08 मई 2022 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. केंद्र का  टिशू कल्चर पौधों का निर्यात बढ़ाने पर जोर:

    सामान्य अध्ययन: 3
    अर्थव्यवस्था,कृषि:
    विषय: भारत के व्यापारिक हितों पर विकास के लिए नीतियां,हस्तक्षेप,उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
    प्रारंभिक परीक्षा:  कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा),टिशू कल्चर ।

    प्रसंग: 

    • केंद्र ने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के माध्यम से टिशू कल्चर पौधों के निर्यात को प्रोत्साहन देने के क्रम में बायोटेक्नोलॉजी विभाग से मान्यता प्राप्त भारत भर की टिशू कल्चर लैबोरेटरीज के साथ मिलकर “वनस्पति, जीवित पौधों, कट फ्लॉवर्स जैसे टिशू कल्चर पौधों और रोपण सामग्री का निर्यात संवर्धन” पर एक वेबिनार का आयोजन किया।

    विवरण:

    • भारत से टिशू कल्चर पौधों का आयात कर रहे शीर्ष 10 देशों में नीदरलैंड, यूएसए,इटली, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, केन्या सेनेगल, इथियोपिया और नेपाल शामिल हैं।
    • 2020-21 में, भारत से 1.717 करोड़ डॉलर के टिशू कल्चर पौधों का निर्यात हुआ था, जिसमें अकेले नीदरलैंड की लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।
    • एपीडा ने बताया की इन देशों में टिशू कल्चर पौधों के लिए ताजा मांग हैं और कैसे शीर्ष निर्यात संवर्धन संस्था भारतीय निर्यातकों/ टिशू कल्चर लैबोरेटरीज को इन बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता कर सकती है।
    • एपीडा ने पौधों की गुणवत्ता में सुधार के लिए निर्यात केंद्रित प्लांट टिशू कल्चर लैबोरेटरीज को दी जा रही अन्य वित्तीय सहायता के बारे में बताया।
    • भारत में टिशू कल्चर पौधों की रेंज बढ़ाने के क्रम में, एपीडा ने निर्यातकों से विशेष पौधों/फसलों के लिए जर्मप्लाज्म की एक सूची उपलब्ध कराने के लिए कहा है, जिन्हें उत्पादक देशों से आयात किया जा सकता है।
    • वहीं निर्यातकों ने यह सुझाव दिया कि एपीडा को भारत में उपलब्ध टिशू कल्चर्ड प्लांट्स, वन पौधों, कमरों में रखे जाने वाले पौधों, सजावटी पौधों और लैंडस्केपिंग प्लांटिंग मैटेरियल जैसी विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों को दिखाने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का आयोजन किया जाना चाहिए।
      • उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि एपीडा को टिशू कल्चर पौधों के लिए नए बाजारों की पहचान के साथ सौदों को अंतिम रूप देने के लिए भारत से व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल विदेश भेजने के लिए आगे आना चाहिए।
    • टिशू कल्चर पौधों से जुड़ी लैबोरेटरीज ने टिशू कल्चर्ड पौधारोपण सामग्री के उत्पादन और उसके निर्यात  से  जुडी चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
    • इसके निर्यात में बिजली की बढ़ती लागत, लैबोरेटरीज में कुशल कार्यबल की कमी, लैबोरेटरीज में प्रदूषण का स्तर,पौधारोपण सामग्री की परिवहन की लागत, दूसरे देशों के साथ ही भारत की पौधारोपण सामग्री के एचएस कोड के सामंजस्य में कमी और वन एवं क्वारंटाइन विभागों की आपत्तियों जैसे मुद्दों का सामना  करना पड़ता हैं।
    • एपीडा एक वित्तीय सहायता योजना (एफएएस) चला रहा है,ताकि निर्यात गुणवत्ता वाले टिशू कल्चर रोपण सामग्री का उत्पादन किया जा सके।
    • यह बाजार विकास, बाजार विश्लेषण और संवर्धन और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में टिशू कल्चर पौधों के प्रदर्शन एवं विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बायर-सेलर मीट्स में भागीदारी के माध्यम से विविध देशों को टिशू कल्चर रोपण सामग्री के निर्यात की सुविधा भी देता है।
    • भारत ज्ञान, व्यापक टिशू कल्चर अनुभव से युक्त बायोटेक विशेषज्ञों के साथ ही किफायती श्रमबल के मामले में समृद्ध है।
    • इससे निर्यात केंद्रित गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री के निर्यात में सहायता मिलती है।
    • ये सभी कारक भारत को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के लिए गुणवत्तापूर्ण वनस्पतियों की एक बड़ी और विविधतापूर्ण रेंज का एक संभावित वैश्विक आपूर्तिकर्ता बना सकते हैं।
  2. विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 के गैर-अपराधीकरण पर चर्चा:

    सामान्य अध्ययन: 2
    शासन:
    विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां,हस्तक्षेप,उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
    प्रारंभिक परीक्षा: विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009
    मुख्य परीक्षा: अनावश्यक हस्तक्षेप को खत्म कर व्यवसाय करने में सुगमता के लिए विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 के गैर-अपराधीकरण के महत्व पर चर्चा कीजिए?

    प्रसंग: 

    • अनावश्यक हस्तक्षेप को खत्म करने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए व्यवसाय करने में सुगमता के लिए एलएम अधिनियम के गैर-अपराधीकरण पर विचार किया जा रहा है।

    उद्देश्य:

    • उपभोक्ता मामले विभाग 9 मई, 2022 को ‘विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 पर राष्ट्रीय कार्यशाला’ का आयोजन करेगा, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं और उद्योगों में संतुलन बनाते हुए विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 के गैर-अपराधीकरण के मुद्दे पर सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करना है।

    विवरण:

    • इस कार्यशाला का उद्देश्य व्यवसाय करने में सुगमता को बढ़ाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए विधिक मापविज्ञान अधिनियम के गैर-अपराधीकरण के द्वारा सफलता की पहचान करने के लिए हितधारकों का परामर्श करना है।
    • इसके अतिरिक्त यह सुनिश्चित करना है कि व्यवसाय पर बोझ बढ़ाए बिना और आर्थिक विकास में बाधा डाले बिना गैर-मानक वजन और उपायों के उपयोग व गलत प्रकटीकरण के माध्यम से उपभोक्ता के हितों की उपेक्षा न की जाए।
    • विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 के गैर-अपराधीकरण पर विचार करने के लिए प्रमुख मुद्दे हैं: कंपनियों पर बोझ कम करना और निवेशकों के बीच विश्वास बढ़ाना ; आर्थिक विकास और उपभोक्ता के हितों की सुरक्षा पर ध्यान केन्द्रित करना; मेन्स री (दुर्भावनापूर्ण/आपराधिक इरादा) आपराधिक दायित्व को लागू करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है- इसलिए, लापरवाही या अनजाने में चूक की तुलना में गैर-अनुपालन यानी धोखाधड़ी; और गैर-अनुपालन की पुनरावृत्ति के लिए आदतन अपराधी की प्रकृति का मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण है।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

आज इससे सम्बंधित कोई समाचार नहीं हैं। 

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लिंक किए गए लेख में 06 मई 2022 का पीआईबी सारांश और विश्लेषण पढ़ें।

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