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02 अप्रैल 2024 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. स्वदेशी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके लीथियम बैटरी और ई-अपशिष्ट के पुनर्चक्रण हेतु एक वाणिज्यिक संयंत्र स्थापित करने हेतु समझौता:
  2. एफएसएसएआई ने ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों को सलाह दी कि वे अपनी वेबसाइटों पर बेचे जाने वाले खाद्य उत्पादों का उचित वर्गीकरण सुनिश्चित करें:
  3. कोडाइकनाल सौर वेधशाला ने सूर्य के अध्ययन के 125 वर्ष पूरे होने पर उत्सव मनाया:

02 April 2024 Hindi PIB
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1. स्वदेशी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके लीथियम बैटरी और ई-अपशिष्ट के पुनर्चक्रण हेतु एक वाणिज्यिक संयंत्र स्थापित करने हेतु समझौता:

सामान्य अध्ययन: 3

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी:

विषय: विज्ञानं एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां;देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

प्रारंभिक परीक्षा: प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी),लीथियम-आयन बैटरी।

मुख्य परीक्षा: लीथियम बैटरी और ई-अपशिष्ट का पुनर्चक्रण का महत्व ।

प्रसंग:

  • प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने विगत 27 मार्च 2024 को नई दिल्ली में जिला उधम सिंह नगर,उत्तराखंड के सितारगंज में एसआईआईडीसीयूएल औद्योगिक क्षेत्र के एल्डेको में “स्वदेशी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके लीथियम बैटरी और ई-अपशिष्ट के पुनर्चक्रण हेतु एक वाणिज्यिक संयंत्र स्थापित करने” के लिए मेसर्स रेमाइन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है।

उद्देश्य:

  • इस समझौते के माध्यम से टीडीबी ने 15 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत में से 7.5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का आश्वासन दिया है, जो सतत विकास और पर्यावरणीय प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • ई-अपशिष्ट उत्पादन के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है और इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयासों की आवश्यकता है।
  • इस पहल का समर्थन करने वाले टीडीबी से अनौपचारिक पुनर्चक्रणकर्ताओं को औपचारिक पुनर्चक्रणकर्ताओं के साथ जुड़ने में सहायता मिलेगी, जिससे चक्रीय अर्थव्यवस्था में भी योगदान मिलेगा।

विवरण:

  • इस वित्तपोषित परियोजना में इलेक्ट्रॉनिक्स प्रौद्योगिकी के लिए सेंटर फॉर मैटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी (सीएमईटी), हैदराबाद द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीक का लाभ उठाते हुए,लीथियम-आयन बैटरी और ई-अपशिष्ट के पुनर्चक्रण के लिए एक वाणिज्यिक संयंत्र की स्थापना शामिल है।
  • राष्ट्रीय महत्व के मामले के रूप में मान्यता प्राप्त लीथियम आयन बैटरियों का कुशल पुनर्चक्रण देश के भीतर सेल विनिर्माण के लिए मध्यवर्ती (इन्टरमीडिएट) कच्चे माल के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में कार्य करता है।
  • आगे उपयोग के लिए अनुपयुक्त हो चुकी लीथियम-आयन बैटरियों (एलआईबी) के निपटान से उत्पन्न होने वाले ई-कचरे का बढ़ता हुआ आयात परिवहन योग्य (पोर्टेबल) इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में उनके बढ़ते उपयोग से प्रेरित है।
  • हालांकि, उन्हें भूमि में दबाने और भस्मीकरण (इन्सिनेरेशन) के माध्यम से एलआईबी का निपटान पर्यावरण एवं सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा करता है, और इससे पुनर्चक्रण पहल की आवश्यकता भी रेखांकित होती है।
  • अनुपयुक्त हो चुके एलआईबी से धातुओं की पुनर्प्राप्ति के माध्यम से मूल्य सृजन (वैल्यू क्रिएशन) की संभावना ने भी इन बैटरियों द्वारा उत्पन्न ई-अपशिष्ट के पुनर्चक्रण में रुचि बढ़ा दी है।
  • लीथियम-आयन बैटरी के पुनर्चक्रण बाजार का आकार 2030 तक 14.89 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 21.6 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) है, जो 2021 के 3.79 अरब अमेरिकी डॉलर से बहुत अधिक है।
  • इसके बावजूद, वर्तमान में लीथियम-आयन बैटरियों का एक महत्वपूर्ण 95 प्रतिशत अंश अंततोगत्वा अनुपयुक्त होने के बाद लैंडफिल में चला जाता हैं, जबकि केवल 5 प्रतिशत ही पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग की प्रक्रिया में आ पाता है।
  • ई-अपशिष्ट परिदृश्य में अनौपचारिक क्षेत्र के प्रभुत्व का प्रतिकूल पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभाव पड़ता है।
  • बैटरी अपशिष्ट की बढ़ती समस्या का हल निकालने, आपूर्ति के साथ में आने वाले अन्य महत्वपूर्ण तत्वों से जुड़े पक्ष के जोखिमों को कम करने एवं कार्बन फुटप्रिंट्स को कम करने के लिए कुशल और पर्यावरण के अनुकूल पुनर्चक्रण की विधियां अब आवश्यक हैं।

2. एफएसएसएआई ने ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों को सलाह दी कि वे अपनी वेबसाइटों पर बेचे जाने वाले खाद्य उत्पादों का उचित वर्गीकरण सुनिश्चित करें:

सामान्य अध्ययन: 3

अर्थव्यवस्था:

विषय: भारत में खाद्य प्रसंस्करण एवं सम्बंधित उद्योग-कार्य क्षेत्र एवं महत्व,स्थान,ऊपरी एवं निचे की अपेक्षाएं, आपूर्ति श्रंखला प्रबंधन।

प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई)

मुख्य परीक्षा: भारत में खाद्य सुरक्षा पर एक लेख लिखिए।

प्रसंग:

  • भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने सभी ई-कॉमर्स फूड बिजनेस ऑपरेटरों (एफबीओ) से अपनी वेबसाइटों पर बेचे जा रहे खाद्य उत्पादों का उचित वर्गीकरण सुनिश्चित करने को कहा है।

उद्देश्य:

  • एफएसएसएआई ने निकटतम श्रेणी – डेयरी आधारित पेय मिश्रण या अनाज आधारित पेय मिश्रण या माल्ट आधारित पेय – के साथ ‘गैर मानकीकृत खाद्य’ के तहत लाइसेंस प्राप्त खाद्य उत्पादों के उदाहरणों को नोट किया है, जो ‘स्वास्थ्य पेय’, ‘ऊर्जा पेय’ श्रेणी के तहत ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर बेचे जा रहे हैं।

विवरण:

  • एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि ‘हेल्थ ड्रिंक’ शब्द एफएसएस कानून 2006 या उसके तहत बनाए गए नियमों/विनियमों के तहत कहीं भी परिभाषित या मानकीकृत नहीं है।
  • इसलिए, एफएसएसएआई ने सभी ई-कॉमर्स एफबीओ को सलाह दी है कि वे अपनी वेबसाइटों पर ऐसे पेय पदार्थों को ‘हेल्थ ड्रिंक्स/एनर्जी ड्रिंक्स’ की श्रेणी से हटाकर या डी-लिंक करके इस गलत वर्गीकरण को तुरंत सुधारें और ऐसे उत्पादों को उचित श्रेणी में रखें जैसा कि मौजूदा कानून के अंतर्गत व्‍यवस्‍था की गई है।
  • गैर मानकीकृत खाद्य पदार्थ वे खाद्य पदार्थ हैं जो खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य उत्पाद मानक और खाद्य योजक) विनियम और खाद्य सुरक्षा और मानक (स्वास्थ्य पूरक, न्यूट्रास्यूटिकल्स, विशेष आहार उपयोग के लिए भोजन, विशेष चिकित्सा प्रयोजन के लिए भोजन, कार्यात्मक भोजन और नवीन भोजन) नियमों में मानकीकृत नहीं हैं लेकिन मानकीकृत सामग्रियों का उपयोग करते हैं।
  • शब्द – ‘ऊर्जा’ पेय – को केवल खाद्य श्रेणी प्रणाली (एफसीएस) 14.1.4.1 और 14.1.4.2 (कार्बोनेटेड और गैर-कार्बोनेटेड पानी आधारित स्वादयुक्त पेय) के तहत लाइसेंस प्राप्त उत्पादों पर उपयोग करने की अनुमति है, जो खाद्य उत्पाद मानक और खाद्य योजक विनियम 2011 (कैफीनयुक्त पेय) के उप-विनियम 2.10.6 (2) के तहत मानकीकृत है।
  • इस सुधारात्मक कार्रवाई का उद्देश्य उत्पादों की प्रकृति और कार्यात्मक गुणों के बारे में स्पष्टता और पारदर्शिता बढ़ाना है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उपभोक्ता भ्रामक जानकारी का सामना किए बिना अच्छी तरह से सूचित विकल्प चुन सकें।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

1. कोडाइकनाल सौर वेधशाला ने सूर्य के अध्ययन के 125 वर्ष पूरे होने पर उत्सव मनाया:

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) ने 1 अप्रैल 2024 को प्रतिष्ठित कोडाइकनाल सौर वेधशाला (केएसओ) की 125वीं वर्षगांठ मनाई, जिससे कोडाइकनाल सौर वेधशाला (केएसओ) के इतिहास का स्मरण किया जा सके।
    • इसके वैज्ञानिकों का अभिनंदन करने और इसकी विरासत का सम्मान करना भारत में खगोल विज्ञान के लिए एक प्रमुख और बड़ी उपलब्धि था।
    • कोडाइकनाल सौर वेधशाला (केएसओ) के पास 20वीं सदी की शुरुआत से हर दिन रिकॉर्ड की जाने वाली 1.2 लाख डिजिटल सौर छवियों और सूर्य की हजारों अन्य छवियों का एक डिजिटल भंडार उपलब्ध है।
  • 1 अप्रैल 1899 को अंग्रेजों द्वारा स्थापित, वेधशाला के पास दुनिया में सूर्य के सबसे लंबे समय तक निरंतर दैनिक रिकॉर्ड में से एक है।
    • इसके साथ ही इस अद्वितीय डेटाबेस को डिजिटल कर दिया गया है। यह डेटाबेस अब दुनिया भर के खगोलविदों के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।
  • इन समारोहों के आरंभ में, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) ने 1792 में मद्रास में स्थापित वेधशाला से शुरू हुए इस वेधशाला के समृद्ध इतिहास, इसकी विविध उपलब्धियों और इसके चल रहे अनुसंधान को दर्शाने के लिए आने वाले महीनों में कई कार्यक्रमों की योजना बनाई है।
    • कोडाइकनाल सौर वेधशाला (केएसओ) वर्तमान में, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) के अंतर्गत एक फील्ड स्टेशन के रूप में कार्यरत है, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्थान है।
  • भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) की निदेशक प्रो. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम ने वेधशाला की विरासत पर प्रकाश डाला और बताया कि कैसे एक सदी से भी अधिक समय से ज्ञान की खोज के लिए प्रौद्योगिकी की कई पीढ़ियों के माध्यम से निरंतर नवाचार की आवश्यकता होती है, साथ ही वैज्ञानिकों की पीढ़ियों के माध्यम से कौशल का हस्तांतरण भी होता है।
    • भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) के पूर्व निदेशक और सौर भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर सिराज हसन ने वर्ष 1909 में वेधशाला में गैस के रेडियल प्रवाह के कारण सनस्पॉट में देखे गए एवरशेड प्रभाव की खोज के बारे में बात की।

कोडाइकनाल सौर वेधशाला:

  • 1 अप्रैल को भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान द्वारा अपने स्थापना दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जब इसे वर्ष 1971 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक संस्थान के रूप में स्थापित किया गया था।
  • यह आयोजन इस बात पर ध्यान केंद्रित करता है कि कैसे कोडाइकनाल सौर वेधशाला डेढ़ सदी से भी अधिक वैज्ञानिकों द्वारा भारतीय धरती से सूर्य को समझने, ग्रहणों का अध्ययन करने, वर्ष 1868 में हीलियम की खोज करने, सूर्य में प्लाज्मा प्रक्रिया को समझने और इसके विस्तार, प्रमुखता और चमक-दमक को समझने का प्रमाण है।
    • हाल ही में प्रक्षेपित किए गए आदित्य-एल-1 पर विजिबल एमिशन लाइन कोरोनोग्राफ, जिसे भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) के क्रेस्ट में असेंबल किया गया था और भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) के नेतृत्व में लद्दाख में प्रस्तावित नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप, इस समृद्ध विरासत को आगे बढ़ा रहा है।

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