03 जुलाई 2022 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. 100 वां अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस: 
  2. 5 जुलाई को खाद्य और पोषण सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन:
  3. राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा (एनसीएफ):
  4. केंद्रीय मंत्री की छह दिवसीय ऑस्ट्रेलिया यात्रा: 

1. 100 वां अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस: 

सामान्य अध्ययन: 2

शासन: 

विषय: सरकार की योजनाएं,संस्थान संसाधन, विकास तथा रोजगार से संबंधित मुद्दे।  

प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस, भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई)।

मुख्य परीक्षा: भारत में सहकारिता के महत्त्व पर चर्चा कीजिए ?   

प्रसंग: 

  • केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री सहकारिता मंत्रालय और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) द्वारा आयोजित 100वें अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के उपलक्ष्य में 4 जुलाई को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोहों में मुख्य अतिथि होंगे। 

उद्देश्य:

  • एनसीयूआई भारत में सहकारिता शिक्षा और प्रशिक्षण पर केंद्रित सहकारिता आंदोलन का एक सर्वोच्च संगठन है।
  • 100वें अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस की विषय वस्तु “सहकारिता से एक बेहतर विश्व का निर्माण” है।
  • एक बेहतर विश्व के निर्माण में आत्मनिर्भर भारत के महत्व को देखते हुए, सहकारिता मंत्रालय और एनसीयूआई “सहकारिता से एक आत्मनिर्भर भारत और बेहतर विश्व का निर्माण” विषय वस्तु के साथ कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं।
  • आत्मनिर्भर भारत की मूल अवधारणा और विजन भारतीय अर्थव्यवस्था के आत्मनिर्भर विकास पर आधारित है; और भारत का सहकारिता मॉडल आत्मनिर्भर भारत पर बल देने के अनुकूल है।

विवरण:  

  • भारत का  सहकारिता आंदोलन दुनिया में सबसे बड़ा है।
  • वर्तमान में, भारत में 90 प्रतिशत गांवों को कवर करने वाली 8.5 लाख से ज्यादा सहकारी समितियों के नेटवर्क के साथ ये ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समावेशी विकास के उद्देश्य से सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण संस्थान हैं।
  • अमूल, इफ्को, कृभको, नाफेड आदि भारत में सहकारिता आंदोलन की कुछ जानी मानी सफलता की कहानियां हैं।
  • सहकारिता क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए केंद्र सरकार ने जुलाई, 2021 में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की थी।
  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को नव गठित सहकारिता मंत्रालय का प्रभार दिया गया था।
  • इसके गठन के बाद, मंत्रालय नई सहकारिता नीति और योजनाओं के मसौदे पर काम कर रहा है।
  • सहकारिता क्षेत्र में देश के किसान, कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास एवं सशक्तिकरण के लिए पर्याप्त संभावनाएं हैं।
  • यही वजह है कि सरकार ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र के साथ सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बना रही है।
  • हाल में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) के कंप्यूटरीकरण को स्वीकृति देकर सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने का अहम फैसला लिया है।
  • इसका उद्देश्य पीएसीएस की दक्षता बढ़ाना, पारदर्शिता लाना और उनके संचालन में विश्वसनीयता लाना; पीएसीएस के कामकाज में विविधता लाने और कई गतिविधियों/सेवाओं के संचालन में सहायता देना है।
  • यह परियोजनाके तहत 2,516 करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ 5 साल की अवधि में लगभग 63,000 सक्रिय पीएसीएस के कंप्यूटरीकरण किया जायगा।
  • सहकारी समितियों ने दुनिया भर में 2 जुलाई को 100वां अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस मनाया।
  • इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस 2012 को पूरा एक दशक हो गया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस का उद्देश्य सहकारिता समितियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता, आर्थिक दक्षता, समानता और विश्व शांति जैसे आंदोलन के आदर्शों को प्रोत्साहन देना है।
  • सहकारी समितियां 10 प्रतिशत कार्यरत जनसंख्या को रोजगार देती हैं और 300 बड़ी सहकारी समितियों का कुल 2,146 अरब डॉलर का टर्नओवर है।

2. 5 जुलाई को खाद्य और पोषण सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन: 

सामान्य अध्ययन: 2

शासन:

विषय: सरकार की योजनाएं,क्रियान्वयन एवं उनका कमजोर वर्ग पर प्रभाव।    

प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए)। 

प्रसंग: 

  • खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग 5 जुलाई 2022 को नई दिल्ली में खाद्य और पोषण सुरक्षा पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर रहा है।

उद्देश्य:

  • इस सम्मेलन का उद्देश्य क्रॉस लर्निंग को सुविधाजनक बनाना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत योजनाओं के लिए सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों का विस्तार तथा पोषण सुरक्षा को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करना है। 
  • इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य खाद्य सुदृढ़ीकरण, खाद्य पदार्थों में विभिन्नता लाने, फसल विविधीकरण, एकीकृत अन्न वितरण पोर्टल 2.0, पीडीएस और भंडारण क्षेत्र में सुधार पर चर्चा करना है।

विवरण:  

  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों के विस्तार और पोषण सुरक्षा को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा हैं।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए) के तहत भारत की योजनाबद्ध उपभोक्ता केंद्रित सार्वजनिक वितरण प्रणाली दुनिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम है।
  • यह प्रणाली 5.33 लाख से अधिक उचित मूल्य की दुकानों के देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से पूरे भारत में लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों की खाद्य सुरक्षा के साथ उनकी रसद आवश्यकताओं को पूरा करती है।
  • कोविड-19 महामारी के दौरान वन नेशन वन राशन कार्ड (ओएनओआरसी) के साथ संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के माध्यम से सरकार की खाद्य सुरक्षा सहायता योजना ने लोगों के लिए एक जीवन रेखा के रूप में कार्य किया और समाज के गरीब तथा कमजोर वर्गों के प्रति इसकी कार्य कुशलता एवं संवेदनशीलता के लिए विश्व स्तर पर इसकी सराहना की जा रही है।
  • यह सम्मेलन देश में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव लाने के उद्देश्य से सहकारी संघवाद की चुनौतियों तथा अवसरों को प्रतिबिंबित करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करेगा।

3. राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा (एनसीएफ): 

सामान्य अध्ययन: 2

शिक्षा:

विषय: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020, देश के युवा वर्ग के लिए महत्व, शिक्षा,प्रगति तथा रोजगार से संबंधित मुद्दे।  

प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 

मुख्य परीक्षा: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता में सुधार की सिफारिश की गई है। टिप्पणी कीजिए।   

प्रसंग: 

  • भारत सरकार ने 29 जुलाई, 2020 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का ऐलान किया, जिसमें एक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा (एनसीएफ) के विकास के माध्यम से शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता में सुधार की सिफारिश की गई है। 

उद्देश्य:

  • जिला परामर्श समितियों, राज्य केंद्रित समूहों और राज्य संचालन समिति, राष्ट्र केंद्रित समूहों और राष्ट्रीय संचालन समिति के गठन के माध्यम से राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
  • व्यापक स्तर पर और कागजरहित तरीके से काम पूरा करने के लिए एक टेक प्लेटफॉर्म- वेबसाइट और मोबाइल ऐप विकसित किया गया है।

विवरण:  

  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अभिभावकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, शिक्षक प्रशिक्षकों और विद्यार्थियों आदि हितधारकों से संपर्क के लिए निचले स्तर से काम करते हुए राज्य केंद्रित समूहों और राज्य संचालन समितियों के माध्यम से जमीनी स्तर पर जिला स्तरीय परामर्श, मोबाइल ऐप आधारित सर्वेक्षण, राज्य स्तरीय परामर्श कराए हैं।
  • इनके माध्यम से भविष्य की स्कूली शिक्षा, बचपन में देखभाल और शिक्षा, शिक्षक शिक्षा और वयस्क शिक्षा के बारे में राय ली की गई हैं।
  • राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्र केंद्रित समूहों और राष्ट्रीय संचालन समिति को भी विभिन्न समस्याओं और चिंताओं पर विचार-विमर्श के लिए जोड़ा गया है।
  • इसमें विभिन्न मंत्रालयों, स्वायत्त संगठनों, एनजीओ, कॉरपोरेट्स, समाजवेसी संगठनों आदि के साथ भी चर्चा  की जाती  है।
  • इसके माध्यम से एनसीएफ के निर्माण के लिए मूल्यवान जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
  • इस प्रक्रिया में हितधारकों को मार्गदर्शन के उद्देश्य से एनसीएफ तैयार करने के लिए एक आदेश पत्र तैयार किया गया है।
  • देश की विविधता को देखते हुए, शिक्षा से संबंधित चिंताओं पर विचार साझा करके हर हितधारकों को अवसर उपलब्ध कराना वक्त की जरूरत है, जो अभिभावक या शिक्षक या छात्र या भारत में शैक्षणिक प्रणाली में बदलाव में भागीदार बनने के इच्छुक लोग हो सकते हैं।
  • ऐसे कई और विविधतापूर्ण विचारों से एनईपी 2020 के विजन के सहज क्रियान्वयन के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने की संभावना है।
  • इस संदर्भ में, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएंडएल), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने एक ऑनलाइन सार्वजनिक परामर्श सर्वेक्षण के माध्यम से विभिन्न हितधारकों से विचार आमंत्रित करने की योजना बनाई है, जो राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा तैयार करने और बाद में पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों और अन्य शिक्षण सामग्री को तैयार करने के लिए बहुत उपयोगी और महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्रित करने में सहायक होगा।

4. केंद्रीय मंत्री की छह दिवसीय ऑस्ट्रेलिया यात्रा:

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

विषय: भारत के व्यापारिक हितों पर विभिन्न विकसित एवं विकासशील देशों की नीतियां और उनका प्रभाव।  

मुख्य परीक्षा:भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय संबंधों पर एक लेख लिखिए।    

प्रसंग: 

  • केंद्रीय संसदीय मामलों, कोयला और खान मंत्री प्रह्लाद जोशी की 3 जुलाई, 2022 को अपनी छह दिवसीय ऑस्ट्रेलिया की यात्रा शुरू होने के साथ भारत अपने ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों को अपनाने के व्यापक मिशन के तहत सुरक्षित, मजबूत और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण खनिजों के विकास की अपनी महत्वाकांक्षा को साकार करने के नजदीक पहुंच गया है।

उद्देश्य:

  • सरकार ने भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय संबंधों को नए मुकाम पर लाने पर खासा जोर दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों, कोयला, खनन, रक्षा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, नई प्रौद्योगिकियों, कृषि अनुसंधान और साइबर सुरक्षा में व्यापक सहयोग के लिए मार्ग प्रशस्त होगा।
  • भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच संबंधों में मजबूती के साथ भारत स्थायी रूप से स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • यह यात्रा इसलिए भी अहम है, क्योंकि एंथनी अल्बानीज सरकार बनने के बाद मंत्री प्रह्लाद जोशी और मैडालीन किंग की यह पहली बैठक हो रही है।

विवरण:  

  • भ्रमण के दौरान,भारतीय मंत्री का लक्ष्य खान मंत्रालय के तहत आने वाले तीन सीपीएसई का एक संयुक्त उपक्रम और खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (केएबीआईएल) और क्रिटिकल मिनरल्स फैसिलिटेशन ऑफिस (सीएमएफओ), ऑस्ट्रेलिया सरकार के बीच एमओयू के लिए आधार तैयार करना है, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को मजबूती देना और सुरक्षित, मजबूत और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य अहम खनिजों की आपूर्ति के लिए मार्ग प्रशस्त करना है।
  • भारत-ऑस्ट्रेलिया महत्वपूर्ण खनिज निवेश भागीदारी के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया में व्यवहार्य लिथियम और कोबाल्ट परियोजनाओं के लिए निवेश करने का प्रस्ताव है, जो भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
  • ये कदम भारत की ई-मोबिलिटी पहलों और अन्य विविध क्षेत्रों के लिए खनिज सुरक्षा के पूरक होंगे, जिनमें महत्वपूर्ण और सामरिक खनिजों का उपयोग होता है।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

आज इससे सम्बंधित कोई समाचार नहीं हैं। 

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