UPSC की सिविल सेवा परीक्षा हेतु वैकल्पिक विषय PSIR का पाठ्यक्रम 2022

UPSC, सिविल सेवा मुख्य परीक्षा हेतु 48 विषयों की सूची में से वैकल्पिक विषय चुनने की अनुमति प्रदान करता है। इनमें से, कुछ वैकल्पिक विषयों में सामान्य अध्ययन के पाठ्यक्रम के साथ समानता भी दिखाई पड़ती है। IAS परीक्षा में तीन चरण होते हैं- प्रारंभिक, मुख्य और व्यक्तित्व परीक्षण। UPSC, सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषय के दो प्रश्नपत्र सहित नौ प्रश्नपत्र होते हैं। राजनीति विज्ञान एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध (Political Science and International Relations- PSIR) UPSC के वैकल्पिक विषयों की सूची में दिया गया एक विषय है।

इस लेख में, हम  वैकल्पिक विषय PSIR के लिये सिविल सेवा परीक्षा हेतु एक विस्तृत पाठ्यक्रम प्रदान करेंगे।

UPSC की सिविल सेवा परीक्षा हेतु वैकल्पिक विषय PSIR का पाठ्यक्रम

PSIR, जैसा कि आमतौर पर जाना जाता है, एक ऐसा विषय है जिसके लिये बड़ी मात्रा में अध्ययन सामग्री उपलब्ध है। पाठ्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय राजनीति, भारत के संविधान, अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली और व्यापार, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, भारत की विदेश नीति शांति और रक्षा से संबंधित विषय शामिल हैं। ये विषय भी सामान्य अध्ययन के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं।

UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के वैकल्पिक विषय राजनीति विज्ञान में दो प्रश्नपत्र  (प्रश्नपत्र- I और प्रश्नपत्र- II) होते हैं। प्रत्येक प्रश्नपत्र 250 के साथ, कुल 500 अंकों का होता है।

सिविल सेवा परीक्षा हेतु PSIR विषय का पाठ्यक्रम नीचे देखें:

राजनीति विज्ञान एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध – प्रश्नपत्र-I

  • राजनैतिक सिद्धांत एवं भारतीय राजनीति 
    • राजनैतिक सिद्धांत : अर्थ एवं उपागम
    • राज्य के सिद्धांत : उदारवादी, नवउदारवादी, मार्क्सवादी, बहुवादी, पश्च-उपनिवेशी एवं नारी  अधिकारवादी ।
    • न्याय: रॉल के न्याय के सिद्धांत के विशेष संदर्भ में न्याय के संप्रत्यय एवं इसके समुदायवादी समालोचक ।
    • समानता : सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक समानता एवं स्वतंत्रता के बीच संबंध; सकारात्मक कार्य। 
    • अधिकार : अर्थ एवं सिद्धांत; विभिन्न प्रकार के अधिकार; मानवाधिकार की संकल्पना।
    • लोकतंत्र : क्लासिकी एवं समयकालीन सिद्धांत; लोकतंत्र के विभिन्न मॉडल-प्रतिनिधिक, सहभागी एवं विमर्शी।
    • शक्ति, प्राधान्य विचारधारा एवं वैधता की संकल्पना।
    • राजनैतिक विचारधाराएँ: उदारवाद, समाजवाद, मार्क्सवाद, फांसीवाद, गांधीवाद एवं नारी-अधिकारवाद ।
    • भारतीय राजनैतिक चिन्तन: धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र एवं बौद्ध परंपराएँ; सर सैयद अहमद खान, श्री अरविंद, एम. के. गांधी, बी. आर. अम्बेडकर, एम. एन. रॉय
    • पाश्चत्य राजनैतिक चिन्तन: प्लेटो अरस्तू, मैकियावेली, हाब्स, लॉक, जॉन. एस. मिल, मार्क्स, ग्राम्स्की, हान्ना आरेन्ट।
  • भारतीय शासन एवं राजनीतिक
    • भारतीय राष्ट्रवाद;
      • (क) भारत के स्वाधीनता संग्राम की राजनैतिक कार्यनीतियाँ; संविधानवाद से जन सत्याग्रह, असहयोग, सविनय अवज्ञा एवं भारत छोड़ो; उग्रवादी एवं क्रांतिकारी आंदोलन, किसान एवं कामगार आंदोलन ।
      • (ख) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के परिप्रेक्ष्य: उदारवादी, समाजवादी एवं मार्क्सवादी; उग्र मानवतावादी एवं दलित । 
  • भारत के संविधान का निर्माण : ब्रिटिश शासन का रिक्थ; विभिन्न सामाजिक एवं राजनैतिक परिप्रेक्ष्य ।
  • भारत के संविधान की प्रमुख विशेषताएँ: प्रस्तावना, मौलिक अधिकार तथा कर्त्तव्य नीति निर्देशक सिद्धांत, संसदीय प्रणाली एवं संशोधन प्रक्रिया; न्यायिक पुनर्विलोकन एवं मूल संरचना सिद्धांत
  • (क) संघ सरकार के प्रधान अंग : कार्यपालिका, विधायिका एवं सर्वोच्च न्यायालय की विचारित भूमिका एवं वास्तविक कार्य प्रणाली ।
  • (ख) राज्य सरकार के प्रधान अंग : कार्यपालिका, विधायिका एवं उच्च न्यायालयों की विचारित भूमिका एवं वास्तविक कार्य प्रणाली
  • आधारिक लोकतंत्र : पंचायती राज एवं नगर शासन; 73वें एवं 74वें संविधान संशोधनों का महत्त्व : आधारिक आंदोलन
  • साविधिक संस्थाएँ/आयोग : निर्वाचन आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, वित्त आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ।
  • सघंराज्य पद्धति : सांविधानिक उपबंध, केन्द्र राज्य संबंधों का बदलता स्वरूप, एकीकरणवादी प्रवृत्तियाँ एवं क्षेत्रीय आकांक्षाएँ; अंतर-राज्य विवाद ।
  • योजना एवं आर्थिक विकास : नेहरूवादी एवं गांधीवादी परिप्रेक्ष्य, योजना की भूमिका एवं निजी क्षेत्र, हरित क्रांति भूमि सुधार एवं कृषि संबंध, उदारीकरण एवं आर्थिक सुधार ।
  • भारतीय राजनीति में जाति, धर्म एवं नृजातीयता ।
  • दल प्रणाली : राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजनैतिक दल, दलों के वैचारिक एवं सामाजिक आधार, बहुदलीय राजनीति के स्वरूप, दबाव समूह, निर्वाचक आचरण की प्रवृत्तियाँ, विधायकों के बदलते सामाजिक-आर्थिक स्वरूप ।
  • सामाजिक आंदोलन : नागरिक स्वतंत्रताएँ एवं मानवाधिकार आंदोलन; महिला आंदोलन, पर्यावरण आंदोलन

राजनीति विज्ञान एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध – प्रश्नपत्र- 2

तुलनात्मक राजनैतिक विश्लेषण एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति

  • तुलनात्मक राजनीति स्वरूप एवं प्रमुख उपागम : राजनैतिक अर्थव्यवस्था एवं राजनैतिक समाजशास्त्रीय प्रेरिप्रेक्ष्य: तुलनात्मक प्रक्रिया की सीमाएँ ।
  • तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में राज्य; पूंजीवादी एवं समाजवादी अर्थ व्यवस्थाओं में राज्य के बदलते स्वरूप एवं उनकी विशेषताएँ तथा उन्नत औद्योगिक एवं विकासशील समाज ।
  • राजनैतिक प्रतिनिधान एवं सहभागिता: उन्नत औद्योगिक एवं विकासशील सभाओं में राजनैतिक दल, दबाव समूह एवं सामाजिक आंदोलन ।
  • भूमंडलीकरण : विकसित एवं विकासशील समाजों से प्राप्त अनुक्रियाएँ ।
  • अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन के उपागम: आदर्शवादी, यथार्थवादी, मार्क्सवादी, प्रकार्यवादी एवं प्रणाली सिद्धांत ।
  • अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में आधारभूत संकल्पनाएँ: राष्ट्रीय हित, सुरक्षा एवं शक्ति; शक्ति संतुलन एवं प्रतिरोध; पर राष्ट्रीय कर्ता एवं सामूहिक सुरक्षा; विश्व पूंजीवादी अर्थव्यवस्था एवं भूमंडलीकरण ।
  • बदलती अंतर्राष्ट्रीय राजनीति व्यवस्था :
    • (क) महाशक्तियों का उदय : कार्यनीतिक एवं वैचारिक द्विध्रुवीयता, शस्त्रीकरण की होड़ एवं शीत युद्ध; नाभिकीय खतरा ।
  • अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था का उद्भव : ब्रेटनवुड से विश्व व्यापार संगठन तक । समाजवादी अर्थव्यवस्थाएँ तथा पारस्परिक आर्थिक सहायता परिषद (CMEA); नव अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की तृतीय विश्व की मांग; विश्व अर्थव्यवस्था का भूमंडलीकरण ।
  • संयुक्त राष्ट्र : विचारित भूमिका एवं वास्तविक लेखा-जोखा; विशेषीकृत संयुक्त राष्ट्र अभिकरण-लक्ष्य एवं कार्यकरण; संयुक्तराष्ट्र सुधारों की आवश्यकता ।
  • विश्व राजनीति का क्षेत्रीयकरण: EU, ASEAN, APEC, SAARC, NAFTA I
  • समकालीन वैश्विक सरोकार : लोकतंत्र, मानवाधिकार, पर्यावरण,लिंग न्याय, आतंकवाद, नाभिकीय प्रसार।
  • भारत तथा विश्व
    • भारत की विदेश नीति : विदेश नीति के निर्धारक, नीति निर्माण की संस्थाएँ; निरंतरता एवं परिवर्तन
    • गुट निरपेक्षता आंदोलन को भारत का योगदान विभिन्न चरण: वर्तमान भूमिका ।
    • भारत और दक्षिण एशिया :
      • (क) दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC)– पिछले निष्पादन एवं भावी प्रत्याशाएँ ।
      • (ख) दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र के रूप में।
      • (ग) भारत की ” पूर्व अभिमुख” नीति ।
      • (घ) क्षेत्रीय सहयोग की बाधाएँ नदी जल विवाद अवैध सीमा पार उत्प्रवासन; नृजातीय द्वंद एवं उपप्ल्व; सीमा विवाद ।
  • भारत एवं वैश्विक दक्षिण अफ्रीका एवं लैटिन अमेरिका के साथ संबंध; NIEO एवं WTO वार्ताओं के लिये आवश्यक नेतृत्व की भूमिका
  • भारत एवं वैश्विक शक्ति केन्द्र संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप संघ (EU), जापान, चीन और रूस ।
  • भारत एवं संयुक्त राष्ट्र प्रणाली : संयुक्त राष्ट्र शान्ति अनुरक्षण में भूमिका; सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग ।
  • भारत एवं नाभिकीय प्रश्न : बदलते प्रत्यक्षण एवं नीति
  • भारतीय विदेश नीति में हाल के विकास : अफगानिस्तान में हाल के संकट पर भारत की स्थिति; इराक एवं पश्चिम एशिया; यूएस एवं इजराइल के साथ बढ़ते संबंध; नई विश्व व्यवस्था की दृष्टि ।

PSIR विषय का पाठ्यक्रम IAS परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी बहुत उपयोगी है क्योंकि सरकार में काम करते समय बहुतायत; इसकी अवधारणाओं का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा, कई प्रतियोगियों को राजनीति विज्ञान बहुत दिलचस्प लगेगा क्योंकि यह उन्हें  IAS परीक्षा में सफलता प्राप्त करनें में सहायता करता है।

वैकल्पिक विषय का प्रश्नपत्र अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों, प्रबंधन सलाहकारों, शिक्षकों और विभिन्न पृष्ठभूमि के प्रतियोगियों  के लिये उपयुक्त है। IAS परीक्षा के प्रतियोगियों को PSIR के लिये अपनी तैयारी को सामान्य अध्ययन के साथ एकीकृत करना चाहिये ताकि वे सभी अवधारणाओं को समझ सकें और UPSC की सिविल सेवा परीक्षा में उच्च रैंक प्राप्त कर सकें।

 PSIR, पूर्व में कई UPSC टॉपर्स का सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला विषय रहा है।

सम्बंधित लिंक्स:

Leave a Comment

Your Mobile number and Email id will not be published.

*

*