09 मई 2022 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. पीएमएसबीवाई,पीएमजेजेबीवाई और एपीवाई ने 7 वर्ष पूरे किए:

    सामान्य अध्ययन: 2
    शासन:
    विषय: सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं एवं उनका कमजोर वर्ग पर प्रभाव।
    प्रारंभिक परीक्षा: पीएमएसबीवाई,पीएमजेजेबीवाई और एपीवाई ।
    मुख्य परीक्षा: इन योजनाओं की उपलब्धियां तथा मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
    प्रसंग: 

    • इस वर्ष तीन सामाजिक सुरक्षा (जन सुरक्षा) योजनाओं, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) की 7 वीं वर्षगांठ हैं।

    उद्देश्य:

    • प्रधानमंत्री द्वारा 9 मई, 2015 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल से पीएमजेजेबीवाई, पीएमएसबीवाई और एपीवाई को लॉन्च किया गया था।
    • उपरोक्त तीन सामाजिक सुरक्षा योजनाएं अप्रत्याशित जोखिमों / नुकसानों और वित्तीय अनिश्चितताओं से मानव जीवन को सुरक्षित करने और नागरिकों के कल्याण के लिए समर्पित हैं।
      • देश के असंगठित क्षेत्र के लोगों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने दो बीमा योजनाएं शुरू कीं – प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) तथा इसके साथ ही वृद्धावस्था में जरूरतों को पूरा करने के लिए अटल पेंशन योजना (एपीवाई) की शुरुआत की गयी।

    विवरण:

    • पीएमजेजेबीवाई और पीएमएसबीवाई के तहत लोगों को कम लागत वाली जीवन/दुर्घटना बीमा कवर की सुविधा दी जाती हैं, जबकि एपीवाईके तहत बुढ़ापे में नियमित पेंशन प्राप्त करने के लिए वर्तमान में बचत करने का अवसर प्रदान करती है।
    • प्रधानमंत्री द्वारा 15 अगस्त, 2014 को घोषित एवं वित्तीय समावेश पर आधारित राष्ट्रीय मिशन के मुख्य उद्देश्यों में से एक था –
      • बीमा और पेंशन के दायरे का विस्तार करना, ताकि समाज के गरीब और कमजोर समुदाय के लोगों को किफायती उत्पादों के माध्यम से अत्यधिक आवश्यक वित्तीय सुरक्षा प्रदान की जा सके।
    • तीन जन सुरक्षा योजनाओं ने बीमा और पेंशन को आम आदमी की पहुंच में ला दिया है।
      • पिछले सात वर्षों में उपरोक्त योजनाओं में पंजीकृत और इनसे लाभान्वित होने वाले लोगों की संख्या इनकी सफलता का प्रमाण हैं।
      • कम लागत वाली बीमा योजनाएं और गारंटी युक्त पेंशन योजना यह सुनिश्चित कर रही हैं कि वित्तीय सुरक्षा, जो पहले कुछ चुनिंदा लोगों को ही उपलब्ध थी, अब समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही है।
    • गरीब से गरीब व्यक्ति भी पीएमजेजेबीवाई के तहत 2 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर प्रति दिन 1 रुपये से कम पर और पीएमएसबीवाई के तहत 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा भी प्रति दिन 1 रुपये से कम पर प्राप्त कर सकता है।
      • देश के आयु वर्ग 18 से 40 वर्ष के सभी नागरिक न्यूनतम 42 रुपये प्रति माह का भुगतान करके 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन प्राप्त कर सकते हैं।
      • यह योजना महामारी के दौरान कम आय वाले परिवारों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुई है, क्योंकि वित्त वर्ष 2021 में, भुगतान किए गए कुल दावों में लगभग 50 प्रतिशत कोविड-19 से हुई मौतों से सम्बंधित थे।
      • महामारी की शुरुआत के बाद से, यानि 1 अप्रैल, 2020 से 23 फरवरी, 2022 तक, कुल 2.10 लाख दावों के लिए 4,194.28 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया।
    • इसी तरह, पीएमएसबीवाई के शुभारंभ के बाद से 28.37 करोड़ लोगों ने दुर्घटना कवर के लिए पंजीकरण कराया है ।

    इनकी विशेषताओं तथा अब तक की उपलब्धियों पर एक नज़र:

    1. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई):

      • योजना: पीएमजेजेबीवाई एक साल की जीवन बीमा योजना है, जिसका नवीकरण प्रत्येक वर्ष होता है और इसके तहत  किसी भी कारण से होने वाली मौत के लिए कवरेज प्रदान किया जाता है।
      • पात्रता: आयु वर्ग 18-50 वर्ष के बचत बैंक या डाकघर के खाताधारक व्यक्ति इस योजना के तहत पंजीकरण के पात्र हैं। 50 वर्ष की आयु से पहले योजना में शामिल होने वाले लोग प्रीमियम का भुगतान करने पर जीवन के जोखिम का कवरेज 55 वर्ष की आयु तक प्राप्त कर सकते हैं।
      • लाभ: 330 रुपये प्रति वर्ष के प्रीमियम भुगतान पर 2 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर, चाहे मृत्यु किसी भी कारण से हुई हो।
      • पंजीकरण: योजना के तहत पंजीकरण, खाताधारक के बैंक की शाखा / बीसी पॉइंट या वेबसाइट पर या डाकघर में किया जा सकता है।
        • योजना के तहत, प्रीमियम का भुगतान ग्राहक द्वारा केवल एक बार दिए गए आदेश के आधार पर बैंक खाते से स्वतः डेबिट द्वारा किया जा सकता है।
      • उपलब्धियां: योजना के तहत 12.76 करोड़ से अधिक पंजीकरण हुए हैं और कुल 5,76,121 दावों के लिए 11,522 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है।
    2. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई):

      • योजना: पीएमएसबीवाई एक साल की दुर्घटना बीमा योजना है, जिसका प्रत्येक साल नवीकरण किया जाता है और यह दुर्घटना के कारण हुई मृत्यु या दिव्यांगता के लिए कवरेज प्रदान करता है।
      • पात्रता: बचत बैंक या डाकघर में खाता रखने वाले आयु वर्ग 18-70 वर्ष के व्यक्ति इस योजना के तहत पंजीकरण के पात्र हैं।
      • लाभ: दुर्घटना के कारण हुई मृत्यु या दिव्यांगता के लिए 2 लाख रुपये (आंशिक दिव्यांगता के मामले में 1 लाख रुपये) का दुर्घटना मृत्यु सह दिव्यांगता कवर।
      • पंजीकरण: योजना के तहत पंजीकरण, खाताधारक के बैंक की शाखा / बीसी पॉइंट या वेबसाइट पर या डाकघर में किया जा सकता है। 
        • योजना के तहत, प्रीमियम का भुगतान ग्राहक द्वारा केवल एक बार दिए गए आदेश के आधार पर बैंक खाते से स्वतः डेबिट द्वारा किया जा सकता है।
      • उपलब्धियां: योजना के तहत कुल 28.37 करोड़ से अधिक पंजीकरण हुए हैं।
    3. अटल पेंशन योजना (एपीवाई)

      • पृष्ठभूमि: अटल पेंशन योजना (एपीवाई) सभी भारतीयों, विशेष रूप से गरीबों, वंचितों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा के लिए शुरू की गई थी।
        • यह असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार की एक पहल है। 
        • एपीवाई को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के समग्र प्रशासनिक और संस्थागत ढांचे के तहत पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा प्रबंधित किया जाता है।
      • पात्रता: एपीवाई, आयु वर्ग 18 से 40 वर्ष के सभी बैंक खाताधारकों के लिए खुली है और चुनी गई पेंशन राशि के आधार पर अंशदान की धनराशि अलग-अलग होती है।
      • लाभ: योजना में शामिल होने के बाद ग्राहक द्वारा दिए गए अंशदान के आधार पर 60 वर्ष की आयु से ग्राहकों को गारंटीशुदा न्यूनतम मासिक पेंशन के रूप में 1000 रुपये या 2000 रुपये या 3000 रुपये या 4000 रुपये या 5000 रुपये मिलते हैं।
      • योजना के लाभों का वितरण: मासिक पेंशन ग्राहक के लिए उपलब्ध है और उसके बाद उसकी पत्नी या उसके पति को और उन दोनों की मृत्यु के बाद, ग्राहक की 60 वर्ष की आयु में जमा हुई कुल पेंशन राशि, ग्राहक द्वारा नामांकित व्यक्ति को वापस कर दी जाएगी। 
      • ग्राहक की समय से पहले मृत्यु (60 वर्ष की आयु से पहले मृत्यु) के मामले में, ग्राहक के पति या पत्नी, शेष अवधि के लिए, ग्राहक के एपीवाई खाते में अंशदान मूल ग्राहक की 60 वर्ष की आयु  तक  कर सकते हैं।
      • केंद्र सरकार द्वारा योगदान: न्यूनतम पेंशन की गारंटी सरकार द्वारा दी जाएगी, अर्थात, यदि अंशदान के आधार पर संचित कोष, अपने निवेश पर अनुमानित लाभ (रिटर्न) से कम राशि अर्जित करता है और न्यूनतम गारंटी पेंशन के लिए अपर्याप्त है, तो केंद्र सरकार शेष अंशदान करेगी। वैकल्पिक रूप से, यदि निवेश पर लाभ (रिटर्न) अधिक है, तो ग्राहकों को बढ़ी हुई पेंशन का लाभ प्राप्त होगा।
      • भुगतान आवृत्ति: ग्राहक मासिक/तिमाही/अर्ध-वार्षिक आधार पर एपीवाई में अंशदान कर सकते हैं।
      • योजना से बाहर होना: ग्राहक कुछ शर्तों के तहत स्वेच्छा से एपीवाई से बाहर निकल सकते हैं; यथा, सरकारी सह-अंशदान और उस पर रिटर्न/ब्याज की कटौती होने पर।
      • उपलब्धियां: 4 करोड़ से अधिक व्यक्तियों ने इस योजना की सदस्यता प्राप्त की है।
  2. एसईसीआई ने सौर ऊर्जा पैनल स्थापित करने के लिए गृह मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए:

    सामान्य अध्ययन: 3
    ऊर्जा:विषय: सरकार की योजनाएं,संस्थान संसाधन, विकास तथा रोजगार से संबंधित मुद्दे।
    प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई)
    मुख्य परीक्षा: देश में सोर ऊर्जा का महत्व।
    प्रसंग: 

    • भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के परिसरों में उपलब्ध छत क्षेत्रों पर सौर ऊर्जा की क्षमता का लाभ उठाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

    उद्देश्य:

    • यह समझौता ज्ञापन देश के सुरक्षा बलों के लिए हरित ऊर्जा की आपूर्ति करने की दिशा में बढ़ाया गया कदम है जो सतत भविष्‍य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
    • इस समझौता ज्ञापन में आरईएससीओ मॉडल के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्रों को लागू करने में गृह मंत्रालय की सहायता करेगा।

    विवरण:

    • भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई), नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के तहत एक सार्वजनिक उपक्रम है जो विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों, विशेष रूप से सौर ऊर्जा, विद्युत व्यापार, अनुसंधान एवं विकास आदि के संवर्धन और विकास कार्य में संलग्‍न है।
    • यह निगम वीजीएफ योजनाओं, आईएसटीएस योजनाओं, सीपीएसयू योजनाओं जैसी सरकार की विभिन्‍न आरई योजनाओं के लिए एक नामित कार्यान्‍वयन एजेंसी भी है।
  3. एनईएचएचडीसी और इट्सी ने उत्तर पूर्व के छोटे और पारंपरिक कारीगरों की सहायता करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए:

    सामान्य अध्ययन: 3
    अर्थव्यवस्था: 
    विषय: सरकार की योजनाएं,क्रियान्वयन एवं उनका कमजोर वर्ग पर प्रभाव।  
    प्रारंभिक परीक्षा: इट्सी इंक,एनईएचएचडीसी ।  
    प्रसंग: 

    • अद्वितीय और रचनात्मक वस्तुओं के लिए वैश्विक बाजार इट्सी ने उत्तर पूर्वी हस्तशिल्प और हथकरघा विकास निगम (एनईएचएचडीसी) के साथ भागीदारी की है। इसके लिए छोटे विक्रेताओं, बुनकरों व कारीगरों को बाजार पहुंच और उनको सक्षम बनाने में सहायता प्रदान करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया है। 

    उद्देश्य:

    • अद्वितीय व रचनात्मक वस्तुओं के लिए वैश्विक बाजार के रूप में इट्सी क्षेत्र के कारीगरों को बाजार पहुंच और सक्षमता सहायता प्रदान करेगी। 
    • यह साझेदारी कारीगरों के लिए एक गेमचेंजर है, जो इस क्षेत्र के स्वदेशी उत्पादों (कपड़ा, बेंत व बांस के उत्पाद, उपकरण और अन्य उत्पाद) को लाखों घरेलू और वैश्विक खरीदारों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराने में सहायता करेगी। 

    विवरण:  

    • इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत इट्सी, एनईएचएचडीसी के साथ मिलकर विशेष रूप से उत्तर पूर्व के कारीगरों के लिए सक्षमता कार्यक्रमों को विकसित करेगी।
      • इसके अलावा ऑनलाइन बिक्री व उद्यमिता पर मॉड्यूल और उनके उत्पादों की व्यापक बाजार तक पहुंच के अवसर पैदा करना शामिल हैं।
    • इट्सी का उद्देश्य भारतीय हस्तशिल्प क्षेत्र में कारीगरों, कलाकारों व छोटे उद्यमियों को ऑनलाइन कारोबार शुरू करने और प्रबंधित करने के लिए महत्वपूर्ण उपकरणों व संसाधनों से युक्त करना है। 
    • इट्सी इन विक्रेताओं को डिजिटल सक्षमता सेवाएं प्रदान करेगी। 
    • साथ ही उन्हें इट्सी से परिचित कराने व बाजार में अपने उत्पादों की बिक्री के तरीकों पर प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित करेगी।
    • उत्तर पूर्व क्षेत्र के स्वदेशी शिल्प को बढ़ावा देने और शिल्पकारों के लिए आर्थिक अवसर उत्पन्न करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु (फोकस) है। 
      • इस क्षेत्र में 21 लाख से अधिक बुनकर और 14.5 लाख कारीगर हैं। 
      • इट्सी के साथ यह जुड़ाव हमारे कारीगरों के लिए एक गेमचेंजर (बड़ा बदलाव लाने वाला) हो सकता है और यह सुनिश्चित करता है कि वे अपनी शर्तों पर उद्यमिता का पता लगाने तथा घरेलू व वैश्विक, दोनों खरीदारों तक पहुंचने में सक्षम हों।
    • पूरे विश्व में इट्सी की सोच ‘कीप कॉमर्स ह्यूमन’ है और यह छोटे विक्रेताओं तथा उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए अपने व्यापार व मंच की ताकत का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 
    • यह साझेदारी ईटीसी मंच पर लाखों खरीदारों के लिए क्षेत्र के स्वदेशी उत्पादों (कपड़ा, बेंत व बांस उत्पादों, सहायक उपकरण और कई अन्य श्रेणियां) को ऑनलाइन उपलब्ध कराने में सहायता करेगी। 
      • उत्तर पूर्व के सभी आठ राज्यों यानी अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के कारीगरों को ईटीसी पर जगह दी जाएगी।  

    पृष्ठ्भूमि: 

    • इट्सी के बारे में:
      • इट्सी इंक की स्थापना 2005 में हुई थी और इसका मुख्यालय न्यूयार्क के ब्रुकलिन में है। 
      • यह दो तरफा ऑनलाइन मार्केटप्लेस है, जो पूरे विश्व के लाखों उत्साही और रचनात्मक खरीदारों व विक्रेताओं को आपस में जोड़ता है। 
      • ये मार्केटप्लेस “कीप कॉमर्स ह्यूमन” के मिशन को साझा करते हैं और समुदायों को मजबूत करने व लोगों को सशक्त बनाने के लिए व्यापार तथा तकनीक की शक्ति का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
      • Etsy.com इसका प्राथमिक बाजार है और यह अद्वितीय व रचनात्मक वस्तुओं के लिए वैश्विक गंतव्य है। 
      • इट्सी पर खरीदार रचनात्मक उद्यमियों की तैयार तथा क्यूरेट की गई वस्तुओं से प्रेरित और आनंदित होने के लिए आते हैं। 
      • विक्रेताओं के लिए इट्सी कई प्रकार के उपकरण और सेवाएं प्रदान करती है।
    • इट्सी इंक के “हाउस ऑफ ब्रांड्स” पोर्टफोलियो में फैशन रीसेल मार्केटप्लेस- डीपॉप, म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट मार्केटप्लेस- रिवर्ब और ब्राजील स्थित हैंडमेड गुड्स मार्केटप्लेस इलो7 भी शामिल हैं। 
      • हर एक इट्सी इंक मार्केटप्लेस स्वतंत्र रूप से संचालित होती है। वहीं, यह उत्पाद, विपणन, तकनीक और ग्राहक सहायता में साझा विशेषज्ञता से लाभान्वित होती है।
    • एनईएचएचडीसी के बारे में:
      • 1977 में गठित उत्तर पूर्वी हस्तशिल्प और हथकरघा विकास निगम (एनईएचएचडीसी) एक ऐसा संगठन है, जो शिल्पकारों को संभावित बाजारों व उपभोक्ताओं से जोड़कर उत्तर पूर्वी क्षेत्र के स्वदेशी शिल्प को विकसित करने और बढ़ावा देने का प्रयास करता है। 
      • इसके अलावा उपभोक्ताओं के लिए सांस्कृतिक मूल्य जोड़ते हुए कलाकारों के लिए आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक अवसर उत्पन्न करता है। 
      • यह निगम भारत सरकार के उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) के प्रशासनिक नियंत्रण में है।
      • यह उत्तर पूर्व के सभी आठ राज्यों यानी अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के उत्पादों की एक श्रृंखला प्रदान करता है।
    • यह संगठन पूरे क्षेत्र के कारीगरों और बुनकरों से हस्तशिल्प व हथकरघा उत्पादों को खरीदता है और शिलांग, गुवाहाटी, कोलकाता, नई दिल्ली व बेंगलुरू में स्थित “पूर्वश्री” एम्पोरिया की अपनी श्रृंखला तथा चेन्नई में एक बिक्री संवर्धन कार्यालय के जरिए इनकी खुदरा बिक्री करता है। 
      • इसके अलावा यह प्रदर्शनियों और व्यापार मेलों के जरिए विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उत्पादों को बढ़ावा देता है। 
      • यह निगम कारीगरों और बुनकरों के कौशल व ज्ञान के उन्नयन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा सेमिनार भी आयोजित करता है।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

 आज इससे सम्बंधित कोई समाचार नहीं हैं।

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