UPSC परीक्षा कम्प्रेहैन्सिव न्यूज़ एनालिसिस - 09 June, 2022 UPSC CNA in Hindi

09 जून 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राज्यव्यवस्था एवं शासन:

  1. भारत में धर्मनिरपेक्षता का भविष्य:

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

  1. यूक्रेन युद्ध और वैश्विक खाद्य संकट:

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

  1. घरेलू राजनीति का विदेश नीति पर प्रभाव:

राजव्यवस्था एवं शासन:

  1. पुलिस मुठभेड़ कानून के शासन की धज्जियां उड़ा रहा है:
  2. समान नागरिक संहिता का भविष्य:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. ‘18,000 पंडितों ने खीर भवानी मंदिर के दर्शन किये’:
  2. सेवेरोडोनेत्स्क का अधिकांश भाग अब रूसियों के अधीन: नियंत्रक
  3. ‘सरकार की इस योजना ने गरीबों को सम्मान के साथ जीने में मदद की’:

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. महंगाई पर काबू पाने के लिए आरबीआई ने दरों में वृद्धि की:
  2. भारत और वियतनाम ने रसद समझौते पर हस्ताक्षर किए:

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

यूक्रेन युद्ध और वैश्विक खाद्य संकट:

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

विषय: विकसित एवं विकासशील देशों की नीतियां और राजनीति का भारत के हितों एवं प्रवासी भारतीयों पर प्रभाव।

मुख्य परीक्षा: वैश्विक खाद्य संकट; वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए रूस और यूक्रेन का महत्व।

संदर्भ:

  • रूस-यूक्रेन युद्ध संकट के कारण विश्व में खाद्यानों की कीमतें बढ़ रही हैं,क्योंकि रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया के एक चौथाई से अधिक गेहूं की आपूर्ति करते हैं।

वैश्विक खाद्य संकट:

  • रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले ही कई देश बढ़ती खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे थे।
  • बार-बार आने वाला सूखा या बाढ़ जैसे जलवायु झटके, संघर्ष और COVID-19 महामारी ने आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया था, जिससे वस्तुओं और फसलों दोनों की कीमतें बढ़ गई थीं। यूक्रेन युद्ध ने इस स्थिति को और ख़राब कर दिया है।
  • विश्व बैंक के अनुमानों के अनुसार, वैश्विक खाद्य, ईंधन और उर्वरक की कीमतों में और तेजी आने का अनुमान है,और यह वर्ष 2024 तक उच्च ही बनी रहेगी।
  • दुनिया की लगभग सभी अर्थव्यवस्थाएं उच्च खाद्य कीमतों के कारण नकारात्मक रूप से प्रभावित हुई हैं।
  • पश्चिमी देशों में, भोजन और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ जीवन की लागत का संकट भी उत्पन्न हो गया है।
  • लगभग 90% उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में इस वर्ष खाद्य मुद्रास्फीति में 5% से अधिक की वृद्धि हुई हैं।
  • कम आय वाले देश जो बुनियादी खाद्य खपत के लिए आयात पर निर्भर हैं, इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, इथियोपिया, नाइजीरिया, दक्षिण सूडान और यमन “उच्च अलर्ट” (highest alert) एवं “भयावह परिस्थितियों” (catastrophic conditions) वाले हॉटस्पॉट बने हुए हैं, साथ ही अफगानिस्तान और सोमालिया को भी इस श्रेणी में जोड़ा गया है।

खाद्य संकट के कारण:

यूक्रेन से निर्यात का घटना :

  • रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से निर्यात में लगातार गिरावट आई है, क्योंकि रूस द्वारा किये जा रहे इस युद्ध का प्रयास पूरी तरह से यूक्रेन के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों अर्थात काला सागर / आज़ोव तट के सागर को अपने अधिकार में लेने पर केंद्रित है।
  • यूक्रेन दो कारणों से मायकोलाइव और ओडेसा बंदरगाहों पर वाणिज्यिक जहाजों को उतरने नहीं दे रहा हैं –
  1. यूक्रेन ने रूसी हमलों के खिलाफ एक निवारक के रूप में इन बंदरगाहों के आसपास नौवहन खनन (mined the waters) किया है।

(एक नौसैनिक खदान एक विस्फोटक उपकरण है जिसे सतह के जहाजों या पनडुब्बियों को नुकसान पहुंचाने या नष्ट करने के लिए पानी में रखा जाता है।)

  1. रूस ने काला सागर के पानी में नौसैनिक नाकाबंदी कर दी है।
  • वास्तव में इन कारकों ने यूक्रेन से निर्यात को पूरी तरह से बंद कर दिया है।

रूस पर पश्चिमी प्रतिबंध:

  • रूस, दुनिया का शीर्ष गेहूं निर्यातक होने के अलावा, उर्वरक का एक प्रमुख निर्यातक भी है, जो खाद्य उत्पादन के लिए एक आवश्यक वस्तु है।
  • रूस के खाद्य और उर्वरक क्षेत्रों पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का अधिक असर नहीं है,लेकिन रूस पर लगे वित्तीय प्रतिबंधों के कारण रूस को भुगतान करना मुश्किल हो गया है, जिसके चलते खाद्यान्न का निर्यात जटिल हो गया है।
  • साथ ही, रूसी कुलीन वर्गों पर लक्षित प्रतिबंधों ने यहाँ के कृषि उद्योग को मिलने वाले वित्त को अवरुद्ध कर दिया है।

वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए रूस और यूक्रेन का महत्व:

  • रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया के एक चौथाई से अधिक गेहूं की आपूर्ति करते हैं।
  • दुनिया में व्यापक तौर पर उगाई जाने वाली फसल गेहूं के वैश्विक निर्यात में रूस की हिस्सेदारी कुछ 20% है, जबकि यूक्रेन की हिस्सेदारी 8% है।
  • एफएओ (FAO) के अनुसार, लगभग 50 देश अपने गेहूं के आयात के 30% से अधिक के लिए रूस और यूक्रेन पर निर्भर हैं।
  • अजरबैजान और जॉर्जिया अपने आयातित गेहूं का 80% से अधिक रूस और यूक्रेन से प्राप्त करते हैं।
  • तुर्की, मिस्र, बांग्लादेश और लेबनान इन दोनों देशों से अपने आयात का 60% से अधिक पूरा करते हैं।
  • यूक्रेन मकई (Corn) का दुनिया का आठवां सबसे बड़ा उत्पादक और चौथा सबसे बड़ा निर्यातक देश है, जो वैश्विक निर्यात का 16% हिस्सा है।
  • इसके अलावा, यूक्रेन सूरजमुखी के बीज और सूरजमुखी के तेल का 46% उत्पादन करता है। यह सूरजमुखी के तेल का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है।
  • इसलिए, युद्ध और प्रतिबंधों ने दुनिया के ब्रेड बास्केट क्षेत्र (एक कृषि क्षेत्र जो अन्य क्षेत्रों को बड़ी मात्रा में भोजन, विशेष रूप से अनाज प्रदान करता है) को स्पष्ट रूप से प्रभावित किया है, जिससे खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।

निष्कर्ष:

  • रूस ने सुझाव दिया है कि वह आज़ोव सागर पर स्थित बंदरगाहों से निर्यात फिर से शुरू करेगा और अगर यूक्रेन अपने नियंत्रण वाले बंदरगाहों को नष्ट कर देता है तो वह काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों के लिए एक गलियारा खोलेगा।
  • लेकिन यह तभी हो सकता है,जब रूस को समुद्री गलियारा खोलने के बदले उस पर लगाए गए प्रतिबंधों में राहत मिले।
  • यूक्रेन के पास एक विकल्प यह है कि बाल्टिक राज्यों पोलैंड या बेलारूस के माध्यम से अनाज को स्थलीय के मार्ग से आपूर्ति की जाए,या फिर उन्हें बाल्टिक सागर के बंदरगाहों से।
  • अमेरिकी विदेश विभाग ने खाद्यान्न ले जाने के बदले बेलारूस को किसी भी प्रकार की कोई रियायत देने का कड़ा विरोध किया है।
  • पोलैंड के माध्यम से स्थलीय मार्ग से खाद्यान्न ले जाना अधिक चुनौतीपूर्ण है क्योंकि पोलैंड में रेल ट्रैक गेज यूक्रेन और बाल्टिक राज्यों जैसे पूर्व सोवियत देशों की तुलना में छोटे है।
  • इसलिए, यूक्रेनी अनाज को वैश्विक बाजारों में ले जाने का एकमात्र मार्ग काला सागर है।
  • वैश्विक खाद्य पदार्थों पर दबाव कम करने के लिए, रूस को अनाज और उर्वरक दोनों के निर्यात को भी बढ़ाना होगा।

सारांश:

  • जैसा कि यूक्रेन के पूर्व में युद्ध जारी है, एवं इसका कोई राजनीतिक समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा है, इससे उत्पन्न हुए संकट के कारण वैश्विक खाद्य कीमतें आसमान छू रही हैं जिससे लाखों लोगों के भूखा रहने का खतरा पैदा हो गया हैं,इस समस्या से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र और तुर्की ने रूसी नेताओं के साथ वार्ता शुरू की है ताकि रूस और यूक्रेन से अनाज और उर्वरक निर्यात शुरू हो सके।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

भारत में धर्मनिरपेक्षता का भविष्य:

राज्यव्यवस्था एवं शासन:

विषय: भारत का संविधान – महत्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

प्रारंभिक परीक्षा: संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता, व राजनीतिक दलों की धर्मनिरपेक्षता।

मुख्य परीक्षा: संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता और राजनीतिक दलों की धर्मनिरपेक्षता।

संदर्भ:

  • भारत में एक राजनीतिक दल के प्रवक्ताओं द्वारा पैगंबर मुहम्मद और इस्लाम पर की गई टिप्पणियों की विभिन्न पश्चिम एशियाई देशों द्वारा निंदा किये जाने के साथ ही धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक सहिष्णुता का मुद्दा एक बार फिर मुखर हो गया है।
  • इस लेख में, लेखक आशावादी दृष्टिकोण रखते हुए कहता हैं कि देश में पुनः संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता को पुनर्जीवित किया जा सकता है और इसे फिर भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ बनाया जा सकता है।

संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता:

  • संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता की दो विशेषताएं हैं :
  • सर्वप्रथम इसमें सभी धर्मों के लिए सम्मान का भाव होना चाहिए।
  • दूसरी विशेषता यह है कि भारत को किसी भी धर्म विशेष से सख्त अलगाव छोड़ देना चाहिए और सभी धर्मों से एक सैद्धांतिक दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

सम्मान एवं आलोचना:

  • धर्म को सामाज से अलग करने की काल्पनिक असंभवता को देखते हुए, धार्मिक सिद्धांत या व्यवहार के हर पहलू का सम्मान नहीं किया जा सकता है।
  • आलोचना के साथ धर्म का सम्मान होना चाहिए।
  • यह इस प्रकार है कि देश को सम्मानपूर्वक धर्म को त्याग देना चाहिए, लेकिन जब भी धार्मिक समूह सांप्रदायिक वैमनस्य और धर्म के आधार पर भेदभाव बढ़ते हैं, तब वहाँ सहोदर की स्थापना के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए।
  • इस प्रकार, देश को सैदव यह तय करना होता है कि कब इसमें शामिल होना है या नहीं। यह पूरी तरह से इस पर निर्भर करता है कि इनमें से कौन स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के प्रति हमारी संवैधानिक प्रतिबद्धता को बढ़ाता है।
  • यह संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता केवल सरकारों द्वारा ही कायम नहीं रखी जा सकती है, इसके लिए निष्पक्ष न्यायपालिका, ईमानदार मीडिया, नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं और सतर्क नागरिकों की सामूहिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है।

राजनीतिक दलों की धर्मनिरपेक्षता (Party-political secularism):

  • राजनीतिक दलों की धर्मनिरपेक्षता तथाकथित ‘धर्मनिरपेक्ष ताकतों’ सहित सभी राजनीतिक दलों द्वारा प्रचलित किया गया एक नापाक सिद्धांत है।
  • इस धर्मनिरपेक्षता ने सभी मूल्यों को मूल विचार से दूर कर इसे अवसरवाद में बदल दिया है। यह विशेष रूप से तत्काल चुनावी लाभ के लिए धार्मिक समुदायों के साथ अवसरवादी गठबंधन का समर्थन करता है।

अवसरवाद का आगमन:

  • अवसरवादी अलगाव (वचनबद्धता या विघटन), विशेष रूप से तत्काल चुनावी लाभ के लिए, राजनीतिक दलों की धर्मनिरपेक्षता का एक नारा है।
  • अवसरवादी अलगाव ने ‘सम्मान’ की व्याख्या धार्मिक समूहों के आक्रामक या रूढ़िवादी वर्गों के साथ उनके संबंधों में कटौती करने के लिए की है- जैसे पूजा के लिए बाबरी मस्जिद / राम मंदिर को खोलना, और शाह बानो मामले में महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी।
  • यह अखंड बहुसंख्यकवाद है जो धर्मनिरपेक्षता के रूप में सामने आया है, जो अपनी अनैतिक प्रथाओं की जांच किए बिना ‘छद्म-धर्मनिरपेक्षता’ का विरोध करता है।
  • भारत में सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए:Positive secularism in India

धर्मनिरपेक्षता पर बातचीत के लिए उठाये जाने वाले महत्वपूर्ण कदम:

  • लेखक के अनुसार, गहन आत्मनिरीक्षण द्वारा अंतर-धार्मिक अन्याय को जड़ से खत्म करने और इसके इसे मानने वालों के लिए स्वतंत्र और समान बनाने की स्थितियां बनायी जा सकती है।
  • भारत की धर्मनिरपेक्षता को राजनीति द्वारा उतना ही नुकसान पहुँचाया है, जितना कि धार्मिक रूढ़िवाद और हठधर्मिता ने।
  • हाल के दिनों में राजनीति और वैचारिक बेड़ियों से मुक्त युवा पुरुषों और महिलाओं की सामूहिक प्रेरणा से अंतर-धार्मिक अन्याय से मुक्ति के लिए किये जा रहे सामाजिक संघर्ष से इसे मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

लेखक धर्मनिरपेक्षता पर बातचीत के लिए निम्न समाधान सुझाता है:

  • प्रथम एक राजनीतिक नेतृत्व वाली योजना से न्याय के लिए सामाजिक रूप से संचालित आंदोलन पर ध्यान केंद्रित करना।
  • दूसरा, अंतर-धार्मिक से अन्त:-धार्मिक मुद्दों पर जोर देना।

यूरोप के उदाहरण:

  • चर्च के उत्पीड़न के खिलाफ यह लड़ाई एक बहुत ही लोकप्रिय संघर्ष थी,क्योंकि यह राज्य द्वारा संचालित थी।
    • अतः यूरोप की धर्मनिरपेक्षता ने अंतर-धार्मिक उत्पीड़न से लड़ने के लिए एक सिद्धांत प्रदान किया।
  • हाल की गतिविधियों से धर्मनिरपेक्षता और इसके कानूनी संवैधानिक स्वरूप को झटका लगा है।
    • लेकिन वास्तव में इस ‘झटके’ को धर्मनिरपेक्षता को पुनर्जीवित करने के अवसर में बदला जा सकता है।

सारांश:

  • धर्मनिरपेक्षता की राज्य-संचालित राजनीतिक परियोजना और इसके संवैधानिक स्वरूप को झटका लगा है। लेकिन इस ‘झटके’ को धर्मनिरपेक्षता की सामाजिक परियोजना को पुनर्जीवित करने के अवसर में बदला जा सकता है। समानता, स्वतंत्रता और न्याय के संवैधानिक मूल्यों के साथ उनकी अनुकूलता बनाये रखने के लिए, हमारे अपने धर्मों में सुधार लाने के लिए एक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्षता की आवश्यकता है।

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

घरेलू राजनीति का विदेश नीति पर प्रभाव:

विषय: भारत एवं उसके प्रवासीयों के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव।

मुख्य परीक्षा: भारतीय घरेलू राजनीति तथा इसके विदेश नीति के सन्दर्भ में निहितार्थ।

पृष्टभूमि:

  • विगत वर्षों में, यह स्पष्ट हो गया है कि भारत के घरेलू मुद्दे भी भारत की विदेश नीति को प्रभावित करते है।
  • नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और कश्मीर जैसे मुद्दे भारत के पड़ोसी ईरान और इंडोनेशिया जैसे प्रमुख इस्लामी देशों तथा संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे रणनीतिक भागीदारों के साथ संबंधों को प्रभावित करने लगे हैं।
  • हाल ही में, भारत सरकार को एक राजनीतिक प्रवक्ता द्वारा एक विशेष धर्म के खिलाफ की गई टिप्पणी पर खाड़ी और अन्य देशों से प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है।
    • संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, इंडोनेशिया, इराक, मालदीव, जॉर्डन, लीबिया और बहरीन इस्लामिक विश्व के वे देश हैं जिन्होंने टिप्पणियों की निंदा की है।
    • इससे पहले कुवैत, ईरान और कतर ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए भारतीय राजदूतों को बुलाया था तथा सऊदी अरब ने कड़ा बयान जारी किया था।
  • एक विशेष धर्म के खिलाफ राजनीतिक दल के प्रवक्ताओं द्वारा की गई अपमानजनक टिप्पणी को लेकर भारत के खिलाफ अभूतपूर्व कूटनीतिक प्रतिक्रिया देखी गई।
  • इस प्रतिक्रिया ने भारत सरकार को फॉरेन पॉलिसी के मामले में बैकफुट पर ला दिया है।

भारत में घरेलू उग्रवाद:

  • ऐतिहासिक रूप से, भारत का चरमपंथ के साथ संघर्ष और नकरात्मक अनुभव रहा है। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से निपटने और तमिल ईलम के लिबरेशन टाइगर्स को प्रारंभ में समर्थन देने के घातक नतीजों ने भारत को सिखाया है कि चरमपंथ का उल्टा प्रभाव हो सकता है।
  • इसके बावजूद, भारत में ‘फ्रिंज’ चरमपंथी समूहों की संख्या बढ़ती जा रही है। भारत में इस तरह के घरेलू चरमपंथी तत्वों के प्रति अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सहिष्णु होने का कारण यह है कि वे घरेलू स्तर पर केंद्रित हैं।

भारत के लिए चिंताएं क्या हैं?

  • बढ़ती आलोचना: हाल के दिनों में भारत की घरेलू नीतियों की आलोचना बढ़ी है। देश में लोकतंत्र का कमजोर होने और धार्मिक असहिष्णुता में वृद्धि की आलोचना की गई है।
  • बाहरी आलोचना के प्रति संवेदनशीलता: भारत लोकतांत्रिक मूल्यों में निहित वैश्विक प्लेटफार्मों- जैसे क्वाड (भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया), लोकतंत्रों के शिखर सम्मेलन का प्रमुख रहा है। जो कि भारत की घरेलू नीतियों को बाहरी आलोचना के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है।
  • वर्तमान संकट बाहरी आलोचना को कम करने की भारत की क्षमता को कम करेगा: भारत ने अपने आंतरिक मुद्दों के बारे में अमेरिका और पश्चिम की आलोचना को लगातार खारिज किया है। हालांकि, भारत के पास अपनी अंतरराष्ट्रीय मानक पहचान तथा अपनी घरेलू विफलताओं के खिलाफ आलोचना को खारिज करने की क्षमता के कारण मौजूदा संकट में कमी आएगी।
  • आलोचना पर भारत की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं: भारत ने अमेरिका/पश्चिम की आलोचना पर क्या प्रतिक्रिया दी और पश्चिम एशिया की आलोचना पर कैसे प्रतिक्रिया दी, इसके बीच एक उल्लेखनीय अंतर है।

घरेलू राजनीति और इसकी विदेश नीति के निहितार्थ:

  • इस्लामी देशों द्वारा आलोचना के परिणाम या जनआक्रोश, पश्चिमी/यू.एस. की अवहेलना करने के भौतिक परिणामो की तुलना में बहुत अधिक हो सकते है।
  • भारत को अपने लाखों प्रवासी मजदूरों की भलाई तथा प्रेषण, ऊर्जा हेतु इस क्षेत्र की जरूरत है तथा साथ ही भारत को यू.एस./वेस्ट की आवश्यकता भी है।
  • हालांकि, अमेरिका और पश्चिम अधिक उन्नत लोकतंत्र हैं, वे भारत या उन देशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों पर किसी भी तरह के मनमाने प्रतिबंध लगाने का प्रयास नहीं करते हैं।
  • यदि भारत उसी भाषा में जबाब देता है जिस भाषा में वह पश्चिम / अमेरिका को देता आ रहा है, तो यह अरब देशों को भारत पर भौतिक प्रतिबंध लगाने हेतु प्रेरित कर सकता है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार यह विवाद संयुक्त अरब अमीरात तथा अन्य देशों के साथ भारत की हालिया कूटनीतिक सफलताओं में से कुछ को प्रभावित कर सकता है।
  • अरब राष्ट्र अपने लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए ठोस कार्रवाई करना चाह रहे हैं। इन देशों में भारत की आलोचना करने वाले हैशटैग ट्रेंड चला रहे है तथा यह घटना मीडिया आउटलेट्स में शीर्ष पर बनी हुई है।
  • विश्लेषकों का कहना है कि विवाद पर अंतरराष्ट्रीय नतीजे भारत के लिए एक चेतावनी होने चाहिए और उसे यह सीखना चाहिए कि विभाजनकारी राजनीति के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भी हो सकते हैं।

भारत के लिए खाड़ी देशों का महत्व

  • खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के साथ भारत का व्यापार, जिसमें कुवैत, कतर, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं, 2020-21 में 87 बिलियन डॉलर था।
  • इन देशों में लाखों भारतीय रहते तथा लाखों डॉलर प्रेषण के रूप में घर भेजते हैं।
  • यह क्षेत्र भारत के ऊर्जा आयात का शीर्ष स्रोत भी है।
  • भारत के प्रधान मंत्री ने 2018 में अबू धाबी में पहले प्रसिद्ध हिंदू मंदिर के शिलान्यास समारोह में भाग लिया – इसे भारत और इस क्षेत्र के बीच बढ़ते संबंधों का एक सफल उदाहरण कहा गया। इसलिए इस मुद्दे पर भारत के खिलाफ होने का संयुक्त अरब अमीरात का निर्णय चिंतनीय है।

सारांश:

  • हाल की घटना ने भारत की विदेश नीति को नुकसान पहुंचाने वाले अप्रतिबंधित घरेलू उग्रवाद के निर्विवाद खतरे को उजागर किया है। पेशेवर राजनयिकों द्वारा दशकों से सावधानीपूर्वक बनाए गए द्विपक्षीय संबंधों को सांप्रदायिक राजनीति और चुनावी दावपेंचो द्वारा कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

पुलिस मुठभेड़ कानून के शासन की धज्जियां उड़ा रहा है:

विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां एवं हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन एवं कार्यान्वयन से संबंधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा: भारत में बढ़ती पुलिस मुठभेड़ हत्याएं और इससे जुड़ी चिंताएं।

पृष्टभूमि:

  • भारत के सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच आयोग द्वारा प्रस्तुत 2019 की एक रिपोर्ट में हैदराबाद में फर्जी मुठभेड़ के लिए पुलिस को दोषी ठहराया है।
  • यह रिपोर्ट उन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के लिए आंखें खोलने वाली है जो कानून और उचित प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हैं और संदिग्धों को दण्ड नहीं दिलाते हैं।

भारत में पुलिस मुठभेड़ हत्याएं:

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, उस वर्ष पुलिस मुठभेड़ों में 164 मौतें हुईं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश (23) में पुलिस मुठभेड़ में सबसे ज्यादा मौतें हुईं, उसके बाद असम (23), महाराष्ट्र (11) का स्थान रहा।
  • इसके अलावा, NHRC ने मानवाधिकार उल्लंघन (मुठभेड़ में हुई मौतों सहित) के लिए केवल 25 मामलों में पुलिस कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की लेकिन किसी भी कर्मियों के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया है।
  • इसी तरह, वार्षिक राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में, मुठभेड़ में हुई हत्याओं के लिए पुलिस कर्मियों के खिलाफ केवल तीन मामले दर्ज किए गए थे।
  • रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या और दोषियों की परिणामी संख्या के बीच अंतर पर भी प्रकाश डाला गया है।

हालिया मुठभेड़ और अदालती फैसले:

  • विकास दुबे मुठभेड़: 2020 में, उत्तर प्रदेश पुलिस, गैंगस्टर विकास दुबे फायरिंग की घटना में शामिल थी, क्योंकि टीम उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पहुंची थी। गैंगस्टर को गोली मार दी गई क्योंकि उसने कथित तौर पर भागने का प्रयास किया था। दुबे के परिवार ने एनकाउंटर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद जस्टिस बी.एस. चौहान को मुठभेड़ की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। आयोग ने 2021 में पुलिस को क्लीन चिट देते हुए कहा था कि पुलिस के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। इसके अलावा, कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिला जो दुबे की मुठभेड़ के लिए यू.पी. पुलिस को जिम्मेदार माने।
  • दिशा सामूहिक बलात्कार और मुठभेड़: 2019 में 27 वर्षीय एक पशु चिकित्सक के साथ चार लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया था। उस दिन सुबह-सुबह अपराध स्थल का मुआयना करने के लिए 10 सदस्यीय पुलिस टीम आरोपीयों के साथ गई थी तथा वहाँ हुई अचानक पुलिस मुठभेड़ में चारों आरोपियों को ढेर कर दिया गया। पुलिस ने दावा किया कि दो आरोपियों ने उनके हथियार छीन लिए और पुलिस पर गोलियां चलाईं और जवाबी फायरिंग में वे मारे गए। बाद में, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति वी.एस. सिरपुरकर से मुठभेड़ की जांच कराई। 2022 में, जाँच समिति ने तेलंगाना पुलिस के दावों को खारिज कर दिया और ‘फर्जी मुठभेड़’ में चार आरोपियों की हत्या के लिए सभी 10 पुलिस कर्मियों को दोषी माना।

2011 में, सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच जिसमें जस्टिस मार्कंडेय काटजू और जस्टिस सी.के. प्रसाद ने कहा था: “पुलिस द्वारा फर्जी मुठभेड़ में हत्या कुछ और नहीं बल्कि एक प्रकार की निर्मम हत्या है जिसे दुर्लभतम अपराध माना जाना चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार पुलिस कर्मियों को मौत की या उन्हें फांसी की सजा दी जानी चाहिए।”

न्यायेतर हत्याओं के प्रति चिंता:

  • कानून के शासन के खिलाफ:
    • न्यायेतर हत्याएं कानून के शासन की भावना के खिलाफ हैं।
    • भारतीय पुलिस सेवा के वही दिग्गज जो फर्जी मुठभेड़ों और हिरासत में हुई मौतों की बात करते हैं, वे भी वही हैं, जिन्होंने पुलिस व्यवस्था में सेवा करते हुए सार्वजनिक जनआक्रोश या राजनीतिक फरमानों के अनुसार कानून के शासन के खिलाफ किया है।
    • यदि निम्न रैंक के कर्मियों को फर्जी मुठभेड़ों के लिए कैद किया जाता है, तो वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी ऐसा ही करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके उनकी जिम्मेदारी है कि उनके अधिकार क्षेत्र में कानून के शासन का सख्ती से पालन किया जाए।
  • निम्न-श्रेणी के अधिकारियों का सामना करना पड़ा खामियाजा:
    • जब फर्जी मुठभेड़ों की जांच के लिए आयोगों का गठन किया जाता है, तो आमतौर पर उसमे निम्न-श्रेणी के अधिकारी कांस्टेबल से लेकर निरीक्षकों तक होते हैं, जिसका बाद में खामियाजा भुगतना पड़ता है।
    • वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जिन्होंने अपराधियों को खत्म करने के लिए अपनी सहमति दी हो, उन्हें इससे मुक्त रखा जाता है और शायद ही कभी आरोप लगाया जाता हो।
  • मजिस्ट्रियल पूछताछ पर:
    • स्थानीय मजिस्ट्रेटों द्वारा की गई मजिस्ट्रियल पूछताछ एक तमाशा साबित होती है क्योंकि उन्हें जिले की पुलिस के अनुरूप काम करना पड़ता है। साथ ही वे पुलिस के पक्ष में उन्हें क्लीन चिट देने के इच्छुक होंते है।

सुझाव:

  • फर्जी मुठभेड़ों की शिकायतों पर सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ ध्यान देने की जरूरत है और शिकायत मिलने के तुरंत बाद न्यायपालिका सक्रियता आवश्यक है।
  • एक समाधान यह है कि अन्य राज्यों के मजिस्ट्रेटों को मनोनीत किया जाए ताकि जांच निष्पक्ष हों सके।
  • जांच आयोगों में अन्य राज्यों के पुलिस अधिकारीयों को शामिल करना चाहिए जो नैतिक रूप से सत्यनिष्ठ और निष्पक्ष हों।
  • पुलिस वीरता पदक या प्रशस्ति पत्र वापस ले लिए जाने चाहिए क्योंकि फर्जी मुठभेड़ किसी भी तरह से साहस को प्रदर्शित नहीं करता हैं।

सारांश:

  • निहत्थे और असहाय संदिग्धों को मारना, जो निश्चित रूप से अपराधी नहीं हो सकते, कायरता का कार्य है। यदि राज्य अपराध दर को कम करने के लिए न्यायेतर रणनीतियों को अपनाना शुरू कर देते हैं, तो कानून के शासन के सुरक्षा कवच के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

समान नागरिक संहिता का भविष्य:

विषय: राज्य नीति निदेशक सिद्धांत।

प्रारंभिक परीक्षा: समान नागरिक संहिता (UCC)।

मुख्य परीक्षा: समान नागरिक संहिता लागू करने का राज्य का अधिकार।

संदर्भ:

  • उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने हाल ही में राज्य के लिए समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया है।

समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code (UCC)) के बारे में और पढ़ें तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के समान संहिता पर जोर देने का आलोचनात्मक विश्लेषण (Critical analysis of Uttarakhand Chief Minister’s push for uniform code stirs debate)।

प्रीलिम्स तथ्य:

1 . ‘18,000 पंडितों ने खीर भवानी मंदिर के दर्शन किये’:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

कला एवं संस्कृति

विषय: भारतीय संस्कृति के प्राचीन से आधुनिक काल की वास्तुकला के प्रमुख पहलु।

प्रारंभिक परीक्षा: खीर भवानी मंदिर .

संदर्भ:

  • गृह मंत्रालय (MHA) ने कहा है कि खीर भवानी मण्डली कश्मीर में सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे का प्रतीक बन गई है।

खीर भवानी मंदिर:

  • खीर भवानी मंदिर कश्मीर घाटी के गांदरबल जिले में स्थित है।
  • यह एक पवित्र झरने के ऊपर निर्मित हिंदू देवी खीर भवानी को समर्पित है।
  • सुंदर चिनार के पेड़ों और नदियों के बीच स्थित, खीर भवानी मंदिर, देवी रागन्या देवी का निवास है। देवी राग्या देवी – देवी दुर्गा का एक अवतार हैं और वे मंदिर की पीठासीन देवी हैं।
  • महाराजा प्रताप सिंह ने 1912 में इस मंदिर का निर्माण कराया था, जिसे बाद में महाराजा हरि सिंह ने इसे पुनर्निर्मित करवाया था।

2.सेवेरोडोनेत्स्क का अधिकांश भाग अब रूसियों के अधीन: नियंत्रक

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: विकसित और विकासशील देशों की नीतियां एवं राजनीति का भारत के हितों एवं प्रवासी भारतीयों पर प्रभाव।

प्रारंभिक परीक्षा: सेवेरोडोनेट्स्क (Severodonetsk) .

संदर्भ:

  • यूक्रेन का प्रमुख पूर्वी शहर सेवेरोडनेत्स्क भीषण लड़ाई के बाद अब अधिकांशत रूसी नियंत्रण में आ गया है।

सेवेरोडनेत्स्क:

  • सिविएरोडोनेट्सक (Sievierodonetsk) यूक्रेन के लुहान्स्क ओब्लास्ट ( Luhansk Oblast ) में स्थित एक शहर है।
  • यह सिवरस्की डोनेट नदी के बाएं किनारे के उत्तर-पूर्व में स्थित है और ओब्लास्ट की राजधानी लुहान्स्क से लगभग 110 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित है।

BBC

Source: BBC

3 . ‘सरकार की इस योजना ने गरीबों को सम्मान के साथ जीने में मदद की’:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां,हस्तक्षेप,उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

प्रारंभिक परीक्षा: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई)।

संदर्भ:

  • एक ताजा अध्ययन के मुताबिक,प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY) ने कम भोजन करने वाले लोगों की संभावना को 76% तक कम कर दिया है और उपयोग व्यय में 75% की कटौती हुई है।

पीएमजीकेवाई (PMGKY) पर हालिया अध्ययन:

  • जर्मन संस्थान Kfw के साथ KPMG द्वारा किए गए एक अध्ययन ने पुष्टि की है कि COVID-19 महामारी के बीच 2020 में घोषित PMGKY के सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
  • किए गए अध्ययन से पता चला है कि पीएमजीकेवाई के तहत सहायता प्राप्त सभी लाभार्थियों में से 67 प्रतिशत की उधार लेने की संभावना को कम कर दिया हैं।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (PMGKY) के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana (PMGKY)

महत्वपूर्ण तथ्य:

1 . महंगाई पर काबू पाने के लिए आरबीआई ने दरों में वृद्धि की:

  • भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने मुद्रास्फीति को कम करने के लिए सर्वसम्मति से रेपो दर को 50 आधार अंक बढ़ाकर 4.90% किया हैं।
  • RBI के इस कदम से कार और घर खरीदने के लिए कर्ज मांगने वालों से लेकर पूंजी जुटाने की चाहत रखने वाली एमएसएमई फर्मों तक की उधारी लागत बढ़ जाएगी।
  • MPC ने कोविड-19 से प्रभावित अर्थव्यवस्था को सहयोग प्रदान करने के लिए आवास की योजना की वापसी पर ध्यान केंद्रित करने का भी फैसला किया हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मुद्रास्फीति विकास को प्रभावित किये बिना लक्ष्य के भीतर बनी हुए हैं।

2 . भारत और वियतनाम ने रसद समझौते पर हस्ताक्षर किए:

  • हाल ही में, भारत और वियतनाम ने रसद पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • दोनों रक्षा मंत्रियों ने ‘भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी 2030’ के संयुक्त विजन दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, जो मौजूदा रक्षा सहयोग को मजबूत करेगा।
  • दोनों देशों के रक्षा बलों के बीच बढ़ती सहकारी भागीदारी के इस दौर में पारस्परिक रूप से लाभकारी लॉजिस्टिक सहयोग की प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।
  • भारत और वियतनाम ने 2016 में एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी साझा की है और रक्षा सहयोग इस साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ है।
  • वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट नीति में एक महत्वपूर्ण भागीदार है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. मुख्य सचिव के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर: मध्यम)

  1. केंद्र सरकार में मुख्य सचिव के पद का सृजन ब्रिटिश शासन के दौरान 1799 में लॉर्ड वेलेजली द्वारा किया गया था।
  2. उसे राज्यपाल द्वारा राज्य संवर्ग के वरिष्ठ IAS अधिकारियों में से चुना जाता है।
  3. मुख्य सचिव की शक्तियों और कार्यों का उल्लेख केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए ‘व्यापार नियम’ में किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 2

(d) केवल 1 और 3

उत्तर: a

व्याख्या:

  • मुख्य सचिव का पद भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सिविल सेवाओं में सबसे वरिष्ठ पद होता है। इस पद का सृजन 1799 में लॉर्ड वेलेजली के शासन के दौरान हुआ था । इसलिए कथन 1 सही है।
  • मुख्यमंत्री मुख्य सचिव की नियुक्ति करता है। अतः कथन 2 गलत है।
  • इन सेवाओं के सदस्यों की भर्ती केंद्र द्वारा की जाती है, लेकिन उनकी सेवाओं को विभिन्न राज्य संवर्गों के अंतर्गत रखा जाता है, और वे राज्य और केंद्र दोनों के अधीन सेवा करने के लिए उत्तरदायी होते हैं।
  • अखिल भारतीय सेवाओं का यह पहलू भारतीय संघ के एकात्मक चरित्र को मजबूत करता है। अतः कथन 3 गलत है।

प्रश्न 2. गन्ने के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? (स्तर: मध्यम)

  1. गन्ने की सर्वप्रथम उत्पत्ति न्यू गिनी में हुई थी ।
  2. कम आर्द्रता के साथ शुष्क मौसम, तेज धूप दिन/घंटे, व्यापक दैनिक विविधताओं वाली ठंडी रातें और इसके पकने की अवधि के दौरान बहुत कम वर्षा के कारण चीनी का संग्रहण (रिकवरी) सबसे अधिक होता है।
  3. भारत में गन्ने की सबसे अधिक खेती महाराष्ट्र में की जाती है।

विकल्प:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: a

व्याख्या:

  • गन्ने की उत्पत्ति संभवतः न्यू गिनी के मेलानेशिया में इसकी जंगली प्रजाति सैकरम रोबस्टम से हुई थी। अतः कथन 1 सही है।
  • कम आर्द्रता के साथ शुष्क मौसम, तेज धूप दिन/घंटे, व्यापक दैनिक विविधताओं वाली ठंडी रातें और इसके पकने की अवधि के दौरान बहुत कम वर्षा के कारण चीनी का संग्रहण (रिकवरी) सबसे अधिक होता है।अतः कथन 2 सही है।
  • उत्तर प्रदेश भारत में गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक है। अतः कथन 3 गलत है।

प्रश्न 3. दलबदल विरोधी कानून के संबंध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर: कठिन)

  1. पीठासीन अधिकारी स्वप्रेरणा से दलबदल से सम्बंधित मामला उठा सकते हैं।
  2. दलबदल विरोधी कानून के अनुसार अयोग्यता की मांग वाली याचिका पर पीठासीन अधिकारी को तीन महीने के भीतर निर्णय लेना होता है।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: d

व्याख्या:

  • दलबदल के आधार पर अयोग्यता के प्रश्नों पर निर्णय अध्यक्ष या सदन का सभापति लेता है और उसका निर्णय अंतिम होता है। इस प्रकार, दलबदल मामले को स्वत: संज्ञान में नहीं लिया जाता है। अतः कथन 1 गलत है।
  • कानून के अनुसार इसकी समय सीमा निश्चित नहीं है जिसके भीतर पीठासीन अधिकारियों को अयोग्यता पर फैसला करना चाहिए।
  • पीठासीन अधिकारी द्वारा निर्णय लेने के बाद ही अदालतें हस्तक्षेप कर सकती हैं, और इसलिए याचिकाकर्ता के लिए एकमात्र विकल्प निर्णय तक इंतजार करना है। अतः कथन 2 गलत है।

प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन सी खरीफ फसलें हैं? (स्तर: मध्यम)

  1. चावल
  2. कपास
  3. बाजरा
  4. सरसों
  5. तूर

विकल्प:

(a) केवल 1, 2, 3 और 5

(b) केवल 1, 3 और 5

(c) केवल 2, 4 और 5

(d) केवल 1, 2, 3 और 4

उत्तर: a

व्याख्या:

  • खरीफ या मानसूनी फसलें वे घरेलू पौधे हैं जिनकी खेती और कटाई दक्षिण एशिया में बरसात (मानसून) के मौसम के दौरान की जाती है,जिनकी क्षेत्रीय आधार पर अप्रैल से अक्टूबर के बीच बुवाई की जाती है।
  • प्रमुख खरीफ फसलें:

BBC

  • अत: विकल्प A सही है।

प्रश्न 5. ‘रिकॉम्बिनेंट वेक्टर टीके’ के संबंध में हाल के घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (स्तर: मध्यम) (यूपीएससी 2021)

  1. इन टीकों के विकास में जेनेटिक इंजीनियरिंग का प्रयोग किया जाता है।
  2. बैक्टीरिया और वायरस वैक्टर के रूप में उपयोग किए जाते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: c

व्याख्या:

  • रिकॉम्बिनेंट वेक्टर टीके आनुवंशिक रूप से संशोधित होते हैं और इनमें उस वायरस की नकल करने के लिए जेनेटिक इंजीनियरिंग का उपयोग किया जाता हैं जिसके लिए वैक्सीन का उत्पादन किया जा रहा है। अत: कथन 1 सही है।
  • रिकॉम्बिनेंट वेक्टर टीके जीवित प्रतिकृति वायरस हैं जिन्हें एक रोगज़नक़ से प्राप्त उस अतिरिक्त जीन को प्रोटीन का उत्पादन करने के लिए संशोधित किया जाता है जिसके खिलाफ प्रतिरक्षा उत्पन्न की जाती हैं। अत: कथन 2 सही है।
  • इन वेक्सीन का उपयोग जीनोम वैक्सीन निर्माण प्रक्रिया के दौरान या किसी व्यक्ति के भीतर प्रतिकृति के दौरान अतिरिक्त जीन को नष्ट करने के लिए किया जाता हैं, और यह विकास वैक्सीन की प्रभावकारिता को गंभीर रूप से सीमित कर सकता है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. ख़राब घरेलू राजनीति के विदेश नीति के सन्दर्भ में निहितार्थ है। क्या आप इससे सहमत हैं? न्यायोचित ठहराइए। (150 शब्द, 10 अंक) [जीएस-2, आईआर]

प्रश्न 2. पुलिस मुठभेड़ में हत्याएं लगातार बढ़ रही हैं।पुलिस की ज्यादतियों को रोकने के उपाय सुझाएं ताकि गलत पुलिसिंग को ठीक किया जा सके। (250 शब्द, 15 अंक) [जीएस -2, राजनीति और शासन]

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