ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट (वैश्विक जोखिम रिपोर्ट)

जनवरी 2022 में विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) ने  ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट (वैश्विक जोखिम दस्तावेज) का 17वां संस्करण जारी किया है |  विश्व आर्थिक मंच प्रतिवर्ष यह रिपोर्ट  जारी करता  है जिसमें दुनिया के सामने आने वाले सबसे बड़े खतरों की पहचान की जाती है। इन खतरों को पांच वर्गों  में बांटा गया  है जिनमें पर्यावरण सम्बन्धी संकट , सामाजिक संकट , आर्थिक संकट, भू-राजनैतिक (geo-political) संकट  और तकनीकी संकट  को शामिल किया जाता है। और इस रिपोर्ट के अनुसार आज जलवायु परिवर्तन और कोरोना वैश्विक महामारी विश्व के समक्ष  2 सबसे बड़े खतरे हैं |  यह दस्तावेज निम्नलिखित तीन श्रेणियों में अध्ययन के आधार पर जारी  किया जाता  है:-

  1. अल्पावधि जोखिम : इसके तहत 2 वर्ष के लिए आंकलन किया जाता है |  
  2. मध्यावधि जोखिम : इसके तहत 3 से 5 वर्ष के लिए आंकलन किया जाता है | 
  3. दीर्घावधि जोखिम : इसके तहत 5 से 10 वर्ष के लिए आंकलन किया जाता है |

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  • आर्थिक संकट : इस दस्तावेज के अनुसार वैश्विक अर्थव्यवस्था में  2024 तक 2.3% तक की गिरावट देखी जा  सकती है। तथापि , विकासशील देशों में यह गिरावट  5.5% तक और  विकसित  देशों में यह 0.9% तक हो सकती है |
  • कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान ऑनलाइन मंचन में तीव्र उछाल देखने को मिला है जिसने साइबर सुरक्षा  जोखिम को कई गुना बढ़ा दिया  है। साइबर खतरे अनियंत्रित दर  पर बढ़ रहे हैं। बिटकोइन जैसी क्रिप्टोकर्रेंसी इसका सबसे बड़ा शिकार हो रही हैं | तकरीबन  90% रैंसमवेयर हमलों का भुगतान क्रिप्टोकरेंसी में किया जाता है।
  • जलवायु परिवर्तन: जलवायु परिवर्तन एक ऐसी समस्या है जो पिछले कई दशकों से निरन्तर हमारे सामने है | वैश्विक तापन (ग्लोबल वार्मिंग), अति-जलवायु स्थितियां , जीव -जंतुओं की लुप्त होती प्रजातियाँ , समुद्री जल सतह में बढ़ोतरी , कार्बन उत्सर्जन इत्यादि  जलवायु परिवर्तन के ही परिणाम हैं | यदि इस समस्या को शीघ्र नियंत्रित नहीं किया गया तो यह सम्पूर्ण विश्व के लिए विनाशकारी होगा | इसके लिए आवश्यकता है एक अंतर्राष्ट्रीय सहमती बना कर इसके हल तलाशने की |
  • अन्तरिक्ष में खतरा :  इस रिपोर्ट की एक अहम बात यह है की इसने अन्तरिक्ष में निरंतर बढती मानवीय गतिविधि के लिए  भी चिंता जाहिर की है | आज अन्तरिक्ष के  क्षेत्र में जिस गति से तकनिकी शोध कार्य जारी हैं उसने विशाल मात्रा में अन्तरिक्ष में कचरे (debris) को उत्पन्न किया है | रिपोर्ट के अनुसार ये कचरे भविष्य में पृथ्वी के लिए खतरा साबित होंगे |
  • कोरोना वैश्विक महामारी और उससे उपजे आर्थिक संकट ने लोगों को नए अवसरों की तलाश में विस्थापन के लिए भी बाध्य किया है जो एक अन्य गम्भीर समस्या है | इसके कारण कई देशों में शरणार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी देखि गई है | इसने सम्बंधित देश में जनसँख्या , कानून एवं विधि की समस्या ,निवास  और उससे भी अधिक रोजगार सुरक्षा की समस्या को जन्म दिया है | इन देश के वासियों के मन में यह भाव उत्पन्न होता है कि इन प्रवासी लोगों ने उन्हें उनके रोजगार से वंचित किया है | कई बार ऐसी स्थिती उनके बीच टकराव का कारण भी बनती है |
  • युवाओं में मोहभंग :- वर्तमान सामाजिक परिवेश और जीवन शैली के कारण आजकल के युवा वर्ग में जिस प्रकार सामाजिक संबंधों और पारिवारिक रिश्तों के प्रति मोह-भंग हुआ है उसकी चिंता की   भी चर्चा  इस दस्तावेज में की गई है | इसके एक मूल कारण के तौर पर इस रिपोर्ट  में “मानसिक स्वास्थ्य” को बताया गया है |  
  • इस रिपोर्ट में निम्नलिखित 5 जोखिम विशेष तौर पर भारत के लिए बताये गये हैं :-

1.डिजिटल असमानता 

2.अंतरराज्यीय संबंधों में बिखराव

3.ऋण संकट

4.प्रौद्योगिकी शासन की विफलता

5.युवाओं में मोहभंग

विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) क्या है ?

विश्व आर्थिक मंच स्विट्ज़रलैंड की  एक  गैर-लाभकारी (Non -Profit Organization) एवं  गैर -सरकारी  अंतर्राष्ट्रीय संस्था  है जिसकी स्थापना 1971 में एक जर्मन इंजिनियर व अर्थशास्त्री  क्लॉस मार्टिन  श्वाब ने की थी |  इसका मुख्यालय जेनेवा में है। ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट के अलावा विश्व आर्थिक मंच निम्नलिखित अन्य रिपोर्ट भी जारी करता है :-

  1. ऊर्जा संक्रमण सूचकांक
  2. वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता रिपोर्ट
  3. वैश्विक सूचना एवं प्रोद्योगिकी रिपोर्ट
  4. लैंगिक असमानता सूचकांक  
  5. वैश्विक यात्रा और पर्यटन रिपोर्ट
  6. पर्यावरणीय प्रदर्शन सूचकांक

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