13 अप्रैल 2022 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन के क्षेत्र में भारत और जापान के बीच एक सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर को मंजूरी दी: 
  2. केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड तथा कनाडा के मैनिटोबा सेक्योरिटीज़ कमीशन के बीच द्विपक्षीय समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दी:
  3.  केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने कोयला युक्त क्षेत्र (अधिग्रहण एवं विकास) अधिनियम, 1957 के तहत अधिग्रहित भूमि के उपयोग की नीति को मंजूरी दी:
  4. कैबिनेट ने केंद्र प्रायोजित योजना- राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) को 31 मार्च 2026 तक जारी रखने की मंजूरी दी:
  5. दीर्घायु वित्त पर विशेषज्ञ समिति ने जीआईएफटी-आईएफएससी में दीर्घायु (लॉन्जेविटी) हब बनाने  की सिफारिश की

1. केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन के क्षेत्र में भारत और जापान के बीच एक सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर को मंजूरी दी: 

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध: 

विषय: अपशिष्ट जल के प्रबंधन से संबद्ध मिशन।  

प्रारंभिक परीक्षा: घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन ।   

मुख्य परीक्षा: विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन और जोहकासौ प्रौद्योगिकी का उपयोग करके शोधित अपशिष्ट जल के प्रभावी उपयोग जैसे क्षेत्रों में जापान के साथ सहयोग किस प्रकार उपयोगी साबित होगा ?

प्रसंग: 

  • केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन के क्षेत्र में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग (डीओडब्‍ल्‍यूआर, आरडी एंड जीआर), जल शक्ति मंत्रालय और जापान के पर्यावरण मंत्रालय के बीच हस्‍ताक्षरित एक सहयोग ज्ञापन (एमओसी) को मंजूरी दे दी है। 

उद्देश्य:

  • कार्यान्वयन की रणनीति और लक्ष्य:
  • एक प्रबंधन परिषद (एमसी) का गठन किया जाएगा, जो सहयोग की विस्तृत गतिविधियों को निर्धारित करके और इन गतिविधियों की प्रगति की निगरानी के माध्यम से इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार होगी।

विवरण:  

  • मुख्य प्रभाव:
  • इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) के माध्यम से विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन और जोहकासौ प्रौद्योगिकी का उपयोग करके शोधित अपशिष्ट जल के प्रभावी दोबारा उपयोग जैसे क्षेत्रों में जापान के साथ सहयोग बेहद उपयोगी साबित होगा। 
  • अपशिष्ट जल के प्रबंधन से संबद्ध यह विकेन्द्रीकृत जोहकासौ प्रणाली जल जीवन मिशन  के तहत आनेवाली बस्तियों से निकले अपशिष्ट/गंदे पानी के प्रबंधन साथ-साथ ताजे पानी के स्रोतों की निरंतरता के अलावा नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत इसी तरह की स्थितियों के लिए बेहद प्रभावकारी हो सकती है। 
  • जापान के साथ सहयोग का यह कदम शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को अपशिष्ट जल के शोधन की जटिल समस्या से निपटने के लिए बेहतर योजना बनाने में मदद करेगा। 
  • इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) के तहत दोनों पक्षों पर कोई वित्तीय दायित्व नहीं होगा। 
  • विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन के क्षेत्र में जल संसाधन, नदी विकास एवं एवं गंगा संरक्षण विभाग (डीओडब्‍ल्‍यूआर, आरडी एंड जीआर), जल शक्ति मंत्रालय (एमओजेएस) और जापान के पर्यावरण मंत्रालय के बीच एक सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर 19 मार्च 2022 को हस्ताक्षर किए गए। 
  • दोनों देशों के बीच समानता और पारस्परिक लाभ के सिद्धांतों के आधार पर सार्वजनिक जल क्षेत्रों में जलीय पर्यावरण के संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार के उद्देश्य से विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन को मजबूत करने, उसे सुगम बनाने और विकसित करने के उद्देश्य से भारत गणराज्य के जल संसाधन, नदी विकास एवं एवं गंगा संरक्षण विभाग (डीओडब्‍ल्‍यूआर, आरडी एंड जीआर), जल शक्ति मंत्रालय (एमओजेएस) और जापान के पर्यावरण मंत्रालय के बीच इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए गए। 
  • सहयोग का दायरा ज्यादातर विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन और शोधित अपशिष्ट जल का प्रभावी दोबारा उपयोग पर केंद्रित है। 
  • इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) के तहत सहयोग के विभिन्न स्वरूप जिसमें संगोष्ठियों, सम्मेलनों और क्षमता निर्माण के माध्यम से विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन से संबंधित सूचना और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान शामिल हो सकते हैं।

पृष्ठ्भूमि: 

  • जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय नीतिगत एवं तकनीकी विशेषज्ञता साझा करने, प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों, कार्यशालाओं, वैज्ञानिक एवं तकनीकी संगोष्ठियों के संचालन, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और शोध के माध्यम से जल संसाधनों के विकास तथा प्रबंधन के क्षेत्र में अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय सहयोग करेगा। 

2. केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड तथा कनाडा के मैनिटोबा सेक्योरिटीज़ कमीशन के बीच द्विपक्षीय समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दी: 

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध: 

विषय: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड तथा कनाडा के मैनिटोबा सेक्योरिटीज़ कमीशन के बीच द्विपक्षीय समझौते का प्रभाव।  

प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड।  

प्रसंग: 

  • प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड तथा कनाडा के मैनिटोबा सेक्योरिटीज़ कमीशन के बीच द्विपक्षीय समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर को मंजूरी दे दी है। 

विवरण:  

  • कनाडा के मैनिटोबा प्रांत में स्थित संस्थाएं सेबी के साथ फ़ॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर (एफपीआई) के रूप में पंजीकरण कराना चाहती हैं, जिसके लिये पूर्व-निर्धारित शर्तों में से एक शर्त यह है कि विदेशी प्रांत के प्रतिभूति बाजार नियामक को इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ सेक्योरिटीज कमीशन के बहुपक्षीय समझौता-ज्ञापन (आईओएससीओ-एमएमओयू) का हस्ताक्षरकर्ता होना चाहिये। 
  • साथ ही सेबी के साथ एफपीआई के रूप में मैनिटोबा की संस्थाओं के लिये एक द्विपक्षीय समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना भी जरूरी है; तभी उन्हें अनुमति मिलेगी। 
  • समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर हो जाने से ये सभी एफपीआई लाभान्वित होंगे तथा भारतीय बाजारों में लगातार निवेश के पात्र हो जायेंगे। 

लाभः

  • समझौता-ज्ञान, अन्य बातों के साथ, प्रतिभूति नियमन के क्षेत्र में सीमा-पार सहयोग के लिये औपचारिक आधार प्रदान करेगा, जिससे पारस्परिक सहायता की सुविधा होगी, निरीक्षण कार्यकलापों के कारगर प्रदर्शन में योगदान होगा, तकनीकी क्षेत्रीय ज्ञान उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और प्रतिभूति बाजारों के नियमन तथा कानूनों के कारगर क्रियान्वयन की क्षमता बढ़ेगी।
  • इस समझौता-ज्ञापन से मैनिटोबा के निवेशक सेबी के साथ एफपीआई के रूप में पंजीकरण के लिये पात्र हो जायेंगे।

3. केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने कोयला युक्त क्षेत्र (अधिग्रहण एवं विकास) अधिनियम, 1957 के तहत अधिग्रहित भूमि के उपयोग के लिए नीति को मंजूरी दी: 

सामान्य अध्ययन: 3

अर्थव्यवस्था,शासन: 

विषय: कोयला युक्त क्षेत्र (अधिग्रहण एवं विकास) अधिनियम, 1957 के तहत अधिग्रहित भूमि के उपयोग के लिए नीति के प्रावधान, लाभ,समस्याएं एवं चुनौतियां।  

प्रारंभिक परीक्षा,मुख्य परीक्षा: कोयला युक्त क्षेत्र (अधिग्रहण एवं विकास) अधिनियम, 1957,सीबीए अधिनियम ।  

प्रसंग: 

  • खनन की जा चुकी या व्यावहारिक रूप से खनन के लिए अनुपयुक्त भूमि के उपयोग को सुविधाजनक बनाने और कोयला क्षेत्र में निवेश तथा रोजगार सृजन को बढ़ाने के उद्देश्य से, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोयला युक्त क्षेत्र (अधिग्रहण एवं विकास) अधिनियम, 1957 [सीबीए अधिनियम] के तहत अधिग्रहित भूमि के उपयोग के लिए नीति को मंजूरी दी है। 

उद्देश्य:

  • इस नीति में कोयला और ऊर्जा से संबंधित अवसंरचना के विकास के उद्देश्य से ऐसी भूमि के उपयोग का प्रावधान है।
  • इस बदलाव से कोयला और ऊर्जा से संबंधित अवसंरचना के विकास तथा स्थापना के लिए गैर-खनन योग्य भूमि का उपयोग करना संभव होगा। 

विवरण:  

  • सीबीए अधिनियम में किसी भी ऋणभार से मुक्त, कोयला युक्त भूमि के अधिग्रहण और इसे सरकारी कंपनी में निहित करने का प्रावधान है। 
  • अनुमोदित नीति, सीबीए अधिनियम के तहत अधिग्रहित भूमि के निम्न प्रकार के उपयोग के लिए स्पष्ट नीतिगत रूपरेखा प्रदान करती है:
  • कोयला खनन गतिविधियों के लिए भूमि; अब उपयुक्त नहीं है या आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है; 
  • (ब) जिन भू-क्षेत्रों से कोयले का खनन/कोयला निकालने का कार्य हो चुका है और ऐसी भूमि को फिर से प्राप्त किया गया है।        
  • सरकारी कोयला कंपनियां,जैसे कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और इसकी सहायक कंपनियां, सीबीए अधिनियम के तहत अधिग्रहित इन भू-क्षेत्रों की मालिक बनी रहेंगी और यह नीति, केवल नीति में दिए गए निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए ही, भूमि को पट्टे पर देने की अनुमति देती है। 
  • कोयला और ऊर्जा संबंधी अवसंरचना विकास गतिविधियों के लिए सरकारी कोयला कंपनियां संयुक्त परियोजनाओं में निजी पूंजी लगा सकती हैं।
  • जिस सरकारी कंपनी के पास भूमि है, वह ऐसी भूमि को निश्चित अवधि के लिए पट्टे पर देगी और पट्टे के लिए संस्थाओं का चयन एक पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया और तंत्र के माध्यम से किया जाएगा, ताकि अधिकतम मूल्य प्राप्त किया जा सके। 
  • निम्नलिखित गतिविधियों के लिए भू-क्षेत्रों पर विचार किया जाएगा:
  • कोल वाशरी स्थापित करना;
  • कन्वेयर सिस्टम स्थापित करना;
  • कोल हैंडलिंग प्लांट स्थापित करना;
  • रेलवे साइडिंग का निर्माण;
  • सीबीए अधिनियम या अन्य भूमि अधिग्रहण कानून के तहत भूमि-अधिग्रहण के कारण परियोजना प्रभावित परिवारों का पुनर्वास और स्थान-परिवर्तन पुनर्वास;
  • ताप आधारित और नवीकरणीय विद्युत परियोजनाओं की स्थापना करना;
  • प्रतिपूरक वनरोपण सहित कोयला विकास संबंधी अवसंरचना की स्थापना या प्रावधान करना;
  • मार्ग का अधिकार प्रदान करना;
  • कोयला गैसीकरण और कोयले से रसायन संयंत्र; और
  • ऊर्जा से संबंधित अवसंरचना की स्थापना या प्रावधान करना।
  • जिन भू-क्षेत्रों से खनन किया जा चुका है या जो कोयला खनन के लिए व्यावहारिक रूप से अनुपयुक्त हैं, उन पर अनधिकृत अतिक्रमण होने की संभावना रहती है और सुरक्षा तथा रख-रखाव पर अनावश्यक व्यय करना पड़ता है। 
  • अनुमोदित नीति के तहत, सरकारी कंपनियों से स्वामित्व को बिना हस्तांतरण किये विभिन्न कोयला और ऊर्जा संबंधी अवसंरचना की स्थापना से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा।
  • अन्य उद्देश्यों के लिए गैर-खनन योग्य भूमि का फिर से उपयोग शुरू होने पर सीआईएल को अपनी परिचालन लागत को कम करने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि यह कंपनी, निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में विभिन्न व्यवसाय मॉडल को अपनाकर कोयले से संबंधित अवसंरचना और अन्य परियोजनाओं जैसे सौर संयंत्र को अपनी जमीन पर स्थापित करने में सक्षम होगी। 
  • यह कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को व्यावहारिक बनाएगा, क्योंकि कोयले को दूर स्थानों पर ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
  • पुनर्वास उद्देश्य के लिए भूमि का उपयोग करने का प्रस्ताव; भूमि का उचित उपयोग सुनिश्चित करेगा, महत्वपूर्ण भूमि संसाधन के अपव्यय को समाप्त करेगा, परियोजना प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए नए भूखंडों के अधिग्रहण से बचाएगा, परियोजनाओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ को समाप्त करेगा और लाभ में वृद्धि करेगा। 
  • यह विस्थापित परिवारों की मांग को भी पूरा करेगा क्योंकि वे हमेशा अपने मूल आवासीय स्थानों के, जितना संभव हो उतना नज़दीक रहना पसंद करते हैं। 
  • इससे कोयला परियोजनाओं के लिए स्थानीय समर्थन प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी और राज्य सरकार द्वारा कोयला खनन के लिए दी गई वन भूमि के बदले में राज्य सरकार को वनरोपण के लिए भूमि उपलब्ध होगी।  
  • प्रस्तावित नीति घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करके, आयात निर्भरता को कम करके, रोजगार सृजन आदि के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में मदद करेगी। 
  • इस नीति से विभिन्न कोयला और ऊर्जा अवसंरचना विकास गतिविधियों के लिए भूमि का फिर से उपयोग किया जा सकेगा, जिससे देश के पिछड़े क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। 
  • पहले से अधिग्रहित भूमि के उपयोग से भूमि के नए अधिग्रहण की जरूरत नहीं होगी और संबंधित विस्थापन को भी रोका जा सकेगा तथा इससे स्थानीय विनिर्माण व उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

 4. कैबिनेट ने केंद्र प्रायोजित योजना- राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) को 31 मार्च 2026 तक जारी रखने की मंजूरी दी: 

सामान्य अध्ययन: 2

शासन,सामाजिक कल्याण: 

विषय:योजना के रोजगार सृजन क्षमता सहित प्रमुख प्रभाव।   

प्रारंभिक परीक्षा:  राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए)।   

मुख्य परीक्षा:इस योजना से किस प्रकार ग्रामीणों को स्थानीय निकायों को सतत विकास लक्ष्यों तक पहुंचने में मदद मिलेगी ?  

प्रसंग: 

  • प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) की शासन संबंधी क्षमताओं को विकसित करने के लिए संशोधित केंद्र प्रायोजित योजना-राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) को 01 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2026 की अवधि (15वें वित्त आयोग की अवधि) के दौरान कार्यान्वयन जारी रखने की मंजूरी दे दी है। 

उद्देश्य:

  • इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 5,911 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 3,700 करोड़ रुपये और राज्य का हिस्सा 2,211 करोड़ रुपये है। 

विवरण:  

योजना के रोजगार सृजन क्षमता सहित प्रमुख प्रभाव: 

  • आरजीएसए की स्वीकृत योजना देश भर में पारंपरिक निकायों सहित 2.78 लाख से अधिक ग्रामीण स्थानीय निकायों को उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर केंद्रित करने के साथ समावेशी स्थानीय शासन के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) पर काम करने के लिए शासन संबंधी क्षमता विकसित करने में मदद करेगी। 
  • एसडीजी के प्रमुख सिद्धांत, यानी किसी को पीछे नहीं छोड़ना, सबसे पहले दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचना और व्यापक कवरेज करना, लैंगिक समानता के साथ-साथ प्रशिक्षण, प्रशिक्षण मॉड्यूल और सामग्री सहित क्षमता निर्माण के सभी क्रियाकलापों को शामिल किया जाएगा।
  • राष्ट्रीय महत्व के विषयों, अर्थात्: (i) गरीबी मुक्त और आजीविका के संसाधनों में वृद्धि वाले गांव, (ii) स्वस्थ गांव, (iii) बच्चों के अनुकूल गांव, (iv) जल की पर्याप्त मात्रा वाले गांव (v) स्वच्छ और हरित गांव, (vi) गांव में आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचा, (vii) सामाजिक रूप से सुरक्षित गांव, (viii) सुशासन वाला गांव, और (ix) गांव में महिला-पुरुष समानता आधारित विकास को मुख्य रूप से प्राथमिकता दी जाएगी।
  • चूंकि पंचायतों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व होता है, और वे जमीनी स्तर के सबसे करीब संस्थान हैं, पंचायतों को मजबूत करने से सामाजिक न्याय और समुदाय के आर्थिक विकास के साथ-साथ समानता और समावेशन को बढ़ावा मिलेगा। 
  • पंचायती राज संस्थाओं द्वारा ई-गवर्नेंस के अधिक उपयोग से बेहतर सेवा वितरण और पारदर्शिता हासिल करने में मदद मिलेगी। 
  • यह योजना ग्राम सभाओं को कमजोर समूहों के सामाजिक समावेशन के साथ प्रभावी संस्थानों के रूप में कार्य करने के लिए मजबूत करेगी। 
  • इससे पर्याप्त मानव संसाधन और बुनियादी ढांचे के साथ राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर पंचायती राज संस्थाओं के क्षमता निर्माण के लिए संस्थागत ढांचे की स्थापना होगी।
  • एसडीजी के लक्ष्य तक पहुंचने में पंचायतों की भूमिका को पहचानने और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण मानदंडों के आधार पर प्रोत्साहन द्वारा पंचायतों को उत्तरोत्तर मजबूत किया जाएगा।
  • योजना के तहत कोई स्थायी पद सृजित नहीं किया जाएगा, लेकिन योजना के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए और योजना के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए राज्यों/ केंद्र-शासित प्रदेशों को तकनीकी सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से अनुबंध आधारित मानव संसाधन का प्रावधान किया जायगा।

लाभार्थियों की संख्या:

  • देश भर में पारंपरिक निकायों सहित ग्रामीण स्थानीय निकायों के लगभग 60 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि, पदाधिकारी और अन्य हितधारक इस योजना के प्रत्यक्ष लाभार्थी होंगे।
  • (i) संशोधित आरजीएसए में केंद्र और राज्य के घटक शामिल होंगे। योजना के केंद्रीय घटकों को पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा। 
  • राज्य घटकों के लिए वित्तपोषण पैटर्न केंद्र और राज्यों के बीच क्रमशः 60:40 के अनुपात में होगा, इसमें पूर्वोत्तर, पर्वतीय राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर शामिल नहीं हैं, जहां केंद्र और राज्य का हिस्सा 90:10 होगा।हालांकि, अन्य केंद्र-शासित प्रदेशों के लिए केंद्रीय हिस्सा शत-प्रतिशत होगा।
  • (ii) इस योजना में दोनों केंद्रीय घटक यानी राष्ट्रीय तकनीकी सहायता योजना, ई-पंचायत पर मिशन मोड परियोजना, पंचायतों को प्रोत्साहन, कार्य अनुसंधान और मीडिया जैसे राष्ट्रीय स्तर के क्रियाकलाप और पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) का क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण के लिए संस्थागत समर्थन, दूरस्थ शिक्षा सुविधा, ग्राम पंचायत भवन के निर्माण के लिए समर्थन, ग्राम पंचायत भवनों में सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) और पूर्वोत्तर राज्यों पर विशेष ध्यान देने के साथ ग्राम पंचायत के लिए कंप्यूटर, पंचायत अनुसूचित क्षेत्र विस्तार प्रावधान (पीईएसए) क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को मजबूत करने के लिए विशेष सहायता, नवाचार के लिए समर्थन, आर्थिक विकास और आय वृद्धि के लिए आर्थिक विकास  जैसे राज्य घटक शामिल  हैं।
  • (iii) सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने के लिए योजना की गतिविधियों के कार्यान्वयन और निगरानी को व्यापक रूप से चिन्हित किया जाएगा। 
  • पंचायतें सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से सभी विकास गतिविधियों और विभिन्न मंत्रालयों/विभागों और राज्य सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन का केंद्र बिंदु हैं।
  • (iv) संशोधित आरजीएसए के तहत मंत्रालय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिकाओं को सक्षम बनाने की दिशा में अपना ध्यान केंद्रित करेगा ताकि सरकार के तीसरे स्तर को विकसित किया जा सके, जिससे वे मुख्य रूप से नौ विषयों – (i) गरीबी मुक्त और आजीविका के संसाधनों में वृद्धि वाले गांव, (ii) स्वस्थ गांव, (iii) बच्चों के अनुकूल गांव, (iv) जल की पर्याप्त मात्रा वाले गांव, (v) स्वच्छ और हरित गांव, (vi) गांव में आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचा, (vii) सामाजिक रूप से सुरक्षित गांव, (viii) सुशासन वाला गांव, और (ix) गांव में महिला पुरुष समानता के लिए काम कर सकें।
  • (v) यह योजना सतत विकास लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए अन्य मंत्रालयों/विभागों की क्षमता निर्माण से जुड़ी पहलों को भी एकीकृत करेगी। 
  • विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल किए गए पारंपरिक निकायों सहित ग्रामीण स्थानीय निकायों के सेक्टर इनेबलर अपने-अपने क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और अन्य हितधारकों को प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
  • (vi) सतत विकास लक्ष्य तक पहुंचने में पंचायतों की भूमिका को पहचानना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करना। 
  • (vii) गहन विश्लेषण प्रदान करने के लिए, पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित क्षेत्रों में साक्ष्य आधारित अनुसंधान अध्ययन और मूल्यांकन किया जाएगा। 
  • जागरूकता पैदा करने, ग्रामीण जनता को संवेदनशील बनाने, सरकारी नीतियों और योजनाओं को इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट, सोशल और पारंपरिक मीडिया के माध्यम से प्रसारित करने से संबंधित क्रियाकलाप शुरू किए जाएंगे।

कार्यान्वयन रणनीति और लक्ष्य:

  • केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अपनी-अपनी भूमिकाओं के लिए स्वीकृत गतिविधियों को पूरा करने के लिए कार्रवाई करेंगी। 
  • राज्य सरकार अपनी प्राथमिकताओं और आवश्यकता के अनुसार केंद्र सरकार से सहायता प्राप्त करने के लिए अपनी वार्षिक कार्य योजना तैयार करेगी। इस योजना को मांग आधारित प्रारूप में लागू किया जाएगा।

शामिल किए गए राज्य/जिले:

  • यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों तक विस्तारित होगी और इसमें भाग IX से भिन्न  ग्रामीण स्थानीय शासन की संस्थाएं भी शामिल होंगी, जहां पंचायतें मौजूद नहीं हैं।

पृष्ठ्भूमि: 

  • तत्कालीन वित्त मंत्री ने 2016-17 के अपने बजट भाषण में, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने के लिए पंचायती राज संस्थानों की शासन संबंधी क्षमताओं को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) की नई पुनर्गठित योजना शुरू करने की घोषणा की। 
  • इस घोषणा के अनुपालन में और नीति आयोग के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में समिति की सिफारिशों के तहत, आरजीएसए की केंद्र प्रायोजित योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 21 अप्रैल 2018 को वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2021-22 तक (01 अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2022) लागू करने के लिए अनुमोदित किया गया था ।
  • इसके अलावा, क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण एक सतत प्रक्रिया है, क्योंकि हर पांच साल में अधिकांश पंचायत प्रतिनिधियों को नए प्रतिनिधियों के रूप में चुना जाता है, जिन्हें स्थानीय शासन में अपनी भूमिका निभाने के लिए ज्ञान, जागरूकता, दृष्टिकोण और कौशल के मामले में सक्षम होना आवश्यक है।
  • इसलिए, उन्हें अपने अनिवार्य कार्यों को कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से निर्वहन को लेकर सक्षम करने के उद्देश्य से उन्हें बुनियादी सामंजस्य और ओरिएंटेशन प्रशिक्षण प्रदान करना एक अनिवार्य आवश्यकता है।
  • इसलिए, संशोधित आरजीएसए को जारी रखने का प्रस्ताव 01 अप्रैल 2022 से 31 मार्च 2026 (15वें वित्त आयोग की अवधि) की अवधि के दौरान कार्यान्वयन के लिए तैयार किया गया था।

पूर्व-संचालित योजना का विवरण और प्रगति:

  • i. केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 21 अप्रैल 2018 को केंद्र प्रायोजित योजना- आरजीएसए को वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2021-22 तक कार्यान्वयन के लिए मंजूरी दी गई थी। 
  • केंद्रीय स्तर पर अन्य गतिविधियों सहित पंचायतों को प्रोत्साहन और ई-पंचायत पर मिशन मोड परियोजना इसके मुख्य केंद्रीय घटक थे।
  • राज्य घटक में मुख्य रूप से क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण से संबंधित क्रियाकलाप,  क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण के लिए संस्थागत तंत्र के साथ-साथ सीमित पैमाने पर अन्य गतिविधियां शामिल हैं।
  • ii. पंचायतों को प्रोत्साहन और ई-पंचायत पर मिशन मोड परियोजना सहित आरजीएसए की योजना के तहत, राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों/पंचायतों और अन्य कार्यान्वयन एजेंसियों को 2018-19 से 2021-22 तक (31 मार्च 2022 तक) 2364.13 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई।
  • iii. योजना के तहत 2018-19 से 2021-22 (31 मार्च 2022 तक) के दौरान लगभग 1.36 करोड़ निर्वाचित प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और पंचायती राज संस्थाओं के अन्य हितधारकों को बहुविध प्रशिक्षण दिया गया ।

5. दीर्घायु वित्त पर विशेषज्ञ समिति ने जीआईएफटी-आईएफएससी में दीर्घायु (लॉन्जेविटी) हब स्थापित करने की सिफारिश की: 

सामान्य अध्ययन: 3

अर्थव्यवस्था: 

विषय: दीर्घायु उद्योग की प्रगति के लिए वित्तीय सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए  इसके गुण-दोषों । 

प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) । 

प्रसंग: 

  • अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) ने दीर्घायु वित्त पर विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। 

उद्देश्य:

  • जिसके सह-अध्यक्ष सुश्री काकू नखाटे कंट्री हेड (इंडिया) बैंक ऑफ अमेरिका और श्री गोपालन श्रीनिवासन, पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड है। 
  • इस समिति ने 12 अप्रैल, 2022 को अपनी अंतिम रिपोर्ट आईएफएससी के अध्यक्ष को प्रस्तुत की है। 

विवरण:  

  • इस समिति ने विश्व स्तर पर दीर्घायु अर्थव्यवस्था के उभरते हुए रुझानों की जांच की और यह पाया कि 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग अभी भी क्रय शक्ति के मामले में 15 ट्रिलियन डॉलर की वैश्विक क्रय शक्ति के साथ वित्तीय प्रणाली के सबसे धनी हिस्सा हैं।
  • दीर्घायु उद्योग की प्रगति के लिए वित्तीय सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इस समिति ने जीआईएफटी-आईएफएससी में पहले वैश्विक दीर्घायु हब (जीएलएच) की स्थापना करने की सिफारिश करते हुए यह सुझाव दिया है कि इस हब को शीर्ष कॉरपोरेट और वित्तीय संस्थानों के जैसे बैंक, पेंशन निधियों, परिसम्पत्ति, प्रबंधन निधियों और बीमा कंपनियों जैसे वित्तीय संस्थानें के समन्वय में दीर्घायु अर्थव्यवस्था विकसित करने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।
  • विशेषज्ञ समिति की ने कहा,स्वास्थ्य देखभाल और चिकित्सा प्रौद्योगिकी में हुई प्रगति ने मनुष्यों के जीवनकाल में बढ़ोतरी की है। 
  • आईएफएससी में एक मजबूत दीर्घायु वित्तीय हब के निर्माण का दीर्घकालिक विज़न धन प्रबंधन, बीमा, पेंशन, सिल्वर उद्यमिता और चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्रों में अवसर जुटा सकता है। 
  • इससे आईएफएससी को दीर्घायु वित्त में एक वैश्विक नेता के रूप में उभरने में मदद मिलेगी और बेबी बूमर्स, जनरल एक्स और जनरल वाई कोहॉर्ट्स की जरूरतों को पूरा करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
  • वैश्विक बैंकों, बीमा कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और फिनटेक और हेल्थ-टेक को यहां दुकानें खोलने के लिए प्रोत्साहित करना ताकि एक विशिष्ट दीर्घायु हब का सृजन हो सके।
  • यह एक महान अभियान है जिसका बुजुर्ग (सिल्वर) पीढ़ी की भूमिका पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • आईएफएससीए की तरफ से दीर्घायु वित्त के बारे में विशेषज्ञ समिति स्थापित करने और आईएफएससी में दीर्घायु वित्त केन्द्र के महत्व की पहचान करने के लिए एक अग्रणी प्रयास रहा है।
  • यह हब कौशल विकास, उद्यमशीलता विकास पर ध्यान केन्द्रित करेगा और बुजुर्ग पीढ़ी की वित्तीय और बीमा उत्पादों की मांग को भी पूरा करेगा।
  • आईएफएससीए के अध्यक्ष ने विशेषज्ञ समिति को उनकी बहुमूल्य सिफारिशों के लिए धन्यवाद देते हुए सतत वित्त के समग्र ढांचे के तहत जीआईएफटी आईएफएससी में एक प्राथमिकता के रूप में दीर्घायु वित्त को बढ़ावा देने के विचार का समर्थन किया।
  • इस समिति के सदस्यों में बैंकिंग, बीमा, धन प्रबंधन, फिनटेक, कानून, अनुपालन और प्रबंधन परामर्श जैसे विभिन्न क्षेत्रों सहित पूरे दीर्घायु वित्त इको-सिस्टम के दिग्गज शामिल थे।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

  • एस. इकबाल सिंह लालपुरा ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधिसूचना 12.4.2022 के अनुसार राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) के अध्यक्ष के रूप में फिर से नामित किए जाने के बाद  नई दिल्ली में एनसीएम के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। 

13 अप्रैल 2022 : PIB विश्लेषण  :-Download PDF Here
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