पीआईबी विश्लेषण और सारांश हिंदी में - 18 June 2022 PIB Analysis in Hindi

18 जून 2022 : PIB विश्लेषण

विषय सूची:

  1. भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के लिए फिर से वार्ता की शुरुआत
  2. जलवायु और ऊर्जा पर प्रमुख अर्थव्यवस्था मंच की बैठक
  3. सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध लागू करने के लिए उपाय
  4. अग्निपथ योजना
  1. भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के लिए फिर से वार्ता की शुरुआत

सामान्य अध्ययन:2

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

मुख्य परीक्षा: मुक्त व्यापार समझौते का भारत और यूरोपीय संघ संबंध पर प्रभाव

संदर्भ:

  • ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ (EU) के मुख्यालय में आयोजित एक संयुक्त कार्यक्रम में, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग, उपभोक्ता कार्य एवं खाद्य तथा सार्वजनिक वितरण और कपड़ा मंत्री और यूरोपीय संघ के कार्यकारी उपाध्यक्ष ने औपचारिक रूप से भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता की पुनः शुरुआत की। इसके अलावा, एक निवेश संरक्षण समझौते (IPA) और एक GI समझौते के लिए भी वार्ता शुरू की गई।

विवरण:

  • पिछले साल, 8 मई, 2021 को पोर्टो में आयोजित भारत और यूरोपीय संघ के नेताओं की बैठक में, एक संतुलित, महत्वाकांक्षी, व्यापक और पारस्परिक रूप से लाभप्रद मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत फिर से शुरू करने और IPA पर नए सिरे से बातचीत शुरू करने और GI पर एक अलग समझौता-वार्ता के लिए एक समझौता किया गया था। दोनों साझेदार अब लगभग नौ साल के अंतराल के बाद मुक्त व्यापार समझौता वार्ता फिर से शुरू कर रहे हैं, क्योंकि 2013 में पूर्व की बातचीत समझौते के दायरे और अपेक्षाओं में अंतराल के कारण बंद हो गई थी।
  • अप्रैल 2022 में यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की दिल्ली यात्रा और भारतीय प्रधानमंत्री की हाल की यूरोप यात्रा से मुक्त व्यापार समझौता वार्ता को गति मिली है तथा वार्ता के लिए एक स्पष्ट रोडमैप को निर्धारित करने में मदद मिली है।
  • यह भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते में से एक होगा, क्योंकि यूरोपीय संघ अमेरिका के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत-यूरोपीय संघ के व्यापारिक कारोबार ने 2021-22 में 43.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 116.36 बिलियन अमरीकी डालर मूल्य का अभूतपूर्व कारोबार किया है। यूरोपीय संघ को भारत का निर्यात वित्त वर्ष 2021-22 में 57 प्रतिशत बढ़कर 65 बिलियन डॉलर हो गया। भारत का यूरोपीय संघ के साथ अधिशेष व्यापार है।
  • दोनों पक्ष निष्पक्षता और पारस्परिकता के सिद्धांतों के आधार पर व्यापार वार्ता को विस्तृत, संतुलित और व्यापक बनाने का लक्ष्य बना रहे हैं। बाजार पहुंच के मुद्दों को हल करने पर भी चर्चा होगी जो द्विपक्षीय व्यापार में बाधा डाल रहे हैं।
  • यद्यपि प्रस्तावित IPA निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने हेतु सीमा पार निवेश के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करेगा, वहीं जीआई समझौते से हस्तशिल्प और कृषि-वस्तुओं सहित जीआई उत्पादों के व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए एक पारदर्शी एवं अनुमान-योग्य नियामक वातावरण स्थापित होने की संभावना है। दोनों पक्ष समानांतर तौर पर तीनों समझौतों पर बातचीत करने और उन्हें एक साथ अंतिम रूप देने का लक्ष्य बना रहे हैं। तीनों समझौतों के लिए पहले दौर की वार्ता 27 जून से 1 जुलाई, 2022 तक नई दिल्ली में होगी।
  • भारत ने इस साल की शुरुआत में रिकॉर्ड समय में ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त अरब अमीरात के साथ मुक्त व्यापार समझौता पूरा किया है। कनाडा और यूनाइटेड किंगडम के साथ भी मुक्त व्यापार समझौता वार्ता चल रही है। मुक्त व्यापार समझौता वार्ता प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ संतुलित व्यापार समझौते बनाने और व्यापार तथा निवेश में सुधार के लिए मौजूदा व्यापार समझौतों में सुधार लाने हेतु भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
  1. जलवायु और ऊर्जा पर प्रमुख अर्थव्यवस्था मंच की बैठक

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3:

अर्थव्यवस्था/पर्यावरण:

विषय: ऊर्जा और संबंधित पर्यावरण प्रभाव आकलन।

मुख्य परीक्षा: स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने हेतु विभिन्न पहल

संदर्भ:

  • केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति की मेजबानी में ऊर्जा और जलवायु पर प्रमुख अर्थव्यवस्था मंच (MEF) की वर्चुअल बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

उद्देश्य

  • इस बैठक का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती प्रदान करना और जलवायु संकट से निपटने हेतु किए गए कार्यों को तीव्र करना था, जिससे COP-27 को गति प्रदान की जा सके। इस बैठक में दुनिया की 23 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने हिस्सा लिया।

विवरण:

  • केंद्रीय मंत्री ने जलवायु परिवर्तन से निपटने हेतु सामूहिक वैश्विक प्रयास में योगदान देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता के संदर्भ में बात की। उन्होंने कहा कि भारत की पहल उसकी सीमाओं से आगे बढ़कर है, जिसमें इंटरनेशनल सोलर एलायंस और कोलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएशन इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है।
  • भारत द्वारा पहले ही 159 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता स्थापित की जा चुकी है और पिछले 7.5 वर्षों में, भारत की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता में 18 गुना से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है।
  • भारत में प्रति व्यक्ति वार्षिक उत्सर्जन, वैश्विक औसत का केवल एक तिहाई है और इसका संचयी GHG उत्सर्जन 4 प्रतिशत से भी कम है, लेकिन भारत के जलवायु लक्ष्य महत्वाकांक्षी हैं और वैश्विक हित के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
  • उन्होंने बताया कि किस प्रकार से विश्व की सबसे बड़ी स्वच्छ ऊर्जा विकास योजनाओं में से एक के माध्यम से पंचामृत लक्ष्यों को पूरा किया जा रहा है। भारत हरित हाइड्रोजन मिशन से लेकर ई-मोबिलिटी तक अपनी अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में निम्न कार्बन नीतियों को अपनाकर अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में अग्रसर है।
  • केंद्रीय मंत्री ने MEF के सदस्यों से ग्लासगो में COP26 में प्रधानमंत्री द्वारा उल्लिखित लाइफ यानी ‘लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरनमेंट’ पर एक वैश्विक आंदोलन की शुरुआत करने का आह्वान किया।
  1. सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध लागू करने के लिए उपाय

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 :

पर्यावरण:

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

मुख्य परीक्षा: सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध लागू करने के उपाय

संदर्भ

  • व्यापक कार्य योजना के हिस्से के रूप में सिंगल यूज प्लास्टिक को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के माननीय प्रधानमंत्री की अपील को पूरा करने के लिए CPCB ने 30 जून, 2022 तक एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाने की भारत की प्रतिबद्धता को प्रभावी बनाने के लिए व्यापक उपाय किए हैं।

विवरण

  • CPCB की बहुआयामी दृष्टिकोण में जो उपाय शामिल हैं इनमें कच्चे माल की आपूर्ति को कम करना, प्लास्टिक की मांग को कम करने के लिए मांग पक्ष के उपाय, सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्पों को बढ़ावा देने के उपायों को सक्षम करना, प्रभावी निगरानी के लिए डिजिटल युक्तियां और जागरूकता पैदा करना तथा निर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य बोर्डों को दिशा निर्देशित करना है।
  • प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (PWM) नियमावली, 2016 के अनुसार, गुटखा, तंबाकू और पान मसाला के भंडारण, पैकिंग या बिक्री के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्लास्टिक सामग्री का उपयोग करने वाले पाउच पर पूर्ण प्रतिबंध है। पीडब्ल्यूएम (संशोधित) नियम, 2021 के अनुसार, पचहत्तर माइक्रोन से कम के रीसाइकल्ड प्लास्टिक से बने कैरी बैग के निर्माण, आयात, स्टॉकिंग, वितरण, बिक्री और उपयोग पर 30 सितंबर, 2021 से प्रतिबंध लगा दिया गया है जबकि पीडब्ल्यूएम नियमावली, 2016 के तहत पहले पचास माइक्रोन की अनुशंसा की गई थी। इसके अतिरिक्त, 12 अगस्त 2021 की अधिसूचना, 1 जुलाई, 2022 से निम्नलिखित चिन्हित एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं के निर्माण, आयात, स्टॉकिंग, वितरण, बिक्री और उपयोग को प्रतिबंधित करती है, जिनकी उपयोगिता कम और गंदगी फैलाने की क्षमता अधिक है:
    • प्लास्टिक स्टिक के साथ ईयर-बड, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक स्टिक, प्लास्टिक के झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक, सजावट के लिए पॉलीस्टाइनिन [थर्माकोल]।
    • प्लेट, कप, गिलास, कांटे, चम्मच, चाकू, पुआल, ट्रे, जैसे कटलरी, मिठाई के डिब्बों के चारों ओर रैपिंग या पैकिंग फिल्म, निमंत्रण कार्ड, सिगरेट के पैकेट, 100 माइक्रोन, स्टिरर से कम के प्लास्टिक या पीवीसी बैनर।
  • चिन्हित वस्तुओं की आपूर्ति पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर निर्देश जारी किए गए हैं। उदाहरण के लिए, सभी प्रमुख पेट्रोकेमिकल उद्योगों को प्रतिबंधित एकल उपयोग प्लास्टिक उत्पादन में लगे उद्योगों को प्लास्टिक के कच्चे माल की आपूर्ति नहीं करने का निर्देश दिया गया है। इसके अतिरिक्त, SPCB/PCC को प्रतिबंधित एकल उपयोग प्लास्टिक उत्पादन में लगे उद्योगों को वायु/जल अधिनियम के तहत प्रचालन करने के लिए सहमति को संशोधित/निरस्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं। सीमा शुल्क प्राधिकरण को प्रतिबंधित एकल उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं के आयात को रोकने के लिए कहा गया है। लूप को पूरा करने के लिए, स्थानीय अधिकारियों को इस शर्त के साथ नए वाणिज्यिक लाइसेंस जारी करने का निर्देश दिया जा रहा है कि एकल उपयोग प्लास्टिक उनके परिसर में नहीं बेचे जाएंगे और मौजूदा वाणिज्यिक लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे, यदि ये निकाय प्रतिबंधित एकल उपयोग प्लास्टिक बेचते पाए जाते हैं।
  • मौजूदा आपूर्ति के विकल्प के रूप में,एकल उपयोग प्लास्टिक के विकल्प को बढ़ावा देने के उपायों को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। CPCB पहले ही कम्पोस्टेबल प्लास्टिक के लगभग 200 निर्माताओं को एकमुश्त प्रमाण-पत्र जारी कर चुका है। इन प्रमाणपत्रों को नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं है जो सरकार की व्यापार करने में सुगमता की नीति के अनुरूप है। इसके अतिरिक्त, इन विनिर्माताओं के प्रमाणीकरण की सुविधा के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया है। एमएसएमई की सहायता करने के लिए, CPCB, CIPET के सहयोग से, एकल उपयोग प्लास्टिक के विकल्प हेतु रूपांतरण के लिए देश भर में एमएसएमई के लिए कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है। रांची, गुवाहाटी और मदुरै में ऐसी तीन कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं। IISC और सिपेट जैसे अग्रणी तकनीकी संस्थानों के सहयोग से पेट्रो आधारित प्लास्टिक के विकल्पों का विकास भी किया जा रहा है।
  • मांग पक्ष पर, ई-कॉमर्स कंपनियों, प्रमुख एकल उपयोग वाले प्लास्टिक विक्रेताओं/ उपयोगकर्ताओं और प्लास्टिक के कच्चे माल के विनिर्माताओं को चिन्हित सिंगल यूज प्लास्टिक मदों को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। इन प्रयासों में नागरिकों को भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु, SPCB और स्थानीय निकाय सभी नागरिकों- छात्रों, स्वैच्छिक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय गैर सरकारी संगठनों/सीएसओ, आरडब्ल्यूए, बाजार संघों, कॉरपोरेट संस्थाओं आदि की भागीदारी के साथ व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चला रहे हैं। इससे पहले, CPCB ने अपने उत्पाद की पैकेजिंग में प्लास्टिक के उपयोग की जांच के लिए देश भर में गुटखा/पान मसाला निर्माण उद्योगों का औचक निरीक्षण किया था।
  • व्यापक स्तर पर दक्षता को बढ़ाने के लिए कई डिजिटल युक्तियां की गई हैं। नागरिक भागीदारी को सक्षम करने के लिए, पर्यावरण वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्री द्वारा एक एकल उपयोग प्लास्टिक लोक शिकायत ऐप लॉन्च किया गया था। इस ऐप में शिकायतों को ट्रैक करने की सुविधा के साथ जियो टैगिंग सुविधाएं हैं। प्रगति और दिन-प्रतिदिन की निगरानी के लिए CPCB द्वारा जारी व्यापक निर्देशों के अनुपालन में राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट दाखिल करने हेतु एक एकल उपयोग प्लास्टिक अनुपालन निगरानी पोर्टल बनाया गया।
  • CPCB भारत के हरित भविष्य के लिए एकल उपयोग प्लास्टिक को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु प्रमुख हितधारकों के सक्रिय सहयोग के माध्यम से अधिसूचित वस्तुओं के एकल उपयोग प्लास्टिक प्रतिबंध की सुविधा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. अग्निपथ योजना
  • रक्षा मंत्री ने रक्षा मंत्रालय में नौकरी की रिक्तियों के 10% को आवश्यक पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले अग्निवीरों के लिए आरक्षित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
  • यह 10% आरक्षण भारतीय तटरक्षक बल, रक्षा असैन्य पदों और सभी 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में लागू किया जाएगा। इनमें शामिल हैं- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML), भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL), हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL), मिश्रा धातु निगम (मिधानी) लिमिटेड, बख्तरबंद वाहन निगम लिमिटेड (AVNL), एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AW&EIL), मुसिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL), यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL), ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (GIL), इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL) और ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड (TCL)। यह आरक्षण भूतपूर्व सैनिकों के लिए वर्तमान आरक्षण के अतिरिक्त उपलब्ध कराया जायेगा।
  • इन प्रावधानों को लागू करने के लिए प्रासंगिक भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन लागू किए जाएंगे। DPSU को सलाह दी जाएगी कि वे अपने संबंधित भर्ती नियमों में समान संशोधन करें। उपरोक्त नौकरियों में अग्निवीरों की भर्ती के लिए आवश्यक आयु सीमा में छूट का प्रावधान भी किया जाएगा।
  • उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के किसानों/उत्पादकों को समर्थन देने के लिए स्थापित NERAMAC किसानों और बड़े बाजार के बीच की खाई को पाटने के लिए काम कर रहा है। इस प्रकार, ओडीओपी यानी एक ज़िला एक उत्पाद पहल के सहयोग से वर्तमान क्रेता-विक्रेता बैठक में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। संयुक्त प्रयासों के माध्यम से, किसानों की कमाई की क्षमता में सुधार के लिए क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ उत्पादों का बड़े ब्रांडों के साथ मिलान किया जा रहा है।
  • सभी 8 उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के राज्यों के खरीदारों, विक्रेताओं और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के बीच केंद्रित व्यापार चर्चा को भी सुगम बनाया गया। इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम के दौरान 6 करोड़ रुपये के आशय पत्र (LOI) पर हस्ताक्षर किए गए।
  • DPIIT, एक ज़िला एक उत्पाद की पहल के अंतर्गत, किसानों की आय बढ़ाने पर प्रमुख रूप से ध्यान देने के साथ इस तरह के संपर्क के निर्माण और निर्वाह को सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है। कृषि, कपड़ा, हस्तशिल्प और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में 700 से अधिक उत्पादों के साथ, एक ज़िला एक उत्पाद पहल देश के हर जिले से एक उत्पाद का चयन, ब्रांड और प्रचार पर केंद्रित है। यह व्यापार को बढ़ावा देने और सुविधा के बड़े उद्देश्य के लिए समन्वय, सहयोगी नेटवर्क बनाने और खरीदारों व विक्रेताओं के हैंडहोल्डिंग को सक्षम करने के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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