पीआईबी विश्लेषण और सारांश हिंदी में - 04 June 2022 PIB Analysis in Hindi

04 जून 2022 : PIB विश्लेषण

विषय सूची::

  1. विश्व पर्यावरण दिवस पर “क्लीन एंड ग्रीन” अभियान की शुरुआत
  2. नेशनल स्ट्रैटजी फॉर सस्टेनेबल टूरिज्म एंड रिस्पॉन्सिबिल ट्रैवलर अभियान का शुभारम्भ
  3. भारत और सेनेगल समान लोकतांत्रिक मूल्यों, बहुलतावादी परंपराओं और सांस्कृतिक समानताओं के साथ विकास में स्वाभाविक साझेदार हैं’
  1. विश्व पर्यावरण दिवस पर “क्लीन एंड ग्रीन” अभियान की शुरुआत

सामान्य अध्ययन: 3

पर्यावरण

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

प्रारंभिक परीक्षा: “क्लीन एंड ग्रीन” अभियान

संदर्भ:

  • देश भर के राज्य/केंद्रशासित प्रदेश और शहरी स्थानीय निकाय “क्लीन एंड ग्रीन” अभियान के तहत 5 जून, 2022 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर देश में सिंगल यूज प्लास्टिक (SUP) को ख़त्म करने के साथ-साथ पर्यावरण को बेहतर बनाने में योगदान देने के लिए अभियान चलाएंगे।

विवरण:

  • विश्व पर्यावरण दिवस के दोहरे अधिदेश और भारत के 30 जून, 2022 तक सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध के संकल्प को देखते हुए, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इन आदेशों को पूरा करने के लिए कई तरह की गतिविधियों को लेकर एक विस्तृत सलाह जारी की है। इनमें प्लास्टिक कचरा संग्रह पर विशेष जोर देने के साथ बड़े पैमाने पर सफाई और प्लॉगिंग अभियान शामिल होंगे, साथ ही, सभी नागरिकों – छात्र, स्वैच्छिक संगठन, स्वयं सहायता समूह, स्थानीय गैर सरकारी संगठन/सीएसओ, एनएसएस और एनसीसी कैडेट, आरडब्ल्यूए, बाजार संघ, कॉर्पोरेट संस्थाएं, आदि की भागीदारी के साथ बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा।
  • राष्ट्रव्यापी सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध के संकल्प को लागू करने के लिए जारी परामर्श में कई पहलें शामिल हैं। वर्तमान में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा स्वच्छ भारत मिशन – शहरी 2.0 का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके तहत प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, जिसमें सिंगल यूज प्लास्टिक का उन्मूलन शामिल है – फोकस का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इस मिशन के तहत, प्रत्येक शहरी स्थानीय निकाय को अपशिष्ट के शत-प्रतिशत स्रोत पृथक्करण को अपनाने की आवश्यकता है, और सूखे कचरे (प्लास्टिक कचरे सहित) को रीसाइक्लिंग और/या मूल्य वर्धित उत्पादों के रूप में प्रसंस्करण हेतु आगे के अंशों में विभाजित करने के लिए एक सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधा (MRF) तक पहुंच हो, जिससे प्लास्टिक और सूखे कचरे की मात्रा कम से कम होकर डांस साइट्स या जलाशयों में समाप्त हो जाए।
  • यद्यपि 2,591 शहरी स्थानीय निकायों (4,704 में से) ने पहले ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध की अधिसूचना जारी की है। इसके तहत राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी कि शेष 2,100 से अधिक शहरी स्थानीय निकाय 30 जून, 2022 तक इसे अधिसूचित करें। शहरी स्थानीय निकाय द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक ‘हॉटस्पॉट’ की पहचान करने और उन्हें नष्ट करने की आवश्यकता होगी, जबकि समानांतर रूप से राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों का समर्थन और विशेष प्रवर्तन दस्तों का गठन, औचक निरीक्षण और एसयूपी प्रतिबंधों को लागू करने के लिए चूककर्ताओं पर भारी जुर्माना और दंड लगाने की आवश्यकता होगी।
  • प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (PWM) (संशोधित) नियमावली, 2021 के अनुसार, 75 माइक्रोन (75 μ यानी 0.075 मिमी मोटाई) से कम या रीसायकल प्लास्टिक से बने कैरी बैग के निर्माण, आयात, स्टॉकिंग, वितरण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जो प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियमावली, 2016 के तहत पहले अनुशंसित 50 माइक्रोन (50 μ) के स्थान पर 30 सितंबर, 2021 से प्रभावी है। इस नए प्रावधान के परिणामस्वरूप, नागरिकों को अब स्ट्रीट वेंडर, स्थानीय दुकानदारों, सब्जी विक्रेता आदि द्वारा प्रदान किए गए पतले प्लास्टिक कैरी बैग का उपयोग करने से रोकने और वैकल्पिक विकल्पों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
  • प्लास्टिक कचरा प्रबंधन (संशोधित) नियम, 2021 के अनुसार प्रवर्तन को मजबूत करने के लिए कई पूरक पहल भी की जाएंगी। शहरी स्थानीय निकायों को बाजार में आसानी से उपलब्ध एसयूपी-विकल्पों (जैसे कपड़ा/जूट/प्लास्टिक बैग, सड़ने वाली कटलरी आदि) की पहचान करने और नागरिकों के बीच ऐसे विकल्पों के बारे में जागरूकता फ़ैलाने की आवश्यकता होगी।
  • बोतलबंद पेय से निपटने वाली कॉर्पोरेट संस्थाओं से अनुरोध किया जा सकता है कि वे बोतल बैंक स्थापित करें (जहां उपयोगकर्ता पीईटी बोतलों को देने पर भुगतान प्राप्त कर सकते हैं), और उनके विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व के हिस्से के रूप में विभिन्न स्थानों पर सब्सिडी वाले पुन: प्रयोज्य प्लास्टिक बोतल बूथ भी स्थापित करें।
  • साथ ही, शहरी स्थानीय निकाय नागरिकों को सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्प प्रदान करने के लिए थैला (बैग)/बार्टन (बर्तन) कियोस्क या भंडार स्थापित कर सकते हैं, विशेष रूप से सार्वजनिक बैठकों और त्योहारों में उपयोग के लिए, जिससे सिंगल यूज प्लास्टिक खपत को कम करने में मदद मिलती है। इन पहलों को सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को रोकने के लिए जागरूकता फैलाने और सिंगल यूज प्लास्टिक-विकल्पों का लाभ उठाने के लिए सभी सार्वजनिक स्थानों, बाजारों और अन्य उच्च फुटफॉल क्षेत्रों में ‘स्वच्छता रथ’ के माध्यम से मजबूत किया जा सकता है।
  • राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों को पास के सीमेंट संयंत्रों या अन्य औद्योगिक इकाइयों के साथ समझौता करने की भी सलाह दी गई है क्योंकि उत्पन्न प्लास्टिक कचरे का एक हिस्सा या तो सीमेंट संयंत्रों में वैकल्पिक ईंधन के रूप में या सड़क निर्माण के उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है। शहरी स्थानीय निकायों या लोक निर्माण विभागों को सड़क निर्माण में SUP/बहुस्तरीय प्लास्टिक के उपयोग के लिए विस्तृत दिशा-निर्देशों को अपनाने की आवश्यकता होगी।
  • एडवाइजरी में बड़े पैमाने पर लोगों की भागीदारी पर जोर दिया गया है, जहां सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध और प्रवर्तन के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए सभी नागरिक श्रेणियों – निर्वाचित प्रतिनिधि जैसे मेयर और वार्ड पार्षद, स्वैच्छिक संगठन, स्थानीय एनजीओ/सीएसओ, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन, मार्केट एसोसिएशन, स्वयं सहायता समूह, छात्र और युवा की पहचान की जानी है और उन्हें शामिल किया जाना है। शहरी स्थानीय निकाय नागरिकों को प्लास्टिक न फैलाने और प्लास्टिक को लैंडफिल में जाने से रोकने के लिए संकल्प करने हेतु प्रोत्साहित कर सकते हैं, साथ ही मीडिया या सोशल नेटवर्क में अच्छे निपटान व्यवहार को प्रचारित करने के लिए इनाम अभियान भी चला सकते हैं ताकि अन्य लोगों को SUP उपयोग को रोकने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
  • आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा स्वच्छ भारत मिशन – शहरी का क्रियान्वयन किया जा रहा है, जो देश के सभी वैधानिक शहरों में व्यापक स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन उपायों के माध्यम से “कचरा मुक्त शहर” बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
  1. नेशनल स्ट्रैटजी फॉर सस्टेनेबल टूरिज्म एंड रिस्पॉन्सिबिल ट्रैवलर अभियान का शुभारम्भ

सामान्य अध्ययन: 3

पर्यावरण:

विषय: पर्यावरणीय स्थिरता।

मुख्य परीक्षा: नेशनल स्ट्रेटजी फॉर सस्टेनेबल टूरिज्म एंड रिस्पॉन्सिबिल ट्रैवलर अभियान

संदर्भ:

  • पर्यटन मंत्रालय ने यूनाइटेड एनवायरनमेंट प्रोग्राम (UNEP) और रिस्पॉन्सिबिल टूरिज्म सोसायटी ऑफ इंडिया (RTSOI) के साथ भागीदारी में नई दिल्ली में नेशनल समिट ऑन डेवलपमेंट सस्टेनेबल एंड रिस्पांसिबल टूरिस्ट डेस्टिनेशन का आयोजन किया। इस अवसर पर पर्यटन मंत्रालय ने नेशनल स्ट्रेटजी फॉर सस्टेनेबल टूरिज्म एंड रिस्पांसिबल ट्रैवलर अभियान का शुभारम्भ किया।

विवरण:

  • इस रणनीतिक दस्तावेज में पर्यावरण स्थायित्व को प्रोत्साहन, जैव विविधता को संरक्षण, आर्थिक स्थायित्व को प्रोत्साहन, सामाजिक सांस्कृतिक स्थायित्व को प्रोत्साहन, टिकाऊ पर्यटन, IEC और क्षमता विकास एवं शासन के प्रमाण की योजना हेतु रणनीतिक आधारों की पहचान की गई है।
  • पर्यटन और पर्यावरण के बीच एक विशेष संबंध है। एक दूसरे के साथ उनकी अंतःक्रिया एक दोतरफा प्रक्रिया है। एक तरफ पर्यावरण संसाधन पर्यटन के बुनियादी अंगों में एक के रूप में अंशदान करते हैं। पर्यटक प्राकृतिक और मानव निर्मित पर्यटन का लुत्फ उठाते हैं। दूसरी तरफ, पर्यटकों, मेजबान समुदायों और स्थानीय पर्यावरण के बीच निकट और प्रत्यक्ष संबंध से एक संवेदनशील स्थिति निर्मित होती है, जिससे पर्यटन न सिर्फ नुकसानदेह बल्कि टिकाऊ विकास के लिए बेहद सकारात्मक दोनों हो सकता है। कोविड-19 महामारी ने पर्यटन क्षेत्र में लोचशीता, टिकाऊ और क्षेत्र में विभिन्न हितधारकों के बीच परस्पर संयोजन को अनिवार्य कर दिया है।
  • राज्यों की पर्यटन नीतियों में पर्यटन के स्वयं के दृष्टिकोण और रणनीतिक दिशा में स्थिरता के सिद्धांतों व टिकाऊ विकास के लक्ष्यों को स्वीकार्यता मिलनी चाहिए। पर्यटन के लिए स्थायी भविष्य तैयार करने के दृष्टिकोण के साथ, पर्यटन मंत्रालय ने इस दिशा में भी कई कदम उठाए हैं।
  • पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटकों को अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से स्वदेश दर्शन योजना की शुरुआत की है और अभी तक 76 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है। “सस्टेनेबल एंड रिस्पांसिबल टूरिस्ट डेस्टिनेशंस के विकास के दृष्टिकोण के साथ समग्र विकास को प्रोत्साहन देने के लिए स्वदेश दर्शन 2.0 के विचार को आगे बढ़ाया गया है। स्वदेश दर्शन 2.0 के माध्यम से विभिन्न परियोजनाओं और पहलों में टिकाऊ और उत्तरदायी पर्यटन प्रक्रियाओं को लागू किया जाएगा। इस योजना से पर्यावरण, सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक स्थायित्व सहित टिकाऊ पर्यटन के सिद्धांतों को अपनाए जाने को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. भारत और सेनेगल समान लोकतांत्रिक मूल्यों, बहुलतावादी परंपराओं और सांस्कृतिक समानताओं के साथ विकास में स्वाभाविक साझेदार हैं’
  • भारत के उपराष्ट्रपति सेनेगल में पश्चिमी अफ्रीका के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक यूनिवर्सिटी चेक एंता डाओप में उपस्थित लोगों को ‘तिरंगा- भारत और सेनेगल के बीच राजनयिक संबंधों के 60 साल’ विषय पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से भारत वैश्विक शासन और वैश्विक विकास में एक प्रमुख नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है, अफ्रीकी देश इसकी समृद्धि में भारत के भरोसेमंद भागीदारों और हितधारकों के रूप में एक प्रमुख भूमिका निभाते रहेंगे।
  • उपराष्ट्रपति ने कहा, “सेनेगल के “तेरंगा” शब्द में निहित शांति, सम्मान, ग्रहणशीलता, लोकतांत्रिक तत्व ऐसे मूलभूत मूल्य हैं, जो सेनेगल और भारत को एक साथ लाए हैं एवं साथ काम करने और हमारे लोगों के लिए शांति एवं संपन्नता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।”
  • भारत और सेनेगल के 60 साल के सफल राजनयिक संबंधों को देखते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों में बहुलतावादी परंपराएं हैं, लोग सांस्कृतिक सहिष्णुता में विश्वास करते हैं और ये मूल्य जनता से जनता के बीच के संबंधों का आधार हैं। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में और सेनेगल अफ्रीका में सबसे ज्यादा स्थायी और लोकतंत्र के मॉडलों में से एक के रूप में विकास के स्वाभाविक भागीदार हैं और एक दूसरे के साथ स्वाभाविक संबंध साझा करते हैं।
  • उपराष्ट्रपति ने सेनेगल की भाषाओं (वोलोफ, सेरर और फुलानी) और द्रविड़ भाषाओं के बीच भाषाई समानता पर शोध की ओर इशारा करते हुए यह भी बताया कि कैसे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक समानताएं हैं। उन्होंने सेनेगल के लोगों द्वारा भारतीय सिनेमा को व्यापक रूप से देखे जाने और उनके प्रति प्यार का भी उल्लेख किया।
  • उपराष्ट्रपति ने माना कि भारतीय कंपनियों के लिए सेनेगल में विशेष रूप से कृषि, स्वास्थ्य, आईसीटी, खनन आदि में निवेश की पर्याप्त संभावनाएं हैं। उन्होंने सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड टेक्निकल डेवलपमेंट की सफलता का उल्लेख किया, जिसकी स्थापना भारत द्वारा डाकर में एक विशाल परियोजना के रूप में की गई है जिसमें सेनेगल के 1,000 और अन्य अफ्रीकी देशों के 19 विद्यार्थी अध्ययन करते हैं।

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