22 जून 2022 : PIB विश्लेषण

विषयसूची:

  1. ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2022 के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री का संबोधन:
  2. भारतीय नौसेना कर्मियों के मर्चेंट नेवी में स्थानांतरण के लिए भारतीय नौसेना और शिपिंग महानिदेशालय के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर:
  3. सूर्य नूतन इनडोर सोलर कुकिंग सिस्टम:
  4.  रक्षा मंत्री तथा उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष ने द्विपक्षीय बातचीत में रक्षा सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की:
  5. केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने बंगाल सफारी सिलीगुड़ी में ‘टाइगर’ को लिया गोद, नाम दिया ‘अग्निवीर’:
  6. प्रधानमंत्री 26 से 28 जून 2022 तक जर्मनी और यूएई के दौरे पर रहेंगे:
  7. निर्यात पोर्टल का शुभारंभ किया जायेगा:
  8. शहरी सहकारी बैंक:
  9. ‘बीआरओ कैफे’:
  10. “बैंगनी क्रांति”:
  1. ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2022 के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री का संबोधन:

    सामान्य अध्ययन: 2
    अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध:
    विषय: भारत के हितों पर विभिन्न अंर्तष्ट्रीय संघठनो की नीतियां और राजनीति का प्रभाव।
    प्रारंभिक परीक्षा: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन।
    मुख्य परीक्षा: भारत एवं ब्रिक्स समूह संबंधों पर एक लेख लिखिए।
    प्रसंग: 

    • प्रधानमंत्री 22 जून को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन उद्घाटन सत्र में शामिल हुए।

    उद्देश्य:

    • चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आमंत्रण पर पीएम मोदी 23 और 24 जून को पांच देशों के समूह ब्रिक्स की  बिजनेस फोरम में शामिल होंगे।
    • यह सम्मेलन डिजिटली आयोजित होगा।
    • इसके उद्घाटन सत्र में पीएम मोदी ने कहा कि भारत की सफलता इनोवेशन और स्टार्टअप के साथ प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाले विकास पर आधारित है।

    विवरण:

    • पीएम मोदी ने कहा कि भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है।
      • इसमें व्यापक स्तर पर सुधार भी किया जा रहा है, इसी का असर साल 2025 तक देखने को मिलेगा, जब भारतीय डिजिटल इकोनॉमी की वैल्यू एक ट्रिलियन डालर तक पहुंच जाएगी।
      • प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ‘ईज ऑफ लिविंग’, पीएम गतिशक्ति के साथ बुनियादी ढांचे के निर्माण, डिजिटल परिवर्तन और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर जोर देती है।
      • पीएम मोदी ने कहा कि भारत ड्रोन, हरित ऊर्जा और अंतरिक्ष सहित हर क्षेत्र में इनोवेशन का समर्थन करता है।
    • प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत मे इनोवेशन के लिए विश्व में सबसे उत्तम इकोसिस्टम है। यह भारतीय स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या में साफ नजर आता है।
    • मौजूदा वक्‍त में देश के 70 हजार से अधिक स्टार्टअप्स में 100 से अधिक यूनिकार्न हैं। यही नहीं इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।
    • ब्रिक्स की स्थापना इस विश्वास से हुई थी कि उभरती हुई अर्थव्यवस्था का यह समूह वैश्विक ग्रोथ के इंजन के रूप में उभर सकता है।
    • आज जब पूरा विश्व कोविड के बाद के सुधार रिकवरी पर ध्यान लगा रहा है,ऐसे में ब्रिक्स देशों की भूमिका एक बार फिर बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है ।
    • महामारी से उत्पन्न आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिए हमने भारत में सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन (Reform,Perform and Transform) का मंत्र अपनाया है,और इस दृष्टिकोण के परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन से स्पष्ट हैं।
    • इस साल, इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.5 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है। जो हमें सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाता है।
    • उभरते हुए नवभारत (New India’) में हर क्षेत्र में परिवर्तनकारी बदलाव हो रहे हैं।
    • आज मैं आपका ध्यान चार प्रमुख पहलुओं पर केन्द्रित करना चाहता हूँ।
    • पहला: भारत की वर्तमान आर्थिक, पुनः प्राप्ति (economic recovery) का एक प्रमुख स्तम्भ प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाली वृद्धि है।
    • हम हर सेक्टर में इनोवेशन को सपोर्ट कर रहे हैं।
    • हमने स्पेस, ब्लू इकॉनमी, ग्रीन हाइड्रोजन, क्लीन एनर्जी, ड्रोन्स, जीओ-स्पेशल, डाटा, जैसे कई क्षेत्रों में इनोवेशन-फ्रेंडली पॉलिसीस बनाई हैं।
    • आज भारत में इनोवेशन के लिए विश्व में सबसे उत्तम इको-सिस्टम है, जो भारतीय स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या में दिखता है।
    • दूसरा: महामारी के दौरान भी भारत ने व्यापार करने में आसानी (Ease of doing business) सुधारने के लिए अनेकों प्रयास जारी रखे।
    • व्यापार पर अनुपालन बोझ (compliance burden) कम करने के लिए हज़ारों नियमों में बदलाव किया गया है।
    • सरकारी पॉलिसीस और प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता और स्थिरता लाने के लिए बड़े पैमाने पर काम हो रहा है।
    • तीसरा:भारत में आधारभूत संरचना को व्यापक स्तर पर सुधारा भी जा रहा है, और उसका विस्तार भी हो रहा है। इसके लिए भारत ने एक नेशनल मास्टर प्लान बनाया है।
    • और हमारी राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (National Infrastructure pipeline )के तहत 1.5 ट्रिलियन डॉलर के निवेश के अवसर हैं।
    • चौथा: भारत में आज जिस तरह का डिजिटल परिवर्तन (Transformation) हो रहा है,यह विश्व में पहले कभी नहीं देखा गया।
    • 2025 तक भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था की 1 ट्रिलियन डॉलर पहुँच जायेगी।
    • डिजिटल क्षेत्र की ग्रोथ से वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी को भी प्रोत्साहन मिला है।
    • हमारे IT क्षेत्र में काम करने वाले 4.4 मिलियन प्रोफेशनल्स में लगभग 36% महिलाएं हैं।
    • प्रौद्योगिकी आधारित वित्तीय समावेशन (Technology-based financial inclusion) का सबसे अधिक लाभ भी हमारी ग्रामीण महिलाओं को मिला है।
    • ब्रिक्स महिला व्यापार गठबंधन (Women Business Alliance ) भारत में हो रहे इस परिवर्तनकारी (transformative ) बदलाव पर एक स्टडी कर सकता है।
    • इसी तरह नवाचार के नेतृत्व वाली आर्थिक सुधार (innovation-led economic recovery ) पर भी हमारे बीच उपयोगी संवाद बन सकता है।
    • मेरा सुझाव है कि ब्रिक्स व्यापार मंच (Business Forum ) हमारे स्टार्टअप्स के बीच नियमित आदान-प्रदान के लिए एक प्लेटफार्म विकसित करे।
  2. भारतीय नौसेना कर्मियों के मर्चेंट नेवी में स्थानांतरण के लिए भारतीय नौसेना और शिपिंग महानिदेशालय के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर:

    सामान्य अध्ययन: 3
    आंतरिक सुरक्षा:
    विषय: शासन के महत्वपूर्ण पहलू, पारदर्शिता एवं जवाबदेही, प्रतिरूप, सफलताएं और सीमाएं।
    मुख्य परीक्षा:  यह समझौता ज्ञापन किस प्रकार नीली अर्थव्यवस्था सहित समुद्री क्षेत्र पर भारत सरकार के फोकस के साथ-साथ कुशल और प्रशिक्षित मानव संसाधनों के इष्टतम उपयोग के भी अनुरूप है। टिपण्णी कीजिए।
    प्रसंग: 

    • भारतीय नौसेना के सेवारत और सेवानिवृत्त दोनों तरह के कर्मियों को मर्चेंट नेवी में स्थानांतरित करने के लिए भारतीय नौसेना (आईएन) और नौवहन महानिदेशालय के बीच 20 जून 2022 को एक ऐतिहासिक समझौता हुआ ।

    उद्देश्य:

    • इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से, नौवहन महानिदेशालय ने अंतरराष्ट्रीय एसटीसीडब्ल्यू (नाविकों के लिए प्रशिक्षण, प्रमाणन और निगरानी के मानक) परंपरा के अनुसार भारतीय नौसेना कर्मियों के प्रमाणीकरण की कल्पना की है, जो वैश्विक नाविकों में भारतीय उपस्थिति और हिस्सेदारी का विस्तार करेगा।
    • यह समझौता ज्ञापन नीली अर्थव्यवस्था सहित समुद्री क्षेत्र पर भारत सरकार के फोकस के साथ-साथ कुशल और प्रशिक्षित मानव संसाधनों के इष्टतम उपयोग के भी अनुरूप है।

    विवरण:

    • इस बदलाव को प्रभावी करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया 2022 के डीजीएस आदेश 17 के माध्यम से जारी की गई है।
      • यह योजना नौसेना कर्मियों को आवश्यक ब्रिजिंग पाठ्यक्रमों और परीक्षाओं से गुजरने के बाद और कुछ मामलों में एसटीसीडब्ल्यू प्रावधानों के तहत अनिवार्य न्यूनतम व्यापारी जहाज समुद्री सेवा पूरी कर सक्षमता का प्रमाण पत्र प्राप्त करना सुनिश्चित करेगी।
      • यह आईएन कर्मियों को भारत में और साथ ही दुनिया भर में शिपिंग कंपनियों में मर्चेंट जहाजों पर विभिन्न पदनामों के लिए सहज स्थानांतरण में सहायता करेगा।
    • इस स्थानांतरण योजना को काफी परिश्रम और अंतर्राष्ट्रीय नियमों सहित कई कारकों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
    • इन योजनाओं में कई प्रावधान हैं जिनके तहत मर्चेंट नेवी में शीर्ष रैंक तक भी आईएन कर्मियों की नियक्ति संभव हो सकेगी।
    • नौसेना में पर्याप्त अनुभव वाले आईएन कर्मी अब समुद्री क्षेत्र में विदेश जाने वाले जहाजों पर सीधे प्रमुख  और इंजीनियरिंग क्षेत्र में मुख्य अभियंता के पद नियुक्त हो सकेंगे।
  3. सूर्य नूतन इनडोर सोलर कुकिंग सिस्टम:

    सामान्य अध्ययन: 3
    विज्ञानं एवं प्रोधोगिकी:
    विषय: पारंपरिक एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नवाचार एवं निवेश बढ़ाना,आमजन को इसके लिए प्रोहत्साहित करना।
    प्रारंभिक परीक्षा: सूर्य नूतन इनडोर सोलर कुकिंग सिस्टम ।
    प्रसंग: 

    • रसोई को बिजली देने के लिए एक व्यवहार्य सौर समाधान के लिए इंडियन ऑयल तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक स्वदेशी सोलर कुक टॉप “सूर्य नूतन” विकसित किया है।

    उद्देश्य:

    • सूर्य नूतन में देश की ऊर्जा सुरक्षा के परिदृश्य को बदलने की क्षमता है, क्योंकि भारत वर्तमान में अपनी एलपीजी आवश्यकताओं का 50 प्रतिशत आयात करता है।
    • यह देश में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को भी काफी कम करता है और हमारे नागरिकों को जीवाश्म ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अत्यधिक उतार-चढ़ाव की चिंता से भी मुक्त रखता है।

    विवरण:  

    सूर्य नूतन इनडोर सोलर कुकिंग सिस्टम:

    मुख्य विशेषताएं:

    • सूर्य नूतन एक स्थान पर स्थापित, रिचार्जेबल और रसोई से हमेशा जुड़ी हुई एक इनडोर सोलर कुकिंग प्रणाली है।
    • यह इंडियन ऑयल के अनुसंधान एवं विकास केंद्र, फरीदाबाद द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया एक पेटेंट उत्पाद है।
    • यह सूर्य के माध्यम से चार्ज करते समय ऑनलाइन कुकिंग मोड प्रदान करता है जो सिस्टम दक्षता को अधिकतम करता है और सूर्य से ऊर्जा का सर्वाधिक उपयोग सुनिश्चित करता है।
    • यह एक हाइब्रिड मोड पर काम करता है (अर्थात सौर और सहायक ऊर्जा स्रोत दोनों पर एक साथ काम कर सकता है) जो सूर्य नूतन को सभी मौसमों के लिए एक विश्वसनीय खाना पकाने का साधन बनाता है।
    • सूर्य नूतन का इन्सुलेशन डिजाइन विकिरण और प्रवाहकीय गर्मी के नुकसान को कम करता है।
    • सूर्य नूतन तीन अलग-अलग मॉडलों में उपलब्ध है: सूर्य नूतन का प्रीमियम मॉडल (नाश्ता + दोपहर का भोजन + रात का खाना) चार लोगों के परिवार के लिए पूरा भोजन बना सकता है।
    • प्रारंभ में, बेस मॉडल के लिए उत्पाद की लागत लगभग 12,000 रुपये और शीर्ष मॉडल का  23,000 रुपये है।
      • हालांकि, आर्थिक लागत में काफी कमी आने की उम्मीद है।
      • यदि इसके टॉप मॉडल के लिए 12,000-14,000 रूपए की लागत आती है और एक वर्ष में 6-8 एलपीजी सिलेंडरों की खपत हो तो खरीदार को पहले 1-2 वर्षों में ही इस उत्पाद की लागत वसूल हो जाती है।
    • सूर्य नूतन का उपयोग सभी मौसमों और ऋतुओं में किया जा सकता है, जिसमें सूर्य लंबे समय तक या लगातार उपलब्ध नहीं रहता है, जैसे मानसून और अत्यधिक सर्दी।
    • सूर्य नूतन में किसी भी इनडोर उपकरण के लिए आवश्यक सभी सुरक्षा पहलू अंतर्निहित हैं।
    • सूर्य नूतन एक निम्नतम रखरखाव वाली प्रणाली है और उत्पाद काफी टिकाऊ है।
    • सूर्य नूतन एक मॉड्यूलर प्रणाली है और इसे आवश्यकता के अनुसार विभिन्न आकारों में डिजाइन किया जा सकता है।
    • उपरोक्त सुविधाओं के साथ, “आत्मनिर्भर होते भारत की नई उड़ान, सूर्य नूतन बनेगा किचन की नई पहचान” बनाना शामिल है।

    पृष्ठ्भूमि:

    • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा वर्तमान वैश्विक ऊर्जा संकट में उठाए जा रहे अन्य कई कदमों, जिसमें इथेनॉल सम्मिश्रण को 20 प्रतिशत तक बढ़ाना, सतत (एसएटीएटी) योजना के तहत कंप्रेस्ड बायो-गैस की खरीद मूल्य को 45 रुपये प्रति किलोग्राम से 54 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ाना, अन्वेषण और उत्पादन के तहत क्षेत्र को वर्तमान 7-8 प्रतिशत से 15  प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में बढ़ाना और हमारी रिफाइनरियों में ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को जोरदार तरीके से आगे बढ़ाना आदि के साथ-साथ ‘सूर्य नूतन’ शामिल है।
  4.  रक्षा मंत्री तथा उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष ने द्विपक्षीय बातचीत में रक्षा सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की:

    सामान्य अध्ययन: 2
    अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
    विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह और भारत से जुड़े समझौते या भारत के हितों को प्रभावित करना।
    मुख्य परीक्षा: भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय बातचीत में रक्षा सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा कीजिए।
    प्रसंग: 

    • रक्षा मंत्री तथा ऑस्ट्रेलिया के उप-प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने 22 जून, 2022 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक की।

    उद्देश्य:

    • दोनों मंत्रियों ने वर्तमान रक्षा सहयोग गतिविधियों की समीक्षा की, जो कोविड-19 महामारी की चुनौतियों के बावजूद बढ़ती रही है तथा रक्षा सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।

    विवरण:

    • भारत और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्रियों ने भारत-ऑस्ट्रेलिया विस्तृत रणनीतिक साझेदारी के रक्षा तथा सुरक्षा स्तंभों की समीक्षा की।
    • दोनों मंत्रियों ने पारस्परिक विश्वास और समझदारी, समान हितों तथा साझा मूल्यों, लोकतंत्र तथा विधि के शासन पर आधारित विस्तृत रणनीतिक साझेदारी को क्रियान्वित करने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
    • दोनों मंत्रियों ने रक्षा अभ्यासों तथा दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान की विविधता का स्वागत किया और भारत-ऑस्ट्रेलिया पारस्परिक लॉजिस्टिक सहायता व्यवस्था के माध्यम से संचालन सहयोग प्रारंभ करने पर बातचीत की।
    • दोनों मंत्रियों ने रक्षा अनुसंधान तथा सामग्री सहयोग पर भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की।
    • इस समूह की बैठक ऑस्ट्रेलिया में इस वर्ष के अंत में होगी। संयुक्त कार्य समूह रक्षा उद्योगों के बीच संबंधों को बढ़ाने की महत्वपूर्ण व्यवस्था है।
    • दोनों मंत्रियों ने सप्लाई चैन की लचीलता बढ़ाने तथा अपने रक्षा बलों को क्षमता प्रदान करने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।
    • दोनों पक्षों ने भारत तथा ऑस्ट्रेलिया के रक्षा औद्योगिक आधारों के बीच अवसरों को बढ़ाने के उपायों पर सहमति व्यक्त की।
    • दोनों मंत्रियों ने ऐतिहासिक जनरल रावत युवा अधिकारी आदान-प्रदान कार्यक्रम 2022 के उत्‍तरार्ध में प्रारंभ करने की योजना का स्वागत किया।
    • इस कार्यक्रम की घोषणा 21 मार्च, 2022 को दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच वर्चुअल शिखर बैठक के दौरान की गई थी।
    • भारत और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री ने रणनीतिक चुनौतियों तथा क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा की और स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी और समृद्ध तथा नियम आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साझा उद्देश्यों को दोहराया।
    • दोनों मंत्रियों ने अक्टूबर, 2022 में ऑस्ट्रेलिया के भारत-प्रशांत प्रयास अभ्यास में भारत की भागीदारी को लेकर आशा जताई।
  5.  केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने बंगाल सफारी सिलीगुड़ी में ‘टाइगर’ को लिया गोद, नाम दिया ‘अग्निवीर’:

    सामान्य अध्ययन: 3
    पारिस्थिकी:
    विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां,हस्तक्षेप,उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
    प्रारंभिक परीक्षा: जीव जंतु गोद अभियान।
    प्रसंग: 

    • केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बंगाल सफारी नॉर्थ बंगाल वाइल्ड एनिमल्स पार्क के निरीक्षण के दौरान एक साल के टाइगर (बाघ) को 1 साल के लिए गोद लिया व उसे ‘अग्निवीर’ नाम दिया।

    उद्देश्य:

    •  एडॉप्शन प्रोग्राम (गोद अभियान) के तहत लोगों में जागरूकता के लिए टाइगर को गोद लिया।

    विवरण:

    • लोगों को अधिक संख्या में जानवरों को गोद लेने को प्रेरित करने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने  आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर लोगों में जागरूकता के साथ केदारनाथ त्रासदी की मृतात्माओं  की याद में टाइगर गोद लिया है।
    • पर्यावरण संतुलन में जीव जंतुओं की प्रमुख भूमिका होती है। उनका संरक्षण जरूरी है। इसके लिए लोगों को नियमित रूप से जागरूक करते रहने की भी  जरूरत है।
  6.  प्रधानमंत्री 26 से 28 जून 2022 तक जर्मनी और यूएई के दौरे पर रहेंगे:

    सामान्य अध्ययन: 2
    अंतर्राष्ट्रीय संबंध:
    विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह और भारत से जुड़े समझौते या भारत के हितों को प्रभावित करना।
    प्रारंभिक परीक्षा: भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श (आईजीसी) बैठक।
    मुख्य परीक्षा:  भारत और जर्मनी के बीच मजबूत एवं घनिष्ठ साझेदारी एवं उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्कों से दोनों देशों को होने वाले लाभों एवं प्रभावों की चर्चा कीजिए।
    प्रसंग: 

    • प्रधानमंत्री मोदी 26-27 जून 2022 को जर्मनी की अध्‍यक्षता के तहत जी7 शिखर सम्मेलन के लिए जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज के निमंत्रण पर जर्मनी के श्लॉस एल्मौ का दौरा करेंगे।

    उद्देश्य:

    •  उम्‍मीद है कि शिखर सम्‍मेलन के दौरान प्रधानमंत्री पर्यावरण, ऊर्जा, जलवायु, खाद्य सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, महिला-पुरूष समानता और लोकतंत्र जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे।
    • इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों के तहत अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, सेनेगल और दक्षिण अफ्रीका जैसे अन्य लोकतांत्रिक देशों को भी आमंत्रित किया गया है।
    • इस शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री कुछ प्रतिभागी देशों के राजनेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।

    विवरण:

    • जी7 शिखर सम्मेलन के लिए यह निमंत्रण दरअसल भारत और जर्मनी के बीच मजबूत एवं घनिष्ठ साझेदारी एवं उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्कों की परंपरा को ध्यान में रखते हुए ही दिया गया है।
    • प्रधानमंत्री की पिछली जर्मनी यात्रा 2 मई 2022 को भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी परामर्श (आईजीसी) के छठे संस्करण के लिए हुई थी।
    • जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद प्रधानमंत्री 28 जून 2022 को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दौरे पर रहेंगे।
    • प्रधानमंत्री मोदी इसके साथ ही इस दौरान महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को यूएई के नए राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक के रूप में चुने जाने पर बधाई देंगे।
    • उसके बाद प्रधानमंत्री 28 जून को संयुक्त अरब अमीरात से प्रस्थान करेंगे।

प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की दृष्टि से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. निर्यात पोर्टल का शुभारंभ किया जायेगा:
    • प्रधानमंत्री 23 जून, 2022 को एक नया पोर्टल – निर्यात (एनआईआरवाईएटी) (राष्ट्रीय आयात-निर्यात वार्षिक व्यापार विश्लेषण रिकॉर्ड) लॉन्च करेंगे – जिसे भारत के विदेश व्यापार से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी समेत हितधारकों के लिए वन स्टॉप प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है।
  2. शहरी सहकारी बैंक:
    • केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री “शहरी सहकारी ऋण क्षेत्र की भविष्य की भूमिका” विषय पर राष्ट्रीय अनुसूचित और बहु-राज्य शहरी सहकारी बैंक तथा क्रेडिट सोसाइटी सम्मेलन के मुख्य अतिथि होंगे।
    • यह सम्मेलन “सहकार से समृद्धि” (सहकारिता के माध्यम से समृद्धि) के दृष्टिकोण को और मजबूत करेगा।
    • सम्मलेन के व्यावसायिक सत्रों में अनुसूचित और बहु-राज्य शहरी सहकारी बैंकों तथा क्रेडिट सोसाइटी एवं सहकारी ऋण क्षेत्र से संबंधित विभिन्न मुद्दे शामिल होंगे- जैसे शहरी सहकारी बैंकों की भविष्य की भूमिका और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें, शहरी सहकारी क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय सहकारी वित्त और विकास सहयोग एक व्यापक संगठन के रूप में एक गेम चेंजर, बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020 और इसके प्रभाव एवं विकास, बहु-राज्य समितियों के विशेष संदर्भ में वित्तीय क्षेत्र परिदृश्य में क्रेडिट सोसाइटी की भूमिका तथा सहकारी क्रेडिट सोसाइटी के विनियमन और कराधान आदि।
    • देश में ऐसे 197 बैंक हैं। यह देश में सहकारी समितियों और सहकारी बैंकों के गहरे रूप से जुड़े होने का संकेत देता है।
    • शहरी सहकारी बैंक, देश के सबसे पुराने बैंकिंग संस्थानों में से हैं।
    • वे एक सदी से भी अधिक समय से अस्तित्व में हैं।
    • समाज के विभिन्न समुदायों से जुड़े लोगों द्वारा इन बैंकों को संगठित और प्रबंधित किया जाता है; जिनमें शिक्षक, वकील, व्यापारी, डॉक्टर, इंजीनियर, सामाजिक कार्यकर्ता और अन्य शामिल हो सकते हैं और वे अपने सदस्यों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करते हैं।
  3. ‘बीआरओ कैफे’:
    • रक्षा मंत्रालय ने 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की सीमावर्ती सड़कों के विभिन्न इलाकों के 75 स्थानों पर सड़क किनारे कैफे स्थापित करने को मंजूरी दे दी है।

    • इसका उद्देश्य है पर्यटकों को बुनियादी सुविधायें प्रदान करना और सीमावर्ती इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को गति देना।

    • इस कदम से स्थानीय लोगों के लिये रोजगार भी पैदा होंगे।

    • सड़क किनारे स्थित इन सुविधाओं को ‘बीआरओ कैफे’ के नाम से जाना जायेगा।

    • बीआरओ की पहुंच दूर-दराज के सीमावर्ती इलाकों तक है और उन इलाकों की सामरिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ वह उत्तरी और पूर्वी सीमाओं में सामाजिक-आर्थिक उन्नति की दिशा में भी काम करता है।

    • सख्त जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों वाली इन सड़कों पर पर्यटकों की आवाजाही को आरामदेह बनाने के लिये, सड़कों के किनारे बहुपयोगी सुविधायें देने की जरूरत है।

    • इस योजना के तहत ‘बीआरओ कैफे सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत संचालित किय जायँगे ।

  4. “बैंगनी क्रांति”:
    • “बैंगनी क्रांति” ने कृषि-तकनीक स्टार्टअप पर ध्यान केंद्रित किया है।

    • उच्च मौद्रिक रिटर्न के कारण, जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में किसान बड़े स्तर पर पारंपरिक खेती से लैवेंडर जैसी सुगंधित फसलों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं।

    • सुगंधित फसलें सूखा और कीट प्रतिरोधी दोनों होती हैं।

    • सीएसआईआर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों जैसे ऐसी ही जलवायु परिस्थितियों वाले अन्य पहाड़ी राज्यों में भी सुगंधित फसलों की खेती शुरू करने की योजना बना रहा है।

    • सीएसआईआर द्वारा समर्थित केंद्र का अरोमा मिशन किसानों की मानसिकता को बदल रहा है और उनमें से अधिक से अधिक किसान कई उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले महंगे तेल निकालने के लिए लैवेंडर, लेमन ग्रास, गुलाब और गेंदे के फूल जैसी सुगंधित फसलों की खेती कर रहे हैं।

    • इन महंगे तेलों का उपयोग कमरे का स्प्रे बनाने, सौंदर्य प्रसाधन और बीमारियों के इलाज के लिए भी किया जा रहा है।

    • भारत की बैंगनी क्रांति के जन्मस्थान भद्रवाह में देश के पहले ‘लैवेंडर फेस्टिवल’ का उद्घाटन गत माह किया गया था।

    • अरोमा मिशन देश भर से स्टार्ट-अप और कृषकों को आकर्षित कर रहा है और पहले चरण के दौरान, सीएसआईआर ने 6,000 हेक्टेयर भूमि पर सुगंधित फसलों की खेती में मदद की तथा इसमें देश भर के 46 आकांक्षी जिलों को शामिल किया।

    • अरोमा मिशन के दूसरे चरण में, देश भर में 75,000 से अधिक कृषक परिवारों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से 45,000 से अधिक कुशल मानव संसाधनों को इसमें शामिल करने का प्रस्ताव है।

    • सीएसआईआर-आईआईआईएम ने जम्मू-कश्मीर के डोडा, रामबन, किश्तवाड़, कठुआ, उधमपुर, राजौरी, पुलवामा, अनंतनाग, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों में किसानों को लैवेंडर की खेती से परिचय कराया।

    • लैवेंडर की खेती ने जम्मू-कश्मीर के भौगोलिक दृष्टि से दूरदराज के इलाकों में किसानों और युवा उद्यमियों को रोजगार दिया है।

22 जून 2022 : PIB विश्लेषण –Download PDF Here

लिंक किए गए लेख में 21 जून 2022 का पीआईबी सारांश और विश्लेषण पढ़ें।

सम्बंधित लिंक्स:

Leave a Comment

Your Mobile number and Email id will not be published.

*

*