UPSC परीक्षा कम्प्रेहैन्सिव न्यूज़ एनालिसिस - 08 June, 2022 UPSC CNA in Hindi

08 जून 2022 : समाचार विश्लेषण

A.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

B.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

  1. नए आईएएस की प्रतिनियुक्ति नियमों पर रोक:

C.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

  1. बेड़ बैंक किस लिए अच्छा है?

D.सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

E.सम्पादकीय:

अर्थव्यवस्था:

  1. वैश्विक सुधार की बृहद छाया:

विविध:

  1. अपराध और कॉपीराइट उल्लंघन:

राज्यव्यवस्था:

  1. GST परिषद के फैसले का महत्व:

F. प्रीलिम्स तथ्य:

  1. नए नियमों के अनुसार सेवानिवृत्त अधिकारी CDS का पद धारण कर सकते हैं:
  2. खाद्य सुरक्षा सूचकांक में तमिलनाडु सबसे ऊपर:

G.महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. दो राज्य, एक पंचायत: कोटिया

H. UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

I. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

बेड़ बैंक किस लिए अच्छा है?

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था में नियोजन, संसाधन, विकास तथा रोजगार से संबंधित मुद्दे।

प्रारंभिक परीक्षा: बैड बैंक क्या है?

मुख्य परीक्षा: ‘बैड बैंक’ की आवश्यकता एवं अर्थव्यवस्था में क्रेडिट प्रवाह पर इसका प्रभाव।

संदर्भ:

  • हाल ही में, वित्त मंत्री ने घोषणा की कि नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (NARCL) इंडिया डेट रिजॉल्यूशन कंपनी (IDRCL) के साथ मिलकर बैंकों से ख़राब लोन का प्रथम फेहरिस्त लेगी और समस्या को सुलझाने का प्रयास करेगी।

‘बैड बैंक’ क्या है?

  • बैड बैंक एक वित्तीय इकाई है जिसे बैंकों से गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA), या खराब ऋण खरीदने के लिए स्थापित किया गया है।
  • बैड बैंक की स्थापना का उद्देश्य बैंकों की बैलेंस शीट से ख़राब लोन को हटाकर और बिना किसी बाधा के ग्राहकों को फिर से उधार देने के लिए उनके बोझ को कम करने में मदद करना है।
  • बैड बैंक के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Bad Bank

बैड बैंक की स्थापना के लाभ:

  • यह एक ही विशिष्ट इकाई के तहत बैंकों के सभी खराब ऋणों को समेकित करने में मददगार साबित हो सकता है।

बैड बैंक के नुकसान:

  • कई आलोचकों के अनुसार खराब ऋणों से निपटने के लिए बैड बैंक की स्थापना से कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं ।
  • RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने इसके विपक्ष में तर्क दिया है कि सरकार द्वारा समर्थित बैड बैंक केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की खराब संपत्ति को खरीदेगा।
  • जब इन संस्थाओं को दिया जाने वाला प्रोत्साहन अनिवार्य रूप से समान होगा तब सरकार की एक जेब से दूसरी जेब में संपत्ति के हस्तांतरण से इन बैड लोन की समस्या का समाधान भी हो जाएगा ।
  • अन्य विश्लेषकों का मानना है कि एक निजी क्षेत्र के बैड बैंक के विपरीत, सरकारी बैड बैंक को तनावग्रस्त संपत्तियों के निपटान के लिए बहुत अधिक भुगतान करना पड़ेगा।

‘बैड बैंक’ की आवश्यकता बैड लोन संकट को कम करने के लिए हैं:

  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में खराब ऋण संकट के पीछे एक प्रमुख कारण उनके स्वामित्व की प्रकृति है।
  • निजी बैंकों के विपरीत, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का प्रबंधन नौकरशाहों द्वारा किया जाता है, जो अक्सर इन उधारदाताओं की लाभप्रदता सुनिश्चित करने के लिए बहुत अधिक प्रतिबद्ध नहीं होते हैं।
  • अतः बैड बैंक के माध्यम से बैंकों को इस समस्या से बाहर निकालने से वास्तव में ख़राब लोन संकट की मूल समस्या का समाधान नहीं होगा ।
  • इसके अलावा,इसमें नैतिक खतरा एक बड़ा जोखिम है,क्योंकि वाणिज्यिक बैंक जिन्हें बैड बैंक द्वारा सहारा दिया जाता है, उनके पास इसे सुधारने के तरीके बहुत कम है।

अर्थव्यवस्था में ऋण प्रवाह पर बैड बैंक एवं इसके प्रभाव:

  • कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बैड बैंक संकटग्रस्त बैंकों के बही-खाते से डूबे कर्ज को खत्म कर इन बैंकों द्वारा फंसे हुए ऋणों के बदले बंधक रखी गई 5 लाख करोड़ से अधिक की पूंजी को छुड़ाने में सहायक हो सकता है।
  • इससे बैंकों को अपने ग्राहकों को अधिक ऋण देने के लिए मुक्त पूंजी का उपयोग करने की स्वतंत्रता मिलेगी।
  • एक विचार यह भी है कि यदि बैंक केवल अपने खराब ऋण से छुटकारा पाना चाहते हैं तो वे अपनी बैलेंस शीट में जो अप्रयुक्त धन पड़ा है, वे उसका उपयोग कर सकते हैं।

वैश्विक अनुभव:

  • अतीत में यू.एस., जर्मनी, जापान और अन्य देशों में भी बैड बैंक की स्थापना की कोशिश की गई थी ।
  • संकटग्रस्त संपत्ति राहत कार्यक्रम जिसे (The troubled asset relief program) TARP के नाम से भी जाना जाता हैं, को वर्ष 2008 में आये वित्तीय संकट के बाद यू.एस. ट्रेजरी द्वारा बैड बैंक के विचार से प्रेरित हो कर शुरू किया गया था।

सारांश:

  • भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अशोध्य ऋणों की समस्या चिरस्थायी है।
    • बैड बैंक स्थापित करने का निर्णय पूंजी को मुक्त कर बैंकों के पूंजी बफर में सुधार करने में सहयक हो सकता है, यह बैंकों को फिर से उधार देने और अधिक आत्मविश्वासी बनाने में भी मदद कर सकता है।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

नए आईएएस की प्रतिनियुक्ति नियमों पर रोक:

विषय: लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।

प्रारंभिक परीक्षा: आईएएस (कैडर) नियम, 1954; प्रस्तावित संशोधन

मुख्य परीक्षा: आईएएस (कैडर) नियम, 1954 में प्रस्तावित संशोधनों से संबंधित चिंताएं।

संदर्भ:

  • कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने सूचना के अधिकार (RTI) के जवाब में कहा कि अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के प्रस्ताव पर अभी अंतिम विचार किया जाना बाकी है और वह “विश्वासपूर्ण संबंध” (fiduciary relationship) के करण इस जानकारी का खुलासा नहीं कर सकते है।
  • आईएएस (संवर्ग) नियमों में प्रस्तावित संशोधनों के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Proposed amendments to the IAS (Cadre) Rules

सम्पादकीय:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

अर्थव्यवस्था:

वैश्विक सुधार की बृहद छाया:

विषय: आर्थिक वृद्धि और विकास।

मुख्य परीक्षा: वैश्विक आर्थिक सुधार पर महामारी और भू-राजनीतिक तनाव के सामूहिक प्रभावों पर चर्चा करें।

संदर्भ:

  • इस लेख में वैश्विक आर्थिक सुधार पर महामारी और रूस-यूक्रेन संघर्ष के प्रभाव पर चर्चा की गई है।

अवस्थिति अवलोकन:

  • विश्व अर्थव्यवस्था जो महामारी के झटकों से अभी उबर ही रही थी, को रूस-यूक्रेन संघर्ष से उत्पन्न चुनौतीयों का सामना करना पड़ा है।
  • उन्नत और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच की खाई बढ़ती ही जा रही है जो आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर वैश्विक विकास को प्रभावित कर रही है।
  • प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में लगे लॉकडाउन ने भी आपूर्ति श्रृंखला में अड़चनें पैदा की तथा आर्थिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।
  • विकास पर दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाले प्रमुख मैक्रोइकॉनॉमिक कारको में शामिल हैं:
    • लगातार बढ़ते कीमत का दबाव विशेष रूप से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है।
    • पूंजी का बहिर्वाह और वित्तीय स्थितियों का कड़ा होना मध्यम एवं दीर्घ अवधि में निवेश और विकास को प्रभावित करता है।

प्रभाव:

मुद्रा स्फ़ीति :

  • उच्च मुद्रास्फीति एक वैश्विक चिंता है तथा वर्तमान में इसके लंबे समय तक उच्च स्तर पर बने रहने का अनुमान है।
  • मुद्रास्फीति के कारण ऊर्जा और खाद्य कीमतों में हुई वृद्धि उभरती चिंताओं में प्रमुख हैं।
  • भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण जीवाश्म ईंधन की आपूर्ति में कमी, तेल एवं गैस की कीमतों में हुई वृद्धि के परिणामस्वरूप दुनिया भर में ऊर्जा लागत में समग्र वृद्धि हुई है।
  • विकासशील देशों में बढ़ती खाद्य कीमतों का व्यापक प्रभाव पड़ा है जिससे समग्र मुद्रास्फीति वृद्धि हुई है।
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, 2023 में उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति 2.5% और उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में 6.5% रह सकती है।

प्रभावित परिवार :

  • विकासशील देशों में, वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का समाज के विभिन्न वर्गों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है।
  • परिवारों पर मूल्य वृद्धि का प्रभाव समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा उपभोग किए जाने वाले भोजन के प्रकार पर भी निर्भर करता है।
  • उच्च ऊर्जा की कीमतें बढ़ती परिवहन लागत और उर्वरक जैसे इनपुट की कीमतों में वृद्धि के परिणामस्वरूप अनाज की कीमतों को प्रभावित करती हैं।
  • यदि आपूर्ति में कमी और खाद्य और ईंधन की कीमतों में वृद्धि जारी रहती है, तो गरीबी के बढ़ने से जनाक्रोश पैदा होने का जोखिम बढ़ सकता है।

पूंजी बहिर्वाह:

  • विकासशील बाजारों के विकास के लिए पूंजी का बहिर्वाह एक बाधा रही है।
  • इससे उभरते बाजारों को काफी नुकसान हुआ है।
  • मुद्रा मूल्यह्रास और बाहरी क्षेत्र की सख्त स्थितियों के कारण विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के विकास में उतार-चढ़ाव जारी है।
  • घरेलू राजकोषीय नीति ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
  • वैश्विक ब्याज दरों में वृद्धि, कई अर्थव्यवस्थाओं के साथ अनुबंधित वित्तीय व्यवस्था को कमजोर कर देगी।

5 जून 2022 को CNA में इस मुद्दे के बारे में और पढ़ें:

भावी नीति:

  • यह अनिवार्य है कि नीति की सख्ती वर्तमान आर्थिक परिदृश्य और आर्थिक गतिविधियों के सभी स्तरों से सुमेलित हो।
  • केंद्रीय बैंक संभवतः मौद्रिक रुख में बदलाव का संकेत दे सकते हैं ताकि विश्वसनीयता बरकरार रहे और नीतिगत कार्रवाइयों के साथ मुद्रास्फीति दरों को स्थिर किया जा सके।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप से उत्पन्न बाजार असंतुलन को भी पूंजी के बहिर्वाह द्वारा दूर किया जा सकता है।
  • खर्च कम करना और राजकोषीय मजबूती जरूरी है।
  • ऐसा समेकन समाज के कमजोर वर्गों के लिए लक्षित विकास योजनाओं पर होने वाले सरकारी खर्च को कम नहीं होने देगा।
  • व्यय का विनियमन इस प्रकार होना चाहिए कि इसके तहत लक्षित आय समर्थन उपायों को कम लागत के साथ कमजोर लोगों तक पहुचाया जा सके।
  • ऊर्जा संक्रमण के प्रभावों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने के लिए संभावित श्रम बाजार और आय समर्थन नीतियों की आवश्यकता होगी जो रोजगार वृद्धि को बाधित किए बिना श्रमिकों को सुरक्षा प्रदान करें।

सारांश:

  • वैश्विक आर्थिक संकट की चुनौतियों का सामना करने और उनसे निपटने के लिए, विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में नीति निर्माताओं को सख्त वित्तीय स्थितियों और भू-राजनीतिक अस्थिरता के प्रति अपनी रणनीति को लचीला और मजबूत करना चाहिए।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

विविध:

अपराध और कॉपीराइट उल्लंघन:

विषय: बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित मुद्दे।

प्रारंभिक परीक्षा: कॉपीराइट अधिनियम।

मुख्य परीक्षा: एक संज्ञेय अपराध के रूप में कॉपीराइट उल्लंघन का विश्लेषण करें।

संदर्भ:

  • हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कॉपीराइट उल्लंघन पर एक निर्णय दिया है जिसके दूरगामी परिणाम होंगे।

कॉपीराइट उल्लंघन का क्या अर्थ है?

  • स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी अविष्कार या वस्तु का उपयोग करने का कार्य कॉपीराइट उल्लंघन माना जाता है।
  • यह अक्सर पायरेसी से जुड़ा होता है।
  • इसमे किसी कार्य की मौलिकता पर हमला करना है, जिससे किसी के बौद्धिक संपदा अधिकारों में हस्तक्षेप होता है।
  • इस अपराध के लिए जालसाजी से संबंधित तथा कभी-कभी आपराधिक न्याय प्रणाली के तहत मुकदमा चलाया जाता है।
  • कॉपीराइट विवादों को वार्ता, नोटिस या मुकदमेबाजी के माध्यम से हल किया जाता है।
  • कोई कला या संगीत या साहित्य एक कॉपीराइट तब बनता है जब किसी माध्यम को उसकी मौलिकता के साथ निर्धारित किया जाता है।
  • भारत में, कॉपीराइट अधिनियम की धारा 52 में कॉपीराइट उल्लंघन की सीमाओं और अपवादों की रूप रेखा दी गई है।
  • कॉपीराइट कानून में ऐसे प्रावधान हैं जो निष्पक्ष व्यवहार तथा उन परिस्थितियों की व्याख्या करते हैं जिनके तहत कॉपीराइट कार्य के कुछ हिस्सों को पुन: प्रस्तुत किया जा सकता है।

फैसले के बारे में:

  • निट प्रो इंटरनेशनल बनाम NCT राज्य के मामले में, शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया कि दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) 1973 के तहत कॉपीराइट उल्लंघन एक संज्ञेय अपराध है।
  • यह निर्णय कॉपीराइट उल्लंघन के संबंध में शिकायतों की जांच में सहायक होगा।
  • कॉपीराइट उल्लंघन के मामलों में जांच अब न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा अपराध के संज्ञान के बिना शुरू की जा सकती है।
  • असंज्ञेय अपराधों के मामले में, पुलिस न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा अपराध के संज्ञान के बाद ही जांच कर सकती है।

संभावित नतीजे:

  • यह निर्णय के कारण पुलिस द्वारा मालिक, विशेष रूप से सॉफ्टवेयर एवं संगीत उद्योगों से संबंधित कॉपीराइट के उल्लंघनकर्ताओं को धमकी/ब्लैकमेल किया जा सकता है।
  • यह निर्णय कॉपीराइट उल्लंघन अपराध को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाता है, जो आरोपी के जमानत के अधिकार को छीन लेता है और मामले के न्यायिक निर्धारण की जिम्मेदारी अदालतों पर स्थानांतरित करता है।
  • कई लोगों ने इस फैसले को पुलिस को जांच की बेलगाम शक्ति प्रदान करने के तरीके के रूप में माना है।
  • जो बिना उचित प्रशिक्षण दिए कॉपीराइट उल्लंघन से संबंधित जांच करने में पुलिस की दक्षता की कमी को सवालों के घेरे में लाता है।

लिंक में कॉपीराइट अधिनियम (Copyrights Act) के बारे में पढ़ें:

निष्कर्ष:

  • कॉपीराइट उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पुलिस को लोगों की स्वतंत्रता का उल्लंघन करने का अधिकार देगा, जब तक कि कानून में संशोधन न केवल कॉपीराइट उल्लंघन के विभिन्न कृत्यों के बीच अंतर करने के लिए किया जाता है, बल्कि आपराधिक जांच के लिए पूर्व शर्त के रूप में पूर्व न्यायिक संज्ञान की भी आवश्यकता होती है।

सारांश:

  • यह संबोधित किया जाना चाहिए कि एक संज्ञेय अपराध के रूप में कॉपीराइट उल्लंघन की मान्यता पुलिस द्वारा कॉपीराइट कानून के दुरुपयोग के रास्ते खोल देगी और नागरिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करेगी।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राज्यव्यवस्था:

GST परिषद के फैसले का महत्व:

विषय: संघीय ढांचे से संबंधित मुद्दे और चुनौतियां।

प्रारंभिक परीक्षा: GST एवं GST परिषद

मुख्य परीक्षा: GST परिषद की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों की चर्चा करें।

संदर्भ:

  • यूनियन ऑफ इंडिया बनाम मोहित मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के मामले में सर्वोच न्यायालय ने कहा है कि GST परिषद की सिफारिशें केंद्र या राज्यों पर बाध्यकारी नहीं हैं।

विश्लेषण:

  • इस फैसले ने कुछ सवाल उठाए हैं जैसे कि GST परिषद (GST Council) किस हद तक काम करती है और परिषद की सिफारिशों में न्यायिक हस्तक्षेप कहाँ तक किया जा सकता है।
  • दूसरी ओर, कुछ राज्यों ने शीर्ष अदालत के फैसले पर सहमति जताते हुए कहा कि GST पर कानून बनाने के लिए राज्यों की स्वायत्तता को इस फैसले के माध्यम से बहाल किया गया है।

25 मई 2022 को CNA में इस मुद्दे के बारे में और पढ़ें:

निष्कर्ष:

  • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि GST परिषद की सिफारिशें अनिवार्य तथा राज्यों एवं केंद्र पर बाध्यकारी नहीं हैं। इसका अर्थ यह है कि लोकतंत्र में कानून बनाने की शक्ति संसद/विधानसभा को उन लोगों द्वारा दी जाती है जिन्होंने सामूहिक निर्णयों के लिए अपनी निजी स्वायत्तता के साथ समझौता कर लिया है।

सारांश:

  • लोकतंत्र में, सिफारिशों की शक्ति सहकारी संघवाद और सहयोगात्मक निर्णय लेने के आधार पर दी जानी चाहिए।

प्रीलिम्स तथ्य:

1. नए नियमों के अनुसार सेवानिवृत्त अधिकारी CDS का पद धारण कर सकते हैं:

सुरक्षा चुनौतियां:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

विषय: विभिन्न सुरक्षा बल और एजेंसियां और उनका जनादेश।

प्रारंभिक परीक्षा: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS)।

संदर्भ:

  • हाल ही में, सरकार ने नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के चयन के नियमों में बदलाव के लिए एक अधिसूचना जारी की हैं।

चयन के नए नियम:

  • इस संशोधित नियम के अनुसार सेवारत या सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल-रैंक का अधिकारी ही इस पद के लिए पात्र होगा, लेकिन इस में यह शर्त जोड़ी गई हैं कि नियुक्ति के समय सम्बन्धित व्यक्ति की आयु 62 वर्ष से कम होनी चाहिए ।
  • तीनों सशस्त्र बलों के प्रमुख, जो 62 वर्ष की आयु में या इस पद पर 3 वर्ष की सेवा (जो भी पहले हो) करने के बाद सेवानिवृत्त होते हैं, तब तक इस पद को धारण करने के पात्र नहीं होंगे यदि सेवानिवृत्ति से पहले उनका इस पद के लिए चयन नहीं हुआ हो या 62 वर्ष की आयु से पहले सेवानिवृत्त नहीं हो ।
  • सरकार थ्री स्टार धारक अधिकारियों में से भी CDS का चुनाव कर सकती है।
  • चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए:Chief of Defence Staff

2. खाद्य सुरक्षा सूचकांक में तमिलनाडु सबसे ऊपर:

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था एवं शासन:

विषय: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां,हस्तक्षेप, उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

प्रारंभिक परीक्षा: राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक (SFSI)।

संदर्भ:

  • हाल ही में, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक (SFSI) प्रकाशित किया गया हैं।

राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक (एसएफएसआई) में राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों का प्रदर्शन:

  • 2022 में तमिलनाडु राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक (SFSI) में सबसे ऊपर है, इसके बाद गुजरात और महाराष्ट्र का स्थान आता हैं।
  • छोटे राज्यों में गोवा पहले स्थान पर है, उसके बाद मणिपुर और सिक्किम का स्थान है।
  • केंद्र शासित प्रदेशों में, जम्मू और कश्मीर, दिल्ली और चंडीगढ़ ने पहला, दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया।

राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक (एसएफएसआई) से सम्बंधित जानकारी:

  • राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक (SFSI) स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा निर्धारित पांच मानकों के आधार पर राज्यों के प्रदर्शन को मापता है।
  • इसको भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा रेटिंग दी जाती है।
  • नागरिकों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने के लिए राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को प्रेरित करने के उद्देश्य से वर्ष 2018-19 से इस सूचकांक शुरू किया गया था।

महत्वपूर्ण तथ्य:

1. दो राज्य, एक पंचायत: कोटिया की स्थिति बेहतर नहीं हो सकती

  • फागुनसिनेरी (Phagunasineri ) भारत का एक गाँव है जिसमें दो “निर्वाचित” सरपंच हैं,और कल्याणकारी योजनाओं को लागू करते हैं।
  • फागुनसिनेरी गाँव ओडिशा-आंध्र प्रदेश के साथ लगे पहाड़ी जंगलों में बसा हुआ है।
  • “दोहरी नागरिकता” को लेकर दोनों राज्यों के बीच सात दशक से अधिक पुराना सीमा विवाद है जो हाल के दिनों में अपने चरम पर है।
  • दोनों राज्यों द्वारा यहाँ के जनजातीय लोगों के लिए बहुत सारी कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई हैं।
  • ओडिशा और आंध्र प्रदेश ने कोटिया ग्राम पंचायत या राजस्व वाले 21 गांवों के कोटिया समूह के गांवों पर एक-दूसरे के प्रशासनिक नियंत्रण को चुनौती दी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न 1. जनजातीय विद्रोहों और उनसे संबंधित व्यक्तित्वों के सन्दर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: (स्तर: कठिन)

आदिवासी विद्रोह व्यक्तित्व

  1. 1830 का खासी विद्रोह तिरोट सिंग
  2. 1830 का कोल विद्रोह बुद्ध भगत
  3. 1850 का संथाल विद्रोह सिद्धू मुर्मू

उपर्युक्त में से कौन सा युग्म सही सुमेलित है ?

(a) केवल 1 युग्म

(b) केवल 2 युग्म

(c) उपर्युक्त सभी युग्म

(d) उपर्युक्त में से कोई युग्म नहीं

उत्तर: c

व्याख्या:

  • खासी विद्रोह वर्ष 1833 में खासी और जयंतिया पहाड़ियों के बीच घिरे भूमि क्षेत्र में ब्रिटिश शासन की नीतियों के विरोध में हुआ था।
  • विद्रोह का नेतृत्व तिरोट सिंग सियम (Tirot Sing Syiem) ने किया था। इस लड़ाई में खासी हार गए और अंग्रेजों ने पहाड़ी इलाकों पर कब्जा कर लिया।
  • वर्ष 1831 में, छोटा नागपुर के कोल आदिवासी, जो ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) के एजेंटों द्वारा किये जा रहे अत्यधिक शोषण से परेशान थे,ने EIC के खिलाफ विद्रोह कर दिया।
  • यह विद्रोह कोल बुद्ध भगत, जोआ भगत, झिंदराय मानकी, मदारा महतो और अन्य के नेतृत्व में हुआ था ।
  • वर्ष 1857 के महान विद्रोह से दो साल पहले 30 जून 1855 को,दो संथाल भाइयों सिद्धू और कान्हू मुर्मू ने 10,000 संथालों के साथ अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की घोषणा की। जिसमे आदिवासियों ने अंग्रेजों को उनकी मातृभूमि से भगाने की शपथ ली थी।

प्रश्न 2. सतह-स्तर के ओजोन प्रदूषक के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं ? (स्तर: मध्यम)

  1. ओजोन एक द्वितीयक प्रदूषक है।
  2. पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नए वायु गुणवत्ता मानकों के अनुसार, ओजोन के लिए, सीमाएं क्रमशः 1 घंटे और 8 घंटे के औसत मान के रूप में 100 और 180 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हैं।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: a

व्याख्या:

  • ट्रोपोस्फेरिक या जमीनी स्तर का ओजोन (Ground-level ozone) एक रंगहीन और अत्यधिक परेशान करने वाली गैस है जो पृथ्वी की सतह के ठीक ऊपर बनती है।
  • इसे “द्वितीयक” प्रदूषक कहा जाता है क्योंकि यह तब उत्पन्न होती है, जब दो प्राथमिक प्रदूषक सूर्य के प्रकाश और स्थिर हवा में प्रतिक्रिया करते हैं।
  • दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के आंकड़े बताते हैं कि विभिन्न निगरानी स्टेशनों पर स्थापित राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों के अनुसार कई दिनों से ओजोन का स्तर 8 घंटे के मानक स्तर से 100 माइक्रोग्राम/घन मीटर ( µg/m3 ) और प्रति घंटा 180 माइक्रोग्राम/घन मीटर (µg/m3) के मानक से काफी ऊपर था।

प्रश्न 3. भारत में ई-कचरे के संबंध में निम्नलिखित कथन में से कौन सा/से सही है/हैं? (स्तर: सरल)

  1. विगत दो वर्षों से भारत दुनिया का सबसे बड़ा ई-कचरा का उत्पादक बना हुआ है।
  2. भारत में उत्पादित ई-कचरे का 90% से अधिक का एकत्रीकरण और निपटान वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है।

विकल्प:

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: d

व्याख्या:

  • भारत चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक कचरा पैदा करने वाला देश है। अतः कथन 1 गलत है।
  • हाल के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 2019-20 में उत्पन्न ई-कचरे का केवल 22.7 प्रतिशत ही एकत्र, नष्ट और उसका पुनर्नवीनीकरण या निपटान किया गया। अतः कथन 2 गलत है।

प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन-सी शक्तियाँ राज्य सभा की हैं? (स्तर: मध्यम)

  1. किसी विषय को एक निश्चित समय के लिए राज्य सूची से संघ सूची में स्थानांतरित करने का अधिकार।
  2. अतिरिक्त अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन की सिफारिश करना।
  3. जब लोकसभा भंग हो जाती है, तो राज्य सभा सीमित समय के लिए अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा कर सकती है।

विकल्प:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: d

व्याख्या:

  • संविधान के अनुसार राज्य सभा उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से राष्ट्रीय हित में राज्य सूची के किसी विषय पर कानून बनाने की मांग संसद से एक प्रस्ताव पारित कर कर सकती है।
  • अखिल भारतीय सेवाओं (अखिल भारतीय न्यायिक सेवा सहित) का सृजन भारत की संसद द्वारा किया जा सकता है हैं यदि राज्य सभा घोषित करती है कि यह राष्ट्र के हित में आवश्यक है।
  • यदि आपातकाल की घोषणा के समय लोकसभा भंग हो जाती है, तो इसे पुनर्गठित लोकसभा द्वारा अपनी पहली बैठक के तीस दिनों के भीतर अनुमोदित किया जाना चाहिए, जब तक कि इसे पहले ही राज्य सभा द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया हो।
  • अत: सभी कथन सही हैं।

प्रश्न 5. मनोरंजन के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: PYQ (2019) (स्तर: मध्यम)

  1. संवर्धित वास्तविकता (AR) में एक नकली वातावरण बनाया जाता है जो भौतिक दुनिया से पूरी तरह से अलग होता है।
  2. आभासी वास्तविकता (VR) में, कंप्यूटर से ली गई छवियों को वास्तविक जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं या परिवेश के रूप में प्रक्षेपित किया जाता है।
  3. AR की दुनिया में हर किसी को व्यक्तिगत रूप से प्रवेश की अनुमति है और यह स्मार्टफोन या पीसी के कैमरे के उपयोग के अनुभव को बेहतर बनाता है।
  4. VR संसार को पृथक् कर देता है और व्यक्ति को एक अलग धरातल पर ले जा कर उसे पूर्ण निमग्नता का अनुभव प्रदान करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 3 और 4

(c) 1, 2 और 3

(d) केवल 4

उत्तर: b

व्याख्या:

  • संवर्धित वास्तविकता (AR) में कंप्यूटर द्वारा उत्पन्न छवियों को वास्तविक जीवन की वस्तुओं या परिवेश पर प्रक्षेपित किया जाता है। इसलिए, कथन 1 गलत है।
  • एक कंप्यूटर जनित काल्पनिक दुनिया की काल्पनिक छवि या वास्तविकता को आभासी वास्तविकता कहा जाता है। अत: कथन 2 गलत है।
  • AR की दुनिया में हर किसी को व्यक्तिगत रूप से प्रवेश की अनुमति है और यह स्मार्टफोन या पीसी के कैमरे के उपयोग के अनुभव को बेहतर बनाता है। अत: कथन 3 सही है।
  • आभासी वास्तविकता का उपयोग लंबे समय से प्रशिक्षण, शिक्षा और विज्ञान में भी किया जाता रहा है। VR में उपयोगकर्ता के साथ बातचीत करते हैं। अत: कथन 4 सही है।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1. बैड बैंक क्या है? भारत में एनपीए (NPA) की समस्या को हल करने में यह कितना कारागर साबित होगा ? (250 शब्द; 15 अंक) जीएस III (अर्थशास्त्र)

प्रश्न 2. जिन राष्ट्रों को अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का संरक्षक माना जाता है, वे ही उन्हें कमजोर कर रही हैं। टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) जीएस II (अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

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