27 जून 2022 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. भारत और मलेशिया ने रक्षा सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया: 
  2.  5 दिवसीय संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन केन्या और पुर्तगाल की मेजबानी में शुरू:
  3.  नीति आयोग ने इंडियाज बूमिंग गिग एंड प्लेटफॉर्म इकोनॉमी पर रिपोर्ट जारी की: 
  4.  शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2018-19 और 2019-20 के लिए जिला निष्पादन ग्रेडिंग सूचकांक (पीजीआई-डी) पर पहली रिपोर्ट जारी की:
  5.  “राष्ट्रीय राजमार्ग उत्कृष्टता पुरस्कार” 2021:
  6.  जर्मनी में जी-7 शिखर सम्मेलन में ‘बेहतर भविष्य में निवेश: जलवायु, ऊर्जा, स्वास्थ्य’ विषय पर  प्रधानमंत्री की टिप्पणी:
  7. अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस:
  8. ‘वन हेल्थ’:

1. भारत और मलेशिया ने रक्षा सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया: 

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

विषय: भारत के व्यापारिक हितों पर विभिन्न विकसित एवं विकासशील देशों की नीतियां और उनका प्रभाव।  

मुख्य परीक्षा: मलेशिया-भारत रक्षा सहयोग बैठक (मिडकॉम) ढांचे के तहत वर्तमान रक्षा सहयोग गतिविधियों तथा रक्षा तंत्र को और मजबूत बनाने के तरीकों पर विचार-विमर्श कीजिए।   

प्रसंग: 

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27 जून, 2022 को मलेशिया के वरिष्ठ रक्षा मंत्री वाईबी दातो ‘सेरी हिशामुद्दीन तुन हुसैन’ के साथ के वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से वार्ता की। 

उद्देश्य:

  •  बैठक के दौरान द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और रक्षा औद्योगिक सहयोग से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा की।

 

  • दोनों रक्षा मंत्रियों ने पहले से ही मजबूत भारत-मलेशिया रक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाने की इच्छा प्रकट की।

विवरण:  

  • दोनों नेताओं ने मौजूदा मलेशिया-भारत रक्षा सहयोग बैठक (मिडकॉम) ढांचे के तहत वर्तमान रक्षा सहयोग गतिविधियों तथा रक्षा तंत्र को और मजबूत बनाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। 

 

  • अगला मिडकॉम जुलाई 2022 में आयोजित होने वाला है और दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में मजबूत भागीदारी के लिए इस मंच का उपयोग करने का निर्णय लिया है ।

 

  • रक्षा मंत्री ने उन क्षेत्रों पर प्रकाश डाला, जिनमें भारतीय रक्षा उद्योग मलेशिया की सहायता कर सकता है। 

 

  • भारतीय रक्षा उद्योग की सुविधाओं और उत्पादों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने के लिए मलेशिया के वरिष्ठ अधिकारियों को भारत यात्रा का सुझाव दिया।

 

  • मलेशियाई वरिष्ठ रक्षा मंत्री ने शांति मिशन में महिला कर्मियों को शामिल करने की आवश्यकता जताई। दोनों पक्ष इस मुद्दे पर एक-दूसरे की सहायता करने पर सहमत हुए। 

 

  • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) संचालन के लिए क्षमता को उन्नत करने पर भी सहमति हुई।

2. 5 दिवसीय संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन केन्या और पुर्तगाल की मेजबानी में शुरू: 

सामान्य अध्ययन:2,3

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध,पारिस्थितिकी:

विषय: भारत के महासागरीय हितों को प्रभावित करने वाले वैश्विक सम्मलनों और भारत से जुड़े समझौते।  

प्रारंभिक परीक्षा: संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन।

मुख्य परीक्षा: महासागर सम्मेलन के निहितार्थ पर चर्चा कीजिए । 

प्रसंग: 

  • केन्या और पुर्तगाल की मेजबानी में 5 दिवसीय संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन शुरू हो गया हैं। 

उद्देश्य:

  •  दुनिया भर के 130 देशों के नेता दुनिया के महासागरों, समुद्रों और समुद्री संसाधनों की रक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौते की संभावना का पता लगाने के लिए पांच दिन विचार-विमर्श करेंगे।  

विवरण:  

  • इस बीच, 5 दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन, भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्‍‍व कर रहे केन‍द्रीय मंत्री डॉ. जितें‍द्र सिंह ने विभिन्न देशों के कई मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।

 

  • संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण बैठक से पहले डॉ.सिंह भारत की तरफ से ब्यान जारी करेंगे । 

 

  • इसमें विदेश मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान और मत्स्य पालन, पशुपालन आदि मंत्रालयों के भारतीय प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य भी मौजूद रहेंगे।

 

  • महासागर सम्मेलन एक निर्णायक समय पर हो रहा है क्योंकि दुनिया एसडीजी लक्ष्य 14 को प्राप्त करने के लिए संरचनात्मक परिवर्तनों और नवीन तथा हरित समाधानों की अनेक चुनौतियों का समाधान करने की कोशिश कर रही है,जिसमें महासागरों, समुद्रों और समुद्री संसाधनों के संरक्षण एवं स्‍‍थायी उपयोग का आह्वान किया गया है।

 

  • संयुक्त राष्ट्र कई मौकों पर जोर देकर कहा चुका है कि मानव गतिविधियों के परिणामस्वरूप महासागरों को गंभीर खतरों का सामना करना पड़ रहा है और दुनिया की आबादी बढ़ने तथा मानव गतिविधियों में वृद्धि के कारण इसके बदतर होने की संभावना है।

 

  • भारत ने जोर देकर कहा कि उसने पहले ही हरित प्रौद्योगिकी में एक बड़ी बढ़त हासिल कर ली है।   

 

  • 2030 के लक्ष्य के अनुसार देश के बिजली कोष में 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन को जोड़कर भारत के उत्सर्जन को 45 प्रतिशत तक कम करना है, इससे कार्बनडाइक्‍‍साइड उत्सर्जन लगभग एक बिलियन टन कम हो जाएगा।

 

  • भारत ने हाल ही में तटीय क्षेत्रों से प्लास्टिक और अन्य कचरे को साफ करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान चलाया और यह मिशन जल्द ही एक जन आंदोलन बन जाएगा।

 

  • भारत ने समुद्री और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, मैनग्रोव और मूंगा चट्टानों की रक्षा के लिए अनेक कार्यक्रम और नीतिगत उपाय किए हैं।

 3. नीति आयोग ने इंडियाज बूमिंग गिग एंड प्लेटफॉर्म इकोनॉमी पर रिपोर्ट जारी की: 

सामान्य अध्ययन: 3

आर्थिक विकास: 

विषय:शासन, पारदर्शिता इसके महत्वपूर्ण पहलू एवं सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं एवं उनका कमजोर वर्ग पर प्रभाव।   

प्रारंभिक परीक्षा: नीति आयोग।

मुख्य परीक्षा: यह रिपोर्ट गिग तथा प्लेटफॉर्म के काम के बारे में अनुसंधान और विश्लेषण को आगे बढ़ाने में किस प्रकार एक मूल्यवान ज्ञान संसाधन बन जाएगी। चर्चा कीजिए।   

प्रसंग: 

  • नीति आयोग ने ‘इंडियाज बूमिंग गिग एंड प्लेटफॉर्म इकोनॉमी’ शीर्षक नामक रिपोर्ट जारी की। 

उद्देश्य:

  • यह रिपोर्ट क्षेत्र की क्षमता को समझने और गिग तथा प्लेटफॉर्म के काम के बारे में अनुसंधान और विश्लेषण को आगे बढ़ाने के लिए एक मूल्यवान ज्ञान संसाधन बन जाएगी। 

विवरण:  

  • यह रिपोर्ट नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष श्री सुमन बेरी, मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी श्री अमिताभ कांत और विशेष सचिव डॉ. के. राजेश्वर राव ने जारी की।  

 

  • यह रिपोर्ट अपनी तरह का ऐसा पहला अध्ययन है जो भारत में गिग-प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था के बारे में व्यापक दृष्टिकोण और सिफारिशें की गई  है। 

 

  • यह रिपोर्ट क्षेत्र के मौजूदा आकार और रोजगार की सृजन क्षमता का अनुमान लगाने के लिए एक वैज्ञानिक पद्धति से संबंधित दृष्टिकोण उपलब्‍ध कराती है। 

 

  • यह इस उभरते हुए क्षेत्र में अवसरों और चुनौतियों के बारे में भी प्रकाश डालती है और सामाजिक सुरक्षा पहल के बारे में श्रेष्‍ठ वैश्विक प्रथाओं को भी प्रस्तुत किया गया। 

 

  • यह इस क्षेत्र में श्रमिकों की विभिन्न श्रेणियों के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन की रणनीतियों की रूपरेखा भी दर्शाती है। 

 

  • इस रिपोर्ट ने भारत में बढ़ते शहरीकरण, इंटरनेट, डिजिटल प्रौद्योगिकियों और स्मार्टफोन तक व्यापक पहुंच को देखते हुए इस क्षेत्र की रोजगार सृजन क्षमता के बारे में प्रकाश डाला हैं। 

 

  • इस रिपोर्ट की सिफारिशें मंत्रालयों, राज्य सरकारों, प्रशिक्षण प्रदाताओं, प्लेटफॉर्म कंपनियों और अन्य हितधारकों के लिए एक महत्‍वपूर्ण संसाधन के रूप में काम करेगी, ताकि ये इस क्षेत्र में विकास और रोजगार क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर सकें।

 

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष और सिफारिशें:

 

  • इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2020-21 में गिग अर्थव्‍यस्‍था में 77 लाख कर्मचारी कार्यरत थे। 

 

  • इनका गैर-कृषि कार्यबल में 2.6% या भारत के कुल कार्यबल में 1.5% योगदान है। 

 

  • गिग कार्यबल की संख्‍या बढ़कर वर्ष 2029-30 तक 2.35 करोड़ हो जाने की उम्मीद है। 

 

  • वर्ष 2029-30 तक भारत में गिग कर्मचारियों का गैर-कृषि कार्यबल में 6.7% या भारत में कुल आजीविका में 4.1% योगदान होने की उम्मीद है। 

 

  • वर्तमान में लगभग 47% गिग कार्य मध्यम कौशल रोजगार में है और लगभग 22% उच्च कौशल में त‍था लगभग 31% कम कौशल रोजगार में है। 

 

  • इस रूख से यह पता चलता है कि मध्यम कौशल में श्रमिकों की एकाग्रता धीरे-धीरे कम हो रही है और कम कौशल और उच्च कौशल में बढ़ रही है।

 

  • गिग-प्लेटफ़ॉर्म क्षेत्र की क्षमता का लाभ उठाने के लिए यह रिपोर्ट प्लेटफ़ॉर्म कर्मियों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए उत्‍पादों के माध्‍यम से वित्‍त तक पहुंच में तेजी लाने, क्षेत्रीय और ग्रामीण व्यंजन, स्ट्रीट फ़ूड आदि को बेचने के व्यवसाय में लगे स्व-नियोजित व्यक्तियों को प्लेटफ़ॉर्मों से जोड़ने की सिफारिश करती है ताकि उन्‍हें अपने उत्‍पादों को कस्बों और शहरों में, बड़े  बाजारों में बेचने के लिए सक्षम बनाया जा सके। 

 

  • यह रिपोर्ट प्लेटफॉर्म आधारित परिवर्तनकारी और परिणाम-आधारित कौशल के बारे में भी सुझाव देती है तथा कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए लैंगिक संवेदनशीलता और पहुंच जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से सामाजिक समावेश को बढ़ाने तथा सामाजिक सुरक्षा वर्ष 2020 में परिकल्पना के अनुसार साझेदारी मोड में सामाजिक सुरक्षा उपायों का विस्तार भी करती है। 

 

  • अन्य सिफारिशों में गिग और प्लेटफॉर्म कार्यबल के आकार का अनुमान लगाने के लिए एक अलग गणना करना और आधिकारिक गणना (आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण) के दौरान जानकारी एकत्र करना भी शामिल है ताकि गिग श्रमिकों की पहचान की जा सके।

 4. शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2018-19 और 2019-20 के लिए जिला निष्पादन ग्रेडिंग सूचकांक (पीजीआई-डी) पर पहली रिपोर्ट जारी की: 

सामान्य अध्ययन: 2

शासन: 

विषय:शिक्षा के क्षेत्र में विकास हेतु सरकारी नीतियां और उनमे हस्तक्षेप एवं डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे। 

प्रारंभिक परीक्षा: जिला निष्पादन ग्रेडिंग सूचकांक (पीजीआई-डी)।

मुख्य परीक्षा: पीजीआई-डी से जिला स्तर पर कमियों की पहचान करने और विकेन्द्रीकृत तरीके से उनके निष्पादन में सुधार करने में किस प्रकार मदद मिलेगी। टिप्पणी कीजिए।   

प्रसंग: 

  • शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने 2018-19 और 2019-20 के लिए जिला निष्पादन ग्रेडिंग सूचकांक (पीजीआई-डी) जारी किया है।  

उद्देश्य:

  • पीजीआई-डी व्यापक विश्लेषण के लिए एक इंडेक्स बनाकर जिला स्तर पर स्कूल शिक्षा प्रणाली के निष्पादन का आकलन करता है।  

विवरण:  

  • भारतीय शिक्षा प्रणाली लगभग 15 लाख स्कूलों, 97 लाख शिक्षकों और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के लगभग 26 करोड़ छात्रों के साथ दुनिया में सबसे बड़ी है। 

 

  • स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने राज्यों के लिए निष्पादन ग्रेडिंग सूचकांक (पीजीआई) तैयार किया और संदर्भ वर्ष 2017-18 से 2019-20 के लिए रिपोर्ट जारी की। 

 

  • राज्य पीजीआई की सफलता के आधार पर, जिले के लिए 83-संकेतक के आधार पर पीजीआई (पीजीआई-डी) को स्कूली शिक्षा में सभी जिलों के निष्पादन को ग्रेड प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। 

 

  • उम्मीद है कि पीजीआई-डी से राज्य के शिक्षा विभागों को जिला स्तर पर कमियों की पहचान करने और विकेन्द्रीकृत तरीके से उनके निष्पादन में सुधार करने में मदद मिलेगी। 

 

  • संकेतक-वार पीजीआई स्कोर उन क्षेत्रों को दर्शाता है जहां जिले को सुधार की जरूरत है। 

 

  • पीजीआई-डी सभी जिलों के सापेक्ष निष्पादन को एक समान पैमाने पर प्रदर्शित करेगा, जो उन्हें बेहतर निष्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

 

  • पीजीआई-डी संरचना में 83 संकेतकों में 600 अंकों की कुल भार आयु शामिल है, जिन्हें 6 श्रेणियों के तहत समूहों में रखा गया है। 

 

  • इन श्रेणियों को आगे 12 डोमेन में विभाजित किया गया है, अर्थात, शिक्षण परिणाम और गुणवत्ता (एलओ), एक्सेस परिणाम (एओ), शिक्षक उपलब्धता और व्यावसायिक विकास परिणाम (टीएपीडीओ), शिक्षण प्रबंधन (एलएम), शिक्षण संवर्धन क्रियाकलाप (एलईए), इंफ्रास्ट्रक्चर, सुविधाएं, छात्रों के अधिकार (आईएफ एंड एसई), स्कूल सुरक्षा और बाल संरक्षण (एसएस और सीपी), डिजिटल लर्निंग (डीएल), निधि का एकीकरण एवं इस्तेमाल (एफसीवी), सीआरसी निष्पादन में वृद्धि (सीआरसीपी), उपस्थिति निगरानी प्रणाली (एएमएस) और स्कूल नेतृत्व विकास (एसएलडी)।

 

  • पीजीआई-डी में जिलों को दस ग्रेडों में विभाजित किया गया है, यानी उस श्रेणी में अथवा कुल मिलाकर 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले जिलों के लिए उच्चतम ग्रेड ‘दक्ष’ प्रदान किया जाता है।

 

  • पीजीआई-डी में निम्नतम ग्रेड को आकांक्षा -3 कहा जाता है, जो कुल अंकों के 10 प्रतिशत तक के स्कोर के लिए है। 

 

  • पीजीआई-डी का अंतिम उद्देश्य जिलों को स्कूली शिक्षा में हस्तक्षेप के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में मदद करना है और इस प्रकार उच्चतम ग्रेड तक पहुंच में सुधार करना है।

 

  • पीजीआई-डी 2020-21 वर्तमान में संकलित किया जा रहा है। 

 

  • पीजीआई-डी 2018-19 और 2019-20 स्कूली शिक्षा की प्रगति की अंतर राज्य तुलना में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।

 5. “राष्ट्रीय राजमार्ग उत्कृष्टता पुरस्कार” 2021: 

सामान्य अध्ययन:  प्रारंभिक परीक्षा

समसामायकी,मिश्रित 

विषय:पुरस्कार।   

प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय राजमार्ग उत्कृष्टता पुरस्कार” 2021,उसकी विभिन्न श्रेणियां।

प्रसंग: 

  • देश में सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के दृष्टिकोण से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राजमार्ग निर्माण और रखरखाव प्रक्रिया में हितधारकों को प्रोत्साहित करने और उनमें स्‍वस्‍थ प्रतिस्‍पर्धा की भावना का सृजन करने के लिए वर्ष 2018 में ‘राष्ट्रीय राजमार्ग उत्कृष्टता पुरस्कार’ (एनएचईए) की शुरुआत की थी।

उद्देश्य:

  • इसका ध्‍येय देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली सड़क परिसंपत्तियों और टोल प्लाजाओं के लिए कंपनियों की पहचान करना तथा उन्‍हें पुरस्कार प्रदान करना है।

 

  • सड़क निर्माण, परिचालन और रखरखाव, नवाचार, हरियाली, राजमार्ग विकास के टोलिंग चरणों के साथ-साथ सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली और अच्‍छी गुणवत्ता वाली कंपनियों को मान्‍यता देना है। 

 

  • पुरस्कारों का उद्देश्य विश्‍व स्‍तर की पर्यावरणीय स्थिरता और स्वच्छता के कारकों पर अधिक ध्यान देते हुए  नवाचारी निर्माण प्रक्रियाओं के माध्यम से विश्व स्तरीय सड़क बुनियादी ढांचा, राजमार्गों, टोल प्लाजा, एक्सप्रेस-वे, पुलों, सुरंगों का निर्माण करना है।  

विवरण: 

 

  • ये पुरस्कार कई श्रेणियों में दिए जाते हैं। 

 

  • यह उन दिग्‍गजों को दिए जाते हैं जिन्होंने निर्माण और परिचालन दिशा-निर्देशों का उचित पालन किया है और गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और नवाचारों तथा स्‍थाई प्रक्रियाओं को भी नियोजित किया है। 

 

  • इस उद्देश्य के लिए विस्तृत, श्रेणी-निर्दिष्‍ट मूल्यांकन ढांचे विकसित किए गए हैं। 

 

  • वर्ष 2018 में पहले पुरस्कार चक्र में, 5  श्रेणियां (निर्माण प्रबंधन में उत्कृष्टता, परिचालन और रखरखाव में उत्कृष्टता, राजमार्ग सुरक्षा में उत्कृष्टता, टोल प्लाजा प्रबंधन और नवाचार में उत्कृष्टता) थी।

 

  • वर्ष 2019 में दूसरे पुरस्कार चक्र में, दो नई श्रेणियां- हरित राजमार्ग और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उत्कृष्ट कार्य शामिल की गई। 

 

  • वर्ष 2020 में एक अतिरिक्त विशेष पुरस्कार श्रेणी, पुल एवं सुरंग (ब्रिज एंड टनल) को 2019 में शामिल किया गया था। 

 

  • चौथे पुरस्कार चक्र के लिए दो नई श्रेणियों – पुल निर्माण और सुरंग निर्माण की भी शुरूआत की गई है। 

 

वर्ष 2021 पुरस्‍कार चक्र के लिए विभिन्‍न श्रेणियां इस प्रकार हैं:

 

  • परियोजना प्रबंधन में उत्कृष्टता: इसमें परियोजना के कार्यान्वयन को दो उपश्रेणियों (ईपीसी और पीपीपी) के साथ समय पर उपलब्धि, संतुलित बजट और गुणवत्ता मानकों से कोई समझौता न करते हुए सभी परियोजना लक्ष्‍यों के कुशल निष्पादन को मान्‍यता दी गई है।

 

  • राजमार्ग सुरक्षा में उत्कृष्टता: इसमें परियोजना के कार्यान्वयन के तरीके के आधार पर दो उपश्रेणियों (पहाड़ी और मैदानी इलाके) के साथ सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और निवारक उपाय और आपातकालीन जवाबी सेवाओं के लिए किए गए प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

 

  • परिचालन और रखरखाव में उत्कृष्टता: इसमें मरम्मत कार्यों का तेजी से और सुचारू रूप से निष्पादन, आवधिक निरीक्षण, विशेष संरचनाओं का रखरखाव, यात्रा अनुभव में बेहतरीन गुणवत्ता और रास्‍ते के फर्श (फुटपाथ) की उचित रूप से चिकनी सतह के साथ निष्‍पादित परियोजनाओं को मान्यता दी जाती है। 

 

  • रास्‍ते के फर्श के प्रकार के आधार पर दो श्रेणियां हैं- कठोर और लचीला फुटपाथ।

 

  • टोल प्रबंधन में उत्कृष्टता: टोल पर यातायात और सेवाओं के कुशल प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

 

  • नवाचार: इसमें नई निर्माण तकनीक या संरचनात्मक और ज्यामितीय डिजाइन को तैयार करने या अपनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

 

  • हरित राजमार्ग: इसमें प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा या उसमें वृद्धि करने और/या परियोजना विकास के प्रभावों को कम करने के लिए अपनाई गई नवाचारी प्रथाओं के लिए किए गए अनुकरणीय प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

 

  • चुनौतीपूर्ण स्थिति में उत्कृष्ट कार्य: इसमें चुनौतीपूर्ण माहौल में काम करने वाले छूटग्राही/ठेकेदार के प्रयासों को मान्‍यता दी जाती है।

 

  • पुल निर्माण: इसमें इस बात को महत्‍व दिया जाता है कि क्या गुणवत्ता, सुरक्षा वृद्धि, समयबद्धता और लागत प्रभावी कार्य में ढांचागत विकास के लिए किए गए अनूठे उपाय किए गए हैं।

 

  • सुरंग निर्माण: इसमें उन परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है जिनके निर्माण में ऐसी विशिष्‍ट तकनीकी अपनाई गई है जिससे परियोजना की गुणवत्ता, समयबद्धता, लागत-प्रभावशीलता, सुरक्षा और/या दक्षता में वृद्धि होती है।

6. जर्मनी में जी-7 शिखर सम्मेलन में ‘बेहतर भविष्य में निवेश: जलवायु, ऊर्जा, स्वास्थ्य’ विषय पर सत्र में प्रधानमंत्री की टिप्पणी: 

सामान्य अध्ययन: 2

अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:

विषय : भारत के हितों पर विभिन्न अंर्तष्ट्रीय वित्त संगठनों एवं विकसित और विकासशील देशों की नीतियां और राजनीति का प्रभाव। 

प्रारंभिक परीक्षा: जी-7 सम्मेलन । 

मुख्य परीक्षा:  जी-7 नेताओं के सम्मेलन का जलवायु परिवर्तन में भूमिका एवं महत्व।  

प्रसंग: 

  • प्रधानमंत्री मोदी G-7 समिट में हिस्सा लेने जर्मनी पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री ने जी-7 के शिखर सम्मेलन के एक सत्र में हरित विकास, स्वच्छ ऊर्जा, सतत जीवनशैली और वैश्विक कल्याण के लिए भारत के प्रयासों को रेखांकित किया। 

उद्देश्य:

  • प्रधानमंत्री ने कहा कि जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं के प्रति भारत का संकल्प उसके प्रदर्शन से स्पष्ट है और उम्मीद जताई कि जी-7 के समृद्ध देश जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने में भारत के प्रयासों का समर्थन करेंगे। 

 

  • उन्होंने भारत में उभर रही स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विशाल बाजार का फायदा उठाने के लिए भी देशों को आमंत्रित किया।   

विवरण: 

 जलवायु, ऊर्जा और स्वास्थ्य पर चर्चा की:

 

  • जी-7 में पहले सत्र में पीएम मोदी ने जलवायु, ऊर्जा और स्वास्थ्य पर बात की, जबकि दूसरे सत्र में खाद्य सुरक्षा और लैंगिक समानता के मुद्दों को संबोधित किया, जिसमें भारत के महिला नेतृत्व वाले विकास दृष्टिकोण पर जोर दिया गया। 

 

भारत का जलवायु प्रतिबद्धताओं के प्रति समर्पण:

 

  • प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक भ्रांति है कि गरीब देश पर्यावरण को अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। 

 

  • भारत का 1000 साल से अधिक का इतिहास इस दृष्टिकोण का पूरी तरह से खंडन करता है। 

 

  • अब आजाद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। दुनिया की 17 फीसदी जनसंख्या भारत में निवास करती है लेकिन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में हमारा योगदान मात्र 5 प्रतिशत है। 

 

  • इसके पीछे मुख्य कारण हमारी जीवनशैली है,जो प्रकृति के साथ सह अस्तित्व के सिद्धांत पर आधारित है।  

 

  • जर्मनी के श्लॉस एल्मौ में हो रहे जी-7 के ‘बेहतर भविष्य में निवेश : जलवायु, ऊर्जा, स्वास्थ्य’ सत्र में पीएम ने जोर देकर कहा कि जलवायु प्रतिबद्धताओं के प्रति समर्पण उसके प्रदर्शन से स्पष्ट होता है। 

 

  • हरित विकास, स्वच्छ ऊर्जा, सतत जीवनशैली और वैश्विक भलाई के लिए भारत के प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने तय समय से नौ साल पहले ही गैर जीवाश्म स्रोतों से 40 फीसदी ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य को हासिल कर लिया। 

 

  • पीएम ने कहा कि पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पांच महीने पहले हासिल किया गया है। 

 

  • भारत में दुनिया का पहला पूरी तरह से सौर ऊर्जा संचालित एयरपोर्ट है। इस दशक में भारत की विशाल रेल प्रणाली परंपरागत ऊर्जा में नेट जीरो हो जाएगी। 

 

  • उन्होंने कहा कि जब भारत जैसा विशाल देश ऐसी महत्वाकांक्षा दिखाता है तो अन्य विकासशील देशों को भी प्रेरणा मिलती है। 

 

  • हमें उम्मीद है कि जी-7 के अमीर देश भारत के प्रयासों का समर्थन करेंगे। 

 

  • भारत में स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के लिए विशाल बाजार उभर रहा है। जी-7 देश इस क्षेत्र में रिसर्च, इनोवेशन और विनिर्माण में निवेश कर सकते हैं। 

 

  • उन्होंने कहा कि भारत हर नई तकनीक के लिए सुविधाएं प्रदान कर सकता है, वह उस तकनीक को पूरी दुनिया के लिए किफायती बना सकता है। 

 

ऊर्जा के उपयोग पर केवल अमीरों का विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए:

 

  • पीएम ने जोर देकर कहा कि ऊर्जा के उपयोग पर केवल अमीरों का विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए और एक गरीब परिवार का भी ऊर्जा पर समान अधिकार होता है। 

 

  • उन्होंने कहा कि आज जब भूराजनीतिक तनावों के चलते ऊर्जा की लागत आसमान छू रही है तो इस बात को याद रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है। 

 

  • इस सिद्धांत से प्रेरणा लेकर हमने भारत में घर-घर एलईडी बल्ब और स्वच्छ रसोई गैस पहुंचाई और दिखाया कि गरीबों के लिए ऊर्जा सुनिश्चित करते हुए लाखों टन कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। 

 

कोरोना में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल के रचनात्मक तरीके खोजे:

 

  • स्वास्थ्य क्षेत्र के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि मानव और प्लेनेट स्वास्थ्य आपस में जुड़े हुए हैं। इसलिए हमने वन वर्ल्ड, वन हेल्थ के दृष्टिकोण को अपनाया है। 

 

  • कोरोना महामारी के दौरान भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए कई रचनात्मक तरीके खोजे। 

 

  • जी-7 देश इन इनोवेशन को अन्य विकासशील देशों में ले जाने में भारत की मदद कर सकते हैं। हाल ही में हमने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया। 

 

  • कोरोना संकट के समय योग दुनियाभर के लोगों के लिए स्वास्थ्य निवारक के लिए एक बड़ा माध्यम बना। इससे कई लोगों को अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिली। 

 

ट्रिपल पी लोगों की संख्या बढ़ाने की लेनी होगी जिम्मेदारी:

 

  • उन्होंने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी के मूल सिद्धांत भारतीय संस्कृति और जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। 
    • पिछले साल ग्लासगो में लाइफ: लाइफस्टाइल फॉर एनवायरमेंट के लिए एक आंदोलन का आह्वान किया था। 

 

  • इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस पर हमने लाइफ अभियान के लिए वैश्विक पहल की शुरुआत की है। इसका लक्ष्य पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली को प्रोत्साहित करना है। 

 

  • हम इस आंदोलन के फॉलोअर्स को ट्रिपल पी यानी ‘प्रो प्लेनेट पीपुल’ कह सकते हैं। 

 

  • हम सभी को अपने देशों में ऐसे ट्रिपल पी लोगों की संख्या बढ़ाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारा सबसे बड़ा योगदान होगा। 

पृष्ठ्भूमि:

 जी-7 – सात देशों का समूह:

 

  • जी-7 दुनिया के सात सबसे अमीर देशों का समूह है। 

 

  • इसकी अध्यक्षता अभी जर्मनी कर रहा है। इसमें ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका शामिल है। 

 

  • इसमें अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, सेनेगल, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों को भी आमंत्रित किया गया है।

 

      प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

7. अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस:

 

  • अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के अवसर पर केन्द्रीय एमएसएमई मंत्री ने कहा है कि  एमएसएमई मंत्रालय एमएसएमई के समग्र विकास और आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। 

 

  • कोविड-19 महामारी और उसके बाद यूक्रेन युद्ध से उत्पन्न प्रतिकूल परिस्थितियों से उबरते हुए, एमएसएमई क्षेत्र ने न केवल अपने व्यावसायिक कार्यों को डिजिटाइज़ किया, बल्कि अपनी उत्पादन लागत को भी कम किया और आयात को कम करने वाले आवश्यक उत्पादों का घरेलू स्‍तर पर उत्पादन करके एक नई परंपरा शुरू की और सरकार की विभिन्‍‍न योजनाओं की सहायता से इन उत्पादों का निर्यात शुरू किया। 

 

  • एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था और निरन्तर वैश्विक विकास की रीढ़ हैं। 

 

  • एमएसएमई स्थानीय समुदायों को आजीविका के अवसर प्रदान करने में योगदान दे रहे हैं। 

 

  • इन लक्ष्यों को प्राप्त करने और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए, हर साल 27 जून को संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में “अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस” मनाया जाता है।

 

  • इस वर्ष एमएसएमई दिवस का विषय है “लचीलापन और पुनर्निर्माण: निरन्तर विकास के लिए एमएसएमई”।

8. ‘वन हेल्थ’:

 

  • ‘वन हेल्थ’ को प्रायोगिक तौर पर बेंगलुरु में शुरू किया जायेगा। 

 

  • मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अधीन पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने ‘वन-हेल्थ’ स्वरूप के जरिये पशुओं, मनुष्यों और पर्यावरण सम्बंधी स्वास्थ्य की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिये हितधारकों को एक मंच पर लाने की पहल की है। 

 

  • बिल एवं मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) के सहयोग से डीएएचडी और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) क्रियान्वयन साझीदार के तौर पर कर्नाटक तथा उत्तराखंड राज्यों में ‘वन-हेल्थ’ प्रारूप को लागू कर रहे हैं।

 

  • डीएएचडी एक राष्ट्रीय ‘वन-हेल्थ’ रोडमैप विकसित करेगा, जो इस पहल से मिलने वाले अनुभवों पर आधारित होगा। 

 

  • इसके जरिये पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले संक्रामक रोगों को भविष्य में रोकने में मदद मिलेगी। 

 

  • इस पहल से बेहतर तरीके से रोगों से निपटने की प्रणाली तैयार होगी और उसका प्रबंधन संभव होगा। 

 

  • साथ ही विश्वभर में अपनाई जाने वाले उत्कृष्ट तरीकों को अपनाया जायेगा।  

लिंक किए गए लेख में 26 June 2022 का पीआईबी सारांश और विश्लेषण पढ़ें।

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