31 मई 2022 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. एनटीपीसी ने जैव विविधता नीति जारी की:
  2. रक्षा मंत्रालय ने बीडीएल के साथ 2,900 करोड़ रुपये से अधिक के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए:
  3. वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत का वस्त्र निर्यात सबसे अधिक:
  4. सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण- शासन के 8 साल:
  5. राष्ट्रीय आय के अनंतिम अनुमान:
  6. नैनो मिश्र धातुओं, अर्धचालकों और दुर्लभ पृथ्वी धातुओं के लिए नई सामग्री की भविष्यवाणी करने में मशीन लर्निंग सहायक:
  1. एनटीपीसी ने जैव विविधता नीति जारी की:

    सामान्य अध्ययन: 3

    पर्यावरण:

    विषय: पर्यावरण प्रदूषण,निम्नीकरण,जैव विविधता का संरक्षण के लिए व्यापक दृष्टिकोण और मार्गदर्शक सिद्धांत। 

    प्रारंभिक परीक्षा: जैव विविधता नीति-2022 ।

    प्रसंग: 

    • भारत के सबसे बड़े एकीकृत ऊर्जा उत्पादक राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम -एनटीपीसी लिमिटेड ने जैव विविधता के संरक्षण, उद्धार और वृद्धि के लिए नवीनीकृत जैव विविधता नीति-2022 जारी की है।

    उद्देश्य:

    • यह जैव विविधता नीति एनटीपीसी की पर्यावरण नीति का एक अभिन्न अंग है।
      • इसका उद्देश्य पर्यावरण और स्थिरता नीतियों के अनुरूप हैं।
      • इसके अलावा, इस नीति को एनटीपीसी समूह के सभी पेशेवरों को इस क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करने के लिए भी तैयार किया गया है।

    विवरण:

    • प्रमुख ऊर्जा उत्पादक एनटीपीसी का उद्देश्य अपनी मूल्य श्रृंखला में जैव विविधता की अवधारणा को शामिल करना है और अपनी व्यावसायिक इकाइयों और उनके आसपास की विविधता को सुनिश्चित करने के लिए जैव विविधता का स्थायी प्रबंधन करना है।
    • इस नीति का उद्देश्य कंपनी की व्यावसायिक गतिविधियों से अलग हटकर जैव विविधता के स्थानीय खतरों को कम भी है।
    • एनटीपीसी 2018 में जैव विविधता नीति जारी करने वाला पहला सार्वजनिक उपक्रम था। उसी वर्ष एनटीपीसी, भारत व्यापार और जैव विविधता पहल (आईबीबीआई) का सदस्य बन गया था।
    • एनटीपीसी विशेषज्ञों के सहयोग से परियोजना-विशिष्ट और राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण के माध्यम से जैव विविधता के बारे में स्थानीय समुदायों और कर्मचारियों को जागरूक कर रहा है।
    • एनटीपीसी जैव विविधता के क्षेत्र में स्थानीय समुदायों, संगठनों, नियामक एजेंसियों और राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय ख्याति के अनुसंधान संस्थानों के साथ भी सहयोग कर रहा है।
    • इसके अलावा, एनटीपीसी अपनी परियोजनाओं केनिष्पादन के दौरान पर्यावरण, वन, वन्यजीव, तटीय क्षेत्र और हरित क्षेत्र से संबंधित नियमों और विनियमों का पालन भी कर रहा है।
    • एनटीपीसी ने आंध्र प्रदेश के समुद्र तट में ओलिव रिडले कछुओं के संरक्षण के लिए आंध्र प्रदेश वन विभाग के साथ पंचवर्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
      • 4.6 करोड़ रुपये के वित्तीय योगदान के साथ एनटीपीसी के हस्तक्षेप के बाद से समुद्र के पानी में हैचिंग की संख्या में लगभग 2.25 गुना वृद्धि हुई है।
  2. रक्षा मंत्रालय ने बीडीएल के साथ 2,900 करोड़ रुपये से अधिक के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए:

    सामान्य अध्ययन: 3

    सुरक्षा:

    विषय: सेना के विभिन्न क्षेत्रों में विकास हेतु नीतियां और हस्तक्षेप एवं डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे। 

    प्रारंभिक परीक्षा: एस्ट्रा एमके-आई बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर टू एयर मिसाइल सिस्टम । 

    प्रसंग: 

    • रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना के लिए इंडियन-आईडीडीएम श्रेणी के तहत 2,971 करोड़ रुपये की लागत से एस्ट्रा एमके-आई बियॉन्ड विजुअल रेंज (बीवीआर) एयर टू एयर मिसाइल (एएएम) और संबंधित उपकरण की आपूर्ति के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) के साथ 31 मई, 2022 को एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।

    उद्देश्य:

    • यह परियोजना बीडीएल में बुनियादी ढांचे और परीक्षण सुविधाओं के विकास के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगी।
    • यह एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी में कम से कम 25 वर्षों तक एमएसएम के लिए कई अवसर भी पैदा करेगी।
    • यह परियोजना अनिवार्य रूप से ‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रतीक है और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम है ।

    विवरण:

    • अभी तक इस श्रेणी की मिसाइल को स्वदेशी रूप से बनाने की तकनीक उपलब्ध नहीं थी।
      • एस्ट्रा एमके-आई बीवीआर एएएम को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है, जो विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करते हुए बियॉन्ड विजुअल रेंज के साथ-साथ क्लोज कॉम्बैट एंगेजमेंट के लिए भारतीय वायु सेना (आईएएफ) द्वारा जारी की गई स्टाफ आवश्यकताओं पर आधारित है।
      • बीवीआर क्षमता के साथ हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अपने लड़ाकू विमानों को बड़ी स्टैंड ऑफ रेंज प्रदान करती है जो दुश्मन के वायु रक्षा उपायों के सामने खुद को उजागर किए बिना शत्रु दल के विमानों को बेअसर कर सकती है।
      • यह मिसाइल तकनीकी और आर्थिक रूप से ऐसी कई आयातित मिसाइल प्रणालियों से बेहतर है।
    • एस्ट्रा एमके-आई मिसाइल और इसके प्रक्षेपण, जमीनी तैयारी तथा परीक्षण के लिए सभी संबद्ध प्रणालियों को डीआरडीओ ने आईएएफ के समन्वय से विकसित किया है।
    • यह मिसाइल, जिसका आईएएफ द्वारा पहले ही सफल परीक्षण किए जा चुके हैं, पूरी तरह से सुखोई 30 एमके-आई लड़ाकू विमान से एकीकृत है और इसे हल्के लड़ाकू विमान (तेजस) सहित चरणबद्ध तरीके से अन्य लड़ाकू विमानों के साथ इसे जोड़ा जाएगा। भारतीय नौसेना मिग 29के लड़ाकू विमान में इस मिसाइल को जोड़ेगी।
  3. वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत का वस्त्र निर्यात सबसे अधिक:

    सामान्य अध्ययन: 3

    अर्थव्यवस्था: 

    विषय: भारत के व्यापारिक हितों पर विकास के लिए नीतियां,हस्तक्षेप,उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे। 

    प्रारंभिक परीक्षा: भारत का वस्त्र निर्यात। 

    प्रसंग: 

    • भारत ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में हस्तशिल्प सहित कपड़ा व परिधान (टीएंडए) का 44.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर निर्यात किया है।

    उद्देश्य:

    •  यह आंकड़ा का अब तक का सबसे अधिक है।
      • इसमें वित्तीय वर्ष 2020-21 और वित्तीय वर्ष 2019-20 में संबंधित आंकड़ों की तुलना में क्रमशः 41 फीसदी और 26 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

    विवरण:

    • अमेरिका 27 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे अधिक निर्यात किया गया। इसके बाद यूरोपीय संघ (18 फीसदी), बांग्लादेश (12 फीसदी) और संयुक्त अरब अमीरात (6 फीसदी) का स्थान है।
    • उत्पाद श्रेणियों के संदर्भ में, 2021-22 के दौरान क्रमशः 39 फीसदी हिस्सेदारी के साथ कपास वस्त्रों का निर्यात 17.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
    • इसमें वित्तीय वर्ष 2020-21 और वित्तीय वर्ष 2019-20 की तुलना में 54 फीसदी और 67 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
    • वहीं, वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान रेडी-मेड गारमेंट्स का निर्यात 36 फीसदी हिस्सेदारी के साथ 16 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
    • यह वित्तीय वर्ष 2020-21 और वित्तीय वर्ष 2019-20 की तुलना में क्रमशः 31 फीसदी और 3 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
    • मानव निर्मित वस्त्र निर्यात 14 फीसदी हिस्सेदारी के साथ 6.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो कि वित्तीय वर्ष 2020-21 और वित्तीय वर्ष 2019-20 की तुलना में 2021-22 के दौरान क्रमशः 51 फीसदी और 18 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
    • वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान हस्तशिल्प का निर्यात 5 फीसदी हिस्सेदारी के साथ 2.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
    • इसमें वित्तीय वर्ष 2020-21 और वित्तीय वर्ष 2019-20 की तुलना में क्रमशः 22 फीसदी और 16 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई|
  4. सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण- शासन के 8 साल:

    सामान्य अध्ययन: 2

    शासन: 

    विषय: शासन के महत्वपूर्ण पहलू, पारदर्शिता एवं जवाबदेही, प्रतिरूप, सफलताएं और सीमाएं। 

    मुख्य परीक्षा: लाभ के अंतिम छोर तक सुपुर्दगी में सुधार लाने और देशभर में विकास के नतीजों को बढ़ाने के लिए सभी क्षेत्रों में ऐतिहासिक नीतियों और पहलों को लागू किया गया है इन नीतियों के समाज पर पड़े प्रभावों की व्याख्या कीजिए।

    प्रसंग: 

    • सरकार के पिछले 8 साल ’रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म’ अर्थात “सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन पर आधारित रहे हैं।

    उद्देश्य:

    • लाभ को अंतिम छोर तक पहुँचाने और देशभर में विकास को बढ़ाने के लिए सभी क्षेत्रों से सम्बंधित नीतियों और पहलों को लागू किया गया है।
    • गरीबों की सेवा, हाशिए पर रह रहे लोगों की सुरक्षा, किसानों का कल्याण सुनिश्चित करने, जीवन की सुगमता बढ़ाने, बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, राष्ट्रीय सुरक्षा में सुधार,प्रौद्योगिकी प्रेरित विकास को बढ़ावा देने और व्यवसाय को सुगम बनाने के लिए कई पहलें शुरू की गईं हैं।

    विवरण:

    • नीतियों में बुनियादी ढांचे में सुधार, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, किसानों के कल्याण को सुनिश्चित करने और हाशिए पर रहने वालों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
      • इसके अलावा, भारत ने युवाओं की अगुवाई में प्रौद्योगिकी प्रेरित विकास में अभूतपूर्व प्रगति की है और देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी व्यवसाय को आसान बनाने को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से अनेक सुधार किए गए हैं।
      • इसके अतिरिक्त, महिला केंद्रित नीतियों ने रक्षा जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने में प्रमुख भूमिका निभाई है।
    • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, पीएम स्वनिधि योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजनाएं सभी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने और गरीबों के जीवन स्तर में सुधार लाने में सहायक रही हैं।
    • पीएम जन धन योजना के तहत 45 करोड़ से अधिक लोगों को औपचारिक बैंकिंग क्षेत्र में लाया गया, जिससे लाभार्थियों को 22.6 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) किया गया ।
    • इसके अलावा जब देश में लॉकडाउन लगा तब पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी सरकारी योजनाओं के तहत 80 करोड़ से अधिक वंचित लोगों को मुफ्त राशन का वितरण किया गया।
    • वहीं, पीएम किसान जैसी पहल देशभर में 11 करोड़ से अधिक किसानों को हर साल 6,000 रुपये प्रदान करके कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में परिवर्तनकारी रही है।
    • पीएम फसल बीमा योजना के तहत बीमा दावों के लिए 1.2 लाख करोड़ रुपये का वितरण किया गया है और खेत से बाजार तक लॉजिस्टिक्स में सुधार के लिए 167 किसान रेल मार्गों का परिचालन किया गया है।
    • महामारी के दौरान, कई ऑक्सीजन संयंत्रों और पीपीई निर्माण क्षमता को शून्य से बढ़ाकर दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुविधाओं में भी शामिल किया गया।
    • टीकाकरण देश के दूर-दराज के हिस्सों तक हो सके, यह सुनिश्चित करने के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया गया और दुनिया में पहली बार पूरे टीकाकरण अभियान को डिजिटल किया गया।
    • इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवा को आर्थिक विकास के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देखते हुए सरकार ने दुनिया की सबसे बड़ी बीमा कवरेज योजना- आयुष्मान भारत योजना शुरू की, जिसमें 3.26 करोड़ नागरिकों ने मुफ्त चिकित्सा उपचार का लाभ उठाया।
    • सस्ती दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए देश में 8,700 से अधिक जनऔषधि केंद्र स्थापित किए गए।
    • इसके अतिरिक्त, देशभर में स्वास्थ्य सेवा वितरण की बढ़ती आवश्यकता को स्वीकार करते हुए सरकार ने 6 नए एम्स चालू किए और देश में मेडिकल कॉलेजों में 55 फीसदी की वृद्धि की।
    • ईज ऑफ लिविंग के लिए बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर – सरकार ने पिछले 8 वर्षों में देश में जीवन को सुगम बनाने के लिए भी समर्पित रूप से काम किया है।
    • अटल सुरंग, बोगीबील ब्रिज और सिक्किम तथा त्रिपुरा में हवाई अड्डे जैसी परियोजनाएं,सब उपर्युक्त प्रगति के मिसाल हैं।
    • इसके अलावा,जीएसटी जैसे ऐतिहासिक सुधारों ने परिवारों को उनके मासिक खर्च का 4 फीसदी तक कम करने में मदद करके करदाताओं का बोझ कम किया है।
    • डिजिटल इंडिया पहल के माध्यम से डिजिटलीकरण पर ध्यान केंद्रित करते हुए, कर दाखिल करने, बीमा दावों और सरकारी कागजी कार्रवाई जैसी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित एवं सरल बनाया गया है।
    • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस – जहां वैश्विक व्यापार सुस्त रहा, वहीं भारत में एफडीआई में वृद्धि हुई।
    • वित्त वर्ष 2011-22 में 83 अरब अमरीकी डालर का अब तक का सबसे अधिक एफडीआई देश में निवेशक और व्यापार के अनुकूल नीतियों के लिए एक वसीयतनामा था।
    • उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं, प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, दुनिया में सबसे कम कॉर्पोरेट टैक्स दरों में से एक और फास्ट ट्रैकिंग निवेश के लिए राष्ट्रीय एकल खिड़की, देश में एफडीआई बढ़ाने में योगदान देने वाली कई पहलें शुरू की गई ।
    • इसके अलावा, तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में, भारत ने 100 यूनिकॉर्न और 70,000 से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप का उद्भव देखा।
    • हर हफ्ते एक विश्वविद्यालय खुलने और हर साल एक नया आईआईटी और आईआईएम चालू होने के साथ देश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है।
  5. राष्ट्रीय आय के अनंतिम अनुमान:

    सामान्य अध्ययन: 3

    अर्थव्यवस्था: 

    विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना से संबंधित मुद्दे, संसाधन जुटाना, विकास और रोजगार । 

    प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ)।

    प्रसंग: 

    • राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने राष्ट्रीय आय, 2021-22 के अनंतिम अनुमान (पीई) के साथ-साथ जनवरी-मार्च (क्यू 4) तिमाही, 2021-22 के सकल घरेलू उत्पाद के तिमाही अनुमान जारी किए है।

    उद्देश्य:

    •  इसके साथ ही राष्ट्रीय खातों के जारी कैलेंडर के अनुसार स्थिर (2011-12) और वर्तमान कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद के व्यय घटकों के संगत अनुमान भी जारी किये जा रहे हैं।

    विवरण:

    • वर्ष 2021-22 में स्थिर (2011-12) कीमतों पर वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वर्ष 2020-21 में ₹ 135.58 लाख करोड़ के पहले संशोधित अनुमान, जिसे 31.01.2022 को जारी किया गया था, के मुकाबले ₹ 147.36 लाख करोड़ रहा ।
    • 2020-21 में 6.6 प्रतिशत के संकुचन की तुलना में 2021-22 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि 8.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
    • वर्ष 2021-22 के लिए नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद या वर्तमान कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद 2020-21 में ₹ 198.01 लाख करोड़ के मुकाबले ₹ 236.65 लाख करोड़ का स्तर प्राप्त करने का अनुमान है और इस प्रकार इसमें 19.5 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गयी है।
    • 2021-22 में स्थिर (2011-12) कीमतों पर जीडीपी 2020-21 के ₹ 39.18 लाख करोड़ के मुकाबले ₹ 40.78 लाख करोड़ होने का अनुमान है और इस प्रकार इसमें 4.1 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गयी है।
    • राष्ट्रीय आय के अग्रिम और अनंतिम अनुमान बेंचमार्क-संकेतक पद्धति का उपयोग करके संकलित किए जाते हैं, यानी पिछले वर्ष के अनुमानों को बेंचमार्क वर्ष (इस मामले में 2020-21) के रूप में संदर्भित किया जाता है।
    • इन अनुमानों को इस वित्तीय वर्ष में प्रासंगिक संकेतकों पर नवीनतम जानकारी को शामिल करते हुए संशोधित किया गया है।
    • (i) औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP), (ii) निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र में सूचीबद्ध कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन, (iii) तीसरा अग्रिम फसल उत्पादन का अनुमान (iv) प्रमुख पशुधन उत्पादों का उत्पादन, (v) मछली उत्पादन, (vi) सीमेंट और स्टील का उत्पादन/खपत, (vii) रेलवे के लिए शुद्ध टन किलोमीटर और यात्री किलोमीटर, (viii) नागरिक उड्डयन द्वारा यात्री और कार्गो यातायात का संचालन, (ix) प्रमुख समुद्री बंदरगाहों पर कार्गो यातायात प्रबंधन, (x) वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री, (xi) बैंक जमा और क्रेडिट, (xii) वित्तीय वर्ष के लिए उपलब्ध केंद्र और राज्य सरकारों के खाते, आदि संकेतकों का उपयोग करके सेक्टर-वार अनुमानों को संकलित किया गया है।
    • सकल घरेलू उत्पाद संकलन के लिए उपयोग किए जाने वाले कुल कर राजस्व में गैर-जीएसटी के साथ-साथ जीएसटी राजस्व भी शामिल है।
      • केंद्र सरकार के 2022-23 के वार्षिक वित्तीय विवरण में उपलब्ध कर राजस्व के संशोधित अनुमान 2021-22 और लेखा महानियंत्रक (सीजीए) और भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (सीएजी) की वेबसाइटों पर उपलब्ध नवीनतम जानकारी) का उपयोग मौजूदा कीमतों पर उत्पादों पर करों के आकलन के लिए किया गया है।
      • स्थिर कीमतों पर उत्पादों पर करों को संकलित करने के लिए, कर योग्य वस्तुओं और सेवाओं की मात्रा वृद्धि का उपयोग करके मात्रा का अनुमान लगाया जाता है।
      • मार्च 2022 तक अधिकांश राज्यों द्वारा सब्सिडी पर किए गए व्यय के साथ-साथ 2021-22 के लिए राज्य-वार बीई प्रावधान का उपयोग; राज्यों की उत्पाद सब्सिडी को संकलित करने के लिए किया गया था।
      • केंद्र के लिए राजस्व व्यय, ब्याज भुगतान, सब्सिडी आदि पर उपलब्ध नवीनतम जानकारी और 2021-22 के लिए राज्यों के बजट दस्तावेजों के विस्तृत विश्लेषण के आधार पर भी सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (जीएफसीई) के आकलन के लिए उपयोग किया गया था।
    • बेहतर डेटा कवरेज, वास्तविक कर संग्रह और सब्सिडी पर किए गए व्यय, स्रोत एजेंसियों द्वारा किए गए डेटा संशोधन आदि का इन अनुमानों के बाद के संशोधनों पर प्रभाव पड़ेगा।
    • इसलिए, रिलीज कैलेंडर के अनुसार, उपरोक्त कारणों के लिए अनुमानों में संशोधन होने की संभावना है। उपयोगकर्ताओं को आंकड़ों की व्याख्या करते समय इन बातों का भी ध्यान रखना चाहिए।
  6. नैनो मिश्र धातुओं, अर्धचालकों और दुर्लभ पृथ्वी धातुओं के लिए नई सामग्री की भविष्यवाणी करने में मशीन लर्निंग सहायक:

    सामान्य अध्ययन: 3

    विज्ञानं एवं प्रोधोगिकी : 

    विषय: विज्ञानं समर्पित योजनाएं एवं दैनिक जीवन में विकास एवं उनके अनुप्रयोग और प्रभाव तथा उनका कमजोर वर्ग पर प्रभाव।

    प्रारंभिक परीक्षा: नैनोस्केल,नैनो मिश्र धातु

    मुख्य परीक्षा: नैनोस्केल पर मिश्र धातुओं का एक डिजाइन मानचित्र का विकास धातुओं के जोड़े के मिलान की भविष्यवाणी करने में किस प्रकार सहायक हो सकता है ? 

    प्रसंग: 

    • वैज्ञानिकों ने नैनोस्केल पर मिश्र धातुओं का एक डिजाइन मानचित्र विकसित करने के लिए मशीन शिक्षण का उपयोग किया है, जो धातुओं के जोड़े के मिलान की भविष्यवाणी करने में सहायता कर सकता है, जो द्विधात्वीय नैनो मिश्र धातु बना सकते हैं।

    उद्देश्य:

    • इन नैनो मिश्र धातुओं को कोर-शेल नैनोक्लस्टर मिश्र धातु भी कहा जाता है। इसमें एक धातु कोर बनाती है और दूसरी सतह पर एक खोल के रूप में रहती है।
    • इस नई सामग्री के लिए वैज्ञानिकों की खोज में एक नई सीमा है और बायोमेडिसिन व अन्य क्षेत्रों में इसके अनुप्रयोग हैं।

    विवरण:

    मशीन लर्निंग सहायक:

    • यह जानना महत्वपूर्ण है कि किन परिस्थितियों में नैनोक्लस्टर मिश्र धातुओं में कोर-शेल संरचनाएं बनती हैं व कौन सी धातु कोर बनाती है और कौन सी सतह पर शेल के रूप में रहती है।
    • संयोजी ऊर्जा अंतर, परमाणु त्रिज्या (रेडियस) अंतर, सतह ऊर्जा अंतर और दो परमाणुओं की इलेक्ट्रोनगेटिविटी जैसे कई कारक परमाणुओं की कोर व शेल वरीयता में एक भूमिका निभा सकते हैं।
    • आवर्त सारणी में क्षार से लेकर क्षारीय पृथ्वी तक विभिन्न श्रेणियों की 95 धातुएं हैं, जो संभावित रूप से 4465 जोड़े बना सकती हैं।
    • यह निर्धारित करना प्रयोगात्मक रूप से असंभव है कि वे नैनोक्लस्टर मिश्र धातु बनाने में कैसे व्यवहार करते हैं। लेकिन कंप्यूटर को ‘मशीन शिक्षण’ के जरिए इन जोड़ियों के व्यवहार की भविष्यवाणी करने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है।
    • कंप्यूटर में जितना अधिक डेटा फीड किया जाएगा, कंप्यूटर का किसी अज्ञात डेटा की पहचान करना, उतनी ही सटीक होगा।
    • हालांकि, घटकों के रासायनिक क्रम की स्पष्ट पहचान के साथ प्रयोगात्मक रूप से संश्लेषित बाइनरी नैनोक्लस्टर्स की सीमित संख्या और सैद्धांतिक रूप से अध्ययन किए गए कुछ कोर-शेल संयोजनों के कारण वैज्ञानिकों को यहां एक असंतुलित ब्लॉक का सामना करना पड़ा।
    • मशीन शिक्षण को 100 या उससे कम आकार के छोटे डेटा सेट पर लागू नहीं किया जा सकता है।
    • विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त संस्थान- एस एन बोस सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज के शोधकर्ताओं ने 903 बाइनरी संयोजनों का एक बड़ा डेटा-सेट बनाने के लिए क्षार धातुओं, क्षारीय पृथ्वी, मूल धातुओं, संक्रमण धातुओं और पी-ब्लॉक धातुओं के विभिन्न संभावित द्विआधारी संयोजनों पर सतह से कोर सापेक्ष ऊर्जा की गणना करके इस समस्या को समाप्त किया।
      • इस बड़े डेटा सेट पर लागू मशीन लर्निंग के सांख्यिकीय उपकरण का उपयोग करके कोर-शेल मॉर्फोलॉजी (आकृति विज्ञान) को चलाने वाली प्रमुख विशेषताओं की जांच की।
      • कोर में कम परमाणु संख्या वाली हल्की धातुओं वाली कोर-शेल संरचनाओं को टाइप 1 के रूप में वर्गीकृत किया गया था और कोर में भारी धातुओं वाले को टाइप 2 के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
      • सेट में हर एक डेटा बिंदु की व्याख्या करने के लिए कई विशेषताओं का निर्माण किया गया था।
    • एमएल मॉडल के प्रदर्शन को मौजूदा प्रयोगात्मक डेटा के साथ जोड़ा गया, इससे एमएल मॉडल विश्वसनीय साबित हुआ।
    • इस तरह अब कोर-शेल पैटर्न को चलाने वाली प्रमुख विशेषताओं का विश्लेषण किया गया है।
    • यह पाया गया कि प्रमुख कारकों का सापेक्ष महत्व क्षार धातु-क्षारीय पृथ्वी और संक्रमण धातु-संक्रमण धातु आदि जैसे उपसमुच्चय संयोजनों पर निर्भर करता है।
    • इसके अलावा यह भी पाया गया कि अगर दो प्रकार के परमाणुओं के बीच संयोजक ऊर्जा में अंतर बहुत कम है, तो नैनोक्लस्टर दोनों धातुओं का एक यादृच्छिक मिश्रण बनाता है।
    • वहीं, अगर संयोजक ऊर्जाओं में अंतर बहुत बड़ा है, तो परमाणु एक संरचना में अलग हो जाते हैं, जिसमें दो मुख होते हैं।
      • इनमें ए परमाणुओं का एक चेहरा और बी परमाणुओं का दूसरा चेहरा होता है, जिसे जानूस संरचना कहा जाता है। इसका नाम दो-मुखी ग्रीक भगवान के नाम पर रखा गया है।
    • इस प्रकार एमएल को नैनोसाइन्स से जोड़ने का प्रयास नैनोक्लस्टर में धातु परमाणुओं के मिश्रण पैटर्न का पता लगाने में सफल रहा ।
    • वैज्ञानिकों की ओर से विकसित इस डिजाइन मानचित्र का मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी और एस.एन. बोस सेंटर में नैनो प्रयोगशालाओं में परीक्षण किया जाएगा।
    • एस.एन. बोस टीम के लिए अध्ययन का एक अन्य क्षेत्र दो असमान अर्धचालकों के संयोजन पर गठित विषम संरचना रहा है।
    • स्थायी चुंबकीय गुणों वाले दुर्लभ पृथ्वी यौगिकों का उपयोग लाउडस्पीकरों और कंप्यूटर के हार्ड ड्राइव में किया जाता है।
    • इनमें से आवर्त सारणी के 17 तत्व जैसे कि नियोडिमियम, लैंथेनम और इसी अन्य तत्व पृथ्वी के क्रस्ट पर बहुत कम पाए जाते हैं।
    • इसके अलावा इनकी आपूर्ति पर उन देशों का एकाधिकार है, जहां उनकी खदानें स्थित हैं।
      • वैज्ञानिकों ने दुर्लभ पृथ्वी यौगिकों और उनकी विशेषताओं का एक डेटाबेस बनाकर और फिर मशीन-लर्निंग मॉडल का निर्माण करके स्थायी चुंबक के संभावित विकल्पों की भविष्यवाणी की है, जिनकी लागत 100 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम से कम होगी।
    • ‘नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन’ के माध्यम से किए गए इस कार्य ने मानव जाति की नई सामग्री के अनुसंधान में एक पूरा नया अभियान जोड़ा है।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

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31 मई 2022 : PIB विश्लेषण –Download PDF Here

लिंक किए गए लेख में 30 मई 2022 का पीआईबी सारांश और विश्लेषण पढ़ें।

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