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04 अप्रैल 2023 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. श्रीलंका ने नीतिगत सुधारों, सुशासन, क्षमता निर्माण, डिजिटलीकरण और लोक सेवा वितरण के लिए भारत से सहायता का अनुरोध किया:  
  2. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर में युवा-20 परामर्श बैठक होगी: 
  3. ड्रोन और ड्रोन घटकों के लिए उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना:
  4. जल जीवन मिशन ने 60 प्रतिशत कवरेज की महत्‍वपूर्ण उपलब्धि अर्जित की:
  5. भूटान नरेश ने राष्ट्रपति से मुलाकात की: 
  6. भारत-श्रीलंका वार्षिक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास (स्लाइनेक्स-23) का आयोजन:
  7. पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण सेल (PPAC) ने 22वां स्थापना दिवस मनाया:
  8. प्रधानमंत्री ने 5वें अंतर्राष्ट्रीय आपदा-रोधी अवसंरचना सम्मेलन को संबोधित किया:

1. श्रीलंका ने नीतिगत सुधारों, सुशासन, क्षमता निर्माण, डिजिटलीकरण और लोक सेवा वितरण के लिए भारत से सहायता का अनुरोध किया:

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय संबंध: 

विषय: भारत एवं इसके पडोसी- संबंध।

प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (NCGG)।

मुख्य परीक्षा: श्रीलंका की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते देखते हुए भारत एवं श्रीलंका के संबंधों पर चर्चा कीजिए।  

प्रसंग: 

  • श्रीलंका सरकार के निमंत्रण पर राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (NCGG) के महानिदेशक श्री भरत लाल के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने दो दिवसीय यात्रा के दौरान 1 अप्रैल 2023 को श्रीलंका के राष्ट्रपति श्री रानिल विक्रमसिंघे से भेंट की।

उद्देश्य:

  • बैठक के दौरान, राष्ट्रपति श्री रानिल विक्रमसिंघे ने श्रीलंका द्वारा हाल में उभरी आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने और देश को उच्च आर्थिक विकास के पथ पर आगे ले जाने की रणनीति के लिए अपना दृष्टिकोण साझा किया।  

विवरण:  

    • दोनों पक्षों के बीच हुई चर्चा नीतिगत सुधारों, सुशासन, डिजिटलीकरण, क्षमता वृद्धि एवं प्रशिक्षण, संस्थान निर्माण और आश्वासित लोक सेवा वितरण पर केंद्रित थी। 
    • श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास को व्यवस्थित करने और उच्च आर्थिक विकास की गति सुनिश्चित करने के तरीके की प्रशंसा की। 
    • चर्चा के दौरान, राष्ट्रपति श्री रानिल विक्रमसिंघे ने राष्ट्रीय सुशासन केंद्र से श्रीलंका में लोक नीति और सुशासन विश्वविद्यालय की स्थापना करने में सहयोग करने का अनुरोध किया।
    • श्रीलंका के राष्ट्रपति श्री रानिल विक्रमसिंघे ने अनुरोध किया कि NCGG तेजी से सामाजिक-आर्थिक विकास एवं उच्च आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए भारत के डिजिटल प्रशासन तथा भागीदारी नीति निर्माण के अनुभव के आधार पर श्रीलंका को आवश्यक सहयोग प्रदान करे। 
      • श्रीलंका अब भारत के नीति-संचालित सुशासन मॉडल और नियोजन एवं निष्पादन में डिजिटल प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग तथा विभिन्न कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं की निगरानी करने में डिजिटल प्रौद्योगिकी के बड़े पैमाने पर उपयोग को सीखने का इच्छुक है।
    • श्रीलंका के शीर्ष सिविल सेवकों ने बैठकों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और कुछ समय पहले उनके देश में आए अभूतपूर्व आर्थिक संकट के दौरान भारत द्वारा श्रीलंका को प्रदान की गई निरंतर सहायता के लिए आभार व्यक्त किया।
    • राष्ट्रीय सुशासन केंद्र के महानिदेशक श्री भरत लाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के बारे में चर्चा की और भारत-श्रीलंका के विशेष संबंधों पर प्रकाश डाला।  
      • दोनों पक्षों के बीच हुई चर्चा नीतिगत सुधारों, डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग, क्षमता वृद्धि, सुशासन और संस्था निर्माण में श्रीलंका के लिए NCGG के सहयोग पर केंद्रित रही।  
    • भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पारदर्शिता, समावेशिता, निष्पक्षता और जवाबदेही को बढ़ावा देने में डिजिटल प्रौद्योगिकी के सकारात्मक प्रभाव पर जोर दिया। 
  • प्रतिनिधिमंडल ने इस तथ्य का जिक्र किया कि: 
    • प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण (DBT) इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे प्रक्रियाओं का स्वचालन विकास योजनाओं में प्रगति और ईमानदारी स्थापित कर कर सकता है। 
    • भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि भारतीय लाभार्थियों के जन धन योजना बैंक खातों में नकद लाभ सीधे हस्तांतरित किया जाता है और इस कार्यक्रम ने बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है, इसी के परिणामस्वरूप भ्रष्टाचार करने वालों के लिए अवसर समाप्त हो गए हैं। 
    • प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली को जन धन-आधार-मोबाइल की ‘जेएएम की त्रिमूर्ति’ द्वारा संचालित किया जाता है। 
    • प्रत्येक नागरिक को प्रदान की गई विशिष्ट डिजिटल आईडी और आधार संख्या ने वास्तविक लाभार्थियों की पहचान को सुव्यवस्थित किया है तथा फर्जी लाभार्थियों को व्यवस्था से  बाहर कर दिया गया है।
  • डिजिटलीकरण की व्यवस्था ने भारत में विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों के कार्यान्वयन और लोक सेवाओं के प्रावधान में महत्वपूर्ण अंतर को दूर किया है, जैसा कि प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों में होने वाली हालिया वृद्धि से स्पष्ट होता है। 
    • राष्ट्रीय सुशासन केंद्र के महानिदेशक श्री भरत लाल ने जल जीवन मिशन की सशक्त ई-निगरानी प्रणाली का उदाहरण भी दिया, जिसमें सेंसर-आधारित इंटरनेट ऑफ थिंग्स- आईओटी उपकरणों का उपयोग किया जाता है।  

पृष्ठ्भूमि:

  • राष्ट्रीय सुशासन केंद्र की स्थापना वर्ष 2014 में भारत सरकार द्वारा देश के साथ-साथ अन्य विकासशील देशों के सिविल सेवकों के सुशासन, नीतिगत सुधारों, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक शीर्ष स्तर की स्वायत्त संस्था के रूप में की गई थी। 
  • राष्ट्रीय सुशासन केंद्र एक विचारक के रूप में भी कार्य करता है। 
  • NCGG ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के साथ साझेदारी में कई विकासशील देशों के सिविल सेवकों की क्षमता निर्माण का कार्य शुरू किया है।

2. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर, में युवा-20 परामर्श बैठक होगी:

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय संबंध:

विषय: महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएं और मंच- उनकी संरचना, और अधिदेश।  

प्रारंभिक परीक्षा: युवा-20 शिखर सम्मेलन 2023

मुख्य परीक्षा: भारत की G-20 अध्यक्षता में भारत द्वारा अभी तक विभिन्न क्षेत्रों में किये गए प्रयासों पर चर्चा कीजिए।   

प्रसंग: 

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर 5 से 6 अप्रैल, 2023 तक भारत की G-20 अध्यक्षता के अंतर्गत युवा-20 परामर्श बैठक की मेजबानी करेगा। 

उद्देश्य:

  • युवा-20 परामर्श बैठक एक ऐसा मंच प्रदान करता है जो युवाओं को जोड़ने, विचारों और अनुभवों को साझा करने और वैश्विक चिंताओं को कम करने के लिए अभिनव समाधान खोजने के बारे में विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ लाता है। 
  • युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में युवा-20 परामर्श बैठक, वाराणसी, उत्तर प्रदेश में आयोजित होने वाले अंतिम युवा-20 शिखर सम्मेलन की तैयारी में एक अखिल भारतीय गतिविधि है। 
  • इन परामर्शों के विचार-विमर्श से भविष्य की नीतियों को आकार देने में मदद मिलेगी।  

विवरण:  

  • युवा-20 शिखर सम्मेलन 2023 के लिए पांच मुख्य विषयों की पहचान की गई है, जिनमें से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर – “भविष्य का काम: उद्योग 4.0, नवाचार, और 21 वीं सदी का कौशल”; और युवा-20 परामर्श के दौरान “स्वास्थ्य, कल्याण और खेल: एजेंडा फॉर यूथ” के दो विषयों पर चर्चा करेगा।
  • युवा-20 परामर्श एक महत्वपूर्ण घटना है जो G-20 देशों के युवाओं को चर्चा करने, विचार करने और बेहतर भविष्य तैयार करने के लिए समाधान सुझाने के लिए एक साथ लाएगा।
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर में युवा-20 परामर्श “फ्यूचर ऑफ हीथ”, “टेक्नोलॉजीज फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर”, और “इनोवेशन इन फ्यूचर ऑफ वर्क” के विषयों पर आमंत्रित गणमान्य व्यक्तियों और उद्यमियों के साथ पैनल चर्चा भी करेगा।  

पृष्ठ्भूमि:

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-IIT कानपुर:

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर की स्थापना 2 नवंबर 1959 को संसद के एक अधिनियम द्वारा की गई थी। 
    • संस्थान में 19 विभागों, 22 केंद्रों और 540 पूर्णकालिक संकाय सदस्यों के साथ इंजीनियरिंग, विज्ञान, डिजाइन, मानविकी और प्रबंधन विषयों में 3 अंतःविषय कार्यक्रमों में फैले शैक्षणिक और अनुसंधान संसाधनों के बड़े संस्थान हैं। 
    • इसमें लगभग 9000 विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। 
    • औपचारिक स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अलावा, संस्थान उद्योग और सरकार दोनों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास में सक्रिय रहा है।

3. ड्रोन और ड्रोन घटकों के लिए उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना:

सामान्य अध्ययन: 3

प्रौद्योगिकी:

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी -विकास एवं अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। 

मुख्य परीक्षा: सरकार द्वारा स्वदेशी ड्रोन उद्योग को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए ड्रोन और ड्रोन घटकों के लिए उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना को अधिसूचित किया था। इस योजना से संबंधित विभिन्न घटकों पर प्रकाश डालिये।     

प्रसंग: 

  • नागरिक विमानन मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान ड्रोन और ड्रोन घटकों के लिए PLI योजना के तहत लाभार्थियों को 30 करोड़ रुपये की राशि (लगभग) का वितरण किया है।

उद्देश्य:

  • सरकार ने 30 सितंबर 2021 को स्वदेशी ड्रोन उद्योग को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए ड्रोन और ड्रोन घटकों के लिए उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना को अधिसूचित किया था।   

विवरण:  

इस योजना में उद्योग जगत की सहायता के लिए कई विशेषताएं उपलब्ध हैं जैसे:

  • तीन वित्तीय वर्षों के दौरान कुल 120 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है यह राशि वित्त वर्ष 2020-21 में सभी घरेलू ड्रोन निर्माताओं के संयुक्त कारोबार की लगभग दोगुनी है।
  • इस योजना के लिए, उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना दर मूल्यवर्धन का 20 प्रतिशत है, जो उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजनाओं में सबसे अधिक है।
  • इस योजना के अंतर्गत मूल्यवर्धन की गणना ड्रोन और ड्रोन घटकों (कुल वस्तु और सेवाकर) से ड्रोन और ड्रोन घटकों की खरीद लागत (कुल वस्तु और सेवाकर) से वार्षिक बिक्री राजस्व के रूप में की जाती है।
  • उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन दर को सभी तीन वर्षों के लिए 20 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है, जो देश में ड्रोन उद्योग के लिए एक असाधारण व्यवहार है।
  • ड्रोन और ड्रोन घटकों के लिए न्यूनतम मूल्य वर्धन मानदंड 50 प्रतिशत की जगह 40 प्रतिशत कुल बिक्री पर रहा है जो उद्योग जगत के लिए एक और असाधारण व्यवहार है।
  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) और स्टार्टअप के लिए पात्रता मानदंड बहुत कम स्तर पर हैं।
  • योजना के दायरे में ड्रोन से संबंधित सॉफ्टवेयर के प्रवर्त्तक भी शामिल हैं।
  • विनिर्माता के लिए उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन कुल वार्षिक परिव्यय के 25 प्रतिशत पर सीमित है। इससे लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि करने में सहायता मिलेगी।
  • यदि कोई विनिर्माता किसी विशेष वित्तीय वर्ष के लिए पात्र मूल्यवर्धन की सीमा को पूरा करने में विफल रहता है, तो उसे बाद के वर्ष में खोए हुए प्रोत्साहन का दावा करने की अनुमति दी जाएगी, अगर वह बाद के वर्ष में इस कमी को पूरा करती है।
  • उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना के 23 लाभार्थियों की नई सूची 6 जुलाई 2022 को जारी की गई थी। लाभार्थियों में 12 ड्रोन निर्माता और 11 ड्रोन घटक निर्माता शामिल हैं।

4. जल जीवन मिशन ने 60 प्रतिशत कवरेज की महत्‍वपूर्ण उपलब्धि अर्जित की:

सामान्य अध्ययन: 2

शासन:

विषय: शासन व्यवस्था पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई- गवर्नेस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं सीमाएं और संभावनाएं। 

मुख्य परीक्षा: जल जीवन मिशन के प्रभाव, महत्व एवं उपलब्धियों पर एक विस्तृत लेख लिखिए।    

प्रसंग: 

  • प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा कि है कि 60 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। भारत में 1.55 लाख से अधिक गांवों (कुल गांवों की संख्या का 25 प्रतिशत) को अब ‘हर घर जल’ पहुंच रहा है यानी इन गांवों के प्रत्येक घर के अपने परिसर में नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल की सुविधा उपलब्‍ध है। 

उद्देश्य:

  • चालू वर्ष में जनवरी से मार्च 2023 तक जल जीवन मिशन के तहत प्रति सेकंड एक नल कनेक्शन प्रदान किया गया है। 
  • यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, जिसमें वर्ष 2023 के पहले तीन महीनों के दौरान प्रतिदिन औसत रूप से 86,894 नए नल जल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं।  

विवरण:  

  • प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त, 2019 को जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। 
    • इसका उद्देश्य सभी ग्रामीण परिवारों को नियमित और दीर्घकालिक आधार पर पर्याप्त मात्रा में (55 LPCD) पर्याप्त दबाव के साथ निर्धारित गुणवत्ता का पानी उपलब्ध कराना है। 
    • जल जीवन मिशन की समग्र वित्तीय प्रतिबद्धता 3600 बिलियन (43.80 बिलियन अमेरिकी डॉलर) रूपये है जो इसे विश्‍व का एक सबसे बड़ा कल्याणकारी कार्यक्रम बनाती है। 
    • अगस्त 2019 में इस मिशन के शुरुआत के समय, 19.43 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से केवल 3.23 करोड़ (16.65 प्रतिशत) परिवारों के पास ही नल का पानी उपलब्‍ध था। 
    • कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण हाल के वर्षों में पैदा हुए कई व्यवधानों के बावजूद राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने जल जीवन मिशन को लागू करने के बारे में लगातार प्रयास किए हैं। 
    • देश ने 4 अप्रैल 2023 को ‘हर घर जल’ की इस यात्रा में एक और महत्‍वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिसमें 11.66 करोड़ (60 प्रतिशत) से अधिक ग्रामीण परिवारों को उनके घरों में नल से जल की आपूर्ति उपलब्‍ध कराई गई है। 
    • 5 राज्यों गुजरात, तेलंगाना, गोवा, हरियाणा और पंजाब और 3 केंद्र शासित प्रदेशों – अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दमन दीव एवं दादरा नगर हवेली और पुडुचेरी ने शत-प्रतिशत कवरेज हासिल कर लिया है। 
    • देश अपने सभी ग्रामीण परिवारों को नल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
  • जल जीवन मिशन केवल बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रम नहीं है। 
    • इस मिशन में जल आपूर्ति की पर्याप्तता, सुरक्षा और नियमितता के रूप में सेवा आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित किया गया है। 
    • जल जीवन मिशन को लागू करने की गति और उसका पैमाना अभूतपूर्व रहा है। 
    • केवल 3 वर्षों में, 40 करोड़ से अधिक लोगों के साथ 8.42 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवार (आईएमआईएस स्रोत के अनुसार 4.95 व्यक्ति प्रति ग्रामीण परिवार) कार्यक्रम के तहत लाभान्वित हुए हैं। 
    • यह संख्‍या संयुक्त राज्य अमेरिका की 33.1 करोड़ जनसंख्या से अधिक है और यह ब्राजील की 21 करोड़ और नाइजीरिया की 20 करोड़ जनसंख्या से लगभग दोगुनी है और मेक्सिको की 12.8 करोड़ और जापान की 12.6 करोड़ जनसंख्या से तीन गुना से भी अधिक है।
  • बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण पर ध्यान देने के साथ-साथ सभी ग्रामीण स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और आश्रमशालाओं (जनजातीय आवासीय विद्यालयों) में पीने, मध्याह्न भोजन पकाने, हाथ धोने और शौचालयों में उपयोग के लिए जल कनेक्शन प्रदान करने के बारे में विशेष प्रयास किए गए हैं। 
    • अब तक, 9.03 लाख (88.26 प्रतिशत) स्कूलों और 9.36 लाख (83.71 प्रतिशत) आंगनवाड़ी केंद्रों में नल से पानी की आपूर्ति उपलब्‍ध कराई जा चुकी है।
  • जल जीवन मिशन के तहत “सुरक्षित पानी की आपूर्ति” मुख्‍य विचारणीय विषय रहा है। 
    • जल जीवन मिशन के शुभारंभ के समय देश में 14,020 आर्सेनिक और 7,996 फ्लोराइड से प्रभावित बस्तियां मौजूद थीं। 
    • राज्यों/केन्‍द्रशासित प्रदेशों के द्वारा किए गए ठोस प्रयासों के कारण जल जीवन मिशन की शुरूआत के बाद तीन वर्षों की छोटी अवधि में ही ऐसी बस्तियों की संख्या घटकर क्रमशः 612 और 431 रह गई है।  
  • अब 2,078 जल परीक्षण प्रयोगशालाएं विकसित की गई हैं, जिनमें से 1,122 NABL से मान्यता प्राप्त हैं। 
    • पानी की गुणवत्ता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए, फील्ड टेस्ट किट (FTK) का उपयोग करके जल के नमूनों के परीक्षण के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 21 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है।  
    • मिशन द्वारा एक विशेष ‘स्वच्छ जल से सुरक्षा’ अभियान शुरू किया गया था और वर्ष 2022-23 के दौरान 5.33 लाख गांवों में रासायनिक और 4.28 लाख गांवों में जैविक अपमिश्रण (मानसून के बाद) के लिए जल गुणवत्ता परीक्षण होने की जानकारी दी गई है।
  • जल जीवन मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए भारत सरकार और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश मिलकर काम कर रहे हैं।
  • लंबी अवधि में ग्रामीण परिवारों में लिए निरंतर सेवा आपूर्ति हेतु भूजल और झरने के जल स्रोतों की स्थिरता बहुत महत्वपूर्ण है। 
  • इस संदर्भ में “पेयजल की स्रोत स्थिरता” (जेएसए-2023-एसएसडीडब्‍ल्‍यू) को जल शक्ति अभियान 2023 के केंद्रीय विषय के रूप में रखा गया है। 
  • इससे पेयजल के स्रोतों विशेष रूप से भूजल संसाधनों और झरनों की स्थिति सुधारने के लिए जल संरक्षण पर आवश्यक ध्यान दिया जाएगा। 

मिशन का प्रभाव:

  • जल जीवन मिशन कई तरह से समाज को प्रभावित कर रहा है। 
    • नियमित रूप से नल के पानी की आपूर्ति से महिलाओं और युवा लड़कियों को अपनी दैनिक घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में पानी ढोने की मेहनत से राहत मिल रही है। 
    • दूसरी तरफ, महिलाएं पानी इकट्ठा करने से बचाए गए समय का उपयोग आय सृजन गतिविधियों के लिए, नए कौशल सीखने और अपने बच्चों की शिक्षा में सहायता के लिए कर सकती हैं। 
    • पानी इकट्ठा करने में अपनी मां की मदद करने के लिए किशोरियों को अब स्कूल नहीं छोड़ना पड़ेगा।
  • नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. माइकल क्रेमर और उनकी टीम द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि अगर परिवारों को पीने के लिए सुरक्षित पानी उपलब्ध कराया जाए तो लगभग 30 प्रतिशत शिशुओं की मृत्यु को रोका जा सकता है। 
    • खासकर नवजात बच्चों में डायरिया एक बहुत ही आम बीमारी है। 
    • नवजात शिशु पानी से होने वाली बीमारियों के प्रति कई अधिक संवेदनशील होते हैं। 
    • इस अध्ययन से यह भी पता चला है कि प्रत्येक चार मौतों में से एक 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से संबंधित है जिसे भारत में सुरक्षित पानी की व्यवस्था करके रोका जा सकता है।
  • जल जीवन मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोजगार के अवसर भी सृजित कर रहा है। 
    • IIM बेंगलुरु द्वारा किए गए एक प्रारंभिक सर्वेक्षण से यह पता चला है कि जल जीवन मिशन के लागू होने की पांच साल की अवधि के दौरान लगभग 1,47,55,980 व्यक्ति प्रति वर्ष रोजगार सृजित किया जा सकता है। 
    • इस मिशन के निर्माण चरण में पूरे वर्ष के लिए प्रत्येक वर्ष औसत रूप से 29,51,196 लोगों को रोजगार मिलता है। 
    • इस मिशन से पाइप जलापूर्ति योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए हर साल लगभग 10.92 लाख लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

1. भूटान नरेश ने राष्ट्रपति से मुलाकात की:

  • भूटान नरेश महामहिम जिग्मे खेसर नामग्याल वांग्चुक ने 04 अप्रैल 2023 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।
  • भारत में भूटान नरेश का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और भूटान के बीच सभी स्तरों पर पारस्परिक विश्वास, सद्भावना और समझदारी पर आधारित घनिष्ठ साझेदारी है। 
    • उन्होंने कहा कि भारत भूटान के साथ बहुआयामी और विशिष्ट साझेदारी को बहुत महत्व देता है।
    • उन्होंने कहा कि भूटान के विकास की प्रक्रिया में सबसे बड़े भागीदार के रूप में, भारत को भूटान में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, अवसंरचना, डिजिटलीकरण और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में विभिन्न परियोजनाओं का समर्थन करने पर गर्व है। 
    • उन्होंने विश्वास दिलाया कि भूटान की प्राथमिकताओं और आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए विकास की प्रक्रिया में भारत की साझेदारी जारी रहेगी।
  • राष्ट्रपति ने कहा कि इस साल भूटान सबसे कम विकसित देश (LDC) की श्रेणी से आगे बढ़ने के लिए तैयार है और एक उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनने की राह पर आगे बढ़ रहा है। 
    • उन्होंने कहा कि भारत इस यात्रा में भूटान का विश्वसनीय भागीदार बना रहेगा।
  • राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और भूटान फिनटेक, स्टार्टअप और उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में परस्पर सहयोग कर रहे हैं। 
    • उन्होंने कहा कि दोनों देशों को हमारे युवाओं की ऊर्जा और क्षमता का उचित उपयोग करने के लिए परस्पर सहयोग के इस दायरे का विस्तार करना चाहिए।

2. भारत-श्रीलंका वार्षिक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास (स्लाइनेक्स-23) का आयोजन:

  • भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ‘स्‍लाइनेक्‍स-23’ (श्रीलंका-भारत नौसेना अभ्यास) का 10वां संस्करण 03 से 08 अप्रैल 2023 तक कोलंबो में आयोजित किया जा रहा है। 
    • यह अभ्यास दो चरणों – 03 अप्रैल से 05 अप्रैल 2023 तक बंदरगाह चरण और उसके बाद 06 से 08 अप्रैल 2023 तक समुद्री चरण में आयोजित हो रहा है।
  • भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व आईएनएस किल्‍तान,  एक स्वदेशी कामोर्टा क्‍लास एएसडब्ल्यू कार्वेट तथा आईएनएस सावित्री, एक अपतटीय गश्ती पोत द्वारा किया जा रहा है। 
    • श्रीलंका नौसेना का प्रतिनिधित्व एसएलएनएस गजबाहू और एसएलएनएस सागर द्वारा किया जा रहा है। 
    • समुद्री गश्ती विमान, हेलीकॉप्टर और दोनों देशों की नौसेना के विशेष बल भी इस युद्धाभ्‍यास में भाग लेंगे। 
    • स्‍लाइनेक्‍स का पिछला संस्करण विशाखापत्तनम में 07-12 मार्च 2022 तक आयोजित किया गया था।
  • स्‍लाइनेक्‍स का उद्देश्य अंतरसंचालन (इंटरऑपरेबिलिटी) को बढ़ाना, आपसी समझ को बेहतर बनाना और संयुक्त रूप से बहु-आयामी समुद्री संचालन करते हुए सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करना है। 
    • दोनों नौसेनाओं के बीच मैत्री और भाईचारे के संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए बंदरगाह चरण के दौरान पेशेवर, सांस्कृतिक और खेल आयोजनों के साथ-साथ सामाजिक आदान-प्रदान की भी योजना बनाई गई है।

3. पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण सेल (PPAC) ने 22वां स्थापना दिवस मनाया:

  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुख्‍य डेटा आधार पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) ने स्कोप कॉम्प्लेक्स कन्वेंशन सेंटर में 3 अप्रैल 2023 को अपना 22वां स्थापना दिवस मनाया।
  • अपनी स्‍थापना के दो दशकों से अधिक समय में, PPAC ने तेल और गैस क्षेत्र के बारे में व्‍यापक डेटा प्रबंधन के अलावा, PMUY (उज्ज्वला), DBTL, पीएम गरीब कल्याण योजना, एलपीजी सब्सिडी और गैस मूल्य निर्धारण के प्रबंधन को विनियमित बाजार में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 
  • विगत में इसने मंत्रालय को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) मिट्टी के तेल की सब्सिडी के प्रबंधन और दूर-दराज के क्षेत्रों के लिए भाड़ा सब्सिडी सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के निर्वहन में काफी सहायता प्रदान की है।
  • PPAC तेल और गैस क्षेत्र में डेटा बैंक का रखरखाव करती है और घरेलू एवं अंतर्राष्‍ट्रीय तेल और गैस क्षेत्र और घरेलू मूल्‍यों में आ रहे रुझानों का विश्लेषण भी करता है। 
    • PPAC जैसा डेटा संगठन किस प्रकार ऊर्जा पारगमन के समय अपने आपको प्रासंगिक रख सकता है। 
    • यह संस्था डेटा और नीति विश्लेषण के लिए सबसे अधिक प्रामाणिक आधिकारिक स्रोत होने के कारण उसकी भूमिका हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण हैं।

4. प्रधानमंत्री ने 5वें अंतर्राष्ट्रीय आपदा-रोधी अवसंरचना सम्मेलन को संबोधित किया:

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से 5वें अंतर्राष्ट्रीय आपदा-रोधी अवसंरचना (ICDRI) सम्मेलन, 2023 को संबोधित किया।
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि CDRI इस वैश्विक दृष्टिकोण पर विकसित हुआ है कि निकट रूप से जुड़ी दुनिया में, आपदाओं का प्रभाव केवल स्थानीय नहीं होगा। 
  • इसलिए, “हमें प्रतिक्रिया को अलग-थलग नहीं, बल्कि एकीकृत रूप देना होगा।
  • कुछ ही वर्षों में, विकसित और विकासशील, बड़े या छोटे या वैश्विक दक्षिण या वैश्विक उत्तर के 40 से अधिक देश, CDRI का हिस्सा बन गए हैं। 
  • इसमें सरकारों के अलावा, वैश्विक संस्थान, निजी क्षेत्र और इस क्षेत्र के विशेषज्ञ भी इसमें शामिल हुए हैं।
  • प्रधानमंत्री ने इस वर्ष की थीम ‘सहनीय और समावेशी अवसंरचना निर्माण’ के संदर्भ में आपदा से निपटने से जुड़ी अवसंरचना पर चर्चा के लिए कुछ प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। 
  • प्रधानमंत्री ने कहा “अवसंरचना न केवल लाभ के बारे में है, बल्कि पहुंच और सहनीयता से भी जुड़ी है। अवसंरचना से कोई पीछे नहीं छूटना चाहिए और संकट के समय में भी लोगों की सेवा करनी चाहिए।“
  • प्रधानमंत्री ने अवसंरचना के समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि सामाजिक और डिजिटल अवसंरचना उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी कि परिवहन अवसंरचना।
  • प्रधानमंत्री ने CDRI की कुछ पहलों की समावेशी भावना को रेखांकित किया। 
    • उन्होंने सहनीय द्वीप देश पहल या IRIS का उल्लेख किया, जिसने कई द्वीप राष्ट्रों को लाभान्वित किया है। 
    • उन्होंने अवसंरचना सहनीयता त्वरण कोष, जिसकी घोषणा पिछले साल की गई थी के बारे में कहा कि इस 50 मिलियन डॉलर के कोष ने विकासशील देशों के बीच अत्यधिक रुचि पैदा की है।
    • प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा, “वित्तीय संसाधनों की प्रतिबद्धता, पहल की सफलता की कुंजी है।“
  • भारत की G-20 अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने CDRI को कई कार्यकारी समूहों में शामिल करने की जानकारी दी।  
  • तुर्किये और सीरिया में भूकंप जैसी हाल की आपदाओं के पैमाने और तीव्रता का उल्लेख करते हुए और CDRI के काम और इसके महत्व को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन किया।

 

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लिंक किए गए लेख में 03 अप्रैल 2023 का पीआईबी सारांश और विश्लेषण पढ़ें।

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