक ऐसा कदम जो भाषा फोनोसाइड का कारण बन सकता है

राजव्यवस्था:

  1. ईंधन पर संघर्ष

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. केंद्र ने अन्य देशों में कॉर्बेवैक्स को मान्यता देने पर जोर दिया

G. महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. ‘मानव प्रेरित जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हीटवेव’
  2. मार्च में कोर सेक्टर की वृद्धि घटकर 4.3 फीसदी रही

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी:

मद्रास उच्च न्यायालय ने प्रकृति(mother Nature)’ को एक जीवित विधिक इकाई का दर्जा दिया:

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

प्रारंभिक परीक्षा: विधिक इकाई दर्जा

मुख्य परीक्षा: मदर नेचर’ को विधिक इकाई घोषित करने का महत्व और आवश्यकता।

प्रसंग:

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने ‘पैरेंस पैट्रिया अधिकार क्षेत्र’ को लागू किया, और ‘प्रकृति’ को एक विधिक इकाई का दर्जा रखने वाले ‘जीवित प्राणी’ के रूप में घोषित किया।

प्राकृतिक व्यक्ति (Natural Person): प्राकृतिक व्यक्ति एक मनुष्य है तथा यह एक वास्तविक और जीवित व्यक्ति है जिसमें विचार, वाक् और पसंद की शक्ति हैं।

विधिक व्यक्ति (Legal Person): विधिक व्यक्ति वास्तविक या काल्पनिक है, जिसे कानून में अधिकारों या कर्तव्यों के लिए सक्षम माना जाता है। कानून में, निगमों, कंपनियों, मूर्तियों आदि को विधिक व्यक्ति माना जा सकता है।

विधिक इकाई का दर्जा क्या है?

  • एक विधिक इकाई एक ऐसी इकाई है जो एक प्राकृतिक व्यक्ति के समान कार्य करती है और उसके कार्य कानून द्वारा शासित होते हैं।
  • एक न्यायिक व्यक्ति एक गैर-मानव विधिक इकाई है जिसे कानून द्वारा मान्यता प्राप्त है और एक मनुष्य के समान अधिकारों और कर्तव्यों का हकदार है।

मदुरै पीठ द्वारा दिए गए निर्देश

  • मदुरै पीठ ने ‘प्रकृति’ को एक ‘जीवित प्राणी’ घोषित किया, जिसे एक जीवित व्यक्ति के सभी संबंधित अधिकारों, कर्तव्यों और उत्तरदायित्वों के साथ एक विधिक व्यक्ति का दर्जा प्राप्त होगा।
  • राज्य और केंद्र सरकार को ‘प्रकृति’ की रक्षा करने और इस संबंध में हर संभव तरीके से उचित कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।

पैरेंस पैट्रिया क्षेत्राधिकार क्या है?

  • लैटिन में “पैरेंस पैट्रिया” का अर्थ है “लोगों के माता-पिता”।
  • पैरेंस पैट्रिया के तहत एक राज्य या न्यायालय की अपने नागरिकों या अन्य लोगों के प्रति पैतृक और सुरक्षात्मक भूमिका होती है।
  • पैरेंस पैट्रिया सिद्धांत में यह भी कहा गया है कि सभी अनाथ, आश्रित बच्चे और अक्षम समझे जाने वाले लोग राज्य के विशेष संरक्षण और नियंत्रण में हैं।

प्रकृति को विधिक व्यक्ति घोषित करने का महत्व:

  • विधिक व्यक्ति का दर्जा देने से प्रकृति को मौलिक अधिकार, कानूनी अधिकार, इसके अस्तित्व के लिए संवैधानिक अधिकार, सुरक्षा, जीविका और पुनरुत्थान का अधिकार प्राप्त होगा।
  • एक जीवित इकाई के रूप में प्रकृति को ’एक जीवित व्यक्ति के समान सभी अधिकार, कर्तव्य और उत्तरदायित्व प्राप्त होंगे।
  • इससे जैव विविधता और संसाधनों का संरक्षण करेगा, जिससे प्रकृति के विनाश को रोका जा सकेगा।

सारांश:

  • अंधाधुंध विनाश या परिवर्तन से पारिस्थितिकी तंत्र में जटिलता उत्पन्न हो रही है तथा अंततः वनस्पति और जीवों, जंगलों, जल निकायों, पहाड़ों, हिमनदों, वायु और निश्चित रूप से मनुष्यों का अस्तित्व संकट में है। प्रकृति को एक जीवित प्राणी घोषित करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्राकृतिक पर्यावरण को ‘जीवन के अधिकार’ के मूल मानवाधिकारों का हिस्सा मानती है।

संपादकीय-द हिन्दू

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1 से संबंधित

भारतीय समाज

एक ऐसा कदम जो भाषा फोनोसाइड का कारण बन सकता है

विषय: भारतीय समाज की मुख्य विशेषताएं, भारत की विविधता।

मुख्य परीक्षा: हिन्दी को भारत की एकमात्र राजभाषा घोषित करने के प्रस्तावों का समालोचनात्मक विश्लेषण।

प्रसंग:

केंद्रीय गृह मंत्री ने हाल ही में एक बैठक में भारत के लोगों से अंतर्राज्यीय संचार में अंग्रेजी के बजाय हिंदी का उपयोग करने का आग्रह किया।

विवरण

  • केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया था कि नागरिकों को “भारत की भाषा” का उपयोग लिंगुआ फ़्रैंका (एक पुल भाषा जिसे उन वक्ताओं के बीच एक आम भाषा के रूप में अपनाया जाता है जिनकी मूल भाषाएं अलग होती हैं) के रूप में करना चाहिए।
  • इसके अलावा अतीत में नेताओं जैसे वी.डी. सावरकर और आर.वी. धुलेकर ने हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करने के विचार की वकालत की थी।
  • हालांकि, कई अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि “भारत में भाषाई बहुलवाद की एक सामंजस्यपूर्ण स्वर-समता है”।

भारत में भाषाई बहुलवाद

  • 1903 और 1923 के बीच भारतीय भाषाई सर्वेक्षण ने भारत में 179 से अधिक भाषाओं और 544 बोलियों को मान्यता दी।
  • 1961 की जनगणना में लगभग 1,652 ‘मातृभाषाओं’ की पहचान की गई, जिनमें से 184 ‘मातृभाषा’ बोलने वाले 10,000 से अधिक लोग थे, और जिनमें से 400 ‘मातृभाषाओं’ का उल्लेख अतीत के भारतीय भाषा सर्वेक्षण में नहीं किया गया था।
  • 1971 की जनगणना में, पंजीकृत भाषाई डेटा को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था,
    • संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लिखित आधिकारिक भाषाएं
    • अन्य भाषाएँ जिनके प्रत्येक के कम से कम 10,000 बोलने वाले हों
    • अन्य सभी भाषाएँ जिसके बोलने वाले 10,000 से कम हों, को एक साथ ‘अन्य’ के रूप में जोड़ा गया।

हिंदी भाषी आबादी के आंकड़ों के खिलाफ तर्क

  • आलोचकों ने उन विचारों का विरोध किया है जो हिंदी को एक अखिल भारतीय भाषा के रूप में पेश करते हैं।
  • आलोचकों का कहना है कि भाषाओं पर 2011 की जनगणना के आँकड़ों में हिंदी को लगभग 52 करोड़ लोगों की ‘मातृभाषा’ के रूप में प्रस्तुत किया गया हैं, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं,
    • 5 करोड़ से ज्यादा लोग जिनकी ‘मातृभाषा’ भोजपुरी है
    • लगभग 61 अन्य भाषाएँ बोलने वाले 9 करोड़ से अधिक लोग जिनमें राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के समुदाय शामिल हैं।
  • लगभग 30% आबादी द्वारा हिंदी बोली जाने का अनुमान है, लेकिन शेष 70% के लिए यह मातृभाषा नहीं है।
  • आलोचकों का मत है कि हिंदी भारतीयों के लिए एक सामान्य भाषा नहीं है या एक प्रमुख भाषा नहीं है, यह विभिन्न अन्य भारतीय भाषाओं के बीच सिर्फ एक प्राइमस इंटर पारेस (समान/बराबर के बीच प्रथम) है।

पाकिस्तान और श्रीलंका में एक भाषा थोपने पर एक केस स्टडी

  • एक बहुभाषी राज्य में दूसरों की उपेक्षा करके एक भाषा को थोपना पाकिस्तान और श्रीलंका में विनाशकारी रहा है।
  • विभाजन के बाद पाकिस्तान एक बहु-जातीय और बहु-भाषाई राज्य था, लेकिन 1948 में, पाकिस्तान सरकार ने उर्दू को एकमात्र राष्ट्रीय भाषा के रूप में निर्धारित किया।
    • इस कदम के कारण पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में एक हिंसक बंगाली भाषा विरोध या भाषा आंदोलन हुआ, जिसमें बंगाली भाषा को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता देने की मांग की गई।
    • इस आंदोलन ने बंगाली राष्ट्रवाद को और मजबूत किया जिसने अंततः बांग्लादेश को पाकिस्तान से मुक्ति दिलाई।
  • श्रीलंका ने 1956 में सिंहली ओनली एक्ट (राजभाषा अधिनियम) लागू किया, जिसके परिणामस्वरूप सिंहली और देश के तमिलों के बीच गंभीर स्थिति वाली अविश्वास की भावना पैदा हुई।
    • सिंहली लगभग 70% आबादी की भाषा थी तथा तमिल भारतीय और श्रीलंकाई तमिलों (और अधिकांश मुसलमानों) द्वारा बोली जाती थी, जो एक साथ देश की कुल आबादी का लगभग 29% हिस्सा थे।
    • सिंहली ओनली एक्ट भेदभावपूर्ण था और तमिल समुदाय को मुख्यधारा से अलग कर दिया, जिसने द्वीप राष्ट्र में कई गृह युद्धों को प्रज्वलित किया है।

सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका में समायोजित भाषाई विविधता पर एक केस स्टडी

  • सिंगापुर में बहु-जातीय आबादी है जिसमें चीनी, मलय और भारतीय शामिल हैं।
    • ली कुआन यू, जिन्हें आधुनिक सिंगापुर का वास्तुकार माना जाता है, ने चीनी को राष्ट्रीय भाषा घोषित करने की मांग को खारिज कर दिया और अंग्रेजी को चुना।
    • अंग्रेजी में विशेषज्ञता ने देश को वैश्विक व्यापार केंद्र बनने में मदद की।
    • इससे देश को बेहतर व्यापार स्थिति बनाने में सहायता मिली और इसने अन्य देशों से ज्ञान प्राप्त करने के लिए एक मंच प्रदान किया।
  • दक्षिण अफ्रीका, अफ्रीका में एक उभरता हुआ देश है और इसकी उदार भाषाई नीति ने उन्हें इस संबंध में काफी मदद की है।
    • दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्रगान पांच भाषाओं की गीतात्मक रचना है, जिसमें ज़ोसा, ज़ुलु, सेसोथो, अफ्रीकी और अंग्रेजी जैसी भाषाएँ हैं।

सारांश: चूंकि एक भाषा को एक भाषा के रूप में थोपने से अन्य भारतीय भाषाओं का फ़ोनोसाइड (phonocide) होगा, इसे ध्यान में रखते हुए भारत को सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका की बहु-भाषाई समायोजन नीति का अनुकरण करना चाहिए, जो देश के सभी वर्गों से उच्च स्तर की स्वीकृति को आकृष्ट करती है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था:

ईंधन पर संघर्ष

विषय: संघीय ढांचे से संबंधित मुद्दे और चुनौतियां

मुख्य परीक्षा: ईंधन की बढ़ती कीमतों का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और ईंधन पर अपने कर की दरों को कम करने के बारे में राज्यों की चिंता।

प्रसंग

प्रधानमंत्री ने राज्यों से सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप पेट्रोलियम उत्पादों पर शुल्क में कटौती करने का आग्रह किया।

पृष्ठभूमि

  • राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में, प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि राज्य पेट्रोल और डीजल पर कर को कम करें जैसा कि केंद्र ने नवंबर 2021 में किया था।
  • प्रधानमंत्री ने बताया कि उस समय पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट को कम करने के केंद्र के अनुरोधों पर विपक्षी दल शासित राज्यों ने ध्यान नहीं दिया।
  • प्रधानमंत्री के इस बयान की कई राज्यों ने आलोचना की है।

ईंधन की बढ़ती कीमतों का प्रभाव

  • ईंधन की बढ़ती कीमतों से मध्यम और निम्न-आय वर्ग की समस्या बढ़ गई है जो पहले से ही कोविड महामारी के कारण नौकरी, स्वास्थ्य की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
  • ईंधन की कीमतों में वृद्धि से घरेलू बजट बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
  • यहां तक कि उद्योग अपनी कमजोर खपत रिकवरी को बनाए रखने के लिए ईंधन कर में कटौती का अनुरोध कर रहा है।

ईंधन पर टैक्स घटाने पर राज्य की चिंता

  • राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र से बकाया राशि और अन्य संसाधनों की कमी के बावजूद कुछ राज्यों ने ईंधन उत्पादों पर वैट को घटा दिया था और अन्य राज्यों ने दरों में वृद्धि नहीं की है।
  • राज्यों का दावा है कि केंद्र ने कोविड-19 लॉकडाउन के बीच भी ईंधन के करों में वृद्धि की थी, जिसमें उपकर को प्राथमिकता दी गई थी, जिसे राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाना था।
  • केंद्र पेट्रोलियम उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और उपकर लगाता है।
  • वित्त वर्ष 2021, में पेट्रोल और डीजल से एकत्रित कुल केंद्रीय उत्पाद शुल्क 3.72 लाख करोड़ रुपए था। लेकिन केंद्रीय उत्पाद शुल्क के तहत एकत्र की गई राशि से राज्य सरकारों को हस्तांतरित कर की राशि सिर्फ 19,972 करोड़ रुपए थी।
  • राज्य अपने घटते राजस्व स्रोतों को लेकर चिंतित हैं क्योंकि सुनिश्चित जीएसटी मुआवजा जुलाई 2022 में समाप्त हो जाएगा
  • साथ ही, बजट 2022-23 के अनुसार, राज्यों को अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए अपने पूंजीगत व्यय में वृद्धि की उम्मीद है।

सारांश: चूंकि बढ़ती मुद्रास्फीति आर्थिक सुधार को प्रभावित करेगी, इसलिए केंद्र और राज्यों के लिए वैश्विक संकट के बीच अर्थव्यवस्था में विकास को प्रोत्साहित करने के लिए बेहतर समन्वय करना आवश्यक हो जाता है।

प्रीलिम्स तथ्य

  1. केंद्र ने अन्य देशों में कॉर्बेवैक्स को मान्यता देने पर जोर दिया

विषय: अंतर्राष्ट्रीय संबंध

प्रारंभिक परीक्षा: WHO की आपातकालीन उपयोग सूची (EUL)

संदर्भ: सरकार अन्य देशों द्वारा कोविड-19 वैक्सीन कॉर्बेवैक्स की मान्यता की प्रक्रिया में तेजी लाने की योजना बना रही है, जबकि इसके निर्माता बायोलॉजिकल E, WHO की आपातकालीन उपयोग सूची का अनुसरण कर रहे हैं।

आपातकालीन उपयोग सूची (EUL) क्या है?

  • WHO आपातकालीन उपयोग सूची प्रक्रिया (EUL) बिना लाइसेंस वाले टीकों, चिकित्सा विज्ञान और इन विट्रो डायग्नोस्टिक के मूल्यांकन और सूचीबद्ध करने की एक जोखिम-आधारित प्रक्रिया है।
  • इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ये उत्पाद सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल से प्रभावित लोगों के लिए जल्द से जल्द उपलब्ध हों।
  • इससे संयुक्त राष्ट्र की खरीद एजेंसियों और सदस्य देशों को यह तय करने में मदद मिलेगी कि गुणवत्ता, सुरक्षा, प्रभावकारिता और प्रदर्शन डेटा के एक महत्वपूर्ण सेट के आधार पर विशिष्ट उत्पादों का उपयोग करना है या नहीं।

उम्मीदवार उत्पादों की पात्रता

  • EUL को तीन उत्पाद वर्गों (टीका, चिकित्सा, और इन विट्रो डायग्नोस्टिक) में विभाजित किया गया है, प्रत्येक EUL मूल्यांकन के लिए उत्पादों की अपनी आवश्यकताओं के साथ निम्नलिखित आवश्यकता पूरी होनी चाहिए:
    • बीमारी गंभीर या जीवन के लिए खतरा हो या जिसमें महामारी पैदा करने की क्षमता हो और EUL मूल्यांकन के लिए उत्पाद पर विचार करना उचित हो, उदाहरण के लिए, एक महत्वपूर्ण उप-जनसंख्या के लिए कोई लाइसेंस प्राप्त उत्पाद नहीं है (उदा- बच्चे);
    • मौजूदा उत्पाद बीमारी को खत्म करने या प्रकोप को रोकने में सफल नहीं रहे हैं
    • उत्पाद का निर्माण दवाओं और टीकों के मामले में वर्तमान अच्छे विनिर्माण प्रथाओं (GMP) के अनुपालन में और IVD के मामले में एक कार्यात्मक गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) के तहत किया गया हो; और
    • आवेदक, उत्पाद के विकास (IVD के मामले में उत्पाद का मिलान और सत्यापन) को पूरा करने और उत्पाद लाइसेंस प्राप्त होने के बाद WHO पूर्व योग्यता के लिए आवेदन करता हो।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. ‘मानव प्रेरित जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हीटवेव’
  • वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बात के पुख्ता साक्ष्य हैं कि मानव-प्रेरित जलवायु परिवर्तन हीटवेव के लिए उत्तरदायी है।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों के जमा होने से महासागरों और सतह पर तापमान बढ़ गया है, जिससे ग्लेशियर पिघल रहे हैं, समुद्र के स्तर की वृद्धि में तेजी आई है और जीवमंडल में बदलाव आया है।
  • सिन्धु-गंगा के मैदानी इलाकों में ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराकर भारत प्रदूषण को कम कर सकता है। जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिए, सामाजिक परिवर्तन, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी को अपनाने की आवश्यकता है।
  1. मार्च में कोर सेक्टर की वृद्धि घटकर 4.3 फीसदी रही
  • भारत के आठ प्रमुख क्षेत्रों से प्राप्त परिणाम अभी भी पांच महीनों में दूसरी सबसे बड़ी विकास दर को दर्शाते हैं।
  • उर्वरक, सीमेंट और बिजली में उत्साहजनक वृद्धि के बीच आठ में से पांच घटकों में मंदी के साथ मार्च 2022 में कोर सेक्टर की वृद्धि की गति धीमी होकर 4.3% हो गई।
  • आगे आर्थिक गतिविधियों में सुधार से कोर सेक्टर को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से समग्र दृष्टिकोण कमजोर हो गया है जो घरेलू उत्पादकों के लिए लाभ मार्जिन पर दबाव डाल सकता है और निजी क्षेत्र के निवेश को बाधित कर सकता है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. पवन हंस लिमिटेड के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. पवन हंस में DRDO की 49% हिस्सेदारी है।
  2. इसे भारत सरकार द्वारा ‘मिनीरत्न’ के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  3. उड़ान II योजना के तहत इस संगठन को अनुसूचित संचालन (Scheduled Operations) के लिए एयर ऑपरेटर्स परमिट प्रदान किया गया है।

निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. उपर्युक्त सभी

उत्तर: b

व्याख्या:

  • पवन हंस सरकार और राज्य के स्वामित्व वाली ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्प लिमिटेड के बीच 51:49 का संयुक्त उद्यम है। इसलिए कथन 1 सही नहीं है।
  • पवन हंस, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत भारत सरकार का एक मिनी रत्न है। अतः कथन 2 सही है।
  • यह 1985 के बाद से तेल और गैस क्षेत्र को रणनीतिक अपतटीय परिवहन सेवाएं प्रदान करते हुए उत्तर पूर्व के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप को जोड़कर राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रों में सामान्य नागरिक उड्डयन और हेलीकॉप्टर सेवाओं के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
  • पवन हंस लिमिटेड को अनुसूचित संचालन के लिए एयर ऑपरेटर्स परमिट दिया गया है। RCS UDAN II के तहत अनुसूचित उड़ानें हिमाचल प्रदेश राज्य में शुरू हो गई हैं और जल्द ही उत्तराखंड, असम और मणिपुर राज्यों में सेवाओं का विस्तार करने की योजना है। अतः कथन 3 सही है।

प्रश्न 2. IPC की धारा 124A के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यह राजद्रोह को एक अपराध के रूप में परिभाषित करता है जब कोई भी व्यक्ति “बोले या लिखे गए शब्दों या संकेतों द्वारा या दृश्य प्रस्तुति द्वारा, भारत में विधि द्वारा स्थापित सरकार के प्रति घृणा या अवमान पैदा करता है या पैदा करने का प्रयत्न करता है, असंतोष (Disaffection) उत्पन्न करता है या करने का प्रयत्न करता है”।
  2. इस कानून के तहत आरोपित व्यक्ति को सरकारी नौकरी से रोक दिया जाता है।
  3. राजद्रोह एक गैर-जमानती अपराध है।

निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. उपर्युक्त सभी

उत्तर: d

व्याख्या:

  • IPC की धारा 124A के अनुसार, बोले या लिखे गए शब्दों या संकेतों द्वारा या दृश्य प्रस्तुति द्वारा, जो कोई भी भारत में विधि द्वारा स्थापित सरकार के प्रति घृणा या अवमान पैदा करेगा या पैदा करने का प्रयत्न करेगा, असंतोष (Disaffection) उत्पन्न करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, उसे आजीवन कारावास या तीन वर्ष तक की कैद और ज़ुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जाएगा।
  • राजद्रोह के अपराध के लिए सजा
    • यह एक गैर जमानती अपराध है।
    • तीन साल से लेकर आजीवन कारावास तक की कैद, जिसमें जुर्माना जोड़ा जा सकता है।
    • इस अपराध का दोषी पाया गया व्यक्ति किसी भी सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं है।
  • अतः सभी कथन सही हैं।

प्रश्न 3. आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के निगमीकरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. OFB के 41 आयुध कारखानों सहित इसकी संपत्तियाँ सात नई फर्मों को हस्तांतरित कर दी गई थी।
  2. इन सभी सात नई फर्मों में केंद्र सरकार की 51% हिस्सेदारी है।
  3. आयुध निर्माणी बोर्ड का मुख्यालय कोलकाता में है।

निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. उपर्युक्त सभी

उत्तर: c

व्याख्या:

  • आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) की स्थापना 1801 में हुई थी।
  • 1 अक्टूबर 2021 से इसका अस्तित्व समाप्त हो गया, और इसके 41 आयुध कारखानों की संपत्ति, कर्मचारी और संचालन को सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (DPSU) में स्थानांतरित कर कर दिया गया था। अतः कथन 1 सही है
  • OFB के 41 कारखानों, संपत्तियों, कर्मचारियों और प्रबंधन को सात नई 100% सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों में स्थानांतरित कर दिया गया था, जो अब 15 लाख की मजबूत सशस्त्र बल के लिए हथियारों, गोला-बारूद और कपड़ों के मुख्य आपूर्तिकर्ता हैं। इसलिए कथन 2 सही नहीं है
  • आयुध निर्माणी बोर्ड का मुख्यालय कोलकाता में है। अतः: कथन 3 सही है

प्रश्न 4. आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किसका भारांक सबसे कम है?

  1. सीमेंट
  2. कोयला
  3. प्राकृतिक गैस
  4. उर्वरक

उत्तर: d

व्याख्या:

भारतीय अर्थव्यवस्था के आठ प्रमुख क्षेत्र हैं:

  1. बिजली
  2. इस्पात
  3. रिफाइनरी उत्पाद
  4. कच्चा तेल
  5. कोयला
  6. सीमेंट
  7. प्राकृतिक गैस
  8. उर्वरक

प्रश्न 5. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

अंतर्राष्ट्रीय समझौता / संगठन विषय

  1. अल्मा-आटा घोषणा — लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल
  2. हेग समझौता — जैविक एवं रासायनिक शस्त्र
  3. तलानोआ संवाद — वैश्विक जलवायु परिवर्तन
  4. अंडर 2 गठबंधन — बाल अधिकार

उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सुमेलित है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 4
  3. केवल 1 और 3
  4. केवल 2, 3 और 4

उत्तर: c

व्याख्या:

  • 1978 में “सभी के लिए स्वास्थ्य” पर अल्मा-आटा घोषणा से प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (PHC) दृष्टिकोण नामक सिद्धांतों का एक व्यापक सेट निर्धारित हुआ। इसमें बहुआयामी, अंतर-क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसे “घर के सबसे करीब” उपलब्ध कराया जाना था। इसके लिए प्रभावी और सुरक्षित होने के साथ-साथ सरल और कम लागत वाली तकनीक की आवश्यकता थी। युग्म 1 सुमेलित है।
  • 2016 में, तत्कालीन महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा था कि भारत अव्यवहार्य शादी से भाग रही महिलाओं के हित में अंतर्राष्ट्रीय बाल अपहरण के नागरिक पहलुओं पर हेग कन्वेंशन की पुष्टि नहीं करेगा और विस्तृत रिपोर्ट के लिए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता में पैनल का गठन किया था। पैनल ने अपनी 2018 की रिपोर्ट में संधि पर हस्ताक्षर करने की सिफारिश नहीं की थी। युग्म 2 सुमेलित नहीं है।
  • जनवरी 2018 से शुरू होने वाले जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन का तलानोआ संवाद, सदस्यों को पेरिस सम्मेलन के बाद की प्रगति का जायजा लेने की सुविधा प्रदान करेगा। अत: युग्म 3 सुमेलित है।
  • अंडर 2 गठबंधन (2050 तक अपने ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन को शुद्ध-शून्य करने के लिए उपराष्ट्रीय सरकारों द्वारा एक समझौता ज्ञापन) प्रभावी जलवायु नेतृत्व के लिए एक मिसाल उत्पन्न कर रहा है। ज्ञात हो कि इसके सदस्य देशों और क्षेत्रों की संख्या 200 से अधिक है। युग्म 4 सुमेलित नहीं है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

  1. भारत में हिंदी भाषा की संवैधानिक स्थिति का विस्तृत विवरण दीजिए। क्या हिंदी भाषा के लिए ‘विशेष वरीयता’ के रूप में इन संवैधानिक प्रावधानों का गलत अर्थ निकाला गया है? (250 शब्द; 15 अंक) सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र II (राजव्यवस्था)
  2. नदियों और झीलों का ‘जीवित इकाई’ के रूप में नामकरण का विचार उनके संरक्षण में कितना उपयोगी होगा? उपयुक्त उदाहरणों के साथ चर्चा कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र II (शासन)

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